ईरान इजरायल पर हजारों रॉकेट और ड्रोन की बारिश करेगा ! नेतन्याहू घातक पलटवार को तैयार

तेल अवीव  ईरान और इजरायल के बीच बीते कई वर्षों से तनातनी चल रही है। ये तनातनी इस समय चरम पर पहुंच गई है, इसकी वजह तेहरान में हमास नेता इस्माइल हानिया की मौत है। हानिया पर हमले के लिए ईरान ने इजरायल को जिम्मेदार बताया है और बदला लेने की कसम खाई है। इस्माइल के अलावा हिजबुल्लाह कमांडर फुआद शुकर को भी बेरूत में एक हवाई हमले में मार दिया गया है। कुछ घंटे के भीतर शुकर और हानिया की मौत ने ईरान और हिजबुल्लाह को भड़का दिया है। हमले के अंदेशे को देखते हुए कई एयरलाइंस ने इजरायल और लेबनान के लिए उड़ानें रद्द कर दी हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों से तुरंत इस क्षेत्र को छोड़ने के लिए कहा है। इजरायल बीते साल अक्टूबर से गाजा में हमास के साथ लड़ रहा है। इस जंग में हमास के समर्थन में लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह और यमन में हूती विद्रोही भी शामिल हैं। इन तीनों ही संगठनों को ईरान का समर्थन है। माना जाता है इजरायल को चौतरफा घेरने के लिए ईरान इन समूहों को वित्तपोषित और प्रशिक्षित करता है। हालिया घटनाक्रम के बाद ईरान की ओर से इजरायल को निशाना बनाया जा सकता है। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसका इशारा करते हुए कहा कि हमारे सामने चुनौतीपूर्ण दिन हैं। हम सभी तरफ से धमकियां सुन रहे हैं। हम किसी भी परिदृश्य के लिए तैयार हैं। किसी भी खतरे के खिलाफ एकजुट और दृढ़ से लड़ेंगे। ईरान के पास जवाबी कार्रवाई के कई विकल्प यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मिसगाव इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी के ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) योसी कुपरवासेर ने ईरान की ओर से हमले के अंदेशे पर कहा कि ईरान के पास जवाबी कार्रवाई के लिए कई विकल्प हैं और इस संघर्ष के एक बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की संभावना है। तेल अवीव विश्वविद्यालय में ईरान विशेषज्ञ डॉक्टर रज जिम्ट का कहना है कि ईरान की धरती से सीधे इजरायल पर हमले के साथ यह इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष का एक नया चरण शुरू हो सकता है। रिपोर्ट कहती है कि इजरायली खुद को ईरानी हमले के लिए तैयार कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष हो सकता है। जिम्ट का कहना है कि ये बहुत संभावना है कि ईरान हमला करेगा। सवाल यह है कि इस तरह के हमले के क्या परिणाम होंगे और क्या इस साल अप्रैल की तरह ये नियंत्रित हो पाएगा। अगर इजरायल व्यापक संघर्ष में उतरा तो फिर उसे बड़ा खतरा हिजबुल्लाह से है। वह निश्चित ही खुद को एक बहु-मोर्चे पर टकराव की स्थिति में पाएग। ईरान के साथ कई गुट भी करेंगे हमला! जिम्ट का कहना है कि इजरायल को इस दफा ईरान और उसके प्रॉक्सी मिलिशिया की ओर से संयुक्त हमला देखने को मिल सकता है। ईरान संभवत यूएवी और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल इजरायल पर करेगा, जैसे ईरान इसी साल अप्रैल में कर चुका है। उसके साथ हिजबुल्लाह भी इजरायल की जमीन पर रॉकेट दाग सकता है। इससे इजरायल के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। रक्षा विश्लेषकों का अनुमान है कि हिजबुल्लाह के पास करीह 150,000 रॉकेट जमा हैं। साथ ही उसने अपनी मिसाइल क्षमताओं में भी सुधार किया है और इजरायल पर हमला करने के लिए उसके पास लड़ाकों की बड़ी तादाद है। ईरान और हिजबुल्लाह के अलावा इजरायल के लिए खतरों में हूती विद्रोही भी शामिल हैं। recent visitors 107

हानिया की मौत से युद्ध के मुहाने पर पश्चिम एशिया, ईरान बना रहा नया आतंकी संगठन !

