गौमाता अपने बच्चों को तो पालती है, इंसान का भी ध्यान रखती, गौमाता का अमृततुल्य दूध पीकर हम बड़े हुए : CM यादव

इंदौर इंदौर के समीप महू के आशापुर गांव में नगर निगम गौशाला का निर्माण कर रहा है। इसका भूमिपूजन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गौमाता अपने बच्चों को तो पालती है। इंसान का भी ध्यान रखती है। गौमाता का अमृततुल्य दूध पीकर  हम बड़े होते है। हमारी संस्कृति में पहली रोटी गौमाता के लिए रखी जाती है। आखरी रोटी कुत्ते के लिए बनाई जाती है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति से जुड़ने के नियम बनाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौमाता की रक्षा का संकल्प युगों-युगों से हमारी संस्कृति से जुड़ा है। पहले माना जाता था कि भारत में दूध-दही की नदियां बहती है। खेती-बाड़ी में गौमाता की पहले काफी मदद ली जाती थी, लेकिन बाद में ट्रैक्टर, नए उपकरणों का उपयोग किया जाने लगा। इसकी मार हमारी गौमाता पर पड़ी। जाने-अंजाने हमसे गलतियां भी हुई, लेकिन हमे वापस ध्यान में आ गया कि रासायनिक खाद के उपयोग से नुकसान हो रहा है। जैविक खाद से किसान की लागत भी कम हो रही है और पौष्टिक अन्न का उत्पादन हो रहा है। हमने संकल्प लिया है कि गौमाता को लावारिस नहीं रहने दिया जाएगा। सभी नगर निगम को बड़ी गौशालाएं बनाने के लिए कहा गया है। इसके लिए राज्य सरकार भी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश भगवान राम और कृष्ण की धरती है। देश की पहचान उनसे भी होती है। प्रदेश में जहां भी राम और कृष्ण की लीलाएं हुई है। उसे हम तीर्थ बनाएंगे। महू के जाना पाव को भी तीर्थ स्थल का रुप दिया जाएगा। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि सवा सौ बीघा में गौशाला तैयार की जा रही है। हम इस गौशाला को आत्मनिर्भर बनाएंगे। यहां दस हजार गौवंश के रहने की व्यवस्था की जाएगी। एक साल के भीतर यह गौशाला बनकर तैयार हो जाएगी।   recent visitors 38

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आप सुजिरा अमृतः सुवर्चाः शंभू मयोभू,अर्थात जल न केवल अमृतस्वरूप है

