पंजाब में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने कल उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आएंगे , लेंगे भाग

लुधियाना भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पंजाब का दौरा करेंगे। बताया जा रहा है कि, वह 12 नवंबर को पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। इसके अलावा वह एक स्कूल का भी दौरा करेंगे और वहां छात्रों और शिक्षकों से बातचीत करेंगे। जानकारी के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 12 नवंबर को पंजाब आ रहे हैं। अपनी यात्रा के दौरान, उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में  पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2024 के उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे। इस सम्मेलन का विषय ट्रांसफार्मिंग एग्री फूड सिस्टम इन फेस ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड एनर्जी ट्रांजिशनज रखा है। इसके बाद वह लुधियाना के सतपाल मित्तल स्कूल में भी मुख्य अतिथि होंगे, जहां वह छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करेंगे। recent visitors 70

उपराष्ट्रपति का मेघालय दौरा, 16 और 17 अक्टूबर को शिलांग और सोहरा की ओर जाने पर रोक लगायी गयी

शिलांग उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 16-17 अक्टूबर को दो दिवसीय दौरे पर मेघालय आ रहे हैं। उपराष्ट्रपति की यात्रा के मद्देनजर शिलांग ट्रैफिक पुलिस ने गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षित और सुचारू यात्रा और आम जनता की सुविधा के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। यातायात पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक या जरूरी काम को छोड़कर शिलांग और आसपास के इलाकों की यात्रा करने से बचने को कहा है। निर्देश में यातायात पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि आवश्यक मालवाहक वाहन, गैस सिलेंडर परिवहन वाहन, तेल टैंकर, एफसीआई ट्रक, स्थानीय मिनी ट्रक सहित सभी प्रकार के भारी और मध्यम मोटर वाहनों को 16 और 17 अक्टूबर को शिलांग और सोहरा की ओर जाने पर रोक लगायी गयी है। ट्रैफिक पुलिस ने 16 अक्टूबर को ट्रैफिक दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है वाहनों को वाईडब्ल्यूसीए गुरुद्वारा जंक्शन से राजभवन के रास्ते में आकाशवाणी जंक्शन पर डायवर्ट किया जाएगा। ये दिशा-निर्देश शाम 5 बजे से कार्यक्रम समाप्ति तक लागू रहेगा। वाईडब्ल्यूसीए से गुरुद्वारा जंक्शन: वाहनों को आकाशवाणी जंक्शन की ओर मोड़ दिया जाएगा। यह निर्देश आईजीपी पॉइंट की ओर जाने वाले सभी वाहनों के लिए शाम 5 बजे से कार्यक्रम के अंत तक लागू रहेगा। गोल्फलिंक्स, पाइनथरबाह, बीडीडब्ल्यू स्कूल लाइलाद नोंगमेनसोंग: दोपहर 2:30 बजे के बाद वाहनों को पाइन्तर बाजार-जेएन स्टेडियम के पीछे-वहुमखराह ब्रिज के पीछे की ओर मोड़ दिया जाएगा। इशिरवाट जंक्शन नोंगमेनसोंग मार्केट की ओर: दोपहर 2:30 बजे से वाहनों को बीएसएफ माओपट, उम्पलिंग रोड की ओर मोड़ दिया जाएगा। शिलांग कॉमर्स कॉलेज बीके बाजोरिया जंक्शन ब्रिज: दोपहर 2:30 बजे के बाद वाहनों को शिलांग कॉमर्स कॉलेज जंक्शन से डॉन बॉस्को स्क्वायर, गुरूद्वारा की ओर मोड़ दिया जाएगा। एमईएस जंक्शन, नोंग्रिम हिल्स डीएडी जंक्शन (डेम्सिनियग): दोपहर 2:30 बजे से वाहनों को नोंग्रिम पेट्रोल पंप, एमईएस जंक्शन नोंग्रिम हिल्स, गोरालेन की ओर मोड़ दिया जाएगा। दोपहर 2:30 बजे से यातायात को बीके बाजोरिया फोर्थ फर्लांग जंक्शन पर शिलांग कॉमर्स कॉलेज की ओर मोड़ दिया जाएगा।       recent visitors 73

