बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को लेकर कट्टरपंथियों की धमकी के बाद हिंदू डरे हुए

ढाका  बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को लेकर कट्टरपंथियों की धमकी के बाद हिंदू डरे हुए हैं। इसके चलते बांग्लादेश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय में दुर्गा पूजा को लेकर जोश फीका पड़ गया है। बांग्लादेश में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच ढाका में राम कृष्ण मिशन ने इस साल कुमारी पूजा नहीं मनाई है। इसके बाद मिशन ने मुख्य पूजा को खुले में न करने का फैसला किया है। यह पूजा अब सभागार के अंदर ही मनाई जाएगी।   अपनी रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है। ढाका में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाले एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर TNIE को बताया कि 'कट्टरपंथियों ने किसी भी तरह के साउंड का इस्तेमाल न करने की चेतावनी जारी की है। इससे पूरे देश में हिंदू डरे हुए हैं।' कार्यकर्ता ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए राम कृष्ण मिशन में दुर्गा पूजा सभागार के अंदर आयोजित की जाएगी। कट्टरपंथियों के साथ अंतरिम सरकार बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के दौरान माइक न लगाने के साथ ही किसी भी तरह के संगीत वाद्ययंत्र के इस्तेमाल को लेकर भी धमकी दी है। पूजा समितियों को पंडाल लगाने के लिए 5 लाख टका फिरौती के रूप में देने की मांग की जा रही है। इन कट्टरपंथियों को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की मौन सहमति मिली हुई है। कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश के गृह मंत्री ने भी इसी के सुर में सुर मिलाते हुए हिंदुओं से दुर्गा पूजा में नमाज के पहले साउंड और पूजा रोकने की बात कही थी। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा 5 अगस्त को शेख हसीना के ढाका छोड़ने के बाद से बांग्लादेश के कुल 72 में से 62 जिलों में हिंदुओं को निशाना बनाकर 2010 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें हिंदू समुदाय के घरों, पूजा स्थलों और कार्य स्थलों पर तोड़फोड़ और भीड़ द्वारा हत्या तक शामिल है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने आगामी त्योहार के दौरान पूजा पंडालों और हिंदुओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, लेकिन यह सब दिखावा है। किसी भी आरोपी को न हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश में घट रहे हिंदू बांग्लादेश में शेख हसीना के जाने के बाद अल्पसंख्यकों पर संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा शासन हिंदुओं को अवामी लीग का समर्थक मानता है और उनके खिलाफ अत्याचारों पर आंख मूंदे हुए है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की यह कहानी नई नहीं है। 1971 में जब बांग्लादेश के गठन के समय देश में हिंदू समुदाय आबादी का 21 प्रतिशत था। अब यह मात्र 8.7 प्रतिशत रह गया है। अल्पसंख्यक कार्यकर्ता ने कहा कि लगता है कि मौजूदा शासन नहीं चाहता कि बांग्लादेश में कोई अल्पसंख्यक रह जाए। recent visitors 80

