आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने भारत को दी धमकी कहा ‘भारत के किसी भी दुस्साहस का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा

इस्लामाबाद पाकिस्तान में खाने के लाले भले भी पड़े हों, लेकिन भारत के खिलाफ उसका जहर उगलना लगातार जारी है। इस बार पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने भारत को धमकी दी है। उन्होंने कहा है, कि 'भारत के किसी भी दुस्साहस का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।' जनरल असीम मुनीर ने मंगलवार को रावलपिंडी में जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में 267वें कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (CCC) की बैठक के दौरान भारत को गीदड़भभकी दी है। उन्होंने भारतीय सैन्य अधिकारियों पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाया और कहा, कि "पाकिस्तानी सेना देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।" असीम मुनीर ने कहा, कि "भारतीय सेना के ये खोखले बयान उनकी बढ़ती हताशा को दर्शाते हैं और वो ऐसा बयान इसलिए दे रहे हैं, कि वो अपने आंतरिक मुद्दों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों से ध्यान भटका पाए।" उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी दुस्साहस का, राज्य की पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा, इंशाअल्लाह।" पाकिस्तान की आर्मी चीफ की गीदड़भभकी इसके अलावा, सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान जनरल असीम मुनीर ने अफगानिस्तान के तालिबान शासकों को भी धमकाने की कोशिश की है। उन्होंने काबुल के शासकों से अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए जा रहे आतंकी अभियानों के खिलाफ ठोक कार्रवाई करने की अपील की है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, कि इस सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता पर बात की गई और उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी हालिया समय में आतंकी हमलों में मौत हुई है। आपको बता दें, कि पाकिस्तान में पिछले तीन सालों में आतंकी हमलों में बेतहाशा इजाफा हुआ है और सैकड़ों जवानों और आम नागरिकों की मौत हुई है। सबसे दिलचस्प ये है, कि जिस तरह से भारत के खिलाफ आतंकवादियों को भेजने के बाद पाकिस्तान ऐसे अभियान में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है, उसी तरह से तालिबान भी पाकिस्तान में होने वाले हमलों से पल्ला झाड़ लेता है। कश्मीर पर भी पाकिस्तान आर्मी चीफ के जहरीले बोल पाकिस्तान के आर्मी चीफ सिर्फ भारत को धमकाने तक ही सीमित नहीं रहे। बल्कि उन्होंने कश्मीर को लेकर भी इस बैठक में जमकर जहर उगला और भारत पर अनर्गल आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने आरोप लगाया, कि 'भारतीय कश्मीर' में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जाता है। लेकिन, पाकिस्तान में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की नारकीय स्थिति पर उनके मुंह से एक बोल नहीं फूटे। बैठक के दौरान उन्होंने 'कश्मीर के आत्मनिर्णय के संकल्प पर पाकिस्तान के अटूट समर्थन' की बात दोहराई। उन्होंने कहा, कि "हम कश्मीरी लोगों के उनके अधिकारों के लिए वैध संघर्ष का समर्थन करने में दृढ़ हैं।" इसके अलावा, पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने बलूचिस्तान में अशांति पर भी बात की है। उन्होंने कहा, कि "बलूचिस्तान में शांति को भंग करने की किसी को भी इजाजत नहीं दी जाएगी।" हैरानी की बात ये थी, कि उन्होंने बलूचिस्तान के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप विदेशी देशों पर लगाया। जबकि, जिहाद के नाम पर पाकिस्तान की सेना ने कैसे अपने ही देश को बर्बाद कर दिया है, ये हर कोई जानता है। recent visitors 55

पडोसी देश पाकिस्तान से 400 हिंदुओं की अस्थियां भारत पहुंची, मृतकों को भारत में मिलेगा मोक्ष; हरिद्वार में होगा गंगा विसर्जन

