Sunday, July 12, 2026 11:01 am

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बार फिर संघ प्रमुख के बयान पर अपना विरोध दर्ज कराया, हिंदुओं के नेता नहीं

मुंबई संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर संत समाज उबल रहा है। इस बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बार फिर संघ प्रमुख के बयान पर अपना विरोध दर्ज कराया है। मुंबई में ANI से बातचीत में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, "…वह किसी संगठन के प्रमुख हो सकते हैं लेकिन वह हिंदू धर्म के प्रमुख नहीं हैं कि उनकी बात हम मानते रहें। वह हमारे अनुशासक रहे हैं, हम उनके अनुसार नहीं चल सकते।" उन्होंने आगे कहा, “मैं बीस बार कह रही हूं कि हिन्दू धर्म की व्यवस्था के लिए वह ठेकेदार नहीं हैं। हिंदू धर्म की व्यवस्था हिन्दू धर्म के आचार्यों के हाथ में है। संपूर्ण भारत के भी वह प्रतिनिधि नहीं हैं।” जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यह भी कहा कि जो हमारी ऐतिहासिक वस्तुएं हैं, वह हमें मिलनी ही चाहिए और हमें लेनी भी चाहिए, चाहे जैसे मिले। भले इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद क्यों न अपनाना पड़े। रामभद्राचार्य के अलावा और कई संतों ने भी मोहन भागवत के बयान की आलोचना की है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी भागवत के उस बयान पर उनकी आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि हर जगह मंदिर ढूंढ़ने की इजाजत नहीं दी सकती। बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में एक व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कहा , “धर्म प्राचीन है और धर्म की पहचान से ही राम मंदिर बनाया गया है। यह सही है, लेकिन सिर्फ मंदिर बन जाने से कोई हिंदुओं का नेता नहीं बन सकता। हिंदू धर्म सनातन धर्म है और इस सनातन और सनातन धर्म के आचार्य सेवाधर्म का पालन करते हैं। यह मानव धर्म की तरह सेवा धर्म है। सेवा करते समय हमेशा चर्चा से दूर रहना हमारा स्वभाव है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग बिना दिखावे के लगातार सेवा करते हैं, वे सेवा की इच्छा रखते हैं। सेवा धर्म का पालन करते हुए हमें अतिवादी नहीं होना चाहिए और देश की परिस्थिति के अनुसार मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए। मानव धर्म ब्रह्मांड का धर्म है और इसे सेवा के माध्यम से प्रकट किया जाना चाहिए। हम विश्व शांति की घोषणा करते हैं , लेकिन अन्य जगहों पर अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है? इस पर ध्यान देना जरूरी है। पेट भरने के लिए जो जरुरी है, वह करना चाहिए , लेकिन घर-गृहस्थी से परे जो कुछ भी हमें मिला है, उसका दोगुना सेवा के रूप में देना चाहिए।” recent visitors 42

समसामयिक और जरूरी चेतावनी है ‘बंटोगे तो कटोगे’, राजस्थान-जयपुर में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने किया आगाह

जयपुर. जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंगलवार को राजधानी जयपुर में बड़ा बयान दिया। महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में बीजेपी के जिस बंटोगे तो कटोगे नारे की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उसे लेकर रामभद्राचार्य ने कहा कि ये बातें समसामयिक हैं और सत्य हैं। हमें बंटना नहीं है। चाहे पंथ अनेक हों, हम सब हिंदू एक हों। जब हम सब एक होकर रहेंगे, हमारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। जैसे एक अंगुली एक होती है तो कोई भी तोड़ देता है, लेकिन जब ये मिलकर मुक्का बन जाती है तो तोड़ने वाले के दांत टूट जाते हैं। गौरतलब है कि बीते चार दिनों में रामभद्राचार्य ने पीओके, पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर लगातार बयान दिए हैं। दो दिन पहले उन्होंने जयपुर में श्रीराम कथा के दौरान कश्मीर में धारा-370 और पाकिस्तान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि धारा-370 की बात मत करो, थोड़े दिन में ही पाक अधिकृत कश्मीर भी हमारा होगा। अब वह दिन दूर नहीं, जब विश्व के नक्शे से पाकिस्तान का नामो निशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा, कश्मीर हमारा है। हमारे देश का अभिन्न अंग है। इसे देश से कोई अलग नहीं कर सकता। कश्मीर भारत का सिरमौर है। भारत माता आप चिंता मत करिए। जब तक जगदगुरु रामभद्राचार्य का यह त्रिदंड रहेगा। भारत की ओर कुदृष्टि रखने वालों की आंख निकाल कर रख दी जाएगी। उन्होंने कहा, भगवान राम ने देश को एक करने का काम किया था। पहले प्रधानमंत्री ने देश को बांटने का काम किया उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम लिए बिना कहा, हमारे देश का दुर्भाग्य देखिए कि पहले प्रधानमंत्री ने देश को बांटने का काम कर दिया। जो कश्मीर हमारे भारत का मुकुट मणि है। ऋषि कश्यप की जन्मस्थली है। इस कश्मीर में भगवान शिव अमरनाथ के रूप में विराजित हैं। माता वैष्णो का जहां धाम है। उस कश्मीर को आधा कर दिया। कश्मीर का आधा हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया, जो बचा उसमें धारा-370 लगवा दी। recent visitors 118