नक्सलियों के खिलाफ सफल अभियान के लिए अमित शाह ने मुख्यमंत्री साय की तारीफ की

नई दिल्ली/रायपुर देश के नक्सल प्रभावित राज्यों में जारी नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों पर एक अहम बैठक आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक का केंद्र बिंदु छत्तीसगढ़ का हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ नक्सल विरोधी ऑपरेशन था, जिसमें राज्य की पुलिस ने 31 नक्सलियों को ढेर किया। इस ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ पुलिस की कुशल रणनीति और राज्य सरकार की योजनाओं की सफलता पर विशेष चर्चा की गई। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय तथा छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उनकी टीम के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ के सुरक्षा बलों ने लगभग 194 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराए हैं। वहीं 801 नक्सली गिरफ्तार हुए एवं 742 नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया है। उन्होंने कहा आज भी जो युवा नक्सलवाद में लिप्त है उनसे आग्रह है कि हथियार छोड़ कर मुख्य धारा से जुड़े। सभी राज्यों ने आपके पुनर्वास के लिए बेहतर योजनाएं बनाई हैं उसका फायदा लीजिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में नक्सल ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने महीनों की मेहनत और प्लानिंग के बाद इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। ऑपरेशन में करीब 1000 जवान शामिल थे, जिन्होंने 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित गवाड़ी पहाड़ को घेरकर 31 नक्सलियों को ढेर किया। इस ऑपरेशन में कई बड़े नक्सली नेता मारे गए, जिनमें 16 पर कुल 1 करोड़ 30 लाख का इनाम घोषित था। मुठभेड़ में 18 पुरुष और 13 महिला नक्सली मारे गए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि कैसे राज्य की पुलिस फोर्स ने सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। मुख्यमंत्री ने बैठक में केवल ऑपरेशन की सफलता पर ही नहीं, बल्कि राज्य में चल रहे विकास कार्यों पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति बढ़ाई गई है। हम निरंतर गाँवों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुंचा रहे हैं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।” श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  के लगातार मिल रहे मार्गदर्शन में हमने माओवादियों के कोर को तोड़ा। ऐसे एरिया में हमने 32 नये कैम्प स्थापित किये हैं, जिसे वो अपनी राजधानी तक कहते थे। उनकी बटालियन के कमांडर हिड़मा के गाँव में भी हमने कैंप स्थापित किया और उसकी माँ को भी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई। भविष्य की योजनाओं और लक्ष्य की दी जानकारी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सरकार की आगे की योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य नक्सलियों के बचे हुए गढ़ों को समाप्त करना और इन इलाकों में स्थाई शांति और विकास सुनिश्चित करना है। निकट भविष्य में, दक्षिण बस्तर में 29 नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना की जाएगी, ताकि नक्सलियों के प्रभाव को खत्म किया जा सके। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा केंद्र हरसंभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में हुए सफल ऑपरेशन की तारीफ करते हुए अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे भी छत्तीसगढ़ की खुफिया तकनीकी और आपसी समन्वय के आधार पर अपने अपने राज्यों में ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सहित अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों को हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए पूरा समर्थन देगी। recent visitors 62

विदेश मंत्री जयशंकर नेUN के पुराने ढर्रे की जमकर आलोचना की, बोले इसी रवैये से देशों ने खुद ही कदम उठाने शुरू कर दिए