तेहरान  इजरायल ने 20 जुलाई को यमन के हूतियों के कब्जे वाले होदेदाह पर हवाई हमला किया था। इस हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए। इसके बाद 30 जुलाई को इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के एक शीर्ष कमांडर फुआद शुकर को एक हमले में मार गिराया। इसके कुछ घंटे बाद हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या कर दी गई। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और हमास ने हानिया की हत्या के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है। तीनों समूहों- यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह और फिलिस्तीन के हमास के बीच एक बात सामान्य है कि इन तीनों को इजरायल के मुख्य प्रतिद्वंद्वी ईरान का समर्थन प्राप्त है। कुछ ही दिनों में तीनों गुटों को निशाना बनाकर इजरायल ने ईरान को तगड़ा झटका दिया है। वहीं लगातार हुए इन हमलों ने क्षेत्र को एक पूर्ण युद्ध के कगार पर पहुंचा दिया है। इसकी वजह ये है कि हूती, हमास और हिजबुल्ला इन हमलों के बाद ईरान के साथ एक मंच पर आकर इजरायल से भिड़ने की सोच सकते हैं। हानिया की मौत के बाद क्या करेगा ईरान?  एक रिपोर्ट में हालिया घटनाओं, खासतौर से हानिया की मौत से ईरान और इजरायल के रिश्ते पर पड़ने वाले असर की बात की गई है। गाजा के बाहर हमास के बड़े नेता हानिया की हत्या को इजरायल की जीत की तरह से देखा जा रहा है। शेख अहमद यासीन और अब्देल अजीज अल-रंतिसी के बाद हानिया को हमास के सबसे शक्तिशाली नेता के तौर पर देखा जाता था। यासीन मार्च 2004 में इजरायली मिसाइल हमले में मारे गए थे। उनके उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए रंतिसी को भी एक महीने के भीतर इजरायलियों ने मार डाला था। ऐसे समय में जब हमास नेतृत्व विहीन होता दिख रहा था तो हानिया ने हमास को आगे बढ़ाया और इसमें उसे काफी कामयाबी भी हासिल की। गाजा पर हमास के कब्जे में हानिया की भूमिका काफी अहम रही तो दुनिया में भी समर्थन हासिल करने की कोशिश की। इस्माइल हानिया 2017 में गाजा छोड़कर कतर आ गया और हमास की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का प्रमुख चेहरा बनकर उभरा। हानिया ने हालिया दिनों में गाजा में युद्ध विराम के लिए हमास की ओर से लगातार बातचीत का नेतृत्व किया था। हानिया की मौत से गाजा युद्ध विराम वार्ता को भी झटका लगा है। ऐसे में क्या हमास अब इजरायल के साथ बंधक समझौते को स्वीकार करेगा और ईरान इस हत्या की शर्मिंदगी के बाद क्या फैसला लेगा। ईरान ने इस साल दमिश्क में अपने दूतावास परिसर पर बमबारी के बाद इजरायल पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया था। इसके बाद से इजरायल ने ईरानी अधिकारियों या उसके मिशनों को निशाना नहीं बनाया था लेकिन ईरान से जुड़े तीन मिलिशिया के खिलाफ हमले करके इजरायल ने एक नई लड़ाई का ऐलान कर दिया है। खासतौर से तेहरान की जमीन पर हमला ईरान के लिए बड़ी शर्मिंदगी का सबब बन रहा है। जवाबी हमला करेगा ईरान? इस साल अप्रैल में जब सीरिया में उसके दूतावास परिसर पर हमला हुआ था तो ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन से हमला किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ईरान इस बार भी अपनी जमीन पर हुई हत्या के बाद जवाबी कार्रवाई करेगा। आईआरजीसी ने हमले के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है, जो ये दिखाता है कि ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खुमैनी ने भी बदला लेने की कसम खाई है। अब यह देखना बाकी है कि ईरान और हिजबुल्लाह जवाबी कार्रवाई में क्या करने जा रहे हैं और इसके बाद इजरायल क्या करेगा। कहा जा सकता है कि पश्चिम एशिया खतरनाक रूप से एक पूर्ण युद्ध के करीब है। निश्चित रूप से हानिया की मौत ईरान और इजरायल के बीच तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकती है। recent visitors 137