अमृतसर  पाकिस्तान से लगभग 400 हिंदुओं की अस्थियां लेकर एक समूह भारत आया है। ये लोग इन अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित करना चाहते हैं। साथ ही महाकुंभ में प्रयागराज जाकर पवित्र स्नान करने की भी इच्छा रखते हैं। यह तीसरी बार है जब विभाजन के बाद पाकिस्तान से हिंदुओं की अस्थियां भारत लाई गई हैं। पहले 2011 और 2016 में भी अस्थियां लाई जा चुकी हैं। यह समूह सोमवार को अटारी बॉर्डर पहुंचा। दिल्ली के निगम बोध घाट पर 4 से 21 फरवरी तक अस्थियां रखी जाएंगी। 22 फरवरी को हरिद्वार के कनखल में सीता घाट पर विसर्जन होगा। इसके साथ 100 किलो दूध की आहुति भी दी जाएगी। वीजा एक्सटेंशन की उम्मीद पाकिस्तान से आए हिंदू समूह के पास लखनऊ और हरिद्वार जाने का वीजा है। वे प्रयागराज जाने के लिए वीजा एक्सटेंशन की उम्मीद कर रहे हैं ताकि महाकुंभ में पवित्र स्नान कर सकें। कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत राम नाथ मिश्र महाराज ने बताया कि पाकिस्तान में कई हिंदुओं की इच्छा होती है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की जाएं। उनके परिजन उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते हैं। ऐसे में अस्थियों को मंदिरों में कलश में सुरक्षित रखा जाता है। जब पर्याप्त संख्या में कलश इकट्ठे हो जाते हैं, तो भारत का वीजा लेने का प्रयास किया जाता है। इस तरह मृतक या उनके परिवार की अंतिम इच्छा पूरी होती है। राम नाथ मिश्र ने बताया कि वे लगभग 400 कलश लेकर आए हैं। ये अस्थियां पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित की गई हैं। 22 फरवरी को कनखल के सीता घाट पर विसर्जन दिल्ली की श्री देवोथान सेवा समिति के महासचिव विजय शर्मा और अन्य लोग अटारी बॉर्डर पर अस्थियां लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि 4 से 21 फरवरी तक अस्थियों को दिल्ली के सबसे पुराने और बड़े श्मशान घाट, निगम बोध घाट पर रखा जाएगा। लोग यहां आकर श्रद्धांजलि दे सकेंगे। 21 फरवरी को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अस्थियों को हरिद्वार ले जाया जाएगा। 22 फरवरी को कनखल के सीता घाट पर विसर्जन होगा। इसके साथ 100 किलो दूध की आहुति दी जाएगी। यह एक पारंपरिक हिंदू रस्म है। विजय शर्मा ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वे उन हिंदुओं को वीजा जारी करें जो अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार हरिद्वार में करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी मंचों के माध्यम से अपनी मांग उठाएंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि पाकिस्तानी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो। recent visitors 46

‘देश के मित्र शत्रुओं को बख्शेंगे नहीं’, 18 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत के बाद बलूचिस्तान पहुंचे सेना प्रमुख

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने शनिवार को बलूचिस्तान का दौरा किया। आतंकियों के साथ संघर्ष के दौरान 18 सैनिकों की मौत के बाद उन्होंने कहा कि देश को निशाना बनाने वाले देश के मित्र शत्रुओं का हम पता लगाकर रहेंगे। हम उनको बख्शेंगे नहीं। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पिछले 24 घंटों में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए 18 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है, जबकि 23 आतंकवादी भी मारे गए हैं। इस बीच सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने बलूचिस्तान के क्वेटा का दौरा किया। सेना ने कहा कि अधिकारियों ने सेना प्रमुख मुनीर को बलूचिस्तान में मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने कहा कि जो लोग अपने विदेशी आकाओं के आतंकी प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं। जिन्होंने शिकारी कुत्ते के साथ शिकार करने और खरगोश के साथ दौड़ने के दोहरे मापदंड की कला हासिल कर ली है। हम उनके बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। ये तथाकथित मित्र-शत्रु चाहे कुछ भी कर लें, वे हमारे गौरवशाली राष्ट्र और इसके सशस्त्र बलों से पराजित होंगे। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि और उसके लोगों की रक्षा के लिए जब भी आवश्यकता होगी और वे जहां भी होंगे हम जवाबी कार्रवाई करेंगे और उनको ढूंढ निकालेंगे। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) मुनीर ने आतंकवाद से लड़ने के लिए सेना, फ्रंटियर कोर और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बहादुर अधिकारियों और सैनिकों के साहस व दृढ़ संकल्प की भी सराहना की। उन्होंने बलूचिस्तान के लोगों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए सेना के संकल्प को फिर से दोहराया। साथ ही क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों में प्रांतीय सरकार को समर्थन देने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बलूचिस्तान बता दें कि बलूचिस्तान में बलूच चरमपंथियों द्वारा नियमित रूप से सुरक्षा बलों पर हमले किए जा रहे हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन अन्य प्रांतों की तुलना में इसके पास अधिक संसाधन होने के बावजूद यह सबसे कम विकसित है। recent visitors 44

एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार अफगानिस्तान, 15000 तालिबान लड़ाके कर रहे कूच, पाकिस्तान की आएगी शामत!

