भोपाल में अगर आपका प्लॉट तीन साल से अधिक से खाली पड़ा है तो BDA कर सकता है कार्यवाई

भोपाल  एमपी की राजधानी भोपाल में बीडीए के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स हैं। इन प्रोजेक्ट्स में सालों से लोग प्लॉट लेकर छोड़े हुए हैं। यह अब नहीं चलने वाला है। भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने सख्त कदम उठाते हुए कहा है कि अगर आपने बीडीए की कॉलोनी में प्लॉट खरीदा है और उस पर निर्माण नहीं कराया है, तो आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। बीडीए ने नियम बनाया है कि प्लॉट की रजिस्ट्री के तीन साल के अंदर निर्माण कार्य शुरू करना जरूरी है। ऐसा न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। प्लॉट लेकर छोड़ देते हैं लोग बीडीए के मुताबिक कई लोग प्लॉट खरीदकर छोड़ देते हैं और उस पर निर्माण कार्य शुरू नहीं करते। इससे कॉलोनियों का विकास नहीं हो पाता। बीडीए ने मिसरोद योजना, राजा भोज योजना, रक्षा विहार योजना और प्रोसिटी योजना के तहत आने वाले उन सभी प्लॉट मालिकों को नोटिस भेजा है, जिन्होंने अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है। एक महीने के अंदर शुरू करना होना निर्माण कार्य इन सभी प्लॉट मालिकों को एक महीने के अंदर बीडीए से अनुमति लेकर निर्माण कार्य शुरू करना होगा। दरअसल, तीन साल के अंदर निर्माण की शर्त इसलिए लागू की गई है क्योंकि कई लोग प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करके छोड़ देते हैं। ऐसे में कॉलोनी सालों तक विकसित ही नहीं हो पाती है। विद्या नगर कॉलोनी करीब 20 साल पहले काटी गई थी, लेकिन यहां कुछ प्लॉट अब तक खाली ही पड़े हैं। अब शुरू होगी कार्रवाई वहीं, निर्माण नहीं करने वाले प्लॉट मालिकों को नोटिस भेजा गया है। इसके बाद भी अगर निर्माण कार्य शुरू नहीं होता है तो बीडीए इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर देगी। बीडीए इन प्लॉट मालिकों पर अच्छा खासा जुर्माना लगा सकती है। इसकी तैयारी विभागीय स्तर पर शुरू हो गई है। recent visitors 137

भारत हंटर-किलर नाम से चर्चित एमक्यू-9 बी के लिए कर रहा डील, 31 ड्रोन खरीदे जाने की तैयारी

