जिला आयुर्वेद अधिकारियों और आयुष ग्राम डॉक्टर्स की हुई कार्यशाला, छत्तीसगढ़ में 146 आयुष ग्राम बनेंगे

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के आयुष संचालनालय द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत प्रदेश में आयुष ग्राम विकसित करने आज राजधानी रायपुर में एक दिवसीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम भवन में आयोजित कार्यशाला में जिला आयुर्वेद अधिकारियों और सभी विकासखंडों के आयुष ग्राम के चिकित्सकों को आयुष ग्राम में क्रियान्वित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। आयुष विभाग की संचालक इफ्फत आरा ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष जीवन शैली के सिद्धांतों और प्रथाओं को अपनाने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वास्थ्य देखभाल व उपचारों पर आधारित आयुष ग्राम की परिकल्पना को साकार करने छत्तीसगढ़ के 146 विकासखंडों में आयुष ग्राम का चिन्हांकन किया गया है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश में 146 आयुष ग्राम विकसित किए जा रहे हैं। आयुष ग्राम के माध्यम से ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा और आजीवन स्वस्थ रखने आयुर्वेद, योग तथा आयुष पद्धतियों के अनुसार उन्हें शिक्षित किया जाएगा। आयुष ग्रामों में जनभागीदारी के माध्यम से विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाएगी। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जेएसीएस राव ने कार्यशाला में आयुष अधिकारियों और चिकित्सकों को सर्वसुलभ औषधीय पौधों के रोपण एवं उपलब्ध बाजार की जानकारी दी। उन्होंने औषधीय गुणों से भरपूर स्टीविया, शतावरी, कालमेघ, लेमन-ग्रास, केऊकंद, अश्वगंधा, सर्पगंधा जैसे 20 पौधों को प्रदर्शित कर इनके रोपण के लिए उपयुक्त मौसम और खेती के बारे में विस्तार से बताया। आयुष विभाग के सहायक संचालक-सह-राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. गजेन्द्र बघेल ने कार्यशाला में आयुष ग्राम की परिकल्पना और वहां संचालित की जाने वाली गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुष ग्राम में लोगों को पेड़-पौधों के औषधीय गुणों के बारे में जागरुक कर इनके पौधरोपण और संरक्षण को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत गांवों का चिन्हांकन कर स्थानीय लोगों को आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुरूप स्वस्थ जीवन शैली, उचित आहार-विहार, सामान्य रोगों के उपचार के लिए आसपास पाए जाने वाले औषधीय पौधों की पहचान एवं उपयोग के लिए प्रेरित करना है। शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, बिलासपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. विद्याभूषण पाण्डेय ने प्रतिभागी अधिकारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘आयुर्विद्या’ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों को आयुर्वेद के बारे में जागरुक करना है। स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना है। स्थानीय स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन कर लोगों को आयुष की उपयोगिता के बारे में जानकारी प्रदान कर इस क्षेत्र में उनके कौशल का उन्नयन करना है। कार्यशाला में आयुष विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. सुनील कुमार दास और उप संचालक डॉ. एसी किरण सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। recent visitors 114

“गोल्डन” इतिहास रचने से बस एक कदम दूर, पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट फाइनल में