 पेशावर  भारत के पड़ोस में खूनी जंग छिड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती अब दुश्मनी में बदलने लगी है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी बदला लेने की ठान ली है। 15 हजार तालिबानी लड़ाकों पाकिस्तान की ओर तेजी से बढ़ रहे है। पाकिस्तान ने मंगलवार (24 दिसंबर) को देर रात अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया था। एयरस्ट्राइक में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की ओर बढ़े तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार तालिबान के 15000 लड़ाके काबुल, कंधार और हेरात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगती मीर अली सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के यह लड़ाके पाकिस्तान से एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार हैं। तालिबान प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। 'कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे…' वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उसका आरोप है कि एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों को भी निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा, 'अपनी मातृभूमि की रक्षा करना हमारा अधिकार है। हम इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे।' क्यों बढ़ा तनाव? टीटीपी एक अलग आतंकवादी संगठन है, लेकिन इसे अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। पाकिस्तान में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनमें वृद्धि हुई है। TTP ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम में एक जांच चौकी पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर साझा सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संगठन को किसी भी देश के खिलाफ हमले करने की इजाजत नहीं देती है। क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. अफगान और तालिबान की सैन्य ताकत कितनी? तालिबान की ताकत कितनी है कि वह अफगानिस्तान की सेना पर भारी पड़ रहा? अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कहते हैं- 'तालिबान का जल्द खात्मा होगा. उनके पास 80 हजार के करीब लड़ाके हैं और अफगानिस्तान की सेना के पास 5 से 6 लाख के बीच सैनिक. इसके अलावा अफगानिस्तान के पास वायु सेना है जो तालिबान पर भारी पड़ेगी.' हालांकि, इस दावे के बावजूद कई ऐसे फैक्ट हैं जो जमीनी स्तर पर तालिबान को मजबूत साबित कर रहे हैं. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.   recent visitors 61

सरकार के खिलाफ किया था विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान की आतंक-रोधी अदालत ने इमरान के 38 समर्थकों को किया रिहा

इस्लामाबाद. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में पिछले महीने विरोध प्रदर्शन करने पर गिरफ्तार किए गए 38 समर्थकों को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने शनिवार को रिहा कर दिया। पुलिस ने 26 नवंबर को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार किया था। यह लोग इस्लामाबाद तक मार्च निकालने जा रहे थे। पीटीआई के संस्थापक और पूर्व पीएम इमरान खान ने 13 नवंबर को लोगों से देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि लोग पार्टी के लिए चुनावी जनादेश की बहाली, हिरासत में लिए गए पार्टी सदस्यों की रिहाई और 26वें संविधान संशोधन को बदलने की मांग करें। इसके बाद पार्टी के समर्थक 26 नबंवर को सड़क पर उतरे थे। पुलिस ने रावलपिंडी में 1,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। डॉन अखबार के मुताबिक न्यायाधीश अबुल हसनत मोहम्मद जुल्करनैन ने शनिवार को 56 संदिग्धों के मामलों की सुनवाई की। पुलिस ने संदिग्धों के लिए 20 दिन की रिमांड मांगी थी। इस पर बचाव पक्ष के वकील अंसार कयानी ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शन से पहले संदिग्धों को उनके घरों से गिरफ्तार किया था। पुलिस संदिग्धों से कुछ भी बरामद नहीं करना चाहती। पुलिस ने केवल उनकी संख्या पूरी की है। इस पर न्यायाधीश ने 50 व्यक्तियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया और छह अन्य को रिहा कर दिया। पुलिस को उन्हें फिर से गिरफ्तार न करने का आदेश दिया। जियो न्यूज ने बताया कि न्यायाधीश जुल्करनैन ने देर रात गिरफ्तार किए गए 32 व्यक्तियों के मामलों सुनवाई की। पुलिस ने संदिग्धों के लिए 30 दिन की रिमांड का अनुरोध किया। जबकि बचाव पक्ष के वकील कियानी ने तर्क दिया कि पुलिस ने कोटा पूरा करने के लिए निर्दोष श्रमिकों को उनके घरों से गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश जुल्कारनैन ने अदालत में संदिग्धों की हथकड़ी खोलने का आदेश दिया और उन्हें मामलों से मुक्त कर दिया। उन्होंने पुलिस को उन्हें फिर से गिरफ्तार न करने की सख्त चेतावनी दी। न्यायाधीश ने कहा कि अगर पुलिस ने फिर से ऐसा किया, तो मैं उन्हें हथकड़ी पहना दूंगा। recent visitors 66

