CM यादव ने साधु संतों की चरण वंदन करते हुए कहा है कि साधु-संतों का स्नेह और आशीर्वाद इस जन्म की सबसे बड़ी उपलब्धि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साधु संतों की चरण वंदन करते हुए कहा है कि साधु-संतों का स्नेह और आशीर्वाद इस जन्म की सबसे बड़ी उपलब्धि है।उज्जैन में परमात्मा ने जन्म दिया उसके लिए हम सौभाग्यशाली है। बाबा महाकालेश्वर की उज्जयिनी नगरी आध्यात्म ,भारतीय दर्शन,धर्म, गणित,चिकित्सा, धनुर्विद्या और  शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में हमेशा से विख्यात रही है। भगवान कृष्ण ने उज्जैन में सांदीपनी गुरु से शिक्षा प्राप्त की और उसी ज्ञान से श्रीमद भगवतगीता का उपदेश विश्व को दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अग्रणी राष्ट्र बन रहा है। हम आध्यात्मिक नगरी अवंतिका को भारत का सिरमौर बना रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये बातें उज्जैन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा बड़नगर रोड़ स्थित, पंचायती निरंजनी अखाड़ा में आयोजित "होली के रंग – साधु संतो के संग" कार्यक्रम में सम्मिलित होकर कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और प्रदेश के अन्य धार्मिक नगरों में 1 अप्रैल से शराब-बंदी की जा रही है। हम संपूर्ण प्रदेश में गौ-शालाओं को बढ़ावा दे रहे है। दूध उत्पादन पर बोनस भी दिया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उज्जैन में "होली के रंग-साधु संतों के संग" कार्यक्रम में ढोल, डमरू, वेद ऋचाओं की गूंज के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी जी महाराज ने गुलाल लगाकर होली की मंगलकामनाएं दी। रविंद्र पूरी जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उज्जैन को संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक राजधानी बनाने के लक्ष्य को पूर्ण करने में हम साधु-संत संपूर्ण रूप से साथ है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी जी महाराज, महामंडलेश्वर शांतिस्वरूपानंद गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर सुमन्नानन्द गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर प्रेमानंद पूरी जी महाराज,महंत डॉक्टर रामेश्वर दास जी महाराज,महंत देवगिरी जी महाराज,महंत शनि भारती जी महाराज,महंत सुरेशानंद पूरी जी महाराज आदि साधु,संत,महंतों का पुष्प-वर्षा कर स्वागत किया।   recent visitors 33

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी होली की मंगलकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने होली के पावन अवसर पर भोपालवासियों, प्रदेशवासियों, और सभी देशवासियों को मंगलकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि होली का यह रंगों भरा त्यौहार पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश दिनों-दिन नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रधानमंत्री मोदी देशवासियों के जीवन में खुशहाली का रंग भरने के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास में होली पर मीडिया से चर्चा में कहा कि परमात्मा करे कि हम सबका परस्पर प्रेम और सौहार्द निरंतर यूं ही बढ़ता रहे।हम सभी एक-दूसरे के सुख-दुःख में साझेदारी करते हुए आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करें। होली हो, दीवाली हो या ईद.. हर त्यौहार का असली आनंद मिल-जुलकर मनाने में ही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे आपसी भाईचारे को और मजबूत करें तथा सामाजिक समरसता को बनाए रखते हुए रंगों के इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएं।   recent visitors 30

मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नए निवेश की बढ़ी संभावनाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आ रहा है। देश के केंद्र में स्थित होने के कारण यह प्रदेश उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम के व्यापार मार्गों को सुविधाजनक रूप से जोड़ते हुए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचे, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और उद्योग समर्थक नीतियों के कारण प्रदेश निवेशकों के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में की जा रही रणनीतिक पहलों से मध्यप्रदेश अब सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि पूरे भारत की आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत आधार बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के हब के रूप में उभर रहा है। अपनी भौगोलिक स्थिति, उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे और उद्योग अनुकूल नीतियों के कारण यह प्रदेश निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं इसे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। बेहतर सड़कों और कॉरिडोर से लॉजिस्टिक्स को नई दिशा प्रदेश में लॉजिस्टिक्स