राज्यपाल ने दिलाई वन्य जीव संरक्षण की शपथ, पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न

बच्चों को वन्य जीवन और जैव विविधता की महत्ता से बचपन में ही करें संस्कारित : मंगुभाई पटेल राज्यपालपटेल ने कहा  हमारा संविधान पर्यावरण के संरक्षण, वन और वन्य जीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रदान करता है राज्यपाल ने दिलाई वन्य जीव संरक्षण की शपथ, पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न  राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह सम्पन्न भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बच्चों को वन, वन्य जीव और जैव विविधता की महत्ता के बारे में बचपन से ही संस्कारित किया जाना चाहिए। माता-पिता उन्हें जैव संरक्षण की बहुलता और आवश्यकता के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाए। राज्यपाल पटेल आज भोपाल में राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर वन्य जीव संरक्षण पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता के पुरस्कार दिए. इसमें वन्य जीव संरक्षण पर श्रेष्ठ पेंटिंग बनाने पर राज्यपाल ने मान्या शाक्या को सम्मानित किया। उन्होंने एक से 7 अक्टूबर 2024 तक आयोजित वन्य जीव सप्ताह की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत कर बधाई दी।  राज्यपाल पटेल ने उपस्थित जनों को वन्य जीव संरक्षण की शपथ भी दिलाई। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारा संविधान पर्यावरण के संरक्षण, वन और वन्य जीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रदान करता है। मौलिक कर्तव्यों के तहत प्रत्येक नागरिक से पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के हिसाब से देश के सबसे बड़े वन क्षेत्र होने गौरव प्राप्त है। बाघों के अलावा, तेंदुए, घड़ियाल, चीता, भेड़िये और गिद्धों की सर्वाधिक संख्या के लिये भी प्रदेश पहचाना जाता है। हर प्रदेशवासी की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे वन और वन्य जीव रूपी अमूल्य धरोहर की विरासत को सहेज कर भावी पीढ़ी को सौंपने में अपना योगदान दे। कोविड ने दिया प्रकृति के प्रति श्रद्धा और सौहार्द्र का सबक राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोविड ने हम सबको यह सबक दिया है कि हमें सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति की विविधता के प्रति श्रद्धा और सौहार्द्र के साथ रहना होगा। हमारे ऋषि-मुनियों ने भी अपने तप त्याग और साधना से हजारों साल पहले ही इकोलॉजी तंत्र के संरक्षण के लिए प्राणियों में सद्भावना का संदेश दिया था। राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वन और वन्यजीवों का विशिष्ट स्थान रहा है। विभिन्न देवी-देवताओं के वाहन वन्यजीव है। अनेक विधि-विधानों में भी पेड़-पौधों की आराधना होती है। शपथ को अपने कार्य और व्यवहारों में शामिल करे राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के समापन अवसर पर उपस्थित जनों को वन्य जीव संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि आप सभी अपने कार्य, और व्यवहार में शपथ का 24 घंटे और 365 दिन पालन करे। आपका यह संकल्प वनों और वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा प्रयासों को जन आन्दोलन बनाने में योगदान देगा। इसे अपना कर्तव्य मानकर कार्य करे। राज्य मंत्री वन, दिलीप अहिरवार ने कहा कि वन्य जीव संरक्षण और कानूनों की जागरूकता में वन्य जीव सप्ताह की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा वन्य जीव संरक्षण, पुनर्वास, अपराध नियंत्रण आदि प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। राज्यपाल पटेल का तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के पोस्टर, मध्यप्रदेश सामान्य तितलियाँ पोस्टर, कान्हा के पक्षी पुस्तक, मध्यप्रदेश टाईगर फान्डेशन की वार्षिक रिपोर्ट, वन्य जीव संरक्षण पर आधारित प्रकाशन का विमोचन किया। एक से 7 अक्टूबर तक आयोजित हुए वन्य जीव सप्ताह के आयोजन का प्रतिवेदन प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही.