मंत्री पटेल ने कहा जलगंगा संवर्धन अभियान में पारंपरिक जल स्रोतों की पहचान कर उनके पुनर्जीवन के लिए पूर्व प्रयास करें

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जलगंगा संवर्धन अभियान में अंतर्गत पारंपरिक जल स्रोतों की पहचान कर उनके पुनर्जीवन के लिए पूर्व प्रयास करें। इस अभियान में मनरेगा योजना और ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण की ओर बढ़ती ग्राम पंचायतों के लिए योजनाओं में लचीलापन हो और जमीनी हकीकत के अनुसार नीतियों में बदलाव किया जाए। मंत्री पटेल ने मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जिला पंचायत एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के प्रशिक्षण सह कार्यशाला (ओरियंटेशन कार्यक्रम) को संबोधित किया। इस अवसर पर अपर सचिव दिनेश जैन, सीईओ एसआरएलएम श्रीमती हर्षिका सिंह, सीईओ आरआरडीए दीपक आर्य, आयुक्त मनरेगा अवि प्रसाद सहित जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत सीईओ उपस्थित थे। मंत्री पटेल ने कहा कि जल स्रोतों और नदियों के उदगम स्थलों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन स्रोतों का संरक्षण आवश्यक। सभी जनपद स्तर के अधिकारी इस दिशा में विशेष कार्य करें। उन्होंने बताया कि नरसिंहपुर जिले में मां नर्मदा के तटों की सफाई के लिए अभियान चलाकर कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार जिला स्तर पर उन्होंने नदियों से तटों की सफाई के लिए विशेष प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के भौगोलिक चुनौतियां का अध्ययन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महानगरों के समीप स्थित ग्राम एवं जनपद पंचायतों को सेमी अर्बन मॉडल पर विकसित किया जाएगा। पौधारोपण के साथ उन पौधों के संरक्षण पर भी दें ध्यान मंत्री पटेल ने कहा कि विगत दिनों आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम के अच्छे परिणाम संवाद के रूप में सामने आए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण एवं कार्यशाला में अपनी पूर्ण तैयारी के साथ आएं। हम अपने क्षेत्र के विकास के लिए अच्छे कार्य करें। उन्होंने कहा कि पंचायत और जनपद स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पर गहन चिंतन करते हुए सभी अधिकारी आत्ममूल्यांकन करें कि क्या वे अपने कार्यों से संतुष्ट हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला पाए हैं। मंत्री पटेल ने कहा कि किसी भी योजना की सफलता अकेले संभव नहीं, बल्कि टीम भावना, सहयोग और सतत संवाद से ही संभव है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की चुनौतियों से सभी अधिकारी हमें अवगत कराएं, जिससे उन चुनौतियों को ध्यान में रखकर कार्य योजनाएं बनाई जा सके। पौधरोपण जैसे अभियानों में केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और जीवित रहने की जिम्मेदारी भी जरूरी है, खासकर जल स्रोतों के पास स्थानीय प्रजाति के पौधों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ओरियंटेशन कार्यक्रम में मनरेगा के तहत जल गंगा संवर्धन अभियान में चिह्नित प्रमुख उद्देश्यों और लक्ष्यों की जानकारी दी गई। क्षेत्र मूल्यांकन, कार्यों के प्रमुख सेटों को चिह्नित करने और प्रभाव मापने को कवर करने वाले एसआईपीआरआई टूल का उपयोग करके कार्य योजना को सुविधाजनक बनाने के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। अमृत सरोवर, खेत तालाब, खोदे गए कुओं के पुनर्भरण कार्यों का तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में एमपी-एसआरएलएम, पंचायत राज, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत योजना और प्रमुख हस्तक्षेपों का रोल आउट की जानकारी साझा की गई।   recent visitors 25

राज्यपाल पटेल ने कहा तथ्य ही सत्य, तथ्यों पर आधारित दलील का कानून स्वाभाविक रूप से साथ देता