नई दिल्ली चीन और पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए भारत अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रहा है। ये ड्रोन 'हंटर-किलर' के नाम से जाने जाते हैं और दुश्मन पर नजर रखने और हमला करने में सक्षम हैं। यह कदम चीन और पाकिस्तान की तरफ से अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के मद्देनजर उठाया जा रहा है। दोनों देशों ने हाल ही में अपने ड्रोन बेड़े को मजबूत किया है। भारत का लक्ष्य इस साल नवंबर-दिसंबर तक इस बड़े सौदे को अंतिम रूप देना है। दोनों देशों के बीच इस सौदे को लेकर काफी समय से बातचीत चल रही है। अब इसी साल सौदे को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि 31 सशस्त्र उच्च-ऊंचाई वाले, लंबी दूरी के ड्रोन के लिए अंतर-सरकारी अनुबंध पर बातचीत 'अब एक उन्नत चरण में है'। इनमें से 15 सी गार्जियन नौसेना के लिए और 8-8 स्काई गार्जियन थल सेना और वायुसेना के लिए होंगे। यह ऐसे समय में हो रहा है जब चीन ने पाकिस्तान को अपने सशस्त्र कै होंग-4 और विंग लूंग- II ड्रोन की आपूर्ति तेज कर दी है। एक सूत्र ने कहा, 'पाकिस्तान ने चीन से 16 और सशस्त्र CH-4 ड्रोन मांगे हैं। उसके पास पहले से ही सेना में सात CH-4 ड्रोन और नौसेना में 3 हैं।' MQ-9B रीपर या प्रीडेटर-बी ड्रोन को 40,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर लगभग 40 घंटे तक उड़ान भरने और निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है।यह दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए हेलफायर हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों और स्मार्ट बमों से लैस हैं। 'हंटर-किलर' ड्रोन चीनी सशस्त्र ड्रोन से कहीं बेहतर माने जाते हैं। MQ-9B ड्रोन को दो सी गार्जियन ड्रोनों द्वारा किए जा रहे व्यापक ISR (खुफिया, निगरानी, टोही) मिशनों द्वारा मजबूती मिलेगी। इन्हें अमेरिकी फर्म जनरल एटॉमिक्स से लीज पर लिया गया है। दोनों ड्रोन से विशाल हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के साथ-साथ साथ ही चीन के साथ लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी पर लगाया गया है। अमेरिका ने 31 हथियारबंद MQ-9B ड्रोन और संबंधित उपकरणों के लिए 3.9 बिलियन डॉलर (33,500 करोड़ रुपये से अधिक) का मूल्य टैग लगाया है, जिसमें 170 हेलफायर मिसाइलें, 310 GBU-39B सटीक-निर्देशित ग्लाइड बम, नेविगेशन सिस्टम, सेंसर सूट और मोबाइल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।सौदे के लिए बातचीत में लगी भारतीय टीम लागत को कम करने के लिए काम कर रही है। एक सूत्र ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'अमेरिकी सरकार और जनरल एटॉमिक्स द्वारा दूसरे देशों को दी जा रही कीमत और शर्तों को ध्यान में रखा जा रहा है। सुरक्षा पर कैबिनेट समिति से अंतिम मंजूरी के बाद इस कैलेंडर वर्ष के भीतर सौदे को समाप्त करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।' सौदे के तहत, ड्रोन को भारत में असेंबल किया जाएगा, जबकि जनरल एटॉमिक्स भारतीय कंपनियों से कुछ कलपुर्जों का स्रोत भी बनाएगा और साथ ही यहां एक वैश्विक एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत, ओवरहाल) सुविधा स्थापित करेगा। सूत्र ने कहा, 'चूंकि जनरल एटॉमिक्स अन्य कंपनियों से प्राप्त किए गए विभिन्न उप-प्रणालियों के लिए प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण नहीं कर सकता है, इसलिए यह ऐसे उन्नत ड्रोन को स्वदेशी रूप से विकसित करने के लिए DRDO और अन्य संस्थाओं को विशेषज्ञता और परामर्श प्रदान करेगा।' डील पर सिग्नेचर के कुछ वर्षों के भीतर पहले 10 MQ-9B ड्रोन को शामिल करने की योजना है। हालांकि यह जनरल एटॉमिक्स की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा। बाकी हर 6 महीने में बैचों में आएंगे। योजना हिंद महासागर क्षेत्र के लिए अराकोणम और पोरबंदर और भूमि सीमाओं के लिए सरसावा और गोरखपुर में ISR कमांड और नियंत्रण केंद्रों पर लड़ाकू आकार के ड्रोन को तैनात करने की है। recent visitors 121