के. अंबाडे ने प्रस्तुत किया। आभार संचालक वन विहार, मीना अवधेश कुमार शिवकुमार ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, मुख्य वन संरक्षक, वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और अधिकारी-कर्मचारी, वन्य जीव संरक्षण से जुड़े व्यक्ति, स्कूली बच्चें और उनके अभिभावक उपस्थित थे।   recent visitors 69

इजरायली सेना ने गाजा को खंडहर में बदल दिया, अब 42000 मौतें, इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है युद्ध

तेल अवीव इजरायल ने 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के बर्बर हमले की पहली बरसी पर 10 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. हमास ने पिछले साल 7 अक्टूबर के दिन इजरायल में अचानक धावा बोल दिया था. उसके लड़ाकों ने आसमान, जमीन और समुद्र के रास्ते इजरायल में घुसकर कत्लेआम मचाया था. इस हमले में 1200 से अधिक इजरायली नागरिकों की मौत हुई थी और हमास ने 250 से के करीब लोगों को बंधक बना लिया था, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं. हमास ने अपने इस हमले को ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड (Operation Al-Aqsa Flood) नाम दिया था. इजरायल ने इस बर्बरता का बदला लेने और हमास का अस्तित्व मिटाने की कसम खाई थी. उसने गाजा में ऑपरेशन आयरन स्वॉर्डस (Operation Iron Swords) चलाया. उसकी सेना ने गाजा को खंडहर में बदल दिया. पिछले एक साल के अंदर गाजा में इजरायली कार्रवाई में करीब 41000 मौतें हुई हैं, लाखों लोग गाजा से विस्थापित हुए हैं. इजरायल अब तक इस्माइल हानिया और मोहम्मद डेफ समेत हमास के कई शीर्ष नेताओं को ढेर कर चुका है. यह 2008 के बाद से फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष का पांचवां युद्ध है, और 1973 में योम किप्पुर युद्ध के बाद इस क्षेत्र में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है. हमार ने 7 अक्टूबर के हमले को बताया 'Glorious' गाजा पट्टी पर 2007 से हमास का शासन है और 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के बाद इजरायल की बदले की कार्रवाई में यहां बड़े पैमाने पर विनाश हुआ है. गाजा में बुनियादी ढांचे मलबे में तब्दील हो चुके हैं. एक वर्ष बीत जाने के बाद भी, गाजा युद्ध अनसुलझा है और पूरे क्षेत्र में युद्ध की संभावना अधिक बनती जा रही है. अपने कई शीर्ष नेताओं और कमांडरों के मारे जाने के हमास सक्रिय है. कतर स्थित हमास के सदस्य खलील अल-हया ने एक वीडियो संदेश जारी करके 7 अक्टूबर, 2023 के हमले को 'महान कार्य' बताया है. अल-हया ने 7 अक्टूबर के हमले की बरसी पर जारी अपने संदेश में कहा, 'पूरा फिलिस्तीन, विशेष रूप से गाजा और हमारे फिलिस्तीनी नागरिक दुश्मन के खिलाफ अपने प्रतिरोध के साथ एक नया इतिहास लिख रहे हैं.' इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है युद्ध हमास द्वारा 7 अक्टूबर, 2024 को किए गए हमले की पहली बरसी आने तक इजरायल कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है. अब उसका फोकस गाजा से लेबनान में शिफ्ट हो गया है. लेबनान के अलग-अलग हिस्सों में हिज्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए इजरायली सेना की जमीनी कार्रवाई और वायुसेना के हवाई हमले जारी हैं. गाजा में 41,000 से अधिक मौतों के बावजूद ऐसा लगता है कि यह हिंसा कभी खत्म नहीं होने वाली. इजरायली रक्षा बलों ने 5 अक्टूबर, 2024 को गाजा शहर के बगल में स्थित जबालिया में हमास लड़ाकों को खत्म करने के इरादे से एक और अभियान शुरू किया. इजरायल ने कहा कि हमास जबालिया में फिर सिर उठाने की कोशिश कर रहा था. अब भी 101 बंधकों के बारे में नहीं चल सका