इतिहास में इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने मंगलवार को इजरायल पर 200 से ज्यादा मिसाइलें दागीं है जिनमें हाइपरसोनिक हथियार भी शामिल हैं। अब इजरायल ने भी कसम खाई है कि ईरान इस हमले की कीमत चुकाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा से खराब नहीं थे। यह सुनने में भले ही अकल्पनीय लगे लेकिन इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था। 1960 के दशक में इजरायल और ईरान दोनों का एक साझा दुश्मन था इराक। जहां इजरायल अरब देशों के खिलाफ संघर्ष में उलझा हुआ था वहीं शाह के नेतृत्व में ईरान के लिए सुरक्षा और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए इराक एक सीधा खतरा था। इसके बाद इस समय की सबसे गुप्त साझेदारी के लिए एक आधार तैयार हुआ। इस साझेदारी में इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान की सीक्रेट पुलिस SAVAK शामिल थे। दोनों ने इराकी शासन के खिलाफ कुर्द विद्रोहियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इराक के अरब नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देखे जाने वाले ये कुर्द समूह इराकी सरकार को अंदर से कमजोर करने के लिए जरूरी थे। खुफिया गठबंधन कोड-नाम ट्राइडेंट के गठन के बाद इज़राइल और ईरान के बीच के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे जिसमें तुर्की भी शामिल था। 1958 की शुरुआत में ट्राइडेंट की मदद से इन तीन समूहों ने कई खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान किया। जैसे-जैसे संबंध परिपक्व होते गए इज़राइल और ईरान और भी करीब होते गए। शाह की महत्वाकांक्षाएं और इज़राइल का प्रभाव ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी न केवल साझा भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित थे बल्कि अमेरिका में इज़राइल के प्रभाव से भी प्रेरित थे। शाह ने इजराइल को अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक साधन के रूप में देखा। खासकर कैनेडी प्रशासन द्वारा उनके शासन के बारे में चिंता व्यक्त करने के बाद यह और जरूरी हो गया था। इजराइली-ईरानी संबंध ईरान की पश्चिम के साथ खुद को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा बन गए। नतीजतन 1960 के दशक के मध्य तक तेहरान में एक स्थायी इजराइली प्रतिनिधिमंडल की स्थापना हुई जो एक दूतावास के रूप में कार्य करने लगी। हालांकि इस संबंध में भी कुछ जटिलताएं थी। शाह अरब दुनिया में व्यापक इजराइल-विरोधी भावना से अवगत थे। उन्होंने ईरान के इजराइल के साथ संबंधों के सार्वजनिक तौर पर इनकार किया। इराक के खिलाफ मिलकर काम करने में दोनों देशों का फायदा ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया और इसे एक इजराइल विरोधी इस्लामी गणराज्य में बदल दिया। फिर भी अयातुल्ला खोईमेनी के सत्ता में आने के बाद भी नए शासन ने इजराइल के साथ गुप्त सहयोग जारी रखा। जैसे-जैसे ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) आगे बढ़ा दोनों देशों ने सद्दाम हुसैन के इराक के खिलाफ़ मिलकर काम करने में ही फायदा देखा। इज़राइल ने भी ईरान की मदद करने में एक अच्छा अवसर देखा। अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इराकी सेना की आपूर्ति की थी और यह एक जोखिम था। इज़राइल द्वारा ईरान को हथियारों की खेप भेजना, खास कर से प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन द्वारा 1980 में सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंज़ूरी दिए जाने के बाद इराक की ताकत को कमज़ोर करने का एक सोचा-समझा फ़ैसला था। ये गुप्त हथियार सौदे अमेरिकी नीति के बावजूद किए गए जिसमें तेहरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी लोगों की रिहाई तक ईरान को सैन्य सहायता देने पर रोक लगाई गई थी। इज़राइली सैन्य सहायता के बदले में, खोईमेनी के शासन ने बड़ी संख्या में ईरानी यहूदियों को इज़राइल या अमेरिका में रहने की अनुमति दी। ऑपरेशन फ्लावर इजरायल-ईरानी साझेदारी पारंपरिक हथियार सौदों से आगे तक पहुंच गई थी। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ऑपरेशन फ्लावर था जो एक गुप्त करोड़ों डॉलर की योजना थी जो 1977 में शाह के शासन के दौरान शुरू हुई थी। इस सौदे के तहत ईरान ने 1978 में इजरायल को 260 मिलियन डॉलर का तेल भेजकर एक बड़ा अग्रिम भुगतान किया जैसा कि 1986 की न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था। मिसाइल कार्यक्रम पर काम 1979 में इस्लामिक क्रांति तक जारी रहा जिसके बाद खोमेनेई के शासन ने अचानक सहयोग रोक दिया। अक्टूबर 1980 में जब ईरान ने इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ा था तब इजरायल ने गुप्त रूप से ईरान को अमेरिकी निर्मित एफ-4 लड़ाकू विमानों के लिए 250 अतिरिक्त टायर भी दिए थे। दुश्मनी की शुरुआत 1990 के दशक तक इज़राइल और ईरान के बीच सहयोग का युग लगभग समाप्त हो गया था। भू-राजनीतिक कारण जैसे अरब समाजवाद, सोवियत प्रभाव और इराक का खतरा, जो कभी उन्हें एकजुट करते थे गायब हो गए थे जिससे सहयोग के लिए वजहें नहीं बची थी। इसके बाद ईरान ने इजरायल विरोधी विचारधारा को अपनाया। ईरान ने इजरायल के साथ संघर्ष में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों का समर्थन किया है। 2000 के दशक की शुरुआत में ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का चुनाव, नरसंहार से इनकार और इजरायल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी ने तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान इस क्षेत्र में इजरायल का सबसे प्रमुख विरोधी बन गया। अब मिडिल ईस्ट के ये दो देश पूरी तरह युद्ध की कगार पर हैं। recent visitors 85

रिपोर्ट : इजरायल ईरान के तेल कुओं और परमाणु अड्डों पर अटैक कर सकता है, एयर डिफेंस सिस्टम भी निशाने पर रहेगा

तेल अवीव ईरान की ओर से इजरायल पर मंगलवार को 200 मिसाइलें दागे जाने के बाद माहौल बदल गया है। अब तक हमास, हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच ही चल रही जंग दो महाशक्तियों में संघर्ष में बदलती दिख रही है। इस बीच इजरायल ने ईरान को खत्म ही करने की कसम खाई और बदला लेने की धमकी दी है। अमेरिकी वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार इसके तहत इजरायल अब ईरान के परमाणु ठिकानों और उसके तेल कुओं पर भी अटैक कर सकता है। इससे ईरान के साथ ही आसपास के देशों के लिए भी खतरे की स्थिति पैदा हो सकती है। यही नहीं तेल के ठिकानों पर अटैक की वजह से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि हम यह देखेंगे कि अब हम अटैक करेंगे तो ईरान क्या करेगा। हम ईरान को ऐसा दर्द देंगे कि वह कभी भुलेगा नहीं। कई इजरायली सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के तेल कुओं पर अटैक हो सकता है। इसके अलावा ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम भी निशाने पर रहेगा। अब तक मिली जानकारी के अनुसार इजरायल की ओर से फाइटर जेट्स से हमला किया जा सकता है। इसके अलावा टारगेट अटैक भी हो सकता है, जिसमें ड्रोन जैसी चीजों का इस्तेमाल हो सकता है। इसी तरीके से इजरायल ने तेहरान के अंदर घुसकर इस्माइल हानियेह को मार गिराया था। यह पहला मौका है, जब इजरायल और ईरान इस तरह से आमने-सामने हैं। इसी साल अप्रैल में भी दोनों के बीच मामूली झड़प हुई थी। लेकिन इस बार जंग तेज होती दिख रही है। यहां तक कि अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक भेजने का ऐलान कर