बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, 3 लोगों की मौत, सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी

ढाका पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बार फिर हिंसा की खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को बांग्लादेश में भड़की हिंसा में 32 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए. यहां छात्र प्रदर्शनकारी पुलिस और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं की बीच भिड़ंत हुआ थी. प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. सरकार ने रविवार शाम 6 बजे से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की, पिछले महीने शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पहली बार सरकार ने ये कदम उठाया है. ऐसे में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाबंदी लगा दी है। इसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब जैसे प्रमुख ऐप शामिल हैं। शुक्रवार को भड़के प्रदर्शन में देश के कई हिस्सों में हिंसा हुई है। इस हिंसा में 32  लोगों की मौत और 100 के घायल होने की खबर है। ढाका में शुक्रवार को हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया। इन सोशल मीडिया ऐप्स पर लगाए गए बैन को लेकर बांग्लादेश की सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि टाइम्स ऑफ इंडिया और ग्लोबल आइज ने अपनी रिपोर्ट में सोशल मीडिया बैन को लेकर जानकारी दी है। हिंसा में मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग आरक्षण के विरोध में हुई हिंसक झड़पों के कारण देशभर में कर्फ्यू लगाना पड़ा था। पिछली बार हुई हिंसक झड़पों में करीब 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे। ऐसे में उनके लिए न्याय की मांग को लेकर एक बार फिर से प्रदर्शन शुरू हो गया है। शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन दो लोगों की मौत हो गई है। 100 से अधिक घायल हो गए है। ढाका के कुछ हिस्सों में 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए। वे सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। ढाका के उत्तरा इलाके में दर्जनों छात्रों के साथ पुलिस की झड़प हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विरोध प्रदर्शन हुआ था शांत दरअसल, बांग्लादेश में पिछले महीने, जुलाई में भीमेटा प्लेटफॉर्म पर पाबंदी लगाई गई थी। देश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के बाद कर्फ्यू लगाया गया था। इस दौरान भी इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अस्थाई तौर पर पाबंदी लगाई गई थी। जुलाई में विरोध प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट और सोशल साइट्स पर रोक का फैसला लिया गया था। कई दिन के हिंसक प्रदर्शनों के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से आरक्षण कोटे पर फैसला आया था। इसके बाद हालात शांत हो रहे थे लेकिन देश में फिर से विरोध प्रदर्शन की चिंगारी भड़कने लगी है। ग्लोबल आइज की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि शुक्रवार से ही पूरे देश में सोशल मीडिया साइट्स पर अस्थायी बैन लगा दिया गया है। recent visitors 106

तीन बाघ शावकों की मौत के बाद वन विभाग संबंधित ट्रेन का इंजन कर सकता है जब्त, असम सरकार दे रहे उदाहरण