पता यह संभव है कि इजरायल के खिलाफ उसके दुश्मनों द्वारा एक और आतंकवादी हमला या सैन्य अभियान इलाके में संघर्ष की स्थिति को और भी भयावह बना सकता है. हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमले के दौरान जिन 250 लोगों को बंधक बनाया था, उनमें से 101 बंधकों का अब भी पता नहीं चल सका है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में इन बंधकों का जिक्र किया था. उन्होंने यह प्रतिबद्धता जाहिर की थी कि इजरायल आखिरी बंधक का पता लगाए बिना चैन से नहीं बैठेगा. गाजा में इजरायल का उद्देश्य हमास की सैन्य क्षमताओं और शासन को नष्ट करना और बंधकों को छुड़ाना है. अपने युद्ध को अंजाम तक पहुंचा पाएगा इजरायल? लेबनान के खिलाफ मोर्चा खोलने के पीछे इजरायल का लक्ष्य अपने उन 60,000 से अधिक नागरिकों को सीमा के पास अपने घरों में लौटने के लिए सुरक्षित महसूस कराना है, जिन्हें ​हिज्बुल्लाह के रॉकेट हमलों की जद में आने का डर सताता है. पिछले एक साल में इजरायल अपने दुश्मनों पर नकेल कसने में कामयाब रहा है, लेकिन अपने युद्धों को अंजाम तक पहुंचाने में सफल नहीं रहा है. इजरायली सैन्य अधिकारी भी यह स्वीकार करते हैं कि हमास और हिज्बुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने और उनकी सैन्य क्षमताओं को कुंद करने के बावजूद, ये दोनों मिलिशिया समूह फिलिस्तीन और लेबनान में एक ताकत बने रहेंगे. इस संघर्ष में ईरान की एंट्री से स्थिति और बिगड़ सकती है. इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यही समझ में आता है कि इजरायल को निकट भविष्य में भी युद्धों और संघर्षों के लिए तैयार रहना होगा.   recent visitors 74

विज्ञान और प्रौद्योगिकी से विकास की तेज राह में विश्व आगे बढ़ रहा है : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से विकास की तेज राह में विश्व आगे बढ़ रहा है, इसे सही दिशा देकर मानव कल्याण से जोड़ने के लिए समाज में सद्मूल्यों को विकसित करना होगा। विकास को वरदान बनाना है तो समाज में प्रेम, दया, करुणा, परोपकार और शांति की भावना को जागृत करना होगा। ब्रह्मकुमारी जैसे संस्थानों द्वारा जन-चेतना के लिए किये जा रहे कार्य सशक्त और समृद्ध भारत तथा वैश्विक खुशहाली के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल राजस्थान के माउंट आबू में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित "आध्यात्मिकता द्वारा स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज का निर्माण" वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित शिखर सम्मेलन के शुभारंभ सत्र में (4 अक्टूबर) राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शामिल हुई थीं। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में सपनों के भारत के निर्माण का चल रहा है महायज्ञ उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है आज भारत विश्व की 5 वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आगामी 5 वर्षों में हम तीसरी और वर्ष 2047 तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे। व्यापक स्तर पर तेज गति से विकास हो रहा है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने विकास के द्वार खोले हैं। नागरिकों को सक्षम बनाने के लिये उच्चस्तरीय शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। विकास की राह के हर पड़ाव में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सपनों के भारत के निर्माण का महायज्ञ चल रहा है। इस विकास को स्थायी बनाने के लिये मानव जाति का जागृत होना आवश्यक है। इसके लिये भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और आध्यमिकता का पुनरुत्थान करना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद कहते थे 21 वीं सदी भारत की होगी। भारत विश्वगुरु होगा। वर्तमान वैश्विक पारिस्थितियों में भारत का नेतृत्व