हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने ईवीएम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए

नई दिल्ली राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली ताकत उनका इकबाल है और एक दिन वह उस इकबाल को खत्म करके रहेंगे। इसके लिए उन्होंने कोशिशें भी खूब की। राफेल सौदे को लेकर 'चौकीदार चोर है' का अभियान हो या हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर 'मोदानी' का हमला या फिर अंबानी-अडानी की जेब में सरकार वाला नैरेटिव…राहुल गांधी ने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राहुल गांधी मोदी का इकबाल खत्म भले न कर पाए लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी पार्टी अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्वस्त करने के खतरनाक खेल में जुट गई है। हरियाणा चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने और चुनाव आयोग पर हमले से कांग्रेस असल में यही कर रही। उस ईवीएम पर सवाल उठा रही जो एक बार नहीं बल्कि कई बार, बार-बार अग्निपरीक्षा में पास हुई है। बेदाग साबित हुई है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली। चुनाव आयोग ने हैकिंग का ओपन चैलेंज तक दिया लेकिन कोई सामने नहीं आया। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का! मंगलवार को दो राज्यों के चुनाव नतीजे आए। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की जीत हुई तो हरियाणा में बीजेपी की। लेकिन दोनों परिणामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जमीन-आसमान का फर्क था। जहां जीते वहां तो लोकतंत्र की जीत। राज्य के साथ 'अन्याय' और 'अपमान' का जनता का करारा जवाब। तरह-तरह के लच्छेदार जुमले। लेकिन जहां हार गए, वहां जनादेश का सम्मान तो दूर, उसे न स्वीकार करने का अहंकार। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का। हरियाणा चुनाव के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी थी। लेकिन 1-2 घंटे बाद ही रुझान पलट गए। बीजेपी आगे हो गई। एक बार आगे हुई तो फिर अंतिम नतीजे आने तक आगे ही रही। पिछड़ने के बाद से ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पहले काउंटिंग के आंकड़ों के कथित धीमे अपडेट का मुद्दा उठाया। वक्त के साथ जब रुझान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए तब कांग्रेस ने ईवीएम पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने काउंटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। ईवीएम पर उंगली उठाई। साजिश का आरोप लगाने लगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतगणना के वक्त कई ईवीएम में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज मिली। जिन ईवीएम की बैटरी 60-70 प्रतिशत चार्ज थीं वहां कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। जहां 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज थी वहां बीजेपी की जीत का दावा किया. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम बैटरी की क्षमता और नतीजों में कोई संबंध ही नहीं है। आत्ममंथन के बजाय ईवीएम का रोना! कांग्रेस ने हार को स्वीकार कर आत्ममंथन और समीक्षा के बजाय बहानेबाजी का आसान रास्ता चुना लेकिन ऐसा करते हुए वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की महान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 2019 में 31 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार 37 सीटों पर जीत हासिल की। वोट शेयर में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर 28 प्रतिशत था तो इस बार 39 प्रतिशत यानी 11 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन प्रदर्शन में ये सुधार सत्ता तक नहीं पहुंचा पाया। ऐसा क्यों हुआ, उसकी समीक्षा के बजाय पार्टी चुनावी प्रक्रिया पर ही लांछन लगाने लगी है। वैसे कांग्रेस या विपक्षी दल ऐसा पहली बार नहीं कर रहे। इससे पहले भी अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से पार्टियां ईवीएम पर चुप्पी या हो-हल्ला मचाती रही हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल तो सबसे पहले बीजेपी ने ही उठाए थे। 2009 की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर संदेह किया था। बीजेपी के एक और नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदे किताब लिखकर ईवीएम पर संदेह जताया था। लेकिन ईवीएम एक बार नहीं, कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी और हर बार बेदाग निकली। जब देश की सबसे बड़ी अदालत से ईवीएम और चुनाव आयोग को क्लीन चिट मिल गई तब इस पर चल रहा विवाद खत्म हो जाना चाहिए था। हर अग्निपरीक्षा में बेदाग साबित हुई है ईवीएम निहित स्वार्थ के तहत चुनाव आयोग और ईवीएम को लांछित करने की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट एडीआर जैसे समूहों को लताड़ लगा चुका है। इसी साल अप्रैल में जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी तब सर्वोच्च अदालत ने पिछले 70 सालों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की और साथ में इस पर दुख जताया कि 'निहित स्वार्थी समूह' देश की उपलब्धियों को कमजोर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम पर 8 बार परीक्षण किया गया और ये हर बार बेदाग निकली। ईवीएम को लेकर कई बार मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन हर बार उसकी विश्वसनीयता असंदिग्ध मिली। वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम में दर्ज वोटों के मिलान में कभी कोई विसंगति नहीं दिखी। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कई राज्यों में ईवीएम में दर्ज वोट और वीवीपैट का मिलान हुआ। सब सही पाया गया और ईवीएम बेदाग साबित हुई। सात साल पहले 2017 में तो चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों या किसी भी व्यक्ति या संगठन को ईवीएम हैक करके दिखाने का खुला चैलेंज दिया था। तब सिर्फ 2 पार्टियों ने ही चैलेंज स्वीकार किया था- एनसीपी और सीपीएम। तय तारीख को दोनों पार्टियों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर तो पहुंचे लेकिन चैलेंज में हिस्सा लेने की हिम्मत नहीं हुई। हां, आम आदमी पार्टी ने जरूर दिल्ली विधानसभा के भीतर प्रहसन किया। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जुगाड़ के डिब्बों को ईवीएम का नाम देकर कथित तौर पर हैक करके दिखाया गया। पार्टी ने असली ईवीएम के बजाय 'जुगाड़ डिब्बे' का इस्तेमाल करके सस्ती पब्लिसिटी का हथकंडा अपनाया। चुनाव आयोग कार्रवाई न कर दे, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की आड़ ली गई। हार-जीत होती रहेगी, जनता में … Read more

