पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन पी-141 ने 4 शावकों को जन्म दिया, गूंजी किलकारी

 पन्ना  पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के लिए मंगलवार का दिन मंगल साबित हुआ जब पन्ना रिजर्व की बाघिन पी-141 ने चार नन्हें शावकों के साथ विचरण करती नजर आई. जिले के मंडला क्षेत्र में बाघिन पी-141 द्वारा चार शावकों को जन्म देने की खबर जैसे ही सामने आई पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में खुशी की लहर दौड़ गई. अपने चार शावकों के साथ पर्यटकों को दिखी बाघिन पी-141 ने शावकों को मंडला क्षेत्र में जन्म दिया. चार शावकों की जन्म की खबर से टाइगर रिजर्व में खुशी की लहर दौड़ गई. रिजर्व में अब बाघों की संख्या 90 पार कर गई है. नन्हें शावकों पर स्वस्थ प्रबंधन सतत निगरानी रख रही है. शावकों के साथ दिखी बाघिन पी-141 का पर्यटकों ने वीडियो बनाया गौरतलब है देश-दुनिया में बाघों की बढ़ती संख्या के लिए शुमार पन्ना टाइगर रिजर्व में आए पर्यटकों ने चार नन्हें मेहमानों को बाघिन-पी 141 को देखा तो उनके वीडियो बना लिए. पन्ना टाईगर रिजर्व में नन्हे शावकों की किलकारी गुंजने के साथ अब टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 90 पार कर गई है. पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों के लिए अनुकूल, इसलिए बढ़ रही बाघों की संख्या फील्ड डायरेक्टर अंजना सुचिता तिर्की ने बताया कि पन्ना रिजर्व में चार शावकों के जन्म की खबर बेहद सुखद है. उन्होंने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों के लिए अनुकूल है और बाघों की संख्या 90 के पार पहुंच गयी है. वही उन्होंने बताया कि चारो शावक स्वस्थ है, जिनका स्वस्थ प्रबंधन द्वारा सतत निगरानी की जा रही है। वन्य जीवन और जैव विविधता से बचपन में ही अवगत कराएं : राज्यपाल भोपाल : सोमवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बच्चों को वन, वन्य जीव और जैव विविधता की महत्ता के बारे में आरंभ से ही संस्कारित किया जाना चाहिए। माता-पिता उन्हें जैव संरक्षण की बहुलता और आवश्यकता के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाएं। हमारा संविधान पर्यावरण के संरक्षण, वन और वन्य जीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रदान करता है। वन्य जीव सप्ताह राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौलिक कर्तव्यों के तहत प्रत्येक नागरिक से पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान की अपेक्षा करता है। उन्होंने एक से सात अक्टूबर तक आयोजित वन्य जीव सप्ताह की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत किया। वन्य जीव संरक्षण की शपथ राज्यपाल ने कहा कि कोविड ने हमें सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति की विविधता के प्रति श्रद्धा और सौहार्द्र के साथ रहने का सबक दिया है। उन्होंने उपस्थित जनों को वन्य जीव संरक्षण की शपथ भी दिलाई। राज्यपाल ने कहा कि मध्य प्रदेश को कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के हिसाब से देश के सबसे बड़े वन क्षेत्र होने गौरव प्राप्त है। बाघों के अलावा, तेंदुए, घड़ियाल प्रदेश की पहचान बाघों के अलावा, तेंदुए, घड़ियाल, चीता, भेड़िए और गिद्धों की सर्वाधिक संख्या के लिए भी प्रदेश पहचाना जाता है। हर प्रदेशवासी की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे वन और वन्य जीव रूपी अमूल्य धरोहर की विरासत को सहेज कर भावी पीढ़ी को सौंपने में अपना योगदान दे। राज्य मंत्री वन दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन्य जीव संरक्षण और कानूनों की जागरूकता में वन्य जीव सप्ताह की महत्वपूर्ण भूमिका है। recent visitors 72