भोपाल मध्य प्रदेश वन विभाग उस ट्रेन को 'जब्त' करने पर विचार कर रहा है, जिसकी टक्कर से मिडघाट-बुधनी रेलवे ट्रैक पर तीन बाघ शावकों की मौत हुई थी। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरने वाली इस ट्रेन की चपेट में 3 बाघ शावक आए थे, जिनमें से एक की मौके पर मौत हुई और बचे 2 शावक रेस्क्यू के लगभग 15 दिन बाद दम तोड़ गए थे। उच्च अधिकारियों पर दबाव सूत्रों के अनुसार, 'टाइगर स्टेट' एमपी में वन अधिकारी निर्णायक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों पर दबाव डाल रहे हैं। इसके लिए असम सरकार के फैसले का उदाहरण लिया जा रहा है, जिसने एक रेलवे इंजन को 'जब्त' कर लिया था, जिससे अक्टूबर 2020 में एक हाथी और उसके बच्चे की मौत हो गई थी। त्रासदी से सबक तीन शावकों की मौत ने मप्र के वन अधिकारियों को सदमे में डाल दिया है। उनका मानना है कि यह त्रासदी पूरी तरह से टाली जा सकती थी। तीनों शावक 14 जुलाई की रात को ट्रेन की चपेट में आ गए थे। एक की मौके पर मौत हो गई, जबकि उसके दो भाई-बहन एक पखवाड़े तक तड़पते रहे और फिर उनकी भी मौत हो गई। वन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि 'हमें उस ट्रेन के इंजन को जब्त कर लेना चाहिए जिसने इन शावकों को तब टक्कर मारी जब वे अपनी मां के पीछे चल रहे थे। यह एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। अगर असम वन विभाग एक जंगली हाथी और बछड़े की मौत के लिए इंजन 'जब्त' कर सकता है, तो हम अपने बाघ शावकों के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते?' ट्रेन की पहचान और जिम्मेदारी वन अधिकारी ट्रेन की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। एक अन्य आईएफएस अधिकारी ने कहा 'पटरियां जंगल से होकर गुजरती हैं और यह हमेशा वन भूमि रहेगी। शमन उपाय करना और तीसरी लाइन के लिए पर्यावरण मंजूरी के दौरान दी गई शर्तों का अनुपालन करना रेलवे की जिम्मेदारी है।' पिछले हादसे सीहोर और रायसेन जिलों में बरखेड़ा और बुधनी के बीच 20 किलोमीटर लंबे इस रेलवे खंड पर ट्रेनों की चपेट में आने से इन तीन शावकों सहित आठ बाघों की मौत हो गई है। 2015 के बाद से ट्रेन दुर्घटनाओं में 14 तेंदुए और एक भालू भी मारे गए हैं। एमपी के वनवासियों का कहना है कि तीन शावकों की मौत एक महत्वपूर्ण बिंदु है। वे असम सरकार की कार्रवाई का हवाला देते हैं, जहां उसका वन विभाग गुवाहाटी में बामुनिमैदान रेलवे यार्ड में गया और 27 सितंबर, 2020 को एक हाथी और उसके बच्चे को कुचलने और एक किलोमीटर तक घसीटे जाने के बाद दर्ज किए गए मामले के खिलाफ लोकोमोटिव को 'जब्त' कर लिया। उस घटना में रेलवे ने पायलट और सह-पायलट को निलंबित कर दिया था। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई एक डिप्टी रेंजर ने कहा, 'हाथियों की तरह, बाघ भी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची -1 जानवर हैं। हमारे अधिकारी और फील्ड कर्मचारी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना खून बहाते हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज हम बाघों में नंबर 1 हैं। बाघों की हत्या के लिए कार्रवाई नहीं करने से वनवासियों का मनोबल गिरेगा।' उन्होंने कहा, ट्रेन पायलट अक्सर इस पैच के माध्यम से 20 किमी प्रति घंटे की गति सीमा को पार कर जाते हैं, उन्होंने कहा: 'बाकी बाघों को बचाने के लिए ओवर स्पीडिंग की जांच की जानी चाहिए।' समिति का गठन वन अधिकारियों ने बाघ गलियारों में गति पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे को लिखा था लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने लोको पायलटों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि 'उन्हें मामला दर्ज करना चाहिए और शावकों की मौत की जांच करनी चाहिए। मुझे नहीं पता कि वन विभाग इस पर धीमी गति से क्यों चल रहा है।' वन विभाग ने पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर यह जांच करने का आग्रह किया है कि बरखेड़ा और बुधनी के बीच तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए लगाई गई शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं। दुबे कहते हैं, 'उन्हें डीआरएम को एक नोटिस भेजना चाहिए और उस भयानक रात से गुजरने वाली ट्रेनों का विवरण मांगना चाहिए।' वन विभाग ने अनुपालन की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया है। सूत्रों ने कहा कि इसमें रेलवे अधिकारियों को भी शामिल किया जाना है, लेकिन रेलवे ने अभी तक पैनल के लिए कोई नाम नहीं दिया है। वन अधिकारी क्षेत्र के दौरे की तारीख तय करने के लिए रेलवे प्रतिनिधि का इंतजार कर रहे हैं। recent visitors 91

