दिल्ली के नबी करीम इलाके में दर्दनाक हादसा, निर्माणाधीन इमारत गिरी, दो की मौत

नई दिल्ली पुरानी दिल्ली के नबी करीम इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने की सूचना है। इसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई के फंसे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पुलिस ने बताया कि दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर भेजी गई है, जिसने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने कई लोगों के फंसे होने की आशंका व्यक्त की है। बारिश और आंधी के कारण कई जगहों पर पेड़ गिरा दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था। मलबे को हटाकर फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। दो मृतकों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बता दें, शनिवार को आंधी और बारिश के कारण कई जगहों पर पेड़ गिरने की भी सूचना है। recent visitors 53

जल नहीं होगा तो जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा, प्रकृति हमें वर्षा के माध्यम से पर्याप्त जल उपलब्ध कराती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मानव और जीवों के अस्तित्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व जल है। जल नहीं होगा तो जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा। प्रकृति हमें वर्षा के माध्यम से पर्याप्त जल उपलब्ध कराती है। वर्तमान समय में जल को संरक्षित करना मानव जीवन के लिए महती आवश्यकता बन गया है। हम सब को वर्षा के जल को संग्रहित कर न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित करना होगा। इसके लिए पुरानी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और नई जल संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देना होगी, जिससे जल की एक-एक बूंद को संरक्षित किया जा सके। प्रदेश में इसी उद्देश्य से 30 अप्रैल से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया है, जो आगामी 30 जून तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान अंतर्गत जहां एक ओर पुरानी बावडियों और तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वहीं बड़े पैमाने पर किसानों के खेतों में "खेत तालाब" भी बनाए जा रहे हैं। वर्षा के जल को संग्रहित करने स्टॉपडेम सहित अन्य जल संरचनाओं का निर्माण भी हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान की विशेषता यह है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जन-भागीदारी भी व्यापक रूप ले चुकी है। श्रमदान कर जन-भागीदारी को कर रहे हैं प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव अभियान में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने विभिन्न जिलों में जाकर स्वयं भी श्रमदान कर रहे हैं। मंत्रि-परिषद के सदस्य, सांसद, विधायक, नगरीय एवं पंचायत प्रतिनिधि, जन अभियान परिषद सहित अनेक स्वयं सेवी संस्थाएं भी अभियान का अभिन्न हिस्सा बन कर इसे जन आंदोलन बना रही हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान की विशेषता 30 अप्रैल से क्षिप्रा के घाट से प्रारंभ हुआ अभियान 30 जून 2025 तक चलेगा। प्रत्येक गाँव में तैयार किये गये जल दूत। पुरानी बावडियों एवं जल संरचनाओं का किया जा रहा है जीर्णोद्धार। किसानों के लिए बनाये जा रहे है "खेत तालाब"। जल बांध, नहरों एवं जल संरचनाओं का सफाई और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। जन-भागीदारी को बढ़ाने के लिए जल-पंचायतों का आयोजन। दीवार-लेखन सहित प्रचार की विभिन्न गतिविधियों से नागरिकों को जल संवर्धन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में भी जन-जागरूकता की गतिविधिया संचालित हो रही हैं। जल संरक्षण के लिए शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक श्रमदान भी कर रहे हैं। अभियान अंतर्गत बड़े पैमाने पर पौध-रोपण भी किया जाएगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को पुरस्कृत करने की योजना भी लागू की गई। जल संरचनाओं की सफाई, निर्माण और जीर्णोद्धार का अभियान जारी देवास जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान” जन भागीदारी से अपने चरम पर है। जन-जीवन से जुड़े इस महत्वपूर्ण अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में जल-संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। जन-प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, आमजन और सरकार के संयुक्त प्रयास से अभियान