मध्यप्रदेश की तीन होनहार लड़कियां संसद के सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने विचार रखेंगी

इंदौर मध्यप्रदेश की तीन मेधावी लड़कियां संसद के सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने स्पीच देने का अवसर प्राप्त करेंगी। इनका चयन राज्य स्तरीय युवा संसद प्रतियोगिता में हुआ है, जिसे विधानसभा के मानसरोवर सभागार में आयोजित किया गया था। यह प्रतियोगिता 'विकसित भारत' थीम पर आधारित थी, जिसमें प्रदेशभर के युवा शामिल हुए थे। प्रतियोगिता में इंदौर की सजल जैन, भिंड की यति सिंह सिसोदिया और राशि त्रिपाठी का चयन हुआ है, जिनको संसद में प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार रखने का मौका मिलेगा।   इंदौर, भिण्ड और सतना की होनहार बेटिया इंदौर की सजल जैन, भिण्ड की यति सिंह सिसोदिया और सतना की राशि त्रिपाठी ने मध्यप्रदेश विधान सभा में जीत का परचम लहराया है। अब ये तीनों दिल्ली स्थित संसद भवन में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी और प्रदेश का नाम गौरवान्वित करेंगी। सजल जैन ने अपने भाषण में कही ये बात बता दें कि इंदौर की सजल जैन ने राष्ट्रीय स्त्तर पर प्रथम स्थान किया है। सजल जैन ने अपने भाषण में अधिकार और कर्तव्य के संतुलन पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि, ‘अधिकारों को दौड़ में हम आगे निकल गए है लेकिन कर्तव्य कही पिछे छूट गए है।’ बेटी ने बढ़ाया मान एकेएस यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वयंसेविका राशि त्रिपाठी का चयन राष्ट्र स्तरीय ’विकसित भारत युवा संसद’ दिल्ली के लिए हुआ है। वहां वह विश्वविद्यालय और प्रदेश का नाम गौरवान्वित करेंगी। दिल्ली युवा संसद में स्वयंसेविका के चयन पर जिला संगठक अधिकारी डॉ. क्रांति मिश्रा, अनंत कुमार सोनी, डॉ. हर्षवर्धन श्रीवास्तव, महेंद्र तिवारी ने शुभकामनाएं दी हैं। फर्स्ट आई सजल जैन बोलीं  हजारों किलोमीटर तीर्थ करते हैं 500 मीटर वोट डालने नहीं जाते सजल जैन ने कहा- मैंने जो बात अलग कही थी वे दो बातें थीं। पहली- संशोधन की थी। 75 सालों में संविधान वो संविधान नहीं रहा जो उस समय गढ़ा गया था। वर्तमान का संविधान उस समय से बहुत अलग है। लेकिन, जो हमारी भावनाएं, इच्छाएं हैं। जो हमें आवश्यकताएं हैं उसके अनुरुप उस संविधान में संशोधन होते गए। और आज संविधान हमारे अनुकूल है। मैंने दूसरी बात रखी थी वो मुख्यत: कर्तव्य की थी। कि हम हजारों किलोमीटर पैदल चलकर तीर्थ यात्रा तो कर लेते हैं। लेकिन, वर्तमान में 500 मीटर की दूसरी तय करके मतदान केन्द्र जाकर मतदान नहीं करते तब हमारे अधिकार तो आगे बढ़ जाते हैं लेकिन, हमारे कर्तव्य पीछे रह जाते हैं। यति सिसोदिया बोलीं जिस भिंड की पहचान डाकुओं से थी वो प्रोग्रेस कर रहा सेकेंड रैंक पर सिलेक्ट हुई यति सिंह सिसोदिया पुरस्कार लेकर सभागार से दौड़कर बाहर आईं और मां को फोन किया। यति की आंखों से आंसुओं की धारा बह रही थी। भरे हुए गले से मां को बताया – मैं सेकेंड आई हूं। अब मैं जाऊंगी दिल्ली और वहां कॉम्पटीशन में भाग लूंगी। मोदी जी के सामने जाऊंगी मुझे यकीन नहीं हो रहा। ठीक है बाय। यति सिंह सिसोदिया ने बताया- मैं मप्र के चंबल क्षेत्र हूं, जो बहुत ज्यादा ही फेमस है अपने डाकुओं के लिए। आज मैं पूरे देश को ये संदेश देना चाहती हूं कि वो क्षेत्र जो कभी डकैती के लिए जाना जाता था। आज प्रगति के लिए जाना जा रहा है। इतने छोटे से भिंड शहर से मप्र की विधानसभा में दूसरा स्थान पाकर भिंड शहर की छोटी सी लड़की यहां खड़ी है। राशि बोलीं- पहली बार इतने बडे़ मंच पर बोली, भरोसा नहीं हो रहा तीसरे नंबर पर सिलेक्ट हुई सतना की राशि त्रिपाठी ने बताया- मैं बहुत खुश