सहारनपुर रेलवे स्टेशन के पास यात्री ट्रेन के पहिये पटरी से उतरे, मौके पर पहुंचे रेलवे अधिकारी

 सहारनपुर सहारनपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक अंबाला की तरफ शारदा नगर पुल के नीचे एक यात्री ट्रेन के पहिये पटरी से उतर गए। घटना का पता लगते ही रेलवे अधिकारियों में खलबली मच गई। मौके पर अफसर पहुंचे और तकनीकी टीम को बुलाकर पहियों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। वहीं सांसद इमरान मसूद भी मौके पर पहुंचे। ट्रेन नंबर 01619 दिल्ली सहारनपुर एक्सप्रेस रविवार सुबह स्टेशन पर करीब 11 बजे पहुंची। इसके बाद ट्रेन को वाशिंग लाइन ले जाया जा रहा था। शारदा नगर पुल के नीचे लाइन पर ट्रेन को शंटिंग किया गया। इससे ट्रेन के एक कोच के दो से तीन पहिये पटरी से उतर गए। चालक की जानकारी कंट्रोल रूम में दी गई तो अधिकारियों में खलबली मच गई। अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। मौके पर तकनीकी टीम भी दौड़ी। टीम पहियों को पटरी पर लाने में जुट गई। सांसद इमरान मसूद ने भी मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। पहिये पटरी उतरने से ट्रेनों के संचालन पर कोई असर नहीं हुआ है। कब और कैसे हुआ हादसा? पटरी से उतरने की घटना तब हुई जब ट्रेन एक पॉइंट पर जा रही थी, जो ट्रैक का एक गतिशील खंड है जिसका उपयोग विभिन्न रेल लाइनों के बीच ट्रेनों को बदलने के लिए किया जाता है। सौभाग्य से, उस समय ट्रेन खाली थी, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ। अंबाला डिवीजन में वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) कार्यालय ने घटना की पुष्टि की, यह देखते हुए कि यार्ड को खाली करने और सामान्य परिचालन बहाल करने के प्रयास चल रहे हैं। ट्रेन डेढ़ घंटे से अधिक देरी से दोपहर 12:26 बजे सहारनपुर जंक्शन पर पहुंची थी। रेलवे कर्मचारी फिलहाल पटरी से उतरे दोनों डिब्बों को वापस पटरी पर लाने का काम कर रहे हैं। यह घटना पिछले 18 दिनों के भीतर देश में ट्रेन के पटरी से उतरने की 10वीं घटना है। विशाखापट्टनम रेल हादसा दूसरी तरफ, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन पर रविवार को एक ट्रेन में आग लगने की खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कोरबा से विशाखापट्टनम होते हुए तिरुमाला जा रही ट्रेन विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर खड़ी थी। इस दौरान एसी बोगी एम1, बी7, बी6 बोगियों में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में पता चला है कि बी7 बोगी के शौचालय में हुए शॉर्ट सर्किट से आग भड़की। ट्रेन के एसी बोगी की एम1, बी7, बी6 बोगियों में आग लगने की जानकारी मिलते ही रेलवे स्टेशन पर हड़कंप मच गया। ट्रेन धू-धू कर जलती दिखी। मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की। हादसे के वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि ट्रेन के कोच से बड़ी-बड़ी लपटें निकल रही है। इस दौरान पूरे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया। recent visitors 123