स्वदेशी डेंगू वैक्सीन DengiALL का फेज 3 के क्लिनिकल ट्रायल की हुई शुरुआत

नई दिल्ली  भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और Panacea Biotec (पैनेसिया बायोटेक) ने भारत में पहली डेंगू वैक्सीन के लिए फेज 3 के क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह ऐतिहासिक ट्रायल पैनेसिया बायोटेक द्वारा विकसित भारत की स्वदेशी टेट्रावेलेंट डेंगू वैक्सीन DengiALL की प्रभावकारिता का मूल्यांकन करेगा। इस ट्रायल से पता चलेगा कि इस वैक्सीन का कितना असर होता है, उसके बाद ही इस टीके को मार्केट में लाए जाने पर फैसला होगा। इस ट्रायल में भाग लेने वाले पहले व्यक्ति को आज पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) रोहतक में टीका लगाया गया। ‘सीरोटाइप 1, 2, 3, 4’ यानी चारों स्वरूपों के लिए प्रभावी बनाने के मकसद के साथ टीका तैयार किया जा रहा है। फेज 3 का क्लिनिकल ट्रायल शुरू केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन के लिए फेज 3 का क्लिनिकल ट्रायल डेंगू के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। यह हमारे नागरिकों को इस व्यापक बीमारी से बचाने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वैक्सीन रिसर्च और विकास में भारत की क्षमताओं को भी दिखाता है। उन्होंने कहा कि ICMR और पैनेसिया बायोटेक के बीच इस सहयोग के माध्यम से हम न केवल अपने लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम उठा रहे हैं बल्कि हेल्थकेयर सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत के अपने दृष्टिकोण को भी मजबूत कर रहे हैं। वर्तमान में भारत में डेंगू के खिलाफ कोई एंटीवायरल उपचार या लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन नहीं है। डेंगू के सभी चार सीरोटाइप के लिए एक प्रभावी वैक्सीन बनाना बड़ी चुनौती है, भारत में डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप कई क्षेत्रों में होते हैं। दो ट्रायल 2019 तक हो गए थे पूरे टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन स्ट्रेन (TV003/TV005), जिसे मूल रूप से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH), यूएसए द्वारा विकसित किया गया था, इस वैक्सीन ने दुनिया भर में प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल ट्रायल में अच्छे रिजल्ट दिखाए हैं। स्ट्रेन हासिल करने वाली तीन भारतीय कंपनियों में से एक पैनेसिया बायोटेक वैक्सीन विकास के सबसे एडवांस स्टेज में है। कंपनी ने एक पूर्ण विकसित वैक्सीन फॉर्मूलेशन विकसित करने के लिए इन स्ट्रेन पर बड़े पैमाने पर काम किया है और इस काम के लिए एक प्रक्रिया पेटेंट रखती है। भारतीय वैक्सीन फॉर्मूलेशन के चरण 1 और 2 क्लिनिकल परीक्षण 2018-19 में पूरे हो गए, जिससे अच्छे रिजल्ट मिले। ICMR के सहयोग से, Panacea Biotec भारत के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 19 साइटों पर फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल करेगा, जिसमें 10,335 से अधिक स्वस्थ वयस्क प्रतिभागी शामिल होंगे। भारत में डेंगू चिंता का विषय है, जो इस बीमारी के सबसे अधिक मामलों वाले शीर्ष 30 देशों में शुमार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार पिछले दो दशकों में डेंगू की वैश्विक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2023 के अंत तक 129 से अधिक देशों में डेंगू वायरल बीमारी की रिपोर्ट की गई है। ‘सीरोटाइप 1, 2, 3, 4’ यानी चारों स्वरूपों के लिए प्रभावी बनाने के मकसद के साथ टीका तैयार किया जा रहा है और अगर तीसरे चरण के ट्रायल भी कामयाब रहते हैं तो अगले साल डेंगू का टीका आ सकता है। भारत समेत अलग- अलग देशों में डेंगू के मामले लगातार सामने आते हैं। डेंगू जानलेवा भी साबित होता है और ऐसे में डेंगू का टीका लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। आईसीएमआर के एक सीनियर वैज्ञानिक का कहना है कि अभी इस बात के पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि डेंगू का कौन सा स्वरूप ज्यादा खतरनाक साबित होता है। सीरोटाइप 2 और 4 को खतरनाक माना जाता है लेकिन डेंगू का टीका तैयार करते वक्त यह ध्यान में रखा जा रहा है कि ऐसा टीका बनाया जाए तो डेंगू बीमारी की गंभीरता को कम करें और किसी भी स्वरूप के खिलाफ कारगर साबित हो। recent visitors 105

मंत्री रावत के निर्देश सेसईपुरा चीता सफारी का काम जल्द से जल्द शुरू, विजयपुर सफारी का प्रस्ताव भी शासन को भेजा