… पेज एक, पेज दो, पेज तीन… उन लड़कों और लड़कियों के चेहरों से भरे हुए रहते हैं जिन्होंने सफलता हासिल की होती है: धनखड़

नई दिल्ली  समाचार पत्रों में ‘कोचिंग सेंटर के विज्ञापनों की भरमार’ की ओर इशारा करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सिविल सेवाओं के प्रति छात्रों के ‘मोह’ पर चिंता व्यक्त की और उनसे अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध ‘आकर्षक’ अवसरों की तलाश करने का आग्रह किया। धनखड़ दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में बौद्धिक संपदा (आईपी) कानून और प्रबंधन में संयुक्त स्नातकोत्तर व एलएलएम डिग्री के पहले बैच के ‘इंडक्शन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘… अब, मुझे समाचार पत्रों में कुल मिलाकर कोचिंग सेंटर के विज्ञापनों की भरमार मिलती है … पेज एक, पेज दो, पेज तीन… उन लड़कों और लड़कियों के चेहरों से भरे हुए रहते हैं जिन्होंने सफलता हासिल की होती है। एक ही चेहरे का उपयोग कई संस्थानों द्वारा किया जा रहा है।’’ धनखड़ ने कहा, ‘‘इन विज्ञापनों की भरमार को देखें… लागत और एक-एक पैसा उन युवा लड़कों और लड़कियों के पास से आया है जो अपने लिए भविष्य सुरक्षित करने की कोशिश में हैं।’’ उपराष्ट्रपति ने युवाओं से कहा कि वे अन्य क्षेत्रों में भी अवसरों की तलाश करें। उन्होंने कहा, ‘‘समय आ गया है, आइए, हम सिविल सेवा की नौकरियों के मोह से बाहर आएं। हम जानते हैं कि अवसर सीमित हैं, हमें दूसरी आरे भी देखना होगा और यह खोजना होगा कि अवसरों के विशाल परिदृश्य कहीं अधिक आकर्षक हैं जो आपको बड़े पैमाने पर (राष्ट्र के लिए) योगदान करने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे स्वार्थ को देश के हित से ऊपर रखने वाली ताकतों को किनारे लगाएं और उन्हें निष्प्रभावी करें।     recent visitors 89

सदन में आपका आचरण सबसे खराब है, चिल्लाने की हिम्मत कैसे की, सांसद पर भड़के जगदीप धनखड़