Israel में घुसकर Yemen की Hypersonic Missile आसमान में ही तबहा

तेलअवीव यमन ने इजरायल पर हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल Palestine-2 से हमला किया. मध्य इजरायल में सायरन बजने लगे. इस मिसाइल के साथ जुल्फिकार (Dhu Al-Fiqar) मिसाइल से भी हमला किया गया. पूरे मध्य इजरायल में हड़कंप मच गया. लोग छिपने लगे. भागने लगे. इसके बाद इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल को वायुमंडल के ऊपर ही खत्म कर दिया. जिसके जलते हुए टुकड़े जब इजरायल के ऊपर आए तो सायरन काफी देर तक बजता रहा. लोगों को लगा कि मिसाइलें गिर रही हैं. हूतियों का कहना है कि उन्होंने दो मिसाइलें दागीं. दोनों जाफा और इलात के मिलिट्री टारगेट पर गिरी हैं. जुल्फिकार मिसाइल कहां गिरी, इसकी डिटेल यमन ने नहीं दी. हूतियों ने पिछले एक साल में इजरायल के ऊपर 220 से ज्यादा बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन्स दागे हैं. इनका हमला ज्यादातर दक्षिणी इजरायली शहर इलात में होता है. इजरायल ने कहा कि हूतियों ने तीन मिसाइलें दागी थीं, दो को हवा में नष्ट कर दिया गया. तीसरी खुले इलाके में गिरी. अब जानिए यमन के हाइपरसोनिक मिसाइल की ताकत… कुछ दिन पहले ही यमन ने Palestine-2 हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल से तेल-अवीव पर हमला किया था. यह मिसाइल मात्र 11 मिनट में 2040 km की दूरी तय करके टारगेट पर पहुंच गई थी. इसकी अधिकतम गति 19756 km/hr है. यानी इसे रोकबेहद मुश्किल है. लेकिन इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम ने इस बार इस मिसाइल को वायुमंडल में ही खत्म कर दिया. जबकि इस मिसाइल की रेंज 2150 किलोमीटर है.    Palestine-2 मिसाइल बीच रास्ते में दिशा बदल सकती है. मतलब एयर डिफेंस सिस्टम से आने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों को हवा में ही धोखा देकर तेज गति से आगे बढ़ सकती है. हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर 15 सितंबर 2024 को कई हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला किया था.    क्या होती हैं हाइपरसोनिक मिसाइल? हाइपरसोनिक मिसाइल वो हथियार होती हैं, जो ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा गति में चले. यानी कम से कम मैक 5. साधारण भाषा में इनकी गति 6100 km/hr या उससे ज्यादा होती है. इनकी गति और दिशा में बदलाव करने की क्षमता इतनी ज्यादा सटीक और ताकतवर होती हैं कि इन्हें ट्रैक करना और मार गिराना असंभव होता है.   recent visitors 59

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आठ लाख आवास स्वीकृत किये जाने पर प्रधानमंत्री का आभार जताया

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात मुख्यमंत्री साय ने राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर की चर्चा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आठ लाख आवास स्वीकृत किये जाने पर प्रधानमंत्री का आभार जताया नई दिल्ली/ रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके निवास पर मुलाकात की।  इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में पिछले नौ महीनों के दौरान हुए विकास कार्यों की जानकारी दी, जिसमें कृषि, कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में की गई प्रमुख पहलों को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में हाल ही हुए सफल नक्सल ऑपरेशन की जानकारी प्रधानमंत्री से साझा की। प्रधानमत्री ने इस ऑपरेशन की सफलता पर सुरक्षा बलों के साहस की सराहना की। मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आठ लाख आवास स्वीकृत किये जाने पर नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को माओवाद के खिलाफ राज्य में चल रहे ऑपरेशन और विकास कार्यों की प्रगति पर विस्तृत जानकारी दी।  उन्होंने नारायणपुर-दंतेवाड़ा जिले के हालिया ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया है, जो राज्य में अब तक का सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों का ब्योरा भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया राज्य सरकार सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता की प्रशंसा की और कहा कि इससे न केवल राज्य में शांति बहाल हो रही है, बल्कि विकास की राह भी आसान हो रही है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर और आदिवासी अंचलों में युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए सरकार विशेष योजनाएँ चला रही है। इन योजनाओं के तहत युवाओं को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, जिससे वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। यह पहल राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि के क्षेत्र में, मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक और उन्नत कृषि विधियों का व्यापक प्रयोग हो रहा है। इससे किसानों की उत्पादकता और उनकी आय में वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रयास प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के साथ मेल खाते हैं, और छत्तीसगढ़ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने बड़े बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि आदिवासी अंचलों में बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे बच्चों की शैक्षणिक प्रगति में सुधार हो रहा है। साथ ही, तकनीकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि राज्य के बच्चे आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित हो सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और कहा कि राज्य की विकास यात्रा अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने मुख्यमंत्री साय को राज्य की प्रगति के लिए और भी अधिक समर्थन और सहयोग का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ी संख्या में आवास की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाखों परिवारों को अपने घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव उत्पन्न होगा। recent visitors 60

मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना आदि राज्य संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलवादियों का खात्मा करने के लिए संकल्प बद्ध- मुख्यमंत्री

मध्यप्रदेश सहित नक्सल प्रभावित राज्य संयुक्त अभियान चलाकर करेंगे नक्सलियों का खात्मा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव  नक्सलवाद के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने विगत दो वर्ष में जो कदम उठाए हैं वह पिछले तीन दशक में नहीं उठाए गए : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना आदि राज्य संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलवादियों का खात्मा करने के लिए संकल्प बद्ध- मुख्यमंत्री भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नक्सलवाद के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने विगत दो वर्ष में जो कदम उठाए हैं वह पिछले तीन दशक में नहीं उठाए गए। मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना आदि राज्य संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलवादियों का खात्मा करने के लिए संकल्प बद्ध हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को नई दिल्ली में सम्पन्न नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्राप्त मार्गदर्शन अनुसार राज्यों द्वारा पूर्ण तालमेल के साथ कार्य किया जाएगा। विकास के मुद्दों दूरसंचार, सड़क संपर्क में वृद्धि, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को बढ़ाकर समन्वय से नक्सलवाद को समाप्त किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने संयुक्त टास्क फोर्स में वृद्धि पर भी बल देते हुए कहा कि नक्सल विरोधी ऑपरेशन्स बढ़ाए जाएं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों में कोई कमी नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में आयोजित वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद पर हुई बैठक के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह केन्द्र सरकार कार्य कर रही है उसी तरह केन्द्रीय गृह मंत्री शाह भी सक्रियता से रणनीतिपूर्वक कार्य कर रहे हैं। गृह मंत्री शाह ने नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ ठोस रणनीति बनाई है। यही कारण है कि अब कार्रवाई का इंतजार नहीं करना पड़ता है और ठोस कार्रवाई हो जाती है। ऐसी कार्यवाही का परिणाम भी आता है। लगातार देश के अलग-अलग राज्यों में नक्सलवादी गतिविधियां आखिरी चरणों में पहुंच गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की बैठक में जैसा केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा है कि हमें कानून के शासन को स्थापित करना है और कुशासन का अंत करना है। मुझे इस बात का संतोष है कि केन्द्र सरकार ने इस बात को माना है कि हमारी नीति जीरो टॉलरेन्स की है। इस लक्ष्य के आधार पर हम यह कहेंगे कि नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा हो और विकास के सभी प्रकार के आयाम स्थापित हों। खास तौर पर सुरक्षा, सड़क संपर्क, पर्यावरण, दूरसंचार और अन्य गतिविधियों का संचालन जिससे सामान्य जीवन में विश्वास बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कठोर कार्रवाई के साथ ही पुनर्वास की दृष्टि से भी कार्यवाही होनी चाहिए, जिससे नक्सलवादी, नक्सल गतिविधियाँ छोड़ कर अपने जीवन में बदलाव चाहते हैं और विकास में कदम से कदम मिलाना चाहते हैं, वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री शाह के मार्गदर्शन में हम इस दिशा में काम करेंगे। यह भी प्रयास रहेगा कि नक्सली गतिविधियों से अव्यवस्था न हो। कानून को अपने हाथ में लेने की किसी को इजाजत नहीं मिलेगी।   recent visitors 47

शासन को भेजा प्रस्ताव- महाकाल मंदिर की सुरक्षा के लिए होमगार्ड जवानों के 480 पदों पर भर्ती, छह माह होगी भर्ती