में मशीन, सामग्री व श्रम का समुचित नियोजन किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बागली विकासखंड की ग्राम पंचायत बरझाई में जन सहयोग से बावड़ी एवं घाट का जीर्णोद्धार कर उनकी साफ-सफाई की गई। जल स्त्रोतों की साफ-सफाई एवं गहरीकरण से इनकी जल संग्रहण की क्षमता बढ़ेगी, साथ ही आस पास की छोटी जल संरचनाओं में भी भू-जल पर्याप्त मात्रा में बना रहेगा। अब नहीं सूखेगी भितरवार की बर्षाती नदी ग्वालियर जिले के विकास खंड भितरवार में जल गंगा संवर्धन अभियान में स्थानीय वर्षाती नदी के संरक्षण के लिए श्रमदान किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद से जुड़ी नवांकुर संस्था के संयुक्त प्रयास से ग्राम पंचायत कैथी और भेंगना के बीच बर्षाती नदी पर युवाओं ने श्रमदान किया। संचार युवा मंडल के पदाधिकारियों ने भी श्रमदान में सहभागिता की। इससे नदियों के संरक्षण के साथ जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया गया। पांढुर्ना की जाम नदी के तट पर सफाई अभियान मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर के नेतृत्व में पांढुर्ना जिले के जनप्रतिधियों ने स्थानीय समुदाय के साथ मिल कर मां जाम नदी के तट पर साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। मां जाम नदी के घाट परिसर की स्वच्छता के अभियान में जन अभियान परिषद और ग्रामीण आदिवासी समाज कल्याण विकास संस्थान की टीम का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।   recent visitors 42

एक ही जगह मिलेगी सभी पद्धतियों की दवाएं, हर मंडल में आयुष महाविद्यालय; CM योगी का निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित की जाए, जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी समेत आयुष की सभी पद्धतियों को एक ही परिसर में उपलब्ध कराया जाए। यह कदम न केवल आयुष चिकित्सा पद्धति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य-आधारित शिक्षा प्रणाली को भी सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष संस्थानों में नेचुरोपैथी और योग सेंटर की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाए और सभी स्वीकृत शैक्षणिक व चिकित्सकीय पदों को शत-प्रतिशत भरने की कार्यवाही समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए। प्रदेश के हर जनपद में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्रारंभ किए जाएं, जो सरकारी या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध ढंग से हो और प्रदेश भर में आयुष विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं को भी प्राथमिकता से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यना ने निजी क्षेत्र को भी इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निजी निवेशकों को आयुष सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र में संचालित आयुष महाविद्यालयों एवं चिकित्सालयों के बुनियादी ढांचे, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, फैकल्टी एवं स्टाफ की गुणवत्ता का गहन परीक्षण कराया जाए ताकि कोई कमी न रह जाए। आयुर्वेद में पंचकर्म जैसी विशिष्ट पद्धतियां गंभीर बीमारियों के उपचार में अत्यंत प्रभावी हैं, इसलिए इन पद्धतियों को प्रदेश के सभी आयुष संस्थानों में बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा की लोकप्रियता को देखते हुए यह समय है जब भारत की परंपरागत चिकित्सा को वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत कर वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए। उन्होने कहा कि डाबर, वैद्यनाथ और पतंजलि जैसी आयुर्वेदिक उत्पादक संस्थाओं के साथ एमओयू कर सभी आयुष चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी मरीज को चिकित्सकीय उपचार के लिए दवा की कमी न हो। बैठक के दौरान आयुष विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रदेश में 2,127 आयुर्वेदिक, 259 यूनानी और 1,598 होम्योपैथिक चिकित्सा संस्थान संचालित हैं, जो आयुष सेवाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन संस्थानों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जाए और आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। recent visitors 44

