मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में परस्पर कनेक्टिविटी बढ़ाना आवश्यक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हो रहा है। जनसामान्य को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नगरीय क्षेत्रों के व्यवस्थित नियोजन को समय रहते सही दिशा देना जरूरी है। इंदौर-उज्जैन-देवास-धार और भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर प्रदेश में दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के नगरीय निकायों और विकास प्राधिकरणों के प्रबंधन को सशक्त करते हुए संस्थाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रस्तावित क्षेत्रों में वर्तमान में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। मेट्रोपॉलिटन के रूप में विकास से यहां निवेश और औद्योगिक विकास की प्रक्रिया तेज होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन एरिया गठन से संबंधित बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित बैठक में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नागरीय विकास एवं आवास श्री संजय शुक्ला सहित अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में परस्पर कनेक्टिविटी बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिए बसाहटों, यातायात, सार्वनिक परिवहन, अधोसंरचना, जल आपूर्ति, सीवरेज, विद्युत आपूर्ति, और प्रकाश व्यवस्था आदि की समन्वित रूप से कार्ययोजना बना कर गतिविधियों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इन वृहद क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता, कृषि योग्य भूमि के संरक्षण, वन प्रबंधन, जल ग्रहण और पर्यटन की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ नीतियां निर्धारित की जाएं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की पंचायतों को आवश्यकतानुसार नगर परिषद के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तामिलनाडु में मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास एवं प्रबंधन के लिए विद्यमान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।   recent visitors 27

FPI ने बोरा भर-भरकर डाला भारतीय शेयर बाजार में पैसा, तोड़ दिया रिकार्ड

मुंबई फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने शुक्रवार को भी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा और रिकॉर्ड 8,831.1 करोड़ रुपए शेयर बाजार में निवेश किए. 27 मार्च के बाद एफपीआई इनफ्लो का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शनिवार को आए डेटा में यह जानकारी मिली. इससे पहले एफपीआई ने 5,746.5 करोड़ रुपए शेयर बाजार में निवेश किए थे. मई में किया 18,620 करोड़ रुपए का निवेश नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के डेटा के मुताबिक, मई में अब तक एफपीआई की ओर से 18,620 करोड़ रुपए शेयर बाजार में निवेश किए गए हैं. बीते एक महीने से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश कर रहे हैं. अप्रैल में एफपीआई इनफ्लो 4,223 करोड़ रुपए था. इससे पहले के तीन महीनों – जनवरी, फरवरी और मार्च में एफपीआई शुद्ध विक्रेता थे और क्रमश: 78,027 करोड़ रुपए, 34,574 करोड़ रुपए और 3,973 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी. DII भी बने शुद्ध खरीदार, 5,187.1 करोड़ रुपए का किया निवेश विदेशी निवेशकों के अलावा घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) भी शुक्रवार को शुद्ध खरीदार थे और करीब 5,187.1 करोड़ रुपए का निवेश शेयर बाजार में किया. विदेशी और घरेलू निवेशकों की शुद्ध खरीदारी के बाद भी बीते सत्र में बाजार लाल निशान में बंद हुए थे. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 200.15 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,330.59 और निफ्टी 42.30 अंक या 0.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,019.80 पर था. मिडकैप, स्मॉलकैप में देखी गई खरीदारी लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 529.65 अंक या 0.94 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,060.50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 320 अंक या 1.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,560.40 पर था. मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद भी व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 2,607 शेयर हरे निशान में, 1,380 शेयर लाल निशान में और 139 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए. एचडीएफसी सिक्योरिटीज, वरिष्ठ डेरिवेटिव और तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक, नंदीश शाह ने कहा, "निफ्टी का रुझान तेजी का है और लगातार अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है. फिलहाल निफ्टी के लिए 25,207 एक रुकावट का स्तर है और सपोर्ट 24,800 पर है."  एफपीआई के साथ-साथ घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 5,187.1 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। हालांकि विदेशी और घरेलू दोनों निवेशकों की भारी खरीदारी के बावजूद शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 200.15 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,330.59 पर और निफ्टी 42.30 अंक या 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,019.80 पर बंद हुआ। हालांकि लार्जकैप स्टॉक्स में कमजोरी रही, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 529.65 अंक या 0.94 प्रतिशत चढ़कर 57,060.50 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 320 अंक या 1.86 प्रतिशत चढ़कर 17,560.40 पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर भी बाजार का व्यापक रुझान सकारात्मक रहा। कुल 2,607 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि 1,380 शेयरों में गिरावट और 139 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ डेरिवेटिव और तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक नंदीश शाह ने कहा कि निफ्टी का रुझान अब भी तेजी का है और यह अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि निफ्टी के लिए 25,207 एक प्रमुख रुकावट स्तर है, जबकि 24,800 पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। -(IANS)   recent visitors 42

