लेबनानी विदेश मंत्री का दावा… मरने से पहले युद्धविराम पर सहमत था नसरल्लाह

तेहरान इजरायली हवाई हमले में मारा गया हिजबुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह अपनी मौत से पहले इजरायल के साथ युद्धविराम चाहता था। लेबनान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बौ हबीब ने कहा है कि नसरल्लाह हवाई हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही युद्धविराम के लिए मान गए थे। उन्होंने कहा कि अपने युद्धविराम के इस फैसले के बारे में उन्होंने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को भी बता दिया था। सीएनएन को दिए अपने इंटरव्यू में हबीब ने कहा कि हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह 21 दिनों के सीजफायर के लिए मान गए थे। लेबनानी संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने नसरल्लाह से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने जंग रोकने के लिए अपनी सहमति जताई थी। इसके बाद बेरी ने अमेरिकी और फ्रांसीसी प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी थी कि हिजबुल्लाह युद्धविराम के लिए तैयार है। लेबनानी विदेशमंत्री ने यह दावा किया कि हमें यह सूचना मिली थी कि इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी सीजफायर के लिए तैयार हैं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना मन बदल लिया और हमारी जमीन पर हमला करना जारी रखा। दरअसल, 27 सितंबर को हुए इस हमले के पहले न्यूयॉर्क में बाइडन और मैक्रों की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने मिलकर 25 सितंबर को 21 दिनों के सीजफायर को लेकर अपना प्लान रखा था। लेकिन नेतन्याहू ने इस प्लान को खारिज कर दिया और पूरी ताकत के साथ लड़ाई जारी रखने का आदेश दिया, विशेषज्ञों के मुताबिक पेजर और अन्य संचार संसाधनों में हुए विस्फोट के बाद हिजबुल्लाह बैकफुट पर था, नेतन्याहू नहीं चाहते थे कि उसे संभलने का कोई भी मौका दिया जाए। हमले के वक्त अपने दहियाह के खुफिया बंकर में था नसरल्लाह हबीब ने बताया कि हमले के वक्त नसरल्लाह दहियाह के दक्षिणी इलाके में एक बंकर में था उसी वक्त वह इजरायली हवाई हमले का शिकार हो गए। इससे पहले जब हिजबुल्लाह ने नसरल्लाह की मौत की पुष्टि की थी तो उनकी तरफ से यह नहीं बताया गया था कि नसरल्लाह की मौत का कारण क्या है। रॉयटर्स के मुताबिक उसके शरीर पर कोई घाव नहीं था, उसके शरीर को देखकर ऐसा लगता है कि विस्फोट की तीव्रता से अंदरूनी चोट की वजह से उसकी मौत हुई। ईरान के सर्वोच्च नेता ने दी थी लेबनान छोड़ने की सलाह रॉयटर्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायली हमले में मारे जाने के कुछ दिन पहले ही नसरल्लाह को लेबनान से भाग जाने की चेतावनी दी थी। पेजर हमलों में हिजबुल्लाह के सदस्यों की मौत के बाद खामेनेई ने एक दूत के साथ नसरल्लाह को ईरान आने के लिए कहा था,जिसमें खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया था कि इज़राइल के पास हिजबुल्लाह के भीतर गुर्गे थे और वह उसे मारने की योजना बना रहा था। ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि खामेनेई ने दूत के रूप में एक वरिष्ठ ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशान थे, जो बंकर में नसरल्लाह के साथ मारे गए थे। recent visitors 68

WTC Final में भारत को पहुंचने के लिए कम से कम 4 टेस्ट मैच जीतने होंगे और दो टेस्ट ड्रॉ कराने होंगे

