भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश,भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी : मोहन भागवत

जयपुर जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शक्ति हो तो दुनिया प्रेम की भाषा भी सुनती है. उन्होंने अपने भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति और त्याग की परंपरा को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास में भगवान श्री राम से लेकर भामाशाह जैसे महान व्यक्तित्वों ने त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व को धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है. धर्म के माध्यम से ही मानवता की उन्नति संभव है. उन्होंने विशेष रूप से हिंदू धर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण माना और कहा कि विश्व कल्याण हमारा प्रमुख धर्म है.  उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश बताते हुए कहा कि भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी है. विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में प्रायसरत! मोहन भागवत का कहना है कि भारत विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता लेकिन जब तक आपके पास शक्ति नहीं होगी, तब तक विश्व प्रेम और मंगल की भाषा नहीं समझेगा. इसलिए उनके मुताबिक, विश्व कल्याण के लिए शक्ति का होना आवश्यक है, और ये कि हमारी ताकत विश्व ने देखी है. शक्ति ही एक माध्यम है! मोहन भागवत ने यह भी बताया कि शक्ति ही वह माध्यम है जिससे विश्व में भारत अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है और वह पहले भी कह चुके हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रसार भी तभी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्वभाव विश्व का है, इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी प्रशंसा की, और कहा कि ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए संस्कृति और धर्म की रक्षा कर रहे हैं.   recent visitors 56

राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या

नई दिल्ली भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट की सलाह मांगी है कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए निर्धारित समयसीमा देश की सर्वोच्च अदालत के द्वारा तय की जा सकती है। यह कदम तब उठाया गया जब 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों को राष्ट्रपति को तीन माह में निपटाना होगा। क्या है अनुच्छेद 143(1)? संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत राष्ट्रपति किसी कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं। यह राय बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका संवैधानिक महत्व काफी अधिक होता है। सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी जाती है। राष्ट्रपति ने यह संदर्भ 13 मई को भेजा और इसमें कुल 14 कानूनी प्रश्न शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट क्या पहले भी राय देने से मना कर चुका है? सुप्रीम कोर्ट ने दो बार राष्ट्रपति की राय मांगने पर जवाब देने से इनकार किया है। 1993 में जब राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद में मंदिर की पूर्वस्थिति पर राय मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने धार्मिक और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले 1982 में पाकिस्तान से आए प्रवासियों के पुनर्वास संबंधी कानून पर राय मांगी गई थी, लेकिन बाद में वह कानून पारित हो गया और कोर्ट में याचिकाएं दायर हो गईं, जिससे राय अप्रासंगिक हो गई। कब-कब सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राय? संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सबसे पहले महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली लॉज एक्ट- 1951 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी. केरल शैक्षणिक बिल- 1957 पर संदर्भ को संवैधानिक तौर पर व्याख्या करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर नरसिंह राव सरकार के समय भेजे गए संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों से जुड़े मामलों में राय देना अनुच्छेद 143 के दायरे में नहीं आता है. साल 1993 में कावेरी जल विवाद मामले के संदर्भ पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राय देने से मना कर दिया था. साल 2002 में गुजरात चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपील या पुनर्विचार याचिका दायर करने के बजाय 143 के तहत संदर्भ भेजा जाना सांविधानिक तौर पर गलत विकल्प है. हालांकि, पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की तरह संदर्भ पर राय बाध्यकारी नहीं होना संविधानिक तौर पर विचित्र है. राज्यपाल मामले से जुड़े कुछ पहलू 2G मामले में यूपीए सरकार के संदर्भ से मेल खाते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने 122 फर्म और कंपनियों के 2G लाइसेंस पर स्पेक्ट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था. तब केंद्र ने उसे फैसले के खिलाफ संदर्भ भेजते हुए पूछा था कि क्या नीतिगत मामलों में सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी होनी चाहिए. दरअसल, केशवानंद भारती मामले में संविधान पीठ के फैसले के अनुसार नीतिगत मामलों में संसद और केंद्र के निर्णय पर अदालतों की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल मामले में क्या हुआ? राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो जजों ने दिया था. कानूनविदों की मानें तो इस मामले में कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई होनी चाहिए थी. दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को उन विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित किया. आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए एक समय-सीमा निर्धारित कर दी थी. इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से सुप्रीम कोर्ट से सवाल किए गए हैं कि जबकि संविधान में ऐसा जिक्र नहीं है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे दी. कानूनविद दो जजों की पीठ के फैसले पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि पूर्व में दिया गया सर्वोच्च अदालत की बड़ी पीठ का फैसले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की सीमा तय की गई है. दूसरी ओर संविधान में राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास विधायक कितने दिन लंबित रहेगा, इसका जिक्र नहीं है. संविधान में जो प्रावधान नहीं है उसकी व्याख्या करके सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रावधान बना दिए. जबकि केशवानंद भारती फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट को कानून निर्माण या संविधान संशोधन की शक्ति नहीं है सरकार की खामियों, कानून के निर्वात को ठीक करने के लिए जजों को संरक्षक की भूमिका मिली है. लेकिन यह साफ है कि राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए संदर्भ पर अगर सुप्रीम कोर्ट आगे बढ़ता है यानी राय देता है तो वह बाध्यकारी नहीं होगी. वह महज एक राय, सलाह या मशविरा होगा. क्या राष्ट्रपति निर्णय को पलटना चाहती हैं? सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 143 का उपयोग किसी पहले से दिए गए निर्णय की समीक्षा या पलटने के लिए नहीं किया जा सकता है। 1991 में कावेरी जल विवाद पर कोर्ट ने कहा था कि निर्णय देने के बाद उसी विषय पर राष्ट्रपति की राय मांगना न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है। यदि सरकार चाहे तो वह पुनर्विचार याचिका या क्युरेटिव याचिका दायर कर सकती है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राष्ट्रपति ने पूछे कैसे प्रश्न? अधिकांश प्रश्न 8 अप्रैल के फैसले से जुड़े हैं, लेकिन अंतिम कुछ प्रश्नों में सुप्रीम कोर्ट की स्वयं की शक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रश्न 12 में पूछा गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को पहले यह तय करना चाहिए कि कोई मामला संविधान की व्याख्या से जुड़ा है या नहीं, ताकि उसे बड़ी पीठ को भेजा जा सके? इसी तरहा प्रश्न 13 में पूछा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के प्रयोग की सीमा क्या है। प्रश्न संख्या 14 में पूछा गया है कि केंद्र-राज्य विवादों की मूल सुनवाई का अधिकार किसके पास है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास या अन्य अदालतों के पास … Read more

व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने 11 लोगों को पाया दोषी, आरोपियों को सुनाई 3-3 साल की सजा, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

भोपाल  मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शुक्रवार को भोपाल सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। एमपी पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से सिलेक्ट होने वाले 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत ने सभी को तीन-तीन साल जेल और 16-16 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।    फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। फैसला सुनाते वक्त अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी।  फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई अधिकारी और नेताओं पर इसकी आंच आई थी। कोर्ट का फैसला मामले का खुलासा होने पर राजधानी के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसपर अब सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों ने 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की कि, शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है। इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाला बहुचर्चित फर्जीवाड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था, जिसके अंदर सरकार की तरफ से आयोजित होने वाली कई भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह फर्जी अभ्यर्थियों ने परीक्षाएं दी थी। याद हो कि, व्यापमं घोटाला सामने आने के बाद कई अधिकारियों के साथ-साथ नेताओं तक पर इसकी जांच की आंच आई थी।   recent visitors 24

