ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंसते युवा: कर्ज, लत और तबाही की ओर ले जाते ऐप्स, सरकार की चुप्पी चिंता का कारण

ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंसते युवा: कर्ज, लत और तबाही की ओर ले जाते ऐप्स, सरकार की चुप्पी चिंता का कारण

Youth getting caught in the trap of online gaming: Apps leading to debt, addiction and destruction, government’s silence is a cause of concern नई दिल्ली ! online gaming a government’s silence देश में ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग और ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, और इसके चपेट में लाखों युवा आ चुके हैं। जल्दी अमीर बनने का सपना, उन्हें एक ऐसे रास्ते पर धकेल रहा है जहाँ लत, कर्ज और कई बार आत्महत्या जैसे खतरनाक परिणाम सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई मामलों में सामने आया है कि युवा बार-बार इन ऐप्स पर पैसा लगाते हैं, हारते हैं, कर्ज लेते हैं और अंततः मानसिक अवसाद में चले जाते हैं। कई युवाओं ने तो कर्ज के बोझ तले आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम तक उठा लिया है। सरकार की नीतियों पर उठते सवाल online gaming a government’s silence प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया”, और “मेक इन इंडिया जैसे अभियानों से युवाओं को नए भारत का सपना दिखाया था, लेकिन हकीकत यह है कि न नई नौकरियों का ठोस रोडमैप सामने आया, न तकनीकी शिक्षा को लेकर ठोस सुधार। सरकार की ओर से इन ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स को अप्रत्यक्ष रूप से मान्यता मिलने और इन पर किसी भी स्पष्ट नियमन की कमी से हालात और खराब हो रहे हैं। क्या चाहिए ठोस नीति और सख्त नियंत्रण online gaming a government’s silence विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि इन ऐप्स को लेकर स्पष्ट और सख्त कानून बनाए जाने चाहिए, ताकि युवा इन लतों से दूर रहें और उनका भविष्य सुरक्षित हो।सवाल यह है कि जब युवाओं को इस देश का भविष्य कहा जाता है, तो फिर सरकार कब इन ऐप्स की लूट पर लगाम लगाएगी? Read More: कर्नल सोफिया केस में नया मोड़: मंत्री विजय शाह को एसआईटी भेजेगी नोटिस, जल्द होगी पूछताछ मुख्य बिंदु वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस क़दम नहीं उठाए, तो डिजिटल गैंबलिंग से जुड़ा सामाजिक-आर्थिक संकट और गहराएगा। उद्योग का आकार जितना बड़ा होगा, उतना ही मुश्किल होगा इसे नियंत्रित करना। निष्कर्ष: तेज़ टेक्नोलॉजी और सुस्त नीति के बीच फँसते युवाओं को बचाने के लिए कई मंत्रालयों की समन्वित रणनीति और सख़्त नियम अनिवार्य हैं। वरना “डिजिटल इंडिया” का सपना, कर्ज़ और लत की स्याही से धुँधला हो सकता है। recent visitors 118