हाईकोर्ट का अहम फैसला, धारा 500 की कार्रवाई रद्द, कानूनी अधिकार से की गई शिकायत मानहानि नहीं

जबलपुर  हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा है कि कानूनी अधिकार के तहत आपराधिक शिकायत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष करना मानहानि की श्रेणी में नहीं आता है। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा ने अपने आदेश में कहा है कि यह धारा 498 अपवाद 8 के सुरक्षा कवच के अंदर आता है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ तलाश पूर्व पत्नी की शिकायत पर भोपाल न्यायालय द्वारा मानहानि तहत धारा 500 के तहत प्रारंभ की गयी आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने के आदेश जारी किये हैं।  भोपाल निवासी सैयद राशिद अली की तरफ से तलाकशुदा पत्नी की तरफ से दायर आवेदन पर भोपाल न्यायालय द्वारा मानहानि के तहत प्रारंभ किये गये आपराधिक प्रकरण को निरस्त किये जाने की राहत चाही गयी थी। याचिका में कहा गया था कि शादी के बाद झगड़ा होने पर पत्नी ने उसके खिलाफ धारा 498 ए के तहत प्रकरण दर्ज करवाया था। न्यायालय ने उसे एक साल की सजा से दंडित किया था परंतु अपीलीय न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया था। दोषमुक्ति के खिलाफ अनावेदिका ने हाईकोर्ट के अपील की है, जो लंबित है। शिकायतकर्ता अनावेदिका का कहना है कि धारा 498 ए के तहत प्रकरण दर्ज करवाने के बाद आवेदक ने मुस्लिम कानून के तहत लिखित तलाक-ए-बैन दिया। इसके बाद आवेदन ने शिकायतकर्ता तलाकशुदा पत्नी तथा उसके रिश्तेदारों के खिलाफ धारा खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 477, 494 और 149 के तहत अपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2023 को उसकी तलाकशुदा पत्नी और अन्य को दोषमुक्त कर दिया था। तलाकशुदा पत्नी ने उसके खिलाफ धारा 499 और 500 के तहत यह शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसके तथा रिश्तेदारों के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोपों लगाते हुए अपराधिक कार्रवाई प्रारंभ की थी, जिसके उसके मानसिक तकलीफ हो। इसके अलावा समाज में उसकी बदनामी करना और लंबित अपराधिक प्रकरण वापस लेने के दबाव बनाना है। तलाकशुदा पत्नी तथा उसके पिता के बयान के आधार पर भोपाल जिला न्यायालय के जेएफएमसी ने उसके खिलाफ धारा 500 के तहत अपराधिक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश जारी किये हैं, जिसमें सजा का प्रावधान है। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने आपराधिक शिकायत कानूनी अधिकार रखने वाली प्राधिकरण के समक्ष की थी। धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत कानूनी अधिकार रखने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा अच्छी नीयत से आपराधिक शिकायत में आरोप लगाना मानहानि नहीं है। एकलपीठ ने मामला धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत आता है, इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ मानहानि का कोई अपराध नहीं बनता है। याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 500 के तहत भोपाल की अदालत में चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द किया जाता है।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 25