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर दी हार्दिक बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा पूज्य संत, पद्मविभूषित जगद्गुरु तुलसीपीठाधीश्वर, रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है। उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, विद्वता और करुणा का अनुपम संगम है। उन्होंने शारीरिक सीमाओं के बावजूद ज्ञान, संस्कृति और संस्कृत साहित्य के संवर्धन हेतु जो कार्य किया है, वह समूचे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सम्मान वास्तव में उस सनातन चेतना का सम्मान है, जो भारत की आत्मा में प्रवाहित होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जगद्गुरु जी ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है। वे तुलसीपीठ, चित्रकूट के अधिष्ठाता हैं और शिक्षा, दिव्यांगजन सेवा व धर्म के क्षेत्र में अनेक संस्थाओं के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।   recent visitors 26

ऑपरेशन सिंदूर : शहबाज शरीफ ने खुद बताया, भारत के हमले से कहां-कहां हुआ नुकसान

इस्लामाबाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत भारतीय वायुसेना के जवाबी हमले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि भारतीय बैलेस्टिक मिसाइलों ने 9-10 मई की मध्यरात्रि में पाकिस्तान के कई एयरबेस, खासकर नूरखान एयरबेस को निशाना बनाया।     शहबाज शरीफ के अनुसार, वजीर-ए-आजम को यह सूचित किया गया कि नूरखान एयरबेस पर मिसाइलें गिरी हैं, जिसके बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने स्वदेशी तकनीक और आधुनिक चीनी लड़ाकू विमानों पर अत्याधुनिक गैजेट का उपयोग कर बचाव किया। मुनीर ने 2.30 बजे फोन करके हमलों के बारे में बताया शरीफ ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं से कहा कि जनरल मुनीर ने मुझे सुबह 2.30 बजे व्यक्तिगत रूप से फोन करके हमलों के बारे में जानकारी दी। यह गंभीर चिंता का क्षण था। भाजपा के राष्ट्रीय आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए इस घटना को ऑपरेशन सिंदूर की साहस और दक्षता का प्रमाण बताया। हमले में नूरखान एयरबेस समेत कई ठिकाने हुए तबाह मालवीय ने लिखा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद माना है कि जनरल असीम मुनीर ने उन्हें रात 2.30 बजे फोन करके बताया कि भारत ने नूर खान एयर बेस और कई अन्य स्थानों पर बमबारी की है। प्रधानमंत्री को आधी रात को पाकिस्तान के अंदर हमलों की खबर के साथ जगाया गया। यह ऑपरेशन सिंदूर के पैमाने, सटीकता और साहस के बारे में बहुत कुछ बताता है। पाक सेना ने स्वदेशी तकनीक और चीनी लड़ाकू विमानों का किया इस्तेमाल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि हमारी वायुसेना ने अपने देश को बचाने के लिए स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने चीनी लड़ाकू विमानों पर आधुनिक गैजेट और तकनीक का भी इस्तेमाल किया। शहबाज शरीफ ने कहा, आज हर जगह यही बात की जा रही है कि पाकिस्तान की सेना ने किस तरह हिंदुस्तान को जवाब दिया। पठानकोट, उधमपुर और न जाने कहां कहां हमारी सेना ने हमले किए और दुश्मनों को सिर छिपाने की जगह नहीं मिल रही थी। नूरखान एयरबेस की अहमियत और हमले की सटीकता नूरखान एयरबेस, इस्लामाबाद के निकट होने के कारण पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एयरबेस VVIP और उच्चस्तरीय सैन्य विमानन का केंद्र है, जहां से पाकिस्तान के टॉप अधिकारी और वायुसेना के ऑपरेशंस संचालित होते हैं। स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी सैटलॉजिक (Satellogic) की सैटेलाइट तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि भारतीय वायुसेना ने रावलपिंडी के नूरखान एयरबेस पर सटीक हमला किया, जिससे कमांड और कंट्रोल यूनिट को भारी क्षति पहुंची।इन तस्वीरों में 10 मई को एयरबेस के पास एक सफेद गल्फस्ट्रीम G450 विमान भी दिखा, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रियों के लिए उपयोग होता है। इस हमले ने पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली को गंभीर झटका दिया है और यह साबित करता है कि भारतीय वायुसेना ने बेहद कुशलता से ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने खुलकर स्वीकार किया है कि भारतीय एयरस्ट्राइक से उन्हें नुकसान हुआ है। इससे पहले पाकिस्तान लगातार ऐसे हमलों को नकारता आया था, पर अब शहबाज शरीफ के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से हमले की बात स्वीकार की है। यह ऑपरेशन न केवल भारत की सैन्य ताकत और सटीकता को दर्शाता है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भी बदलाव का संकेत है। भारत ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक हमलों से पाकिस्तान की महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाकर उसकी युद्ध क्षमता को कम करने की कोशिश की है। recent visitors 42