प्रभावितों को मिले तत्काल राहत एवं आर्थिक सहायता- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में हो रही लगातार बारिश को देखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन को सजगता और सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्य करें और आवश्यकता होने पर तत्काल आमजनता को आगाह किया जाए, जिससे कहीं भी कोई दुर्घटना न हो। अतिवर्षा और बाढ़ की चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वय में कोई कमी नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रपटों और पुलों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि तमाम सावधानियां के बाद भी यदि कोई घटना और दुर्घटनाएं होती हैं, तो ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। प्रदेश में वर्षा की स्थिति और शासन द्वारा किए गए प्रबंध प्रदेश में 3 अगस्त तक 548.9 मि.मी. वर्षा हो चुकी है यह औसत से 14% अधिक है। आगामी 3 दिनों में भी सम्पूर्ण प्रदेश में मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है। आज लगभग पूरे प्रदेश में वर्षा हो रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जिला भोपाल, विदिशा, सागर, दमोह, रायसेन, गुना, अशोकनगर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम्, जबलपुर, कटनी, सिवनी, छिंदवाड़ा में अतिभारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। जिला सीहोर, शिवपुरी, सतना, मैहर, मण्डला, बालाघाट, पन्ना, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, एवं डिण्डौरी जिलों में भारी वर्षा तथा शेष सभी जिलों में हल्की वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है। सिंचाई डेमों की स्थिति प्रदेश के ज्यादातर सिंचाई डेम अभी 60-80% के आस-पास भरे हैं। बाणसुजारा 68.56%, बरगी 88.49%, बारना 79.18%, संजय सरोवर 66.71%, राजघाट 75.90%, तवा 82.45% भर चुका है। वर्तमान में बाणसुजारा (टीकमगढ़) के 06 गेट, बरगी (जबलपुर) के 09 गेट, बिलगांव मीडियम प्रोजेक्ट (डिण्डौरी) 02 गेट, कलियासोत डेम (भोपाल) के 2 गेट, कोलार डेम (सीहोर) के 02 गेट, मटियारी (मंडला) के 06 गेट, मोहनपुरा (राजगढ) 02 गेट, पागरा फिडर (सागर) के 08 गेट, पवई मीडियम प्रोजेक्ट (पन्ना) के 06 गेट, पेंच डायवर्जन (छिंदवाडा) का 04 गेट, राजघाट (अशोकनगर) के 12 गेट, संजय सागर (विदिशा) 01 गेट, तवा (नर्मदापुरम) 03 गेट, थानवर (मंडला) 05 गेट, संजय सरोवर (सिवनी) के 03 गेट खोले गये हैं। इस मॉनसून में अभी तक हुई जन और पशु हानि और मकानों में क्षति के मामलों में राहत राशि तत्काल वितरण करने के निर्देश दिये गए हैं। इसके लिये जिलों में पर्याप्त बजट भी उपलब्ध करवाया गया है। वर्तमान में फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में बाढ़ प्रभावितों के लिए 02 कैम्प संचालित है, जिसमें कुल 290 लोगों को रखा गया हैं। सागर जिले में 01 कैम्प संचालित है, जिसमें 25 लोगों को रखा गया है। जिलेवार स्थिति:- विदिशा – तहसील पोहरी के केदारेश्वर मंदिर पर सरकुला नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने से 8 लोग फस गए हैं। मौके पर पुलिस एवं राजस्व टीम ओ.एस.डी.आर.एफ. की टीम पहुँच गई है। सभी 8 लोग ऊंचाई पर हैं एवं सुरक्षित हैं। हरदाः– तहसील हंडिया अंतर्गत ग्राम झुगरिया मनोहरपुरा, अजनई-बमनई, गांगियाखेडी-घोडाकुण्ड रास्ते पर बने रपटों पर पानी होने से मार्ग बंद है। रात भर से वर्षा हो रही है। नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। हरियाली अमावस्या के चलते किनारे के गांवों में घाट पर नहाने से रोक दिया गया है। रायसेन:- नाले में 02 व्यक्तियों के बहने की सूचना पर सर्चिग जारी है। नर्मदा नदी में 01 व्यक्ति के कूदने एवं नाले में 01 बच्चे की डूबने की पर सूचना पर सर्चिग जारी है। छतरपुरः– धसान नदी में एक संदग्धि बॉडी नदी में फसी होने पर SDERF टीम द्वारा सर्चिग जारी है। खरगोन:- 01 व्यक्ति नर्मदा नदी में नहाने गया था। उसके डूबने की सूचना पर रेस्क्यू कार्य जारी है। बालाघाटः- संगाडी नाले में एक अज्ञात महिला का शव बहने की सूचना पर SDERF टीम द्वारा सर्चिग जारी है। सागर:- रातभर वर्षा हुई है। निचले इलाकों में पानी भरने की सूचना है। जनहानि नहीं हुई है। वर्तमान में हल्की बारिश हो रही है। सीहोर:– ग्राम छिदगाव काछी से चमेटी मार्ग बंद। बैरिकेट लगा दिया गया है। कोटवार तैनात है। नर्मदा नदी में 01 महिला के कूदने की सूचना पर सचिंग जारी है। जिला रीवा:- 3 अगस्त 2024 को दोपहर रीवा जिले की मनगवां तहसील के ग्राम गढ़ में अशासकीय सनराइज विद्यालय के समीप बाउंड्रीवाल गिरने से 04 बच्चों की मृत्यु हुई है। 