कांग्रेस न्याय यात्रा से दिल्ली फतह करने की तैयारी में, जाने नई रणनीति

नई दिल्ली  दिल्ली में आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। दिल्ली के लोगों से जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए अगले महीने 'दिल्ली न्याय यात्रा' का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' की तर्ज पर होगी। 8 नवंबर को राजघाट से शुरू होकर यह यात्रा सभी विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी और 4 दिसंबर को समाप्त होगी। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव इस यात्रा का नेतृत्व करेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी इसके पहले चरण में शामिल हो सकते हैं। 'दिल्ली न्याय यात्रा' के चार चरण संविधान क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में देवेंद्र यादव ने बताया कि 'दिल्ली न्याय यात्रा' के चार चरण होंगे। "इस यात्रा के दौरान हम दिल्ली के लोगों से बातचीत करेंगे और पिछले 10 सालों से वे किन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उसे समझेंगे। पहले चरण में हम चांदनी चौक से शुरू होकर 16 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे। दूसरे चरण में 15 से 20 नवंबर तक 18 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे। तीसरे चरण में 22 से 27 नवंबर तक 16 और चौथे चरण में 29 नवंबर से 4 दिसंबर तक 20 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे। यात्रा का समापन तिमारपुर में होगा। यादव ने यह भी बताया कि प्रत्येक चरण में लगभग 250-300 कांग्रेस कार्यकर्ता चौबीसों घंटे भाग लेंगे और प्रत्येक चरण में रात में रुकने की व्यवस्था होगी। पूर्व सांसद जय प्रकाश अग्रवाल ने 'न्याय यात्रा' का लोगो और पूर्व दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने यात्रा की टी-शर्ट लॉन्च की। आप-बीजेपी पर बरसी कांग्रेस देवेंद्र यादव ने AAP सरकार पर दिल्ली को बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने दिल्ली को "एक हरे-भरे और स्वच्छ विश्व स्तरीय शहर" के रूप में विकसित किया था। दिल्ली BJP प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दिल्ली कांग्रेस अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता खो चुकी है। कपूर ने कहा, "जिन लोगों ने AAP सरकार के खिलाफ 'न्याय यात्रा' शुरू की है, उन्होंने छह महीने पहले ही कांग्रेस-AAP गठबंधन का जमकर समर्थन किया था। दिल्ली की जनता अब अच्छी तरह जानती है कि कांग्रेस AAP की 'बी-टीम' बन गई है।" recent visitors 85

मैं जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की हम कड़ी निंदा करता हूं: खरगे

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। श्री खरगे ने सोमवार को कहा, ‘‘मैं जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की हम कड़ी निंदा करता हूं जिसमे कई श्रमिक और एक डॉक्टर मारे गए हैं। लक्षित हिंसा का यह अमानवीय और घृणित कृत्य से भारत जम्मू-कश्मीर में प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण से पीछे नहीं हटेगा। एक राष्ट्र के रूप में, हम आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक साथ हैं। पीड़ितों के परिवारों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदना। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।” श्री गांधी ने कहा, ‘‘गांदरबल में आतंकवादी हमले में एक डॉक्टर और प्रवासी मज़दूरों समेत कई लोगों की हत्या बहुत ही कायरतापूर्ण और अक्षम्य अपराध है। सभी शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की आशा करता हूं।” उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादियों का यह दुस्साहस जम्मू-कश्मीर में निर्माण का क्रम और लोगों का विश्वास कभी नहीं तोड़ पाएगा। आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में पूरा देश एकजुट है।” श्रीमती वाड्रा ने कहा, ‘‘जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में कायराना आतंकी हमले में पांच मजदूरों समेत छह नागरिकों की हत्या अत्यंत निंदनीय है। निर्दोष नागरिकों की हत्या करके आम जनता के बीच हिंसा और दहशत फैलाने जैसे कृत्य मानवता के विरुद्ध अपराध हैं। इसके खिलाफ पूरा देश एकजुट है। शोक- संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना।”   recent visitors 92

देवगुराडिया में रावण के दस सिरों के स्थान पर राहुल गांधी-प्रियंका लगाकर दहन करने पर कांग्रेस नेता भड़क गए