हाईकोर्ट ने कहा: याचिकाओं को आधार से जोड़ने का मसला अब प्रशासनिक कमेटी के समक्ष

जबलपुर  हाईकोर्ट में दायर होने वाली याचिकाओं को आधार कार्ड से लिंक करने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इससे वर्षों से लंबित अनुपयोगी याचिकाओं का जल्द निराकरण होगा और लंबित प्रकरणों की संख्या में कमी आएगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के सुझाव को अभ्यावेदन मानकर रजिस्ट्रार जनरल प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखा जाए। याचिका जबलपुर निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा की तरफ से दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी हाईकोर्ट को डिजिटलीकरण के संबंध में आदेश जारी किए थे। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया कि डिजिटलीकरण के दौरान नेशनल प्रिजन पोर्टल से हाईकोर्ट को भी जोड़ा जाए, ताकि जेल में सजा काट रहे कैदियों के रिकॉर्ड देखे जा सकें। याचिका में यह भी बताया गया कि कई मामलों में कैदियों की सजा पूरी होने के बावजूद उनके द्वारा दायर अपील हाईकोर्ट में लंबित रहती है। इसी तरह जिला न्यायालय में आपसी समझौता होने के बावजूद उच्च न्यायालय में दायर याचिका लंबित रहती है। सुझाव में यह भी कहा गया कि डिजिटलीकरण के दौरान याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। कई मामलों में याचिकाकर्ता की मृत्यु होने के बावजूद याचिका लंबित रहती है, जिससे न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। इसके अलावा फाइलिंग और आवेदन पेश करने के संबंध में भी कई सुझाव दिए गए थे। युगलपीठ ने याचिका में दिए गए सभी सुझावों को उचित मानते हुए आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष स्वयं रखा। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 16

UP शिक्षा व्यवस्था पर HC की निगाह: सभी सहायक शिक्षकों की नियुक्तियां जांच के दायरे में

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों को न केवल बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनसे अब तक ली गई सैलरी की वसूली भी की जाए। 6 महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि पूरी जांच प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा किया जाए। हाईकोर्ट ने उन अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिनकी मिलीभगत या लापरवाही की वजह से ऐसे फर्जी शिक्षक सिस्टम में बने रहे। अदालत ने आदेश दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। 15 साल की सेवा के बाद खुली पोल यह पूरा मामला गरिमा सिंह नाम की एक शिक्षिका की याचिका से शुरू हुआ। गरिमा सिंह को जुलाई 2010 में देवरिया जिले के सलेमपुर विकास खंड के एक उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था। वह लगभग 15 वर्षों से अपनी सेवा दे रही थीं। 2025 में एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अन्य संबंधित अधिकारियों की जांच में पाया गया कि गरिमा सिंह ने जिन शैक्षिक दस्तावेजों और निवास प्रमाण पत्र का उपयोग किया था, वे फर्जी थे। असल में वे दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति के थे, जिनके नाम का सहारा लेकर उन्होंने धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) देवरिया ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जताई चिंता गरिमा सिंह ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके वकील का तर्क था कि वह 15 साल से निष्कलंक सेवा दे रही हैं और नियुक्ति के समय उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हो चुका था। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति चौहान ने टिप्पणी की कि "धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ का लाभ उठाने वाला व्यक्ति किसी भी तरह की रियायत या जांच का हकदार नहीं है।" अदालत ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में फर्जी प्रमाण पत्रों के बढ़ते पैटर्न पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई सहायक अध्यापक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बरसों से नौकरी कर रहे हैं और यह सब प्रबंधन या शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव पर प्रहार करती है। अदालत के अनुसार, छात्रों का हित सर्वोपरि है और अयोग्य शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 31

पेंशन विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी कार्रवाई, CMPF आयुक्त को चेतावनी, हाजिरी न देने पर गिरफ्तारी तय

