मुंबई: रतन टाटा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए NCPA परिसर लाया गया ,रतन टाटा का राजकीय अंतिम संस्कार आज होगा

मुंबई टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब नहीं रहे. उनका 86 साल की उम्र में निधन हो गया. रतन टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. यहां उन्हें कुछ दिन पहले उम्र संबंधी दिक्कतों की वजह से भर्ती कराया गया था. बुधवार रात ही उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से घर लाया गया. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल में रखा जाएगा. यहां गुरुवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे. भारत के बाहर भी प्रेरणादायक रहे हैं रतन टाटा: नेपाल के PM नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रतन टाटा के निधन पर कहा कि उद्योग जगत के अनमोल रत्न रतन टाटा के निधन की खबर से दुखी हूं. बिजनेस और सामाजिक कार्यों में उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत के बाहर भी बहुत प्रभावकारी और प्रेरणादायक रहा है, इससे बहुत लोगों को प्रेरणा मिली. रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग की है. पार्टी नेता राहुल कनाल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चिट्ठी लिखकर भारत रत्न के लिए रतन टाटा का नाम केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है. नीतीश कुमार ने रतन टाटा के निधन पर जताया शोक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जी का निधन दुखद है. उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया. उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया. रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय क्षति हुई है. दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है.     प्रख्यात उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन, पद्म विभूषण रतन टाटा जी का निधन दुःखद। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया। उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया। रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय…   रतन टाटा के जीवन की दिलचस्प बातें साल 1937 में जन्मे रतन टाटा का पालन-पोषण 1948 में उनके माता-पिता के अलग होने के बाद उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था. रतन टाटा साल 1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. 1962 के अंत में भारत लौटने से पहले उन्होंने लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय काम किया. 2008 में भारत सरकार ने उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, प्रदान किया था. वह 28 दिसंबर 2012 को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रिटायर हुए थे. रतन टाटा का सफ़र: रतन टाटा का सफर एक प्रेरणादायक कहानी है, जो उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और नेतृत्व कौशल को दर्शाता है- जन्म      28 दिसंबर 1937 कॉलेज डिग्री      1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क (Bachelor of Architecture) विदेश में कार्य अनुभव      1962 के अंत में भारत लौटने से पहले लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ काम किया मैनेजमेंट ट्रेनिंग      1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया टाटा संस के चेयरमैन बने      मार्च 1991 रिटायर      28 दिसंबर 2012 टाटा समूह की आय      1991 में ₹10,000 करोड़ से बढ़कर 2011-12 में USD 100.09 बिलियन टाटा के मुख्य अधिग्रहण      – 2000 में टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में टेटली का अधिग्रहण – 2007 में टाटा स्टील द्वारा 6.2 बिलियन पाउंड में कोरस का अधिग्रहण – 2008 में टाटा मोटर्स द्वारा 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण सम्मान      2008 में पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) निधन      09 अक्टूबर 2024 …जब रतन टाटा ने संभाली कमान: रतन टाटा की उल्लेखनीय यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने साल 1991 में ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील तक के विभिन्न उद्योगों में फैले टाटा समूह की बागडोर संभाली. साल 1996 में उन्होंने टाटा टेली-सर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करवाया, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ. रतन टाटा के नेतृत्व में ऐतिहासिक अधिग्रहण:     टेटली (2000): टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली का अधिग्रहण किया गया. यह भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण था.     कोरस (2007): टाटा स्टील ने 6.2 बिलियन पाउंड में यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी कोरस का अधिग्रहण किया. यह भारतीय स्टील उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा सौदा था.     जगुआर लैंड रोवर (2008): टाटा मोटर्स ने 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में प्रतिष्ठित ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। यह सौदा टाटा मोटर्स के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ और कंपनी को वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में मजबूती दी. टाटा ग्रुप की कमान किसके हाथ? रतन टाटा की सेवानिवृत्ति के बाद, टाटा ग्रुप की कमान एन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) के हाथों में है. उन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पदभार संभाला था. एन चंद्रशेखरन इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं.     recent visitors 97

गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया, केंद्रीय कैबिनेट ने लिया निर्णय