नितांत आवश्यक है। आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास पर भी कार्य करना होगा। विकसित, समृद्ध और खुशहाल विश्व के निर्माण के लिये भारत की “वसुधैव कुटुंबकम्” की सोच पर सभी को चलना होगा। वैश्विक कल्याण के इस अहम दायित्व के निर्वहन के लिये आवश्यक है कि भारत का हर नागरिक सकारात्मक भूमिका निभाकर लोक-कल्याणकारी पुनीत यज्ञ में सहभागी बने। अच्छा मनुष्य बनकर ही स्वयं, समाज और विश्व का कल्याण किया जा सकता है सुनिश्चित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी कहते थे “आज मानव ने आकाश में पक्षी की तरह उड़ना सीख लिया है, मछली की तरह समुद्र में तैरना सीख लिया है लेकिन इंसान की तरह जमीन पर चलना नहीं सीख पाया।” उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वैश्विक कल्याण के लिये मानव मूल्यों को जागृत करना होगा। समाज को तोड़ने वाली शक्तियाँ कार्य कर रही हैं, परंतु ख़ुशी की बात है कि समाज को जोड़ने वाली, चिंतन करने वाली, वैश्विक कल्याण के भाव वाली संस्थाएँ और विचारक सतत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज विश्व ब्रह्मकुमारी जैसे संस्थानों को आशा भरी नज़रों से देख रहा है। यह वर्तमान पीढ़ी की ज़िम्मेदारी है आगामी पीढ़ी को भारत की समृद्ध संस्कृति और आध्यात्म से जोड़ने की दिशा में प्रयास करे। एक अच्छा मनुष्य बनकर ही स्वयं का, समाज का और विश्व का कल्याणकारी भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल को ब्रह्मकुमारी संस्थान के प्रतिनिधियों ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। ब्रह्मकुमारी के राजयोगी बृजमोहन, राजयोगिनी सुचन्द्रिका दीदी सहित 20 हजार से अधिक प्रतिभागी इस सम्मेलन में शामिल थे। recent visitors 70

खत्म हो गया बॉन्ड का चक्कर, राज्य सरकार का बड़ा कदम, काउंसलिंग के बाद भी छोड़ सकेंगे सीट

भोपाल  प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस में प्रवेश लेने जा रहे डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर है। अब काउंसलिंग के पहले दो चरण तक प्रवेश के बाद सीट छोड़ने पर उनके ऊपर सीट लीविंग बांड लागू नहीं होगा। मॉप-अप राउंड से यह प्रभावी होगा। पिछले सत्र तक दूसरे चरण में प्रवेश लेने के बाद सीट छोड़ने पर सीट लीविंग बांड लगता था। इसमें सरकारी कॉलेज में प्रवेश लेने वाले को 30 लाख रुपये और निजी कॉलेज वाले को पूरे पाठ्यक्रम की शुल्क बांड राशि के रूप में शासन को जमा करानी होती थी। अभ्यर्थी अच्छा कॉलेज या विषय मिलने के बाद भी त्यागपत्र नहीं दे पाते थे। एमबीबीएस में पहले ही यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि पिछले सत्र में प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पीजी की 1262 और निजी कॉलेजों में 830 सीटें थीं। इस वर्ष सरकारी और निजी दोनों कॉलेजों में कुछ सीटें बढ़ने के आसार हैं। प्रवेश नियमों में यह भी निर्धारित किया गया है कि अभ्यर्थियों को सिर्फ एक बार ही पंजीयन का अवसर दिया जाएगा। एमबीबीएस में दूसरी बार भी अवसर दिया था। एमडी-एमएस में प्रवेश के लिए दो अक्टूबर से पंजीयन प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई है। अभी जारी नहीं हुआ काउंसलिंग का कार्यक्रम हालांकि, अखिल भारतीय कोटे की सीटों का कार्यक्रम अभी तक जारी नहीं होने से चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने भी अभी काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी नहीं किया है। पहले चरण की काउंसलिंग में सीट आवंटन इसी माह होने के आसार हैं। MBBS and BDS: अब नहीं भरना होगा बॉन्ड मध्यप्रदेश सरकार ने ये ऐतिहासिक फैसला लिया है। आप चाहे सरकारी कॉलेज में एमबीबीएस बीडीएस में दाखिले ले रहे हों या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में, आपको सीट लीविंग बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं होगी। आने