नई दिल्ली  जमाने की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे तो इंसान हो या संस्थान, हिकारत ही झेलता है। और यही हाल है संयुक्त राष्ट्र का। दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत आज इस हालत में पहुंच गई है कि इसकी उपयोगिता पर उठे सवालों की जड़ें लगातार गहरी हो रही हैं। विश्व जब आज बहुध्रुवीय अवस्था में कहीं युद्ध तो कहीं युद्ध जैसे हालात का सामाना कर रहा है तो संयुक्त राष्ट्र का मूकदर्शक बनकर ठिठके रहना इस संस्था के निष्प्रभावी होने का पर्याप्त संकेत है। यही वजह है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को एक पुरानी कंपनी करार दे दिया जो बाजार से कदमताल तो नहीं मिला पा रही है, लेकिन जगह घेर रखी है। संयुक्त राष्ट्र की तुलना पुरानी कंपनी से जयशंकर ने यूएन की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक पुरानी कंपनी की तरह है जो बाजार के साथ पूरी तरह से नहीं चल पा रही है, लेकिन जगह घेरे हुए है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में एक बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में दो बहुत ही गंभीर संघर्ष चल रहे हैं। और इन पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है? विदेश मंत्री ने कहा, 'निश्चित रूप से एक दर्शक की।' उन्होंने अमेरिकी चुनावों के संभावित नतीजों पर एक सवाल के जवाब में कहा कि अमेरिका ने भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण में वास्तविक बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि नवंबर में चाहे जो भी नतीजे हों, इनमें से कई रुझान आने वाले दिनों में तेज होंगे। कौटिल्य इकनॉमिक कॉन्क्लेव में बोले जयशंकर जयशंकर ने 'भारत और दुनिया' विषय पर आयोजित इंटेरेक्टव सेशन में भाग लिया और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत की भूमिका और चुनौतियों के बारे में बात की। जयशंकर ने श्रीलंका जैसे अपने पड़ोसी देशों के साथ-साथ अन्य देशों की मदद के लिए उठाए गए कुछ कदमों की चर्चा की। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी आगामी पाकिस्तान यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर से अपने पाकिस्तानी समकक्ष के साथ किसी भी द्विपक्षीय बातचीत से इनकार किया। पाकिस्तान दौरे को लेकर क्लियर कट जयशंकर ने कहा, 'मैं वहां एक खास काम, एक खास जिम्मेदारी के लिए जा रहा हूं। चूंकि मैं अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेता हूं इसलिए मैं एससीओ मीटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां जा रहा हूं, और बस यही करने जा रहा हूं।' विदेश मंत्री ने शनिवार को भी कहा था कि वह बहुपक्षीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रहे हैं, न कि भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने। संयुक्त राष्ट्र की कड़ी आलोचना बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने विश्व निकाय के बारे में काफी आलोचनात्मक नजरिया पेश किया।उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र एक तरह से एक पुरानी कंपनी की तरह है, जो बाजार के साथ पूरी तरह से नहीं चल पा रही है, लेकिन जगह घेरे हुए है। और, जब यह समय से पीछे होता है, तो इस दुनिया में आपके पास स्टार्ट-अप और इनोवेशन होते हैं, इसलिए अलग-अलग लोग अपनी चीजें खुद करने लगते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'तो आज आपके पास संयुक्त राष्ट्र है, हालांकि कामकाज में कितना भी दोयम दर्जे का क्यों न हो, यह अभी भी एकमात्र वैश्विक पंचायत है।' विदेश मंत्री ने कहा, 'लेकिन, जब यह प्रमुख मुद्दों पर आगे नहीं बढ़ पाता है तो देश इसे करने के अपने-अपने तरीके खोज लेते हैं। उदाहरण के लिए, पिछले पांच-दस वर्षों को ही ले लीजिए, शायद हमारे जीवन में सबसे बड़ी चीज जो हुई वह थी कोविड। संयुक्त राष्ट्र ने कोविड पर क्या किया? मुझे लगता है कि जवाब है- बहुत ज्यादा नहीं।' जयशंकर ने कहा, 'आज दुनिया में दो संघर्ष चल रहे हैं, दो बहुत ही गंभीर संघर्ष, उन पर संयुक्त राष्ट्र कहां है, बस एक दर्शक की मुद्रा में।' यूएन की निष्क्रियता से खुद फैसले लेने लगे देश इससे हो यह रहा है कि सभी ने अपने-अपने हिसाब से कदम उठाए, जैसे कि कोवैक्स जैसी पहल जो कई देशों के एक समूह ने की थी। उन्होंने कहा, 'जब अब बड़े मुद्दों पर कुछ करने को लेकर सहमत होने वाले देशों के समूह बढ़ रहे हैं।' उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी), ग्लोबल कॉमन्स की देखभाल के लिए इंडो-पैसिफिक में क्वाड, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) और आपदा प्रतिक्रियाशील अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी संपर्क पहलों का हवाला देते हुए कहा कि ये सभी निकाय संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के बाहर आए हैं। जयशंकर ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र तो रहेगा, लेकिन संयुक्त राष्ट्र से इतर का स्थान भी तेजी से तैयार हुआ है जो सक्रिय है और मुझे लगता है कि यह संयुक्त राष्ट्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।' संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत लेकिन हो नहीं रहे जयशंकर ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्यों का अदूरदर्शी दृष्टिकोण वैश्विक निकाय के लंबे समय से लंबित सुधार में आगे बढ़ने से रोक रहा है। पांच स्थायी सदस्य रूस, यूके, चीन, फ्रांस और अमेरिका हैं और ये देश किसी भी वास्तविक प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं। जयशंकर से अमेरिकी चुनावों के संभावित नतीजे और नई सरकार के साथ भारत कैसे जुड़ेगा, इस बारे में भी सवाल किया गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'पिछले पांच वर्षों पर गौर करें तो पता चलेगा कि ट्रंप प्रशासन की कई नीतियां वास्तव में न केवल बाइडेन प्रशासन ने आगे बढ़ाई गईं बल्कि उन्होंने उन नीतियों का विस्तार किया।' उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह बात समझ आ गई है कि जिस व्यवस्था को उसने कई साल पहले खुद तैयार किया था, वह अब उस हद तक उसके फायदे के लिए काम नहीं करती है।' संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के अनुसार, अपनी स्थापना के 75 से अधिक वर्षों के बाद संयुक्त राष्ट्र अभी भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने, जरूरतमंदों को मानवीय सहायता देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कायम रखने के लिए काम कर रहा है। भारत बदलते समय के साथ तालमेल बिठाते हुए संयुक्त राष्ट्र और इसकी सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग करता रहा है। recent visitors 83