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि निष्ठा और धैर्य के साथ न्यायसंगत दलील देना लोक अभियोजक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि तथ्य ही सत्य है। तथ्यों पर आधारित दलील का कानून स्वाभाविक रूप से साथ देता है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि क्षमताओं और कार्यकुशलता को विकसित कर विभाग को और अधिक ऊँचाइयों पर पहुँचाने की चुनौती में प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान तथा अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन सहयोगी होगा। राज्यपाल पटेल सोमवार को केन्द्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (सीएपीटी) भोपाल में आयोजित सहायक लोक अभियोजन अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर 10 सहायक लोक अभियोजकों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने अकादमी परिसर में गोल्डन चंपा का पौधा भी लगाया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का वो स्तम्भ है, जिस पर नागरिकों की गहरी आस्था है। वह उसे सबसे अधिक आदर भाव से देखते हैं। न्याय व्यवस्था में अभियोजन अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, बहुआयामी है। उनकी जिम्मेदारी पीड़ितों के लिए मुकदमा चलाने तक सीमित नहीं है। कोर्ट के समक्ष सबूत पेश कर दोषी को सजा और पीड़ित को न्याय दिलाना है। अभियोजन अधिकारी के रूप में अपराध नियंत्रण में पुलिस की जांच में गुणवत्ता लाने, शासकीय विभागों को कानूनी सलाह देने, प्रकरणों में अपील करवाने और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि अभियोजन अधिकारी के रूप में उनके पास वंचित, गरीब और पीड़ित व्यक्ति अत्याचार, अनाचार के खिलाफ न्याय के उसके संघर्ष का रक्षक मानकर आएगा। उस समय उनका संवेदनशील व्यवहार, सहानुभूति और सहयोग न्याय में उसके विश्वास को मजबूत बनाएगा। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सहायक लोक अभियोजक के रूप में उनका चयन कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद हुआ है, क्योंकि सरकारी नौकरी व्यवसाय मात्र नहीं है। यह वंचितों के जीवन में खुशहाली लाकर देश, प्रदेश और समाज के विकास के द्वारा सुखद भविष्य बनाने की प्रतिबद्ध सेवा का संकल्प है। उन्होंने लोक सेवक के रूप में इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए प्रशिक्षु अधिकारियों का अभिनंदन किया। यह अपेक्षा की है कि न्याय के मंदिर में वह निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य के उच्च मानदण्ड स्थापित करेंगे। लोकायुक्त न्यायमूर्ति सत्येन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि लोक शांति राज्य का दायित्व है। लोक शांति के लिए अपराधिक न्याय प्रणाली का मजबूत होना आभारभूत आवश्यकता है। इस कार्य में लोक अभियोजकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे न्याय को सुनिश्चित करने के लिए अभियोजन अधिकारी के विहित दायित्वों का निर्वहन जितनी कुशलता और निष्ठा से करेंगे, परिणाम उतने ही अच्छे मिलेंगे। अपर मुख्य सचिव गृह जे. एन. कंसोटिया ने कहा कि नए विचारों और ऊर्जा के साथ सहायक लोक अभियोजक कार्य को नौकरी की तरह नहीं, सेवा के रुप में करें। उन्होंने न्याय व्यवस्था में लोक अभियोजकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और शुभकामनाएं दी। केन्द्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी भोपाल के निदेशक अनिल किशोर यादव ने अकादमी की स्थापना, प्रशिक्षण व्यवस्था और कार्यक्रमों का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि नवीन कानूनों को लागू होने के 40 घंटों के भीतर अकादमी में उनका प्रशिक्षण प्रारम्भ हो गया था। प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि नये कानून में लोक अभियोजकों की भूमिका काफी मजबूत हो गई है। संचालक लोक अभियोजन बी. एल. प्रजापति ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि सहायक लोक अभियोजन अधिकारियों को 45 दिवस का आधारभूत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। उन्होंने प्रशिक्षण की गतिविधियों का ब्यौरा दिया। बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कानूनों के विभिन्न आयामों के साथ योग एवं व्यायाम के सत्र भी आयोजित किए गए है। समापन सत्र में आभार प्रदर्शन संयुक्त संचालक लोक अभियोजन रामेश्वर कुम्हरे ने आभार प्रदर्शन किया।   recent visitors 34

राज्यपाल पटेल महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में हुए शामिल