बीजेपी अब जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को सार्वजनिक जीवन में मंचों से बोलने का प्रशिक्षण देने की करेगा शुरुआत

भोपाल  भाजपा के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों, विधायकों की सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की धूमिल होती छवि के चलते अगले महीने से भाजपा का स्पीकिंग कोर्स शुरू हो सकता है। मध्य प्रदेश भाजपा में जिस तरीके से पार्टी के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों के विवादास्पद बयान सामने आ रहे हैं, उसके चलते न केवल पार्टी बल्कि सरकार की भी छवि धूमिल होती जा रही है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी अब जिम्मेदार पदों पर बैठे अपने तमाम नेताओं को सार्वजनिक जीवन में मंचों से बोलने का प्रशिक्षण देने की शुरुआत करने जा रही है। माना जा रहा है कि बीजेपी जून से यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश में शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि जिस तरह विधानसभा सत्र से पहले भाजपा अपने विधायक दल की बैठक में तय कर लेती है कि किस तरीके से विधानसभा में सरकार का पक्ष रखना है, कैसे विपक्ष को घेरना है, ऐसी बयानबाजी से बचाना है जिसके चलते विधानसभा सत्र के दौरान सरकार पर सवाल ना उठे। इसके साथ ही जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर उन्हें हर मुद्दे पर बोलने से सार्वजनिक बयान बाजी से, रोकने के गुण सिखाता है उसी तर्ज पर भाजपा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करने की शुरुआत करेगी। इसमें बाकायदा भाजपा मीडिया प्रबंधन के प्रोफेशनल एक्सपर्ट के जरिए सार्वजनिक मंचों पर कैसे बोला जाए, विवादित मुद्दों से कैसे बचा जाए, सरकार पर विपक्ष के हमले का कैसे जवाब दिया जाए, इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। दरअसल बीते दिनों जिस तरीके से मंत्री विजय शाह की ऑपरेशन सिंदूर की आइकॉन बनी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए बयान के चलते भाजपा की और सरकार की अंतरराष्ट्रीय किरकिरी हुई, उसके बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के सेना पर दिए गए अपमानजनक बयान के बाद भाजपा और सरकार हाशिये पर आई भाजपा ने तय कर लिया है कि मंत्री, सांसदों, विधायक जैसे तमाम दिग्गज नेताओं को सार्वजनिक जीवन में बोलने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। किन बयानों के चलते हुई सरकार और पार्टी की किरकिरी?     मंत्री विजय शाह के ऑपरेशन सिंदूर की आइकॉन कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई बदजुबानी     डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का बयान     मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल द्वारा 2024 में अपने बेटे के मारपीट के मामले में भोपाल के थाने में हंगामा किए जाने के मामले के बाद ग्वालियर के होटल में छापामार कार्रवाई से हुआ विवाद     मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में आवेदन लेकर आने वाली जनता को भिखारी बताना     विधायक भूपेंद्र सिंह और मंत्री गोविंद सिंह के बीच सार्वजनिक बयानबाजी के चलते पार्टी की छवि धूमिल होना     मंत्री नगर सिंह द्वारा अपना वन विभाग का मंत्री पद छिनने के बाद सरकार और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी   recent visitors 65

सांची विकासखंड के रतनपुर गांव में प्रदेश की पहली डिजिटल आंगनबाड़ी, नई तकनीक से पढ़ाई कर रहे बच्चे

