ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत आपने ऑपरेशन सिंदूर में देखी होगी, अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान वालों से पूछ लो : CM योगी

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस इंड्यूटियल कॉरिडोर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का वर्जुअली उद्घाटन किया. इस दौरान कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल थे. इस यूनिट को हर साल 80 से 100 मिसाइलों के प्रोडक्शन के लिए डिजाइन किया गया है. इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है, जो कभी सीधी नहीं होगी. उसको उसी भाषा में जवाब देना होगा. हमने ब्रह्मोस मिसाइल के लिए दो सौ एकड़ जमीन दी. अब यहां ब्रह्मोस बनना शुरू होगा. ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत आपने ऑपरेशन सिंदूर में देखी होगी, अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान वालों से पूछ लो कि ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत क्या है? उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि कोई भी आतंक घटना अब युद्ध मानी जाएगी और याद रखना आतंकवाद को जब तक हम पूरी तरह कुचलेंगे नहीं, तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा. अब समय आ गया है इसको कुचलने के लिए हम सभी को एक स्वर से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे भारत को पूरे उत्तर प्रदेश को मिलकर अभियान के साथ जुड़ना होगा.   उन्होंने कहा कि आतंकवाद कुत्ते की पूंछ है, जो कभी सीधी नहीं होने वाली. जो प्यार की भाषा मानने वाले नहीं हैं, उनको उनकी भाषा में जवाब देने के लिए तैयार होना होगा. इस दिशा में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया को एक संदेश दे दिया है. लखनऊ में शुरू की गई एयरोस्पेस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी से हर साल 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन किया जाएगा. इसके अलावा हर साल 100 से 150 Next Generation की ब्रह्मोस मिसाइलों का भी निर्माण किया जाएगा. ये मिसाइलें एक साल के अंदर तैयार कर दी जाएंगी. अभी तक सुखोई जैसे लड़ाकू विमान सिर्फ एक ब्रह्मोस मिसाइल ही ले जा सकते हैं, लेकिन अब वे Next Generation की तीन ब्रह्मोस मिसाइलें ले जा सकेंगे. Next Generation की ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर से अधिक होगी और इसका वजन 1,290 किलोग्राम होगा, जबकि वर्तमान ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 2,900 किलोग्राम है. लखनऊ में 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्रोडक्शन यूनिट ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण करेगी, जिसकी मारक क्षमता 290 से 400 किलोमीटर है और इसकी अधिकतम गति मैक 2.8 है. भारत और रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस मिसाइल को जमीन, समुद्र या हवा से लॉन्च किया जा सकता है. यह 'फायर एंड फॉरगेट' गाइडेंस सिस्टम को फॉलो करती है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 के वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर पहल के हिस्से के रूप में प्रोडक्शन यूनिट की घोषणा की गई थी. इसके बाद साल 2021 में इसकी आधारशिला रखी गई थी. ब्रह्मोस मिसाइलें भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई हैं और इन्हें भारत के डिफेंस सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी कार्यक्रम में टाइटेनियम और सुपर अलॉयज मैटीरियल प्लांट (स्ट्रैटेजिक मैटीरियल टेक्नोलॉजी कॉम्प्लेक्स) का भी शुभारंभ किया गया. इसमें एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का प्रोडक्शन जाएगा. इसके अलावा रक्षा परीक्षण अवसंरचना सिस्टम (डीटीआईएस) की आधारशिला रखी गई. डीटीआईएस का उपयोग रक्षा उत्पादों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए किया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई 80 हेक्टेयर भूमि पर निर्मित ब्रह्मोस प्रोडक्शन यूनिट साढ़े तीन वर्षों में पूरी हुई. यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में छह नोड हैं, जिनमें लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा, झांसी और चित्रकूट शामिल है. इसका उद्देश्य प्रमुख रक्षा निवेशों को आकर्षित करना है. तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश ऐसा कॉरिडोर स्थापित करने वाला दूसरा राज्य है.   recent visitors 47

मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित, 83 लाख का ई-केवायसी बाकी