01 बच्चा एवं 01 महिला घायल होने से उपचाररत हैं। पिकनिक मनाने गये 12 लोगो को जंगली क्षेत्र जल भराव में फंसे होने की सूचना पर SDERF द्वारा सुरक्षित बाहर निकाला गया। शहडोल:- 02 अगस्त 2024 को सांय लगभग 7 बजे अतिवृष्टि के कारण निर्माणाधीन ब्यौहारी न्यू सपटा मार्ग के चैनेज में झापर नदी पर लगभग 35 वर्ष पुराना पूर्व निर्मित बाक्स कलवर्ट क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके कारण यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया है। पुल के दोनो तरफ बैरिकेडिंग की गई है। दुर्गा माता मंदिर के पास बरसात का पानी भर जाने से कुछ लोग के फसे होने की सूचना पर SDERF टीम घटना स्थल पर पहुँची जहा स्थिति सामान्य है और सभी सुरक्षित है। फ्लोटिंग पम्प की सहायता से पानी खाली कराया गया है। भोपाल:- ईदगाह हिल्स में NDRF कार्यालय की बाउड्रीवाल गिर गई है। जनहानि नही हुई है। उमरिया:– 01 व्यक्ति के डूबने की सूचना पर सर्चिग जारी है। छिंदवाड़ा:- पेंच नदी में 01 व्यक्ति के डूबने की सूचना पर सर्चिग जारी है। पन्ना:- जल भराव के कारण एक ट्रक के फसने की सूचना पर SDERF टीम द्वारा ड्राइवर एवं उनके सहयोगी को सकुशल निकाला। सिंगरौली:– जल भराव होने पर 25 लोगो के फसे होने की सूचना पर SDERF टीम द्वारा सभी को सुरक्षित निकाला गया। कटनी:- गर्रा घाट में अभी पुल के काफी ऊपर से नदी बह रही है। सभी नदी नालों में पानी बढ़ा है। रास्ते बंद है। जिले में अत्यधिक वर्षा के कारण कुछ स्थानों में जल भराव की स्थिति निर्मित हुई है, जलभराव वाले क्षेत्रों में विभागों से सुरक्षा की दृष्टि से वैरीकेट एवं कर्मचारी तैनात किये गये है, किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।   recent visitors 108

मप्र पुलिस में लगभग ढाई वर्ष बाद बनेगी ऐसी स्थिति की एक एडीजी के पास होगा दो शाखाओं का प्रभार

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस में लगभग ढाई वर्ष बाद ऐसी स्थिति बनेगी कि एक एडीजी के पास दो शाखाओं का प्रभार रहेगा। कुछ एडीजी को तो अगले वर्ष से ही दो शाखाओं का प्रभार देना पड़ेगा। एक जनवरी 2025 को 25, उसके एक वर्ष बाद 20 और जनवरी 2027 में 15 एडीजी ही रह जाएंगे। कारण, जितने एडीजी सेवानिवृत हो रहे हैं उनके पद भरने के लिए आईजी ही नहीं रहेंगे। इसकी वजह है आईपीएस अधिकारियों का छोटा बैच। आगे चलकर ऐसी स्थित बनेगी कि स्पेशल डीजी के पद भरने के लिए एडीजी नहीं मिलेंगे। पदोन्नति के अवसर ज्यादा किसी वर्ष बड़ा तो किसी वर्ष एक से तीन आईपीएस अधिकारियों का बैच होने के कारण यह असंतुलन हो रहा है। जिन राज्यों में हर वर्ष चार से पांच अधिकारी मिले वहां अधिकारियों को पदोन्नति के अवसर ज्यादा मिल रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 1998 के बैच में तीन, 1999 में तीन, 2000 में एक, 2001 में एक, 2002 में दो आईपीएस अधिकारियों का बैच है। एडीजी बनने के लिए 25 वर्ष की सेवा अनिवार्य है, इस कारण इस पद पर उन्हीं आईजी को पदोन्नत किया जा सकेगा जो यह शर्त पूरी कर रहे हों। पदोन्नति में देरी से अधिकारियों की नाराजगी इस बात की है कि बड़ा बैच लेने वाले उस समय के डीजीपी ने यह नहीं सोचा कि इससे पदोन्नति में नुकसान होगा। इसके पहले के सभी बैच पांच अधिकारियों से अधिक के हैं। 1992 बैच में नौ अधिकारी हैं। बड़ा बैच होने के कारण कुछ एडीजी स्पेशल डीजी भी नहीं बन पाएंगे। इसी बैच के जी जनार्दन एडीजी पद से ही पिछले वर्ष दिसंबर में सेवानिवृत हो गए हैं। एडीजी (अजाक) राजेश गुप्ता भी एडीजी पद से सितंबर 2024 में रिटायर हो जाएंगे, जबकि दूसरे कुछ राज्यों में इस बैच के अधिकारी बीते तीन वर्ष डीजीपी हैं।   recent visitors 97