पेरिस. भारत के लिए पेरिस ओलंपिक में 11वां दिन मिले-जुले नतीजे लेकर आया। टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा ने फैंस को निराश नहीं किया, वहीं कुश्ती के मैट पर विनेश फोगाट के असाधारण प्रदर्शन ने पेरिस ओलंपिक में भारत की एक और स्वर्ण की उम्मीदों को जगा दिया। विनेश फोगाट ने इतिहास रच दिया है। वह ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली पहली महिला पहलवान बन गई हैं। उन्होंने कुश्ती में महिलाओं की 50 किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल में क्यूबा की लोपेज गुजमान को 5-0 से हरा दिया। पहले राउंड तक विनेश 1-0 से आगे थीं। फिर आखिरी तीन मिनट में उन्होंने क्यूबा की पहलवान पर डबल लेग अटैक किया और चार पॉइंट अर्जित किए। इस बढ़त को वह अंत तक बनाए रखी और फाइनल में जगह बनाई। विनेश का इस ओलंपिक में सफर शानदार रहा है। रियो ओलंपिक में चोट की वजह से हटने और फिर टोक्यो ओलंपिक में राउंड ऑफ 16 से बाहर होने के बाद इस साल विनेश ने अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने दिखाया है। अपने पहले मैच यानी प्री क्वार्टर फाइनल में विनेश ने चार बार की विश्व चैंपियन और टोक्यो ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट सुसाकी को 3-2 से हराया था। फिर ओकसाना को क्वार्टर फाइनल में 7-5 से हराया। अब सेमीफाइनल में 5-0 से जीत हासिल कर फाइनल में जगह बनाई। विनेश ने कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया और वह बुधवार यानी सात अगस्त को स्वर्ण पदक के लिए उतरेंगी। विनेश से पहले केवल दो पुरुष पहलवान ही ओलंपिक में फाइनल तक पहुंच पाए हैं। 2012 लंदन ओलंपिक में सुशील कुमार और 2020 टोक्यो ओलंपिक में रवि दहिया फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन आखिरी मुकाबला दोनों हार गए थे। नीरज चोपड़ा भालाफेंक के फाइनल में – गत चैंपियन नीरज ने मंगलवार को अपने पहले ही प्रयास में 89.34 मीटर के थ्रो के साथ पुरुष भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश किया, जबकि महिला पहलवान विनेश (50 किग्रा) ने पहले दौर में अब तक अपराजेय मौजूदा चैंपियन युई सुसाकी को हराकर बड़ा उलटफेर करने के बाद सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक की ओर मजबूत कदम बढ़ाए। टेबल टेनिस पुरूष वर्ग में भारत को हालांकि निराशा हाथ लगी। नीरज के साथी भाला फेंक खिलाड़ी किशोर जेना हालांकि फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे जबकि पुरुष टेबल टेनिस टीम भी प्री क्वार्टर फाइनल में शीर्ष वरीय चीन के खिलाफ हार के साथ बाहर हो गई। ग्रुप बी क्वालीफिकेशन में सबसे पहले थ्रो करने उतरे नीरज ने 89.34 मीटर से सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए आठ अगस्त को होने वाले फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। नीरज ने तोक्यो ओलंपिक में भी अपने पहले ही प्रयास में फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया था। नीरज ने ग्रुप ए और बी दोनों में शीर्ष पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई और इस तरह एडक्टर की चोट से जुड़ी चिंताओं को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया। यह नीरज के करियर का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है। इस गत ओलंपिक और विश्व चैंपियन ने 87.58 मीटर के प्रयास के साथ तोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण पदक जीता था जबकि उनका निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 89.94 मीटर है जो उन्होंने 2022 में स्टॉकहोम डाइमंड लीग में रजत पदक जीतने के दौरान किया था। यह राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है। भारत के किशोर जेना हालांकि ग्रुप ए क्वालीफिकेशन में 80.73 मीटर के प्रयास से नौवें और कुल 18वें स्थान पर रहे तथा शीर्ष 12 खिलाड़ियों में जगह बनाकर फाइनल में प्रवेश करने के नाकाम रहे। ग्रुप ए और बी क्वालीफिकेशन के बाद 84 मीटर या इससे अधिक का थ्रो करने वाले सभी खिलाड़ी या दोनों ग्रुप से शीर्ष 12 खिलाड़ियों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। किरण 400 मीटर सेमीफाइनल में जगह बनाने में नाकाम – एथलेटिक्स की महिला 400 मीटर रेपेचेज में भारत की किरण पहल हीट एक में 52.59 सेकेंड के लचर प्रदर्शन के साथ छह खिलाड़ियों में छठे स्थान पर रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहीं। वह रेपेचेज में चुनौती पेश करने वाली 26 धावकों में 23वें स्थान पर रहीं। हीट एक में नाईजीरिया की एला ओनओजुववेमो 50.59 सेकेंड के समय के साथ शीर्ष पर रहीं। प्रत्येक हीट से शीर्ष पर रहने वाली धावक और दो अन्य सबसे तेज धावकों ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। भारतीय पुरुष टेबल टेनिस टीम चीन से हारकर बाहर – भारतीय पुरुष टेबल टेनिस टीम प्री क्वार्टर फाइनल में शीर्ष वरीय चीन के खिलाफ एकतरफा मुकाबले में हार के साथ प्रतियोगिता से बाहर हो गई। भारत की 14वीं वरीय टीम के पास कई बार के ओलंपिक चैंपियन चीन का कोई जवाब नहीं था जिसने मुकाबला 3-0 से जीता। भारत की ओर से सिर्फ अनुभवी अचंता शरत कमल ही एक गेम जीतने में सफल रहे जबकि टीम ने बाकी दो मैच सीधे गेम में गंवाए। भारत के लिए मुकाबले की शुरुआत हरमीत देसाई और मानव ठक्कर की दुनिया की 42वें नंबर की जोड़ी ने की जिसे बेहद एकतरफा मुकाबले में मा लोंग और वैंग चुकिन की चीन की दुनिया की नंबर एक जोड़ी के खिलाफ सीधे गेम में 0-3 (2-11, 3-11, 7-11) से शिकस्त का सामना करना पड़ा। शरत कमल ने दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी फेन झेनडोंग के खिलाफ पहला गेम जीता लेकिन चीन के खिलाड़ी ने अगले तीन गेम जीतकर मुकाबला 3-1 (9-11, 11-7, 11-7, 11-5) से अपने नाम किया और चीन को 2-0 की बढ़त दिला दी। करो या मरो के मुकाबले में दुनिया के 59वें नंबर के खिलाड़ी मानव को दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी चुकिन को हराना जरूरी थी लेकिन चीन के खिलाड़ी ने 3-0 (11-9, 11-6, 11-9) से मैच जीतकर अपनी टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। recent visitors 97