दिया है और इजरायल का समर्थन करते हुए कहा है कि उसे ईरान के हमलों से अपनी रक्षा करने का अधिकार है। अब अनुमान है कि इजरायल बड़ा हमला कर सकता है और इससे पूरे मिडल ईस्ट में ही कोहराम की स्थिति पैदा हो सकती है। बता दें कि अब तक ईरान के अलावा किसी भी अन्य मुस्लिम देश ने इजरायल के खिलाफ खुलकर उतरने का ऐलान नहीं किया है। सऊदी अरब, यूएई जैसे देश तो तटस्थ ही हैं। ऐसी स्थिति में इजरायल और ईरान के बीच बड़ा संघर्ष दुनिया को किस तरफ ले जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू तो वीडियो जारी करके कह चुके हैं कि ईरान को हमले की कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान यह नहीं समझता कि हमारा अपनी रक्षा को लेकर संकल्प है। यह संकल्प दुश्मनों के खात्मे तक बना रहेगा। recent visitors 83

तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से कहा- इजरायल को रोका जाए

तेल अवीव  तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। एर्दोगन ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अगर गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकने में कामयाब नहीं हो रही है तो फिर इससे आगे बढ़ते हुए कदम उठाए जाएं। इजरायल नहीं रुक रहा है तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को तुरंत 1950 में पारित प्रस्ताव के मुताबिक इजरायल के खिलाफ सेना के इस्तेमाल की सिफारिश करनी चाहिए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अंकारा में एक कैबिनेट बैठक के बाद एर्दोगन ने कहा, 'अगर सुरक्षा परिषद जरूरी इच्छाशक्ति नहीं दिखाती है, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को बल के उपयोग की सिफारिश करने के अधिकार को तेजी से लागू करना चाहिए। एर्दोगन ने कहा कि गाजा में इजरायल ने भारी तबाही मचाई और अब वही लेबनान में शुरू हो गया है। ये सब रुकना बहुत ज्यादा जरूरी है।' 'दूसरे मुस्लिम देश भी बनेंगे इजरायल का निशाना' एर्दोगन ने इस दौरान कहा कि हमारे क्षेत्र में रहने वाले सभी मुस्लिम, यहूदी और ईसाइयों के लिए हम शांति की चाह रखते हैं। हम शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मुस्लिम दुनिया से एकजुट होने का आह्वान करते हैं। एर्दोगन ने कहा कि इजरायल का आक्रामक रवैया बढ़ता जा रहा है, अगर उसे जल्दी नहीं रोका गया तो उसके हमले दूसरे मुस्लिम देशों को भी निशाना बनाएंगे। उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि किम सोंग ने भी इजरायल के हमलों की आलोचना की है। सोंग ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 79वें सत्र में कहा कि यह कल्पना करना भी मुश्किल लगता है कि एक देश (इजरायल) गाजा में भयानक नरसंहार करने के बाद भी किसी भी तरह की निंदा और मंजूरी से अछूता है। ऐसा उसको अमेरिका के संरक्षण की वजह से है। इजरायल ने लेबनान में शुरू किया जमीनी आक्रामण इजरायली रक्षा बलों ने लेबनान में भीषण बमबारी के बाद जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है। मंगलवार को आईडीएफ ने कहा कि उसके सैनिकों ने हिजबुल्लाह की साइटों को टारगेट करने के लिए लेबनान की सीमा पार की है। आईडीएफ का कहना है कि उसकी सैनिक दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लक्षित जमीनी हमले कर रहे हैं। इयरायली सेना ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे लगता है कि आने वाले दिनों में हमले बढ़ सकते हैं। recent visitors 77

इजरायल ने जने कैसे किया लेबनान पर हमला? आर्मी चीफ ने बताई तैयारी वाली वो बात