चंदा देवी मल्टीस्पेशयलिटी हाॅस्पिटल के नवीन भवन का विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया लोकार्पण

बलौदाबाजार जिले में स्वास्थ्य सेवा में अग्रणी चंदा देवी मल्टीस्पेशयलिटी हाॅस्पिटल के नवीन भवन का आज पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने लोकार्पण किया एवं तिवारी परिवार को बधाई शुभकामनाएं दी. इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक अमर अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि एवं डाॅक्टर उपस्थित थे. इस अवसर पर अम्बिकापुर से बायरोड रायपुर और वहां से बलौदाबाजार पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री का डाॅ. रमन सिंह ने नाड़ी देखकर स्वास्थ्य जांच भी किया और कहा सब कुछ ठीक है. बलौदाबाजार पहुंचने पर डाॅ. रमन सिंह का चंदा देवी हाॅस्पिटल के डायरेक्टर डाॅ. प्रमोद तिवारी, डाॅ. नितिन तिवारी, डाॅ. गीतिका शंकर तिवारी, पूर्व आयुक्त गणेश शंकर मिश्रा सहित तिवारी परिवार ने स्वागत किया. इसके बाद डाॅ. रमन सिंह, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर लोकार्पण किया. डाॅ. रमनसिंह ने कहा कि चंदा देवी हाॅस्पिटल पूर्व विधायक बंशराज तिवारी द्वारा स्थापित है, जो सन 2001 से निरंतर लोगों को स्वास्थ्य सेवा दे रहा है. अब यह 180 बिस्तर के साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ क्षेत्र सहित प्रदेश वासियों को सेवा देने जा रहा है. मैं पूरे तिवारी परिवार को बधाई शुभकामनाएं देता हूं. डाॅ. नितिन तिवारी डायरेक्टर चंदा देवी मल्टीस्पेशयलिटी हाॅस्पिटल ने कहा कि हम और हमारा परिवार स्वास्थ्य सेवा में श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम सेवा देने अग्रसर है. यह हमारे पूज्य बाबूजी स्व. पंडित बंशराज तिवारी, पिताजी डाॅ. प्रमोद तिवारी का सपना था कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दें, जो आज पूरा हुआ है. आज इसका शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह सहित अतिथियों ने किया है. डाॅ. गीतिका शंकर तिवारी डायरेक्टर चंदा देवी हास्पिटल ने क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त किया और कहा कि लगभग 35 वर्षों से हमारा परिवार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देते आ रहा है. आज हम इसमें और विस्तार किए हैं. मैं सभी को धन्यवाद देती हूं और विश्वास दिलाते हैं कि आगे और बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएंगे. recent visitors 103

नक्सलियों पर बड़े प्रहार की तैयारी! 8 राज्यों के CM से अमित शाह की मुलाकात, जानें देश में कितना खत्म हुआ नक्सलवाद

