ज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के शीश पर कलशों की गलंतिका बांधी, ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगी परंपरा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल के शीश मिट्टी के कलशों से शीतल जलधारा प्रवाहित करने की शुरुआत हो गई है। सुबह 6 बजे पुजारियों ने पवित्र नदियों का आवाह्न कर भगवान के शीश 11 मिट्टी के कलशों की गलंतिका बांधी। प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भी भगवान मंगलनाथ को वैशाख की भीषण गर्मी में ठंडक प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधने की शुरुआत हो गई है। पं.महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पूरे दो माह तेज गर्मी रहने की मान्यता है। इन 60 दिनों में भगवान महाकाल को ठंडक प्रदान करने के लिए भगवान के शीश मिट्टी से बनी मटकियों से जलधारा प्रवाहित करने की परंपरा है। दो माह तक प्रतिदिन सुबह 6 से शाम 4 बजे तक गलंतिका बांधी जाती है। रविवार को इसकी शुरुआत हुई। पुजारियों ने गंगा, यमुना, कांवेरी, नर्मदा, शिप्रा आदि नदियों का आवाह्न कर उन्हीं के नाम से 11 कलश की गलंतिका बांधी। पंचामृत पूजन के बाद बांधी गलंतिका मंगल ग्रह की जन्म स्थली कहे जाने वाले प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में रविवार को गलंतिका बांधी गईं। सुबह गादीपति महंत जितेंद्र भारती द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन कर भात अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान के शीश गलंतिका बांधी गई। महंत भारती ने बताया भगवान मंगलनाथ अंगारकाय अर्थात अंगारे के समान कांति वाले देव हैं। इनकी प्रकृति उष्ण मानी जाती है। इसलिए जल, पंचामृत तथा भात अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं। गर्मी में भगवान को शीतल सुगंधित द्रव्य, शीतल पुष्प आदि अर्पण करने का भी महत्व है। recent visitors 49

महाकाल के शिखर पर अब लहराएगा ब्रह्मध्वज, मप्र के प्रमुख मंदिरों-संस्थानों पर भी लगाएंगे ध्वज, नीम जल से होगा बाबा का अभिषेक

उज्जैन  हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में एक विशेष धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मंदिर के मुख्य शिखर पर सूर्य चिन्ह वाला केसरिया ब्रह्म ध्वज फहराया जाएगा। यह ध्वज प्रदेशभर के प्रमुख मंदिरों और संस्थाओं में भी लगाया जाएगा। साथ ही मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना, भोग आरती और पंचांग पूजन की प्रक्रिया भी होगी।  मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा ब्रह्म ध्वज हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ध्वज बदलने की परंपरा का पालन किया जाता है। इस बार मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज को फहराया जाएगा, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से प्रदान किया गया है। पिछले दिनों भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व मंत्रिपरिषद ने ब्रह्म ध्वज व विक्रम संवत पुस्तिका का लोकार्पण किया है। इसके बाद से यह ध्वज श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ ने इस ध्वज को प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और शासकीय व अशासकीय संस्थानों में भी लगाने की पहल की है। श्री महाकालेश्वर मंदिर के साथ-साथ इस ध्वज को प्रदेशभर के प्रमुख स्थानों पर फहराया जाएगा। 65 वर्षों तक ध्वज को पूजा स्थान पर रखा था सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। इस दिन ब्रह्म ध्वज का फहराया जाना एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ी को जोड़ता है। उन्होंने बताया कि इस ध्वज को पं. सूर्यनारायण व्यास परिवार से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया, जिन्होंने 65 वर्षों तक इस ध्वज को सुरक्षित पूजा स्थान पर रखा था। गुड़ी पड़वा पर विशेष पूजा और अभिषेक 30 मार्च को गुड़ी पड़वा के दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। महाराष्ट्रीयन पंचांग के अनुसार, भगवान महाकाल का नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद, मंदिर में नई ध्वज का फहराया जाएगा। इस अवसर पर विशेष भोग आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्री खंड और पूरणपोली का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही, मंदिर के नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। गुड़ी पड़वा पर इस बार मंदिर में पंचांग पूजन भी किया जाएगा, जिससे यह दिन और भी विशेष हो जाएगा। recent visitors 51