रायसेन  सांची विकासखंड के रतनपुर गांव में मध्य प्रदेश की पहली डिजिटल आंगनबाड़ी का उद्घाटन किया गया है. इस मौके पर भोपाल कमिश्नर संजीव सिंह, जिला कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ अंजू पवन भदौरिया, महिला एवं बाल विकास अधिकारी मौजूद रहे. इस आंगनबाड़ी केंद्र को डिजिटल रूप में डेपलप किया गया. इसमें स्मार्ट टीवी, तीन सैमसंग टैबलेट, अलेक्सा डिवाइस और आईआईटी दिल्ली द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम है. बच्चे प्राइवेट स्कूल छोड़ यहां एडमिशन ले रहे हैं. बच्चों के शैक्षणिक स्तर में हुआ सुधार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शकुन ने बताया, "जब से आंगनवाड़ी का डिजिटलीकरण हुआ है, यहां बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है. यहां बच्चे डिजिटल डिवाइस के माध्यम से भविष्य की तकनीक को जान रहे हैं. साथ ही इन बच्चों का शैक्षणिक स्तर भी सुधर रहा है. किसी समय इस आंगनबाड़ी में 5 से 10 बच्चे ही आया करते थे, लेकिन आंगनबाड़ी का डिजिटलीकरण होने से यहां की तस्वीर बदल गई है. अब निजी संस्थानों को छोड़कर बच्चे इस आंगनबाड़ी में पढ़ने आ रहे हैं. यह सब संभव हो पाया है भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे ग्रामीण क्षेत्र के डिजिटलीकरण के कारण." दीवारों पर उकेरी गई पाठ्य सामग्री रतनपुर ग्राम में बनाई गई डिजिटल आंगनवाड़ी में बच्चों के लिए टैबलेटों के साथ बड़ी एलईडी टीवी लगाई गई है. साथ ही इस आंगनबाड़ी की दीवारों पर सुंदर चित्रकारी भी उकेरी गई है. छत हो या दीवारें सबको बच्चों की रुचि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. दीवारों पर ABCD, 123 और हिंदी वर्णमाला के शब्दों को इस तरह से प्रदर्शित किया गया है कि बच्चे आसानी से आकर्षित होकर इन्हें सीख सकें. साथ ही आंगनबाड़ी में पदस्थ कार्यकर्ताओं को भी विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जिससे कि वह बच्चों को डिजिटल डिवाइस के माध्यम से भविष्य की तकनीक से रूबरू करा सकें. डिजिटलीकरण के बाद बच्चों की बढ़ी संख्या आंगनबाड़ी में बच्चों को सैनिटाइजर से अपने हाथों की साफ सफाई के बारे में भी सिखाया जा रहा है. बच्चे डिजिटल डिवाइस में चित्रकारी करते हैं, पढ़ाई करते हैं और नए-नए शब्दों को सीखते हैं. इन बच्चों को यहां पर भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है. पूरा प्रांगण इस तरह से तैयार किया गया है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे यहां पर आ सके और नई-नई चीजें सीख सकें. डिजिटल आंगनबाड़ी तैयार होने के बाद से यहां पर बच्चों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. परिजन काफी खुशी से अपने बच्चों को भेज रहे हैं. यहां बच्चों के खेलने का भी इंतजाम किया गया है. बच्चों को सिखाने का नया प्रयोग महिला बाल विकास अधिकारी दीपक संकत ने कहा, "भारत सरकार के यूआईडीएआई डिपार्टमेंट के माध्यम से देश के कुछ राज्यों में डिजिटल आंगनबाड़ी केंद्र शुरू किए गए हैं, जो एक नया प्रयोग है. इन आंगनबाड़ी केंद्रों में जो बच्चे हैं, उनकी डिजिटल उपकरणों के जरिए नई तरह से पढ़ाई करवाई जा रही है. इसमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य और शब्दों को पहचानने के लिए रंगों को पहचानने के लिए हिंदी और अंग्रेजी भाषा में पढ़ाई करवाई जाती है." भारत सरकार ने स्वीकृति किया प्रस्ताव दीपक संकत ने कहा, "जिला कलेक्टर के निर्देश पर हमने भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था. भारत सरकार ने हमारे प्रस्ताव को मानते हुए पूरे मध्य प्रदेश में सिर्फ रायसेन जिले के सांची विकासखंड में 2 डिजिटल आंगनबाड़ियों की स्वीकृति दी है, जिनमें आधुनिक शिक्षा दी जा रही है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई करवा रही हैं. उन्हें टैबलेट दिए गए हैं, जिनके माध्यम से वस्तुओं की आकृति स्क्रीन पर थ्री डाइमेंशनल तरीके से बनाकर बच्चों को पढ़ाया जाता. बच्चे उसे आसानी से देखकर छूकर समझ सकते हैं. डिजिटलीकरण से आसानी से सीख रहे बच्चे ग्राम रतनपुर की आंगनबाड़ी केंद्र में आदिवासी बच्चे आते हैं. पहले इस आंगनबाड़ी में बच्चे रूटीन की पढ़ाई में विशेष रुचि नहीं लेते थे, जब से आधुनिक कारण किया गया है तब से बच्चों की संख्या के साथ उपस्थित बढ़ गई है. परिजन भी अपने बच्चों को यहां लेकर आते हैं. अब स्थिति ऐसी है कि बच्चों को अंक समझ में आते हैं. शब्दों के आकार और उनसे जुड़े हुए अर्थ भी समझ आते हैं.   दिल्ली आईआईटी की टीम ने किया निरीक्षण वहीं, दिल्ली से यहां थर्ड पार्टी ऑडिट भी हुआ था, जहां दिल्ली आईआईटी की पांच सदस्य टीम ने तीन से चार दिन यहां रुक कर आंगनबाड़ी की उपयोगिता का आकलन किया. उन्होंने बच्चों के माता-पिता से भी संपर्क किया और उनसे बात की. परिजन ने बताया कि उनके बच्चे रायसेन शहर के सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल में जाया करते थे. उन्होंने अपने छोटे बच्चों का दाखिला इस आंगनबाड़ी में सिर्फ इसलिए करवा दिया क्योंकि यहां पर शिक्षा का स्तर निजी स्कूलों से अच्छा है. recent visitors 34