को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का तेज़ी से विस्तार किया गया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, उत्तर-दक्षिण फ्रेट कॉरिडोर और भारतमाला परियोजना प्रदेश को लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं। इंदौर और भोपाल में विकसित हो रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) व्यापार को आसान और लागत प्रभावी बना रहे हैं। हवाई मार्ग से निर्यात और उद्योग को नई गति प्रदेश के छह प्रमुख हवाई अड्डों पर एयर कार्गो सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ी ताकत मिल रही है। रीवा हवाई अड्डे के चालू होने से व्यापार और औद्योगिक परिवहन को नई रफ्तार मिली है। फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और खाद्य प्र-संस्करण जैसे उद्योगों को अब कम समय में बेहतर लॉजिस्टिक्स सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। डिजिटल तकनीक से लॉजिस्टिक्स और बिजनेस में आई ट्रांसपेरेंसी प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्रणाली व्यापारियों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) के माध्यम से पारदर्शी और कुशल लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। प्रदेश के लॉजिस्टिक्स हब में स्मार्ट वेयरहाउसिंग, ऑटोमैटेड ट्रैकिंग और डिजिटल डिलीवरी सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। औद्योगिक विकास एवं लॉजिस्टिक्स में बेहतर तालमेल प्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास का गहरा तालमेल देखने को मिल रहा है। विक्रम उद्योगपुरी आईआईटीवीयूएल जैसी परियोजनाएं लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विस्तार में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश में स्थापित किए जा रहे 11 औद्योगिक गलियारे और 20 स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र लॉजिस्टिक्स उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। हरित ऊर्जा समाधान और इलेक्ट्रिक लॉजिस्टिक्स वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मजबूत नीति और प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लेकर आई है। निश्चित पूंजी निवेश पर 30% तक की वित्तीय सहायता, स्टाम्प ड्यूटी में 100% छूट और लॉजिस्टिक्स पार्कों के लिए अनुदान जैसी योजनाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। ग्रीन लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार आईजीबीसी प्रमाणन प्राप्त इकाइयों को अतिरिक्त रियायतें दे रही है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नए अवसरों का केंद्र प्रदेश की मजबूत आधारभूत संरचना, उन्नत तकनीक और उद्योग अनुकूल नीति इसे लॉजिस्टिक्स सेक्टर के सबसे प्रमुख निवेश केंद्रों में शामिल कर रही है। सरकार के स्पष्ट विजन और विकास रणनीति के चलते यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।   recent visitors 41

मुख्यमंत्री ने ऑइल फील्डस बिल-2024 लोकसभा में पारित होने का किया स्वागत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऑइल फील्ड्स (रेग्युलेशन एण्ड डेवलपमेंट) बिल 2024 के लोकसभा में पारित होने का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने वाला ऑइल फील्ड्स रेग्युलेशन एण्ड डेवलपमेंट बिल- 2024 भारत के ऊर्जा क्षेत्र को और भी अधिक मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बिल निश्चित ही रोजगार के नए अवसर के साथ ही देश की सतत् विकास यात्रा को एक नई उड़ान देगा। उन्होंने कहा कि इस बिल के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत की कहानी का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।   recent visitors 38

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ – 2028 के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में बैठक लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश

सिंहस्थ – 2028 के लिए अभी से करें माइक्रो प्लानिंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 तक करें पूर्ण क्राउड मैनेजमेंट पर दें विशेष ध्यान महाकाल लोक में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के हिसाब से करें सिंहस्थ की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ – 2028 के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में बैठक लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ – 2028 मध्यप्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। लाखों-करोड़ों श्रद्धालु सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आएंगे। किसी भी श्रद्धालु को स्नान व देव दर्शन में कोई कठिनाई हो, इसके लिए व्यापक प्रबंध किए जाएं। पुराने सिंहस्थ आयोजन से सीख लें और आगामी सिंहस्थ के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए अभी से माइक्रो प्लानिंग कर व्यवस्थाओं को अंजाम देना प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में पूर्व में सम्पन्न हुए सिंहस्थ में प्राप्त अनुभवों को केन्द्र में रखते हुए सिंहस्थ – 2028 के योजनाबद्ध आयोजन के संबंध में बैठक की अध्यक्षता कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे बेहतर यह होगा कि सिंहस्थ की व्यवस्थाओं और प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 के पहले ही पूरे कर लिए जाएं। इससे रह गई कमोबेशी को दुरुस्त करने या व्यवस्थाओं को और भी अधिक बेहतर करने का समय भी मिल सकेगा। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव नगरीय‍विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ – 2028 की व्यवस्थाओं एवं प्रबंधन के लिए मंजूर किए गए सभी कार्य जून 2027 तक पूरे कर लिए जाएं। चल रहे कार्यों की मासिक प्रोग्रेस रिपोर्ट की समीक्षा की जाए। प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। मंजूर किए गए सभी काम प्रारंभ हो जाएं और तय समय-सीमा में ही पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकाल लोक बनने के बाद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की दिनों-दिन बढ़ती संख्या के हिसाब से ही सिंहस्थ की तैयारी की जाए, क्योंकि जो श्रद्धालु सिंहस्थ में आएंगे, वे बाबा महाकाल सहित अन्य देव स्थलों पर भी अवश्य ही जाएंगे। भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रयास यह हो कि श्रद्धालुओं को ई-बस या ई-ऑटो से महाकाल मंदिर के नजदीक ही छोड़ा जाए, ताकि उन्हें महाकाल दर्शन के लिए अधिक पैदल न चलना पड़े और प्रबन्धन में भी आसानी हो। सिंहस्थ से पहले अंदरूनी गलियों का भी चौड़ीकरण करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन शहर में आएंगे। बड़े मार्गों के अलावा उज्जैन शहर की अंदरूनी गलियों व रास्तों का भी और अधिक चौड़ीकरण करें ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन का वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध रहे और वे आसानी से आ-जा सकें। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में क्षिप्रा नदी व शहर के अंदर सिंहस्थ के लिए जितने भी सेतु निर्माण कार्य जरूरी हैं, वे अभी से प्रारंभ कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भी श्रद्धालुओं के देवदर्शन के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाए। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो रूद्र सागर में भी घाट बनाने पर विचार कर प्रारंभिक सर्वे भी कर लें। आपदा/अग्नि प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटी-छोटी व्यवस्थागत कमियों की वजह से आयोजन के दौरान ही प्राकृतिक आपदा व अग्नि दुर्घटना से अप्रिय स्थिति निर्मित न हों। सिंहस्थ वर्ष 2028 में है, इसलिए किसी भी प्रकार की आपदा और अग्नि दुर्घटना प्रबंधन पर विशेष ध्यान देकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये वॉलिंटियर्स को प्रापर ट्रेनिंग भी दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के लिए बेहतर से बेहतर प्लानिंग अमल में लाई जाए। विशेष ध्यान रहे कि कार्यों में विलंब न हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन शहर पहुंचने वाले 7 प्रमुख मार्गों को फोरलेन और एक प्रमुख मार्ग सिक्स लेन रोड के रूप में मंजूरी दे दी गई है। इस पर तेजी से काम प्रारंभ किया जाए, ताकि समय रहते सभी मार्ग तैयार हो जाएं। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी वर्ष 2016 के सिंहस्थ के व्यक्तिगत अनुभवों पर सिंहस्थ-2028 के लिए और अधिक बेहतर और व्यापक इंतजाम की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी काम अभी से प्रारंभ कर दिए जाएं, क्योंकि शाही स्नान के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं की एक ही वक्त में एक साथ एक ही स्थान पर मौजूदगी बनी रहने की संभावना रहती है। इसीलिये भीड़ प्रबंधन के‍लिए अत्याधुनिक प्रबंधन किए जाएं। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास शुक्ल ने बताया कि मंत्रि-मंडलीय समिति द्वारा सिंहस्थ – 2028 के लिए 7 प्रमुख विभागों द्वारा 7379.75 करोड़ रूपए की लागत से किए जाने वाले कुल 74 अधोसंरचना विकास कार्य मंजूर किए गए हैं। इनमें से 54 विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है, 15 निर्माण कार्य निविदा प्रक्रिया में है और 5 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सिंहस्थ – 2028 के पड़ाव क्षेत्र का टाउन प्लानिंग स्कीम (टी.पी.एस.) के माध्यम से विकास किया जाएगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र नगर विकास योजना 8,9,10,11 टी.पी.एस. (सम्मिलित रकबा 2378 हेक्टेयर) को राज्य शासन द्वारा 7 मार्च 2025 को मंजूरी दे दी गई है। सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े सभी विभागों द्वारा अपनी-अपनी कार्ययोजना की जानकारी दी गई। बैठक में सिंहस्थ – 2028 के दौरान यातायात प्रबंधन, पार्किंग व सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन एवं प्रशिक्षण, आवास, विद्युत, जल प्रदाय एवं सीवरेज, स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई व्यवस्था, उपचार, स्नान, प्रचार-प्रसार, देव दर्शन की व्यवस्था, खाद्य आपूर्ति व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, आई.टी. इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, सी.एस.आर. सेल, टूरिज्म सर्किट के निर्माण आदि विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने हाल ही में सम्पन्न हुए प्रयागराज महाकुंभ के फील्ड विजिट … Read more

