रानी दुर्गावती को जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है

भोपाल वीरांगना रानी दुर्गावती महिला शासकों के भारतीय स्वर्णिम इतिहास का एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। रानी दुर्गावती ने 16वीं शताब्दी में गोंडवाना राज्य की शासक के रूप में अपने साहस और नेतृत्व के लिए ख्याति प्राप्त की। उनकी जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रानी ने एक संतुलित, न्यायपूर्ण और विकासात्मक प्रणाली के रूप में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए गोंडवाना को एक मजबूत और समृद्ध साम्राज्य बनाया। वीरांगना रानी दुर्गावती के शासन में गोंड संस्कृति ने देश की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है। उन्होंने अपनी पारंपरिक प्रथाओं से पर्यावरण के संवर्धन और संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज़ादी के प्रति असीम प्रेम और किसी की अधीनता स्वीकार न करने की जिद और जुनून गोंड समाज की पहचान रही है। रानी दुर्गावती गोंड समुदाय के पराक्रम, भारतीय वीरता और शूरता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार न करने वाली रियासतों के लिए मुगल काल में सुरक्षित रहना बहुत कठिन माना जाता था, क्योंकि विशाल मुगल सेना के सामने युद्ध भूमि में सामना करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में गोंडवाना साम्राज्य की संरक्षिका के रूप रानी दुर्गावती के कार्य एवं अपूर्व वीरता के साथ राज्य के विकास में किया गया अभूतपूर्व योगदान सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। रानी दुर्गावती के कार्यों और वीरता का गुण-गान आज भी जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न बोलियों और कई भाषाओं में किया जाता है, जो भावी पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्पद है। रानी दुर्गावती का संघर्ष मुगलों के खिलाफ था और वे जनजातीय संस्कृति और विरासत की सुरक्षा के प्रति कृत-संकल्पित थीं। उन्होंने मुगलों के खिलाफ एक सशक्त प्रतिरोध का आधार तैयार किया, जिसने देश के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले राजा-महाराजा और अधीनता स्वीकार न करने वाले अनेक समूहों को मुगल सत्ता के खिलाफ लगातार लड़ने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान जबलपुर उनके साम्राज्य का केंद्र था। रानी ने करीब 16 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने अपने कार्य-काल में अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ियां तथा धर्मशालाएं बनवाईं। लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए रानी की कीर्ति दूर-दूर तक फ़ैल गई। रानी दुर्गावती के गढ़ मंडला पर मुगल सूबेदार बाजबहादुर की बुरी नजर थी, लेकिन युद्ध में रानी दुर्गावती ने उसकी पूरी सेना का सफाया कर दिया और फिर वह कभी पलटकर नहीं आया। मुगल सेना के कई हमलों को नाकाम करने वाली रानी दुर्गावती का खौफ दिल्ली की मुगल सत्ता को भी प्रभावित करने लगा। रानी दुर्गावती को अपनी रणनीतिक योग्यता, पारम्परिक सैन्य संसाधन और सैन्य शक्ति पर इतना विश्वास था कि वे विशाल मुगल सेना से कभी विचलित नहीं हुईं। रणक्षेत्र में रानी ने मुगलों की अपेक्षा में बेहद छोटी सेना होने के बाद भी असीम वीरता का परिचय दिया। इस कारण मुगल सेना युद्ध मैदान से भाग खड़ी हुई। रानी दुर्गावती ने मुगलों के खिलाफ अपनी भूमि की रक्षा के लिए जिस अद्वितीय साहस का परिचय दिया, वह भारत की मातृशक्ति के पराक्रम, शौर्य और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। रानी दुर्गावती को भारतीय इतिहास की सर्वाधिक प्रसिद्ध महारानियों और बेहतर प्रशासकों में शुमार किया जाता है। उन्होंने जिस कुशलता से राज संभाला, उसकी प्रशस्ति इतिहासकारों ने भी की है। आईन-ए-अकबरी में अबुल फ़ज़ल ने लिखा है कि "दुर्गावती के शासनकाल में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा लगान की अदायगी-स्वर्ण मुद्राओं और हाथियों से करती थी।" रानी दुर्गावती ने गोंडवाना की स्थिरता, विकास तथा कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रभावी न्याय प्रणाली की स्थापना की। उन्होंने स्व-शासन को बढ़ावा देते हुए गांवों को मजबूत किया, जिससे किसान खुशहाल हुए। रानी दुर्गावती ने कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। उन्होंने कृषि सुधारों और सिंचाई योजनाओं को लागू किया, जिससे खाद्य उत्पादन बढ़ा। रानी दुर्गावती ने शिक्षा और संस्कृति के विकास पर अधिक जोर दिया। उन्होंने साहित्य, कला और संगीत को प्रोत्साहित किया, जिससे गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिला। रानी दुर्गावती की नेतृत्व क्षमता, साहस और बलिदान, राजनैतिक समझ, सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के कार्य, सांस्कृतिक समृद्धि और राज्य में स्थिरता बनाये रखने की कोशिशें अतुलनीय थी। जन-कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता और मातृभूमि की सुरक्षा के संकल्प ने रानी दुर्गावती को एक महान नेतृत्वकर्ता और शासक के रूप में इतिहास में अमर बना दिया। उनका जीवन और न्यायपूर्ण शासन आज भी प्रेरणा का ऊर्जा स्रोत है।   recent visitors 91

