Sunday, July 5, 2026 11:42 pm

कपिल सिब्बल ने कहा कि शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, संकट में नौकरी

नई दिल्ली मुस्लिमों को लेकर विवादित टिप्पणी करने और बहुसंख्यकों के हिसाब से कानून चलने की बात कहने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव घिरते जा रहे हैं। अब विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ महाभियोग की मांग की है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। यही नहीं कई सांसदों ने तो इसके लिए मुहिम भी शुरू दी है। इन लोगों ने जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस देने की मुहिम शुरू कर दी है और इसके लिए सांसदों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने बुधवार को बताया कि अब तक राज्यसभा के 30 से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर ले लिए गए हैं और संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र में ही इसके लिए नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘यह गंभीर मामला है। हम संसद के इसी सत्र में महाभियोग के लिए नोटिस देंगे।’ न्यायमूर्ति यादव ने रविवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए विवादास्पद टिप्पणी की थी। नियम के अनुसार किसी जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए 100 लोकसभा सदस्यों या 50 राज्यसभा सदस्यों की ओर से मंजूरी मिलनी चाहिए। राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को कहा था कि महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘कोई भी न्यायाधीश इस तरह का बयान देता है तो वह अपने पद की शपथ का उल्लंघन करता है। अगर वह पद की शपथ का उल्लंघन कर रहा है, तो उसे उस कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है।’ बता दें कि जस्टिस शेखर यादव ने मुस्लिमों के लिए कठमुल्ला शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने एक और टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस देश में एक वर्ग को 4 शादियां करने का अधिकार नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा था कि भारत में बहुसंख्यकों के अनुसार ही कानून चलेगा। उनका कहना था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आप देखते हैं कि परिवार और समाज में भी बहुमत की राय को ही माना जाता है। इस लिहाज से देश में भी कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से ही चलना चाहिए। गौरतलब है कि जस्टिस शेखर यादव की इस टिप्पणी को लेकर उन्हें घेरा जा रहा है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अखबारों में छपी रिपोर्ट्स का संज्ञान लिया है और इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जस्टिस शेखर यादव से जुड़ी डिटेल मांगी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले हमारे संज्ञान में है और जांच की जा रही है। recent visitors 44

देश बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार चलेगा… बयान देने वाले जस्टिस शेखर कुमार यादव

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने रविवार को वीएचपी के कार्यक्रम में ऐसा बयान दिया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। यहां पर उन्होंने कहा कि यह मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार काम करेगा। अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू धर्म में अस्पृश्यता, सती प्रथा और जौहर जैसी प्रथाओं को खत्म कर दिया गया, जबकि मुस्लिम समुदाय में कई पत्नियां रखने की प्रथा अभी भी जारी है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस शेखर यादव ने कहा, ‘मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार काम करेगा। यह कानून है। आप यह नहीं कह सकते कि आप हाईकोर्ट के जज होने के नाते ऐसा कह रहे हैं। दरअसल कानून बहुमत के हिसाब से काम करता है। इसे परिवार या समाज के संदर्भ में देखें। केवल वही स्वीकार किया जाएगा जिससे बहुसंख्यकों का कल्याण और खुशी हो।’ हिंदू धर्मग्रंथों में महिलाओं को देवी के तौर पर पूजते- जस्टिस शेखर जस्टिस शेखर ने आगे बताया कि शास्त्रों और वेदों जैसे हिंदू धर्मग्रंथों में महिलाओं को देवी के रूप में पूजा जाता है, फिर भी एक समुदाय के सदस्य कई पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक का अधिकार मांगते हैं। उन्होंने कहा, ‘आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी के तौर पर मान्यता दी गई है। आप चार पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक का अधिकार नहीं मांग सकते। आप कहते हैं, हमें ट्रिपल तलाक कहने का अधिकार है और महिलाओं को भरण-पोषण नहीं देना है। यह अधिकार काम नहीं करेगा। UCC ऐसा कुछ नहीं है जिसकी VHP, RSS या हिंदू धर्म वकालत करता है। देश का सुप्रीम कोर्ट अदालत भी इसकी बात करती है।’ राजा राम मोहन राय का भी दिया उदाहरण इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म में बाल विवाह, सती प्रथा और बालिकाओं की हत्या जैसी कई सामाजिक बुराइयां थीं, लेकिन राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन प्रथाओं को खत्म करने के लिए काफी मेहनत की। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समुदाय में हलाला, तीन तलाक और गोद लेने से संबंधित सामाजिक बुराइयों की बात आती है, तो उनके खिलाफ खड़े होने का उनमें कोई साहस नहीं है या यह कहा जा सकता है कि इन मुद्दों को हल करने के लिए मुस्लिम समुदाय की ओर से कोई पहल नहीं हुई। recent visitors 105