घातक ड्रोन बनेगा राफेल का पूरक, दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे

पेर‍िस  फ्रांस का लड़ाकू विमान राफेल पूरी दुनिया में सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। भारत से लेकर कतर तक ने फ्रांस को जमकर ऑर्डर दिए हैं। इससे राफेल बनाने वाली कंपनी डसाल्‍ट एविएशन की चांदी हो गई है। अब फ्रांसीसी कंपनी राफेल मल्‍टी रोल जेट की अगली पीढ़ी F5 बना रही है जो हवा में ही 'शाही बॉडीगार्ड' से लैस होगा। दरअसल, फ्रांसीसी कंपनी चाहती है कि हवा में राफेल के साथ एक मानवरहित ड्रोन विमान भी उड़ान भरे। यह ड्रोन राफेल के पायलट के इशारे पर काम करेगा और दुश्‍मन को तबाह करने में मदद करेगा। फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टिअन लेकोर्नू ने राफेल के घर कहे जाने वाले सेंट डिजिअर एयरबेस पर इस ड्रोन का ऐलान किया। यह ड्रोन पहले के nEUROn UCAV प्राजेक्‍ट के आधार पर तैयार किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक nEUROn UCAV का ट्रायल के दौरान पायलट वाले लड़ाकू विमानों के साथ पहले ही इस्‍तेमाल किया जा रहा है। डसॉल्‍ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैप्पियर ने कहा, 'यह रेडार की पकड़ में नहीं आने वाला लड़ाकू ड्रोन विमान साल 2033 तक फ्रांसीसी एयर फोर्स को तकनीकी और ऑपरेशनल बढ़त दिलाएगा।' यह ड्रोन विमान कई तरह की क्षमताओं से लैस होगा और इसे शामिल किया जाएगा। इस ड्रोन का अभी कोई नाम नहीं रखा गया है और यह राफेल का पूरक होगा। यह ड्रोन और राफेल दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे। राफेल F5 जेट का ड्रोन क्‍यों है बेहद खास ? इस यूएवी के अंदर ही एक आंतरिक पेलोड होगा। इस ड्रोन में ऑटोनॉमस कंट्रोल और राफेल का पायलट इसे आसानी से उड़ा सकेगा। डसॉल्‍ट ने बताया कि यह ड्रोन विमान कई गुणों से लैस होगा और भविष्‍य में आने वाले खतरों को ध्‍यान में रखकर इसे आगे भी विकसित किया जा सकेगा। कंपनी ने इस किलर ड्रोन के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी है। बता दें कि फ्रांस एक परमाणु हथियार संपन्‍न राष्‍ट्र है और वह अब राफेल की मदद से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता रखता है। इससे पहले मिराज फाइटर परमाणु बम गिराने के लिए तैयार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक भविष्‍य में किलर ड्रोन परमाणु मिशन के दौरान आकाश में आने वाले खतरों को दूर करेगा और इसके बाद राफेल आराम से एटम बम गिरा सकेगा। राफेल का एफ-5 वर्जन नए ड्रोन के साथ साल 2060 तक फ्रांस की वायुसेना में बना रह सकेगा। राफेल के एफ-5 वर्जन के लिए शुरुआती अध्‍ययन हो चुका है और साल 2026-27 में इसका पूरा विकास शुरू हो जाएगा। इससे आने वाले समय में यह राफेल नए ड्रोन के साथ उड़ान भर सकेगा। आने वाले दिनों में फ्रांस राफेल को ASN4G से लैस करने जा रही है जो फ्रांसीसी वायुसेना का स्‍टैंडऑफ न्‍यूक्लियर वेपन है। भारत को भी हो सकता है बड़ा फायदा इस नए राफेल नई क्रूज मिसाइल, एयर