नई दिल्ली बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम को मिली जीत के बाद विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्लूटीसी) की अंक तालिका में भारत काफी मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। हालांकि डब्लूटीसी के फाइनल में जगह बनाने के लिए रोहित शर्मा एंड कंपनी को अभी कई और जीत की आवश्यकता है। मौजूदा डब्लूटीसी चक्र में 26 टेस्ट मैच शेष हैं और पहले दो स्थान में जगह बनाने की दौड़ काफी रोमांचक होती जा रही है। एक नजर डालते हैं कि अभी तमाम टीमें किस स्थिति में हैं। श्रीलंका- प्रतिशत अंक – 55.56, शेष सीरीज – दक्षिण अफ्रीका (2 टेस्ट, बाहर), ऑस्ट्रेलिया (2 टेस्ट, घर पर) न्यूजीलैंड की टीम को श्रीलंका ने बीती टेस्ट सीरीज में 2-0 से मात दी थी। इस शानदार जीत की वजह से श्रीलंका की टीम को 24 महत्वपूर्ण अंक हासिल हुए हैं। इस कारण से श्रीलंका की टीम भी अब डब्लूटीसी फाइनल में पहुंचने की दावेदार बन गई है। उनके शेष चार टेस्ट मैच उन दो टीमों के विरुद्ध हैं, जो खुद भी डब्लूटीसी फाइनल खेलने की प्रबल दावेदार हैं। अगर श्रीलंका की टीम धीमी ओवर गति के कारण बिना कोई अंक गंवाए चारों मैच जीत लेती है तो उनके पास 69.23 प्रतिशत अंक हो जाएंगे और तब वे अन्य टीमों के नतीजों पर निर्भर नहीं रहेंगे। हालांकि अगर वह एक मैच हार जाते हैं और तीन में उन्हें जीत मिलती है तब ऐसी स्थिति में उनके पास 61.54 प्रतिशत अंक होंगे लेकिन इसके बावजूद उनके फाइनल में पहुंचने की संभावना बनी रहेगी। भारत- प्रतिशत अंक: 74.24, शेष सीरीज : न्यूजीलैंड (3 टेस्ट, घर पर) और ऑस्ट्रेलिया (5 टेस्ट, बाहर) कानपुर में बेहतरीन जीत हासिल करने के बाद भारत अंक तालिका में शीर्ष पर और भी मजबूत हो गया है। शेष सभी मैच जीतने पर उनके 85.09 प्रतिशत अंक हो जाएंगे। हालांकि उनकी कोशिश यही होगी कि वह कम से कम इतने अंक हासिल कर लें कि डब्लूटीसी फाइनल खेलने के लिए उन्हें अन्य नतीजों पर निर्भर न रहना पड़े। इसके लिए उन्हें कम से कम चार टेस्ट मैच जीतने होंगे और दो टेस्ट मैच ड्रॉ (56 अंक) कराने होंगे। जिसकी बदौलत वह 67.54 प्रतिशत अंक तक पहुंच जाएंगे। दक्षिण अफ्रीका अगर अपने शेष सभी छह टेस्ट जीत लेती है तब वह 69.44 अंकों तक पहुंच सकती है। वहीं अगर ऑस्ट्रेलिया चार टेस्ट जीतती है और दो टेस्ट ड्रॉ समाप्त होता है (यह मानते हुए कि वह भारत से एक टेस्ट हारती है, और दो ड्रॉ होता है जबकि अन्य चार टेस्ट जीत लेती है) तब वह 64.04 अंकों तक ही पहुंच सकती है। अगर भारत को 56 से कम अंक हासिल होते हैं तब हो सकता है कि वह शीर्ष दो स्थानों में न रहें। अगर वह चार मैच जीतते हैं और एक मैच ड्रॉ होता है (52 अंक) तब ऐसा संभव है कि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका भारत से आगे निकल जाएं। श्रीलंका भी 67 से अधिक प्रतिशत अंक के साथ अंक तालिका समाप्त कर सकती है लेकिन उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत हासिल करनी होगी जो कि भारत के पक्ष में ही काम करेगा। बांग्लादेश- प्रतिशत अंक : 34.38, शेष सीरीज: वेस्टइंडीज (2 टेस्ट, बाहर), दक्षिण अफ्रीका (2 टेस्ट, घर पर) भारत के खिलाफ दो मैच हारने के बाद बांग्लादेश 45.83% प्रतिशत अंक से 34.38 तक पहुंच गई है। अगर वे अपने शेष चार मैच भी जीत लेते हैं तब भी वह 56.25 प्रतिशत अंकों तक ही पहुंच पाएंगे, जो कि शीर्ष दो स्थान तक पहुंचने के लिए काफी नहीं होंगे। न्यूजीलैंड- प्रतिशत अंक : 37.50, शेष सीरीज : भारत (3 टेस्ट, बाहर), इंग्लैंड (3 टेस्ट, घर पर) कागज पर न्यूजीलैंड अभी भी अपने शेष सभी छह मैच जीतकर 64.29 प्रतिशत अंक तक पहुंच सकती है, लेकिन उनका हालिया फॉर्म इस संभावना के सच होने की उम्मीद पैदा नहीं करता। उनके अगले तीन टेस्ट भारत में भारत के खिलाफ हैं, जिसे उसके घर पर हराना किसी भी अन्य मजबूत टीम के लिए मुश्किल रहता है। अगर न्यूजीलैंड शेष छह में से चार मैच जीतती है और दो हार जाती है तब भी उनके खाते में 50 प्रतिशत अंक होंगे। ऑस्ट्रेलिया- प्रतिशत अंक : 62.50, शेष सीरीज : भारत (5 टेस्ट, घर पर), श्रीलंका (2 टेस्ट, घर पर) ऑस्ट्रेलिया अभी 62.5 प्रतिशत अंकों के साथ तालिका में दूसरे स्थान पर है और अगर वह अपने सभी सात मैच जीत जाती है तब उसके खाते में 76.32 प्रतिशत अंक हो सकते हैं। जिन दो टीमों, भारत और श्रीलंका के खिलाफ उसे दो श्रृंखलाएं खेलनी हैं वे भी फाइनल में पहुंचने के प्रबल दावेदार हैं। पांच जीत उन्हें 65.79 प्रतिशतअंकों तक पहुंचाएगी लेकिन भारत और दक्षिण अफ्रीका तब भी ऑस्ट्रेलिया से आगे जाने की स्थिति में होंगे। भारत के खिलाफ श्रृंखला शुरु होने से चीजें स्पष्ट होने लगेंगी, क्योंकि तब तक भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ घर पर टेस्ट श्रृंखला खेल चुका होगा। दक्षिण- अफ्रीका प्रतिशत अंक : 38.89, शेष सीरीज : श्रीलंका, (2 टेस्ट, घर पर), पाकिस्तान (2 टेस्ट, घर पर), बांग्लादेश (2 टेस्ट, बाहर) अगर दक्षिण अफ्रीका अपने सभी शेष मैच जीत लेता है तब उनके खाते में 69.44 प्रतिशत अंक होंगे जो कि फाइनल में जगह बनाने के लिए काफी होंगे। क्योंकि तब भारत और ऑस्ट्रेलिया में से कोई एक ही इस आंकड़े को पार कर पाएगा। पांच मैच में जीत और एक मैच ड्रा होने पर दक्षिण अफ्रीका के पास 63.89 प्रतिशत अंक होंगे और तब भी वह दावेदार बने रहेंगे। जबकि पांच में जीत और एक में हार नसीब होने पर उनके खाते में 61.11 प्रतिशतअंक होंगे, उनकी दावेदारी तब भी बनी रहेगी लेकिन ऐसी स्थिति में उन्हें अन्य नतीजों पर अधिक रहना पड़ेगा। इंग्लैंड- प्रतिशत अंक : 42.19, शेष सीरीज : पाकिस्तान (3 टेस्ट, बाहर), न्यूजीलैंड (3 टेस्ट, बाहर) श्रीलंका के खिलाफ अंतिम टेस्ट में इंग्लैंड की हार ने यह तय कर दिया है कि वह इस चक्र में 60 प्रतिशत अंकों से आगे नहीं जा सकते। अपने शेष सभी छह टेस्ट जीतकर वह 57.95 अंकों तक ही पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति में भी उन्हें अन्य नतीजों पर निर्भर रहना होगा। पाकिस्तान- प्रतिशत अंक : 19.05, शेष सीरीज : इंग्लैंड … Read more

हरियाणा में लोगों से मजबूत सरकार चुनने की अपील की, प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा की जनता के नाम खास संदेश दिया

नई दिल्ली हरियाणा में चुनावी शोर गुरुवार शाम को समाप्त हो गया है। अब शनिवार, पांच अक्टूबर को मतदान होंगे एवं आठ अक्टूबर को मतों की गणना की जाएगी। प्रचार समाप्त होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा की जनता के नाम खास संदेश दिया, जिसमें उन्होंने लोगों से हरियाणा में मजबूत सरकार चुनने की अपील की। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने गुरुवार शाम को एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'अब से कुछ देर में हरियाणा विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान समाप्त हो जाएगा। बीते कुछ दिनों में मैंने पूरे राज्य की यात्रा की है। मैंने लोगों का जो उत्साह देखा है, उसे देखकर मुझे ये पक्का विश्वास है कि हरियाणा के लोग भाजपा को फिर अपना आशीर्वाद देने वाले हैं। हरियाणा के देशभक्त लोग, कांग्रेस की विभाजनकारी और नकारात्मक राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।' 'घोटालों और दंगों के दौर से बाहर लाए' पीएम ने आगे लिखा, 'पिछले 10 वर्षों में भाजपा ने हरियाणा के लोगों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए लगातार काम किया है। हमने सभी वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। किसान हों, युवा हों, महिलाएं हों, गांव और शहरों का विकास हो, हमने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। हम हरियाणा को कांग्रेस के घोटालों और दंगों वाले दौर से बाहर निकालकर लाए हैं।' उन्होंने कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि हरियाणा की जनता-जनार्दन जानती है कि कांग्रेस का मतलब भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता और भाई-भतीजावाद की