तेल अवीव लेबनान के अंदर घुसकर हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को इजरायल की ओर से मार गिराने की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस तथ्य से हो रही है कि ईरान के ही एक जासूस ने इजरायल के लिए काम किया और नसरल्लाह का पता उसे बता दिया। फ्रांसीसी अखबार ले पैरिसियन की रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ घंटे पहले ईरानी दूत ने इजरायल को नसरल्लाह का पता बताया और फिर इजरायल ने उस इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया, जहां वह अपने कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहा था। कहा जा रहा है कि वह बंकर में छिपा था, लेकिन इमारत गिरने की दहशत से ही वह मारा गया। आखिर इजरायल ने कैसे इतनी मजबूत तैयारी की थी कि तेहरान में हमास कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया और फिर लेबनान में हिजबुल्लाह के लीडर को मार डाला। यह अहम सवाल है। दरअसल 2006 में जब इजरायल की हिजबुल्लाह से जंग हुई थी तो यह 34 दिनों तक चली थी। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के आगे इजरायल की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन यहीं से इजरायल ने सबक सीखा और 2006 के बाद से ही अगली जंग की प्लानिंग शुरू कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने तब से ही जंग की तैयारी शुरू कर दी थी और खासतौर पर खुफिया मिशन पर उसका जोर था। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है। इजरायल ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को भी मार दिया। इसका खुलासा खुद इजरायली सेना ने किया। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इजरायल ने लेबनान में कैसे तैयारी के साथ हमला किया। उन्होंने कहा कि जो शेल कंपनी बनाई गई, वो ही इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। 'इजरायल का मास्टर स्ट्रोक' आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान पर कहा, 'जो शेल कंपनी बनाई गई है, वह इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। इसके लिए उसे सालों-साल की तैयारी की जरूरत है। इसका मतलब है कि वे इसके लिए तैयार थे और यही बात मायने रखती है। युद्ध उस तरह से शुरू नहीं होता जिस तरह से आप लड़ना शुरू करते हैं, यह उस दिन से शुरू होता है जिस दिन आप योजना बनाना शुरू करते हैं।' 'हमास को खत्म करने पर अड़ गया इजरायल' आर्मी चीफ ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि इजरायल ने हमास को अपना पहला टारगेट बनाया और उसे जड़ से खत्म करने पर अड़ गया। जनरल द्विवेदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक किताब का हवाला देते हुए इजरायल की रणनीति की तुलना महाभारत के एक प्रसंग से की, जहां अर्जुन, अगर चक्रव्यूह में प्रवेश करते, तो जीवित बच सकते थे और अभिमन्यु भी बच जाता। इसी तरह, इजरायल ने हमास को पहले निपटाने का फैसला किया है। खासतौर पर इजरायल ने यूनिट 8200 को तैनात किया। यह इजरायली सेना की ही एक यूनिट है, जो मोसाद के साथ मिलकर काम करती है। इसके तहत उसने साइबर वारफेयर पर काम किया। इसी एजेंसी की देन थी कि उसने हिजबुल्लाह पर पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के जरिए हमले कराए। इसी के तहत ईरान की इंटेलिजेंस यूनिट में घुसपैठ की गई और उसके 20 लोगों से सारी सूचना हासिल की गई। ईरान के परमाणु ठिकानों से लेकर हिजबुल्लाह, हमास के लीडर्स तक के बारे में पूरी जानकारी इजरायल को मिल गई। इजरायल के इस इंटेलिजेंस वारफेयर का पहला नतीजा 2008 में आया था। तब मोसाद ने सीआईए के साथ मिलकर हिजबुल्लाह के टॉप लीडर इमाद मुगनियाह को ढेर कर दिया था। इसके बाद 2020 में ईरानी कुद्स फोर्स के नेता कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मार गिराया था। सुलेमानी की लोकेशन की पूरी जानकारी इजरायली एजेंसी ने ही अमेरिका को दी थी, जिसे इराक में मारा गया था। इसी दौरान इजरायल नसरल्लाह को मार गिराने वाला था, लेकिन तब ऐसा नहीं किया। इसकी वजह थी कि इजरायल तब युद्ध नहीं चाहता था। अब इजरायल की वह 18 साल पुरानी तैयारी काम आ रही है। उसने 7 दिनों में हिजबुल्लाह के सात कमांडरों को मार गिराया है। इसके अलावा हमास के लीडर्स को भी उसने ढेर किया है। recent visitors 87