हूं कि मेरी थर्ड रैंक लग गई। मैंने संविधान की 75 साल की यात्रा के बारे में बताया था। हम किस तरह प्रोग्रेस कर पा रहे हैं जब से हमारा संविधान लागू हुआ तो हम और हमारा देश किस तरह तरक्की कर रहा है। मुझे अभी भरोसा नहीं हो रहा है कि मेरी पोजिशन लग गई है। ये मेरा पहला स्टेट चैंपियनशिप था। इतने बडे़ मंच पर इससे पहले कभी नहीं बोला। मैं दिल्ली के लिए सिलेक्ट हो गई मेरे लिए इससे बड़ी खुशी कोई और नहीं हो सकती। मेरे सिलेक्शन के बाद मुझे ये महसूस हुआ कि मैं बहुत आगे जा सकती हूं। recent visitors 38

PM मोदी ने अपने पत्र में शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की का किया जिक्र

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की राह देख रहे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक खास चिट्ठी मिली है. ये चिट्ठी प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस पर लिखी है. बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस 26 मार्च को मनाता है. यह दिन 1971 में उस ऐतिहासिक क्षण को बताता है, जब भारत की सैन्य सहायता के बदौलत बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बना था. पीएम मोदी ने इस चिट्ठी में इतिहास का जिक्र किया और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की अटूट भावना को भारत-बांग्लादेश के मजबूत संबंधों की नींव बताया, और सूक्ष्म रूप से बांग्लादेश को उसकी स्थापना में भारत की भूमिका की याद दिलाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र उस समय किया है जब भारत के इस पड़ोसी देश में बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है. बांग्लादेश में पिछले साल 5 अगस्त को कथित क्रांति के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद शेख मुजीबुर्रहमान से जुड़े प्रतीकों, चिह्नों पर हमले हुए हैं. बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा साझा किये गए संदेश में PM मोदी ने बांग्लादेश के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है, "यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदान का प्रमाण है, जिसने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है." दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को स्वीकार करते हुए उन्होंने आगे कहा, "बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है, जो कई क्षेत्रों में फली-फूली है और हमारे लोगों को ठोस लाभ पहुंचा रही है. हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं और एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं." गौरतलब है कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लोगों को सैन्य, राजनयिक और मानवीय सहायता प्रदान की. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया. बता दें कि यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक वापसी की चर्चा जोर पकड़ रही है. 1971 के मुक्ति संग्राम का जिक्र कर पीएम मोदी ने बांग्लादेश को संदेश दिया है कि बांग्लादेश के निर्माण में भारत का रोल दोनों देशों के बीच रिश्तों का रेफरेंस प्वाइंट है. गौरतलब है कि शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश के नए शासन ने भारत से टकराव वाला रुख अपनाया है. लेकिन भारत पर कई चीजों के लिए निर्भर रहने वाला बांग्लादेश अब घुटनों पर आ रहा है. बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जताई है और इस बाबत भारत को अपना संदेश भेजा है. चर्चाएं हैं कि बैंकॉक में 3-4 अप्रैल को होने वाले बिमस्टेक शिखर सम्मेलन के दौरान यूनुस प्रधानमंत्री मोदी से मिल सकते हैं. लेकिन पीएम मोदी मोहम्मद यूनुस से मिलेंगे या नहीं इस मुद्दे पर नई दिल्ली ने अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.   विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले एक संसदीय समिति को बताया था कि बांग्लादेश के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है. सरकारी सूत्रों ने  बताया कि कार्यक्रम के दौरान मोदी की द्विपक्षीय बैठकों की घोषणा बाद में की जाएगी. बता दें कि शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश बॉर्डर पर भारत की ओर से किए जा रहे बाड़ेबंदी, बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा समेत अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर ढाका का व्यवहार लीक से हटकर और भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा है. इसलिए भारत बांग्लादेश के साथ रिश्तों को आगे ले जाने पर सतर्क रहा है.  recent visitors 35

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जन्मदिन पर PM मोदी ने दी हार्दिक शुभकामनाएं

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जन्मदिन पर उन्हें आज बधाई दी है। उन्होंने ईश्वर से कामना की है कि वह उन्हें जनसेवा करने के लिए दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करें। एक्स पर लिखा शुभकामना संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह एक्स पर प्रेषित शुभकामना संदेश में कहा, ”मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने मध्य प्रदेश के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक पहल की हैं। ईश्वर उन्हें जनता की सेवा करते हुए दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करें।” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दीर्घायु की कामना की 25 मार्च,1965 को उज्जैन जिले में जन्मे यादव वर्ष 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव रहे हैं। वर्ष 1988 में उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्य प्रदेश के सह मंत्री बनाया गया। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। 2013 में वह पहली बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए।   recent visitors 33

CM यादव ने कहा PM मोदी ने प्रदेश के छोटे से गांव के उभरते खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए उनकी तुलना ब्राजील से कर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश के शहडोल जिले के छोटे से गांव के उभरते फुटबाल खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए उनकी तुलना ब्राजील से कर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है। यह प्रधानमंत्री मोदी के मध्यप्रदेश के प्रति विशेष स्नेह का प्रकटीकरण है। यह भाव "एमपी के मन में मोदी" को भी चरितार्थ करता है। प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट से लेकर कई परियोजनाओं में प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान का शुभारंभ कर विश्व को प्राकृतिक संसाधनों का श्रेष्ठतम प्रबंधन करने का संदेश दिया। उनके आशीर्वाद से प्रदेश विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रदेश और प्रदेशवासियों को निरंतर प्रोत्साहन के लिए हम सब उनके आभारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकन पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमेन के साथ बातचीत में शहडोल जिले के दौरे की स्मृतियों को साझा करते हुए जनजातीय बाहुल्य गांव विचारपुर के निवासियों में फुटबाल के प्रति जबर्दस्त जुनून की चर्चा की थी। उल्लेखनीय है कि दक्षिण अमेरिका महाद्वीप का प्रमुख देश ब्राजील फुटबाल के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता और अनेक बार फुटबाल का फीफा विश्व कप जीतने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है।   recent visitors 32