भारत ने ब्रिटेन को पेनल्टी शूटआउट में किया पराजित , सेमीफाइनल में बनाई जगह

पेरिस भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए ब्रिटेन को पेनल्टी शूटआउट में हराकर लगातार दूसरी बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई। चार क्वार्टर की समाप्ति के बाद दोनों टीमों का स्कोर 1-1 से बराबर चल रहा था। दोनों ही टीमों ने निर्धारित समय तक बढ़त लेने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया जिसमे भारत ने 4-2 से ब्रिटेन को मात दी। भारत इस मैच में 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रहा था क्योंकि दूसरे ही क्वार्टर में अमित रोहिदास को रेड कार्ड दे दिया गया था जिस कारण वह पूरे मैच से बाहर हो गए थे। हालांकि, भारतीय टीम ने हार नहीं मानी और अंत तक ब्रिटेन को कड़ी टक्कर दी। भारतीय टीम ने इस तरह पदक के लिए एक और कदम बढ़ा दिया है। अगर भारत सेमीफाइनल में जीत हासिल करने में सफल रहा तो कम से कम रजत पदक पक्का कर लेगा। भारत का सेमीफाइनल मुकाबला छह अगस्त यानी मंगलवार को खेला जाएगा। शूटआउट में क्या हुआ?      पहला शूटआउट ब्रिटेन ने लिया और एलबरी जेम्सी ने गोल दागा      भारत की ओर से पहला शूट हरमनप्रीत सिंह लेने पहुंचे और उन्होंने भी गोल किया     इंग्लैंड की ओर से वालेस ने दूसरा शूट लेने आए और उन्होंने गोल दागा     भारत के लिए सुखजीत आए और उन्होंने गोल कर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया     इंग्लैंड के लिए तीसरे प्रयास में क्रोनोन आए और वह गोल करने से चूक गए     भारत के लिए तीसरे प्रयास में ललित ने गोल दाग भारत को 3-2 से बढ़त दिलाई     इंग्लैंड चौथे प्रयास में भी गोल करने में विफल रहा और श्रीजेश ब्रिटेन के खिलाड़ी के सामने डटे रहे और गोल नहीं करने दिया     भारत के लिए चौथे प्रयास में राजकुमार ने गोल किया। इस तरह भारत ने इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई भारत और ब्रिटेन के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबले के तीसरे क्वार्टर तक स्कोर 1-1 की बराबरी पर रहा था। दोनों टीमों ने काउंटर अटैक किए, लेकिन गोल प्राप्त नहीं कर सके। इससे पहले हाफ टाइम तक दोनों टीमों का स्कोर 1-1 की बराबरी पर चल रहा था। हॉफ टाइम के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर था। दूसरे क्वार्टर में भारत के अमित रोहिदास को रेड कार्ड मिला जिस कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसका मतलब है कि भारतीय टीम अब शेष मैच 10 खिलाड़ियों के साथ खेली। भारत ने हालांकि, इसे पीछे छोड़ते हुए हरमनप्रीत सिंह के शानदार गोल के दम पर बढ़त हासिल की, लेकिन ब्रिटेन के लिए ली मोर्टन ने जल्द ही बराबरी का गोल दागा। ब्रिटेन के लिए ली मोर्टन ने काउंटर अटैक पर गोल किया था, जबकि हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर में गोल कर 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही भारतीय टीम को 22वें मिनट में 1-0 की बढ़त दिलाई थी। हरमनप्रीत का यह पेरिस ओलंपिक में सातवां गोल रहा। मैच रेफरी ने रोहिदास को ब्रिटेन के एक खिलाड़ी को हॉकी स्टिक से जानबूझकर सिर में चोट पहुंचाने का दोषी माना था और उन्हें रेड कार्ड देकर बाहर कर दिया था। पेरिस ओलंपिक में पहली बार है जब किसी खिलाड़ी को रेड कार्ड