गारंटी है। बापू-बेटे की राजनीति का मूल उद्देश्य सिर्फ स्वार्थ है। कांग्रेस यानि दलाल और दामाद का सिंडिकेट। लोग आज हिमाचल से कर्नाटक तक कांग्रेस सरकारों की विफलता भी देख रहे हैं। कांग्रेस की नीतियां, लोगों को तबाह करती हैं, इसलिए हरियाणा के लोग कांग्रेस को बिल्कुल नहीं चाहते हैं। कांग्रेस कभी स्थिर सरकार नहीं दे सकती पीएम मोदी ने लिखा, 'हरियाणा की जनता यह जानती हैं कि कांग्रेस कभी स्थिर सरकार नहीं दे सकती। हरियाणा के लोग देख रहे हैं कि कैसे कांग्रेस के नेता आपस में लड़ रहे हैं। ये हाल तब है, जब ये विपक्ष में हैं। हरियाणा के लोगों को इस बात से भी चोट पहुंच रही है कि दिल्ली और हरियाणा में बैठे दो खास परिवारों के इशारे पर पूरा हरियाणा अपमानित हो रहा है।' उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के नेताओं ने आरक्षण खत्म करने का बयान देकर अपने इरादे जता दिए हैं। हरियाणा का पिछड़ा और दलित समुदाय जातिगत हिंसा रोकने में विफल रहने पर पहले से ही कांग्रेस से नाराज चल रहा है। इसलिए लोगों ने कांग्रेस को फिर कड़ी सजा देने का मन बना लिया है। हरियाणा के गली-गली से एक ही आवाज आ रही है- भरोसा दिल से, भाजपा फिर से।' हरियाणा के मतदाताओं से की अपील हरियाणा के लोगों से अपील करते हुए पीएम ने कहा, 'आज पूरी दुनिया की नजरें भारत पर हैं। दुनिया, भारत की ओर बहुत आशा और उम्मीद से देख रही है। ऐसे में यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि हरियाणा के लोग एक ऐसी सरकार चुनें, जो भारत को मजबूती देने की दिशा में प्रयास करे। कांग्रेस कभी देश को मजबूत नहीं बना सकती। इसलिए मैं हरियाणा के अपने मतदाताओं से ये आग्रह करता हूं कि वे फिर से भाजपा को अपना आशीर्वाद जरूर दें।' recent visitors 78

वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध किया गया, मैरिटल रेप अपराध नहीं: केंद्र सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें भारत में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध किया गया है। केंद्र ने कहा कि यौन संबंध पति-पत्नी के बीच संबंधों के कई पहलुओं में से एक है, जिस पर उनके विवाह की नींव टिकी होती है। ये मुद्दा कानूनी से अधिक सामाजिक केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा कानूनी से अधिक सामाजिक है। इसका समाज पर सीधा असर पड़ता है। इसके साथ ही केंद्र ने यह तर्क भी दिया कि अगर 'वैवाहिक बलात्कार' को भी अपराध घोषित किया जाता है, तो ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। संबंध को साबित करना चुनौतीपूर्ण केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तेजी से बढ़ते और लगातार बदलते सामाजिक एवं पारिवारिक ढांचे में संशोधित प्रावधानों के दुरुपयोग से भी इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि किसी व्यक्ति के लिए यह साबित करना मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होगा कि संबंध के लिए सहमति थी या नहीं। बलात्कार विरोधी कानून शादी में जीवनसाथी से उचित यौन संबंध की अपेक्षा तो की जाती है, लेकिन ऐसी अपेक्षाएं पति को अपनी पत्नी को उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं देती हैं। केंद्र ने कहा कि बलात्कार विरोधी कानूनों के तहत किसी व्यक्ति को ऐसे कृत्य के लिए दंडित करना असंगत हो सकता है। क्रूरता पर दंडात्मक कानून संसद ने पहले ही विवाहित महिला की सहमति को सुरक्षित रखने के लिए उपाय प्रदान किए हैं। केंद्र ने कहा कि इन उपायों में विवाहित महिलाओं के साथ क्रूरता करने पर दंडात्मक कानून शामिल हैं। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 कानून है, जो विवाहित महिलाओं की मदद कर सकता है। recent visitors 75

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की पीड़िता डॉक्टर की मूर्ति स्थापित करने को लेकर विवाद