भोपाल खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत प्रतिमाह दिए जाने वाले निश्शुल्क खाद्यान्न का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों को ही मिले, इसके लिए ई-केवायसी करवाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में अभी तक 15 लाख ऐसे हितग्राही चिह्नित किए गए हैं, जिनका या तो निधन हो गया है या फिर वे चार माह से खाद्यान्न लेने नहीं आए। इन सभी के नाम पात्रता सूची से हटाए गए हैं। अभी भी 83 लाख हितग्राहियों का ई-केवायसी होना बाकी है। इनमें भी तीन से चार लाख ऐसे हितग्राही हो सकते हैं, जिनका नाम दो जगह दर्ज है, उनका निधन हो चुका है या फिर खाद्यान्न लेने ही नहीं आ रहे हैं। ऐसे हितग्राहियों का नाम सूची से काटकर नए नाम जोड़े जाएंगे।   खाद्य सुरक्षा कानून के प्रविधान के अंतर्गत मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 5.46 करोड़ हितग्राही हो सकते हैं। यह संख्या साढ़े पांच करोड़ को पार कर गई थी। जांच कर कुछ नाम छांटे गए फिर भी अपात्रों को राशन मिलने की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए सरकार ने ई-केवायसी की प्रक्रिया प्रारंभ की। इसमें एक-एक हितग्राही की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन कराया जा रहा है। साढ़ें चार लाख हितग्राही राशन लेने ही नहीं आ रहे इसमें साढ़े चार लाख हितग्राही तो ऐसे पाए गए जो चार माह से राशन लेने के लिए नहीं आ रहे हैं। जबकि, योजना में निश्शुल्क खाद्यान्न देने का प्रविधान है। इसी तरह जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 10 लाख हितग्राही ऐसे हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर कहीं चले गए हैं। ऐसे सभी लोगों के नाम काटे जाने चाहिए थे लेकिन सूची में दर्ज थे। इनके नाम पर खाद्यान्न भी आवंटित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनवरी से अप्रैल, 2025 के बीच 15 लाख नाम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के हितग्राहियों की सूची से हटाए जा चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है इसलिए संख्या बढ़ भी सकती है।   समग्र के डाटा से हटते हैं नाम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब भी किसी हितग्राही परिवार के किसी सदस्य का निधन होता है या फिर विवाह कर लड़की ससुराल चली जाती है तो उसका नाम हटाना होता है। इसकी जानकारी स्थानीय निकायों द्वारा संग्रहित कर समग्र पोर्टल पर दर्ज कराई जाती है। वहां से खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को प्रतिमाह डाटा मिलता है, जिसके आधार पर नाम हटाए जाते हैं। इंदौर में सर्वाधिक और भिंड में सबसे कम ई-केवायसी प्रदेश में अभी तक 84 प्रतिशत ई-केवायसी का काम हो चुका है। सर्वाधिक 92 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी इंदौर में हुआ है, जबकि सबसे कम 75 प्रतिशत भिंड जिले का रहा है। बालाघाट में 90, भोपाल 85, उज्जैन 83 जबलपुर 81 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवायसी किए जा चुका है। टीकमगढ़, शिवपुरी, आलीराजपुर, अशोक नगर जिले में 80 प्रतिशत से कम काम हुआ है। 2.90 लाख टन प्रतिमाह लगता है गेहूं-चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रतिमाह 2.90 लाख टन निश्शुल्क खाद्यान्न दिया जाता है। इसमें 1.74 लाख टन चावल और 1.16 लाख टन गेहूं है। प्रदेश सरकार ने चावल का कोटा कम करके गेहूं का बढ़ाने की मांग की है। गेहूं उपार्जन का काम पूरा हो चुका है इसलिए अब कोटा में परिवर्तन संभव है। recent visitors 27