दिया गया है। पहले क्वार्टर में दोनों टीमों को पेनाल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन कोई इसे गोल में नहीं बदल सका। इस दौरान भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने दमदार प्रदर्शन किया और ब्रिटेन के हर आक्रमण को रोकने में सफल रहे। भारत ने लगातार तीन पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन गोल में तब्दील नहीं कर सके। भारत ने ग्रुप चरण में शानदार प्रदर्शन किया था और अब टीम को नॉकआउट चरण में भी उस लय को कायम रखनी होगी। भारतीय टीम यह मुकाबला जीतने में सफल रही तो पदक की ओर एक कदम बढ़ा लेगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह का कमाल का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी जारी रहा और उन्होंने इस मैच में दो गोल दागे। अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रहे अनुभवी गोलकीपर पीआर श्रीजेश गोल के सामने दीवार की तरह खड़े रहे और कई बचाव किए। भारतीय टीम को ब्रिटेन के खिलाफ एक बार फिर से उन से ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद होगी। अपने अंतिम पूल मैच में टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत के बाद आत्मविश्वास से भरपूर भारतीय पुरुष हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन के खिलाफ जीत की इस लय को कायम रखने की कोशिश करेगी। ऑस्ट्रेलिया पर जीत के साथ ही भारत भारत पूल-बी में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन बेल्जियम के बाद दूसरे स्थान पर रहा, जबकि ब्रिटेन पूल-ए में तीसरे स्थान पर था। भारत को अभी तक सिर्फ बेल्जियम से ही हार मिली है। 52 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को दी थी ओलंपिक में मात ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत के प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण मनप्रीत सिंह तथा उप-कप्तान हार्दिक सिंह के नेतृत्व वाले मिडफील्ड और गुरजंत सिंह तथा सुखजीत सिंह अग्रिम पंक्ति के बीच शानदार समन्वय था। गुरजंत और सुखजीत ने अपने खेल से ऑस्ट्रेलिया की रक्षा पंक्ति को दबाव में रखा। टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय टीम विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ एक बार फिर से हर विभाग में बढ़त बनाने की कोशिश करेगी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अभिषेक फॉरवर्ड लाइन में सक्रिय थे और उन्होंने टूर्नामेंट में अपना दूसरी बार मैदानी गोल कर भारत को बढ़त दिलाई। बॉक्सर लवलीना क्वार्टर फाइनल हारकर बाहर बॉक्सिंग से भारत के लिए निराश करने वाली खबर सामने आ रही है. भारतीय स्टार महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला हार गई हैं. उन्हें चीनी खिलाड़ी लि कियान ने 1-4 से शिकस्त दी. recent visitors 114

पेड़ के प्रति ग्रामीणों की गहरी आस्था, राजस्थान-अजमेर के गांव में नीम का पेड़ काटने पर जुर्माना

अजमेर. राजस्थान के अजमेर जिले के पदमपुरा गांव में पीढ़ियों से नीम का पेड़ नहीं काटने या किसी तरह का नुकसान न पहुंचाने की परंपरा चली आ रही है। मान्यताओं के मुताबिक, नीम का पेड़ भगवान विष्णु के रूप देवनारायण से जुड़ा है, गांव में अधिकतर आबादी गुर्जर समाज के लोग की है और गुर्जर समाज के लोगों के इष्ट देव भगवान देवनारायण है। यही वजह है कि गांव वाले नीम के पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। नीम के पेड़ों के प्रति लोगों में गहरी आस्था है। इसी वजह से नीम के पेड़ काटने या किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने वाले पर जुर्माना लगाया जाता है। नीम की टहनियां या पत्तियों में औषधीय गुण होते हैं । इस लिहाज से उन्हें जरूरत के मुताबिक तोड़ा जा सकता है, लेकिन बकरियों