वाले सत्र से इसे लागू किया जाएगा। इस फैसले से सीधे सीधे 30 से 40 लाख रुपये तक की बचत हो सकेगी। क्योंकि किसी भी कारण से बीच में ही पढ़ाई छोड़ने पर आपको ये मोटी रकम नहीं भरनी होगी। Seat Leaving Bond क्या है? अब तक जो नियम हैं, उसके अनुसार MBBS Admission और BDS Admission के समय कॉलेज स्टूडेंट्स से एक बॉन्ड भरवाते हैं। इसमें ये लिखा होता है कि अगर छात्र/ छात्रा किसी भी कारण कोर्स पूरा नहीं करते हैं और बीच में ही कॉलेज छोड़ देते हैं, तो उन्हें एक निश्चित रकम कॉलेज को देनी होगी। ये रकम 5 लाख से 40 लाख रुपये तक.. बल्कि कई कॉलेजों में इससे ज्यादा भी होती है। इसी साल नेशनल मेडिकल कमीशन ने भी इस मामले में दखल दिया था। National Medical Commission ने 2024 की शुरुआत में कहा था कि 'हमारे पास आयोग के पास इस बॉन्ड को लेकर ढेर सारी शिकायतें आई हैं। ये बताती हैं कि हालात कितने गंभीर हैं। इस नियम के कारण स्टूडेंट्स स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन तक का शिकार हो रहे हैं। खासकर पीजी मेडिकल स्टूडेंट्स।' इसके मद्देनजर NMC ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मेडिकल कॉलेजं में सीट लीविंग बॉन्ड खत्म करने के लिए कहा था। recent visitors 90

रतन टाटा की तबीयत खराब, मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के ICU में हुए भर्ती

मुंबई जाने-माने उद्योगपति रतन टाटा की तबियत खराब है और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. टाटा संस के चेयरमैन ऐमिरेट्स रतन टाटा की आयु 86 वर्ष है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण आईसीयू में भर्ती कराया गया है.  उन्हें सोमवार की सुबह अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है. बता दें कि रतन टाटा को गंभीर हालत में रात 12:30 से 1:00 बजे के बीच अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनका ब्लड प्रेशर बहुत कम हो गया था और उन्हें तुरंत आईसीयू में ले जाया गया, जहां जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शारुख अस्पी गोलवाला की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है. 1962 में शुरू हुई असल कहानी 28 दिसंबर 1937 को तत्कालीन बॉम्बे जो अब मुंबई के नाम से जाना जाता है. वहां रतन टाटा का जन्म हुआ. वह टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के परपोते हैं. वे 1990 से 2012 तक समूह के अध्यक्ष थे और अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम अध्यक्ष थे. रतन टाटा समूह के धर्मार्थ ट्रस्टों के प्रमुख बने हुए हैं. टाटा की असल कहानी 1962 में शुरू हुई जब वे टाटा समूह में शामिल हुए. उन्होंने 1990 में समूह के अध्यक्ष बनने से पहले कई कार्य किए और धीरे-धीरे बिजनेस की सीढ़ी चढ़ते गए. उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने घरेलू और विदेश दोनों ही स्तरों पर पर्याप्त वृद्धि और विस्तार का अनुभव किया. टाटा की दूरदर्शिता और रणनीतिक सोच ने कंपनी को टेलीकॉम, रिटेल और ऑटो जैसे नए उद्योगों में विस्तार करने की अनुमति दी. सरकार ने किया सम्मानित टाटा की सबसे खास उपलब्धियों में से एक 2008 में जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण था, जो टाटा समूह के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था. परोपकार और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें भारत के दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित अनगिनत सम्मान दिलाए हैं. कैसा रहा रतन टाटा का करियर (Ratan Tata Profile) 28 दिसंबर, 1937 को बॉम्बे (अब मुंबई), भारत में जन्मे रतन टाटा, टाटा ग्रुप के फाउंडर जमशेदजी टाटा के परपोते हैं। वे 1990 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम चेयरमैन रहे। रतन टाटा ग्रुप के चैरिटी ट्रस्ट्स के प्रमुख बने हुए हैं। टाटा का करियर 1962 में शुरू