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा – मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में साथ कार्य करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में साथ कार्य करेंगे। दोनों राज्यों की साझा विरासत के संरक्षण में मिलकर कार्य करेंगे। उद्योगों के क्षेत्र और सांस्कृतिक आध्यात्मिक परंपराओं, पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में दोनों राज्यों की परस्पर सहयोग की गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में "तापी मेगा रिचार्ज परियोजना" से संबंधित एमओयू हस्ताक्षरित होने के पश्चात अन्य क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने के बारे में विचार व्यक्त किए। जबलपुर- नागपुर कॉरिडोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स तथा कृषि उत्पादन का महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों के माध्यम से काफी निर्यात होता है। महाराष्ट्र के विभिन्न बंदरगाहों में एक डेडिकेटेड निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ के गठन की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। जबलपुर से नागपुर के मध्य एक डेडिकेटेड फ्रंट कॉरिडोर बन जाने से मध्य भारत क्षेत्र में माल परिवहन में भाड़ा, समय और लागत की अत्यधिक बचत संभव होगी। आध्यात्मिक पर्यटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे अनेक तीर्थ दोनों राज्यों और देश के नागरिकों के आस्था केंद्र हैं। मध्यप्रदेश के दोनों ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और श्री ओंकारेश्वर को महाराष्ट्र के ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर, श्री भीमाशंकर और श्री घृष्णेश्वर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है। देवी अहिल्या के योगदान से दोनों राज्यों के युवाओं को कराएंगे अवगत लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर का महाराष्ट्र से संबंध था। बुनकर समाज के हित में महेश्वर सहित मालवा के अन्य स्थानों पर प्रशिक्षण और व्यवसाय उन्नयन के प्रयास किए जा रहे हैं। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के सांस्कृतिक, धार्मिक और सुशासन क्षेत्र के योगदान से दोनों प्रदेशों के प्रमुख नगरों में लाइट एण्ड साउंड शो, नाटक मंचन के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को अवगत करवाया जा सकता है। आगामी 20 मई को राजवाड़ा इंदौर में कैबिनेट बैठक का आयोजन लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के सम्मान में हो रहा है। साहसी योद्धाओं के स्वर्णिम इतिहास पर दोनों राज्यों को गर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मराठा राजशाही का संबंध मध्यप्रदेश से रहा है। साहसी योद्धा बाजीराव पेशवा सहित होलकर, शिंदे (सिंधिया), तात्या टोपे, रानी लक्ष्मी बाई, अप्पाजी भोंसले से जुड़े इतिहास के गौरवशाली दस्तावेजों के संकलन और डिजिटलाइजेशन के कार्य भी किए जायेंगे। इसी क्रम में मोड़ी लिपि की पांडुलिपियों को संरक्षित करने और उनके प्रकाशन में दोनों राज्य सहभागिता कर सकते हैं। प्रदेश में मोड़ी लिपि के लगभग 21 लाख दस्तावेज संरक्षित किए जा चुके हैं। केला महोत्स और आम महोत्सव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां बुरहानपुर में केला महोत्सव होता है, वहीं महाराष्ट्र के रत्नागिरी में आम महोत्सव का प्रचलन है। इन दोनों महोत्सवों को जोड़कर पर्यटन और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।   recent visitors 23

15 जून तक आ सकता है मानसून, मध्‍य प्रदेश में सामान्य से अधिक होगी बारिश

भोपाल प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने तय समय (15 जून) पर प्रदेश में पूर्वी क्षेत्र से दस्तक दे सकता है। प्रवेश करने के पांच दिन में मानसून के पूरे प्रदेश में छा जाने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञानियों ने मध्य प्रदेश में मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक होने की भी उम्मीद जताई है। बता दें कि पिछले वर्ष प्रदेश में मानसून छह दिन की देरी से 21 जून को आया था। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस बार देश में मानसून का प्रवेश चार दिन पहले अर्थात 27 मई तक होने का अनुमान लगाया है। इस हिसाब से 15 से 18 दिन में मानसून के मप्र में प्रवेश करने के आसार हैं। प्रदेश में मानसून आने की सामान्य तारीख 15 जून है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से मानसून की प्रदेश में एंट्री 18 जून के बाद ही हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डा. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि यदि देश में मानसून जल्दी आता है, तो प्रदेश में भी इसके तय समय पर आने की संभावना है। पिछले वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 21 जून को प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र पांर्ढुना, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में प्रवेश किया था। इस बार भी इन्हीं जिलों से मानसून के प्रवेश की संभावना बताई जा रही है। सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक, प्रदेश में 104 से 106 प्रतिशत अर्थात औसत 38-39 इंच वर्षा हो सकती है। जबलपुर-शहडोल संभाग में सबसे ज्यादा वर्षा संभावित है। जबकि ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में भी वर्षा का कोटा फुल हो सकता है। बता दें कि प्रदेश की सामान्य वर्षा औसत 37.3 इंच है। पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में कब-कब आया मानसून वर्ष- आगमन- विदा हुआ2024- 21 जून- 07 अक्टूबर2023- 24 जून- 09 अक्टूबर2022- 16 जून- 14 अक्टूबर2021- 09 जून- 11 अक्टूबर2020- 14 जून- 21 अक्टूबर2019- 24 जून- 12 अक्टूबर2018- 25 जून- 04 अक्टूबर2017- 22 जून- 11 अक्टूबर2016- 19 जून- 13 अक्टूबर2015- 15 जून- 02 अक्टूबर(मौसम विज्ञान केंद्र के सौजन्य से) recent visitors 30

महाकाल मंदिर में अब सीमित को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जाएगी