CM यादव ने राज्य नीति आयोग के विकसित मध्यप्रदेश विज़न डॉक्यूमेंट के लिए नागरिक सर्वे का शुभारंभ किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में राज्य नीति आयोग द्वारा बनाए जा रहे विकसित मध्यप्रदेश विज़न डॉक्यूमेंट के लिए नागरिक सर्वे का शुभारंभ किया। विकसित मध्यप्रदेश@ 2047 के निर्माण में आम जन की भागीदारी और उनका अभिमत जानने के उद्देश्य से नागरिक सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। इस सर्वे के लिए वेबसाइट के साथ ही एक क्यूआर कोड भी उपलब्ध करवाया गया है, जहां आमव्यक्ति भी नागरिक सर्वेक्षण में हिस्सा लेकर विभिन्न सुझाव दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण में प्रदेश के सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। हमारा यह प्रयास है कि यह विज़न डॉक्यूमेंट केवल सरकार का दस्तावेज न होकर जनता का दस्तावेज बने। इसी उद्देश्य से इसके निर्माण की प्रक्रिया में विषय-विशेषज्ञों, हितधारकों और विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ व्यापक रूप से प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं और सुझावों को सम्मिलित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश और प्रदेश का भविष्य हमारे बच्चे हैं और उनकी आकांक्षाओं को इस विज़न में स्थान देने के लिए प्रदेश के विद्यालयों में विकसित मध्यप्रदेश @2047 विषय पर निबंध प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इसके साथ ही जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जिला स्तर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों से राय मांगी गई। इस प्रक्रिया में 2.5 लाख से अधिक नागरिकों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। इसी कड़ी में आज नागरिक सर्वेक्षण का शुभारंभ किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक नागरिकों का अभिमत प्राप्त किया जा सके। यह सर्वेक्षण हमें बताएगा कि मध्यप्रदेश की जनता 2047 का मध्यप्रदेश कैसा देखना चाहती है और किन महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सर्वेक्षण में भी प्रदेश के नागरिक उत्साह से भाग लेंगे। नागरिकों की भागीदारी से एक समावेशी, विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार किया जा सकेगा। नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका विकसित मध्यप्रदेश @2047 विज़न डॉक्यूमेंट को तैयार करने में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस सर्वे में आयोग की वेबसाइट https://mprna.mp.gov.in/vision के माध्यम से भाग लिया जा सकता है। इसके लिए एक क्यूआर कोड भी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर वर्ष@2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और एक लोकतांत्रिक वैश्विक महाशक्ति बनने की परिकल्पना की गई है। अपने समृद्ध इतिहास, विविध संस्कृतियों, विशाल प्राकृतिक संसाधनों और केंद्रीय भौगोलिक स्थिति के साथ मध्यप्रदेश भारत के भविष्य को आकार देने और@2047 में विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह ज़रूरी है कि मध्यप्रदेश के नागरिक, सामूहिक रूप से एक विकसित मध्यप्रदेश @2047 के लिए एक विज़न को आकार दें- एक बड़ी और विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था विकसित हो जो सभी निवासियों को उच्चतम गुणवत्ता वाला जीवन प्रदान करे। इस सर्वे के जरिए नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि विकसित मध्यप्रदेश @2047 के लिए विज़न को आकार देने के लिए अपनी राय और विचारों को व्यक्त करें। इस विज़न के लिए नागरिकों के योगदान से मध्यप्रदेश में आने वाली पीढ़ियां लाभान्वित होंगी। नागरिक सर्वेक्षण के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा (वित्त एवं वाणिज्यिक कर), मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास और योजना आर्थिक सांख्यिकी संजय शुक्ला एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 25