कोलकाता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या की पीड़िता डॉक्टर की मूर्ति स्थापित करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मूर्ति को विरोध प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने बनवाया है। मूर्ति बनाने वाले कलाकार असित सैन के मुताबिक, 'क्राई ऑफ द ऑवर' नाम की इस प्रतिमा में पीड़िता की जिंदगी के आखिरी लम्हों में में उसकी पीड़ा और भय को दर्शाया गया है। एक ऊंचे स्लैब पर स्थापित इस मूर्ति में एक महिला जैसी आकृति रोते हुए दिखाई दे रही है और इसे आरजी कर के प्रिंसिपल के कार्यालय के पास लगाया गया है। अस्पताल के एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, "यह प्रतिमा पीड़िता की नहीं है बल्कि उसके द्वारा झेले गए दर्द और यातना और चल रहे विरोध का प्रतीक है।" हालांकि ट्रेनी डॉक्टर की मूर्ति की स्थापना को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी निंदा की है और इसे अपमानजनक और असंवेदनशील बताया है। एक यूजर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "क्या आप चाहेंगे कि उनकी प्रतिमा लगाई जाए? उनके पीड़ा भरे चेहरे के साथ ऐसा ना करें। यह जो भी बकवास है यह बेहद परेशान करने वाला है।" वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, "यह कितना असंवेदनशील है इस से आश्चर्यचकित हूं। किसी के दर्द को अमर कर दिया जाना। किसी को सिर्फ़ यौन शोषण के लिए जाना जाना। मुझे उम्मीद है कि इस मूर्ति को जल्द हटा दिया जाएगा।" TMC नेता कुणाल घोष ने की आलोचना तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने भी प्रशिक्षु डॉक्टर की प्रतिमा स्थापित करने पर डॉक्टरों की आलोचना की है और कहा कि यह पीड़िता का नाम और पहचान उजागर करने के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने ट्वीट किया, "कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता। कला के नाम पर भी नहीं। विरोध प्रदर्शन होंगे और न्याय की मांग की जाएगी। लेकिन मूर्ति में दर्द से कराहती लड़की का चेहरा ठीक नहीं है। पीड़िता की तस्वीरों या मूर्तियों का इस्तेमाल न करने के दिशा-निर्देश हैं।" हम न्याय के लिए लड़ते रहेंगे- डॉक्टर वहीं इस मामले पर इंडिया टुडे ने आरजी कर अस्पताल के डॉ. देबदत्त के हवाले से बताया, "हमने कोई नियम नहीं तोड़ा है या अदालत के आदेश की अनदेखी नहीं की है। यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक मूर्ति है। हम अथॉरिटीज को दिखाना चाहते हैं कि क्या हुआ था और उसे कैसे पीड़ा हुई। हम न्याय के लिए लड़ते रहेंगे।" डॉक्टर्स की मांगे गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर मंगलवार से दोबारा हड़ताल शुरू कर रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर सितंबर में किए गए वादों को पूरा ना करने का आरोप लगाया है। डॉक्टरों ने हड़ताल के 42 दिनों के बाद आंशिक रूप से सेवाएं फिर से शुरू कर दी थीं लेकिन अब उन्होंने वापस काम रोकने का फैसला किया है और आरोप लगाया है कि चिकित्सा कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपायों को बढ़ाने जैसी प्रमुख मांगों को लागू नहीं किया गया। बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगों में अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाना, स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चौबीसों घंटे सुरक्षा और चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा की इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल शामिल हैं। recent visitors 82