बाइडेन प्रशासन ने इजरायल को 2 हजार करोड़ रुपए के हथियारों के सप्लाई की मंजूरी दी

तेलअवीव गाजा में पिछले 10 महीने से जारी जंग में अब तक लगभग 40 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले साल हमास के हमले के बाद इजरायल लगातार गाजा पर हमलावर है। वहीं इसे अपने साथी अमेरिका का भी पूरा समर्थन मिला है। बाइडेन प्रशासन ने हाल ही में इजरायल को 2 हजार करोड़ रुपए के हथियारों के सप्लाई की मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि गाजा में आम लोगों की मौतों को देखते हुए कई मानवाधिकार संगठनों ने हथियारों की आपूर्ति रोकने की गुहार लगाई थी। हालांकि अमेरिका ने इन मांगों को दरकिनार कर दिया है। हथियारों के इस खेप की आपूर्ति आने वाले सालों में की जाएगी। स्टेट डिपार्टमेंट ने एक अधिसूचना में अमेरिकी कांग्रेस को $18.82 बिलियन में इजरायल को 50 F-15 लड़ाकू जेट की बिक्री को मंजूरी देने की घोषणा की। जेट के साथ इजरायल लगभग 33,000 टैंक कारतूस, 50,000 विस्फोटक मोर्टार कारतूस और नए सैन्य कार्गो वाहन खरीदेगा। एडवांस रडार और सिक्योर गियर से लैस F-15 जेट 2029 तक इजरायल के मौजूदा बेड़े को शामिल होंगे। मानवाधिकार समूहों ने की है निंदा बोइंग द्वारा तैयार F-15 पर अपने नोटिस में स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा, "अमेरिका इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इजरायल को मजबूत बनाने और खुद की रक्षा के लिए क्षमता विकसित करना और इसमें मदद करना अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण है।" टैंक कारतूसों के बारे में अमेरिका ने इस बात पर जोर दिया कि बिक्री मौजूदा और भविष्य के दुश्मन खतरों का सामना करने, अपनी धरती की रक्षा करने और क्षेत्रीय खतरों को दूर करने में इज़राइल की क्षमता में सुधार करेगी। गौरतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस के पास हथियारों की बिक्री को रोकने का अधिकार है लेकिन ऐसा करना चुनौतीपूर्ण है। मानवाधिकार समूहों और बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सदस्यों ने प्रशासन से इज़राइल को हथियारों की बिक्री रोकने का आग्रह किया था। उन्होंने गाजा जंग में बड़ी संख्या में नागरिक के मारे जाने की निंदा की है। मई में बाइडेन ने शिपमेंट पर लगाई थी रोक हाल ही में गाजा में विस्थापित फिलिस्तीनियों के शरण वाले एक स्कूल पर इज़राइली हवाई हमले में 93 लोग मारे गए थे। इज़राइल ने दावा किया कि वह स्कूल में आतंकवादियों को निशाना बना रहा था। बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों ने नागरिकों की मौतों पर चिंता व्यक्त की लेकिन उन्होंने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की कि हमले में अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए गए हथियारों का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। मई की शुरुआत में बाइडेन ने इजरायल को भेजे जाने वाले एक शिपमेंट को रोक दिया था जिसमें 2,000 पाउंड के बम शामिल थे और दक्षिणी गाजा में राफा पर बड़े पैमाने पर हमले के खिलाफ चेतावनी दी थी जहां कई विस्थापित फिलिस्तीनी रहते हैं। recent visitors 100

इजरायल के लिए एक अच्छी खबर पड़ोसी देश जॉर्डन ईरान पर पलटवार करने के लिए अपना एयरस्पेस देगा

