जनजातीय जीवन और प्रकृति पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का होगा प्रदर्शन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय वन-पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापन, जलवायु परिवर्तन और समुदाय-आधारित आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित होने वाली कार्यशाला में विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों में वनों की भूमिका पर मंथन होगा। कार्यशाला में प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह स्वागत उद्बोधन देंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. राहुल मूँगीकर प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर जनजातीय समुदाय और प्राकृतिक संरक्षण पर केंद्रित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी जाएगी। प्रमुख विषय : वन संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रबंधन राष्ट्रीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में वन संरक्षण की वर्तमान कानूनी व्यवस्थाएं, उनकी सीमाएं और समाधान, जैव विविधता संशोधन अधिनियम-2023, सामुदायिक वन अधिकार, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और वन पुनर्स्थापन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैंगलुरू से आ रहे प्रो. रमेश विशेषज्ञ वक्तव्य भी देंगे। कार्यशाला में डॉ. योगेश गोखले, डॉ. राजेन्द्र दहातोंडे आदि वक्ता विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यपाल पटेल समापन सत्र को करेंगे संबोधित राज्यपाल मंगुभाई पटेल राष्ट्रीय कार्य शाला के समापन-सत्र में मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व राष्ट्रीय जनजातीय आयोग अध्यक्ष हर्ष चौहान समापन वक्तव्य देंगे। कार्यशाला में वनीकरण, जलवायु संवेदनशीलता और वनवासी समुदायों की समावेशी भागीदारी पर केन्द्रित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में वनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यशाला वनों, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय आजीविका को केंद्र में रखते हुए एक सतत और न्यायसंगत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।   recent visitors 32

CM Mohan Yadav ने प्रदेश के किसानों के लिए खोल दिया पिटारा, पराली नहीं जलाने वाले को मिलेगी प्रोत्साहन राशि !