जबलपुर  हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने कोल माइंस प्राविडेंट फंड (सीएमपीएफ) के क्षेत्रीय आयुक्त, जबलपुर को 11 फरवरी को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। यदि वे हाजिर नहीं हुए तो उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने की चेतावनी दी गई है। मामला एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार से जुड़ा है, जो 14 साल से लंबित पेंशन मामले का दंश भोग रहा है। प्रकरण मूलतरू लिपिकीय त्रुटि से दोहरे प्राविडेंट फंड खाते से जुड़ा है। शहडोल जिला अंतर्गत धनपुरी निवासी 57 वर्षीय विमला बाई के पति स्व. संपत द्वारा मूल रूप से याचिका दायर की गई थी, जिनका निधन याचिका की सुनवाई दौरान हो गया था। विमला बाई अब उनकी कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में मामला लड़ रही हैं। याचिका के अनुसार मृतक संपत ने वर्ष 1972 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में शहडोल जिले के धनपुरी खदान में स्वीपर के पद पर नियुक्ति पाई थी और वर्ष 2012 को 40 वर्ष से अधिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। किन्तु याचिकाकर्ता को वर्ष 1972 से 1981 के दौरान का प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ नहीं दिए गए। मामले का मूल कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की एक लिपिकीय त्रुटि बताई गई है। कर्मचारी संपत के लिए गलती से दो सीएमपीएफ खाते (1972 और 1981) खोल दिए गए। 1981 वाले खाते को मुख्य मान लिए जाने के कारण 1974 से 1981 तक के उनके सीएमपीएफ अंशदान योगदान की गणना नहीं की गई। इस मामले में 23 फरवरी, 2022 को भी हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई थी। उस समय सीएमपीएफ ने कोर्ट को बताया था कि उनका जवाब तो 2013 में ही दाखिल हो गया था, जबकि अन्य पक्षों (एसईसीएल आदि) के 2019 में जवाब दाखिल करने के बाद ही उन्हें पता चला कि याचिकाकर्ता के दो पीएफ खाते हैं। मार्च 1974 से मार्च 1981 की अवधि के दौरान कटने वाला सीएमपीएफ अंशदान, जो मूल खाता संख्या से संबद्ध था, अद्यतन नहीं हो सका। इस कारण इसी त्रुटि के कारण 1972 से 1982 की अवधि के लाभ का भुगतान नहीं हो पाया था। याचिकाकर्ता के अनुसार इस त्रुटि के कारण न केवल भविष्य निधि का पूर्ण भुगतान बाधित हुआ, बल्कि पेंशन की गणना भी अधूरी रह गई, जिससे याचिकाकर्ता को भारी आर्थिक क्षति हुई। तब कोर्ट ने सीएमपीएफ को चार सप्ताह का समय देते हुए आदेश दिया था कि वह याचिकाकर्ता को बकाया लाभ का भुगतान करे और यह दर्शाता हलफनामा दाखिल करे। हाई कोर्ट ने ताजा सुनवाई में पाया कि 2022 का आदेश आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 21

जनभागीदारी कर्मचारियों को स्थाईकर्मी घोषित ना करने पर हाईकोर्ट नें प्राचार्य को लगाई फटकार

जनभागीदारी कर्मचारियों को स्थाईकर्मी घोषित ना करने पर हाईकोर्ट नें प्राचार्य को लगाई फटकार

The High Court reprimanded the Principal for not declaring public participation employees as permanent employees. भोपाल। प्रदेश क़े शासकीय महाविद्यालयों मे कई वर्षो से कार्यरत जनभागीदारी के अंतर्गत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कोर्ट के आदेश के बाद भी स्थाईकर्मी की श्रेणी नहीं दे रहा है। जबकि कुछ कॉलेजों ने इस श्रेणी का लाभ दे दिया है। जबकि कई शासकीय महाविद्यालयों क़े प्राचार्य द्वारा कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। यानि वे मनमानी पर उतारू हैं। जिससे कर्मचारी फिर से उच्च न्यायालय की शरण ले रहे हैं।शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय इंदौर के प्राचार्य की कर्मचारी विरोधी सोच का मामला सामने आया है। उच्च शिक्षा महाविद्यालयीन जनभागीदारी कर्मचारी संघ मप्र के राजगढ़ जिले के सदस्य हितेश गुरगेला ने बताया कि इंदौर महाविद्यालय की जनभागीदारी निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों ने स्थाई कर्मी योजना से लाभान्वित करने उच्च न्यायालय इंदौर का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय इंदौर ने अंतिम निर्णय 20 दिसंबर 2024 को पारित किया था, लेकिन महाविद्यालय के प्राचार्य ने उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय का पालन नहीं किया। प्राचार्य के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की गई। बावजूद इसके प्राचार्य कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, जिससे कार्यवाही लंबे समय तक खिंचती रही। हाइकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर प्राचार्य को तलब किया और फटकार लगाई। अधिवक्ता गौरव पांचाल ने बताया है कि शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय इंदौर की प्राचार्य डॉ. अनामिका जैन ने जनभागीदारी निधि से वेतन पाने वाले दैनिक वेतनभोगियों को स्थाईकर्मी योजना से लाभान्वित नहीं करने को लेकर तर्क दिए गए, लेकिन हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा है कि रिट याचिका में 20 दिसंबर 2024 को पारित आदेश को लगभग एक वर्ष बीत चुका है। यह स्थगन का आधार नहीं हो सकता है। पुनर्विचार याचिका लंबित है। अंतिम अनुमति के रूप में न्यायालय द्वारा पारित आदेश का पालन करें अन्यथा प्राचार्य के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। हाइकोर्ट ने दो सप्ताह बाद होने वाली आगामी सुनवाई से पहले कंप्लायंस करने के निर्देश प्राचार्य को दिए। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 123