तेल अवीव तेहरान में हमास चीफ इस्माइल हानिया की मौत के बाद इजरायल पर ईरान के हमले का डर बना हुआ है। ईरान चेतावनी दे चुका है कि वह हमला करेगा। वहीं इजरायल ने कहा है कि वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इस बीच इजरायल के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। उसका एक पड़ोसी मुस्लिम देश ईरान पर पलटवार करने के लिए अपना एयरस्पेस देगा। यह देश जॉर्डन है। जॉर्डन सरकार के आधिकारी रुख के बावजूद यह इजाजत दी जा सकती है। इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक एक हाई रैंकिंग स्रोत ने इससे जुड़ी जानकारी दी है। यह फैसला जॉर्डन के व्यापक सुरक्षा हितों और इजरायल के साथ सहयोग की नीति के अनुरूप है। जॉर्डन ने अप्रैल में ईरान की तरफ से इजरायल पर हुए हमलों को विफल करने में मदद की थी। सूत्र ने इस बात पर जोर दिया कि जॉर्डन का कदम यूएस के साथ उसके रणनीतिक गठबंधन के अनुरूप हैं। लेकिन सार्वजनिक तौर पर उसने इसे नहीं माना है। ईरान में हमास नेता इस्माइल हानिया की मौत के बाद बढ़े तनाव के बीच यह खुलासा हुआ है। इजरायल ने आधिकारिक तौर पर हानिया की हत्या में हाथ को नहीं माना है। पहले भी जॉर्डन ने की थी मदद रिपोर्ट्स के मुताबिक जॉर्डन ने पहले अप्रैल में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले के दौरान इजरायल को इसी तरह की इजाजत दी थी। तब ईरान ने 300 मिसाइल और ड्रोन के जरिए इजरायल पर हमला बोला था। इनमें से कुछ इजरायल तक पहुंचे थे, जिन्हें इजरायल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। एक बार फिर इसी तरह के हमले की आशंका जताई जा रही है। लेकिन हानिया की मौत के 10 दिन होने के बाद भी ईरान ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। गाजा के हमले में 100 की मौत गाजा सिटी में एक स्कूल पर शनिवार तड़के हुए इजराइल के हवाई हमले में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई। फलस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इजराइली सरकार ने तबीन स्कूल पर हमले की बात स्वीकार करते हुए दावा किया है कि स्कूल के अंदर हमास के कमान सेंटर को निशाना बनाया गया था। हालांकि, हमास ने कहा कि उसका कोई कमान सेंटर अंदर नहीं था। स्कूल का इस्तेमाल युद्ध के चलते अपने घरों को छोड़कर भागने को मजबूर हुए लोगों को शरण देने के लिए किया जा रहा था। recent visitors 89

ईरान का इजरायल पर होगाजोरदार हमला… एक्सपर्ट ने नेतन्‍याहू को दी चेतावनी, बड़ी तैयारी में शिया मुल्‍क

तेहरान  ईरान और इजरायल के बीच तनाव इस समय चरम पर है। हानिया पर हमले के बाद ईरान की से बदले की कार्रवाई हो सकती है। ईरान के हमले के अंदेशे को देखते हुए इजरायल और उसका खास सहयोगी अमेरिका तैयारी कर रहे हैं। इस बीच रक्षा एक्सपर्ट ने दावा किया है कि ईरान का इजरायल पर ये हमला इसी साल अप्रैल में हुए अटैक से बड़े स्तर पर होगा। ईरान ने इस साल अप्रैल में इजरायल पर सैकड़ों की तादाद में मिसाइल और ड्रोन दागे थे। दावा किया जा रहा है कि इस दफा ईरान इससे कहीं बड़े हमले की योजना बना रहा है। द सन की रिपोर्ट कहती है कि इस्माइल हानिया की बाद ईरान अपना बदला लेने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आईडीएफ को उसके पड़ोसी देशों में ईरान की ओर से 170 ड्रोन, 30 क्रूज मिसाइल और 120 बैलिस्टिक मिसाइलें भेजे जाने की सूचना मिली है। एक्सियोस ने अमेरिकी जासूसों के हवाले से कगहा है कि ईरान कुछ ही दिनों में इजरायल पर हमला करेगा। लेबनान की राजधानी बेरूत में अपने वरिष्ठ कमांडर की हत्या के बाद हिजबुल्लाह भी इजरायल पर हमला कर सकता है और वह ईरान के साथ इसमें शामिल होगा। अमेरिका ने माना- आने वाले दिन हो सकते हैं मुश्किल रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल की सुरक्षा के लिए सावधानी बरत रहा है और उसे लगता है कि आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। इजरायल के अधिकारियों भी मानना है कि ईरान उनके देश पर बड़ा मिसाइल हमला करेगा। पूर्व इजरायली खुफिया अधिकारी एवी मेलमेड ने कहा कि हमला ईरान के किसी प्रॉक्सी जैसे हिजबुल्लाह, इराक में शिया मिलिशिया या यमन में हौथियों के माध्यम से हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमले में साइबर हमला शामिल हो सकता है।  