इंदौर : राजवाड़ा में होगी 20 मई को कैबिनेट बैठक, अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई

 इंदौर इंदौर का दिल कहे जाने वाले राजवाड़ा पैलेस में 20 मई को प्रदेश सरकार बैठक करने जा रही है। अलग-अलग विभाग इसकी तैयारियों में जुट गए है। राजवाड़ा के गणेश हाॅल में बैठक होगी। वहां की रंगाई-पुताई,फर्श की सफाई की जा रही है। कैबिनेट बैठक के बाद पैलेस के खुले हिस्से में भोजन की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए डोम भी बनाया जाएगा। अब बैठक में तीन दिन शेष है। इस कारण राजवाड़ा पैलेस को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। अब राजवाड़ा पैलेस पर्यटकों के लिए 20 मई के बाद ही खुलेगा। यहां हर दिन शाम को लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाता है। वह भी फिलहाल बंद रहेगा।  कैबिनेट बैठक की तैयारियों के मद्देनजर अफसरों ने राजवाड़ा पैलेस और उद्यान का दौरा भी किया। संभावित बारिश के मद्देनजर भी व्यवस्थाएं जुटाने के लिए कहा गया है।  पहला मौका है जब शहर में कैबिनेट बैठक होने जा रही है। इससे पहले इंदौर जिले के उज्जैनी में नर्मदा-शिप्रा संगम स्थल पर बैठक आयोजित की गई थी। देवी अहिल्या की 300 वीं जयंती के मौके पर राजवाड़ा के पैलेस में बैठक करने का फैसला लिया गया है।   इंदौर में कैबिनेट बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में प्रदेश के अलग-अलग एजेंडों पर चर्चा होगी और उन्हे मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव लालबाग पैलेस के गार्डन और राजवाड़ा पैलेस के कामों का भी भूमिपूजन करेंगे। बैठक से पहले राजवाड़ा चौक पर लगी देवी अहिल्या की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव जाएंगे। नगर निगम 20 लाख रुपये खर्च कर उद्यान को भी संवार रहा है।   200 साल पुराना है राजवाड़ा राजवाड़ा 200 साल पुराना है। 1984 के दंगों में राजवाड़ा का एक हिस्सा जल गया था। 25 साल पहले राजवाड़ा की जीर्णद्धार किया गया था। इसके बाद चार साल पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 20 करोड़ रुपये से राजवाड़ा को नया स्वरुप दिया गया। राजवाड़ा होलकर राज परिवार का राज दरबार था। देवी अहिल्या ने तो अपनी राजधानी महेश्वर को बनाया था, लेकिन बाद में यशवंत राव होलकर, तुकोजीराव होलकर ने इंदौर में रहकर राज चलाया। कौन क्या देखेंगे…? ● मुख्य आयोजन स्थल राजबाड़ा : अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, एसडीएम निधि वर्मा व तहसीलदार नारायण नांदेड़ा ● सीएम ग्रीन रूम : एसडीएम सीमा कनेश व तहसीलदार विकास रधुवंशी ● अहिल्या प्रतिमा स्थल : निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ● अतिथि सत्कार व प्रतीक चिन्ह वितरण : आइडीए सीईओ आरपी अहिरवार व संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव ● राजबाड़ा प्रवेश द्वार : एसडीएम गोपाल वर्मा व तहसीलदार याचना दीक्षित ● अस्थाई सीएम कार्यालय : एसडीएम कल्याणी पांडे व आइटी अधिकारी शीतल पाठक ● सीएम घोषणा संबंधी – जिला योजना अधिकारी माधव बेंड़े ● पर्यटन स्थल भ्रमण व भोजन : नगर निगम अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा व खाद्य आपूर्ति अधिकारी एमएल मारू ● पार्किंग व बसों की व्यवस्था : एसडीएम विजय मंडलोई व आरटीओ प्रदीप शर्मा ● रेसीडेंसी कोठी : एसडीएम प्रियंका चौरसिया ● होटल : अपर कलेक्टर राजेंद्र रघुवंशी ● सेफ हाऊस : नायब तहसीलदार दयाराम निगम ● कंट्रोल रूम : नायब तहसीलदार धर्मेंद्र चौहान व अजय अहिरवार ● स्वास्थ्य व्यवस्था : सीएमएचओ बीएस सैत्या व सिविल सर्जन गिरधारी लाल सोढ़ी   recent visitors 35