को खिलाने या मनोरंजन के लिए तोड़ना पूरी तरह मना है। पीढ़ियों से नीम काटना माना जाता है अपराध अजमेर जिले के इस गांव पदमपुरा के ग्रामीण पिछले सात शताब्दियों से नीम के पेड़ों को संरक्षित कर रहे हैं, इतना कि पेड़ों को काटना उनके लिए अपराध माना जाता है। पदमपुरा गांव वृक्ष प्रेमियों और पर्यावरण के लिए काम करने वालों के लिए एक रोशनी की किरण है। अजमेर के इस गांव में नीम के पेड़ों को काटना पीढ़ियों से अपराध माना जाता रहा है। इस गांव का हर व्यक्ति नीम को पवित्र मानता है और इसकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नीम वाला गांव के नाम से है पहचान अजमेर से 18 किलोमीटर दूर अरावली पहाड़ियों की गोद में बसा पदमपुरा गांव 705 साल पुराना इतिहास समेटे हुए है। पहाड़ी की तलहटी में बसे इस गांव में एक छोटा सा किला है जो इसके प्राचीन इतिहास का गवाह है। लोग इसे 'नीम वाला गांव' के नाम से भी जानते हैं जो गांव में लगे हजारों नीम के पेड़ों के प्रति स्थानीय लोगों के प्रेम को अमर करता है। पदमपुरा गांव में नीम के पेड़ को काटना तो दूर उसकी टहनी तोड़ना भी अपराध माना जाता है। करीब 1200 लोगों से अधिक की आबादी वाले पदमपुरा गांव में नीम का पेड़ सिर्फ आस्था का हिस्सा ही नहीं बल्कि पूर्वजों से मिली विरासत भी है, जिसे यहां उतनी ही शिद्दत से सहेज कर रखा गया है। ऐसा नहीं है कि यहां नीम के अलावा कोई पेड़ नहीं है, लेकिन इस गांव और यहां रहने वाले लोगों के लिए नीम का पेड़ भगवान है। जब पदम सिंह ने गांव बसाया तो ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि नीम के पेड़ को कभी नहीं काटा जाएगा और यह कानून बन गया। गांव में ज्यादातर आबादी गुर्जर समुदाय की है। गुर्जर समुदाय के देवता देवनारायण हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। गुर्जर ने ऐसे समय में नीम के पेड़ों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों के प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया, जब पर्यावरण तेजी से खराब हो रहा है। चौपाल लगाकर दिया जाता है दंड गांव के रहने वाले जसराज गुर्जर बताते है कि बचपन से ही वे अपने बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि नीम को नारायण का रूप माना जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी किसी को पेड़ काटते नहीं देखा, इसकी टहनी तो दूर की बात है। अगर किसी के घर या रास्ते में नीम का पेड़ बाधा बनता है तो गांव के लोग चौपाल पर एकत्र होकर निर्णय लेते हैं और संबंधित व्यक्ति से मंदिर में दान करने और पक्षियों व कबूतरों को दाना डालने के लिए कहा जाता है। गांव में खेती के साथ-साथ लोग पशुपालन भी करते हैं और ज्यादातर लोग बकरी पालन करते हैं। गांव के लिए वरदान है नीम का पेड़ जसराज गुर्जर ने कहा कि नीम के पेड़ गांव के लिए वरदान हैं क्योंकि इससे गांव का वातावरण स्वच्छ रहता है और लोग स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने कहा, कोरोना काल में भी गांव का एक भी व्यक्ति बीमारी से ग्रस्त नहीं हुआ। वहीं गांव के बुजुर्ग बताते है कि नीम के पेड़ से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि गांव में 15 हजार से ज्यादा नीम के पेड़ हैं। गांव में नीम के पेड़ ज्यादा होने की वजह से गर्मी के दिनों में गांव का तापमान बाकी जगहों से कम रहता है। गांव में जब बिजली चली जाती है तो लोग नीम की ठंडी छांव में समय बिताते हैं। गांव के बुजुर्ग ने बताया कि 700 साल पहले बुजुर्गों ने नीम की रक्षा और संरक्षण का फैसला लिया था और पीढ़ी दर पीढ़ी वे इसका पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई चुपके से नीम की एक टहनी भी तोड़ देता है और इसकी जानकारी नहीं देता है तो देवनारायण खुद उसे सजा देते हैं। recent visitors 218