पीएम मोदी ने अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को लिखा पत्र, विलियम्स की सकुशल वापसी की कामना

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को पत्र लिखकर भारत आने का न्योता दिया है। सुनीता विलियम्स अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर नौ महीने बिताने के बाद बुधवार को पृथ्वी पर लौटने वाली हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता विलियम्स के नाम एक भावपूर्ण पत्र लिखकर उनकी सुरक्षित वापसी की कामना की है। पीएम मोदी की ओर से एक मार्च को ये पत्र लिखा गया, जिसे नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो के माध्यम से सुनीता विलियम्स को भेजा गया है। इस पत्र को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया। सुनीता विलियम्स को पीएम मोदी का पत्र नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मर करीब नौ महीने तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर ‘फंसे’ रहने के बाद आखिरकार धरती पर लौट रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता विलियम्स के नाम एक भावपूर्ण पत्र लिखकर उनकी सुरक्षित वापसी की कामना की है। एक मार्च को प्रधानमंत्री ने लिखा था ये लेटर प्रधानमंत्री की ओर से 1 मार्च को लिखा गया यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें पीएम मोदी ने लिखा है, 'पूरी दुनिया सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रही है। इस महत्वपूर्ण क्षण में पीएम मोदी ने भारत की इस गौरवशाली बेटी के लिए अपनी चिंता और शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।' हम भारत में आपसे मिलने को उत्सुक हैं- पीएम प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में लिखा, 'भले ही आप हजारों मील दूर हैं, लेकिन आप हमारे दिलों के बेहद करीब हैं। भारत के लोग आपके अच्छे स्वास्थ्य और आपके मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। आपकी वापसी के बाद हम भारत में आपसे मिलने को उत्सुक हैं। भारत के लिए अपनी सबसे प्रतिभाशाली बेटियों में से एक की मेजबानी करना खुशी की बात होगी।' पीएम मोदी ने 2016 में विलियम्स से मुलाकात को किया याद पीएम मोदी ने 2016 में अमेरिका यात्रा के दौरान सुनीता विलियम्स और उनके दिवंगत पिता दीपक पंड्या से हुई मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में उनकी मुलाकात मैसिमिनो से हुई थी और बातचीत के दौरान विलियम्स का जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमारी बातचीत के दौरान आपका नाम आया और हमने चर्चा की कि हमें आप पर और आपके काम पर कितना गर्व है। इस बातचीत के बाद, मैं खुद को आपको पत्र लिखने से नहीं रोक सका।' 'विलियम्स की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व' पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूर्ववर्ती जो बाइडेन से मुलाकात के दौरान सुनीता विलियम्स का कुशलक्षेम पूछा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों को विलियम्स की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर आपके प्रेरणादायी धैर्य और दृढ़ता को दर्शाया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शेयर किया पीएम का लेटर जितेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो से मुलाकात की थी। उनके माध्यम से यह पत्र सुनीता विलियम्स तक पहुंचाने का अनुरोध किया था। उन्होंने बताया कि सुनीता विलियम्स इस भावनात्मक संदेश से बेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने पीएम मोदी और भारत के प्रति अपना आभार प्रकट किया। पीएम मोदी ने कहा कि विलियम्स की मां बोनी पंड्या उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रही होंगी और उन्हें यकीन है कि 'दीपकभाई' (विलियम्स के पिता) का आशीर्वाद भी उनके साथ है। प्रधानमंत्री ने पत्र में विलियम्स के पति माइकल विलियम्स को भी अपनी हार्दिक शुभकामनाएं भेजी हैं। recent visitors 31