वीर सैनिकों के सम्मान में उमड़ा जनसैलाब, देशभक्ति के नारों से गूंजा बैरसिया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्तमान युग में एक नई शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर से थल, वायु और नौसेना ने अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। भारतीय सेना ने मात्र 4 दिन के अल्प समय में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। इस अभियान ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता, एकजुटता और आधुनिक तकनीकी सामर्थ्य का परिचय दिया है। आतंकवाद के मंसूबों को ध्वस्त किया गया है। आज कोई भी शक्ति भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती। हम सभी इस तिरंगा यात्रा से भारतीय सेना को सम्मान देने के लिए एकत्र हुए हैं। यह तिरंगा यात्रा ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक निरंतर आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भोपाल जिले के बैरसिया में वीर सैनिकों के सम्मान में निकाली गई तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे शूरवीरों ने पाकिस्तान को आधी रात में ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान के साथ दुनिया के 200 देश में से सिर्फ दो देश साथ आए- एक तुर्किए और दूसरा अजरबैजान। अब देश की जनता तुर्किए का बहिष्कार कर रही है और भविष्य में अजरबैजान के साथ भी ऐसा ही होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तिरंगा यात्रा मार्ग में उपस्थित जनसमूह का अभिवादन किया। पूरा बैरसिया देशभक्ति की भावना से सराबोर हो उठा। भारत माता की जय और वंदे मातरम् के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा। इस यात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के नागरिक उत्साहपूर्वक शामिल हुए। हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों ने देश के प्रति अपनी निष्ठा और वीर जवानों के प्रति सम्मान प्रकट किया। विधायक श्री विष्णु खत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकियों का खात्मा किया है। आज की यह विशाल तिरंगा यात्रा हमारे वीर सैनिकों के सम्मान में आयोजित की गई है। परमाणु शक्ति का डर दिखाने वाला पाकिस्तान 4 दिन में घुटनों पर आ गया। यह भारतीय सेना के पराक्रम और नेतृत्व का कमाल है। सभा में अन्य वक्ताओं ने कहा कि देश और प्रदेश में आज मजबूत सरकारें हैं। जनता के कल्याण के सभी कदम उठाए गए हैं। इस अवसर पर सांसद श्री आलोक शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रामकुंवर नवरंग गुर्जर सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।   recent visitors 40

इसरो कल पीएसएलवी-सी61के माध्यम से खास ईओएस-09 (RISAT-1B) सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने जा रहा

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। इसरो 18 मई यानी कल अपने विश्वसनीय पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी61) के माध्यम से खास ईओएस-09 (RISAT-1B) सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने जा रहा है। यह प्रक्षेपण सुबह 5:59 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इस सैटेलाइट के साथ भारत की रात के समय और हर मौसम में निगरानी की क्षमता को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बादलों के आर-पार देखने की क्षमता यह उपग्रह न केवल बादलों के आर-पार देख सकता है, बल्कि रात के अंधेरे में भी हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकता है। इसके जरिए भारत की अंतरिक्ष से निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूती मिली है, खासतौर पर उस समय जब पाकिस्तान के साथ सीमा पर भले ही अभी शांति हो, लेकिन भारत हर स्थिति को लेकर सतर्क बना हुआ है। यह सैटेलाइट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो के भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (PSLV) के जरिए छोड़ी जाएगी। यह इसरो की अब तक की 101वीं बड़ी रॉकेट लॉन्चिंग है। EOS-9 का वजन 1,696 किलोग्राम है और इसे पृथ्वी की सतह से करीब 500 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। कम रोशनी में भी जमीन की सटीक तस्वीरें इस सैटेलाइट को इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें C-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो हर मौसम में और कम रोशनी में भी जमीन की सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम है। यह "जासूसी सैटेलाइट" भारत के उस सैटेलाइट सिस्टम का हिस्सा बनेगी, जिसमें पहले से ही 50 से अधिक सैटेलाइट अंतरिक्ष में तैनात हैं। इनमें से सात रडार सैटेलाइट्स विशेष रूप से सीमा क्षेत्रों की निगरानी में सक्रिय हैं, जो