पीएम ओली चीनी की खतरनाक चाल से निपटने अब भारत की शरण में पहुंचे

काठमांडू नेपाल के नए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी भारत विरोधी नीतियों के लिए जाने जाते रहे हैं। ओली ने ही चीनी राजदूत के इशारे पर नेपाल का नया नक्‍शा जारी किया था जिसमें भारतीय इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपना बताया था। प्रचंड को सत्‍ता से हटाकर ओली एक बार फिर से नेपाल के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। वहीं केपी ओली के आने से उत्‍साहित चीन ने नेपाल पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह अपने कर्ज के जाल में फंसाने वाले बीआरआई प्रॉजेक्‍ट में शामिल हो। नेपाल में चीन के राजदूत लगातार धमकाने वाले बयान देते रहते हैं। इस बीच पीएम ओली चीनी ड्रैगन की चाल से निपटने के लिए अब भारत की शरण में पहुंच गए हैं। आइए समझते हैं पूरा मामला…  रिपोर्ट के मुताबिक केपी ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल ने कहा है कि नेपाल बीआरआई पर पीछे नहीं हटेगा लेकिन भारत की संवेदनशीलताओं का पूरा ध्‍यान रखा जाएगा। उसने कहा कि हमारा मानना है कि भारत का विरोध करके न तो नेपाल प्रगति हासिल कर सकता है और न ही नेपाली लोगों का हित बढ़ाया जा सकेगा। नेपाल के अंतरराष्‍ट्रीय मामलों पर नजर रखने वालों का कहना है कि चीन के बीआरआई प्रॉजेक्‍ट ने ओली को फंसा दिया है। नेपाल ने इस पर साल 2017 में इस समझौते पर साइन किया था। ओली इस बार भारत समर्थक पार्टी नेपाली कांग्रेस की मदद से सत्‍ता में आए हैं। चीन लगातार अब नेपाल सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह बीआरआई पर आगे बढ़े। भारत के साथ दोस्‍ती चाहते हैं ओली विश्‍लेषकों का कहना है कि वहीं ओली अब भारत के साथ रिश्‍ते सुधारना चाहते हैं जो अपने पड़ोस में चीन के बढ़ते प्रभाव को खतरे के रूप में लेता है। नेपाली सेना से रिटायर रणनीतिक विश्‍लेषक मेजर जनरल बिनोज बासनयत ने कहा कि बीआरआई अभी चर्चा में बना रहेगा लेकिन ओली के राज में इसे बहुत गति नहीं मिलने जा रही है। इसकी वजह ओली की गठबंधन सरकार है। उन्‍होंने कहा कि चीन की ओर से नेपाल सरकार पर बीआरआई को लागू करने को लेकर दबाव बना रहेगा लेकिन ओली के गठबंधन सहयोगी नेपाली कांग्रेस इसको लेकर एकदम अलग सोचती है। बिनोज ने कहा कि नेपाली कांग्रेस लोन की मदद से कोई भी बीआरआई प्रॉजेक्‍ट आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। नेपाली कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह चीन से ग्रांट या सॉफ्ट लोन के खिलाफ नहीं है जिसमें लंबे समय में कम ब्‍याज पर पैसा लौटाना होता है। जून महीने में चीन के उप विदेश मंत्री नेपाल आए थे ताकि बीआरआई को आगे बढ़ाया जा सके लेकिन ऐसा हो नहीं सका। नेपाल और चीन के बीच शर्तों को लेकर कोई समझौता नहीं हो पाया। तत्‍कालीन पीएम प्रचंड ने भारत की चिंताओं को देखते हुए बीआरआई को लागू करने को मंजूरी नहीं दी। विश्‍लेषकों का कहना है कि ओली खुद भी नहीं चाहते हैं कि नेपाल चीन से लोन लेकर बीआरआई को लागू करे। recent visitors 119

मध्य प्रदेश सरकार छह और सात अगस्त को दो किश्त में 5 हजार करोड़ रुपये का कर्जा लेगी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पर इस वित्तीय वर्ष में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो जाएगा। इसी के साथ मध्य प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति 50 हजार रुपये से अधिक का कर्जदार होगा। अब तक सरकार 3.75 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। अब छह और सात अगस्त को दो किस्तों में पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाएगा। वहीं, मध्य प्रदेश के कुल बजट की बात करें तो 3.65 लाख करोड़ रुपये का बजट है, लेकिन इससे अधिक मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज है। जीडीपी का तीन प्रतिशत लोन ले सकती है सरकार वित्तीय वर्ष 2024-25 की समाप्ति तक राज्य सरकार पर चार लाख 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर्ज होने का अनुमान है, क्योंकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार सरकार राज्य सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत तक ऋण ले सकती है। आधा प्रतिशत ऋण ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों के लिए विशेष परिस्थिति में लिया जा सकता है। वर्ष 2024-25 में सरकार 65 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज ले सकती है। इसका उपयोग विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए किया जा सकता है। ऐसे बढ़ा प्रदेश पर कर्ज मार्च 2023 मार्च की स्थिति में प्रदेश पर कुल कर्ज 3,19,109 करोड़ रुपये था। जुलाई 2024 तक मध्य प्रदेश पर 3,75,578 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है। वर्तमान प्रत्येक व्यक्ति है 45 हजार रुपये का कर्जदार जुलाई में लाए गए 3.65 लाख करोड़ रुपये के बजट में कुल राजस्व आय 2.63 लाख करोड़ रुपये है और साल भर के खर्च 3.26 लाख करोड़ रुपये हैं। ऐसे में राज्य सरकार को खर्चों के लिए 31 मार्च 2025 तक और कर्ज लेना होगा। इसमें बाजार से 65 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा सकता है। अभी मप्र सरकार पर जो कर्ज है उसके अनुमान में यह बात सामने आती है कि वर्तमान में मप्र का प्रत्येक व्यक्ति पर 45 हजार रु. का कर्जदार है। मार्च 2025 तक प्रत्येक व्यक्ति 50 हजार से अधिक के कर्ज में होगा। recent visitors 96

CAG रिपोर्ट केअनुसार सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी से तेलंगाना के खजाने को 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान

हैदराबाद  तेलंगाना में 1983 से 2018 के बीच शुरू हुई 20 सिंचाई परियोजनाओं की लागत मार्च 2023 तक एक लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये हो गई जिसका कारण इनके क्रियान्वयन में विलंब होना है। भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।  राज्य विधानसभा में रखी गई कैग रिपोर्ट (2022-23 के लिए) के अनुसार, परियोजनाओं के पूरा न होने से राज्य आर्थिक विकास के अपेक्षित लाभ से वंचित हो रहा है और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण में निवेश से मिलने वाले लाभ की कोई गारंटी नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य सरकार ने किसी भी सिंचाई परियोजना के वित्तीय परिणामों को सामने नहीं रखा है। कैग ने कहा, ‘‘वर्ष 2023 तक पूरी होने वाली 20 सिंचाई परियोजनाएं (1983 से 2018 के बीच शुरू) अधूरी हैं। इन परियोजनाओं की मूल लागत 1,02,388 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,06,977 करोड़ रुपये हो गई है, यानी विलंब की वजह से लागत में 1,04,589 करोड़ रुपये (102 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है।’ मार्च 2023 तक इन परियोजनाओं पर 1,73,564 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार पर 13 अधूरी सिंचाई परियोजनाओं के संबंध में 8,971 करोड़ रुपये की देनदारी है। कैग रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इन परियोजनाओं/निर्माण के पूरा होने में अत्यधिक देरी से न केवल सरकार पर वित्तीय बोझ साल दर साल बढ़ता जा रहा है, बल्कि जनता को अपेक्षित लाभ से भी वंचित होना पड़ रहा है।’’   recent visitors 121

अनजाने में जातिसूचक शब्द के प्रयोग से नहीं चल सकता एससी-एसटी एक्ट का केस :इलाहाबाद हाई कोर्ट

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि आरोपित नहीं जानता कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है तो विवाद होने पर एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। कोर्ट ने जालौन जिले में टवेरा कार की सामने से आल्टो कार में टक्कर मारना और गाली-गलौच, मार-पीट करने पर आईपीसी सहित एससी-एसटी एक्ट में दर्ज आपराधिक केस कार्यवाही रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि विवेचना अधिकारी ने सतही तौर पर विवेचना की। किसी चश्मदीद गवाह का बयान नहीं लिया और यह पता करने की कोशिश नहीं की कि क्या घटना पर एससी-एसटी एक्ट का अपराध बनता भी है या नहीं और चार्जशीट दाखिल कर दी। किसी के चोटिल होने की रिपोर्ट नहीं है और पहचान परेड भी नहीं कराई गई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा कि जब आरोपित को मालूम ही नहीं था कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है और अनजाने में अपमानित किया गया है तो एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने नसीम खान, फहीम व पांच अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने 27 जून 19 को दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश व सम्मन रद्द कर दिया है। मालूम हो कि शिकायतकर्ता आल्टो कार चला रहा था। याची व अन्य आरोपित टवेरा कार चला रहे थे। पेट्रोल पम्प पर याची ने अपनी कार से ऑल्टो में टक्कर मारी और मार-पीट की। जिस पर एफआईआर दर्ज की गई थी। ST/SC Act का दुरुपयोग चिंतनीय: इलाहाबाद हाई कोर्ट देश में एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। ये सवाल यूँ ही नहीं उठाए जाते हैं, इसके ऐसे कई उदाहरण हैं कि फर्जी SC-ST के कारण कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई। कई लोगों के जीवन के अनमोल वर्ष जेल में बीते और बाद में पता चला कि केस झूठा था। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और कठोर टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई करने के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी के इशारे पर एक पति-पत्नी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा, “अगर उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति किसी और के द्वारा नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी के द्वारा दी जाती है तो यह न्यायालय अपने कर्तव्य में असफल होगा। यहाँ भू-माफियाओं, राजस्व अधिकारियों और तत्कालीन एसएचओ की मिलीभगत है, जिसमें एक जोड़े को गलत तरीके से आपराधिक कार्यवाही में फंसाया गया है और उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया गया।” याचिकाकर्ता अलका सेठी और उनके पति ध्रुव सेठी द्वारा दायर याचिका पर FIR रद्द करने का आदेश कोर्ट ने दे दिया। याचिकाकर्ताओं पर आरोप था कि सतपुड़ा में सड़क के खसरा नंबरों का लेखपाल निरीक्षण कर रहा था। इस दौरान अलका और उनके पति से लेखपाल का सामना हुआ। याचिका के अनुसार दोनों दंपत्ति ने लेखपाल को जातिसूचक गालियाँ दीं। कथित तौर पर ध्रुव सेठी ने कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह उसकी पत्नी के साथ बदतमीजी और भ्रष्टाचार के मुकदमे में फँसा देगा। आरोप है कि याचिकर्ता ने लेखपाल को बंधक बना लिया था और बिहारीगढ़ एसएचओ के हस्तक्षेप के बाद लेखपाल को रिहा कराया जा सका। इसके बाद लेखपाल ने SC/ST ऐक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पति-पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज करा दी। इसके बाद पूरे आपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम), सहारनपुर द्वारा पारित समन एवं आरोप पत्र को चुनौती देते हुए पति-पत्नी ने अदालत का रुख किया। इस पर तर्क दिया गया कि ध्रुव सेठी ने जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था और म्युटेशन के बाद सीमांकन के लिए आवेदन किया था। सीमांकन के आदेश के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने इसे पूरा नहीं किया। अधिकारी सीमांकन नहीं कर रहे थे और इसके लिए आवेदकों को इधर-उधर दौड़ा रहे थे। जब उन पर दबाव डाला गया तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सीमांकन पक्षों के सामने कराया जाएगा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्होंने आवेदकों की अनुपस्थिति में सीमांकन करना शुरू कर दिया। जब इसका विरोध किया गया तो हाथापाई शुरू हो गयी। दंपति ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय भू-माफिया, जिनका उस क्षेत्र में और राजस्व पर भी प्रभाव था, और स्थानीय पुलिस अधिकारी ने एक साजिश रची। वे उनकी जमीन हड़पना चाहते थे। इसी वजह से उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही दंपति ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि लेखपाल की जाति क्या है और ना ही जाति से संबंधित उन्होंने कोई बात कही। इस पर न्यायालय ने कहा कि चौंकाने वाली बात है कि ST/SC ऐक्ट के प्रावधानों का कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत प्रतिशोध, व्यक्तिगत हितों या खुद को बचाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। न्यायालय ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एक भी सबूत नहीं था कि उन्हें लेखपात की जाति के बारे में पता था। कोर्ट ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि आवेदकों ने लेखपाल के खिलाफ जाति-संबंधी शब्दों का इस्तेमाल किया था। राजस्व अधिकारी को बाँधने की घटना को भी कोर्ट ने अविश्वसनीय बताया और कहा कि एक महिला एवं एक पुरुष इतने लोगों कैसे हावी हो सकते हैं और एक व्यक्ति को बाँध सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि FIR पढ़ने से कोई मामला नहीं बनता। इसलिए इसे रद्द किया जाता है। SC/ST Act के दुरुपयोग को लेकर कई कोर्ट सख्त यह कोई पहली बार नहीं है कि किसी कोर्ट ने ST/SC ऐक्ट के गलत इस्तेमाल पर इस तरह की कठोर टिप्पणी की है। इससे पहले इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे ही व्यक्ति को निर्दोष करार दिया था, जो पिछले 20 वर्षों से जेल में कैद था। व्यक्ति को बलात्कार के आरोप और SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपित की रिहाई की बात कहते हुए मामले पर तल्ख़ टिप्पणी भी … Read more

लंका के स्पिनरों और धीमी पिच से पार पाने का तरीका खोजना होगा भारत को

कोलंबो  भारत को अगर श्रीलंका के खिलाफ दबदबा बनाए रखना है तो उसे आज रविवार को यहां होने वाले दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में स्पिनरों और धीमी पिच से निपटने का तरीका ढूंढना होगा। भारत शुक्रवार को खेले गए पहले वनडे मैच में 231 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय तीन विकेट पर 130 रन बनाकर अच्छी स्थिति दिख रहा था लेकिन इसके बाद श्रीलंका के स्पिनर हावी हो गए और भारतीय टीम 230 रन पर आउट हो गई जिससे यह मैच टाई रहा। रोहित शर्मा ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की लेकिन इसके बाद श्रीलंका के स्पिनरों ने अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया। भारत ने उनका सामना करने के लिए विराट कोहली, केएल राहुल और श्रेयस अय्यर को उतारा जिन्हें स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ काफी सफलता मिली है। इन तीनों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई लेकिन वे स्वच्छंद होकर बल्लेबाजी नहीं कर पाए। कोहली पर बाएं हाथ के स्पिनर डुनिथ वेलालेज और लेग स्पिनर वानिंदु हसरंगा ने लगाम कसे रखी। पिच काफी धीमा खेल रही थी और ऐसे में स्पिनर का सामना करना आसान नहीं था। यहां तक के बाद में मुख्य रूप से बल्लेबाज श्रीलंकाई कप्तान चरित असलांका ने भी गेंदबाजी की और तीन महत्वपूर्ण विकेट लेकर मैच को टाई कराया। भारतीय बल्लेबाजों को साझेदारी निभाने की जरूरत थी लेकिन वह इसमें नाकाम रहे। दूसरी तरफ श्रीलंका के पाथुम निसांका और वेलालेज ने दूसरे छोर पर विकेटों की झड़ी के बावजूद अर्धशतक जमा कर दिखाया कि इस तरह के विकेट पर किस तरह से बल्लेबाजी करनी चाहिए। उन्होंने कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर का प्रभावी ढंग से सामना किया। शुभमन गिल सहित भारत के चार स्पिनरों ने 30 ओवर में 126 रन देकर चार विकेट लिए जबकि श्रीलंका की तरफ से स्पिन गेंदबाजों 37.5 ओवर किए और 167 रन देकर नौ विकेट लिए। भारतीय स्पिनरों को रन रोकने के साथ ही विकेट हासिल करने पर भी ध्यान देना होगा। भारत बल्लेबाजी में एक बदलाव करके ऋषभ पंत या रियान पराग को मौका दे सकता है जिनका स्पिनर के खिलाफ अच्छा रिकॉर्ड रहा है। यह दोनों बल्लेबाज अपरंपरागत शॉट खेल कर उनकी लय बिगाड़ सकते हैं। वेलालेज ने वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल के खिलाफ स्कूप और रिवर्स स्वीप का अच्छा इस्तेमाल किया। पराग स्पिनर की भूमिका भी निभा सकते हैं लेकिन यह देखना होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन केवल एक मैच के बाद टीम में बदलाव करता है या नहीं क्योंकि हाल के दिनों में उसकी ऐसी रणनीति नहीं रही है। टीम इस प्रकार है: भारत: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), विराट कोहली, केएल राहुल (विकेटकीपर), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, मोहम्मद। सिराज, वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, रियान पराग, अक्षर पटेल, खलील अहमद, हर्षित राणा। श्रीलंका: चरित असलांका (कप्तान), पाथुम निसांका, अविष्का फर्नांडो, कुसल मेंडिस, सदीरा समरविक्रमा, कामिंदु मेंडिस, जेनिथ लियानगे, निशान मदुश्का, वानिंदु हसरंगा, डुनिथ वेलालेज, चमिका करुणारत्ने, महीश थीक्षाना, अकिला धनंजय, दिलशान मदुशंका, मथीशा पथिराना, असिथा फर्नांडो। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 2.30 बजे शुरू होगा।   recent visitors 109