आपरेशन सिंदूर में एल-70 गन का प्रभावी प्रदर्शन, उत्पादन शुरू करने की योजना

जबलपुर  पाकिस्तान के खिलाफ आपरेशन सिंदूर में अपने अचूक निशाने से सबसे सटीक प्रदर्शन करने वाली एंटी एयरक्राफ्ट गन एल-70 ने आर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) को अपने उत्पादन पर गर्व करने का अवसर दे दिया है। यह एडवांस वर्जन है और एल-70 गन ओएफके का ही उत्पादन है। करीब तीन साल पहले तक सेना को बनाकर दिया जा रहा था। शांति काल के कारण इसकी उपयोगिता सीमित होने से रक्षा उत्पादन बंद था। लेकिन हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में जिस तरह दुश्मन के लक्ष्य को भेदने में एल-70 सफल हुई और भारतीय सेना की एक मजबूत ताकत बनकर उभरी, इसे ध्यान में रखते हुए ओएफके इसके एक बार फिर ट्रायल उत्पादन की तैयारियों में जुटा हुआ है। संभावना है कि उत्पादन जल्द शुरू हो सकता है। इन हाउस तैयारियों को पुख्ता किया जा रहा सूत्रों के अनुसार म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) की एक इकाई ओएफके एल-70 के ट्रायल उत्पादन शुरू करने से पहले इन हाउस तैयारियों को पुख्ता करने के साथ मंथन में जुटा है। सेना से रक्षा उत्पादन को हरी झंडी मिलने के बाद कार्य के गति पकड़ने की संभावना है। इस बीच ओएफके शानदार रक्षा उत्पादन से आयुध क्षेत्र में उसकी साख में काफी इजाफा हुआ है। पूर्व में निजी कंपनियों से उसे चुनौती मिल रही थी। लेकिन अपने रक्षा उत्पादन में निर्माणी ने स्वदेशी तकनीक का भरपूर इस्तेमाल करने के साथ गुणवत्ता का भी विशेष ख्याल रखा है। यही कारण है कि देश की सेना का निर्माणी पर हमेशा से भरोसा कायम रहा है और उसके उत्पादन सटीक प्रदर्शन करते रहे हैं। महत्वपूर्ण है कि यह पूर्व में एक स्वीडिश निर्मित 40 मिमी एंटी-एयरक्राफ्ट गन है, जिसे बाद में आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाते हुए पूर्णत: स्वदेशी तकनीक की मदद से अपग्रेड किया गया। भारतीय सेना और वायुसेना की निम्न-ऊंचाई वाली रक्षा का हिस्सा है। एल-70 ने पाकिस्तानी ड्रोनों को नष्ट करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से पंजाब और जम्मू-कश्मीर क्षेत्रों में इसकी सटीकता और तेजी से फायरिंग ने इसे प्रभावी बनाया। एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन को जानें रेंज : करीब पांच किलोमीटर तक मारक क्षमता लक्ष्य : ड्रोन, हेलिकॉप्टर और निम्न-उड़ान वाले विमान गति : 300 राउंड प्रति मिनट मार्गदर्शन प्रणाली : राडार-आधारित फायर कंट्रोल सिस्टम सशस्त्र बलों में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन सशस्त्र बलों में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली एयर-डिफेंस गन है। सेना के पास इसकी बड़ी खेप हमेशा से रही है। पहली बार 1960 के दशक के अंत में स्वीडिश कंपनी से खरीदा गया था और बाद में आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) द्वारा निर्मित करने का लाइसेंस दिया गया था। मिराज व सुखोई की चर्चा में एरियल बम की धमक ऑपरेशन सिंदूर में अपने प्रभावी प्रदर्शन से दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाला मिराज व सुखोई लड़ाकू विमानों ने जिन बमों का प्रयोग किया, वे ओएफके ने ही बनाए थे। लड़ाकू विमानों के लिए 250 किग्रा क्षमता और 450 किग्रा क्षमता के एरियल बम व थाउजेंड पाउंडर बम सफल साबित हुए हैं। recent visitors 27