PM मोदी ने पॉडकास्टर में शहडोल जिले के आदिवासी बाहुल्य गांव विचारपुर की बात की, जिसे ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से जाना जाता

शहडोल  जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहडोल जिले का दौरा किया था, और ये दौरा उन्हें इतना भा गया कि शहडोल जिले के एक छोटे से आदिवासी गांव की तारीफ वे एक बार नहीं बल्कि कई बार कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने शहडोल जिले के इस मिनी ब्राजील की चर्चा अमेरिकन पॉडकास्टर से की है, जो सुर्खियों में है. अमेरिका तक शहडोल के मिनी ब्राजील की गूंज हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकन पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ विस्तार से बातचीत की, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के दौरे को भी याद किया. पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने शहडोल जिले के आदिवासी बाहुल्य गांव विचारपुर की बात की, जिसे 'मिनी ब्राजील' के नाम से जाना जाता है, उन्होंने कहा कि शहडोल जिले की यात्रा में उन्हें उस जगह के बारे में पता चला, जहां के निवासियों में फुटबॉल के प्रति अटूट प्रेम था और वे अपने क्षेत्र को मिनी ब्राजील कहते हैं.'' अमेरिकन पॉडकास्ट में मोदी ने शहडोल को किया याद अमेरिकन पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने कहा, " हमारे यहां मध्य प्रदेश एक स्टेट है, सेंट्रल पार्ट ऑफ इंडिया में. वहां शहडोल करके एक जिला है, वहां बहुत बड़ा ट्राइबल बेल्ट है, जहां काफी ट्राइबल लोग रहते हैं. वहां ट्राइबल वुमन के स्वसहायता समूह चलते हैं, उनसे मैं बातचीत कर रहा था. उनसे बातचीत करना मुझे पसंद आता है, ऐसे लोगों से बातचीत करने मिलने गया था, वहीं पर मैंने देखा कि स्पोर्ट्स की ड्रेस पहने हुए वहां 70 से 80 के करीब नौजवान, छोटे बच्चे, सभी लोग एक ही प्रकार से बैठे थे, स्वाभाविक है मैं उनके पास गया. मैंने पूछा कि आप लोग कहां से हैं, तो सभी ने कहा कि हम 'मिनी ब्राजील से हैं'. विचारपुर गांव को कहते हैं मिनी ब्राजील पीएम ने आगे कहा, '' मैंने कहा कि मिनी ब्राजील क्या है? तो वो बोले कि हमारे गांव को लोग मिनी ब्राजील कहते हैं, तो मैंने बोला कैसे मिनी ब्राजील कहते हैं? तो बोले हमारे गांव में हर परिवार में लगभग चार-चार पीढ़ी से लोग फुटबॉल खेलते आ रहे हैं, और नेशनल प्लेयर 80 के करीब हमारे गांव से निकले हैं, पूरा गांव फुटबॉल को समर्पित है, और वो कहते हैं कि हमारे गांव का इंडिविजुअल मैच जब होता है, तो 20 से 25 हजार दर्शक तो आसपास के गांव से ही आ जाते हैं, तो भारत में जो फुटबॉल का क्रेज इन दिनों बढ़ रहा है, मैं उसके लिए इसे शुभ संकेत मानता हूं. यह टीम स्पिरिट भी पैदा करता है. मिनी ब्राजील विचारपुर के बारे में गौरतलब है कि मिनी ब्राजील के नाम से पहचान रखने वाला यह गांव शहडोल जिला मुख्यालय से लगा हुआ विचारपुर गांव है, और ये आदिवासी बाहुल्य गांव है. यहां पर फुटबॉल के प्रति लोगों में गजब का क्रेज है. बच्चे हों, बड़े हों, बुजुर्ग हों या लड़के-लड़कियां सभी में फुटबॉल के प्रति जुनून है. क्रिकेट के इस दौर में भी विचारपुर गांव में फुटबॉल का एक अलग ही क्रेज देखने मिलता है. ठंडी हो