छत्‍तीसगढ़ में राज्य स्थापना दिवस पर स्कूल-कॉलेज और सरकारी कर्मियों की रहेगी छुट्टी, एक नवंबर को अवकाश की घोषणा

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर, शुक्रवार को प्रदेश में स्थानीय अवकाश घोषित किया है। इस दिन प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में छुट्टी रहेगी। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि 1 नवंबर को सभी सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में अवकाश रहेगा। हालांकि, यह अवकाश बैंकों और कोषालयों पर लागू नहीं होगा, वहां सामान्य कामकाज जारी रहेगा। राज्योत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राज्य सरकार ने 5 नवंबर को जिलास्तरीय एकदिवसीय राज्योत्सव मनाने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा, राजधानी रायपुर में मुख्य राज्योत्सव समारोह 4 या 5 नवंबर को आयोजित किया जा सकता है। मुख्य आयोजन की तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी। स्थापना दिवस की महत्ता 1 नवंबर का दिन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन 2000 में राज्य का गठन हुआ था। राज्य स्थापना दिवस पर हर साल विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाता है। इस वर्ष भी राज्योत्सव का आयोजन पूरे जोश और उत्साह के साथ किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के विकास, समृद्धि और संस्कृति को सम्मानित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दे दिए हैं। recent visitors 117