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित राज्यों में सुरक्षा और विकास की समीक्षा के लिए बैठक की अध्यक्षता की. बैठक के बाद गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल एरिया में अंतिम प्रहार किया जाएगा. मार्च 2026 तक हम नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है तो नक्सलवाद को खत्म करना होगा. LWE के सामने लड़ने के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून को लागू करना जरूर है. 30 साल के बाद पहली बार वामपंथी उग्रवाद से मरने वाले लोगों की संख्या 100 से कम रही है. नक्सलियों से अंतिम चरण में लड़ाई अमित शाह ने कहा कि LWE से लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है. 2026 मार्च तक ये देश इस दशकों पुरानी समस्या से मुक्ति पा लेगा. LWE का 85 फीसदी कैडर स्ट्रैंथ छत्तीसगढ़ में सिमट कर रह गया है. छत्तीसगढ़ में जनवरी से लेकर अब तक 194 मारे गए , 801 ने हथियार छोड़े और 742 नक्सलियों ने सरेंडर किया. उन्होंने कहा कि मैं दोबारा नक्सलियों से अपील करता हूं हथियार छोड़िए और मुख्यधारा से जुड़िए. राज्यों में हमने राज्य पुलिस और ज्वाइंट टास्क फोर्स गठित की है, लेकिन इसकी हेरारकी पर भी काम करना है. नक्सली ऑपरेशन के लिए आज 12 हेलीकाप्टर, 6 बीएसएफ के और 6 एयरफोर्स के जवानों को बचाने के लिए तैनात हैं. ‘छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को बधाई’ शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनकी टीम को बधाई देना चाहता हूं कि अगस्त से अब तक लगभग 194 नक्सली मारे गए हैं. जो युवा नक्सलवाद से आज भी जुड़े हैं उनसे विनती है कि हिंसा छोड़िए और मुख्यधारा में आइए. नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होने वाला है. सरकार क्षमता निर्माण का एक संयुक्त अभियान चलाया जाएगा. करीब 3 गुना बजट सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) स्कीम का बढ़ा है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रो में विकास कार्यों के लिए मुख्य योजना है.   इस बैठक में छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. इसके अलावा बैठक में पांच केंद्रीय मंत्री, केंद्रीय मंत्रालयों के सीनियर अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के प्रतिनिधि और डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भी भाग लेंगे. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार मार्च 2026 तक एलडब्ल्यूई के खतरे को पूरी तरह से खत्म करेगी. केंद्र सरकार नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए प्रभावित राज्य सरकारों को हर संभव सहायता कर रही है. गृह मंत्री अमित शाह ने पिछली बार 6 अक्टूबर 2023 को नक्सलवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ रिव्यू बैठक की थी. उस बैठक में गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बड़े स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए थे. कहा गया है कि मोदी सरकार की रणनीति की वजह से 2010 की तुलना में 2023 में नक्सलवाद हिंसा में 72 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी, जबकि मौतों में 86 प्रतिशत की गिरावट आई थी. सरकार का कहना है कि नक्सलवाद आज अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा है. इस साल कितने मारे गए हैं नक्सली? गृह मंत्रालय का कहना है कि साल 2024 में अब तक सुरक्षाबलों ने हथियारबंद नक्सलियों के सफाए में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है. इस वर्ष अब तक 202 नक्सलियों का सफाया किया जा चुका है. पिछले 9 महीनों में 723 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जबकि 812 को गिरफ्तार किया गया है. 2024 में नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर मात्र 38 रह जाएगी. उसका कहना है कि केंद्र सरकार ने विकास से वंचित क्षेत्रों तक योजनाओं को पहुंचाने के लिए सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने समेत कई कदम उठाए हैं. नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 14400 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं और करीब 6000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं. सरकार का नक्सलियों पर बड़ा एक्शन जिस तरह से बीजेपी सरकार ने जम्मू कश्मीर में आतंक की फंडिंग पर रोक लगाने का लगातार प्रयास किया और बहुत हद तक इसको रोका गया, वैसे ही नक्सलियों की हो रही फंडिंग को रोकने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में 31 नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों ने 6 अक्टूबर को नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया. सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के आतंक को खत्म करने के लिए 120 मिनट में 31 नक्सलियों को ढेर कर दिया. 31 नक्सलियों को ढेर किए जाने के मौके पर राज्य के सीएम विष्णु दिओ साय ने कहा, जब से हम सरकार में आए हैं, हम तब से मजबूती के साथ नक्सलवाद से लड़ रहे हैं. साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के संग सोमवार को नक्सलवाद के खिलाफ होने वाली बैठक को लेकर कहा, अमित शाह जी के संग बैठक है, जहां जिसमें नक्सल प्रभावित राज्य शामिल होंगे. 812 गिरफ्तार, 202 नक्सली ढेर मीटिंग को लेकर जारी बयान में कहा गया, इस साल 2024 में 202 नक्सलियों को ढेर किया गया, 723 ने सरेंडर किया, 812 को गिरफ्तार किया गया. बीजेपी सरकार समय-समय पर नक्सलवाद को खत्म करने का प्रयास करती रही है. पिछले साल 6 अक्टूबर को भी गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ मीटिंग की थी. recent visitors 75

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा तकनीकी कदम, राजस्थान के अस्पतालों में लागू होगा एबीडीएम