18 अगस्त तक सुनीता विलियम्स की वापसी जरूरी, नासा 18 अगस्त को एक नया मिशन लॉन्च करने वाला है

वॉशिंगटन नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर स्पेस में फंसे हुए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री बोइंग स्टारलाइनर की पहली उड़ान की टेस्टिंग के लिए रवाना हुए थे। लेकिन उनके अंतरिक्ष यान में खराबी आ गई, जिस कारण वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में ही फंसे हैं। अब नासा के पास उनकी वापसी के लिए 11दिनों का समय है। न्यूयॉर्क टाइम्स में रिपोर्ट आई है कि नासा स्पेस स्टेशन में संभावित भीड़ पर नजर रख रहा है। दरअसल अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा 18 अगस्त को 'क्रू-9' मिशन लॉन्च करने वाला है। इस मिशन के जरिए चार अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशन स्पेस स्टेशन पर जाएंगे। हालांकि स्पेस स्टेशन का लक्ष्य एक समय में तीन से छह अंतरिक्ष यात्रियों को रखना है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक जब तक विलियम्स और विल्मोर सुरक्षित वापस नहीं आ जाते, तब तक मिशन में देरी हो सकती है या इसे रद्द किया जा सकता है। नासा अधिकारियों का कहना है कि अगस्त में बढ़ा हुआ ट्रैफिक देखा जाएगा। वहीं एक अन्य रिपोर्ट कहती है कि सकारात्मक और प्रगति के संकेद दिख रहे हैं। क्यों जरूरी है वापसी नासा के अंतरिक्ष संचालन मिशन निदेशालय के एसोसिएट प्रशासक केन बोवर्सॉक्स ने कहा, 'हमारे पास कभी इतने सारे वाहन और इतने विकल्प नहीं थे। यह हमारे जीवन को जटिल बना रहा है। लेकिन वास्तव में अच्छे तरीके से।' बोइंग स्टारलाइनर में लॉन्चिंग के बाद हीलियम लीक देखा था। साथ ही इसके कई थ्रस्टर्स ने काम करना बंद कर दिया। खराबियों के बावजूद भी यह दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में पहुंचाने में कामयाब रहा। वर्तमान में यह स्पेस स्टेशन के साथ जुड़ा हुआ है। नासा के लिए इसकी वापसी जरूरी है, तभी दूसरा अंतरिक्ष यान स्पेस स्टेशन के साथ जुड़ सकेगा। वापसी की नहीं तय हुई तारीख नासा में आईएसएस के प्रोग्राम मैनेजर डाना वीगेल ने कहा, 'हमारी योजना डॉकिंग पोर्ट को खाली करने की है। हमें स्टारलाइनर को पहले हटाना पड़ेगा।' सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 6 जून से अंतरिक्ष में हैं। स्पेसक्राफ्ट में खराबी का पता लगाने के लिए जमीन पर नासा और बोइंग काम कर रहे हैं। लेकिन अभी भी दोनों की वापसी की तारीख तय नहीं हो पाई है। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक नासा के वाणिज्य क्रू कार्यक्रम मैनेजर स्टीव स्टीच ने कहा कि मिशन प्रबंधन वापसी की तारीख की घोषणा करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, 'लक्ष्य दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाना है। जब हम तैयार होंगे तब घर आएंगे। बैकअप के विकल्पों की समीक्षा हो रही है। नासा के पास हमेशा इमरजेंसी के विकल्प होते हैं।' recent visitors 109