अप्रैल 22 को हुए पहगाम हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच हुई सैन्य गतिविधियों के दौरान अहम भूमिका में रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी EOS-9 से पहले भारत के पास जो प्रमुख इमेजिंग सैटेलाइट Cartosat-3 थी, वह रात में तस्वीरें नहीं ले पाती थी। EOS-9 इस कमजोरी को दूर करेगी और इससे मिली तस्वीरें पहले से ज्यादा स्पष्ट और सटीक होंगी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को काफी मदद मिलेगी। हाल ही में इसरो अध्यक्ष डॉ वी. नारायणन ने इस मौके पर कहा, "कम से कम 10 सैटेलाइट चौबीसों घंटे देश की सुरक्षा में लगे हैं। भारत को अपनी 7,000 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा और पूरे उत्तरी क्षेत्र की निगरानी करनी होती है। यह सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक के बिना संभव नहीं है।" वहीं, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने इस लॉन्च पर कहा, "सटीकता, टीमवर्क और इंजीनियरिंग भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को शक्ति देती हैं।" इस ऐतिहासिक लॉन्च को देखने के लिए कई सांसद और वैज्ञानिक श्रीहरिकोटा में मौजूद रहे। मुख्य बातें:     अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का यह 101वां मिशन है।     शनिवार सुबह सात बजकर 59 मिनट पर उलटी गिनती शुरू हो गई। कुल 22 घंटे की उलटी गिनती है।     सैटेलाइट का नाम: EOS-9     वजन: 1,696 किलोग्राम     लॉन्च व्हीकल: PSLV     स्थान: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा     खासियत: बादलों के आर-पार और रात में भी हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग     तकनीक: C-बैंड Synthetic Aperture Radar (SAR)     निर्माण: यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में योगदान यह लॉन्च भारत की सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक दोनों के लिए मील का पत्थर है। ईओएस-09 की उन्नत रडार इमेजिंग क्षमता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनाती है। यह सैटेलाइट भारत की सीमाओं और तटीय क्षेत्रों की 24×7 निगरानी करने में सक्षम होगी, जिससे सैन्य और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, यह सैटेलाइट कृषि, वानिकी, बाढ़ निगरानी, मृदा नमी मूल्यांकन, भूविज्ञान, समुद्री बर्फ और तटीय निगरानी जैसे नागरिक अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुल मिलाकर इस मिशन का उद्देश्य देश भर में विस्तारित तात्कालिक समय पर होने वाली घटनाओं की जानकारी जुटाने की आवश्यकता को पूरा करना है। पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट-09 वर्ष 2022 में प्रक्षेपित किए गए ईओएस-04 जैसा ही एक सैटेलाइट है। पीएसएलवी-सी61 रॉकेट 17 मिनट की यात्रा के बाद ईओएस-09 उपग्रह को सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) में स्थापित कर सकता है। सैटेलाइट के वांछित कक्षा में अलग होने के बाद वैज्ञानिक बाद में कक्षा की ऊंचाई कम करने के लिए वाहन पर ‘ऑर्बिट चेंज थ्रस्टर्स’ (ओसीटी) का उपयोग करेंगे। इसरो ने बताया कि ईओएस-09 की मिशन अवधि पांच वर्ष है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सैटेलाइट को उसकी प्रभावी मिशन अवधि के बाद कक्षा से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन आरक्षित कर लिया गया है ताकि इसे दो वर्षों के भीतर कक्षा में नीचे उतारा जा सके, जिससे मलबा-मुक्त मिशन सुनिश्चित हो सके। recent visitors 50

मई में एक साथ मिलेगा तीन महीने का राशन,अगर आपने एक जरूरी काम नहीं क‍िया तो आप इससे हाथ धो सकते हैं

भोपाल शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से हर महीने राशन लेने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए ये महत्वपूर्ण खबर है, राज्य शासन ने आदेश दिया है कि उन्हें तीन महीनों का राशन एकमुश्त दिया जायेगा, यानि जून, जुलाई और अगस्त का राशन हितग्राहियों को एक साथ दिया जायेगा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। संचालनालय ने सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु NFSA/PMGKAY अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री के आवंटन, उठाव एवं वितरण किया जाए। 