पराली जलाने के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब हो रही, सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब को लगाई फटकार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब और हरियाणा सरकारों को पराली जलाने वाले किसानों से केवल नाममात्र का मुआवजा वसूलने पर कड़ी फटकार लगाई। पराली जलाने के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब हो रही है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को भी खूब सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आयोग पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण करने में असफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि आयोग ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए उनके निर्देशों को लागू करने का कोई प्रयास नहीं किया है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह भी कहा कि 29 अगस्त को दिल्ली में वायु प्रदूषण पर चर्चा के लिए बुलाई गई आयोग की बैठक में केवल 11 में से 5 सदस्य ही उपस्थित हुए थे, और अदालत के निर्देशों पर कोई चर्चा भी नहीं हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जब तक लोग यह नहीं समझेंगे कि उन्हें वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, तब तक पराली जलाना नहीं रुकेगा। प्रदूषण फैलाने के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को सौंपी गई है। हालांकि अदालत ने पाया कि न तो आयोग और न ही पंजाब और हरियाणा की राज्य सरकारें इस समस्या को समाप्त करने के प्रति गंभीर हैं, जहां पराली जलाने की घटनाएं अब भी हो रही हैं। जस्टिस अभय एस ओका की अध्यक्षता वाली बेंच ने CAQM की स्थिति रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ये टिप्पणियां कीं। अदालत ने पिछले हफ्ते आयोग और उसकी विभिन्न उप-समितियों से इस समस्या को सुलझाने के लिए वर्षों से उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी थी, क्योंकि सर्दियों के महीनों में पराली जलाने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए, बेंच जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे। उन्होंने कहा, "जब तक लोग यह नहीं जानेंगे कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा, तब तक वे नहीं रुकेंगे और न ही उन्हें उपलब्ध मशीनों का इस्तेमाल करेंगे।" अदालत ने यह भी नोट किया कि आयोग केवल राज्य सरकारों के साथ बैठकें आयोजित करने में व्यस्त है और अपने आदेशों को लागू करने के प्रयास नहीं कर रहा है। अदालत ने कहा कि आयोग को अधिनियम की धारा 14 और 15 के तहत अपराधियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने, जुर्माना लगाने और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने का अधिकार है। अदालत ने कहा, "किसी न किसी कारण से वे किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करना चाहते। आपको अपने आदेशों को पत्र और भावना में लागू करना चाहिए। केवल बैठकें बुलाने से कुछ नहीं होगा, कार्रवाई जरूरी है।" केंद्र और CAQM की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि पराली जलाने पर कड़ी कार्रवाई के आदेश 10 जून, 2010 को जारी किए गए थे और उसके बाद कई आदेश पारित हुए, जिनमें आखिरी आदेश अप्रैल 2024 का है। इसमें राज्य सरकारों को अवैध पराली जलाने के खिलाफ कार्रवाई करने और आयोग और केंद्र द्वारा प्रस्तावित अन्य उपायों को लागू करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें पराली हटाने की मशीनें उपलब्ध कराना और पराली जलाने वाले किसानों को हतोत्साहित करना शामिल है। ASG ने यह भी बताया कि इस साल अब तक आयोग की तीन उप-समितियों की 11 बैठकें हो चुकी हैं। अदालत ने कहा, "आयोग खुद ही अपने आदेशों को लागू कराने का प्रयास करता नहीं दिख रहा है।" अदालत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से जून 2010 और अप्रैल 2024 के आदेशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह भी कहा कि आयोग के आदेशों को लागू करने के लिए बनाई गई उप-समिति की अंतिम बैठक 29 अगस्त को हुई थी, जिसमें जून 2010 के आदेश का कार्यान्वयन एजेंडे में नहीं था। अदालत ने कहा, "यदि किसानों के खिलाफ मुकदमा नहीं चल सकता, तो अधिकारियों को दोषी ठहराया जाना चाहिए। आपको दिखाना चाहिए कि आपने जो तंत्र 2021 के अधिनियम के तहत बनाया था, वह अभी भी मौजूद है।" ASG ने अदालत को बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत एफआईआर दर्ज की गई हैं, जो अधिकारियों द्वारा जारी आदेशों की अवहेलना से संबंधित है। बेंच ने कहा, "आपने दंडित करने के लिए सबसे हल्का प्रावधान चुना है, जबकि आपके पास CAQM अधिनियम के तहत कठोर प्रावधान हैं।" CAQM द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला कि 15 से 30 सितंबर के बीच पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की 129 अवैध घटनाएं हुईं। अदालत ने कहा कि उनसे जुर्माना वसूलना कोई उद्देश्य पूरा नहीं करेगा, क्योंकि इस समय की जरूरत है कि उन्हें कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाए। पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि किसानों को वैकल्पिक प्रोत्साहन प्रदान करने के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जैसे कि पराली हटाने की मशीनें। राज्य के एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कहा कि राज्य में 1.4 लाख से अधिक मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन 10 एकड़ से कम भूमि वाले छोटे किसानों को इन मशीनों को चलाने के लिए ड्राइवर और ईंधन चाहिए।  recent visitors 79

छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन का भव्य हुआ आयोजन, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया उद्घाटन

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज ग्राउंड परिसर में आज *प्रथम छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया। कार्यक्रम में प्रदेश की पारंपरिक वन संपदा, औषधीय उत्पादों और सांस्कृतिक धरोहर को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल और प्रदर्शनी लगाई गई थी। मुख्यमंत्री ने इन स्टॉलों का भ्रमण कर उत्पादों की जानकारी ली और कलाकारों व कारीगरों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप भी उपस्थित थे। *पारंपरिक औषधियों की जानकारी प्राप्त की*   मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ वैद्य संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दशरथ नेताम द्वारा प्रदर्शित पारंपरिक औषधियों का अवलोकन किया। श्री नेताम ने बताया कि ये औषधियाँ जंगलों से विशेष रूप से चुनकर लाई गई जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने इन औषधियों की निर्माण प्रक्रिया और उनके उपयोग के लाभों पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने इन पारंपरिक विधियों के संरक्षण और प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। *महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की सराहना*   मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी मर्यादित संघ के स्टॉल पर जाकर विभिन्न वन-आधारित उत्पादों जैसे जशपुर के हैंडमेड ग्रीन टी, हर्बल च्यवनप्राश, और बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदाय द्वारा तैयार किए गए शुद्ध हर्बल उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने ‘हर्बल छत्तीसगढ़’ ब्रांड के तहत तैयार शहद, रागी-कोदो कुकीज, आँवला कैंडी, और जामुन रस जैसे उत्पादों को देखकर हर्ष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “इन हर्बल उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगा।” *लोक कलाकारों के अनोखे प्रदर्शन की प्रशंसा*   