टी-20 मैच में जिम्बाब्वे को पाकिस्तान ने 57 रनों से हराया

बुलावायो. दमदार बल्लेबाजी के बाद पाकिस्तान ने अपनी घातक गेंदबाजी से जिम्बाब्वे को पहले टी20 मैच में 57 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने तीन टी20 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। जिम्बाब्वे के खिलाफ इस टी20 सीरीज में पाकिस्तान ने अपने सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया है। बाबर आजम, मोहम्मद रिजवान, शाहीन अफरीदी और नसीम शाह जैसे खिलाड़ी टी20 सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर के खेल में 4 विकेट के नुकसान पर 165 रन का स्कोर खड़ा किया था। पाकिस्तान के लिए बल्लेबाजी में उस्मान खान और तैयब ताहिर ने तूफानी अंदाज में 39-39 रनों का योगदान दिया। इसके अलावा सैम अयूब और इरफान खान ने भी दमदार बल्लेबाजी की। दमदार बल्लेबाजी के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम के गेंदबाजों ने भी अपना खूब कमाल दिखाया। पाकिस्तान के लिए गेंदबाजी में अबरार अहमद और सुफियान मुकीम ने सबसे ज्यादा तीन-तीन विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा हारिस रऊफ ने भी बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए अपनी टीम के लिए दो विकेट हासिल किए। वहीं जहांदाद खान के नाम एक विकेट हरा। पाकिस्तानी गेंदबाजों के इस दमदार प्रदर्शन के कारण ही जिम्बाब्वे की टीम ने 166 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 15.3 ओवर में सिर्फ 108 रन बनाकर सिमट गए। जिम्बाब्वे के लिए बल्लेबाजी में सबसे ज्यादा कप्तान सिकंदर रजा ने 39 रनों की पारी खेली। अपनी इस पारी में सिकंदर 28 गेंद का सामना करते हुए 4 चौके भी लगाए। सिकंदर रजा के अलावा जिम्बाब्वे की तरफ विकेटकीपर बल्लेबाज तदिवानाशे मरुमणि ने जरूर 33 रनों की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों के अलावा जिम्बाब्वे का और कोई भी खिलाड़ी क्रीज पर पैर नहीं जमा सके। recent visitors 94

पाकिस्तान में निकले फतवे से लोग नाराज, ‘वीपीएन के जरिए अवैध सामग्री देखना शरिया के खिलाफ’

इस्लामाबाद. पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। हालांकि, यहां सरकार, सेना और धार्मिक संगठनों की नजर इन परेशानियों को सुलझाने के बजाय लोगों की रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के खात्मे की ओर ज्यादा रही है। सरकार की तरफ से अलग अलग वक्त पर एक्स समेत कई वेबसाइटों और एप्स को बैन करने का फरमान सुनाया जाता रहा है। हालांकि, अब इन मसलों पर धार्मिक संगठन भी घुस गए हैं, जिसे लेकर पाकिस्तान की आवाम में जबरदस्त गुस्सा है। ताजा मामला पाकिस्तान के एक संवैधानिक धार्मिक संस्थान से जुड़ा है, जिसने इंटरनेट के लिए इस्तेमाल होने वाले वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) को ही इस्लाम विरोधी बता दिया और इसे लेकर फतवा जारी कर दिया। बता दें कि वीपीएन का इस्तेमाल किसी देश में प्रतिबंधित सामग्री, वेबसाइट या एप को चलाने में किया जाता है। इसे लेकर पाकिस्तान में काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (इस्लामी विचारधारा परिषद), जो कि धर्म से जुड़े शिक्षण और अन्य मुद्दों पर सरकार को सलाह भी देता है, की तरफ से फतवा लोगों को पसंद नहीं आया है। यहां तक कि डिजिटल अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ताओं और कुछ धार्मिक नेताओं ने भी इसका विरोध किया है। इस्लाम के विद्वानों ने घेरा पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक, सीआईआई के प्रमुख रघी नईमी ने कहा कि वीपीएन के जरिए इंटरनेट पर अवैध सामग्री देखना शरिया के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर एक बयान में पाकिस्तान के जाने-माने धार्मिक नेता मौलाना तारिक जमील ने कहा कि अगर वयस्क सामग्री या ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री देखना ही मुद्दा है तो वीपीएन से पहले मोबाइल फोन को भी इस्लाम विरोधी घोषित कर देना चाहिए। दूसरी तरफ पाकिस्तान के एक सांसद और शिया संगठन मजलिस वहादत मुस्लिमीन के प्रमुख अल्लमा नसीर अब्बास ने कहा कि देश को अयोग्य और भ्रष्ट उच्च वर्ग चला रहा है, जो लोगों के असल प्रतिनिधि भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे कानून बनाते हैं और फतवे का इस्तेमाल अपने मन से करते हैं। recent visitors 106