विश्व के प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत भाषा से ही संभव – राज्यपाल पटेल संस्कृत शास्त्रों में करुणा संवेदना और संस्कृति का समावेश- राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में हुए शामिल भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। विश्व के प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत भाषा के माध्यम से ही संभव हो सकता है। हमारी भारतीय संस्कृति के खजाने में छुपे ज्ञान और विज्ञान को अपनी प्रतिभा से जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प समस्त उपाधी प्राप्तकर्ता विद्यार्थी लें। विद्यार्थी प्रयास करें कि वे अपने ज्ञान से वंचित लोगों का उद्धार करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि समाज और राष्ट्र की शिक्षा जगत पर बहुत सारी आशाएं टिकी हैं। आने वाले समय में भारत को विकसित बनाने में सभी विद्यार्थी अपना योगदान दें। राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन के पंडित सूर्य नारायण व्यास संकुल सभागृह में महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। वैदिक ज्ञान के महत्व को विस्तारित करने के करें प्रयास राज्यपाल पटेल ने आह्वान किया कि वैदिक ज्ञान के उपयोग, महत्व और संभावनाओं विस्तारित करने के प्रयास करें। उन्होंने कहा कि कभी यह न सोचें कि आप अकेले हैं, आप सभी संसार में ज्ञान के बल पर परिवर्तन ला सकते हैं। आज की पीढ़ी को संस्कृत और परंपराओं के ज्ञान की आवश्यकता है। अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव है। संस्कृत शास्त्रों में करुणा संवेदना और संस्कृति का समावेश है। समय और शिक्षा का सही उपयोग व्यक्ति को जीवन में बनाता है सफल राज्यपाल पटेल ने कहा कि कहा कि समय और शिक्षा का सही उपयोग ही व्यक्ति को जीवन में सफल बनाता है। राज्यपाल पटेल ने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफल होने पर अपने माता-पिता, शिक्षकों, समाज को न भूलें। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय से प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने योग, आयुर्वेद, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में विगत 35 वर्षों से अनवरत सेवारत तथा अविस्मरणीय योगदान देने के लिये महर्षि पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति आचार्य बालकृष्ण और नृत्य, नाट्यशास्त्र, संस्कृत एवं भारतीय जान परंपरा के क्षेत्र में अनवरत साधनारत, अध्यक्ष केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली डॉ. संध्या पुरेचा को महामहोपाध्याय (डी.लिट.) की मानद उपाधि से विभूषित किया। राज्यपाल पटेल ने महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय को ए-प्लस ग्रेड मिलने की शुभकामनाएं दीं। भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में दें योगदान- मंत्री परमार उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को पूरे विश्व-पटल पर लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए निरंतर परिश्रम करें। मंत्री परमार ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में वार्तालाप में अधिक से अधिक संस्कृत भाषा का उपयोग किया जाए। भारतीय संस्कृति की सभी भाषाओं का सम्मान करें और उन पर गर्व करें। शीघ्र ही प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भारत के अन्य राज्यों की भाषाओं का भी अध्यापन करने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। कुलपति को कुलगुरु नाम से संबोधित करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरु नाम से संबोधित करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कभी भी विद्या अर्जन के कार्य से मुक्त न हों। राष्ट्र निर्माण के लिए विद्या अर्जन करना,अध्ययन और अध्यापन करना अत्यंत जरूरी है। डॉ. संध्या पुरेचा ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा है। यह एक सोच है, विचार है, भाव है। इसमें हमारी भारतीय संस्कृति का मूल तत्व निहित है। हमेशा इस पर गर्व करें। कुलगुरु आचार्य विजय कुमार सीजी नेबताया कि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय को हाल ही में नेक से ए ग्रेड मिला है। यहां विद्यार्थियों के लिए ई लाइब्रेरी का निर्माण किया गया है। साथ ही कंप्यूटर प्रयोगशाला भी शुरू की गई है। विश्वविद्यालय में तीन नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। साथ ही एक करोड रुपए की लागत से अलग-अलग प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय में चल रहे हैं। विश्वविद्यालय में एनसीसी भी शुरू किया गया है और राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय को दो पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, कुल सचिव दिलीप सोनी उपस्थित रहे।   recent visitors 24