या बरसात, यहां बच्चे हमेशा फुटबॉल खेलते आपको मिल जाएंगे. विचारपुर में खेलो इंडिया सेंटर करीब डेढ़ साल पहले विचारपुर में ही फुटबॉल के लिए साईं का खेलो इंडिया सेंटर भी खोला गया. यहां विचारपुर की ही फुटबॉल प्लेयर 9 नेशनल खेल चुकीं लक्ष्मी सहीस को सेंटर का कोच बनाया गया है, जो सेंटर में लगातार सुबह-शाम कोचिंग देती हैं. लक्ष्मी बताती हैं कि केंद्र में 20 लड़के और 20 लड़कियां हैं, बाकी गांव के भी बच्चे आते हैं. कुल मिलाकर 50-60 बच्चे हो जाते हैं. हर दूसरे घर में नेशनल प्लेयर विचारपुर के ही रहने वाले और खुद नेशनल खेल चुके प्लेयर अनिल सिंह गोंड बताते हैं, '' विचारपुर में कई पीढियों से लोग फुटबॉल खेल रहे हैं, और फुटबॉल के प्रति इनका गजब क्रेज है. यही वजह है कि इस गांव के हर दूसरे घर में आपको फुटबॉल के नेशनल प्लेयर मिल जाएंगे. सबसे अच्छी बात यह है कि यहां लड़कों से ज्यादा लड़कियां नेशनल खेली हुई हैं. कुछ लड़कियां तो ऐसी हैं कि अकेले ही 8 से 9 नेशनल गेम्स फुटबॉल में खेल चुकी हैं.'' recent visitors 34

भारत और चीन अब 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मशहूर अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ पॉडकास्ट रिलीज हो चुका है। पॉडकास्ट के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के साथ भारत के रिश्तों को लेकर भी बात की। डोनाल्ड ट्रंप की ‘विनम्रता’ की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके दिमाग में एक स्पष्ट रोडमैप है, जिनमें से प्रत्येक उन्हें उनके लक्ष्यों की ओर ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि ट्रंप ‘अमेरिका फ़र्स्ट’ के पक्षधर हैं जबकि ‘मैं इंडिया फ़र्स्ट’ के पक्ष में हूं। हाउडी मोदी कार्यक्रम में ट्रंप ने ऐसा क्या किया? राष्ट्रपति ट्रंप का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सितंबर 2019 में ह्यूस्टन में हुए हाउडी मोदी कार्यक्रम में ट्रंप और मैं दोनों वहां थे और पूरा स्टेडियम पूरी तरह से भरा हुआ था। हम दोनों ने भाषण दिया और वह नीचे बैठे, मेरी बातें सुनते रहे। अब यह उनकी विनम्रता है। जब मैं मंच से बोल रहा था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति दर्शकों में बैठे थे, यह उनकी ओर से एक इशारा था। भाषण के बाद मैंने ट्रंप को स्टेडियम का चक्कर लगाने के लिए कहा और बिना किसी हिचकिचाहट के वह सहमत हो गए और मेरे साथ चलने लगे। उनकी पूरी सुरक्षा व्यवस्था चौंक गई, लेकिन मेरे लिए वह क्षण वास्तव में दिल को छू लेने वाला था। इसने मुझे दिखाया कि इस आदमी में साहस है। वह अपने फैसले खुद लेता है। यह आपसी विश्वास की भावना थी, हमारे बीच एक मजबूत बंधन था जिसे मैंने उस दिन वास्तव में देखा और जिस तरह से मैंने राष्ट्रपति ट्रंप को उस दिन सुरक्षाकर्मियों से पूछे बिना हजारों की भीड़ में चलते हुए देखा, वह वास्तव में आश्चर्यजनक था।” ‘जब ट्रंप पर हुआ हमला’ पिछले साल जुलाई में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैंने उसी दृढ़ निश्चयी और दृढ़निश्चयी राष्ट्रपति ट्रंप को देखा, जो उस स्टेडियम में मेरे साथ हाथ में हाथ डालकर चल रहे थे। गोली लगने के बाद भी वे अमेरिका के प्रति अडिग रहे। उनका जीवन उनके राष्ट्र के लिए है। उनमे अमेरिका फर्स्ट भावना दिखाई दी, ठीक वैसे ही जैसे मैं नेशन फर्स्ट में विश्वास करता हूं। मैं इंडिया फर्स्ट के लिए खड़ा हूं और यही कारण है कि हम इतने अच्छे से जुड़ते हैं।” अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जिस क्षण मैंने व्हाइट हाउस में कदम रखा, उन्होंने तुरंत सभी औपचारिक प्रोटोकॉल तोड़ दिए। फिर, वे व्यक्तिगत रूप से मुझे व्हाइट हाउस के दौरे पर ले गए। जब ​​उन्होंने मुझे चारों ओर दिखाया, तो मैंने एक खास बात देखी, उनके हाथ में कोई नोट या क्यू कार्ड नहीं था, न ही उनकी सहायता के लिए कोई उनके साथ था। उन्होंने खुद ही चीजों को दिखाया। मुझे यह अविश्वसनीय रूप से प्रभावशाली लगा। इससे पता चलता है कि वे राष्ट्रपति पद का कितना सम्मान करते थे और अमेरिका के इतिहास से कितने सम्मानजनक और गहरे जुड़े हुए थे। बाइडेन शासन के दौरान जब भी हम दोनों को जानने वाला कोई व्यक्ति उनसे (ट्रंप) मिलता था और ऐसा दर्जनों बार हुआ होगा, तो वे कहते थे, मोदी मेरे मित्र हैं, मेरा अभिवादन कहना। इस तरह का इशारा दुर्लभ है। भले ही हम वर्षों तक शारीरिक रूप से नहीं मिले, लेकिन हमारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कम्युनिकेशन, हमारी निकटता और हमारे बीच का विश्वास अडिग रहा।” चीन के साथ रिश्तों को लेकर बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने चीन को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन अब 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, “यह सच है कि हमारे बीच सीमा विवाद चल रहे हैं। 2020 में सीमा पर हुई घटनाओं ने हमारे देशों के बीच काफी तनाव पैदा किया। हालांकि राष्ट्रपति शी के साथ मेरी हालिया बैठक के बाद, हमने सीमा पर सामान्य स्थिति की वापसी देखी है। अब हम 2020 से पहले की स्थितियों को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से विश्वास, उत्साह और ऊर्जा वापस आ जाएगी। लेकिन निश्चित रूप से इसमें कुछ समय लगेगा, क्योंकि पांच साल का अंतराल रहा है। हमारा सहयोग न केवल फायदेमंद है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भी आवश्यक है। चूंकि 21वीं सदी एशिया की सदी है, इसलिए हम चाहते हैं कि भारत और चीन स्वस्थ और स्वाभाविक तरीके से प्रतिस्पर्धा करें। प्रतिस्पर्धा कोई बुरी चीज नहीं है, लेकिन इसे कभी भी संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए।” पीएम मोदी ने आगे कहा, “देखिए भारत और चीन के बीच संबंध कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यताएं प्राचीन हैं। आधुनिक दुनिया में भी, वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर आप ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखें, तो सदियों से भारत और चीन एक-दूसरे से सीखते आए हैं। साथ मिलकर उन्होंने हमेशा किसी न किसी तरह से वैश्विक भलाई में योगदान दिया है। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि एक समय में भारत और चीन अकेले दुनिया के GDP का 50% से अधिक हिस्सा थे। भारत का योगदान इतना बड़ा था।” पीएम मोदी ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि हमारे संबंध बहुत मजबूत रहे हैं, गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ। उन्होंने कहा, “अगर हम सदियों पीछे देखें, तो हमारे बीच संघर्ष का कोई वास्तविक इतिहास नहीं है। यह हमेशा एक-दूसरे से सीखने और एक-दूसरे को समझने के बारे में रहा है। एक समय में बौद्ध धर्म का चीन में गहरा प्रभाव था, और वह दर्शन मूल रूप से यहीं से आया था। हमारे रिश्ते भविष्य में भी उतने ही मजबूत रहने चाहिए। इसे आगे बढ़ना जारी रखना चाहिए। बेशक, मतभेद स्वाभाविक हैं। जब दो पड़ोसी देश होते हैं, तो कभी-कभी असहमति होना लाजिमी है। यहां तक ​​कि एक परिवार के भीतर भी सब कुछ हमेशा सही नहीं होता है। लेकिन हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि ये मतभेद विवाद में न बदल जाएं। हम इसी दिशा में सक्रिय रूप से काम करते हैं। मतभेद के बजाय हम संवाद पर जोर देते हैं, क्योंकि केवल संवाद के माध्यम से ही हम एक स्थिर संबंध 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