नवरात्रि में झूमेंगे बाजार होगा 50 हजार करोड़ से अधिक का व्यापार

मुंबई देश में  नवरात्र का त्योहार प्रारंभ हो गया है। 10 दिन चलने वाले नवरात्रि फेस्टिवल का जहां धार्मिक महत्व है, वहीं इसके चलते जो कारोबार होगा, उससे अर्थव्यवस्था को भी पंख लग जाएंगे। यानी अर्थव्यवस्था में अच्छा खासा उछाल देखने को मिलेगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री और दिल्ली की चांदनी चौक सीट से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली सहित देश भर में अगले एक महीने तक त्योहारों की धूम रहेगी। 10 दिन के नवरात्र एवं रामलीला, डांडिया एवं गरबा उत्सवों से 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होगा। दिल्ली में ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये के व्यापार होने की उम्मीद है।   खंडेलवाल के मुताबिक, नवरात्रि, रामलीला, गरबा तथा डांडिया जैसे उत्सव, जो हर वर्ष देश भर में दस दिन तक मनाए जाते हैं, इनके चलते इस बार देशभर में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। एक अनुमान के अनुसार, अगले दस दिनों में देश भर में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने की संभावना है। अकेले दिल्ली में ही लगभग 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होगा। इन उत्सवों के दौरान बाजारों में रौनक बढ़ने की उम्मीद है। जहां एक तरफ व्यापारियों को काफी फायदा होगा तो वहीं दूसरी ओर, लाखों लोगों को अस्थायी रोजगार भी मिलेगा। पिछले वर्ष दस दिन का यह व्यापार लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का था। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री खंडेलवाल ने बताया कि त्योहारों में खरीदी की विशेष बात यह है कि बिक्री किए जाने वाले अधिकांश उत्पाद, भारतीय ही होंगे। अब लोगों का चीन से बने सामानों से मोहभंग हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 'वोकल फॉर लोकल' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान ने देश भर में भारतीय सामानों की गुणवत्ता को बढ़ाया है। भारत में बना सामान, अब किसी भी विदेशी सामान से बेहतर है। यही कारण है कि उपभोक्ताओं का रुझान अब भारतीय वस्तुओं की खरीदी पर ही है। देश भर में नवरात्र, रामलीला, गरबा एवं डांडिया जैसे 1 लाख से अधिक छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम शामिल हैं। बड़े पैमाने पर देश भर में भक्ति संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इन उत्सवों के जरिए लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। नवरात्र के समापन पर विजयदशमी, दुर्गा विसर्जन, करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, भाई दूज, छठ पूजा एवं तुलसी विवाह के बाद ही त्योहारों की यह श्रृंखला समाप्त होगी। अकेले दिल्ली में छोटी बड़ी लगभग एक हजार से अधिक रामलीलाएं आयोजित की जाती हैं। दुर्गा पूजा के लिए सैकड़ों पंडाल लगते हैं। मूल रूप से गुजरात में होने वाले डांडिया और गरबा के कार्यक्रम बड़े पैमाने पर अब दिल्ली सहित देश भर में आयोजित होने लगे हैं। करोड़ों लोग त्योहारों की खुशियां मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि त्योहार मनाने से घरों में सौभाग्य एवं संपन्नता का वास होता है। खंडेलवाल ने बताया, इस त्योहारों के सीजन में कपड़े एवं परिधान खासकर पारंपरिक परिधान जैसे साड़ी, लहंगा, और कुर्ते की मांग नवरात्र और रामलीला के दौरान काफी बढ़ती है। पूजा और धार्मिक आयोजनों के लिए लोग नए कपड़े खरीदते हैं। इसके चलते इस श्रेणी में व्यापार में उछाल देखने को मिलता है। बड़े पैमाने पर पूजा सामग्री की मांग भी होती है। पूजन के लिए आवश्यक वस्तुएं जैसे फल, फूल, नारियल, चुनरी, दीपक, अगरबत्ती और अन्य पूजन सामग्रियों की भारी मांग रहती है। खाद्य एवं मिठाई अन्य वस्तुएं हैं, जिनको त्योहारों के दौरान लोग खरीदते हैं। हलवा, लड्डू, बर्फी और अन्य मिठाइयों की खपत इस दौरान बढ़ जाती है। बड़ी मात्रा में फलों और फूलों की भी मांग रहती है। त्योहारों में घर और पूजा पंडालों को सजाने के लिए साज-सज्जा के सामान, जैसे दीयों, बंदनवार, रंगोली सामग्री और लाइटिंग की मांग बढ़ती है। नवरात्र और रामलीला उत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी होते हैं। खंडेलवाल ने कहा कि इन दस दिनों में पंडाल बनाने के लिए टेंट हाउस, सजाने के लिए सजावटी कंपनियां आदि को खूब काम मिलता है। इस मौके पर देश भर में बड़ी मात्रा में मेले तथा उत्सव संबंधी हजारों आयोजन होते हैं। इनमें लाखों लोग भाग लेते हैं। खंडेलवाल ने कहा, यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता और व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करते हैं। recent visitors 108

प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने कहा- महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए ‘डिजिटल कुंभ संग्रहालय’ बनाने की तैयारी कर रहा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले साल आयोजित होने वाले महाकुंभ को भव्य बनाने के लिए सरकार जल्द डिजिटल कुंभ संग्रहालय बनाएगी। प्रदेश के पर्यटन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया कि पर्यटन विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विचार के अनुरूप प्रयागराज में ‘डिजिटल कुंभ संग्रहालय’ बनाने की तैयारी कर रहा है। यहां श्रद्धालु डिजिटल माध्यमों से समुद्र मंथन देख सकेंगे। इसके अलावा, कुंभ, महाकुंभ सहित अन्य धार्मिक-आध्यात्मिक स्थलों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि डिजिटल कुंभ संग्रहालय के लिए 21.38 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से छह करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। लगभग 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस संग्रहालय में एक साथ 2000 से 2500 लोग भ्रमण कर सकेंगे। सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत डिजिटल संग्रहालय में समुद्र मंथन की 14 रत्नों वाली गैलरी बनाई जाएगी। डिजिटल माध्यम से समुद्र मंथन के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। डिजिटल स्क्रीन सहित अन्य माध्यमों से प्रयागराज महाकुंभ-कुंभ, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन कुंभ आदि के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसके अलावा, लैंडस्केपिंग विकसित की जाएगी। टिकट काउंटर भी बनाया जाएगा। पर्यटन मंत्री ने बताया कि श्रद्धालु अगर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के वनवास के समय उनके प्रवास स्थल यानी चित्रकूट के दर्शन करना चाहते हैं तो इसके लिए ‘चित्रकूट टूरिज्म ऐप’ तैयार किया गया है। इस मोबाइल ऐप्लीकेशन पर दर्शनीय स्थलों का नाम, महत्व, दर्शन के समय समेत समग्र जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐप्लीकेशन में ‘फेस्टिवल और इवेंट’ पर क्लिक करने पर महाकुंभ, चित्रकूट महोत्सव, रामनवमी, राष्ट्रीय रामायण मेला आदि की विस्तार से जानकारी मिलेगी। साथ ही, महाकुंभ में विशेष स्नान की तिथियां, महत्व आदि के बारे सूचना दी गई है।   recent visitors 61

Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहनों को नवरात्रि पर मिलेगी बड़ी खुशखबरी, तारीख हुई घोषित, आ गया अपडेट!

भोपाल  मध्यप्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए फिर खुशखबरी आ रही है। इस बार अक्टूबर में बहुत सारे त्यौहार पड़ रहे है, जिनको लेकर प्रदेश की लाड़ली बहनें काफी उत्साहित है। इसी खुशी को दोगुना करेगी लाड़ली बहना योजना की 17 वीं किस्त।  बता दें कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई एक बड़ी योजना है। इसके तहत हर महीने की 10 तारीख 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों को 1250 रुपए दिए जाते है। लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी। कब आएगी 17 वीं किस्त जानकारी के लिए बता दें कि 17 वीं किस्त दशहरे से पहले आने वाली है। वैसे तो ये किस्त 10 अक्टूबर को जारी की जाएगी। इसके तहत फिर 1.29 करोड़ लाभार्थी बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे। इससे पहले सागर से सीएम मोहन यादव ने 9 सितंबर को 16वीं किस्त के 1574 करोड़ रुपए जारी किए थे। वहीं दूसरी ओर माना ये भी जा रहा है कि इस बार भी नवरात्रि को देखते हुए अक्टूबर में समय से पहले किस्त जारी हो सकती है। इस बारे में सीएम अपने बयान में कई बार कह चुके है कि हर महीने की 10 तारीख को बहनों के बैंक खाते में राशि जमा हो जाएगी और यदि छुट्टी अथवा अन्य किसी कारण से ऐसा संभव नहीं हुआ तो पहले जमा हो जाएगी। इससे पहले सितंबर में 10 की बजाय किस्त 9 सितंबर जारी की गई थी। हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लाडली बहना योजना 17 किस्त का पैसा कब आएगा? सभी महिलाओं का इंतजार जल्द समाप्त होने वाला है, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में 17वीं किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जाने वाला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा निर्धारित समय पर किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है जिसमें 10 अक्टूबर 2024 तक बहनों के बैंक खाते में 1250 रुपए की राशि स्थानांतरित कर दी जाएगी। लाडली बहना योजना 17 किस्त मैं कितना पैसा मिलेगा? लाडली बहनों के लिए लगातार किस्तों में पैसा प्रदान किया जा रहा है। उसी प्रकार आगे आने वाली किस्त में महिलाओं के लिए कितना पैसा मिलेगा यह जानकारी तलाश कर रही महिलाओं के लिए काफी अच्छा मौका प्रदान किया जा रहा है। बता दें मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा बहुत जल्द महिलाओं के लिए ₹1500 प्रतिमाह देने की घोषणा की जाने वाली है। यदि आप भी इस योजना से पंजीकृत महिला है, तो आपके लिए 17वीं किस्त में 1250 रुपए मिलने वाले हैं। लेकिन मोहन यादव जी द्वारा कोई नया अपडेट जारी करते हुए आपकी किस्त में इजाफा किया जा सकता है। लाडली बहना योजना 17वीं किस्त न्यू अपडेट 2024 मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में कई प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया गया है और महिलाओं को लाभ दिलाया जा रहा है। यदि आप भी 17वीं किस्त का इंतजार कर रही महिला है तो यहां पर काफी बड़ा अपडेट सामने आया है। अपडेट के मुताबिक बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए किस्त मिलने की डेट से कुछ दिन पहले पैसा दिए जाने की उम्मीद है तो आपके लिए केवल इंतजार करना होगा, कुछ ही दिनों पश्चात आपके बैंक खाते में 1250 रुपए की राशि ट्रांसफर होने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और आपको यह पैसा मिल सकेगा। लाडली बहना योजना तीसरा चरण कब शुरू होगा? मध्य प्रदेश की लाखों महिलाएं लाडली बहन योजना से वंचित है यदि आप पात्र होकर ऐसी योजना से लाभ नहीं ले पा रही है तो आपके लिए काफी अच्छा मौका अक्टूबर 2024 में मिलने की उम्मीद बताई जा रही है। मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव जी द्वारा बहनों के लिए किस्त का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। उसके साथ ही ऐलान किया जा सकता है कि महिलाओं के लिए फिर से आवेदन का मौका मिले और वह सभी महिलाएं जो कि इस योजना से लाभ नहीं ले पा रही है वह लाभ उठा सके। लाडली बहना योजना 17 किस्त 2024 स्थिति कैसे देखें? लाडली बहना योजना के तहत किस्त की स्थिति देखने हेतु आपको दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा, जो कुछ इस प्रकार है:-     सबसे पहले लाडली बहना योजना का पोर्टल खोलें।     होम पेज पर जाएं।     यहां पर आवेदन की स्थिति विकल्प का चयन करें।     समस्त जानकारी जो की मांगी जा रही है वह दर्ज करते हुए सबमिट करें।     सबमिट करते ही समस्त किस्तों का विवरण एवं आने वाली किस्त से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित हो जाएगी। मध्य प्रदेश में बहनों का इंतजार जल्द समाप्त होने वाला है क्योंकि आगे आने वाली किस्त का पैसा महिलाओं के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यदि आप इस योजना से पंजीकृत महिला है, तो आपके बैंक खाते में जल्द पैसा ट्रांसफर होने वाला है, जिसकी पूरी अपडेट आपके लिए यहां पर दी जा चुकी है अधिक जानकारी आपके लिए नवीनतम खबरों के माध्यम से प्रदान कर दी जाएगी। recent visitors 56