बुदनी मेंकिसानों को खेती के अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग और ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा

 सीहोर सीहोर के बुदनी नगर के केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान में देश का पहला ग्री ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर खोला जा रहा है। किसानों को खेती की सुरक्षा का ड्रोन के जरिए प्रशिक्षण देने के लिए इस संस्थान में ड्रोन सियुलेशन लैब बनकर तैयार हो गई है। एक ड्रोन भी लैब में आ गया है। बताया जा रहा है कि 25 मई को इसका शुभारंभ हो सकता है। महिलाओं को भी दी जाएगी ट्रेनिंग ड्रोन प्रशिक्षण सेंटर में किसानों को खेती के अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग और ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को खेती में उपयोग की जा रही हाईटेक पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षित करना है। बताया जा रहा है कि इस सेंटर पर महिलाओं को भी ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे अपने परिवार में पुरुष किसानों के साथ तकनीकी का फायदा उठाकर खेती में हाथ बंटा सकें। अफसर बता रहे हैं कि प्रशिक्षित किसान नई तकनीकों का प्रयोग कर अपनी आय को बढ़ा सकेंगे, जिससे वे खेती के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। किसानों के लिए ड्रोन खेती एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो फसलों की निगरानी, छिड़काव और फसल निरीक्षण में मददगार है। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। ड्रोन के लिए उपयुक्त बुदनी का केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान 1955 में बना था। यह ड्रोन उड़ाने के लिए उपयुक्त व ग्रीन जोन है। सुरक्षा कारणों से कहीं भी ड्रोन को उड़ाना मना है, लेकिन बुदनी का केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान इसके लिए उपयुक्त है। यह ड्रोन पायलट प्रशिक्षण केंद्र 20 सीट का है। किसानों के प्रशिक्षण के लिए इसमें रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 10वीं पास किसान ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण ले सकेंगे। बुदनी में यह पूरा सेंटर ड्रोन इंस्ट्रक्टर राय सिंह गुर्जर, डायरेक्टर पीपी राव, ट्रेनिंग हेड अनिल कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ कृषि अभियंता जीआर अंवालकर के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की टीम जल्द ही इसका निरीक्षण करेगी, उसके बाद यहां ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण देना शुरु हो जाएगा। ड्रोन का कृषि में उपयोग     फसल निगरानी ड्रोन का उपयोग फसलों की निगरानी करने, उनकी वृद्धि और स्वास्थ्य की जांच करने में किया जा सकता है।     ड्रोन का उपयोग सिंचाई प्रणाली की निगरानी करने और पानी की बचत करने में किया जा सकता है।     ड्रोन का उपयोग कीटनाशक और उर्वरक छिडकाव में किया जा सकता है, जिससे समय और श्रम की बचत होती है।     ड्रोन का उपयोग फसल कटाई में भी किया जा सकता है, खासकर उन फसलों के लिए जो ऊंचाई पर उगाई जाती हैं।     मिट्टी की जांच ड्रोन का उपयोग मिट्टी की जांच करने और उसकी गुणवत्ता का विश्लेषण करने में किया जा सकता है। …..   recent visitors 42