टु-एयर मिसाइल और नई एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने की भी योजना है। राफेल एफ-5 संस्‍करण दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को मुख्‍य रूप से निशाना बनाएगा। नए राफेल को इस तरह से बनाया जाएगा कि वह दुश्‍मन की नजर में नहीं आए और अगर हमला हो तो बचाव भी कर सके। फ्रांस अगर यह नया राफेल बनात है तो इससे भारत को भी बड़ा फायदा हो सकता है। भारत 100 से ज्‍यादा लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है और इससे पहले भारतीय वायुसेना में राफेल को शामिल किया जा चुका है। भारत अब नौसेना के लिए भी राफेल खरीद रहा है। ऐसे में भविष्‍य में भारत को भी इस परमाणु बम गिराने वाले ड्रोन से लैस राफेल का ऑफर मिल सकता है। recent visitors 69

अडानी की नेटवर्थ में 4.35 अरब डॉलर की तेजी आई, नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई

नई दिल्ली  लगातार छह दिन की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार में तेजी लौटी। शुरुआत में मार्केट में भारी उतारचढ़ाव दिख रहा था लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनावों की मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही शेयर मार्केट में तेजी दिखने लगी। इस तेजी से सबसे ज्यादा फायदे में गौतम अडानी रहे। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की नेटवर्थ में  4.35 अरब डॉलर यानी करीब 36,505 करोड़ रुपये की तेजी आई। इसके साथ ही वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में दो स्थान की छलांग लगाते हुए 16वें नंबर पर पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 101 अरब डॉलर पहुंच गई है। अडानी  एनवीडिया के फाउंडर और सीईओ जेंसन हुआंग के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शख्स रहे। हुआंग की नेटवर्थ में 4.36 अरब डॉलर की तेजी आई। अडानी की नेटवर्थ में इस साल 16.3 अरब डॉलर की तेजी आई है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी  तेजी रही। उनकी नेटवर्थ 2.12 अरब डॉलर की तेजी के साथ 106 अरब डॉलर पहुंच चुकी है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 9.90 अरब डॉलर की तेजी आई है और वह दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 14वें नंबर पर हैं। अंबानी और अडानी की नेटवर्थ में अब केवल 5 अरब डॉलर का फासला रह गया है। कौन-कौन है टॉप 10 में इस बीच एलन मस्क 259 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर बने हुए हैं। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म के सीईओ मार्क जकरबर्ग 210 अरब डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर हैं। जेफ बेजोस ($206 अरब) तीसरे, बर्नार्ड अरनॉल्ट ($191 अरब) चौथे, लैरी एलिसन पांचवें ($185 अरब), बिल गेट्स ($161 अरब) छठे, लैरी पेज ($149 अरब) सातवें, स्टीव बाल्मर ($144 अरब) आठवें, वॉरेन बफे ($143 अरब) नौवें और सर्गेई ब्रिन ($140 अरब) दसवें नंबर पर हैं। recent visitors 79