हुआ जब वे टाटा ग्रुप में शामिल हुए। उन्होंने 1990 में चेयरमैन बनने से पहले ग्रुप में अलग-अलग पदों पर अपनी सेवाएं दीं। उनके कार्यकाल में, टाटा ग्रुप ने घरेलू और विदेशी दोनों ही लेवल पर शानदार ग्रोथ और विस्तार किया। क्या रही खास उपलब्धि टाटा की दूरदर्शिता और रणनीतिक सोच के जरिए ग्रुप टेलीकॉम, रिटेल और ऑटो जैसे नए सेक्टरों में दाखिल हुआ। टाटा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 2008 में जगुआर लैंड रोवर को खरीदना था, जो टाटा ग्रुप के इतिहास में एक अहम पल था। पद्म विभूषण से सम्मानित चैरिटी और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति रतन टाटा के समर्पण ने उन्हें अनगिनत सम्मान दिलाए हैं, जिनमें भारत के दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण और पद्म विभूषण भी शामिल हैं। अपने पूरे करियर के दौरान, रतन टाटा को उनके असाधारण लीडरशिप के लिए जाना जाता रहा है।   recent visitors 75

भोपाल में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 1800 करोड़ रुपयों से अधिक का नशीला पदार्थ जप्त

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की संयुक्त कार्रवाई में नशीले पदार्थ का उत्पादन करने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर लगभग नौ क्विंटल एमडी (मेफेड्रोन) और अन्य सामान जप्त करने के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि नशे के खिलाफ हर कार्रवाई में राज्य सरकार सभी केंद्रीय एजेंसियों और प्रदेश सरकारों के सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ यादव ने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के सोशल मीडिया एक्स पर भोपाल के पास नशे की एक फैक्ट्री के खुलासे के संबंध में किए गए पोस्ट बाद सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी। डॉ यादव ने संघवी की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कल रात लिखा, “नशे के खिलाफ हर कार्रवाई में मध्यप्रदेश सरकार सभी केंद्रीय एजेंसियों और प्रदेश सरकारों के सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।” डॉ यादव ने एक अन्य पोस्ट में संघवी की ओर से उन्हें (मुख्यमंत्री डॉ यादव को) लिखे गए पत्र की प्रति पोस्ट करते हुए लिखा है, “प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर नशे के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है, जिसमें अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई भी शामिल है। इसी क्रम में गुजरात एटीएस एवं एनसीबी दिल्ली द्वारा की गयी कार्रवाई में मध्यप्रदेश पुलिस ने भी तत्परता के साथ सहयोग किया है। जिसके तहत सभी दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध मध्यप्रदेश के मार्ग में बाधा बनने वाली किसी भी अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। माननीय हर्ष संघवी जी आपका हृदय से आभार।” इसके पहले संघवी ने कल शाम सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, “गुजरात एटीएस तथा एनसीबी दिल्ली द्वारा भोपाल में की गयी संयुक्त कार्रवाई के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस के द्वारा सराहनीय मदद की गयी। ऑपरेशन की सफलता में मध्यप्रदेश पुलिस के अमूल्य योगदान के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ। इस ऑपरेशन की आगे की इन्वेस्टीगेशन में भी मध्यप्रदेश पुलिस गुजरात एटीएस की निरंतर मदद कर रही है। इस तरह के विभिन्न राज्यों तथा केंद्रीय एजेंसीज़ के समन्वित प्रयासों से ही नार्कोटिक्स के विरुद्ध की लड़ाई को जीता जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी एवं उनकी समस्त टीम का बहुत-बहुत आभार।’’ संघवी की ओर से मुख्यमंत्री डॉ यादव को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है, जिसमें मध्यप्रदेश पुलिस की “सराहनीय मदद” का जिक्र किया गया है। दूसरी ओर भोपाल पुलिस आयुक्त की ओर से सोशल मीडिया के जरिए कहा गया कि मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश पर भोपाल पुलिस मादक पदार्थों के विरुद्ध लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत ऑपरेशन अंकुश चलाया गया है, जिसमें अब तक 55 आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर 13 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जप्त किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भोपाल के पास फैक्ट्री के भंडाफोड़ मामले में भोपाल पुलिस के सहयोग से मंदसौर पुलिस एवं गुजरात पुलिस द्वारा एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। इसके पहले संघवी ने इस सिलसिले में कल दिन में सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी। संघवी ने अपनी पोस्ट में कहा कि गुजरात एटीएस और एनसीबी दिल्ली ने अपने संयुक्त अभियान में ड्रग्स (मादक पदार्थों) के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की है। हाल ही में इन दोनों एजेंसियों ने एक संयुक्त अभियान के तहत भोपाल में एक कारखाने पर छापामार कार्रवाई की, जिसके बाद वहां से लगभग 1814 करोड़ रुपए की एमडी (एक प्रकार का मादक पदार्थ) और उसके निर्माण में उपयोग आने वाला सामान जब्त किया गया। संघवी के पोस्ट के बाद राजधानी भोपाल के विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप में भोपाल पुलिस और राज्य सरकार को लक्ष्य करके अनेक टिप्पणियां की जाने लगीं और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार को निशाने पर ले लिया। सोशल मीडिया में कहा गया कि भोपाल के पास इतनी बड़ी फैक्ट्री चलती रही और पुलिस को इसका पता ही नहीं चला। इसके अलावा गुजरात पुलिस कार्रवाई करके भी चली गयी और इसकी भनक तक पुलिस को नहीं लगी। रविवार रात को यहां सूत्रों ने बताया कि भोपाल के पास औद्योगिक क्षेत्र बगरौदा में एक फैक्ट्री पर छापे की कार्रवाई शनिवार को की गयी। इस दौरान दो युवकों को हिरासत में लिया गया और फैक्ट्री स्थल से बड़ी मात्रा में एमडी तरल और ठोस अवस्था में जप्त किया गया। बताया गया है कि इस फैक्ट्री में प्रतिदिन कई किलो एमडी बनायी जा रही थी और यह कार्य कई दिनों से चल रहा था। यह नशीला पदार्थ कहां पर सप्लाई किया जा रहा था, इस बारे में अब तक ठोस जानकारी नहीं आयी है, लेकिन माना जा रहा है कि यह पदार्थ मध्यप्रदेश के बाहर भेजा जा रहा था। सूत्रों ने इस घटनाक्रम को लेकर हुयी प्रारंभिक छानबीन के हवाले से कहा कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से एक महाराष्ट्र का और एक अन्य मध्यप्रदेश का ही निवासी है। महाराष्ट्र निवासी आरोपी ड्रग तस्करी के मामले में पहले भी जेल जा चुका है। इन दोनों ने कथित तौर पर भोपाल के पास बगरौदा औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री कुछ दिनों पहले किराए पर ली और यहां पर एमडी का उत्पादन किया जाने लगा। इस संबंध में और जानकारी अभी आना शेष है। वहीं संयुक्त दल ने रविवार शाम को स्थानीय पुलिस की मदद से मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले से भी एक व्यक्ति को हिरासत में लिया।   recent visitors 68

शेयर बाजार की आज मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 400 अंक उछला, निफ्टी 25,100 के ऊपर

 मुंबई भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त क साथ खुले.