20 तारीख तक मई का और 21 से जून, जुलाई, आगस्त का राशन मिलेगा निर्देश में कहा गया कि मई हेतु आवंटित राशन सामग्री का वितरण हर हाल में 20 मई तक समस्त पात्र परिवारों को कराया जाए, उसके बाद अगले दिन 21 मई से जून से अगस्त 2025 तक की एकमुश्त राशन सामग्री (PMGKAY, MDM, ICDS, KKY का खा‌द्यान्न, शक्कर एवं नमक) का पात्रतानुसार वितरण कराया जाए। POS मशीन पर तीन महीने के राशन वितरण की सुविधा आदेश में कहा गया है कि जून से अगस्त तक का एकमुश्त आवंटन जारी किया गया है जिसे 31 मई, 2025 तक प्रदाय केन्द्रों पर उठाव कराकर उचित मूल्य दुकानों पर भंडारण सुनिश्चित कराया जाए, पीओएस मशीन में माह जून से अगस्त, 2025 तक की राशन सामग्री माहवार वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है अर्थात् पात्र हितग्राही को राशन प्राप्त करने हेतु माहवार क्रमानुसार पीओएस मशीन पर एथेंटिकेशन किया जाकर राशन का वितरण कराया जाए। मानसून को देखते हुए सरकार का फैसला तीन महीने का राशन एक साथ वितरित कराने का कारण मानसून सीजन बताया गया है, आदेश में कहा गया है की मानसून सीजन में संभावित बाढ़ के कारण राशन सामग्री के परिवहन, भंडारण एवं वितरण में आने वाली समस्याओं के निराकरण एवं पात्र परिवारों को समय-सीमा में राशन सामग्री उपलब्ध करने हेतु ये व्यवस्था की गई है। 3 महीने के राशन से धो बैठेंगे हाथ! अगर 31 मई से पहले नहीं क‍िया ये काम अगर अब भी आप राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराने में आलस दिखाएंगे तो एक नहीं लगातार तीन महीने का गेहूं-चावल और चीनी का नुकसान करा लेंगे। देशभर में तमाम राज्यों में जून-जुलाई और अगस्त का राशन एक साथ देने का फैसला किया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत यूपी, मध्य प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों में तीन महीने का एडवांस राशन दिया जाएगा। 21 मई से राशन मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि अगर आपके राशन कार्ड का ई-केवाईसी नहीं हुआ है तो आपको तगड़ा झटका लग सकता है। इसके बाद राशन सीधे सितंबर में मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ियों को रोकने और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए सभी राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी कराया जाए। सरकारें लगातार इसे लेकर मौके दे रही हैं। बावजूद इसके अभी भी बहुत से लोगों ने ई-केवाईसी नहीं कराया है। यूपी में मई-जून में ही मिलेगा 3 महीने का राशन यूपी सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग की बैठक में तय हुआ है कि मई का राशन 20 मई तक वितरित कर दिया जाएगा। इसके बाद 21 मई से 31 मई तक जून का राशन बांटा जाएगा। फिर 5 जून से 16 जून तक जुलाई का राशन मिलेगा। जून में ही 19 से 30 जून तक अगस्त का राशन भी मिल जाएगा। इसके बाद फिर सीधे सितंबर में राशन मिलेगा। झारखंड में 1 जून से 30 जून के बीच जून, जुलाई और अगस्त का एडवांस राशन मिलेगा। अनुमान के मुताबिक झारखंड में करीब 2.88 करोड़ लाभार्थी हैं, जो सरकार द्वारा सब्सिडी पर मिलने वाला राशन लेते हैं। मध्य प्रदेश में भी 21 मई से तीन महीने का राशन एक साथ मिलना शुरू हो जाएगा। अन्य राज्यों में भी एडवांस राशन बांटने की तैयारी हो गई है। ऐसे करें ई-केवाईसी राशन कार्ड का ई-केवाईसी कराना बहुत ही आसान है। आप मोबाइल से बस 2 मिनट में इस काम को कर सकते हैं। मोबाइल में 2 एप डाउनलोड करें- 'मेरा KYC' और AadhaarFaceRD मोबाइल एप। बस आपको अपना आधार नंबर डालकर लोकेशन के साथ वेरिफाई करना है और फिर मोबाइल कैमरे से अपनी वेरिफिकेशन को पूरा करना है। बस हो गया ई-केवाईसी। आप चाहें तो पास की राशन कार्ड की दुकान पर आधार कार्ड ले जाकर भी यह काम करा सकते हैं। क्यों मिल रहा 3 महीने का एडवांस राशन सरकार द्वारा तीन महीने का एडवांस राशन मिलने को कुछ लोग पाकिस्तान के साथ तनाव के साथ जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है। दरअसल मानसून में कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। राशन का ट्रांसपोर्टेशन, उसका वितरण, स्टोरेज जैसी बहुत सी समस्याएं आती हैं। ऐसे में कोई परिवार इस वजह से भूखा न सोए, इसलिए सरकार मानसून खत्म होने तक का राशन एडवांस में दे रही है। कई बार सरकार ऐसा कदम जरूरत से ज्यादा अनाज उत्पादन की वजह से भी करती है। अंत्योदय अन्न योजना (AAY) राशन कार्ड धारकों को प्रति परिवार 35 किलो राशन दिया जाता है। जबकि पीएचएच कार्ड पर परिवार में प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज दिया जाता है। recent visitors 46

UPSC ने DGP के चयन के लिए तीन IPS के नामों का किया चयन, अरुण देव सहित तीनों के नाम शामिल…