देश में फेफड़ा ट्रांसप्लांट में महिलाओं की संख्या पुरुषों के बराबर, अंग दान करने वालों में 63 प्रतिशत महिलाएं

भोपाल आज से नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं। नौ दिन तक अलग-अलग रूप में देवी की शक्ति के रूप में आराधना की जाएगी। ऐसी ही हमारे देश की नारी शक्ति है जो समर्पण का अप्रतिम उदाहरण बन रही है। नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नोटो) द्वारा जनवरी से दिसंबर, 2023 के बीच देशभर में हुए अंग दान और अंग प्रत्यारोपण के आंकड़े इसका प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं। कुल किडनी प्रत्यारोपण करवाने वालों में महिलाएं 37 प्रतिशत, लिवर में 30 प्रतिशत, हार्ट में 24 प्रतिशत और पैंक्रियाज में 26 प्रतिशत हैं। फेफड़ा ट्रांसप्लांट में जरूर महिलाओं की संख्या लगभग पुरुषों के बराबर है। बता दें, देश में वर्ष 2013 में 4,990 अंग दान हुए थे जो लगातार बढ़ते हुए 2023 में 18,378 हो गए हैं। दिल्ली सबसे आगे वर्ष 2023 में जीवित व्यक्ति के अंग दान के बाद प्रत्यारोपण के मामले में सबसे आगे दिल्ली रहा। यहां 4,275 अंग प्रत्यारोपित हुए। इसके बाद तमिलनाडु में 1,833, महाराष्ट्र में 1,493, केरल में 1,376 और बंगाल में 1,021 अंग प्रत्यारोपित हुए। ब्रेन डेथ लोगों के अंग दान के मामले में सबसे आगे तेलंगाना है। हालांकि, इनके अंगों के प्रत्यारोपण तमिलनाडु में सर्वाधिक 595 किए गए। इसके बाद क्रमश: तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात हैं। जिन राज्यों में प्रत्यारोपण की सुविधाएं कम हैं वे पिछड़े हैं। मध्य प्रदेश में अब तक कुल 60 ब्रेन डेथ अंग दान हुए हैं। दो तरह से होता है अंग दान ब्रेन स्टेम डेथ अंग दान जब व्यक्ति का ब्रेन काम करना बंद कर देता हैं पर हृदय कुछ देर तक काम करता रहता है। उस अवस्था में छह अंग (हार्ट, लिवर, किडनी, फेफड़ा, पैंक्रियाज और छोटी आंत) दान किए जा सकते हैं। लिविंग अंग दान जब जीवित व्यक्ति अंग दान करता है तो उसे लिविंग अंग दान कहा जाता है। जैसे एक किडनी या फिर लिवर का अंश। महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा भावुक     लिविंग अंग दान में महिलाओं द्वारा पुरुषों से अधिक अंग दान किए जाने की वजह सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक है। आमतौर पर पुरुष कामकाजी होते हैं। ऐसे में परिवार के अधिकतर लोगों की धारणा रहती है यदि महिला की किडनी मिलान हो रही है तो किसी पुरुष की नहीं ली जाए। महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा भावुक होती हैं। वह न केवल सहजता से अंग दान के लिए तैयार होती हैं, बल्कि देने के लिए जिद भी करती हैं। सामाजिक पक्ष यह है कि जब अंग लगाकर उनकी जान बचाने की बात आती है तो कई बार वे खुद किसी स्वजन का अंग लेने से मना कर देती हैं या फिर स्वजन उनके उपचार में कम गंभीरता दिखाते हैं।  – डॉ. राकेश भार्गव, सदस्य, अंगदान राज्य प्राधिकार समिति   recent visitors 103

इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं

 दमिश्क हाल ही में लेबनान में एक इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की मौत के बाद, इराक में नवजात बच्चों के नाम "नसरल्लाह" रखने का एक नया चलन देखने को मिला है। इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश भर में लगभग 100 बच्चों का नाम नसरल्लाह रखा गया है। नसरल्लाह पिछले तीन दशकों से आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का नेतृत्व कर रहा था। उसे कई लोगों द्वारा इजरायली और पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता था। उनकी लोकप्रियता इराक में विशेष रूप से देश के अधिकांश शिया समुदाय के बीच मजबूत थी। अब इराक के लोग नसरल्लाह की याद में अपने बच्चों का नाम भी नसरल्लाह ही रख रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे ऐसा "प्रतिरोध के शहीद के सम्मान में" कर रहे हैं। नसरल्लाह की हत्या ने इराक में गुस्से की लहर पैदा कर दी, जिसके परिणामस्वरूप बगदाद और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने नसरल्लाह को "धर्म के मार्ग पर एक शहीद" बताया। हिजबुल्लाह नेता की याद में तीन दिन का राजकीय शोक मनाया गया, जिसमें देश भर में श्रद्धांजलियां आयोजित की गईं। नसरल्लाह का इराक से गहरा संबंध है, जो धार्मिक और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़ा है। उसका जन्म 1960 में साधारण परिवार में हुआ था, और उसने इराक के नजफ शहर में एक शिया सेमिनरी में इस्लाम की पढ़ाई की थी। यहीं पर उसके राजनीतिक विचारों ने आकार लिया। 1982 में इजरायल के लेबनान में आक्रमण के बाद, हिजबुल्लाह का जन्म हुआ और नसरल्लाह इसमें शामिल हुआ। इस समूह की स्थापना ईरान की क्रांतिकारी गार्ड्स के समर्थन से की गई थी, जो प्रारंभ में इजरायली बलों के खिलाफ एक मिलिशिया के रूप में कार्यरत था। 1992 में अपने पूर्ववर्ती और गुरु अब्बास मुसावी की हत्या के बाद नसरल्लाह ने हिजबुल्लाह का नेतृत्व संभाला। अगले तीन दशकों में, उसने इस समूह को एक क्षेत्रीय शक्ति में बदल दिया, जो सीरिया से यमन तक के संघर्षों पर प्रभाव डाल रहा था और गाजा में फलस्तीनियों को प्रशिक्षण दे रहा था। नसरल्लाह के नेतृत्व में, हिजबुल्लाह की शक्ति ने सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर वृद्धि की। इस संगठन ने हमास जैसे समूहों और इराक और यमन में मिलिशियाओं को मिसाइलें और रॉकेट प्रदान किए, जो इजरायल और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक व्यापक "प्रतिरोध का धारा" का हिस्सा थे। recent visitors 54