नई दिल्ली पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को अयोग्य ठहराये जाने के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग को राज्यसभा में आसन की ओर से खारिज किए जाने के बाद विपक्ष ने गुरुवार को उच्च सदन से बहिर्गमन किया। इस दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों के अमर्यादित आचरण से दुखी होकर सभापति जगदीप धनखड़ यह कहते हुए आसन छोड़कर चले गए कि वह कुछ समय के लिए आसन पर बैठने में खुद को सक्षम नहीं पा रहे हैं। सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और उसके बाद शून्यकाल आरंभ करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) अजीत गोपचड़े को अपना मुद्दा उठाने को कहा। इसके तुरंत बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्ष के कुछ सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए और फोगाट को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करने लगे। हंगामे के बीच ही गोपचड़े अपना मुद्दा उठा रहे थे। इसी दौरान तृणमूल के डेरेक ओब्रायन कुछ कहते हुए सुने गए। सभापति ने जब हंगामा कर रहे सदस्यों की बात को अनसुनी कर दिया तो सदन में शोरगुल और तेज हो गया। विपक्षी सदस्यों की ओर से फोगाट के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी गई। सभापति ने इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को मौका दिया। उन्होंने कहा कि कल ही हमने यह मुद्दा उठाया था और यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा, 'यह मुद्दा व्यक्तिगत तौर पर किसी के लिए चिंता में डालने वाला नहीं है।' खरगे अभी बोल ही रहे थे कि सभापति ने उनसे पूछा कि वह कौन सा मुद्दा उठाना चाहते हैं। खरगे ने कहा कि फोगाट का मुद्दा। इस पर सभापति ने खरगे से पूछा कि क्या वह इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं? नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'चर्चा कीजिए…इसके पीछे कौन है? और कैसे केवल 100 ग्राम…।' सभापति ने खरगे को मुद्दा उठाने देने से रोकते हुए कहा कि वह इस सदन को ऐसे मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं करने देंगे। उन्होंने खरगे से कहा कि वह नियमों का उपयोग करें। इसी दौरान विपक्ष के सदस्यों का हंगामा शुरू हो गया। हंगामा देख सभापति ने डेरेक का नाम लेकर कहा कि वह आसन पर चिल्ला रहे हैं। उन्होंने डेरेक से कहा, 'सदन में आपका आचरण सबसे खराब है। आप आसन पर चिल्ला रहे हैं। मैं इसकी निंदा करता हूं। अगली बार मैं आपको दरवाजा दिखा दूंगा। आपने आसन पर चिल्लाने की हिम्मत कैसे की?' विपक्ष के नेता की ओर हाथ करते हुए सभापति ने कहा कि और वरिष्ठ नेता इस पर (डेरेक के आचरण पर) कोई ध्यान नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण आचरण है।'' इसी दौरान नारेबाजी करता हुआ समूचा विपक्ष सदन से बहिर्गमन कर गया। सभापति ने इस पर कहा, 'हमने सबसे बदसूरत दृश्य देखा है। हमने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र का काला दौर देखा है। हम जानते हैं कि यह कैसे शुरू होता है। इसकी शुरुआत सबसे पहले संसदीय संस्थाओं को चुनौती देने से होती है। और यह चुनौती जून 1975 में दी गई थी। यहां एक गंभीर चुनौती थी। क्या कोई इस तरह का आचरण कर सकता है।' सभापति की इस टिप्पणी के बाद सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि विपक्ष ने आसन को तकलीफ पहुंचाई और यह संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा, 'यह सच में निंदनीय है।' उन्होंने विशेषतौर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के आचरण की निंदा करते हुए कहा कि यह उनके लिए चिंतन करने वाला प्रश्न है। उन्होंने कहा, 'जहां तक विनेश फोगाट का सवाल है। यह पक्ष और विपक्ष का सवाल नहीं है। यह देश का सवाल है। सारा देश उनके साथ खड़ा है। यह भारतीय खेल को आगे बढ़ाने का विषय है, जिसमें सब लोग भावनात्मक तरीके से जुड़े हुए हैं और विनेश के साथ खड़े हैं।' उन्होंने कहा कि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विनेश को चैंपियन ऑफ चैंपियंस कहा है और यह भी कहा है कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य इस बात का है इसको भी हम पक्ष और विपक्ष में बांटने का प्रयास कर रहे हैं। शायद विपक्ष विषय विहीन हो चुका है। मुद्दा विहीन हो चुका है। कोई ठोस मुद्दा नहीं है उनके पास।' इसके बाद धनखड़ ने कहा कि इस पवित्र सदन को अराजकता का केंद्र बनाना, भारतीय प्रजातंत्र के ऊपर कुठाराघात करना, सभापति की गरिमा को धूमिल करना और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण बनाना यह अब मर्यादित आचरण नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं हाल के दिनों में देख रहा हूं, जिस तरीके से आसन को चुनौती दी जा रही है। शब्दों से, पत्र के द्वारा, अखबार के माध्यम से…कितनी गलत टिप्पणी की है। मैंने देखा है। मेरे को यह चुनौती नहीं दी जा रही है। यह सभापति के पद को दी जा रही है। यह चुनौती है इसलिए दी जा रही है कि जो व्यक्ति इस पद पर बैठा है वह इसके लायक नहीं है, ऐसा यह सोचते हैं।'   recent visitors 112