केवल उन्हीं छात्रों को कक्षा 10वीं और 12वीं में प्रवेश मिलेगा जिन्होंने कक्षा 9वीं अथवा 11वीं संस्कृत बोर्ड से सम्बद्ध विद्यालयों से उत्तीर्ण की हो: हाईकोर्ट

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान (पूर्व में संस्कृत बोर्ड) के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें यह शर्त जोड़ी गई थी कि केवल उन्हीं छात्रों को कक्षा 10वीं और 12वीं में प्रवेश मिलेगा जिन्होंने कक्षा 9वीं अथवा 11वीं संस्कृत बोर्ड से सम्बद्ध विद्यालयों से उत्तीर्ण की हो। आदेश के विरुद्ध आधा दर्जन स्कूलों द्वारा याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि इस संशोधित प्रवेश नीति के कारण मध्य प्रदेश बोर्ड या सीबीएसई से अध्ययनरत छात्रों के परीक्षा फार्म अस्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे वे कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं से वंचित हो रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृत रूपराह ने दलील दी कि यह निर्णय न केवल छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है, बल्कि समानता के अधिकार का उल्लंघन भी है। याचिका में यह भी कहा गया कि मप्र बोर्ड, सीबीएसई और संस्कृत बोर्ड सभी सरकारी संस्थाएं हैं, इसलिए उनके बीच इस प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक और मनमाना है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने छात्रों को राहत देते हुए संस्कृत बोर्ड के संशोधित आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और बोर्ड को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता छात्रों के परीक्षा फॉर्म स्वीकार किए जाएं और उन्हें आगामी परीक्षाओं में सम्मिलित किया जाए। कोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। याचिका की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। यह आदेश उन सैकड़ों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो नियमों में अचानक किए गए बदलाव से परीक्षा देने से वंचित हो रहे थे। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 42

गांधी मेडिकल कॉलेज में नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, दोषियों पर हो कार्रवाई

भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में लैब असिस्टेंट और तकनीशियन पदों पर हुई नियुक्तियों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने गठित जांच कमेटी को 6 सप्ताह में जांच पूरी करने के आदेश जारी किये हैं. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 'नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियां' भोपाल निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट वीर सिंह लोधी ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है. यह जनहित याचिका गांधी मेडिकल कॉलेज में हुई नियुक्तियों को लेकर है. जिसमें आरोप लगाते हुए कहा गया है कि "गांधी मेडिकल कॉलेज में साल 2021 में लैब असिस्टेंट और तकनीशियन पदों पर नियमों को ताक में रखकर नियुक्तियां की गई थीं." 'जांच कमेटी ने नहीं की कोई कार्रवाई' याचिका की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता वीर सिंह लोधी की तरफ से बताया गया कि "नियुक्तियों पर सवाल उठने और शिकायत होने पर जांच के लिए 1 मई 2024 और 19 सितंबर 2024 को पारित आदेश के बाद डॉ संजय जैन के नेतृत्व में 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था. जांच कमेटी गठित होने के बावजूद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई." '6 सप्ताह में जांच कमेटी पेश करे अपनी रिपोर्ट' हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा है कि "6 सप्ताह में कमेटी अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करे. रिपोर्ट पेश होने के 3 दिनों की अवधि में उसकी प्रति याचिकाकर्ता को प्रदान की जाए. रिपोर्ट के आधार पर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अक्षांश श्रीवास्तव ने पैरवी की." Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 39