भोपाल मप्र में पराली जलाने के बढ़ते मामलों के बीच सरकार किसानों के लिए एक नई स्कीम लेकर आ रही है। इसके तहत जो किसान सरकार की पांच शर्तों को पूरा करेंगे उन्हें सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। एक एकड़ खेत वाले किसान को 1500 रुपए से लेकर 3 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। सरकार ने इस नई स्कीम को अन्नदाता मिशन (कृषक कल्याण मिशन) नाम दिया है। इसके जरिए किसानों की आय बढ़ाने के साथ साथ उन्हें जलवायु अनुकूल खेती और फसलों के सही दाम दिलाना है। बता दें कि मंगलवार यानी 15 अप्रैल को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस मिशन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सरकार ने मिशन के लिए 2028 तक का टारगेट भी तय किया है। इसमें 2.69 लाख वनाधिकार ( एफआरए) पट्टाधारी किसानों को 100 फीसदी फायदा देना है। पहले जानिए सरकार ने क्यों लागू किया मिशन मप्र में लघु और सीमांत किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है, मगर उन तक तकनीक और संसाधनों की सीमित पहुंच है। मानसून पर निर्भरता की वजह से ये किसान फसल का सही उत्पादन भी नहीं कर पाते। जिसकी वजह से उन्हें फसल के उचित दाम नहीं मिलते। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि अन्नदाता की आय बढ़ाने के साथ वे खेती के साथ और भी व्यवसाय कर सके इसके लिए सरकार ने पॉलिसी बनाई है। कृषि विभाग के अलावा उद्यानिकी एवं फूड प्रोसेसिंग, खाद एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग को भी इसमें जोड़ा गया है। किसानों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे जलवायु अनुकूल खेती करें। साथ ही ऐसी फसलों का उत्पादन करें जो पोषण और खाद्य सुरक्षा तय करते हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि इस पॉलिसी के जरिए गौशालाओं को बढ़ावा देने का काम भी किया जाएगा। इसके लिए आहार, डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था भी सरकार करेगी। 5 शर्तें पूरी की ताे मिलेंगे 3 हजार रु. प्रति एकड़ तक कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अन्नदाता मिशन के तहत किसानों को 1500 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए किसानों को 5 शर्तों को पूरा करना होगा। इनमें तीन शर्तें अहम है। पहली- पराली जलाने से मुक्त खेती को अपनाना, दूसरी- खेती के लिए लिए गए लोन का समय पर भुगतान। तीसरी शर्त के रूप में कीटनाशकों का कम इस्तेमाल यानी जैविक खेती की पद्धति को अपनाना है। इन तीनों शर्तों के अलावा तिलहन और दलहन की फसलें और ड्रिप इरिगेशन पद्धति को बढ़ावा देना भी शामिल है। अधिकारी के मुताबिक मप्र के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 12 हजार रुपए प्रतिवर्ष मिल रहे हैं। इन पांच शर्तों को किसान पूरा करते हैं तो उन्हें 15 हजार रु. तक मिल सकते हैं। ये एक तरह से इन्सेंटिव होगा। एमपी में तीन साल में पराली जलाने की 32 हजार से ज्यादा घटनाएं कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि हरियाणा,पंजाब, दिल्ली के बाद पराली जलाने की घटना मध्यप्रदेश में बढ़ती जा रही है। पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो रबी और खरीफ सीजन मिलाकर 32 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई है। इनमें भोपाल संभाग अव्वल है। दूसरे नंबर पर चंबल संभाग है। अधिकारी के मुताबिक किसान अगली फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए आसान रास्ता अपनाते हैं। नर्मदापुरम और हरदा के बेल्ट में गेहूं की फसल काटने के बाद मूंग की फसल लेने के लिए खेत में आग लगा दी जाती है। इससे खेत तो साफ हो जाता है, लेकिन उसकी मृदा शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है। किसान बोले- जुर्माने से ज्यादा महंगा खेत की सफाई कराना पराली जलाना किसानों की मजबूरी है। राजगढ़ जिले के किसान मुकेश नागर कहते हैं कि फसल कटाई के बाद जो अवशेष बचते हैं उसे हटाने के लिए बक्खर चलाना पड़ता है। मजदूर एक एकड़ का 4 से 5 हजार रुपए लेते हैं। अब किसी किसान का दो से तीन एकड़ का खेत है तो उसे कम से कम 10 से 15 हजार रुपए खेत की सफाई के लिए लिए देना पड़ते हैं। नागर कहते हैं कि इससे अच्छा तो जुर्माना देकर पराली जलाना है। पांच एकड़ खेत में पराली जलाने पर 5 हजार रुपए जुर्माना है। किसान की अगली फसल की लागत भी नहीं बढ़ती है। यदि सरकार किसानों को पराली न जलाने पर कोई आर्थिक सहायता देगी तो किसान पराली नहीं जलाएगा। recent visitors 31

मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…

नीमच गर्मी का मौसम हो और ठंडी-ठंडी लस्सी मिल जाए तो क्या ही कहने। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज नीमच में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ एक दुकान पर लस्सी का स्वाद लिया। इसका वीडियो खुद सीएम ने अपने एक्स हैंडल पर डाला है। आज मोहन यादव सीआरपीएफ के स्थापना दिवस के मौके पर नीमच आए थे। यहां उन्होंने इस अवसर पर आयोजित एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। मोहन यादव के अलावा देश के गृह मंत्री अमित शाह भी थे। मध्य प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…आज नीमच प्रवास के दौरान कार्यकर्ता बंधुओं के साथ लस्सी का आनंद लिया। इसके साथ उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक 46 सेकेंड का वीडियो भी डाला है। मोहन यादव के इस वीडियो पर लोगों ने भी अलग-अलग कॉमेंट किए हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा कि बहुत बढ़िया आपका व्यवहार बड़ा सरल स्वभाव का है। दूसरे ने लिखा कि आप की ड्रेस तथा जैकेट एकदम से मैचिंग है..शॉप की अम्बिएंस के साथ।आप का चाहने वाला बिहार से। इससे पहले आज नीमच में 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजि हुआ था। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शिरकत की थी। मोहन यादव ने सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में लिखा कि CRPF के जवानों के हौसले ने हृदय को गर्व से भर दिया…नीमच की धरती पर 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल दिवस परेड समारोह में शामिल होकर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस,समर्पण और राष्ट्रभक्ति को नमन किया। recent visitors 33

दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश को देश में प्रथम बनाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज पूरी दुनिया सनातन संस्कृति को अब बेहतर तरीके से समझ रही है। उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक में एक वृंदावन गांव बनाया जाएगा और दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को देश में नंबर वन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंदसौर में सोमयज्ञ में सम्मिलित हुए और यज्ञ में आहुति देने के साथ संतों का आशीर्वाद भी प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजा-अर्चना की तथा सुख, शांति, समृद्धि कामना की। मुख्यमंत्री ने मंच से संत जनों का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया। पवित्र नगरी मंदसौर को नशा मुक्त करने पर 160 समाजों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। इस दौरान सर्वाध्यक्ष पू.पा. डॉ. आचार्य गोस्वामी गोकुलोत्सवजी महाराज, जिले की प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया, वल्लभ मूल के आचार्यगण, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक सर्वचंदर सिंह सिसोदिया, ओम प्रकाश सखलेचा, माधव मारू, दिलीप सिंह परिहार और राजेश दीक्षित सहित अन्य जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम सब सोमयज्ञ का हिस्सा बने है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस यज्ञ का विशेष महत्व है। पूरी दुनिया सनातन संस्कृति को समझ रही है। सनातन संस्कृति की अपनी अलग विशेषता रही है। दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में वर्तमान में 9% दूध उत्पादन होता है जिसको बढ़कर 20% किया जाएगा। दूध उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को प्रथम स्थान पर लाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हर ब्लॉक में वृंदावन गांव बनाए जाएंगे। दूध का उत्पादन बढ़ाने के विशेष प्रयास किये जाएंगे। गांव की गौशाला अच्छे से संचालित हो इसके लिए प्रयास होंगे। एक व्यक्ति 25 गाय की एक इकाई मानकर आठ इकाई रख सकेंगे। कामधेनु योजना को जमीन स्तर पर उतारेंगे। समाज में संस्कार दिखे इसके लिए धार्मिक नगरों में शराबबंदी की गई। कृष्ण की लीलाओं के पवित्र स्थान को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएंगे।   recent visitors 33

किसानों और गौपालकों को कुपोषण दूर करने की दिशा में सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है और इस क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय, कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन में वृद्धि के साथ-साथ खाद्य प्र-संस्करण और कृषि से उत्पादित कच्चे माल पर आधारित औद्योगिक इकाई स्थापित करने जैसे हर संभव प्रयास जारी हैं। किसानों और गौपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कुपोषण दूर करने की दिशा में सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मध्यप्रदेश में वर्तमान दुग्ध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर जल्द से जल्द 20 प्रतिशत तक करने के लिए राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना प्रारंभ की है। इससे हम घर-घर गोकुल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हमने गौशालाओं में दुधारू पशुओं के लिए भी अनुदान राशि बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मीडिया को जारी संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप हमारी सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी कल्याण के लिए मिशन शुरू कर दिए हैं। मंत्रि-परिषद की गत दिवस मंगलवार को बैठक में मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश को विशेषकर गरीबों औरकिसानों को आर्थिक रूप से सुखी और समृद्ध बनाने के लिए प्राण-प्रण से कार्य कर रही है।   recent visitors 32