ईरान की सेना अब इजरायल पर सबसे बड़े हमले की तैयारी कर रही है। इस हमले की जद में लेबनान भी आ सकता है जहां पर ह‍िज्‍बुल्‍ला के लड़ाके इजरायली इलाके में रॉकेट बरसा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान, हिज्‍बुल्‍ला, हूती तीनों मिलकर इजरायल पर एक साथ मिसाइल, रॉकेट और विस्‍फोटक ड्रोन से हमला बोल सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए इजरायल भी नागरिकों से बम शेल्‍टर को साफ करने और सभी जरूरी सामान रखने के लिए कहा गया है। वहीं इस बड़े खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने इजरायल और लेबनान में रह रहे भारतीय लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दरअसल, इन 3 तीनों ही देशों में कुल मिलाकर 40 हजार भारतीय रहते हैं जो वहां नौकरी या पढ़ाई कर रहे हैं। दिल्‍ली से लेकर इजरायल तक भारत अलर्ट यही नहीं भारत में सभी राज्‍यों के पुलिस प्रमुखों को इजरायली नागरिकों और यहूदियों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल की राजधानी तेलअवीव में अमेरिका के दूतावास को भी ड्रोन से निशाना बनाया गया था। इस हमले में 1 आम नागरिक की मौत हो गई थी। साल 2021 में इजरायल के नई दिल्‍ली स्थित दूतावास के पास क्रूड बम का एक विस्‍फोट हुआ था। 26 दिसंबर 2023 को इजरायली दूतावास के पास एक और धमाका हुआ था। इन हमलों के पीछे ईरानी गुटों पर आशंका जताई गई थी लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी। मिडिल ईस्ट में अमेरिका कर रहा हथियारों की तैनाती पिछले हफ्ते मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद पेंटागन ने शुक्रवार को ऐलान किया कि अमेरिका मध्य पूर्व में एक अतिरिक्त लड़ाकू स्क्वाड्रन तैनात कर रहा है. साथ ही ऐलान किया गया है कि इजराइल की रक्षा और अमेरिकी सेना की सुरक्षा में मदद के लिए अतिरिक्त क्रूजर और विध्वंसक जहाज की भी तैनाती किया जाएगा. पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत मध्य पूर्व में यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट की जगह लेगा. हिज्बुल्लाह ने भी दी है अटैक की चेतावनी यूएन में ईरान के स्थायी मिशन ने चेतावनी दी है कि मंगलवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के एक टॉप कमांडर फुआद शुक्र की हत्या के जवाब में समूह इजरायल के अंदर "और बड़े और गहरे" नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या हिजबुल्लाह फिर से ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों द्वारा इजरायल पर एक साथ किए जाने वाले जवाबी हमले का हिस्सा होगा, या फिर वह अपना अलग हमला करेगा. कितना ताकतवर है हिज्बुल्लाह? माना जाता है कि हिजबुल्लाह के पास 150,000 मिसाइलों और रॉकेटों का भंडार है, जिनमें से कुछ लंबी दूरी तक मार करने वाली हैं. मसलन, अगर इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलें छोड़ी जाती हैं तो इजरायल के आयरन डोम के लिए इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाएगा. लंबी दूरी की मिसाइलें इजरायल के अंदर ठिकानों को निशाना बनाने में कारगर है. इजरायली सेना, जो कि फिलहाल गाजा में है, ने दक्षिण और उत्तर में एक साथ दो मोर्चे पर जंग लड़ने में सक्षम नहीं होगी. recent visitors 88