Sunday, July 5, 2026 11:50 am

चढ़ते पारे ने बढ़ायी मुसीबत, 2024 सबसे गर्म वर्ष, टूटा 175 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र (UN)के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) ने  अपनी एनुअल क्लाइमेट स्टेटस रिपोर्ट (Annual State of the Climate Report) जारी की। इसमें शुरुआती आंकड़ों की पुष्टि करते हुए संकेत दिया गया कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा। 2024 ने 2023 में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। WMO के अनुसार, 2024 में पहली बार वैश्विक तापमान 1850-1900 में निर्धारित आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने पिछले 175 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। 10 सालों में हीटवेव से हालात खराब जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में 2014 से 2023 का समय सबसे गर्म दशक के रूप में रिकॉर्ड किया गया था। इन 10 सालों में हीटवेव ने महासागरों को प्रभावित किया। साथ ही ग्लेशियरों (Glaciers) को रिकॉर्ड बर्फ का नुकसान हुआ। लाखों लोगों को छोड़ना पड़ा घर     2024 में चक्रवात, बाढ़, सूखा और अन्य आपदाओं ने 2008 के बाद से सबसे अधिक लोगों को विस्थापित किया,     ऐसे में 36 मिलियन लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा था।     सिचुआन भूकंप के बाद चीन में लगभग आधे 15 मिलियन विस्थापित हुए थे।     बाढ़ ने भारत में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया।     सऊदी अरब सहित दर्जनों अभूतपूर्व हीटवेव दर्ज किए गए जहां हज यात्रा के दौरान तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया । मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के फेनर स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी की प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने कहा कि दुनिया एक ऐसे प्वांइट पर पहुंच गई है जहां शुद्ध शून्य उत्सर्जन अब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें अपने अलार्म पर स्नूज बटन दबाना बंद करना होगा, जो कि अब नियमित रूप से होने वाले रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैश्विक तापमान हैं। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन हो रहा है, यह हमारी वजह से है, और बिना किसी गंभीर कार्रवाई के, यह और भी बदतर होता जाएगा? यह जितना लंबा चलेगा, चीजों को बेहतर बनाना उतना ही मुश्किल होगा।' recent visitors 31

पहली बार 14.10 डिग्री सेल्सियस हुआ वैश्विक तापमान, 2024 बना इतिहास का सबसे गर्म साल

ब्रसेल्स. दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन का असर अब तेजी से दिखने लगा है। इस बीच यूरोप की जलवायु परिवर्तन एजेंसी कॉपरनिकस ने डराने वाला अनुमान जारी किया है। एजेंसी ने कहा है कि 2024 का साल दुनिया के इतिहास में सबसे गर्म साल होने वाला है। एजेंसी ने कहा कि यह लगभग तय है कि 2024 रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल होगा। बयान में कहा गया है कि यह पहली बार होगा, जब औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा होगा। एजेंसी ने कहा कि इस साल इतिहास का दूसरा सबसे गर्म नवंबर दर्ज किया गया। 2023 का नवंबर अब भी इतिहास में सबसे गर्म नवंबर बना हुआ है। इस बार नवंबर में सतह पर हवा का तापमान 14.10 डिग्री सेल्सियस रहा है, जो कि 1991 से 2020 के औसत तापमान के मुकाबले 0.73 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। नवंबर में ही ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ा एक और अनचाहा रिकॉर्ड भी बना है। इस दौरान औसत वैश्वित तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.62 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। कॉपरनिकस एजेंसी के मुताबिक, बीते 17 महीनों में यह 16वां महीना है, जब औसत वैश्विक तापमान पूर्व औद्योगिक काल के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। भारत के मौसम विभाग के मुताबिक, 1901 के बाद से भारत के लिए यह दूसरा सबसे गर्म नवंबर रहा है। इश दौरान औसत अधिकतम तापमान 29.37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो कि सामान्य से 0.62 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। 2024 में जनवरी से नवंबर तक की बात करें तो औसत वैश्विक तापमान 1991-2020 के तापमान से करीब 0.72 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। वहीं, जनवरी-नवंबर 2023 के मुकाबले इस साल इसी दौर में तापमान 0.14 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। 1.50 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने की संभावना यूरोपीय एजेंसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2023 का तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.48 डिग्री सेल्सियस अधिक था, इसलिए यह भी लगभग निश्चित है कि 2024 का वार्षिक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा। recent visitors 61