जल गंगा संवर्धन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “आपः सुजिरा अमृतः सुवर्चाः शंभू मयोभूः", अर्थात जल न केवल अमृतस्वरूप है, बल्कि शुभ, पवित्र और जीवनदायक भी है। उन्होंने कहा है कि जल जीवन जीने का संसाधन मात्र नहीं, अपितु हमारा सनातन संस्कार है। हमारे ग्रंथ कहते हैं कि जल की हर बूंद में जीवन है और हर स्रोत में आने वाले कल का भविष्य छिपा है। इसलिए इस अमूल्य धरोहर की किसी भी मूल्य पर रक्षा करना हमारा दायित्व है। इसी दायित्व की पूर्ति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इसमें नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के साथ-साथ पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई, जल स्त्रोतों के आस-पास पौध रोपण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। जन-जागरुकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इस अभियान में जन-भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। छिंदवाड़ा जिले में सक्रिय जनसहयोग छिंदवाड़ा जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में 30 मार्च से शुरू हुए कार्यों के अंतर्गत कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने जनपद पंचायत जुन्नारदेव पहुंच कर बुधवारा गांव में तालाब के गहरीकरण हेतु ग्रामवासियों के साथ मिलकर श्रमदान किया। तालाब के जीर्णोद्धार के साथ ही इसमें जमा गाद निकालकर सफाई की जा रही है। इसी के साथ छिंदवाड़ा जिले की जन अभियान परिषद शाखा ने कन्हांन नदी तट की सफाई करते हुए जल संरक्षण की शपथ दिलाई। बुरहानपुर में जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन का प्रयास जल गंगा संवर्धन अभियान में वन विभाग द्वारा जिले के वन क्षेत्रों में स्थित जल-स्त्रोतों की सफाई, तालाब, बावड़ियों, स्टॉप डेम का गहरीकरण और पौधारोपण का कार्य किया जा रहा है। सोलाबरडी और गढ़ताल रेंज वन क्षेत्रों समेत जिले के 67 चिन्हित जल-स्त्रोतों की सफाई और गहरीकरण का काम किया जा रहा है। वन विभाग का अमला स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से नदी, तालाबों, बावड़ियों में जमा कचरा, सूखे पत्ते, गाद और झाड़ियां को हटा रहा है। अमरावती नदी के तटों पर भी वृहद स्तर पर सफाई अभियान जारी है। इससे मानसून के दौरान इन स्त्रोतों में पानी का भराव आसानी से हो सकेगा। जल संरचनाओं में पानी का भराव होने से वन्य जीवों और पक्षियों को भी राहत मिलेगी और भूजल स्तर बना रहने से पर्यावरण भी संतुलित रहेगा। देवास जिले में नये एवं पुराने जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के उद्देश्य से देवास जिले में भी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ 30 मार्च से 30 जून तक चल रहा है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह एवं जिला पंचायत के सीईओ हिमांशु प्रजापति के मार्गदर्शन में नये तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही पुराने तालाबों, बावड़ियों, नदियों एवं कुँओं का जीर्णोद्धार व पौधारोपण के कार्य जन-भागीदारी से किये जा रहे हैं। जिले की जनपद पंचायत खातेगांव में ग्राम पंचायत बछखाल के बोरदा गांव में तालाब का गहरीकरण किया गया है। इसी क्रम में जिला प्रशासन एवं ग्रामीणों के जनसहयोग से जिले की जनपद पंचायत देवास की ग्राम पंचायत गदाईशा पीपल्या में तालाब का गहरीकरण किया जा रहा है। इससे बारिश के दिनों में जल-संचय बढ़ेगा जिससे पेयजल एवं कृषि दोनों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।  शिवपुरी एवं शहडोल में हनुमान जन्मदिवस पर सामुदायिक श्रमदान शिवपुरी जिले के विकासखंड शिवपुरी में निवर्तमान नवांकुर संस्था, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति बूढ़ीबरोद, सेक्टर सुरवाया व ग्राम विकास समिति धुवानी के संयुक्त प्रयास से ग्राम धुवानी तालाब में श्रमदान कर मिट्टी हटाई गई और जल संरक्षण हेतु प्रेरणा दी गई। वहीं, शहडोल जिले में हनुमान जयंती के अवसर पर जिला प्रशासन एवं नगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में प्राचीन विराटेश्वर मंदिर परिसर में स्थित बाणगंगा कुण्ड में सफाई अभियान चलाया गया। विधायक मनीषा सिंह, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस अभियान में भाग लेते हुए जल संरक्षण की शपथ भी ली। अभियान का समग्र उद्देश्य इस अभियान के अंतर्गत नई जल संरचनाओं का निर्माण और पुरानी संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जल स्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की सफाई के साथ-साथ उनके आस-पास पौधारोपण को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जन-जागरुकता अभियानों के माध्यम से लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का उद्देश्य न केवल जल संरचनाओं के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार में सहायता प्रदान करना है, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्रोतों को पुनर्जीवित करते हुए वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों में भारत के स्वर्णिम अतीत से परिचय एवं प्रेरणा का संचार करना भी है। अभियान में मशीन, सामग्री व श्रम का समुचित नियोजन कर आमजन, स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधि एवं सरकार का संयुक्त प्रयास सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस महत्त्वपूर्ण अभियान में एकजुटता के साथ भाग लेकर जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं, क्योंकि “जल है तो कल है”।   recent visitors 37