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महा नाट्य के माध्यम से रंगमंच के महत्व से भी पूरे राष्ट्र को अवगत करवा दिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर विक्रम संवत जिनके नाम पर प्रारंभ हुआ, ऐसे कल्याणकारी शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के सम्मान में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसमें विक्रम विश्वविद्यालय का नामकरण, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने का निर्णय भी शामिल है। इसके पूर्व वार्षिक विक्रम उत्सव की शुरुआत कर राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य को यथोचित सम्मान देने का कदम उठाया था। इस क्रम में हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महा नाट्य के माध्यम से रंगमंच के महत्व से भी पूरे राष्ट्र को अवगत करवा दिया है। वैसे तो इस डिजिटल युग में सूचना और मनोरंजन के कई फॉर्मेट लोकप्रिय हो चुके हैं, लेकिन भारतीय नाट्यशास्त्र की सुदृढ़ और समृद्ध परंपरा से जन-जन को विशेष रूप से युवा वर्ग परिचित करवाने के लिए नई दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य नाटक का निरंतर तीन दिन मंचन होना महत्व रखता है। बहुत दिन नहीं हुए जब हम डिजिटल तकनीक को आत्मसात कर बैठे थे। ऐसा लगता था कि पारंपरिक कलाओं को हम भूल रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश से जो संदेश पूरे राष्ट्र में पहुंचा है वह यह है कि अभिनय, प्रकाश संयोजन, संगीत, वेशभूषा और विशाल मंच के माध्यम से हमारे पौराणिक चरित्रों का जीवन सामने आना चाहिए। हमारे वे आदर्श शासक और आराध्य जो युवा पीढ़ी द्वारा भुला दिए गए हैं या युवा पीढ़ी को हमने उनसे परिचित ही नहीं करवाया तो इसमें कसूर वर्तमान पीढ़ी का भी है। युवाओं के पास समय भी है। सृजन की शक्ति भी है, जिज्ञासा का तत्व भी विद्यमान है तो फिर उन्हें इन राष्ट्र के आदर्श प्रतीकों की जानकारी से वंचित क्यों रखा जाए और बच्चे भी कलाओं के प्रति रुचि रखते हैं, वे भी इस विधा के लिए जिज्ञासु हो सकते हैं। यदि उन्हें महान व्यक्तित्वों के बारे में ज्ञानवर्धक विवरण देने वाले नाटक मंचन से जोड़ा जाए। प्रतापी शासक राजा भोज और अन्य सेनानियों की गाथा भी आएगी मंच पर भोपाल में कुछ वर्ष पूर्व लाल परेड मैदान पर जाणता राजा का मंचन हुआ था, जिसमें शिवाजी महाराज के कृतित्व को दर्शाया गया था। इस नाटक के मंचन से यह जागृति प्रारंभ हो जाती लेकिन वह लहर न बन सकी। एकाध मंचन हुआ और मामला समाप्त हो गया। देश की राजधानी में लाल किले पर तीन दिन लगातार सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नवाचार है। हमारे ऐसी दानवीर शासक जिन्होंने वीरता और न्याय के क्षेत्र में भी दृष्टांत स्थापित किए, वे पाठ्य-पुस्तकों में तो आ गए हैं लेकिन पाठ्य-पुस्तकों से बाहर मंच तक क्यों न पहुंचें। आखिर युवा पीढ़ी को उनकी विस्तार पूर्वक जानकारी क्यों नहीं दी जाना चाहिए? यह नवाचार आगे जाएगा अन्य राज्यों में भी न केवल सम्राट विक्रमादित्य के कार्यों की जानकारी, नागरिकों को मिलेगी बल्कि भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, राजा भोज, सम्राट अशोक और स्वतंत्रता सेनानियों सहितभारत के गौरव रहे अन्य महापुरुषों के कृतित्व की गाथा बताने वाली नाट्य प्रस्तुतियां होंगी। दिल्ली में हुए नाट्य मंचन सफल रहे हैं। हाथी, घोड़ों के उपयोग और बीसियों की संख्या में कलाकार दल के साथ इतिहास के उस दौर को जीवंत करना साधारण कार्य नहीं है। संस्कृति विभाग, विक्रमादित्य पीठ, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक संगठन इसके लिए एकजुट हुए। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इन कार्यक्रमों के लिए जो समन्वय किया उसकी भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशंसा की है। युवाओं को मिलेगी प्रेरणा कलाओं के विकास के साथ भारतीय गौरव का स्मरण करते हुए देश की प्राचीन संस्कृति, भारतीय अस्मिता को सामने लाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ कहने के लिए विरासत से विकास की बात नहीं कही, वे चाहते हैं इसका दायरा विस्तृत हो। हमारे युवा हेरिटेज वॉक करें। वे किलों और स्मारकों को देखें। तत्कालीन शासकों के शौर्य से परिचित हों। भारतीय स्वाभिमान के प्रसंग चर्चा का विषय बनें। सिर्फ बंद कमरों में संगोष्ठी न हो बल्कि भारत के ऐसे गौरवशाली व्यक्तित्व बच्चों के बीच भी जाने जाएं। स्कूली पाठ्यक्रम से लेकर विद्यालयों, महाविद्यालय के पाठ्यक्रमों में सगर्व उनका उल्लेख हो और नाट्य मंचन उस थ्योरी को प्रैक्टिकल रूप में रंगमंच पर प्रस्तुत करे। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन युवाओं को रंगमंच विधा की ओर आकर्षित करने के लिए प्रेरित करेगा। रंगमंच कलाकार भी हुए उत्साहित रंगमंच से जुड़े देश के हजारों कलाकारों का मन हर्षित है और वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार का भाव रखते हैं, जो उन्होंने इस कला को महत्व दिया और राज्याश्रय भी दिया। सैकड़ों कलाकारों को प्रोत्साहित किया। थिएटर की शक्ति सही दिशा में और सही विषय को लेकर दिखाई दी है।   recent visitors 30