इंदौर  इंदौर के देवगुराडिया में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के फोटो रावण के दस सिरों के स्थान पर लगाकर दहन करने पर कांग्रेस नेता भड़क गए। रावण दहन के दौरान बने वीडियो वायरल होने के बाद रविवार को बड़ी संख्या में कांग्रेसी पुलिस थाने पहुंचे। युकां जिला अध्यक्ष दौलत पटेल ने आरोप लगाया कि दशहरा उत्सव समिति में भाजपा नेता शामिल थे और उन्होंने जानबूझकर यह कृत्य किया। इंदौर ग्रामीण क्षेत्र के खुड़ैल थाना में दोपहर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देवगुराडिया दशहरा समिति पर एफआइआर की मांग की है। हालांकि पुलिस ने अभी तक के दर्ज नहीं किया है। ओवैसी-ममता के चेहरे रावण के वायरल वीडियो में कांग्रेस नेताओं के साथ ही पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी के चेहरे भी लगाए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इंदौर. इंदौर के देवगुराडिया में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के फोटो रावण के दस सिरों के स्थान पर लगाकर दहन करने पर कांग्रेस नेता भड़क गए। रावण दहन के दौरान बने वीडियो वायरल होने के बाद रविवार को बड़ी संख्या में कांग्रेसी पुलिस थाने पहुंचे। युकां जिला अध्यक्ष दौलत पटेल ने आरोप लगाया कि दशहरा उत्सव समिति में भाजपा नेता शामिल थे और उन्होंने जानबूझकर यह कृत्य किया। इंदौर ग्रामीण क्षेत्र के खुड़ैल थाना में दोपहर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देवगुराडिया दशहरा समिति पर एफआइआर की मांग की है। हालांकि पुलिस ने अभी तक के दर्ज नहीं किया है। ओवैसी-ममता के चेहरे रावण के वायरल वीडियो में कांग्रेस नेताओं के साथ ही पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी के चेहरे भी लगाए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। recent visitors 109

राहुल गांधी के भाषणों का असर कांग्रेस को मिली जम्मू और हरियाणा में हार!