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य : वर्तमान और भावी पीढ़ियां भारत के स्वर्णिम अतीत से होंगी परिचित: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर दिल्ली के लाल किले में हो रहे सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति की पहल को सराहा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य :यह पहल देश की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करेगी : प्रधानमंत्री मोदी सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य : वर्तमान और भावी पीढ़ियां भारत के स्वर्णिम अतीत से होंगी परिचित: प्रधानमंत्री मोदी भारतीय संस्कृति की पहचान है विक्रम संवत परंपरा भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में होने वाले तीन दिवसीय 'सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य' और इससे जुड़ी प्रदर्शनियों के आयोजन सराहना की है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा है कि "मुझे खुशी है कि मध्यप्रदेश के ऊर्जावान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा और वैभव को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।" प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के आयोजकों एवं इसमें हिस्सा ले रहे देश के कलाकारों को आयोजन की सफलता की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश में लिखा है कि युगपुरुष सम्राट विक्रमादित्य का शासनकाल जनकल्याण, सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए जाना जाता है। वह भारत की न्यायप्रिय और लोक कल्याणकारी नेतृत्व परंपरा के प्रतीक थे। उन्होंने साहित्य, कला और विज्ञान को जिस रूप में प्रोत्साहित किया, वह आज भी हमारे लिए आदर्श है। उनके काल की 'विक्रम संवत' परंपरा आज भी भारतीय संस्कृति की पहचान है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य और प्रदर्शनी का महत्व एक सांस्कृतिक आयोजन से कहीं अधिक है। इसका उद्देश्य हमारे इतिहास, हमारी जड़ों और हमारे आत्मबोध को एक उत्सव के रूप में मनाने का है। मुझे विश्वास है कि ऐसे आयोजनों से वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियां भारत के स्वर्णिम अतीत से परिचित होंगी और उससे प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में आगे बढ़ेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा है कि सांस्कृतिक मूल्यों को आधार बनाकर, आधुनिकता और विरासत को साथ लेकर, इस अमृत काल में विकसित भारत की ओर अग्रसर राष्ट्र पर सभी को गर्व है। इस यात्रा में सम्राट विक्रमादित्य समेत हमारे महापुरुषों से मिली न्याय, पराक्रम और सेवा जैसी शिक्षाएं हमारा मार्गदर्शन करेंगी। यह आयोजन देश की सांस्कृतिक चेतना को और सशक्त बनाते हुए युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़कर आत्मविश्वास से पूर्ण, जागरूक औ कर्तव्यनिष्ठ नागरिक के रूप में तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा।   recent visitors 32

दिल्ली और मध्यप्रदेश के संबंधों का नया अध्याय लिखा जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिल्ली के लाल किले पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन ऐतिहासिक होगा। आज दिल्ली और मध्यप्रदेश के संबंधों का नया अध्याय लिखा जाएगा। भारत उत्कर्ष, नवजागरण और भारत विद्या पर एकाग्र, विक्रमोत्सव के अंतर्गत विक्रम संवत के प्रवर्तक सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित महानाट्य की प्रथम प्रस्तुति, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री संस्कृति एवं पर्यटन गजेन्द्र सिंह शेखावत की गरिमामय उपस्थिति में होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का सुशासनकाल आज भी भारत के सभी राज्यों में सम्मान के साथ याद किया जाता है। उनके शौर्य, पराक्रम, वीरता, ज्ञानशीलता, दानवीरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहल ने शासन संचालन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। बेताल पच्चीसी, सिंहासन बत्तीसी सहित विक्रमादित्य की वीरता की गाथाएं आज भी याद की जाती हैं। संस्कृति मंत्रालय, दीनदयाल शोध संस्थान और दिल्ली सरकार के सहयोग से कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य के काल को जीवंत करते हुए उनके सुशासन की झलक दिखाने का प्रयास किया। यह मंचन दिल्ली के लाल किले में 13 और 14 अप्रैल को भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।   recent visitors 27

हर दु:ख, हर कष्ट में सबसे पहले ही हनुमानजी ही आते हैं याद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भगवान श्रीराम के रामराज्य की स्थापना में हनुमान जी का योगदान सदैव प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाभारत में हनुमानजी ने ही धर्म ध्वजा की थी धारण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दु:ख, हर कष्ट में सबसे पहले ही हनुमानजी ही आते हैं याद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव हनुमान जी ही बल, बुद्धि, पराक्रम और विनयशीलता का वरदान करते हैं प्रदान मुख्यमंत्री ने हनुमान जयंती की दी बधाई भोपाल    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हनुमान जयंती की सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामदूत हनुमानजी की भक्ति, सेवा और समर्पण भाव से प्रेरित होकर हम विकसित भारत-विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प की सिद्धि में योगदान दें , यही प्रार्थना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हनुमान जयंती के पावन पर्व पर राजकीय विमान तल भोपाल स्थित हनुमान मंदिर में दर्शन व पूजा-अर्चना कर जगत के कल्याण की प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने आगामी कार्यक्रमों के लिए प्रस्थान किया।        मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों के लिए जारी संदेश में कहा कि हनुमान जी अजर-अमर हैं। भगवान श्रीराम के रामराज्य की स्थापना में हनुमान जी का योगदान सदैव प्रेरणादायी रहेगा। माता सीता का प्रेम, स्नेह और वात्सल्य पाकर उनकी आजीवन सेवा तथा असाधारण वीरता का हनुमानजी का संकल्प सभी के लिए प्रेरक है। महाभारत के युद्ध में अर्जुन बाण चला रहे थे, और भगवान श्रीकृष्ण सारथी थे, तब भी धर्म ध्वजा हनुमानजी ने ही धारण की थी। हर कष्ट, हर दु:ख में सबसे पहले हमें हनुमानजी ही याद आते हैं। वे ही हमें बल, बुद्धि, पराक्रम, वीरता, ज्ञान, विनयशीलता जैसे मानवीय गुणों का वरदान प्रदान करते हैं। संकटमोचक हनुमानजी की कृपा सब पर बरसती रहे, यही प्रार्थना है।   recent visitors 26

