Thursday, July 16, 2026 8:47 am

देश ने घरेलू रक्षा उत्पादन में 1.27 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड हासिल किया..

नई दिल्ली भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत के बाद से 2023-24 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल की है। खास बात यह है कि ये वृद्धि रिकॉर्ड एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रक्षा उत्पादन का मूल्य 2014-15 में 46 हजार 429 करोड़ से 174 प्रतिशत बढ़ गया जी हां, इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षा उत्पादन का मूल्य 2014-15 में 46 हजार 429 करोड़ से 174 प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं रक्षा निर्यात की बात करें तो 2023-24 में यह रिकॉर्ड 21,083 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो पिछले दशक में 30 गुना बढ़ा है। आईडेक्स और सामर्थ्य से स्वदेशी तकनीकी प्रगति को मिल रहा बढ़ावा यही नहीं, आईडेक्स और सामर्थ्य जैसी पहलों के माध्यम से स्वदेशी तकनीकी प्रगति को बढ़ावा मिल रहा है जो AI साइबर युद्ध और स्वदेशी हथियार प्रणालियों में महत्वपूर्ण विकास कर रही हैं। 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन का रखा लक्ष्य भारत ने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य रखा। इस संबंध में मंत्रालय ने कहा कि कभी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाला देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई ताकत के रूप में खड़ा है, जो घरेलू क्षमताओं के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को आकार दे रहा है। रक्षा निर्यात में भी 30 गुना वृद्धि रक्षा निर्यात भी 2013-14 में 686 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक में 30 गुना वृद्धि दर्शाता है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए कई उपाय किए हैं। रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की उल्लेखनीय प्रगति एक आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी सैन्य विनिर्माण केंद्र के रूप में इसके परिवर्तन को रेखांकित करती है। रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेप, घरेलू भागीदारी में वृद्धि और स्वदेशी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के संयोजन ने देश की रक्षा क्षमताओं को काफी मजबूत किया है। उत्पादन में उछाल, निर्यात में तेजी से वृद्धि और मेक इन इंडिया जैसी पहलों की सफलता रक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 2029 के लिए निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के साथ, भारत अपने वैश्विक पदचिह्न का और विस्तार करने के लिए तैयार है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ाते हुए अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बाजार में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया जा सके।   recent visitors 47

राज्य देश का तकनीकी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान में मध्यप्रदेश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क ने वंदे भारत ट्रेन के लिए बीएचईएल द्वारा सौंपे गए उच्च गुणवत्ता वाले बियरिंग पार्ट्स का सफलतापूर्वक निर्माण कर यह साबित कर दिया है कि राज्य देश का तकनीकी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में ग्लोबल स्किल्स पार्क ने बियरिंग पार्टस निर्माण के प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हुए अपनी तकनीकी क्षमता को सिद्ध किया है। बियरिंग पार्टस निर्माण की इस परियोजना में अत्याधुनिक 3-एक्सिस और 5-एक्सिस सीएनसी मिलिंग और टर्निंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। ग्लोबल स्किल्स पार्क के प्रशिक्षित विशेषज्ञों और युवाओं ने पूरी दक्षता के साथ बियरिंग पार्ट्स का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ किया। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश के तकनीकी नवाचार और कौशल विकास के बढ़ते कदमों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क ने यह साबित कर दिया है कि मध्यप्रदेश न केवल तकनीकी हब बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि यह मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती देने वाला एक मजबूत स्तंभ भी बन रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) टेटवाल ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि हमारे युवा विश्वस्तरीय औद्योगिक मानकों को पूरा करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ग्लोबल स्किल्स पार्क ने तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षण में एक अनूठी मिसाल पेश की है। तकनीकी शिक्षा और नवाचार का केंद्र ग्लोबल स्किल्स पार्क, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है। संस्था ने साबित किया है कि भारत में उन्नत तकनीकों का विकास और उन्हें विश्वस्तरीय उत्पादों में बदलना संभव है। ग्लोबल स्किल्स पार्क न केवल युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल सिखा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। ग्लोबल स्किल्स पार्क की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य के प्रशिक्षित युवा वैश्विक औद्योगिक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ग्लोबल स्किल्स पार्क : आत्मनिर्भरता और प्रगति का प्रतीक ग्लोबल स्किल्स पार्क की यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता को मजबूत आधार प्रदान करती है। यह परियोजना बताती है कि उन्नत तकनीकों का उपयोग और स्थानीय प्रतिभा का सही मार्गदर्शन देश को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत, भारत ने तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। ग्लोबल स्किल्स पार्क भोपाल जैसे संस्थान न केवल स्थानीय स्तर पर विकास की कहानी लिख रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और तकनीकी उत्कृष्टता के उदाहरण भी पेश कर रहे हैं।   recent visitors 39