जयपुर. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के क्रियान्वयन को लेकर भारत सरकार देश की स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रमुख घटकों पर प्राथमिकता से कार्य कर रही है। एबीडीएम का उद्देश्य एक ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य इको सिस्टम का निर्माण करना है, जो देश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान और समान पहुंच प्रदान कर सके। राज्य सरकार का चिकित्सा विभाग 10 महीने पहले निकले इन आदेशों को मिशन मोड में लागू करने जा रहा है। मिशन निदेशक एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा जारी आदेशों के अनुसार राजस्थान के सभी जिलों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत योजना के प्रमुख घटकों को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य संबंधी डेटा का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार ने इसके क्रियान्वयन के लिए आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा), हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री (एचपीआर), और हेल्थकेयर फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) पर विशेष जोर देने का निर्णय लिया है। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) प्रत्येक नागरिक का हेल्थ अकाउंट 14 अंकों की आभा आईडी के माध्यम से पहचाना जाएगा। आभा आईडी पोर्टल और एप्स के माध्यम से स्वयं पंजीकरण की सुविधा दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक का एक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाना है, जो उसकी संपूर्ण स्वास्थ्य जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड होगा। इस आईडी के माध्यम से नागरिक किसी भी अस्पताल या क्लिनिक में अपनी स्वास्थ्य जानकारी आसानी से साझा कर सकेंगे। इससे मरीजों को बार-बार मेडिकल रिपोर्ट्स ले जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और इलाज में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही यह मरीजों के समय और पैसे की बचत भी करेगा, क्योंकि उन्हें बार-बार अपने टेस्ट और मेडिकल जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। एचपीआर (हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री) एचपीआर के तहत राज्य के सभी स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों का पंजीकरण किया जाएगा। यह रजिस्ट्री स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य पेशेवरों की एक व्यापक जानकारी प्रदान करेगी। इससे राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग अधिक संगठित और पारदर्शी ढंग से किया जा सकेगा। एचएफआर (हेल्थकेयर फैसिलिटी रजिस्ट्री) एचएफआर के तहत राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का पंजीकरण किया जाएगा। इस रजिस्ट्री के माध्यम से नागरिक यह जान सकेंगे कि राज्य में किन-किन स्थानों पर कौन-कौन सी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। इससे लोगों को सही समय पर सही स्थान पर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी और उपचार में होने वाली जटिलताएं कम होंगी। मिशन की चुनौतियां और समाधान मिशन के क्रियान्वयन के दौरान कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं की कमी, स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों को डिजिटल तकनीक के प्रति जागरूक करना और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना प्रमुख हैं। राज्य सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है। सरकार का यह प्रयास है कि डिजिटल मिशन के सफल क्रियान्वयन से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार हो। इसके साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित की जा सकेगी। लाभार्थियों के लिए फायदा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से राज्य के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। आभा आईडी और अन्य डिजिटल सुविधाओं से वे न केवल अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम और सुलभ बना सकेंगे, बल्कि इससे उनकी निजी स्वास्थ्य जानकारी भी सुरक्षित रहेगी। राज्य सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2025 तक राजस्थान के सभी जिलों में एबीडीएम के सभी घटकों का पूर्ण क्रियान्वयन हो जाएगा। recent visitors 101

ड्रैगन के डर से सहमा शेयर बाजार, सेंसेक्स में पिछले 6 कारोबारी दिन के दौरान 4786 अंक की गिरावट देखने को मिली