महाकाल की शरण में केएल राहुल, आईपीएल में सफलता के लिए आशीर्वाद लिया

उज्जैन  देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास और इंडियन क्रिकेटर केएल राहुल सोमवार को उज्जैन पहुंचे. कुमार विश्वास व केएल राहुल ने यहां महाकालेश्वर मंदिर पुहंच बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया. वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने नंदी हॉल में बैठक भगवान महाकाल का ध्यान लगाया. हमारी पीढ़ियों पर महाकाल की कृपा : कुमार विश्वास सोमवार को उज्जैन पहुंचे डॉ. कुमार विश्वास ने तकरीबन 15 मिनट तक महाकाल का ध्यान लगाया और पूजा अर्चना की. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद डॉ. विश्वास ने कहा, " मैं उनसे क्या मांगू वो तो सबका मन जानते हैं. बाबा महाकाल की कृपा हमारे परिवार पर पीढ़ियों-शताब्दियों से बनी हुई है. जब भी अवसर मिलता है, मैं यहां आकर बाबा के चरणों में शीश नवाता हूं. बच्चे भी प्रवास पर हैं और जैसे ही वापस लौटेंगे वे भी बाबा की शरण में माथा टेकने आएंगे.'' इंदौर में अपने-अपने राम गौरतलब है कि डॉ. कुमार विश्वास इन दिनों इंदौर प्रवास पर हैं. वे यहां इंदौर के गुजराती इनोवेटिव कॉलेज में ''अपने-अपने राम' कार्यक्रम में राम कथा सुना रहे हैं. रविवार को कार्यक्रम के पहले दिन के समापन के बाद डॉ. विश्वास महाकाल के दर्शन करने के लिए रवाना हुए. परिवार के साथ पहुंचे थे केएल राहुल वहीं क्रिकेटर केएल राहुल ने भी परिवार के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. बता दें कि क्रिकेटर केएल राहुल कई बार बड़ी क्रिकेट सीरीज से पहले और बाद में महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं. चैंपियंस ट्रॉफी के बाद केएल राहुल फिर यहां पहुंचे.  बाबा महाकाल के दर्शन कर मांगी सफलता की कामना महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि केएल राहुल विशेष रूप से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने मस्तक पर तिलक लगाया और गले में आंकड़े की माला पहनी। पूजन के बाद वे नंदी हॉल पहुंचे और नंदी महाराज के कानों में अपनी मनोकामना कही। बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं केएल राहुल बताया जाता है कि केएल राहुल बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं और समय मिलने पर उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करते हैं। इससे पहले भी वे अपनी पत्नी, अभिनेत्री आथिया शेट्टी के साथ बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। आईपीएल में नई टीम से खेलेंगे केएल राहुल जल्द ही शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए केएल राहुल पूरी तरह तैयार हैं। इस सीजन में वे दिल्ली कैपिटल्स टीम की ओर से खेलते नजर आएंगे। बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान उन्होंने अपनी टीम की शानदार परफॉर्मेंस के लिए प्रार्थना की।   recent visitors 49

महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे

उज्जैन मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली और अब होली जैसे बड़े त्योहार भी उनके लिए मुश्किल भरे साबित हो रहे हैं। समय पर वेतन न मिलने से उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है, लेकिन मंदिर प्रशासन इस पर ध्यान देने के बजाय चुप्पी साधे बैठा है। हर महीने देरी से मिल रहा वेतन मंदिर में सफाई, सुरक्षा, तकनीकी और अन्य सेवाओं में लगे करीब 1500 कर्मचारी क्रिस्टल और केएसएस जैसी आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। अनुबंध के अनुसार, उन्हें हर महीने की 5 तारीख तक वेतन मिल जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि वेतन कभी 15 तारीख के बाद तो कभी 25 तारीख तक टल जाता है। त्योहारों पर अधूरी रह जाती हैं जरूरतें समय पर वेतन न मिलने की वजह से त्योहारों पर कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। न तो वे घर की जरूरतें पूरी कर पाते हैं और न ही परिवार के साथ त्योहार मना पाते हैं। इस साल भी रक्षाबंधन से लेकर होली तक उनकी आर्थिक परेशानियां कम नहीं हुईं, जिससे उनकी खुशियां फीकी पड़ गईं। प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी समस्या मंदिर प्रशासन इस पूरे मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। कर्मचारियों से ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की उम्मीद की जाती है, लेकिन उनके वेतन को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। वेतन में देरी की वजह से कई बार कर्मचारियों पर दर्शनार्थियों से अवैध वसूली के आरोप भी लगे हैं, जिन पर कार्रवाई भी हुई है। नियंत्रण की कमी, बढ़ता असंतोष मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन आउटसोर्स कंपनियों पर उनका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। कर्मचारी भी मजबूरी में शोषण सहने को मजबूर हैं, क्योंकि नौकरी छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। अगर समय पर वेतन नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे मंदिर की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। recent visitors 35

14 मार्च धुलेंडी पर भस्म आरती में हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे राजा