इसके पीछे की वजह यह है कि एशियाई बाजारों में बढ़त के कारण वैश्विक बाजारों में सेंटीमेंट कुछ हद तक स्थिर हुआ, क्योंकि  इज़राइल और ईरान के बीच हालात थोड़े शांत हैं. बाजार खुलते ही लगभग 9:17 बजे बीएसई सेंसेक्स 412 अंकों यानी 0.50 प्रतिशत की बढ़त के साथ 82,100 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 में 121 अंकों यानी 0.48 प्रतिशत की तेजी आई और यह  25,135 पर पहुंच गया. पिछले सप्ताह, निफ्टी 50 और एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स दोनों का प्रदर्शन  पिछले दो साल से अधिक समय में सबसे खराब  रहा . मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट पर देखा गया. शुक्रवार का बाजार कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ रेड जोन में बंद हुआ. बीएसई पर सेंसेक्स 801 अंकों की गिरावट के साथ 81,688.45 पर क्लोज हुआ. वहीं, एनएसई पर निफ्टी 0.93 फीसदी की गिरावट के साथ 25,014.60 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एनएसई पर एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, नेस्ले इंडिया, हीरो मोटोकॉर्प, एशियन पेंट्स शेयर टॉप गेनर के लिस्ट में शामिल रहे. जबकि इंफोसिस, ओएनजीसी, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ के शेयर टॉप लूजर के लिस्ट में शामिल रहे. पीएसयू बैंक और आईटी को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए, जिसमें ऑटो, एफएमसीजी, रियल्टी, पावर, मीडिया, टेलीकॉम, ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1-2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5-0.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. पिछले सप्ताह दलाल स्ट्रीट के निवेशकों को 15 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. केवल पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 4,000 अंक टूट गया. ईरान-इजरायल युद्ध और चीन के प्रोत्साहन पैकेज के दोहरे झटके ने भारतीय शेयर बाजार पर मंदी का असर देखने को मिल रहा. कुछ ही मिनटों में 82000 के पार सेंसेक्स शेयर मार्केट (Stock Market) में बीते पांच दिनों से जारी गिरावट पर सोमवार को ब्रेक लगा नजर आया और पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स-निफ्टी जोरादार तेजी के साथ भागे. बीते सप्ताह के आखिरी दो कारोबारी दिनों में बाजार ने बड़ी गिरावट देखी थी. एक ओर जहां गुरुवार को सेंसेक्स 1769 अंक फिसला था, तो वहीं शुक्रवार को इसमें 808 अंकों की बड़ी गिरावट आई थी. लेकिन सोमवार को BSE Sensex अपने पिछले बंद 81,688.45 की तुलना में 239 अंक की बढ़त के साथ 81,926.99 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में ये 400 अंकों से ज्यादा की उछाल के साथ 82,137.77 के स्तर पर पहुंच गया. Nifty ने भी मारी लंबी छलांग सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी भी ग्रीन जोन पर ओपन हुआ. Nifty ने अपने पिछले बंद 25,014.60 की तुलना में चढ़कर 25,084 के लेवल पर कारोबार की शुरुआत की और अचानत इसमें भी जोरदार तेजी आई और ये इंडेक्स 120.90 अंकों की उछाल मारते हुए 25,143 के लेवल पर पहुंच गया. गौरतलब है कि बीते सप्ताह के आखिरी दो कारोबारी दिनों में Nifty-50 में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. जहां गुरुवार को ये 546 अंक फिसला था, तो वहीं शुक्रवार को इसमें 235 अंकों की गिरावट आई थी. इन 10 शेयरों ने खुलते ही पकड़ी शेयर मार्केट में जारी तेजी के बीच मार्केट ओपन होने पर जो शेयर शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी के साथ भागे, उनमें लार्जकैप कंपनियों में शामिल ITC Share 1.89%, Kotak Bank Share 1.50%, ICICI Bank Share 1.30% चढ़ा. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में शामिल शेयरों की बात करें, तो Mphasis Share 3.54%, AUBank Share 2.64% और Godrej Properties Share 1.50% की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. स्मालकैप कैटेगरी में शामिल Heidelberg Share में खुलते ही 13.91% की तेजी देखने को मिली, तो DBCorp Share 9.15% की उछाल के साथ कारोबार करता हुआ नजर आया. फार्मा कंपनी  AstraZen Share 7.22% तक उछलकर 7969.05 रुपये के लेवल पर पहुंच गया. इसके अलावा Senco Gold के शेयर में 5.69% की तेजी आई और ये 1484.35 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था.   recent visitors 77