मुंबई शेयर बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में आज फिर से भारी गिरावट देखने को मिली है। चीनी मार्केट में बेहतर संभावनाओं को देखते हुए विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार घरेलू शेयर बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। जिसकी वजह से सेंसेक्स में पिछले 6 कारोबारी दिन के दौरान 4786 अंक की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, आज बीएसई सेंसेक्स 638 अंक की गिरावट के साथ 81,050 पर बंद हुआ है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,795.75 पर बंद हुआ है। आज दिन में सेंसेक्स 962 अंक की गिरावट के बाद 80,726 अंक पर आ गया था। वहीं, निफ्टी 24,700 के नीचे लुढ़क गया था।  शेयर मार्केट में एक बार फिर भूचाल आ गया है। सेंसेक्स 887अंक लुढ़क कर 80787 पर आ गया है। निफ्टी गिरावट का दोहरा शतक लगाकर 24716 पर आ गया है। यह 298 अंक टूट चुका है। शेयर मार्केट में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अच्छी शुरुआत के बाद मार्केट अब बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा है। सेंसेक्स 694 अंक नीचे 80993 पर आ गया है। निफ्टी गिरावट का दोहरा शतक लगाकर 24770 पर आ गया है। सभी सेक्टोरल इंडेक्स भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मीडिया, निफ्ट मेटल, निफ्टी पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूराबेल्स, एफएमसीजी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी भारी गिरावट है। शेयर मार्केट में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अच्छी शुरुआत के बाद मार्केट अब बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा है। सेंसेक्स 575 अंक नीचे 81113 पर आ गया है। निफ्टी गिरावट का दोहरा शतक लगाकर 24809 पर आ गया है। आज के हाई से यह करीब 340 अंक लुढ़क चुका है। एनटीपीसी और अडानी पोर्ट्स 4 पर्सेंट से अधिक टूट चुके हैं। पावर ग्रिड, कोल इंडिया और बीईएल में 3 फीसद से अधिक की तेजी है। शेयर मार्केट सुबह की बढ़त गंवाकर अब लाल निशान पर आ गया है। सेंसेक्स आज के हाई से 1000 अंक टूट चुका है। आज सेंसेक्स ने 81,139.62 का लो बनाया। सेंसेक्स 228 अंक टूटकर 81460 पर आ गया है। निफ्टी भी गिरावट का शतक लगाकर 24907 पर आ गया है। शेयर मार्केट ने सुबह की बढ़त गंवा दी है। सेंसेक्स आज के हाई 82137 के लेवल से गरकर अब 81695 पर आ गया है। दूसरी निफ्टी 29 अंकों की गिरावट के साथ 24985 पर है। आज यह 25143 तक पहुंचा था। निफ्टी टॉप लूजर में आज अडानी पोर्ट्स, बीईएल, ओएनजीसी, कोल इंडिया और अडानी एंटरप्राइजेज हैं, जिनमें 2.39 से लेकर 2.94 पर्सेंट तक की गिरावट है। शेयर मार्केट अभी भले ही हरे निशान पर है, लेकिन सुबह की बढ़त कम हो गई है। आईटीसी में 2 पर्सेंट से अधिक की तेजी है। कोटक बैंक में 1 पर्सेंट की बढ़त है इसके बावजूद सेंसेक्स केवल 123 अंक नीचे 81812 पर है। क्योंकि, टाइटन, अडानी पोर्ट्स, पावर ग्रिड समेत दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। शेयर मार्केट पांच दिन से चली आ रही गिरावट पर आज ब्रेक लग गया है। अच्छे ग्लोबल संकेतों के बीच बीएसई का 30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 238 अंकों की बढ़त के साथ 81926 के लेवल पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी 69 अंक ऊपर 25084 पर खुलने में कामयाब रहा। घरेलू शेयर मार्केट में लगातार 5 सेशन से चल रहा गिरावट का सिलसिला आज थम सकता है। क्योंकि, ग्लोबल संकेत कुछ ऐसा ही इशारा कर रहे हैं। आज सप्ताह के पहले दिन सोमवार 7 अक्टूबर को एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हुआ, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। Gift Nify ने भी अच्छे संकेत दिए हैं। रॉयटर्स ने बताया कि अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए नवंबर में 50 बीपीएस के बजाय सिर्फ 25 बीपीएस कटौती करने के लिए बाजार की उम्मीदें चरम पर पहुंच गई हैं। सीएमई के फेडवॉच टूल के अनुसार व्यापारियों ने अब एक चौथाई अंक की कटौती की 95 फीसद संभावना में उम्मीद लगाई, जो पिछले सप्ताह के मध्य में 65 फीसद से ऊपर थी, और कोई कटौती नहीं होने का 5 फीसद मौका था। इससे पहले शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार के सूचकांक लगभग एक प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे लगातार पांचवें सत्र में नुकसान हुआ। सेंसेक्स 808.65 अंक या 0.98 फीसद की गिरावट के साथ 81,688.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 235.50 अंक या 0.93 फीसद की गिरावट के साथ 25,014.60 पर बंद हुआ। recent visitors 89