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अब सीमित संख्या में भक्तों को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति प्रदान की जाएगी। कितने भक्तों को प्रतिदिन अनुमति दी जाएगी, इसकी संख्या समिति तय करेगी। इसके लिए जल्द ही उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह निर्णय गुरुवार को प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया है। बता दें, वर्तमान में करीब 1800 भक्तों को प्रतिदिन भस्म आरती दर्शन अनुमति दी जा रही है।   नंदी, गणेश और कार्तिकेय मंडपम में बैठते हैं भक्त महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के चार बजे भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है। मंदिर में स्थान सीमित है, इसलिए मंदिर समिति प्रतिदिन 1800 भक्तों को ही अनुमति देती है। इन दर्शनार्थियों को नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडपम में बैठाकर भस्म आरती के दर्शन कराए जाते हैं। देखने में आ रहा है कि जो दर्शनार्थी गर्भगृह के द्वार की सीध में बैठे होते हैं उन्हें दर्शन हो जाते हैं लेकिन जो आसपास बैठते हैं, उन्हें सुविधा से दर्शन नहीं हो पाते हैं। दर्शनार्थियों की सीमित संख्या होने पर श्रद्धालु ऐसे स्थान पर बैठ पाएंगे, जहां से भस्म आरती के सुविधापूर्वक दर्शन हो सकेंगे। चलायमान व्यवस्था करेंगे प्रभावी प्रबंध समिति ने चलायमान व्यवस्था से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती दर्शन कराने का निर्णय लिया है। 11 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत भी होने वाली है, ऐसे में चलायमान व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह निश्शुल्क है और इसके लिए किसी प्रकार की कोई अनुमति भी नहीं लेनी पड़ती है। भक्तों को तड़के चार बजे से ही भगवान महाकाल के दर्शन सुलभ हो जाते हैं।   इन माध्यमों से मिलती है अनुमति ऑनलाइन मंदिर की वेबसाइट पर भक्त आनलाइन दर्शन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए प्रतिव्यक्ति 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। प्रतिदिन 400 भक्तों को आनलाइन अनुमति दी जाती है। ऑफलाइन महाकाल महालोक स्थित बुकिंग काउंटर के माध्यम से प्रतिदिन 300 भक्त आफलाइन अनुमति प्राप्त कर सकते हैं। ऑफलाइन अनुमति निश्शुल्क है। प्रोटोकाल सांसद, मंत्री, विधायक, विभिन्न विभागों के प्रमुखों की अनुशंसा पर करीब 600 लोगों को प्रतिदिन दर्शन अनुमति दी जाती है। प्रोटोकाल दर्शन अनुमति के लिए भी 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। पुजारी, पुरोहित मंदिर समिति प्रतिदिन पुजारी, पुरोहित व उनके प्रतिनिधियों के यजमानों को करीब 500 अनुमति जारी करती है। इसके लिए भी यजमानों को प्रति व्यक्ति 200 रुपये शुल्क चुकाना होता है। recent visitors 49

मौसम विभाग ने बताया-इस बार समय से पांच दिन पहले ही मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है

नई दिल्ली   मौसम को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार समय से पांच दिन पहले ही मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है। 27 मई को मॉनसून पहुंचने की संभावना जताई गई है। आम तौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट पर पहुंचता है। आईएमडी के आंकड़े के अनुसार, यदि मानसून केरल में उम्मीद के अनुरूप पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर मानसून का समय से पहले आगमन होगा। तब मानसून 23 मई को आया था। आमतौर पर, दक्षिण-पश्चिम मानसून एक जून तक केरल में दस्तक देता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में छा जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है। आईएमडी ने अप्रैल में 2025 के मानसून में सामान्य से अधिक कुल वर्षा का पूर्वानुमान जताया था और अल नीनो परिस्थितियों की संभावना को खारिज कर दिया था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा से जुड़ी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम रविचंद्रन ने कहा था, ‘भारत में चार महीने के मानसून (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।’ इस बार प्री मॉनसून ऐक्टिविटी भी काफी देखी जा रही है। पिछले एक महीने से देश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां जारी ही रही हैं। शनिवार को भी राजधानी दिल्ली में बौछार पड़ने के बाद मौसम ठंडा हो गया। वहीं बीते पांच दिनों में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में अलग-अलग इलाकों में बारिश हुई है। पश्चिमी विक्षोभ और अन्य कारणों से उत्तर भारत में होने वाली बारिश के चलते अब तक हीटवेव का ज्यादा प्रकोप देखने को नहीं मिला है। वहीं गर्मी बढ़ने की संभावना के बीच मॉनसून जल्दी आने की खबर भी राहत भरी है। recent visitors 44

स्टारलिंक को भारत में सर्विसेज शुरू करने की हरी झंडी मिली, लगेगा 4 % स्पेक्ट्रम शुल्क