राज्यपाल, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल ‘सदाकाल गुजरात’ कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने गुजराती में कहा कि गुजराती संस्कृति में समरसता का अद्भुत भाव है। गुजरातियों में मेलजोल और आपसी भाईचारे का व्यवहार होता है। राज्यपाल पटेल रवीन्द्र भवन में अखिल भारतीय गुजराती समाज के कार्यक्रम ‘सदाकाल गुजरात’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे।     राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि “जहां बसे गुजराती, वहां बसे सदाकाल गुजरात” कहावत को गुजरातियों ने हमेशा चरितार्थ किया है। मध्यप्रदेश की संस्कृति में भी गुजराती समाज रच, बस गया है। गुजराती समाज का मध्यप्रदेश के विकास में विशेष योगदान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत को बनाने में मध्यप्रदेश की जनता के साथ गुजराती समाज लगातार सहयोग और सहभागिता कर रहा है। राज्यपाल पटेल ने केंद्र और राज्य सरकार के सामाजिक सहभागिता पर आधारित कार्यक्रमों को सफल बनाने में अखिल भारतीय गुजराती समाज संस्था के सहयोग और सक्रियता की सराहना की। गुजरात देश का ग्रोथ इंजन : मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल ने गुजराती में कहा कि गुजराती संस्कृति गर्व का प्रतीक है। आजादी के आन्दोलन में देश को गुजरात ने ही महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल के रूप में मजबूत नेतृत्व दिया है। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित और विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने गुजरात राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को अवसरों में बदल कर गुजरात को देश का ग्रोथ इंजन बनाने वाले प्रधानमंत्री मोदी की कार्यकुशलता, नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति की सराहना की। मुख्यमंत्री पटेल ने मध्यप्रदेश के गुजराती समाज को प्रदेश के विकास में हमेशा योगदान देने और “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” निर्माण में बढ़-चढकर भाग लेने का आव्हान किया। गुजरात पर ईश्वर की विशेष कृपा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि गुजरात राज्य पर ईश्वर की विशेष कृपा और आशीर्वाद है। आजादी से लेकर देश के विकास और अर्थव्यवस्था में आज गुजरात का अहम योगदान है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। गुजरात-मध्यप्रदेश की रीति-नीति-संस्कृति एक जैसी: गृह राज्य मंत्री संघवी गुजरात राज्य के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने गुजराती में कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश का इतिहास, भूगोल और संस्कृति एक समान है। दोनों राज्य के लोगों का व्यवहार, रीति-नीति और संस्कृति एक जैसी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में रहने वाला प्रत्येक गुजराती, गुजरात की संस्कृति का ब्रांड एम्बेसडर है। संघवी ने कहा कि वर्तमान और भावी पीढ़ी को गुजरात दर्शन जरूर कराए। कोरोना काल में गुजराती समाज ने की मानवता की सराहनीय सेवा : सांसद शर्मा खजुराहो सांसद वी. डी. शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में प्रदेश के गुजराती समाज ने पीड़ित मानवता की सराहनीय सेवा की है। अनेक अवसरों पर भी गुजराती समाज द्वारा मानव सेवा के उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण मिलते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में गुजराती समाज की सक्रिय भागीदारी कर रहा है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दीप प्रज्ज्वलन कर, कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उनका गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल और अखिल भारतीय गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में गुजरात के विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अध्यक्ष संजय पटेल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में एन.आर.जी. विभाग गुजरात के चेयरमेन हरीश शुक्ला, प्रदेश और अन्य राज्यों के गुजराती समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।         recent visitors 35

नए वित्तीय वर्ष में अधोसंरचना क्षेत्र में सरकार सर्वाधिक खर्च करेगी, कर्ज चुकाने, ब्याज के लिए 58 हजार करोड़