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके अनुसार गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत भरा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलेगी, खासकर उन परिवारों के लिए जो रोजमर्रा के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। योजना का दायरा इस योजना के तहत, गरीब परिवारों को हर महीने अनाज प्रदान किया जाएगा। यह अनाज विभिन्न प्रकार के अनाज, जैसे गेहूं और चावल, शामिल होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी जरूरतमंद लोगों को उचित मात्रा में खाद्य सामग्री मिल सके। सीमावर्ती इलाकों में किया जाएगा सड़क निर्माण साथ ही इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत की और सरकार के नए कदमों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश का विवरण बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमावर्ती इलाकों में 4,406 करोड़ रुपये के निवेश से 2,280 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी, बल्कि देश की सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगी। विकास के लाभ इस सड़कों के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन में सुधार होगा, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह सुरक्षा बलों की तैनाती और ऑपरेशन में भी मदद करेगा।केंद्रीय कैबिनेट के इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। recent visitors 64

नहीं रहे रतन टाटा, मुंबई हॉस्पिटल में ली अंतिम सांसें, देश के लिए किए ये 5 बड़े काम

मुंबई दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे, 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. दरअसल, रतन टाटा को भारतीय उद्योग का पितामह भी कहा जाता है. अपने व्यक्तित्व से उन्होंने लोगों को प्रभावित किया. रतन टाटा ने इस दुनिया को कई बहुमूल्य उपहार दिए. उनका योगदान आज भारत समेत पूरे विश्व के लिए एक नजीर है. यूं तो देश निर्माण में रतन टाटा के अनगिनत योगदान हैं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने समय की परिधि पर अमिट छाप छोड़ दी है. जिस समय पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा था, उस समय भारत भी हेल्थ संकटों से लड़ रहा था. इस संकट के समय में  रतन टाटा सामने आए और उन्होंने 500 करोड़ रुपये की देश को सहायता दी. उन्होंने एक्स (x) पर लिखा था, कोविड-19 हमारे सामने आने वाली सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है. टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां अतीत में भी देश की जरूरतों के लिए आगे आईं हैं. इस समय आवश्यकता किसी भी अन्य समय से अधिक है.   रतन टाटा अपने सौम्य स्वभाव और उदार दिल के लिए जाने जाते थे. उनको कुत्तों से बड़ा लगाव रहा. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने कुत्तों के लिए एक हास्पिटॉल खोला. उन्होंने हॉस्पिटल खोलते समय कहा था कि मैं कुत्तों को अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं. रतन टाटा ने आगे कहा था कि मैं जीवन कई पेट्स रखे हैं. इस वजह से मुझे हॉस्पिटल की अहमियत पता है. उनके द्वारा नवी मुम्बई बनाया गया अस्पताल 5 मंजिला है, जिसमें 200 पालतू जानवरों का एक साथ इलाज किया जा सकता है. इसको 165 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. रतन टाटा को कुत्तों से कितना नेह है उसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि एक बार एक कुत्ते को वो यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा लेकर गए थे. जहां कुत्ते का जॉइंट रिप्लेसमेंट किया गया था. टाटा ग्रुप पहले केवल बड़ी गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता था. लेकिन 1998 रतन टाटा ने छोटी गाड़ियों की दुनिया में भी उतरने का फैसला लिया और उन्होंने टाटा इंडिका (Tata Indica) को बाजार में लॉन्च किया. टाटा इंडिका पूरी तरह से एक स्वदेशी कार थी. जिसको लोगों ने खूब पसंद किया और इसने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ कर बाजार में नया कीर्तिमान को स्थापित कर दिया. उसके लगभग एक दशक बाद टाटा ने एक और प्रयोग किया और वो 2008 में बाजार में नैनो कार लेकर आए, जिसकी कीमत एक लाख रुपये से भी कम थी. कहते हैं अगर मन में ठान लें तो कोई लक्ष्य बड़ा नहीं होता, टाटा इंडिका इतना ब्रेकडाउन हो रही थी कि साल 1999 में टाटा ने उसे बेचने का फैसला कर लिया. ये जज्बे से भरे रतन टाटा के लिए एक बहुत बड़ा झटका था. उसी समय वो बिल फोर्ड को अपनी कार की कंपनी बेचना चाहते थे. लेकिन बिल फोर्ड  ने तंज कसते हुए कहा कि जब पैसेंजर कार बनाने का कोई अनुभव नहीं था तो ये बचपना क्यों किया. ये बात उनको चुभ गई और उन्होंने कंपनी को बेचने से इनकार कर दिया. एक दशक बाद वक्त ने करवट ली और फोर्ड मोटर्स की हालत खराब हो गई. जिस वजह से फोर्ड को बेचना और उसे रतन टाटा ने खरीद लिया. भारत में जब भी सॉफ्टवेयर कंपनी का जिक्र करते ही लोगों की जुबान से सबसे पहले टीसीएस का ही नाम आता है. टीसीएस दुनिया की सबसे बड़ी सूचना तकनीकी और बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवा देने वाली कंपनियों में से एक है. जिसने तकनीक के क्षेत्र में अहम योगदान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन भी किया. recent visitors 68