मुख्यमंत्री नरसिंहपुर में लाड़ली बहनों के आभार सह उपहार कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बहनों के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार कृत संकल्पित है। प्रदेश की जनता और बहनों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का एक अलग ही आनंद है। बहनों ने आज जिस स्नेह से उन्हें राखी बांधी है, उसे वह भूल नहीं सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज रक्षाबंधन एवं श्रावण उत्सव में नरसिंहपुर के कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित लाड़ली बहनों के आभार सह उपहार कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लाड़ली बहनों को राज्य सरकार प्रतिमाह 1250 रुपये की राशि दे रही है, जिसका उपयोग बहनें अपने परिवार को चलाने के लिए करती हैं। इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर 10 तारीख को लाड़ली बहना योजना की राशि के साथ उन्हें 250 रुपये अलग से दिये जायेंगे। यह राशि प्रदेश की 1.29 करोड़ बहनों के बैंक खातों में अंतरित की जायेगी। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व सभी त्यौहारों से बड़ा है, जो भाई- बहन के अटूट प्रेम को प्रदर्शित करता है। आज यहां नरसिंहपुर की बहनों के बीच पहुंचकर जो स्नेह मुझे मिला है, ऐसा लगता है कि आज मैंने सभी त्यौहार मना लिये। यह त्यौहार हमारी सनातन संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि उपज मंडी नरसिंहपुर में आयोजित लाड़ली बहनों के आभार सह उपहार कार्यक्रम में 151.13 करोड़ रुपये की लागत से 12 निर्माण कार्यों का लोकार्पण, भूमिपूजन व शिलान्यास किया। साथ ही विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के तहत हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को लाड़ली बहनों ने वृहद राखी भेंट की और उनकी कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने नरसिंहपुर की खुली जेल परिसर में आम का पौधा रोपा। जेल विभाग के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सौभाग्य से होता है मनुष्य का जन्म भारत भूमि में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई जन्मों के पुण्य के बाद भाग्य अच्छा हो, तो मनुष्य इस पृथ्वी पर जन्म लेता है और सौभाग्य अच्छा रहा, तो वह भारत में जन्म लेता है। भगवान के भक्ति के पुण्य से मध्यप्रदेश में तथा साधना की पराकाष्ठा से वह नर्मदा किनारे जन्म लेता है। हमारी संस्कृति है जियो और जीने दो। हमारी संस्कृति सर्वे भवंतु सुखिन:-सर्वे संतु निरामया, यही संस्कृति हमें एक-दूसरे एवं प्रकृति से जोड़ती है। चराचर जगत में हमारी समरसता के कारण ही भारत की अलग पहचान है, जहां सदैव संस्कार पूजे जाते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद द्वारा अमेरिका में दिये भाई- बहनों के संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में समानता का भाव है। जहां दुनिया में व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की आवश्यकता होती है, लेकिन हमारे यहां यह कार्य संस्कार करते हैं। पुलिस तो गुंडे- बदमाशों को नियंत्रित करने के लिए चाहिये। कोई भी योजना नहीं होगी बंद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं की बेहतर शिक्षा के लिए नई शिक्षा नीति के तहत नरसिंहपुर सहित प्रदेश के हर जिले में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गये हैं। उन्होंने कहा कि खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को केन्द्र सरकार 6 हजार रुपये तथा राज्य सरकार भी 6 हजार रुपये दे रही है, जिससे किसान खाद- बीज, बिजली, पानी आदि की पूर्ति कर सके। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार की छात्रवृत्तियां चालू रहेंगी, जिससे विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। प्रदेश में संचालित सभी कल्याणकारी योजनाएँ निरंतर चलती रहेगी, कोई भी योजना बंद नहीं की जायेगी। युवाओं को सीखो- कमाओ योजना में इंटरशिप में हिस्सेदारी दी जायेगी। दुग्ध उत्पादक कृषकों को दी जायेगी बोनस राशि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं, धान के बोनस की तरह अब दुग्ध उत्पादक किसानों को भी बोनस राशि दी जायेगी। उन्होंने कहा कि नरसिंहपुर कृषि उपज मंडी के उन्नयन के लिए जो भी लागत आयेगी, वह स्वीकृत की जायेगी। मुख्यमंत्री ने विगत दिवस जिले के गाडरवारा विधानसभा के सांईखेड़ा विकासखंड के ग्राम रम्पुरा में अतिवर्षा से मकान ढहने से मृत व्यक्तियों को 4-4 लाख और घायलों को एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा भी की। पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि सावन की झड़ी की भांति विकास के लिए प्रदेश के मुखिया का आशीर्वाद प्रदेश को मिलता रहे। उन्होंने विकास कार्यों की जानकारी भी दी। उनके आगमन पर बधाई व शुभकामनायें दी। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, सांसद श्री चौधरी दर्शन सिंह ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज़िला प्रशासन के विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया।   recent visitors 107

आठ करोड़ की लागत से बने पाँच कन्या छात्रावास, छतीसगढ़-रायपुर में मुख्यमंत्री साय ने किया शुभारंभ

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज आरंग में पाँच कन्या छात्रावासों का शुभारंभ किया। पाँचो छात्रावासों के शुरू हो जाने से अनुसूचित जाति की तीन सौ कन्याओं की अपनी पढ़ाई के लिए आवासीय सुविधा मिलेगी। इन छात्रावासों की लागत आठ करोड़ छह लाख रुपये से ज्यादा है। मुख्यमंत्री ने पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास आरंग 100 सीटर लागत 174.67 लाख, प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास मंदिर हसौद, 50 सीटर लागत 174.67 लाख, अनुसूचित जाति कन्या आश्रम आरंग 50 सीटर लागत 162.76 लाख, अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास आश्रम 50 सीटर लागत 162.76 लाख, नवीन प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास आरंग 50 सीटर लागत 152.97 लाख रूपए का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कन्या छात्रावास परिसर में एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत रामफल के पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सभी हॉस्टल, छात्रावासों में दो हजार सीटों की वृद्धि करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने माइनर नगर वितरक शाखा क्रमांक-एक पोढ़ापार रसोटा तुलसी केशला के जीर्णाेद्धार, आरंग एसडीएम और तहसील कार्यालय के कर्मचारियों के लिए आवास के निर्माण, आरंग रेस्ट हाउस का विस्तार और जीर्णाेद्धार करने की घोषणा की। इस मौके पर विधायक गुरू श्री खुशवंत साहेब की मांग पर भण्डारपुरी गुरुद्वारा परिसर के निर्माण के लिए 17 करोड़ रुपये की मंज़ूरी भी दी गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छात्रावास के लोकार्पण कर छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि इन भवनों के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग की हमारी बेटियां सुविधापूर्ण तरीके से अपनी शिक्षा को जारी रख सकेंगी और अच्छी तरह पढ़-लिखकर अपने माता-पिता और हमारे प्रदेश का नाम रोशन करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है। शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम ही नहीं है बल्कि उससे भी बढ़कर एक आदर्श समाज की नींव है। किसी भी कार्य को अच्छी तरह कर पाने के लिए शिक्षा का अहम योगदान होता है। 