नई दिल्ली  दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सर्विसेज शुरू करने की हरी झंडी मिल गई है। यह कंपनी सैटेलाइट के जरिए दुनिया के 100 से अधिक देशों में इंटरनेट सर्विसेज देती है। इस बीच दूरसंचार नियामक ट्राई ने स्टारलिंक जैसे उपग्रह संचार सेवा प्रदाताओं पर वार्षिक राजस्व का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लगाने की सिफारिश की है। ट्राई ने दूरसंचार विभाग को दी गई अपनी सिफारिश में कहा है कि शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं को प्रति ग्राहक 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए इन कंपनियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। ट्राई ने सिफारिश की है कि उपग्रह ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए आवंटित किया जाए जिसे बाद में दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। AGR का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क भू-स्थैतिक कक्षा (जीएसओ) और गैर-भूस्थैतिक कक्षा (एनजीएसओ) में स्थित उपग्रहों के जरिये सेवाएं देने वाली दोनों तरह की उपग्रह संचार कंपनियों को देना होगा। न्यूनतम वार्षिक स्पेक्ट्रम शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज होगा। एजीआर का उपयोग उस राजस्व की गणना करने के लिए किया जाता है, जिसे दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस शुल्क के रूप में सरकार के साथ साझा करती हैं। ट्राई का यह प्रस्तावित शुल्क सेवा प्रदाता कंपनियों के अनुरोध से काफी अधिक है। मस्क की स्टारलिंक और एमेजन इंक की सहायक कंपनी कुइपर सिस्टम्स ने ट्राई के साथ परामर्श के दौरान स्पेक्ट्रम शुल्क को एजीआर के एक प्रतिशत से कम रखने और कोई अन्य शुल्क नहीं लगाने का आग्रह किया था। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने सिफारिशें जारी करते हुए कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं उन वंचित क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जहां दूरसंचार नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं। इन सेवाओं की आपदाओं, बचाव और राहत कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ट्राई ने कहा कि स्पेक्ट्रम शुल्क को कारोबारी सुगतमा को बढ़ाते हुए एजीआर के प्रतिशत के रूप में लगाया जाना चाहिए। नियामक ने कहा, 'कुल मिलाकर स्पेक्ट्रम शुल्क स्पेक्ट्रम के आवंटन को कवर करने के लिए जरूरी प्रशासनिक लागतों से अधिक नहीं होना चाहिए। यह निवेश और नवाचार को भी सुविधाजनक बनाएगा। डीओटी इन सिफारिशों पर कार्रवाई करेगा। यह उन्हें संशोधित कर सकता है या पूरी तरह स्वीकार कर सकता है और उन्हें मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल को भेज सकता है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद उपग्रह संचार कंपनियां लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती हैं। लेना होगा लाइसेंस स्टारलिंक को दो दिन पहले ही सेवा शुरू करने का आशय पत्र (LOI) दिया गया था। अब कंपनी को भारत में सेवाएं शुरू करने से पहले लाइसेंस हासिल करना होगा। स्पेसएक्स ने भारत में स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए पहले ही रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ समझौता कर लिया है। ट्राई ने इन तर्कों को खारिज किया कि उपग्रह संचार सेवाएं स्थलीय मोबाइल नेटवर्कों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करेंगी। इसके लिए दूरसंचार नियामक ने इन दोनों की नेटवर्क क्षमताओं और संचालन के पैमाने के बीच बहुत बड़ा अंतर होने का हवाला दिया। लाहोटी ने उपग्रह संचार पर अपनी अनुशंसा सौंपे जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इनमें प्रतिस्पर्धा को लेकर कोई तुलना नहीं है, ये पूरक सेवाएं हैं। यह पूछने पर कि क्या उपग्रह संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम पर ट्राई की सिफारिशों से स्थलीय मोबाइल सेवा प्रदाताओं को किसी तरह का झटका लगेगा, उन्होंने कहा, 'इन सिफारिशों के कारण (दूरसंचार कंपनियों को) कोई नुकसान नहीं होगा।' समान अवसर ट्राई ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं निकट भविष्य में स्थलीय सेवाओं के लिए काफी हद तक पूरक बनी रहेंगी और दोनों सेवाओं की परिचालन क्षमताओं तथा पैमाने में काफी अंतर है। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) ने कहा कि उपग्रह संचार सेवाओं के मूल्य निर्धारण पर ट्राई की सिफारिशें सरकार के लिए राजस्व जरूरतों और उपग्रह सेवाओं को किफायती एवं सुलभ रखने के बीच संतुलन बनाती हैं। इसके साथ ही आईएसपीए ने कहा कि इस सिफारिश में सबको समान अवसर देने पर भी ध्यान दिया गया है। recent visitors 45