भारत के ‘रतन’ की कहानी, टाटा कंपनी को बना दिया इंटरनेशनल ब्रांड

नई दिल्ली रतन टाटा नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार रात को निधन हो गया. मुंबई के अस्‍पताल में उन्होंने 86 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. 1962 में टाटा ग्रुप में सहायक के रूप में हुआ थे शामिल रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे. रतन टाटा की उपलब्धियां 1. टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में 1991-2012 तक सेवा. 2. जैगुआर लैंड रोवर की खरीद (2008). 3. कोरस की खरीद (2007). 4. टाटा स्टील की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 5. टाटा मोटर्स की सफलता. 6. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 7. टाटा समूह की वैश्विक ब्रांड वैल्यू में वृद्धि. रतन टाटा के प्रमुख पुरस्कार और सम्मान 1. पद्म विभूषण (2008) 2. पद्म भूषण (2000) 3. ऑनररी नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (2009) 4. इंटरनेशनल हेरिटेज फाउंडेशन का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2012) परोपकार और सामाजिक कार्य रतन टाटा को उनकी परोपकार और समाज सेवा के कार्यों के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है. उनके नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट और टाटा फाउंडेशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है. recent visitors 71

मेनोपॉज का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है

मुंबई मेनोपॉज महिलाओं के जीवन में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है। जब एक महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता, तो इस स्थिति को मेनोपॉज के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर महिलाओं को 45 से 50 साल की उम्र तक मेनोपॉज की अवस्था आ जाती है। जिसकी वजह से महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, इस स्थिति का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। इस दौरान महिलाओं की यौन इच्छा में कमी आ सकती है। ऐसे में मेनोवेदा की फाउंडर और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानते हैं आखिर मेनोपॉज का महिलाओं के जीवन और सेक्सुअल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है। मेनोपॉज महिलाओं के यौन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन्हीं हार्मोनल बदलावों की वजह से, महिलाओं को अपने यौन जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है। जिसकी वजह से वजाइन में ड्राइनेस की समस्या, वजाइना में दर्द और असुविधा का भी अनुभव होने लगता है। इन समस्याओं की वजह से महिला को यौन क्रियाओं में मुश्किल महसूस हो सकती है। जिससे महिलाओं में यौन इच्छा में कमी हो सकती है। मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य में बदलाव होने पर क्या करें? मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य प्रभावित होने पर महिलाओं को तनाव महसूस हो सकता है। जिसकी वजह से उनके आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। ऐसे में महिला को अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताएं। -मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी स्थिति को लेकर डॉक्टर से भी कंसल्ट करना चाहिए। डॉक्टर कुछ दवाइयों की मदद से यौन जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर कर सकते हैं। -यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद भी ली जा सकती है। -मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। हेल्दी खाना खाएं और अनहेल्दी फूड्स से दूरी बनाकर रखें। -मेनोपॉज के दौरान तनाव और चिंता से बाहर निकलने के लिए मेडिटेशन जरूर करें। -फिट और हेल्दी बने रहने के लिए योग और एक्सरसाइज जरूर करें। रजोनिवृत्ति में योनि संबंधी लक्षण मासिक धर्म की अनियमितता, नए दर्द और पीड़ा, मनोदशा में बदलाव, कामेच्छा में कमी और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी इस समय आम शिकायतें हैं जिनकी गंभीरता और दैनिक जीवन पर प्रभाव अलग-अलग डिग्री के साथ होते हैं ( बीएमएस अगस्त, 2023 )। रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव और गिरावट के कारण कुछ लोग कुछ दिनों में सामान्य कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं, वे उदास महसूस करते हैं, उनमें आत्मविश्वास या प्रेरणा की कमी होती है तथा वे एक सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक दिन में लाल चकत्ते और रात में पसीने से तर-बतर हो जाते हैं। सलाह मेनोपॉज के दौरान, यौन स्वास्थ्य में आने वाले बदलाव बेहद सामान्य हैं। इसलिए आपको इनके प्रति जानकारी रखना बेहद जरूरी है। मेनोपॉज के दौरान अगर आपको कुछ असामान्य लक्षणों का अनुभव हो, तो मेनोपॉज एक्सपर्ट से जरूर संपर्क करें। recent visitors 70

रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन, PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई अरबपति कारोबारी और बेहद ही दरियादिल इंसान रतन टाटा का निधन हो गया है. वह 86 वर्ष के थे. उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे. 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. कुछ दिनों पहले उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें चल रही थी और इस बारे में उन्होंने एक बयान जारी कर बताया भी था कि उनकी तबीयत ठीक है और सामान्य चेक-अप के लिए अस्पताल में हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर "गलत सूचना" न फैलाने की सलाह दी थी. रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे. recent visitors 71

अनैतिकता को कानून का जामा पहनाने के लिए किया गया कोई अनुबंध भी अनैतिक ही माना जाएगा: अदालत

ग्वालियर  ‘भारतीय समाज और विधि के अनुसार शादी एक पवित्र बंधन है और शादी के होते हुए किसी दूसरे के साथ संबंध रखना अनैतिक है। इस अनैतिकता को कानून का जामा पहनाने के लिए किया गया कोई अनुबंध भी अनैतिक ही माना जाएगा।’ यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने दुष्कर्म के मामले को झूठा पाने पर आरोपित को बरी करते हुए कही। न्यायाधीश ने कहा कि कानून महिलाओं को अपराध से सुरक्षित करता है और अपराधी को सजा देता है, लेकिन कोई अगर अनैतिक संव्यवहार करे, चाहे महिला हो या पुरुष, वह व्यवहार कानून की दृष्टि में अवैध ही होगा। दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने का यह था मामला     एक तलाकशुदा महिला द्वारा अभिषेक राजौरिया पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि महिला उस व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही थी।     इसके साथ ही महिला ने युवक के साथ एक अनुबंध किया था, जिसमें युवक को उस महिला को हर महीने एक तय रकम देना थी। जैसे ही महिला को रकम मिलना बंद हुई, वैसे ही उसने युवक पर दुष्कर्म का झूठा मुकदमा कर दिया।     सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि महिला 2015 में किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी ऐसा कर चुकी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों और तथ्यों से सहमति जताते हुए युवक को दोषमुक्त कर दिया। महिला ने पुलिस के सामने गढ़ी थी यह झूठी कहानी महिला ने पड़ाव थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी वर्ष 1999 में हुई थी। पति शराब पीता था तो उसने पति को तलाक दे दिया और अपने पिता के साथ रहने चली गई। महिला के साथ उसकी एक 16 वर्ष और एक 11 वर्ष आयु की बेटी भी रहती है। इस दौरान महिला की पहचान अभिषेक नामक युवक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई तो महिला ने उससे काम दिलवाने की बात कही। युवक ने जून 2016 में काम दिलवाने के बहाने महिला को एक होटल में बुलाया और दुष्कर्म कर दिया। इसके बाद कई बार उसने महिला को शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। जब महिला ने शादी के लिए दबाव डाला तो युवक उसे टालने लगा। अप्रैल 2019 में महिला को पता चला कि युवक ने किसी और से शादी कर ली है। इसके बाद महिला ने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया। recent visitors 64