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य: स्वयं डॉ. मोहन यादव ने सम्राट महेन्द्रादित्य के जीवंत किया था

उज्जैन उज्जैन की पवित्र धरती पर 2000 के दशक की शुरुआत की एक अनोखी सांस्कृतिक पहल की शुरूआत "सम्राट विक्रमादित्य महामंचन" के रूप में हुई। यह महानाट्य मंचन केवल एक ऐतिहासिक पात्र का स्मरण नहीं था, बल्कि एक ऐसे युग की पुनर्प्रतिष्ठा थी जिसे भारतीय संस्कृति, न्याय, और नीति का प्रतीक माना जाता है। इस मंचन की सबसे रोचक बात यह रही कि इसमें स्वयं डॉ. मोहन यादव ने सम्राट महेन्द्रादित्य (विक्रमादित्य के पिता) के जीवंत किया था। महानाट्य के मंचन के समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि रंगमंच पर उतरने वाला यह युवक भविष्य में वास्तविक रूप में मध्यप्रदेश के विक्रमादित्य की तरह एक नेतृत्वकर्ता, एक सांस्कृतिक अभिभावक और जनमानस का प्रतिनिधि के रूप में प्रतिष्ठित होगा। डॉ. यादव का यह सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रेम ही उन्हें सत्ता के शीर्ष तक ले आया। सत्ता में आने के बाद भी उनका यह रुझान केवल मंचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने महानाट्य के मंचन को सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनाया। प्राधिकरण से प्रारंभ हुई विक्रमदर्शिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव जब उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने, उन्होंने विकास को केवल अधोसंरचनात्मक निर्माण तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य की दृष्टि से उज्जैन शहर को एक ऐसे नगर के रूप में देखा जो इतिहास, आस्था और आधुनिकता का संगम बने। उनकी पहल पर शहर में चार दिशाओं में भव्य प्रवेश द्वार निर्मित किए गए, जो चार युगों के प्रतीक हैं। यह कार्य न केवल स्थापत्य की दृष्टि से अभिनव था, बल्कि सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला भी था। उज्जैन को देश का पहला ऐसा शहर बनने का गौरव प्राप्त हुआ, जिसमें दिशा-प्रेरित प्रवेश द्वारों से संस्कृति का स्वागत हुआ। विक्रम विश्वविद्यालय को नई पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अगला महत्वपूर्ण कार्य सम्राट विक्रमादित्य के नाम से स्थापित विक्रम विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना रहा। उन्होंने विश्वविद्यालय में न केवल शोध और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के साहित्य, न्याय दर्शन, और सांस्कृतिक मूल्यों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी विशेष प्रयास प्रारंभ किए गए। लाल किले से देशव्यापी मंचन की ओर अब जब डॉ. यादव सत्ता और संस्कृति दोनों के मध्य सेतु बन चुके हैं, उन्होंने अपने पुराने सांस्कृतिक अभियान को उत्थान के एक नए सोपान पर ले जाने का संकल्प लिया है। उनके नेतृत्व में टीम अब सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के महामंचन को देशभर में करने के लिए तत्पर हैं। इससे सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और दर्शन पर आधारित यह महानाट्य लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्थल पर किया जाकर राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्स्थापित कर सांसकृतिक उत्थान का नया आयाम स्थापित करेगा। "सम्राट विक्रमादित्य" केवल इतिहास के पात्र नहीं हैं, वे भारतीय मानस के आदर्श पुरुष हैं। डॉ. मोहन यादव ने उन्हें सुशासन-प्रेरणा में बदल दिया है। उनका यह अभियान केवल उज्जैन या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारत में सांस्कृतिक चेतना की लौ जलाने वाला है। जब लाल किले की प्राचीर पर विक्रमादित्य की गाथा गूंजेगी, तब यह केवल एक नाट्य मंचन नहीं होगा। यह भारतीय अस्मिता का उत्सव होगा।   recent visitors 35