नई दिल्ली आजकल मीडिया में इस बात के बहुत चर्चे थे कि कांग्रेस नेता राहुल का मेकओवर हो गया है. राहुल गांधी की बातें देश की जनता प्रधानमंत्री से भी अधिक सुन रही है. काग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने तो बकायदा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी हैंडल के आंकड़ों की तुलना करते हुए इसे साबित भी किया था. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि राहुल गांधी आजकल कुछ भी बोलते हैं सभी नैशनल टीवी चैनल उनको कवर करते हैं क्योंकि जनता उन्हें सुनना चाह रही है. पर जब आप बेवजह की बातें करने लगते हैं तो जनता के लिए वे बातें ओवरडोज हो जातीं हैं. क्या ऐसा ही कुछ राहुल गांधी के साथ भी हुआ है? क्योंकि जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसा एक मजबूत साथी का समर्थन होने के बावजूद कांग्रेस का वहां से सफाया हो गया है.कांग्रेस को जम्मू में केवल एक मुस्लिम प्रत्याशी वाली सीट ही मिल सकी है. जबकि नेशनल कान्फ्रेंस ने जम्मू की कई सीटें हिंदू प्रत्याशी खडे़ कर भी जीत लिए हैं. यहां तक कि जम्मू कश्मीर बीजेपी प्रेसिडेंट रविंद्र रैना को भी हराने वाला नेशनल कॉन्फेंस का एक हिंदू प्रत्याशी ही है. यहां हिंदू प्रत्याशी और मुस्लिम प्रत्याशी का नाम इसलिए लिया जा रहा है ताकि यह बताया जा सके वोटों का ध्रुवीकरण कम से कम जम्मू में हिंदू मुस्लिम के नाम पर नहीं हुआ है. इसके बावजूद जम्मू में कांग्रेस की दाल नहीं गली है. 1- हरियाणा और जम्मू में नहीं चला राहुल गांधी की बातों का जोर राहुल गांधी ने इस बार के चुनावों में बीजेपी में चुनाव प्रचार के महारथी कहे जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी से भी कहीं अधिक रैलियां , सभाएं और रोड शो किया. पर जाट बेल्ट तक में कांग्रेस की हालत खराब रही. कांग्रेस की लहर के बावजूद बीजेपी अगर हरियाणा में तीसरी बार पूरे बहुमत के साथ अगर सरकार बनाने जा रही है तो इसका मतलब है कि राहुल गांधी का करिष्मा काम नहीं किया है. उनके साथ उनकी बहन प्रियंका भी पूरी तरह लगी हुईं थीं. जम्मू में भी अब तक की सबसे बड़ी हार कांग्रेस को देखने को मिली है. कांग्रेस जम्मू कश्मीर में 32 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिनमें से 10 सीटों पर मुस्लिम कैंडिडट उतारे और 22 हिंदुओं को टिकट दिया.पर जम्मू में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली. जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को कुल 42 सीटों पर जीत मिली है जिसमें कुछ सीटें उसने जम्मू में हिंदू कैंडिडेट खडा़ कर भी जीत लिया है. पर कांग्रेस जम्मू से साफ हो गई है. कश्मीर में उसे 6 सीटें मिलीं हैं पर वो सभी मु्स्लिम कैंडिडेट वाली सीटें आईं हैं.मतलब साफ है कि कांग्रेस की स्थिति बीजेपी से तो खराब रही है नेशनल कॉन्फ्रेंस से भी खराब रहीं. इसका एक और मतलब निकलता है कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस को मिली सीटें भी नेशनल कॉन्फ्रेंस की बदौलत ही आईं हैं. जाहिर है कि हरियाणा और जम्मू में कांग्रेस को मिली हार से राहुल गांधी के भाषणों और मुद्दों को तो टार्गेट किया जाएगा. 2-जाति जनगणना का मुद्दा क्या उल्टा पड़ गया हरियाणा में हरियाणा में जिस तरह कांग्रेस को हार मिली है और जिस तरह बीजेपी के प्रत्य़ाशियों को जाट सीटों पर वोट मिले हैं उसका सीधा मतलब है कि जाति जनगणना का मुद्दा नहीं चला है. हरियाणा में ओबीसी वोटर्स ने बीजेपी का साथ पूरी ईमानदारी के साथ दिया है.विनेश फोगाट का मुकाबला बीजेपी के एक ओबीसी कैंडिडेट से था. बीजेपी को भी ऐसा लग रहा था कि योगेश बैरागी कहीं विनेश के सामने टिक नहीं रहे हैं. इसलिए ही शायद बीजेपी ने यहां कम ध्यान दिया. पर विनेश के मुकाबले योगेश को केवल 6 हजार वोट कम मिले हैं. ये बताता है कि विनेश को पिछड़ी जातियों के वोट नहीं मिले.मतलबा साफ है कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय की बातें हरियाणा की जनता को हजम नहीं हुईं. 3-जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी कभी नहीं भाएगी कांग्रेस के कोर वोटर्स को राहुल गांधी अपने गुरु ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा की इच्छानुसार कई बार देश की संपत्तियों के बंटवारे की बात करते रहे हैं. इसके साथ ही जाति जनगणना के पीछे उनका इरादा है कि देश में अमीरों की संपत्ति का बंटवारा किया जा सके. वैसे तो हरियाणा में उन्होंने इस मुद्दे पर जोर नहीं दिया नहीं तो जाटों का वोट भी कांग्रेस को नहीं मिलता . क्योंकि हरियाणा में जाटों के पास सबसे अधिक जमीन है.वह कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी जमीन का बंदरबांट हो.दरअसल राहुल गांधी की ये विचारधारा उन्हें वामपंथ के नजदीक ले जाती है. जबकि वामपंथी विचारधार अब पूरी दुनिया से खत्म हो चुकी है. 4-संविधान बचाओ- आरक्षण बचाओ नारे की हवा निकली हरियाणा में जिस तरह दलितों ने बीजेपी या अन्य को वोट दिया है उससे नहीं लगता है कि अब संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ का मुद्दा रह गया है. हो सकता है कि दलितों का वोट बीजेपी को नहीं मिला हो. पर यह भी तय है कि कम से कम कांग्रेस को नहीं मिला है. लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में दलित वोटों जरूर विपक्ष को गए थे. हरियाणा के विश्वेषण से ऐसा लगता है कि दलित वोटों पर प्रभाव इस नारे का नहीं था. इसके लिए यूपी चुनावों की फिर से विश्लेषण करना होगा. 5-अडानी और अंबानी के खिलाफ एजेंडा राहुल गांधी के भाषणों में अब भी अडानी और अंबानी छाए रहते हैं. बार-बार वो याद दिलाते हैं कि राम मंदिर के उद्घाटन के समय अडानी-अंबानी और अमिताभ बच्चन दिखे. गरीब , दलित और पिछड़े नहीं दिखे. वो अपने भाषणों में साबित करते हैं कि पीएम मोदी जो भी करते हैं वो अपने दोस्तों अडानी और अंबानी के लिए करते हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस सरकारें अडानी- अंबानी के साथ मधुर रिश्ते रखती हैं इसका जवाब वो नहीं देते. हरियाणा में चुनाव के दौरान उन्होंने एक दिन कहा कि अंबानी के घर शादी में कौन गया था. आपने देखा वहां मोदी गए थे पर मैं नहीं गया था.जाहिर है कि अडानी-अंबानी की बातें लोगों को अब ओवरडोज हो रही हैं.     recent visitors 76

सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में समन जारी

मुंबई  महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक अदालत ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में उन्हें समन जारी किया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक, दीपाली परिमल केडुस्कर ने गांधी को इस संबंध में एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि ‘‘एक देशभक्त व्यक्ति के खिलाफ दिया गया बयान प्रथम दृष्टया अपमानजनक प्रतीत होता है।’’ गांधी को मामले की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से या अपने कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होना होगा, जिस पर अभी निर्णय होना बाकी है। शिकायतकर्ता एक गैर सरकारी संगठन के निदेशक हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने हिंगोली में गांधी द्वारा संबोधित एक संवाददाता सम्मेलन और नवंबर 2022 में कांग्रेस नेता द्वारा दिए गए भाषण को सुना और देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने इन दोनों मौकों पर अपने भाषण और दृश्य चित्रणों से वीर सावरकर की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया और समाज में उनकी छवि को धूमिल करने की भी कोशिश की। शिकायतकर्ता के अनुसार, गांधी ने कहा कि ‘‘सावरकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिन्न हैं’’ और यह टिप्पणी मानहानिकारक प्रतीत होती है। शिकायतकर्ता ने कहा कि गांधी ने इसके बाद आरोप लगाया कि ‘‘सावरकर ने हाथ जोड़कर रिहाई के लिए प्रार्थना की और उन्होंने ब्रिटिश सरकार के लिए काम करने का वादा भी किया।’’ अदालत ने सभी दलीलों पर गौर करने के बाद कहा, ‘‘रिकॉर्ड में प्रस्तुत साक्ष्यों पर गौर करने पर, अभियुक्त द्वारा एक देशभक्त व्यक्ति के खिलाफ दिए गए बयान प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होते हैं।’’ मजिस्ट्रेट ने कहा कि मामले में कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार हैं। इसके बाद अदालत ने गांधी के खिलाफ मानहानि और जानबूझकर अपमानित करने से संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया।     recent visitors 93

साल के अंत तक देश की 50 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, राहुल, अखिलेश, शिवराज के गढ़ किसके साथ, सियासी हलचल तेज

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव खत्म हुए अभी कुछ महीने ही बीते हैं कि अब उपचुनाव का दौर शुरू होने वाला है। इस साल के अंत तक देश की 50 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इनमें कई सीटें लोकसभा की हैं तो ज्यादातर विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। ये सीटें उन विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई हैं, जो अब सांसद बन चुके हैं या फिर दो जगहों से लड़ने के चलते एक लोकसभा सीट खाली की है। माना जा रहा है कि इन सीटों पर हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और झारखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव के साथ ही वोटिंग कराई जा सकती है। उत्तर प्रदेश में ही 10 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जिनमें से एक सीट अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली मैनपुरी की करहल है। इसके अलावा अयोध्या के सांसद बने अवधेश प्रसाद की सीट मिल्कीपुर भी है। वह अब तक यहीं से विधायक थे। गाजियाबाद, कुंदरकी जैसी सीटों पर भी चुनाव होना है। वहीं मध्य प्रदेश में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की विधानसभा सीट बुधनी में भी चुनाव होगा। अब वह विदिशा सीट से सांसद बन चुके हैं। वहीं कर्नाटक में बसवराज बोम्मई, एचडी कुमार स्वामी, बिहार में जीतन राम मांझी और सिक्किम में सीएम प्रेम सिंह तमांग की छोड़ी हुई सीटों पर भी मतदान होगा। बंगाल की भी 6 सीटों पर उपचुनाव, बिहार और पंजाब में 4-4 उपचुनाव में सबसे ज्यादा यूपी की सीटें हैं तो दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है। यहां 6 सीटों पर उपचुनाव होगा। इसेक अलावा असम और राजस्थान में 5-5 सीटों पर वोटिंग होगी। बिहार और पंजाब में 4-4 सीटों पर उपचुनाव होना है। बता दें कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भी रायबरेली और वायनाड सीट से लड़े थे। उन्होंने चुनाव के बाद रायबरेली से सांसद बने रहने का फैसला लिया और वायनाड से इस्तीफा दे दिया। अब वायनाड से उनकी बहन प्रियंका गांधी चुनाव लड़ रही हैं। नियम के अनुसार किसी भी सीट को 6 महीने से ज्यादा खाली नहीं रका जा सकता। ऐसे में ज्यादातर सीटों पर नवंबर तक मतदान करा लिया जाएगा। यूपी में 10 सीटों पर कांग्रेस और सपा दिखाना चाहेंगे ताकत इसी साल महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में असेंबली इलेक्शन का प्लान है। संभावना है कि अलग-अलग समय पर राज्यों के साथ ही विधानसभा और लोकसभा के उपचुनाव भी करा लिए जाएं। कई राज्यों में तो उपचुनाव को भी सरकार के लिए जनादेश के तौर पर माना जा रहा है। यूपी में भाजपा को लोकसभा चुनाव में झटका लगा था। ऐस में अब 10 विधानसभा सीटों पर जीत के जरिए वह ताकत दिखाना चाहेगी। वहीं सपा और कांग्रेस एक बार फिर अपनी ताकत को दिखाना चाहेंगे। recent visitors 93