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य में अब बजट का सूखा समाप्त होने वाला है। सरकारी महकमों को खर्चे के लिए एक अप्रेल से रकम मिल जाएगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 4.21 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र में सदन से यह बजट पारित करवाकर राज्य सरकार ने राजभवन भेजा था। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही विभागों में खर्चों पर लगी रोक भी हट जाएगी। MP में 4.21 लाख करोड़ के बजट को मिली हरीझंडी मध्यप्रदेश में अब बजट का सूखा समाप्त होने वाला है। सरकारी महकमों को खर्चे के लिए एक अप्रैल से रकम मिल जाएगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 4.21 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र में सदन से यह बजट पारित करवाकर राज्य सरकार ने राजभवन भेजा था। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही विभागों में खर्चों पर लगी रोक भी हट जाएगी। नए वित्तीय वर्ष में अधोसंरचना क्षेत्र में सरकार सर्वाधिक खर्च करेगी। अधोसंरचना क्षेत्र में 70515 करोड़ रुपए इस बार खर्च करने की तैयारी है। अधोसंरचना पर ज्यादा नए वित्तीय वर्ष में अधोसंरचना क्षेत्र में सरकार सर्वाधिक खर्च करेगी। अधोसंरचना क्षेत्र में 70515 करोड़ रुपए इस बार खर्च करने की तैयारी है। जबकि कृषि क्षेत्र में 39207 करोड़ रुपए, सामाजिक स्वास्थ्य एवं महिला विकास विकास के लिए 50333 करोड़ रुपए की व्यवस्था सरकार ने की है। नगरीय एवं ग्रामीण विकास के लिए यह राशि 51074 करोड़ रुपए है। कर्ज चुकाने, ब्याज के लिए 58 हजार करोड़ कर्ज का बोझ कम करने के लिए भी सरकार ने व्यवस्था की है। इस बजट में कर्ज चुकान और ब्याज भुगतान के लिए 58 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इसमें ब्याज भुगतान के लिए 28636 करोड़ रुपए एवं कर्ज भुगतान के लिए 29980 करोड़ रुपए का प्रावधान है। यही नहीं पेंशन भुगतान के लिए 28961 करोड़ रुपए की व्यवस्था इस बजट में है। recent visitors 39

राज्यपाल पटेल ने आचार्य बालकृष्ण को राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन के तहत किए जा रहे उपचार और पुनर्वास प्रयासों के बारे में बताया

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आयुर्वेद में सिकल सेल उपचार अनुसंधान प्रयासों में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से सहयोग की अपेक्षा की है। राज्यपाल पटेल द्वारा पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के संस्थापक सचिव आचार्य बालकृष्ण से महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के दीक्षांत समारोह में चर्चा के दौरान इस विषय पर विचार विमर्श किया गया। राज्यपाल पटेल ने आचार्य बालकृष्ण को राष्ट्रीय  सिकल सेल मिशन के तहत किए जा रहे उपचार और पुनर्वास  प्रयासों के बारे में भी बताया। उल्लेखनीय है कि पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के संस्थापक सचिव बालकृष्ण को महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। recent visitors 32

राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे

भोपाल राजभवन में “कर्मयोगी बनें” विषय पर 28 मार्च 2025 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कार्यशाला में शामिल होंगे। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के. सी. गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नेतृत्व-विधाओं के साथ संयोजित कर उपयोग करने का प्रशिक्षण देना है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में कर्मयोग के सिद्धांतों के समावेश, विकास और सेवा का वातावरण बना कर सकारात्मक बदलाव लाना है। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू एवं कुलसचिव, पी.एम. एक्सीलेंस और स्वशासी कॉलेज के प्राचार्य सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक शामिल होंगे। तकनीकी सत्र “शैक्षणिक नेतृत्व और शिक्षा में कर्मयोग” विषय पर दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक होगा। इस सत्र के मुख्य वक्ता मानव संसाधन क्षमता निर्माण आयोग और केन्द्र सरकार के 'मिशन कर्मयोगी' के सदस्य प्रो. बालासुब्रमण्यम, ग्लोबल कन्वर्टर यूनाइटेड कॉन्शसनेस के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आई.आई.टी. कानपुर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. के. राधाकृष्णन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली की कुलपति प्रो. शांतिधुलीपुडी पंडित होंगे। “एक कर्मयोगी शिक्षाविद्-चुनौतियां और उसके समाधान” विषय पर चर्चा एवं संवाद सत्र का आयोजन दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगा।   recent visitors 42