मंदसौर में 3 मई को लगेगा कृषि मेला, कृषि उपकरणों की लगेगी प्रदर्शनी

प्रदेश में लगेंगे किसान मेले: मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को कृषि और सम्बद्ध कार्यों के लिए मिलेगा मार्गदर्शन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंदसौर में 3 मई को लगेगा कृषि मेला, कृषि उपकरणों की लगेगी प्रदर्शनी मुख्यमंत्री से की भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट मुख्यमंत्री को किसान हित में निर्णयों के लिए दिया धन्यवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के सभी संभागों में इस वर्ष किसान मेले आयोजित होंगे जिसमें किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित विभिन्न कार्य पद्धतियों और नए अनुसंधान की जानकारी दी जाएगी। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से संबंधित मार्गदर्शन दिया जाएगा। कृषि कार्यों से जुड़े आधुनिक उपकरणों को प्रदर्शित भी किया जाएगा। आगामी 3 मई को मंदसौर में किसान मेले का आयोजन जा रहा है। संभाग स्तरीय किसान मेलों के बाद अक्टूबर माह में एक वृहद राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर भारतीय किसान संघ ने प्रदेश में किसानों को 5 रुपए के शुल्क पर विद्युत कनेक्शन और फसलों पर बोनस राशि प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में एक वर्ष में दस लाख सौर ऊर्जा पम्प प्रदान करने का लक्ष्य है। यह कार्य अभियान के रूप में चलेगा। एक हॉर्स पॉवर से दस हॉर्स पॉवर तक सोलर पम्प स्थापना के लिए किसान को राशि जमा करवाकर निर्धारित अवधि में कनेक्शन दिए जाएंगे। प्रदेश में किसान खुद बिजली बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मजरों टोलों के निवासी जनजातीय वर्ग के लोगों को इस कार्य में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में गत तीन दिन में सोलर पम्प स्थापना के लिए लगभग 17 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सुझावों पर करेंगे अमल मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि कृषक प्रतिनिधियों के सुझावों पर राज्य सरकार अमल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को प्रदेश में गठित एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को सक्रिय करने,किसानों द्वारा नरवाई जलाने को निरूत्साहित करने और रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने के संबंध में निर्देश दिए। बैठक में बड़ी परियोजनाओं के लिए किसानों की भूमि लेने पर बदले में भूमि देने के प्रावधान, किसान को हिस्सेदार और मालिक बनाकर उनका हित सुनिश्चित करने, दूध पर बोनस, कम पानी से सिंचाई से मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने, गौशालाओं के अंतर्गत आधुनिक तकनीक से संचालन, उच्च शिक्षा में कृषि विषय के अध्ययन और जिलों में पर्याप्त पशु चिकित्सकों की व्यवस्था के संबंध में चर्चा हुई। बैठक में कमल सिंह आंजना, चंद्रकांत गौर, राम भरोसे बासोतिया, श्रीमती गिरजा ठाकुर, राजेन्द्र पालीवाल आदि शामिल थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, कृषि सचिव एम सेलवेंद्रन एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 21