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 13 मार्च को राजसी वैभव के साथ होली उत्सव मनेगा। भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद प्रदोषकाल में होलिका का पूजन उपरांत दहन किया जाएगा। 14 मार्च को धुलेंडी पर तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। उत्सव को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा में होली उत्सव का विशेष महत्व है। देशभर से सैकड़ों भक्त राजा की रंगरंगीली होली देखने मंदिर पहुंचते हैं। इस बार यह उत्सव 13 मार्च को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिर परिसर में श्री ओंकरेश्वर मंदिर के सामने पुजारी, पुरोहित परिवार द्वारा होलिका का निर्माण किया जाएगा। शाम 7.30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका का पूजन करेंगे। पश्चात होलिका का दहन होगा। मंदिर समिति उपलब्ध कराएगी हर्बल गुलाल परंपरा अनुसार 14 मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा। तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित करेंगे। मंदिर समिति पुजारियों को प्राकृतिक उत्पादों से तैयार हर्बल गुलाल उपलब्ध कराएगी। बताया जाता है, मंदिर समिति होली उत्सव के लिए एक थाल भरकर गुलाल उपलब्ध कराती है। वैसे भी ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को समिति मात्रा में पूजन सामग्री अर्पित करने का सुझाव दिया है। ज्योतिष का मत : 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत ज्योतिष व धर्मशास्त्र के जानकार 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि के चंद्रमा की साक्षी में पूर्णिमा तिथि लगेगी, जो प्रदोष काल में पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी। धर्मशास्त्र में होलिका का पूजन प्रदोषकाल में बताया गया है। इसलिए शुभयोग व नक्षत्र में 13 मार्च को प्रदोषकाल में होलिका का पूजन करना श्रेष्ठ है। इस दिन पाताल वासनी भद्रा भी रहेगी, इसलिए होलिका का दहन अवश्य रात 11.30 बजे के बाद करना चाहिए। सामान्यत: होलिका का दहन अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। ऐसे में 13 व 14 मार्च की तारीख होली तथा धुलेंडी मनाने के लिए शास्त्र सम्मत है। सिंहपुरी में पांच हजार कंडों से बनेगी हर्बल होली पुराने शहर सिंहपुरी में गाय के गोबर से बनाए गए पांच हजार कंडों से होली बनाई जाएगी। आयोजन समिति का दावा है कि यह विश्व की सबसे बड़ी हर्बल होली है। इसमें सिर्फ गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग होता है। लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाता है। होली के मध्य में डांडा के रूप में ध्वज लगाया जाता है। इस बार यह आयोजन 13 मार्च को होगा। शाम को प्रदोष काल में चार वेद के ब्राह्मण चतुर्वेद पारायण से होलिका का पूजन करेंगे। रात्रि जागरण के उपरांत अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में होलिका का दहन किया जाएगा। recent visitors 40

बाबा महाकाल की वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. पनगढ़िया ने की सपत्नीक पूजा-अर्चना

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने सपत्नीक बाबा महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ वित्त आयोग के सचिव कुमार विवेक ने भी बाबा महाकाल की पूजा कर अभिषेक किया। महाकालेश्वर प्रबन्धन समिति की ओर से संभाग आयुक्त संजय गुप्ता और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया। इसके बाद डॉ. पनगढ़िया ने सपत्नीक शक्ति पीठ माता हर सिद्धि मन्दिर मे माता रानी माँ हर सिद्धि की पूजा की और महाकाल लोक का अवलोकन किया।   recent visitors 37

मंत्री प्रवेश वर्मा ने किए महाकाल के दर्शन, पूजा-पाठ के साथ-साथ संकल्प भी लिया

उज्जैन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव में हराने वाले दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा गुरुवार को भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे. उन्होंने परिवार के साथ भगवान महाकाल की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की.  दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा गुरुवार को रविवार के साथ उज्जैन पहुंचे. धार्मिक यात्रा पर उज्जैन पहुंचे प्रवेश वर्मा ने सीधे महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की. पंडित राजेश शर्मा और आकाश शर्मा ने पूजा अर्चना संपन्न कराई. उल्लेखनीय है कि प्रवेश शर्मा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के पुत्र हैं और वे इस बार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे लेकिन एन वक्त पर वे दौड़ में पीछे रह गए. पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि दिल्ली के मंत्री प्रवेश शर्मा ने भगवान महाकाल की आराधना करने के साथ-साथ संकल्प भी लिया है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के उप प्रशासक एस एल सोनी की ओर से बताया गया कि दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा का पूजा अर्चना के बाद मंदिर समिति की ओर से सम्मान भी किया गया. मंदिर समिति की परंपरा है कि जो भी वीआईपी मंदिर पहुंचते हैं उनका समिति की ओर से अभिनंदन किया जाता है. पहले भी भगवान महाकाल के दरबार में आ चुके हैं वर्मा दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा पहले भी भगवान महाकाल के दरबार में आ चुके हैं. वे धार्मिक यात्रा के दौरान मीडिया के सवालों से भी बचते रहे. हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि भगवान महाकाल के दर्शन की अभिलाषा थी जो कि आज पूरी हो गई है. recent visitors 58