राहुल, अखिलेश, शिवराज के गढ़ किसके साथ-साल के अंत तक देश की 50 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, सियासी हलचल तेज

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव खत्म हुए अभी कुछ महीने ही बीते हैं कि अब उपचुनाव का दौर शुरू होने वाला है। इस साल के अंत तक देश की 50 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इनमें कई सीटें लोकसभा की हैं तो ज्यादातर विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। ये सीटें उन विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई हैं, जो अब सांसद बन चुके हैं या फिर दो जगहों से लड़ने के चलते एक लोकसभा सीट खाली की है। माना जा रहा है कि इन सीटों पर हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और झारखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव के साथ ही वोटिंग कराई जा सकती है। उत्तर प्रदेश में ही 10 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जिनमें से एक सीट अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली मैनपुरी की करहल है। इसके अलावा अयोध्या के सांसद बने अवधेश प्रसाद की सीट मिल्कीपुर भी है। वह अब तक यहीं से विधायक थे। गाजियाबाद, कुंदरकी जैसी सीटों पर भी चुनाव होना है। वहीं मध्य प्रदेश में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की विधानसभा सीट बुधनी में भी चुनाव होगा। अब वह विदिशा सीट से सांसद बन चुके हैं। वहीं कर्नाटक में बसवराज बोम्मई, एचडी कुमार स्वामी, बिहार में जीतन राम मांझी और सिक्किम में सीएम प्रेम सिंह तमांग की छोड़ी हुई सीटों पर भी मतदान होगा। बंगाल की भी 6 सीटों पर उपचुनाव, बिहार और पंजाब में 4-4 उपचुनाव में सबसे ज्यादा यूपी की सीटें हैं तो दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है। यहां 6 सीटों पर उपचुनाव होगा। इसेक अलावा असम और राजस्थान में 5-5 सीटों पर वोटिंग होगी। बिहार और पंजाब में 4-4 सीटों पर उपचुनाव होना है। बता दें कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भी रायबरेली और वायनाड सीट से लड़े थे। उन्होंने चुनाव के बाद रायबरेली से सांसद बने रहने का फैसला लिया और वायनाड से इस्तीफा दे दिया। अब वायनाड से उनकी बहन प्रियंका गांधी चुनाव लड़ रही हैं। नियम के अनुसार किसी भी सीट को 6 महीने से ज्यादा खाली नहीं रका जा सकता। ऐसे में ज्यादातर सीटों पर नवंबर तक मतदान करा लिया जाएगा। यूपी में 10 सीटों पर कांग्रेस और सपा दिखाना चाहेंगे ताकत इसी साल महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में असेंबली इलेक्शन का प्लान है। संभावना है कि अलग-अलग समय पर राज्यों के साथ ही विधानसभा और लोकसभा के उपचुनाव भी करा लिए जाएं। कई राज्यों में तो उपचुनाव को भी सरकार के लिए जनादेश के तौर पर माना जा रहा है। यूपी में भाजपा को लोकसभा चुनाव में झटका लगा था। ऐस में अब 10 विधानसभा सीटों पर जीत के जरिए वह ताकत दिखाना चाहेगी। वहीं सपा और कांग्रेस एक बार फिर अपनी ताकत को दिखाना चाहेंगे। recent visitors 116