मुख्यमंत्री यादव बेंगलुरु में 7 एवं 8 अगस्त को निवेशकों से करेगें संवाद

भोपाल राज्य की विकास योजनाओं में नवीन तकनीक की सहायता लेने और उपयोग बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश पहली बार स्पेस टेक कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है।स्पेस टेक्नोलॉजी सेक्टर में मध्यप्रदेश में पहली बार निवेश प्राप्त करने के लिए कदम बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम कर रही कंपनियां उपग्रह चित्रण और डाटा एनालिटिक्स की सेवाएं उपलब्ध कराती है। उपग्रह के माध्यम से वैश्विक निगरानी और डाटा की शुद्धता में सुधार होता है। यह कंपनियां अंतरिक्ष में प्रदूषण और कक्षीय वस्तुओं पर निगरानी के लिए नवीनतम तकनीकी विकसित कर रही है। इन कंपनियों का उद्देश्य अंतरिक्ष में सुरक्षा को बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु में आयोजित निवेशको के साथ 7 एवं 8 अगस्त को आयोजित दो दिवसीय इन्वेस्टर रोड-शो में उद्योगपतियों से संवाद करेंगे। वे इस क्षेत्र में काम कर रही प्रमुख कंपनियों को मध्यप्रदेश में निवेश का आमंत्रण देंगे। इनमें मुख्य रूप से पिक्सल, दिगंतरा, गैलेक्स आई, सेटस्योर कलाइड ईओ, स्काई सर्वर जैसी कंपनियों से मध्यप्रदेश में निवेश की संभावना पर चर्चा करेंगे। सेटस्योर कंपनी सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराती है जो कृषि क्षेत्र के लिए बहुत उपयोगी है। इसी प्रकार पिक्सल कंपनी पृथ्वी के चित्रों पर आधारित छोटे सैटेलाइट का निर्माण और संचालन करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आईटी सेक्टर की कंपनियों से भी संवाद करेंगे और निवेश की संभावना पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्य रूप से कॉग्निजेंट, नेसकॉम, किंड्रील, इंफोसिस, टीसीएस, विसेन टेक्नोलॉजी, सीसा इंफोसेक हैपिएस्ट माइंड्स, डेल्टा कैपिटा, नीमन मारकस एवं मोवाटे जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे। इसके अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने वैश्विक ऑपरेशन को बेहतर तरीके से संचालन करने के लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थपित करती है। यह सेंटर आर्थिक प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन, आईटी सपोर्ट, डाटा एनालिटिक्स और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता की सेवाएं और संचालन की दक्षता प्रदान करते हैं। वे लागत में कमी लाने में भी मदद करते हैं और स्थानीय बाजार में निवेश के अवसर सृजन करने में सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा है कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को भोपाल और इंदौर में स्थापित करें। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इन केंद्रों की स्थापना से राज्य की प्रतिभाओं का उपयोग किया जा सकेगा जिससे कुशल कार्यबल की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इन केंद्रों से शहरों में तकनीकी नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में आईटी के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और इस क्षेत्र की आवश्यकताओं के संबंध में प्रमुख निवेशकों से चर्चा करेंगे। मध्यप्रदेश में गारमेंट इंडस्ट्री की संभावनाओं को देखते हुए बेंगलुरु में प्रमुख परिधान और वस्त्र (टेक्टाइल) कंपनियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव चर्चा करेंगे। इस क्षेत्र की कई कंपनियां जैसे बेस्ट कॉर्प और गोकलदास मध्यप्रदेश में निवेश कर रही है। गारमेंट इंडस्ट्री में निवेश से मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। गारमेंट इंडस्ट्री में निवेश से मध्यप्रदेश को युनिवर्सल गारमेंट सेक्टर में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने में मदद मिलेगी। मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, आईटी सेक्टर में निवेश, पर्यटन, एमएसएमई में निवेश और गारमेंट सेक्टर में मध्यप्रदेश में बनी संभावनाओ से निवेशकों को परिचित कराया जाएगा।   recent visitors 84