10 लाख फिलिस्तीनियों को लीबिया Settle करने की तैयारी में हैं ट्रंप – रिपोर्ट , पढ़ें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन गाजा को लेकर अमेरिका का एक चौंकाने वाला प्लान सामने आया है। अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार युद्धग्रस्त गाजा पट्टी से करीब 10 लाख फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से लीबिया भेजने की योजना बना रही है। ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और इस संबंध में लीबिया के नेतृत्व के साथ चर्चा भी कर चुका है। इस योजना के तहत, लीबिया को उन अरबों डॉलर की धनराशि को जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो अमेरिका ने एक दशक से अधिक समय पहले फ्रीज कर दी थी। एनबीसी न्यूज ने पांच सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस योजना पर पिछले कुछ समय से अमेरिका तथा लीबिया की लीडरशिप के बीच बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका लीबिया की अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के एक प्रवक्ता ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “ये रिपोर्टें असत्य हैं। जमीन पर हालात ऐसे किसी प्लान के अनुकूल नहीं हैं। ऐसी कोई योजना चर्चा में नहीं रही और इसका कोई तर्क नहीं बनता।” लीबिया में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन नाटो समर्थित विद्रोह के बाद 2011 में लीबिया में अराजकता फैल गई थी, जिसमें लंबे समय से शासन कर रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. देश विभाजित हो गया, और इसके पूर्वी और पश्चिमी हिस्से पर दो प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया समूहों ने नियं​त्रण कर लिया. लीबिया में वर्तमान में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन है: अब्दुल हामिद दबीबेह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एकता सरकार (Government of National Unity), और प्रतिनिधि सभा समर्थित राष्ट्रीय स्थिरता सरकार (Government of National Stability), जिसका नेतृत्व लीबियाई नेशनल आर्मी और उसके कमांडर खलीफा हफ्तार के वास्तविक शासन के तहत ओसामा हम्माद द्वारा किया जाता है. जीएनयू त्रिपोली में स्थित है और देश के पश्चिमी हिस्से को नियंत्रित करता है, जबकि जीएनएस पूर्वी और मध्य क्षेत्र में काम करता है. इस विभाजन ने लीबिया में सत्ता के दो केंद्र स्थापित कर दिए हैं, जिसमें दोनों सरकारें वैधता और देश पर नियंत्रण के लिए होड़ कर रही हैं. कई सालों से अस्थिरता से जूझ रहा लीबिया 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की हत्या और शासन के पतन के बाद से लीबिया लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है। देश पूर्व और पश्चिम में दो भागों में विभाजित हो गया है, जहां विभिन्न सशस्त्र गुट सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीनी नागरिकों को वहां पुनर्वासित करना एक व्यवहारिक और मानवीय चुनौती बन सकती है। गाजा में भीषण हमले, 100 से अधिक की मौत इधर, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिनमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 108 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इजरायल का कहना है कि ये हमले हमास पर दबाव बनाने और बंधकों की रिहाई के लिए युद्ध को अगले चरण में ले जाने की तैयारी का हिस्सा हैं। इजरायल ने यमन के दो बंदरगाहों पर भी हमले किए, जिनके बारे में उसका दावा है कि वहां से हूती विद्रोही हथियारों को ट्रांसफर कर रहे थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। ट्रंप की फिलिस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की इच्छा जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देश गाजा से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अधिक संख्या में स्वीकार करें, ताकि "इस तबाह हो चुके इलाके को साफ किया जा सके और एक नया शुरुआत दी जा सके।" उन्होंने कहा था, “यह लगभग एक ध्वस्त इलाका है। लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है, लोग मर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि कुछ अरब देशों के साथ मिलकर कहीं और मकान बनाएं, जहां ये लोग शायद शांति से रह सकें।” हमास ने बंधक सौदे के बदले युद्ध रोकने का प्रस्ताव दिया हमास के गाजा प्रमुख और इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में शामिल खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए एक भाषण में कहा कि उनका संगठन सभी बंधकों के बदले इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के लिए तत्पर है- बशर्ते युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने अंतरिम संघर्षविराम के किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इजराइल ने गाजा और यमन में हमले बढ़ाए इस बीच, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि 108 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. इजरायली अधिकारियों ने इसे हमास पर बंधकों को रिहा करने के लिए दबाव बनाने के अभियान की शुरुआत बताया. इजराइल ने यमन में दो बंदरगाहों पर भी हमला किया, जिसके बारे में उसने कहा कि हूती उग्रवादी समूह द्वारा हथियारों को स्थानांतरित करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए. इस बीच हमास के गाजा प्रमुख ने कहा कि समूह सभी बंधकों को इजरायल द्वारा जेल में बंद फिलिस्तीनियों की एक निश्चित संख्या के साथ बदलने के लिए तत्काल बातचीत करने के लिए तैयार है, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध समाप्त हो जाएगा. इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए हमास वार्ता दल का नेतृत्व करने वाले खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि समूह अंतरिम युद्धविराम समझौते से इनकार करता है.   recent visitors 54