इजरायल का बड़ा दावा, हानिया ही नहीं हमास मिलिट्री चीफ दायफ का भी खात्मा

तेलअवीव इजरायल की सेना (IDF) ने गुरुवार को दावा किया कि हमास (Hamas) के सैन्य विंग के प्रमुख मोहम्मद दायफ (Mohammed Deif) की पिछले महीने गाजा में इजरायली हवाई हमले में मौत हो गई थी. यह जानकारी समूह के राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या के एक दिन बाद दी गई. इजरायली सेना ने की तरफ से कहा गया, "IDF ऐलान करता है कि 13 जुलाई, 2024 को IDF लड़ाकू विमानों ने खान यूनिस के इलाके में हमला किया और खुफिया आकलन के बाद यह पुष्टि की जा सकती है कि हमले में मोहम्मद दायफ मारा गया." इजरायली डिफेंस फोर्स ने इससे जुड़ा हुआ एक सोशल मीडिया पोस्ट भी किया. इजरायली अधिकारियों ने कहा कि उन्हें संकेत मिले थे कि उनका हमला सफल रहा, लेकिन वे अब तक यह पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि वह मारा गया है. हमास ने इजरायल के द्वारा किए गए इस ऐलान पर कोई तत्काल जवाब नहीं दिया है. यह ऐलान ऐसे वक्त में किया गया है, जब तेहरान में हमास के नेता इस्माइल हानिया के अंतिम संस्कार के लिए भीड़ इकट्ठा हो रही थी. ऐसा माना जाता है कि दायफ 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल पर हमास के हमले के मास्टरमाइंडों में से एक था, जिसकी वजह से गाजा युद्ध शुरू हुआ, जिसको 300 दिन हो रहे हैं. हमास के टॉप लीडर्स में शामिल था दायफ हमास के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक, दायफ 30 साल से ज्यादा वक्त तक समूह में आगे बढ़ता रहा और सुरंगों का नेटवर्क और बम बनाने में विशेषज्ञता विकसित करता रहा. मोहम्मद दायफ, दशकों से इजरायल की मोस्ट वॉन्डेट लिस्ट टॉप पर है. इजरायल उसे आत्मघाती बम विस्फोटों में दर्जनों इजरायलियों की मौत के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानता आया है. इस्माइल के जनाजे के बीच इजरायल ने दी यह खबर यहूदी देश की सेना ने कहा कि मोहम्मद डीफ ने ही 7 अक्टूबर के हमले की प्लान की और उसे अंजाम दिया था। इजरायल की ओर से यह घोषणा उस दौरान की गई, जब ईरान की राजधानी तेहरान में हमास के नेता इस्माइल हानियेह के जनाजे में हजारों की भीड़ जुटी थी। माना जा रहा है कि इस बड़े ऐलान के लिए इजरायल ने जानबूझकर ऐसा मौका चुना ताकि हमास और ईरान का मनोबल तोड़ा जा सके। बता दें कि मंगलवार को ही इजरायल ने तेहरान में इस्माइल को मार डाला था। उसकी हत्या उस दौरान की गई, जब वह ईरान के नए राष्ट्रपति के शपथ समारोह से लौट रहा था। 30 सालों से इजरायल को थी मोहम्मद डीफ की तलाश मोहममद डीफ का मारा जाना इजरायल के लिए बड़ी सफलता है क्योंकि उसकी 30 सालों से तलाश थी। उसे अमेरिका ने भी 2015 में अपनी इंटरनेशनल टेररिस्ट्स की लिस्ट में शामिल किया है। इजरायल की सेना ने कहा कि उनकी धरती पर डीफ ने बीते सालों में कई हमले किए थे। गौरतलब है कि इजरायल पर हुए भीषण हमले में 1200 लोग मारे गए थे। वहीं करीब 250 लोगों को हमास के आतंकियों ने बंधक बना लिया था।    recent visitors 195