भारत अमेरिका से खरीद रहा MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो, डील से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध और मजबूत होंगे

नई दिल्ली भारतीय नौसेना की गिनती दुनियाभर की टॉप 10 नेवी में होती है। अब इसकी ताकक औरबढ़ने वाली है। दरअसलभारत अमेरिका से 53 MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो खरीदने वाला है। जिनकी कीमत 175 मिलियन डॉलर है। ये टॉरपीडो भारत के नए MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों के लिए हैं। बाइडन प्रशासन का कहना है कि यह सौदा दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करेगा। इससे भारत की सुरक्षा भी बेहतर होगी। बढ़ेगी नौसेना की ताकत अमेरिका का कहना है कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम है। नए टॉरपीडो से भारत की नौसेना और मजबूत होगी। वे पनडुब्बियों से होने वाले खतरों से निपटने में सक्षम होंगे। भारत ने मार्च में छह MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल किए थे। ये हेलीकॉप्टर हेलफायर मिसाइल, MK-54 टॉरपीडो और प्रेसिजन-किल रॉकेट से लैस हैं। अगले साल तक भारत को 24 और सीहॉक मिलेंगे। ये सभी हेलीकॉप्टर फरवरी 2020 में हुए 15,157 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं। सीहॉक हेलीकॉप्टर काफी आधुनिक हैं। इनमें मल्टी-मोड रडार और नाइट-विजन उपकरण भी हैं। ये हेलीकॉप्टर युद्धपोतों से संचालित हो सकते हैं। नौसेना अधिकारियों का कहना है कि सीहॉक दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं। यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं। MK-54 टॉरपीडो भारत की नौसेना को एक मजबूत बढ़त देंगे। कितने पावरफुल होते हैं MK-54 लाइटवेट टॉर्पीडो एक प्रकार का स्वचालित पनडुब्बी रोधी हथियार है, जिसे पानी के अंदर चलने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये टॉर्पीडो आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं और उच्च गति से चलते हैं। इन्हें हल्का होने के कारण विभिन्न प्रकार के प्लेटफॉर्म जैसे कि हेलीकॉप्टर, विमान और जहाज से लॉन्च किया जा सकता है। recent visitors 81