उज्जैन महाकाल मंदिर में अंदर से लेकर बाहर तक सुरक्षा की कमान होमगार्ड जवानों के हाथ में रहेगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने डेढ़ माह पहले इसके निर्देश दिए थे। इसके बाद होमगार्ड मुख्यालय ने जवानों के 480 पद स्वीकृत करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। छह माह होगी भर्ती कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद लगभग छह माह इन पदों को भरने में लगेंगे। इसके अतिरिक्त हर जिले में पुलिस बैंड के लिए 800 होमगार्ड जवानों की भर्ती का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। महाकाल मंदिर में सुरक्षा की जिम्मेदारी अभी होम गार्ड जवानों के अतिरिक्त निजी एजेंसी के हाथ में है। इसमें अधिकतर सुरक्षाकर्मी निजी एजेंसी के हैं। अब पूरी सुरक्षा व्यवस्था होमगार्ड जवानों को सौंपी जानी है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का अच्छा नियंत्रण हो सके। होमगार्ड जवानों की भर्ती डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार ने बताया कि होमगार्ड जवानों की संख्या कम होने के कारण दूसरी जगह से उन्हें महाकाल में पदस्थ नहीं किया जा सकता, इसलिए अतिरिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। मुख्यमंत्री ने हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना के लिए भी इसी वर्ष जनवरी में कहा था। उनके निर्देश पर एसएएफ के जवानों को बैंड का प्रशिक्षण दिया गया है, पर स्थायी व्यवस्था के लिए होमगार्ड जवानों की भर्ती की जा रही है। recent visitors 114

अब अमूल दूध इंडिया ही नहीं, पूरी दुनिया पिएगी, अब यूरोप में अपने पैर जमाने की तैयारी में

नई दिल्ली अमूल दूध पीता है इंडिया… आपने यह लाइन अमूल दूध के विज्ञापन में पढ़ी और सुनी होगी। अब अमूल दूध इंडिया ही नहीं, पूरी दुनिया पिएगी। अमेरिकी मार्केट में सफलता के बाद अमूल दूध यूरोप में भी मिलाना शुरू होगा। इसके लिए तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। ऐसे में अगर आप यूरोप के देशों की सैर पर जाएंगे तो वहां भी अमूल दूध का लुत्फ उठा पाएंगे। अमूल ब्रांड गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड नाम की सहकारी संस्था के प्रबंधन में चलता है। इस संघ के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने कहा कि अमूल दूध कुछ महीने पहले अमेरिका में लॉन्च किया गया था। वहां इसे लोगों ने काफी पसंद किया। कंपनी का यह प्रयोग सफल रहा। उन्होंने कहा कि अमूल दूध अब यूरोप के मार्केट में उतरने के लिए तैयार है। मेहता ने यह जानकारी XLRI की ओर से आयोजित 11वें डॉ. वर्गीज कुरियन मेमोरियल व्याख्यान में कही। मेहता ने कहा कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। साथ ही आने वाले वर्षों में दुनिया के कुल दूध का एक तिहाई प्रोडक्शन करने के लिए तैयार है। 6 महीने में अमेरिका में गाड़े झंडे अमूल में अमेरिका में इसी साल मार्च में एंट्री की थी। यह पहली बार था जब अमूल दूध ने इंडिया से बाहर किसी देश में कदम रखे थे। अमूल ने अमेरिका ने चार तरह के दूध के वेरिएंट लॉन्च किए थे। इनमें अमूल ताजा, अमूल गोल्ड, अमूल शक्ति और अमूल स्लिम एंड ट्रिम थे। इसके लिए अमूल ने Michigan Milk Producers Association (MMPA) के साथ पार्टनरशिप की थी। यह अमेरिका की करीब 108 साल पुरानी डेयरी कॉपरेटिव है। डेयरी सेक्टर का बड़ा योगदान दूध न सिर्फ सेहत बनाता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की भी सेहत बेहतर रखता है। ज्यादातर ग्रामीण लोगों की आय का बड़ा सोर्स दूध का उत्पादन ही है। वहीं देश की अर्थव्यवस्था में डेयरी सेक्टर का योगदान 5 फीसदी है। इससे करीब 8 करोड़ किसान जुड़े हुए हैं। जानकारों के मुताबिक अगले 5 सालों में इसमें 15 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ देखी जा सकती है। डेयरी से जुड़े कई स्टार्टअप भी बेहतरीन काम कर रहे हैं। 80 हजार करोड़ रुपये का कारोबार अमूल अपने प्रोडक्ट की बिक्री से सालाना जबरदस्त कमाई करता है। मार्च 2024 में खत्म हुए वित्त वर्ष में इसका सालाना टर्नओवर करीब 80 हजार करोड़ रुपये था। अमूल के देशभर में 107 डेयरी प्लांट हैं। यह ब्रांड 50 से ज्यादा प्रोडक्ट बेचता है और रोजाना 310 लाख लीटर दूध एकत्र करता है। अमूल के देशभर में सालाना करीब 22 अरब पैकेट बेचे जाते हैं। इससे 35 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं। recent visitors 124