22 मई को बीकानेर से पीएम मोदी 103 रेलवे स्टेशनों का करेंगे वर्चुअल उद्घाटन

बीकानेर बीकानेर के पास स्थित पलाना गांव 22 मई को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के 103 रेलवे स्टेशनों का सामूहिक रूप से वर्चुअल उद्घाटन करेंगे और कुछ प्रस्तावित स्टेशनों का शिलान्यास भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम भारतीय रेलवे के अब तक के सबसे बड़े वर्चुअल लोकार्पण आयोजनों में से एक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम के लिए बीकानेर में तैयारियां जोरों पर हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 17 मई को पलाना पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। जानकारी के अनुसार रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी प्रधानमंत्री के साथ इस दौरे में शामिल हो सकते हैं। गुरुवार को बीकानेर की जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि और पुलिस अधीक्षक कावेन्द्र सिंह सागर ने पलाना पहुंचकर कार्यक्रम स्थल और हेलीपैड के लिए उपयुक्त स्थानों का निरीक्षण किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि यह भारतीय रेलवे का एक बड़ा और महत्वपूर्ण आयोजन होगा। हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी गंभीरता से जुटा हुआ है और सभी तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रेल मंत्रालय की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बीकानेर मंडल में डबवाली, गोगामेड़ी और लालगढ़ जैसे रेलवे स्टेशन अत्याधुनिक स्वरूप में तैयार किए जा चुके हैं। जोधपुर मंडल के देशनोक रेलवे स्टेशन का कार्य भी पूर्ण हो चुका है। कुल मिलाकर बीकानेर मंडल के 22 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें यात्री सुविधाओं के साथ-साथ स्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी अत्याधुनिक स्वरूप दिया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दौरे के संकेत मिलने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि तैयारियों को समयबद्ध ढंग से पूरा कर लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न सिर्फ रेलवे विकास को रफ्तार देगा, बल्कि बीकानेर संभाग के लिए भी एक अहम राजनीतिक और विकासात्मक संदेश माना जा रहा है।   recent visitors 48