श्योपुर  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अब एक नहीं बल्कि दो चीता सफारी बनेंगी। वन मंत्री रामनिवास रावत ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पहली चीता सफारी सेसईपुरा में कूनो नदी के किनारे 50 हेक्टेयर में बनाई जाए। दूसरी चीता सफारी विजयपुर क्षेत्र में बनाई जाएगी। इससे पहले सिर्फ़ एक ही चीता सफारी का प्रस्ताव था, जिसका शिलान्यास अभी तक नहीं हो पाया है। कूनो नेशनल पार्क में 20 से अधिक चीते हैं लेकिन अभी तक सफारी शुरू नहीं हुई है। अधिकारियों को काम शुरू करने के निर्देश वन मंत्री रामनिवास रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सेसईपुरा में बनने वाली चीता सफारी का काम जल्द से जल्द शुरू किया जाए। साथ ही, विजयपुर में बनने वाली चीता सफारी का प्रस्ताव भी जल्द तैयार कर शासन को भेजा जाए। इससे उम्मीद है कि दोनों सफारी के लिए एक साथ अनुमति मिल जाएगी। टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा कूनो नेशनल पार्क में दो चीता सफारी बनने से श्योपुर जिले में पर्यटन को काफ़ी बढ़ावा मिलेगा। वनमंत्री रावत का कहना है कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार और डॉ. मोहन यादव ने विकास को लेकर जो वादा किया था, उसे पूरा किया जाएगा। मीडिया से बात करते हुए वन मंत्री रामनिवास रावत ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में श्योपुर को काफ़ी लाभ होगा। जो उम्मीद बीजेपी की सरकार और डॉ. मोहन यादव ने विकास को लेकर लोगों में जगाई है, उसको पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि कूनो में दक्षिण अफ्रीका और नामिबिया से चीते लाए गए थे। अभी कूनो में बड़े चीतों के साथ-साथ भारत में जन्मे शावक भी हैं। इसके साथ ही अब गांधी सागर अभ्यारण में भी चीतों को बसाने की तैयारी चल रही है। recent visitors 108

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया अस्पताल में तोड़फोड़ में सीपीआई और भाजपा कार्यकर्ता शामिल

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को दावा किया कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई तोड़फोड़ में सीपीआई (एम) और भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे। राज्यपाल से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस को बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले लोग "बाहरी" थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे जानकारी मिली है कि बाहरी लोग थे। 'बाम और राम' के कुछ राजनीतिक पार्टी कार्यकर्ताओं ने यह किया है। इसमें छात्रों की कोई भूमिका नहीं है। मैं इस घटना की निंदा करती हूं और कल (बलात्कार के आरोपियों के लिए) फांसी की सजा की मांग को लेकर एक रैली निकालूंगी।" पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा, "जहां तक ​​मेरी जानकारी है, मैं (अस्पताल में तोड़फोड़ के लिए) छात्रों को दोष नहीं दूंगी… घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम अभी भी कहते हैं कि उन्हें फांसी होनी चाहिए… हमने सारे दस्तावेज दे दिए हैं, जब तक हमारी पुलिस जांच कर रही थी, तब तक कुछ भी लीक नहीं हुआ… मेरी और बंगाल की जनता की संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं… यह बहुत बड़ा अपराध है, और इसकी एक ही सजा है कि आरोपियों को फांसी हो, अगर अपराधी को फांसी होगी तभी लोगों को इससे सबक मिलेगा लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।" ममता बनर्जी ने पहले भी वामपंथियों और भाजपा पर अपनी सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, "मैंने वामपंथियों और भाजपा के झंडे देखे… जिस तरह से उन्होंने पुलिस पर हमला किया। मेरे एक प्रभारी अधिकारी एक घंटे तक लापता रहे। बाद में उन्हें घायल अवस्था में पाया गया। लेकिन पुलिस ने मरीजों की सूची नहीं बनाई। उन्होंने बल प्रयोग नहीं किया। हमने बहुत सारे आंदोलन किए हैं और अस्पताल के अंदर कभी इस तरह की हरकत नहीं की।" बुधवार की रात, पश्चिम बंगाल में हजारों महिलाएं 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर के लिए न्याय मांगने के लिए 'रिक्लेम द नाइट' विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। डॉक्टर की आरजी कर अस्पताल में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। हालांकि विरोध प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण थे, लेकिन आरजी कर अस्पताल के बाहर हिंसा भड़क उठी। एक भीड़ ने जबरदस्ती अस्पताल में प्रवेश किया, आपातकालीन वार्ड में तोड़फोड़ की और बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कहा कि करीब 40-50 लोग, प्रदर्शनकारियों का नाटक करते हुए, अस्पताल में घुस गए और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। जवाब में, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया। recent visitors 101