भारतीय वायुसेना को नए प्लेन की खरीद में लग रहा समय, ट्रेनिंग देने में लगेगा टाइम

नई दिल्ली  वायुसेना के पास फाइटर प्लेन की ताकत ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है। स्थिति यह है कि भारत के फाइटर प्लेन की क्षमता साल 1965 से भी कम हो गई है। इस पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का कहना है कि 'जो कुछ भी हमारे पास है, उसी से लड़ने' को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान मौजूदा असेट्स के संरक्षण और कर्मियों को उनके सही तरीके से उपयोग करने के लिए ट्रेनिंग देने पर है। फाइटर प्लेन हो रहे रिटायर हालांकि एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत क्षमता है। यह संख्या सीमा पर खतरे की स्थिति को देखते हुए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद स्वीकृत की गई है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार कमी आई है। इसकी वजह है कि पुराने सोवियत युग के फाइटर प्लेन रिटायर हो गए हैं और उनकी जगह नए प्लेन को लाने का आदेश नहीं दिया गया है। पिछले 6 साल से नहीं दिख रही प्रोग्रेस अपने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) का उत्पादन, जो समय से पीछे चल रहा है, को तेज करने की जरूरत है। इसके साथ ही नए मल्टी रोल वाले वाले फाइटर प्लेन विमानों की जरूरत "कल से ही" है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि वायुसेना ने 2018 में मेक इन इंडिया योजना के तहत 114 मल्टीरोल फाइटर प्लेन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन पिछले छह साल से कोई प्रोग्रेस नहीं दिख रही है। रातों-रात प्लेन नहीं खरीद सकते वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की कमी को स्पष्ट रूप से बताते हुए कहा कि यह कोई थोड़े समय की बात नहीं है कि हम रातों-रात सामान खरीद सकते हैं। इसमें समय लगता है, सिर्फ सेलेक्शन ही नहीं, बल्कि शामिल करने में भी समय लगता है। इसके साथ ही, अगर हम दो या तीन स्क्वाड्रन शामिल भी करते हैं, तो निश्चित रूप से उनका उपयोग करने में सक्षम होने के लिए ट्रेनिंग में समय लगता है। इसलिए हम इस समय जिस चीज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वह यह है कि हमारे पास जो कुछ भी है, हम उससे तुरंत लड़ने में सक्षम हों। 1965 के बाद सबसे कम ताकत रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 स्क्वाड्रन की मौजूदा ताकत 1965 के बाद से भारत की सबसे कम ताकत है, जब पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा गया था। 1965 के युद्ध के बाद यह संख्या लगातार बढ़ती गई और 1996 में 41 स्क्वाड्रन तक पहुंच गई। जैसे-जैसे विमान की रूपरेखा बदलती गई, 2013 में यह संख्या घटकर 35 रह गई और तब से लगातार कम होती गई। सर्विस में मौजूद 31 स्क्वाड्रन में से दो स्क्वाड्रन कम से कम उड़ान भर रहे हैं। ये अपने मिग 21 लड़ाकू विमानों को बचा रहे हैं, जिन्होंने पहली बार 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया था। ये विमान लंबे समय से अपने लाइफ के अंत तक पहुंच चुके हैं। उनकी रिटायरमेंट को कई सालों के लिए टाला जा रहा है। इसकी वजह है कि वायुसेना एलसीए एमके1ए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी का इंतजार कर रही है। अतीत से सबक लेने की जरूरत एलसीए परियोजना से करीब से जुड़े रहे वायुसेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि अतीत से सबक लेने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे कोई देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जेट विमानों के उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर को बड़े पैमाने पर शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर एलसीए डिलीवरी की समयसीमा पूरी हो जाती है और मल्टी-रोल फाइटर कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो वायुसेना 'बुरी स्थिति में' नहीं होगी।   recent visitors 86