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति होने वाली है। इसको लेकर आज यूपीएससी (UPSC) की सलेक्शन कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए UPSC से 3 अधिकारियों के नाम काे क्लीयरेंस मिल गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थायी डीजीपी बनने की रेस में IPS अरुण देव गौतम के अलावा, IPS पवन देव और IPS जीपी सिंह का नाम शामिल है। वर्तमान में DGP की जिम्मेदारी IPS अरुण देव गौतम के पास है। सरकार ने गौतम को डीजीपी पद की अस्थायी जिम्मेदारी दी है। बताया जा रहा है कि IPS अरुण देव गौतम के लिए प्रदेश के नेताओं की लॉबी लगी हुई है। वहीं IPS पवन देव के लिए बिहार के राजनेता लॉबी कर रहे हैं। इसी तरह से IPS जीपी सिंह के लिए प्रदेश के राजनेताओं के अलावा दिल्ली के राजनेता और अफसर लॉबी कर रहे हैं। इन तीनों में से कोई एक छत्तीसगढ़ पुलिस का स्थायी मुखिया होगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अरुण देव का नाम सबसे टॉप पर है। UPSC से छत्तीसगढ़ वापस आ गई फाइल गृह विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी से सीएम सचिवालय फाइल और लेटर आ चुका है। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने यूपीएससी से आए पत्र पर अंतिम निर्णय लेने की कवायद शुरू कर दी है।जून माह तक नए डीजीपी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा। 4 फरवरी को IPS गौतम को मिली थी डीजीपी की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने 4 फरवरी को आईपीएस अरुण देव गौतम को डीजीपी की अस्थायी जिम्मेदारी दी थी। इस संबंध में गृह विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किया था। जिस समय आईपीएस गौतम को डीजीपी बनाया गया था, उस समय उनके पास नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक की भी जिम्मेदारी थी। स्थायी DGP की रेस में शामिल IPS वर्तमान में यहां हैं पदस्थ     IPS अरुण देव गौतम: अस्थायी डीजीपी, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक     IPS पवन देव: चेयरमेन पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन     IPS जीपी सिंह: डीजी पीएचक्यू पहले मुख्यमंत्री सीधे करते थे डीजीपी की नियुक्ति छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री खुद ही डीजीपी की नियुक्ति करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर कोई निर्धारित नियम नहीं था। 2011 में एएन उपध्याय की नियुक्ति के बाद तक यूपीएससी को नाम भेजने का नियम लागू नहीं हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जानी चाहिए। साथ ही अगर नियुक्ति के बाद छह महीने से कम समय में रिटायरमेंट का समय बचा हो, तो भी उन्हें दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। छत्तीसगढ़ में इस गाइडलाइन का पालन करते हुए, अशोक जुनेजा को इसका लाभ मिला था। अब इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ को जल्द ही अपना नया और पूर्णकालिक डीजीपी मिलेगा, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभालेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल: यूपीएससी सलेक्शन कमेटी केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल तैयार कर भेजेगा। वहां से छत्तीसगढ़ सरकार को फिर पेनल आएगा। जिस पर मुख्यमंत्री को अधिकार होगा कि वह इन तीन नामों के पेनल में से किसी एक नाम पर वे टिक लाएंगे, हालांकि, पहले डीजीपी की नियुक्ति मुख्यमंत्री सीधे करते थे। और एएन उपध्याय की नियुक्ति होने तक यूपीएससी को नाम भेजने का कोई नियम नहीं बना था। मुख्यमंत्री उस समय सीधे डीजीपी अपाइंट करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके बाद गाइडलाइन आ गया, जिसके अब कम-से-कम दो साल के लिए डीजीपी की नियुक्ति होगी। अशोक जुनेजा को इसका लाभ : इसके साथ ही अगर उनकी नियुक्ति के बाद रिटायरमेंट में छह महीने भी टाईम बचा हो तो भी उन्हें दो साल का नियुक्ति के बाद अवसर दिया जाएगा। इसका लाभ छत्तीसगढ़ में अशोक जुनेजा को मिला है।छह महीने से छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए मामला यूपीएससी में लटका था। वहीं इससे पहले डीपीसी हुई भी मगर जीपी सिंह की इंट्री के बाद एक बार फिर से कई तरह की जानकारियां राज्य सरकार से  यूपीएससी ने मंगवाई थी। ज्ञात हो कि डीजीपी सलेक्शन के लिए  सरकार ने दिसंबर 2024 में प्रस्ताव भेज दिया था। लेकिन अब यह समझा जाता है कि भारत सरकार को यूपीएससी जल्द अब पेनल बनाकर भेज सकती है। recent visitors 56