रक्षाबंधन से पहले Mohan सरकार का बड़ा तोहफा, 7 लाख कर्मचारियों को मिलेगी DA की पहली किस्त

भोपाल मध्य प्रदेश में इस रक्षा बंधन से पहले लाडली बहनों के साथ ही सरकारी कर्मचारियों को मोहन यादव सरकार तोहफे देने जा रही है। सरकारी कर्मचारियों द्वारा पिछले कुछ सालों से जो मांगे सरकार से की जा रही थी। अब उसे सरकार पूरा करने जा रही है, इससे 10 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। अगस्त वादा पूरा प्रदेश सरकार की ओर से कर्मचारियों को 3 अलग अलग किस्तों में एरियर दिए जाने का निर्देश भी दिया गया था। जिसे अब अगस्त के महीने में सरकार पूरा करने जा रही है। इन कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में सरकारी की ओर से इससे पहले इजाफा किया गया था। इन किस्तों को जुलाई से देने के निर्देश थे परन्तु ऐसा संभव नहीं हो पाया। कर्मचारियो को 6 हजार 5 सौ तक का लाभ अब अगस्त महीने में रक्षाबंधन से पहले बढ़ाए गए महंगाई भत्ते की किस्त सरकारी कर्मचारियों को दी जाएगी। महंगाई भत्ते में किए गए इजाफे से इन कर्मचारियों के मासिक वेतन में 6 हजार 5 सौ तक का लाभ मिल सकेगा। त्यौहार से पहले सरकार के इस निर्णय से कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कान आ रही है। महंगाई भत्ते में 4 फीसदी का इजाफा बता दें कि इससे पहले प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को 42 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा था। जिसमें 4 फीसदी का इजाफा किया गया, अब यह दर 46 फीसदी तक पहुंच गई है। जुलाई 2023 में बढ़ाए गए महंगाई दर का भुगतान कर्मचारियों को एक अप्रैल 2024 से करने का निर्णय लिया गया था। वित्त विभाग के द्वारा अब कर्मचारियों को इसका भुगतान किया जाना है। इतने सालों के लिए कर्ज लेगी मोहन सरकार  जानकारी के मुताबिक मोहन सरकार दो अलग अलग कर्ज लेने जा रही है। पहला कर्ज 2500 करोड़ का होगा। जिसे सरकार को 11 साल के अंदर चुकाना होगा। तो वही दूसरा कर्ज भी 2500 करोड रुपए का होगा। जिसे मोहन सरकार को 21 सालों में चुका होगा। इस हिसाब से सरकार पर कुल  5000 करोड़ का कर्ज हो जाएगा। सुत्रों के अनुसार बांड गिरवी करके सरकार 6 तारीख को आरबीआई के जरिए ऑक्शन करवाएगी। इसके बाद आरबीआई के द्वारा 7 अगस्त को सरकार को कर्ज की रकम दी जाएगी।  नई सरकार का पहला ऋण नहीं सीएम मोहन प्रदेश की कमान सँभालने के बाद कई बार कर्ज ले चुके है। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार पर अबतक करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। सरकार का सबसे ज्यादा पैसा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना लाड़ली बहना योजना पर खर्च हो रहा है। सराकर इस योजना पर हर माह करीब 1500 करोड़ रूपये खर्च कर रही है। ये नई सरकार का पहला ऋण नहीं है। इसके पहले भी मोहन सरकार ने 2023-24 वित्त वर्ष में 55 हजार 708 रुपये का कर्ज लिया था। जिसे सरकार को साल 2039 तक चुकानी होगी। recent visitors 81

दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका और यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी जर्मनी में एक बार फिर मंदी की आशंका मंडराने लगी

नई दिल्ली दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका और यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी जर्मनी में एक बार फिर मंदी की आशंका मंडराने लगी है। अमेरिका में हाल में आए रोजगार के आंकड़े उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे हैं। इससे वहां एक बार फिर मंदी की आशंका पैदा हो गई है। इस कारण सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। दूसरी ओर जर्मनी की इकॉनमी में दूसरी तिमाही में अप्रत्याशित गिरावट देखने को मिली। जर्मनी की जीडीपी में पहली तिमाही की तुलना में 0.1 फीसदी गिरावट देखने को मिली। तकनीकी रूप से लगातार दो तिमाहियों में गिरावट को मंदी कहा जाता है। करीब दो दशक तक ग्लोबल ग्रोथ का इंजन रहे चीन की इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। लेकिन इन सबसे बीच भारत की इकॉनमी दुनिया में सबसे तेजी से दौड़ रही है। भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के एक्सपोर्ट में जून तिमाही में काफी तेजी आई है। देश से ऐपल आईफोन के एक्सपोर्ट में तेजी के कारण भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 22% उछलकर 8.44 अरब डॉलर पहुंच गया। इंजीनियरिंग गुड्स और पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के बाद अब भारत से सबसे ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स का ही एक्सपोर्ट हो रहा है। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत से 6.94 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स सामान एक्सपोर्ट हुआ था। इस साल जून तिमाही में 4.8 अरब डॉलर के मोबाइल एक्सपोर्ट हुए जो कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का करीब 57 फीसदी है। इस दौरान ऐपल ने भारत से 3.5 अरब डॉलर के आईफोन एक्सपोर्ट किए। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून तिमाही में मोबाइल एक्सपोर्ट में पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी तेजी आई। इस दौरान आईफोन के एक्सपोर्ट में 90 करोड़ डॉलर की तेजी आई। जबसे सरकार ने स्मार्टफोन प्रॉडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव लॉन्च की है तबसे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में तेजी आई है। अप्रैल 2020 में इस योजना के शुरू होने से पहले फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में देश से 2.9 अरब डॉलर के मोबाइल एक्सपोर्ट किए गए थे। भारत से एक्सपोर्ट होने वाले आइटम्स की लिस्ट में मोबाइल 14वें स्थान पर थे। लेकिन वित्त वर्ष 2024 में भारत ने 15.6 अरब डॉलर के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट किए जो ऑटोमोटिव डीजल, डायमंड्स और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के बाद सबसे अधिक है। इससे फाइनेंशियल ईयर 2024 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 29.1 अरब डॉलर पहुंच गया। गैस उत्पादन में भी भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है। 2020-21 में देश में गैस उत्पादन 28.7 अरब घन मीटर (BCM) था। सरकारी आंकडों के मुताबिक देश में 2023-24 में गैस उत्पादन बढ़कर 36.43 बीसीएम पहुंच गया और 2026 में इसके 45.3 बीसीएम पहुंचने की संभावना है। देश में नेचुरल गैस की सालाना खपत 64 बीसीएम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर कहा कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता बहुत महत्वपूर्ण है। गैस उत्पादन का यह रिकॉर्ड इस दिशा में हमारी प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मोदी सरकार ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है। भारत के लिए गुड न्यूज जर्मनी की इकॉनमी के सुस्त पड़ना भारत के लिए गुड न्यूज है। जर्मनी अभी अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है जबकि जापान चौथे नंबर पर है। भारत इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में कहा था कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी बन जाएगा। लेकिन जापान और जर्मनी की हालत जिस तरह से खराब हो रही है, उससे लगता है कि भारत को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। Forbes के मुताबिक अभी अमेरिका ($28.783 ट्रिलियन) पहले, चीन ($18.536 ट्रिलियन) दूसरे, जर्मनी ($4.590 ट्रिलियन) तीसरे और जापान ($4.112 ट्रिलियन) चौथे नंबर पर है। भारत की इकॉनमी का साइज अभी $3.942 ट्रिलियन डॉलर है।   recent visitors 98