मुख्यमंत्री ने देवरी (आरंग) के मोहरी वादक श्री विशाल राम यादव और कोलिहापुरी, दुर्ग के चिकारा वादक श्री मनहरण दास बंजारे के लोक वाद्य प्रदर्शन का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पारंपरिक लोक कलाएँ हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं, जिन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों कलाकारों को उनके संगीत के प्रति समर्पण के लिए बधाई दी। *रजवार कला के भित्ति चित्रों की सराहना*   भित्ति चित्र कलाकार डॉ. शशिप्रिया उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को उनकी टीम द्वारा बनाए गए भित्ति चित्रों के बारे में बताया, जिनमें रजवार कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिम संस्कृति, लोक जीवन, और पारंपरिक वेशभूषा को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि रजवार कला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को जीवित रखना और इसे नए आयाम देना है। मुख्यमंत्री ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि, "ऐसी लोककलाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार से हमारी सांस्कृतिक धरोहर का भविष्य सुरक्षित रहेगा।" *दिव्यांग बच्चों की कला का सम्मान*   मुख्यमंत्री ने शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय, माना कैम्प के मूक-बधिर विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई चित्रकला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस दौरान छात्र धनदास बरमते ने स्वनिर्मित लोककला आधारित चित्र मुख्यमंत्री को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस उपहार को स्वीकारते हुए धनदास की कला की प्रशंसा की और कहा, "आपकी यह कला हमारी संस्कृति को नई पहचान देने का कार्य करेगी।" उन्होंने धनदास के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। *45 वर्षों से पारंपरिक वाद्य यंत्रों का संरक्षण कर रहे श्री रिखि क्षत्रिय का अभिनंदन*   कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संरक्षण में योगदान देने वाले श्री रिखि क्षत्रिय ने मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। श्री क्षत्रिय ने कहा कि वे पिछले 45 वर्षों से छत्तीसगढ़ी वाद्य यंत्रों—जैसे रुंजू बाजा, घूमरा बाजा और चिरई बाजा—का संरक्षण और प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। श्री क्षत्रिय ने मुख्यमंत्री को रुंजू बाजा भेंट किया और अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन करते हुए घूमरा बाजा से शेर की आवाज और चिरई बाजा से चिड़िया की आवाज निकालकर उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया। मुख्यमंत्री ने उनके इस अनूठे योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसे कलाकार हमारी लोक परंपराओं के सच्चे रक्षक हैं। *छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को मिला मंच*   इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा, “छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन जैसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, पारंपरिक उत्पादों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करते हैं। ये आयोजन हमारे पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को सहेजने के साथ-साथ, इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सहायक हैं।” कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कला प्रेमियों और स्थानीय निवासियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। साथ ही, मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों, कारीगरों, और प्रतिभागियों को प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए प्रोत्साहित किया। recent visitors 70