15 साल प्रदेश में डॉ. रमन सिंह की सरकार रही, इन 15 सालों में प्रदेश में शिक्षा के विकास के लिए अनेक कार्य हुए। उस समय हमारे प्रदेश के शैक्षणिक संस्थान टॉप में रहे। उसी का परिणाम है कि आज प्रदेश में 10 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन के साथ विकास हमारी सरकार की प्राथमिकता है। हमारी सरकार को कुछ ही माह हुए हैं इतने कम समय में हमने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रदेश की जनता को दी गई गारंटियों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इस क्रम में आरंग विधानसभा के विकास के लिए भी हमने कम समय में 17 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। शिक्षा के क्षेत्र में भी हमारी सरकार लगातार कार्य कर रही है। पीएम श्री योजना में छत्तीसगढ़ के 211 स्कूलों को शामिल किया गया है। इन स्कूलों के विकास के लिए केंद्र सरकार से 02 करोड़ रूपए का बजट मिलेगा, जिसका उपयोग स्कूल में अच्छे शिक्षकों की उपलब्धता, शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ से दिल्ली जाकर आईएएस, आईपीएस परीक्षा की तैयारी करने वाले एसटी, एससी, ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए दिल्ली में निर्धारित हॉस्टल में सीटों की संख्या की बढ़ोतरी करते हुए उसे 200 किया गया है। मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार समाज के बेहतरी, उत्थान और विकास के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि इन कन्या छात्रावासों के शुभारंभ से छात्राओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही हैै कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में भवन विहीन 180 छात्रावासों के बिल्डिंग निर्माण की स्वीकृति मिली है। वर्तमान में 180 में से 121 भवन के निर्माण के लिए 210 करोड़ रूपए का टेंडर भी लगा दिया गया है। 69 छात्रावास बिल्डिंग निर्माण के लिए निविदा भी अपलोड की जा रही है। प्रदेश के 295 भवनविहीन छात्रावास और आश्रम के भवन निर्माण के लिए भी हमारी सरकार प्र्रतिबद्ध है। श्री नेताम ने आगे कहा कि हमारी सरकार ने खराब स्थिति वाले छात्रावास के मेंटेनेंस कर उन्हें सर्वसुविधा युक्त बनाने का भी कार्य कर रहे हैं। छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल और अनुकूल सुविधाएं सुनिश्चित कर रहे हैं। एसटी-एससी वर्ग के लिए छात्रावासों आश्रमों में निर्धारित संख्या 3757 है, जिनमें 1,97,000 सीटें है। कई जगहों में आश्रम छात्रावासों में भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है। प्रदेशभर में हमने नवीन एकलव्य विद्यालय भी खोले हैं। उल्लेखनीय है कि इन छात्रावास-आश्रमों में अनुसूचित जाति की छात्राओं को पढ़ाई के लिए प्रवेश दिया जाएगा, जहाँ रहकर वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगी। छात्रावासों में सुसज्जित शयन कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, क्लास रूम्स सहित भोजन कक्ष और पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा स्नानागार बनाये गये है। भवनों में बिजली-पानी की भी पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लगभग 20 स्कूली छात्राओं को आने-जाने के लिए निः शुल्क साइकिलें भी वितरित की। आरंग में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को भी लाभान्वित किया। उन्होंने मिनीमाता महतारी योजना के तहत श्रमिक परिवार की दस महिलाओं को बीस-बीस हज़ार रुपये की सहायता दी। श्री साय ने नोनी सशक्तिकरण योजना के तहतश्रमिक परिवार की  लगभग पंद्रह मेधावी छात्राओं को भी बीस -बीस हज़ार रुपये की राशि के चेक वितरित किए। मुख्यमंत्री ने दो निर्माण श्रमिकों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की। यह राशि निर्माण श्रमिक मृत्यु-दिव्यांग सहायता योजना के तहत दी गई। श्री साय ने दो बुजुर्ग श्रमिकों को बीस बीस हज़ार रुपये की सहायता श्रमिक सियान सहायता योजना के तहत प्रदान की। श्रमिकों के पाँच मेधावी बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए तीन तीन हज़ार रुपये की सहायता भी दी गई। इस योजना के तहत एक साल में नब्बे दिन निर्माण श्रमिक के रूप में काम करने वाले पंजीकृत श्रमिक के दो बच्चों को पहली कक्षा से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई के लिए एक हज़ार रुपए से दस हज़ार रुपए तक की सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री श्री साय … Read more