सिंहस्थ 2028 से पहले शिप्रा-चंबल नदी के संगम स्थल शिपावरा का स्वरूप नई निखरेगा

 रतलाम  जिले के आलोट विकासखंड में शिप्रा-चंबल नदी का संगम स्थल शिपावरा का स्वरूप अब निखरने वाला है। यह जगह करीब 4000 साल पुरानी ताम्राश्म युगीन सभ्यता के अवशेष समेटे हुए है। शिपावरा के पौराणिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हुए यहां महाकाल लोक की तर्ज पर नवनिर्माण होगा। कलेक्टर राजेश बाथम ने करीब 23 करोड़ रुपये की योजना तैयार करवाकर स्वीकृति के लिए शासन को भेजी है। सिंहस्थ मद से इसमें स्वीकृति मिलना तय माना जा रहा है। पर्यटन और धार्मिक नजरिये से शिपावरा विकास की योजना में पूरे क्षेत्र को शिवआकृति में तैयार किया जाएगा।     शिपावरा के विकास के लिए कार्ययोजना बनाकर स्वीकृति के लिए संभागायुक्त को भेजी गई है। इस स्थल को पर्यटन व धार्मिक नक्शे पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।     -राजेश बाथम, कलेक्टर शिव के त्रिनेत्र, अर्द्धचंद्रमा आदि आकार में होगा निर्माण इसके लिए शिव के त्रिनेत्र, अर्द्धचंद्रमा, सर्प आदि शामिल रहेंगे। धर्मशाला, ऑडिटोरियम, वॉच टॉवर की तर्ज पर दीपस्तंभ, बड़े घाट, सड़क, पार्किंग, भव्य प्रवेश द्वार सहित अन्य निर्माण किए जाएंगे। इस काम के लिए हाउसिंग बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। शिपावरा से उज्जैन की दूरी 100 किमी है। तैयारी इस तरह से की जा रही है कि यहां भविष्य में बड़े सांस्कृतिक आयोजन भी किए जा सकें। सिंहस्थ 2028 से पहले निर्माण कार्य पूरा करने की योजना है। इससे इस इलाके में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उल्टे दीयों पर टीका है मंदिर, खुदाई में मिले हैं दीये शिप्रा नदी शिपावरा में आकर चंबल नदी में मिल जाती है। इस संगम पर करीब 100 फीट ऊंचे एक टीले पर शिपावरा में दीपेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। इसके उल्टे दीयों पर टीके होने की बात कही जाती है। खुदाई में भी यहां दीये मिलते हैं। आलोट से विक्रमगढ़, खजूरी देवड़ा, रजला, मोरिया होकर शिपावरा तक जाने के बाद आगे करीब ढाई किलोमीटर का कच्चा और पथरीला रास्ता संगम स्थल तक पहुंचाता है। प्रागैतिहासिक काल के प्रमाण भी यहां मिलते हैं शिपावरा में प्रागैतिहासिक काल से लेकर परमार और मराठा काल तक की पुरा-संपदा के महत्वपूर्ण प्रमाण मिलते हैं। लोकमान्यता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इस स्थल पर छुपे थे। यंत्र-तंत्र लगे परमार स्थापत्य एवं मूर्तिकला के कारण इसकी प्राचीनता सिद्ध होती है। यहां रियासतकालीन शिकारगाह भी बना हुआ है, जिसका प्रयोग जावरा के नवाब किया करते थे। recent visitors 160