उज्जैन में क्षिप्रा तट से होगी प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत 30 मार्च से 30 जून तक चलेगा अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  जल की बूंद-बूंद बचायें, जल से ही सुरक्षित होगा हमारा कल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च को गुड़ी पड़वा से होगा 90 दिवसीय जल गंगा जल संवर्धन अभियान का शुभारंभ उज्जैन में क्षिप्रा तट से होगी प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत 30 मार्च से 30 जून तक चलेगा अभियान पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभाग करेंगे सहभागिता अभियान में होगा 50 हजार नए खेत-तालाबों का निर्माण वर्षा जल भंडारण के लिए सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार पर दें विशेष ध्यान जल स्त्रोतों का रख-रखाव अब पंचायतें एवं स्थानीय जन करेंगे अभियान में प्रदेशभर में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत अभियान के क्रियान्वयन संबंधी बैठक में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण में तेजी लाने के दिये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पानी से ही जिंदगानी है। हम सभी को जल की बूंद-बूंद बचाने की जरूरत है। जल से ही हम सबका आने वाला कल सुरक्षित है। जल गंगा जल संवर्धन अभियान में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक गतिविधियां चलाई जाएं। जन सामान्य में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों और आम जनता की भागीदारी से जल संरक्षण गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगी। अभियान में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई 'जल गंगा जल संवर्धन अभियान' की बैठक ये निर्देश दिए। जल गंगा संवर्धन अभियान गुड़ी पड़वा 30 मार्च से प्रारंभ होकर 30 जून 2025 तक तीन माह लगातार चलेगा। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, अभियान से जुड़े अन्य विभागों के प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि जल गंगा जल संवर्धन अभियान से प्रदेश में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। जल संरक्षण के लिए उठाए जाएं ठोस कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत जल संचय की विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएं। उन्होंने कहा कि पौधरोपण एवं जल स्रोतों का पुनर्जीवन, गांव-गांव में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यों के अलावा सामुदायिक सहभागिता के जरिए जल संरक्षण के प्रयास किए जाएं। अभियान को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सकारात्मक अभियान की शुरुआत की जाए। ग्रीष्मकाल में शासकीय स्कूलों में जल संरक्षण की गतिविधियां आयोजित की जाएं। बच्चों के लिए पीने के पानी की टंकी की साफ-सफाई कराई जाए, जिससे विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए है। राज्य स्तरीय जल गंगा जल संवर्धन अभियान का शुभारंभ आगामी 30 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के दिन से उज्जैन की क्षिप्रा नदी के तट से किया जाएगा। लगभग 90 दिन चलने वाले 'जल गंगा जल संवर्धन अभियान' का समापन 30 जून 2025 को होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेश व्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण एक साथ मिलकर कार्य करेंगे। अभियान की थीम 'जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण' रखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब बना जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण आबादी को पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध कराने के लिए पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव में लोगों को पेयजल एवं किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। साथ ही गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को भी कोई परेशानी न हो और उन्हें पानी मिले, इसके लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं को पुनर्विकसित किया जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार भी 'खेत का पानी खेत में – गांव का पानी गांव में' के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश की ऐसी सभी नदियों का रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए, जहां जल धाराओं में मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुआ समेत अन्य जलीय जीवों को पुनर्स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि नर्मदा में डॉल्फिन मछली को छोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए। इन सभी प्रयासों से नदियों और जलीय जीवों दोनों का संरक्षण होगा। 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जल गंगा जल संवर्धन अभियान में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे। मंदिरों के निकट जल स्त्रोतों की सफाई में संतों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय एवं प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। विक्रम संवत् के पहले दिन वरुण पूजन और जलाभिषेक के साथ अभियान की विधिवत शुरुआत की जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अमृत सरोवर … Read more