86 की उम्र में रतन टाटा का मुंबई में निधन, शोक में देश

नई दिल्ली देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का निधन बुधवार की शाम को हो गया. उन्‍होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम सांस ली. रतन टाटा 86 साल के थे. पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी. दरअसल, बुधवार की शाम में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी. जिसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. रतन टाटा का जाना देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. हालांकि उन्हें देश कभी भूल नहीं पाएगा. उन्होंने देश के एक से बढ़कर एक काम किए. टाटा ग्रुप को ऊंचाईयों पर पहुंचाने में रतन टाटा की सबसे बड़ी भूमिका रही. इन्‍होंने देश और आम लोगों के लिए कई ऐसे काम किए, जिसके लिए उन्‍हें हमेशा याद किया जाता रहेगा. रतन टाटा एक दरियाद‍िली इंसान थे और मुसीबत में देश के लिए हमेशा तैयार रहते थे. दो दिन पहले ही कहा था- मैं बिल्‍कुल ठीक हूं इससे पहले सोमवार को भी रतन टाटा की तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद खुद रतन टाटा के एक्‍स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्‍ट शेयर किया गया था. इस पोस्‍ट में लिखा था कि मेरे लिए चिंता करने के लिए सभी का धन्‍यवाद! मैं बिल्‍कुल ठीक हूं. चिंता की कोई बात नहीं, मैं बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों की रूटीन जांच के लिए अस्‍पताल आया हूं. लेकिन देश को ये दर्द रहेगा कि वो इस बार अस्पताल से लौट नहीं पाए, और हमेशा के लिए अंतिम यात्रा पर निकल पड़े. 28 दिसंबर को हुआ था जन्‍म अरबपति कारोबारी और बेहद दरियादिल इंसान रतन टाटा 86 साल के थे, 28 दिसंबर 1937 को उनका जन्म हुआ था. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. रतन टाटा की शख्सियत को देखें, तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान भी थे. वो देश के लिए हमेशा आदर्श और प्रेरणास्रोत रहेंगे. वे अपने समूह से जुड़े छोटे से छोटे कर्मचारी को भी अपना परिवार मानते और उनका ख्याल रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते, इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. 1991 में बने थे चेयरमैन गौरतलब है कि रतन टाटा को 21 साल की उम्र में साल 1991 में ऑटो से लेकर स्टील तक के कारोबार से जुड़े समूह, टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया था. चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. उन्होंने 2012 तक इस समूह का नेतृत्व किया, जिसकी स्थापना उनके परदादा ने एक सदी पहले की थी. 1996 में टाटा ने टेलीकॉम कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को मार्केट में लिस्‍ट कराया था.   recent visitors 88

पीएम मोदी की कैबिनेट में पंजाब के लिए बड़ा फैसला लिया, सीमावर्ती इलाकों में सड़क बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी

पंजाब आज पीएम मोदी की कैबिनेट में पंजाब के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने जब से सत्ता संभाली है, उनके एजेंडे में 2 मुख्य बातें रही हैं। पहला, हाशिये पर पड़े लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाना और दूसरा, देश के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसलों में पंजाब के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। पंजाब और पाकिस्तान की सीमा से लगे अन्य राज्यों में सड़क व्यवस्था सुधारने के लिए आज मोदी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में 2280 किमी लंबी सड़क बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए मोदी सरकार ने 4400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मंजूर की है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान (Pakistan) के सीमावर्ती इलाके दशकों से हर मौसम के लिए उपयुक्त सड़क नेटवर्क की कमी से जूझ रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क होने से परिवहन में काफी आसानी होगी। आपातकालीन स्थिति में जहां तुरंत मौके पर पहुंचना आसान होगा, वहीं जरूरी सामान की आपूर्ति भी आसानी से हो सकेगी।  recent visitors 81

दिवाली से पहले Home Loan लेने वालों को बड़ी राहत, आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने EMI पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली नेशनल डेस्क आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पिछली 9 बैठकों में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को तीन दिवसीय मीटिंग के बाद भी समिति ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। फरवरी 2023 में आखिरी बार रेपो रेट में संशोधन किया गया था, जब इसे 6.50% पर लाया गया था, और तब से यह दर स्थिर बनी हुई है। रेपो रेट में बदलाव न होने से आम जनता के होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों पर ब्याज दरों में कोई असर नहीं पड़ेगा। रेपो रेट वही दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को अल्पकालिक कर्ज प्रदान करता है, जिससे यह देशभर में उधारी की लागत को प्रभावित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि दरों में कटौती से रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है। रुपये के कमजोर होने से आयात की लागत बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों के लिए इनपुट लागत भी प्रभावित हो सकती है। ग्रोथ पर रहेगा फोकस RBI का मुख्य फोकस आर्थिक विकास पर है, और दिसंबर या फरवरी में होने वाली आगामी मौद्रिक नीति समितियों (MPC) में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (BPS) की कटौती की संभावना अधिक है। मौजूदा समीक्षा बैठक सोमवार से शुरू हुई थी, और आज RBI दरों पर अपना फैसला सुनाएगा। 2023 के बाद से RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि उससे पहले दरों में तेजी से वृद्धि हुई थी। recent visitors 88