मध्यप्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे हैं मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उन्नत और समृद्ध रही है प्राचीन भारतीय वास्तुकला : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजा भोज द्वारा निर्मित बड़ा तालाब तकनीकी उत्कृष्टता का है श्रेष्ठ उदाहरण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे हैं मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने वास्तुकारों को मध्यप्रदेश में गतिविधियों के विस्तार के लिए किया आमंत्रित मुख्यमंत्री ने "द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स" के राष्ट्रीय सम्मेलन "ट्रांसम" का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री ने डॉ. निधिपति सिंघानिया को किया सम्मानित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीनकाल से ही आर्किटेक्ट्स का विशेष महत्व रहा है। राजा भोज स्वयं बड़े वास्तुकार थे। भोपाल ताल सहित प्राचीन स्थापत्य के कई उदाहरण भोपाल और इसके आसपास विद्यमान है। भोपाल का ताल मूलतः बांध है। एक हजार साल पहले बनी है यह अद्भुत और बेमिसाल संरचना आज भी सामयिक और बड़ी आबादी के लिए उपयोगी है। मितव्ययता और तकनीकी उत्कृष्टता के साथ निर्मित यह संरचना, प्राचीन समृद्ध ज्ञान परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जिस पर आज भी विचार प्रासंगिक है। इस दृष्टि से भोपाल में हो रहा आर्किटेक्ट्स सम्मेलन विशेष महत्व का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स" के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन "ट्रांसम" के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वास्तुशिल्प नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए वास्तुकला उत्कृष्टता में विरासत को समाहित करने के लिए डॉ. निधिपति सिंघानिया को भारतीय वास्तुकार संस्थान (आईआईए) फैलोशिप से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आर्किटेक्ट्स को विश्वकर्मा बंधु संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर वास्तुकला और पूजा पद्धतियों में कई रहस्य विद्यमान हैं। भस्म आरती जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन यात्रा को संक्षिप्त रूप में दिखाने का प्रकल्प है। राजा भोज द्वारा बनवाया गया भोजपुर मंदिर और उनके बड़े भाई राजा मुंज द्वारा मांडव में बनाई गई संरचनाएं तत्कालीन उत्कृष्ट वास्तु शिल्प का उदाहरण है। उत्कृष्ट तकनीक के ये प्रतीक हमारी संस्कृति पर गौरव और आत्म सम्मान का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज कई विधाओं के विशेषज्ञ थे, उन्होंने विभिन्न विषयों पर पुस्तक भी लिखी। उनकी राजधानी उज्जैन थी लेकिन उत्तर की ओर से हो रहे आक्रमणों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए राजा भोज ने अपनी राजधानी को मांडव में स्थापित किया और वहां उत्कृष्ट जल संरचनाओं का भी निर्माण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस दौर में मध्यप्रदेश बदल रहा है, प्रदेश में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, जलवायु, जन सामान्य का आत्मीय व्यवहार, सड़क-बिजली-पानी जैसी अधोसंरचनात्मक सुविधाएं, प्रदेश को निवेश के लिए आदर्श राज्य बनाती हैं। व्यवसायियों और उद्योगपतियों को कार्य में परेशानी ना आए इस उद्देश्य से ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ सेक्टर विशेष पर केंद्रित नीतियां लागू की गई है। प्रदेश में मेट्रोपॉलिटन सिटी भी तेजी से विकसित हो रही हैं, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों से आसपास के पांच जिलों को जोड़कर विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन विकसित करने की कल्पना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वास्तुकारों को मध्यप्रदेश में गतिविधियों के विस्तार के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि है कि संस्था "द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स" वर्ष 1917 में स्थापित हुई, इसका मुख्यालय मुम्बई में है। देश के वास्तुविदो को संगठित कर वास्तु कला को बढ़ावा देने में संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। वास्तु कला और भवन निर्माण से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से यह संस्था निरंतर समन्वय और सम्पर्क में रहती है। संस्था के सम्मेलन को भारत के सबसे बड़ा वास्तु कला उत्सव के रूप में देखा जाता है।   recent visitors 25