दो महीने में 908 नए मामले, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा केस: विश्व स्वास्थ्य संगठन

नई दिल्ली कोरोना के मामलों में फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस साल जून और जुलाई के बीच कोविड के 908 नए मामले और दो मौतें देखी गई हैं। संयुक्त राष्ट्र निकाय के लेटेस्ट कोविड महामारी विज्ञान अपडेट से पता चला है कि 24 जून से 21 जुलाई के बीच 85 देशों में हर हफ्ते SARS-CoV-2 के लिए औसतन 17,358 नमूनों का परीक्षण किया गया। इस अवधि के दौरान दुनिया भर में नए मामलों में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, 26 प्रतिशत मौतें हुईं। 96 देशों में 1,86,000 से अधिक नए मामले सामने आए और 35 देशों में 2,800 से अधिक नई मौतें हुईं। WHO ने नोट किया कि 21 जुलाई तक, 'महामारी की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर 775 मिलियन से अधिक मामले और सात मिलियन से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।' यहां मिले सबसे ज्यादा कोविड केस अमेरिका और यूरोपीय क्षेत्र के देशों में कोविड संक्रमण के कारण सबसे अधिक अस्पताल में भर्ती होने और आईसीयू में भर्ती होने की सूचना मिली। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में, थाईलैंड से सबसे अधिक नए मामले और मौतें दर्ज की गईं हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर, JN.1 कोरोना का सबसे अधिक बताया जाने वाला प्रकार (VOI) है, जो 135 देशों में मौजूद है। इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड डैशबोर्ड के अनुसार, भारत के कई राज्यों में कोविड मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान और पश्चिम बंगाल पांच प्रतिशत से अधिक की दर सकारात्मकता का अनुभव कर रहे हैं। इनमें महाराष्ट्र में सबसे अधिक 417 मामले थे, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 157 और उत्तराखंड में 64 मामले सामने आए।   क्यों बढ़ें कोरोना केस? भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के अनुसार, अत्यधिक संक्रमणीय केपी.1 और केपी.2 स्ट्रेन, जो जेएन.1 ओमिक्रॉन वेरिएंट से विकसित हुए हैं, इस बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार हैं। recent visitors 123

रक्षाबंधन का पर्व के लिए डाक विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी, जारी किया विशेष वाटरप्रूफ लिफाफा

गुना रक्षाबंधन का पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा। इसके लिए डाक विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। डाक विभाग ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के त्यौहार राखी पर एक विशेष पहल शुरू की है। डाक विभाग ने वाटर प्रूफ लिफाफा जारी किया है, जो भीगने पर भी राखी को सुरक्षित रखेगा। यह लिफाफा अन्य लिफाफों से अलग है, जिससे डाकिए को इस लिफाफे को पहचाने में दिक्कत नहीं होगी और रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले देश- विदेश में राखी समय पर पहुंच सकेगी। डाक अधीक्षक गुना संभाग विनय श्रीवास्तव ने लिफाफा के बारे में बताया कि भारत सरकार के द्वारा स्पेशल वाटरप्रूफ लिफाफे गुना डाक संभाग को भेजे गए हैं, ताकि रक्षाबंधन के त्यौहार पर बहनें अपने भाई को वर्षा के मौसम में राखी सुरक्षित भेज सकें। वाटरप्रूफ लिफाफे के बाएं हिस्से के ऊपरी भाग में भारतीय डाक के लोगो और रक्षाबंधन की डिजायन के साथ अंग्रेजी में राखी लिफाफा और नीचे दाहिने तरफ हैप्पी राखी लिखा गया है। इस लिफाफे की मदद से बहनें देश-विदेश तक अपने भाइयों को राखी भेज सकती हैं। इसमें वर्षा के मौसम में भी राखियां प्रभावित नहीं होंगी और बहनों की राखियां सुदूर रहने वाले भाइयों तक सुरक्षित पहुंच सकेंगी। राखी भेजने के लिए भी डाक विभाग के द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं।   recent visitors 150