रेलवे दिल्ली-मुंबई रूट पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बेलास्ट-लेस ट्रैक बिछा रहा, 220 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से होगी टेस्टिंग

भोपाल इस साल के अंत तक भोपाल और रानी कमलापति (आरकेएमपी) रेलवे स्टेशनों पर बेलास्ट-लेस ट्रैक (बिना गिट्‌टी का ट्रैक) बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इस ट्रैक पर ट्रेनें 220 किमी प्रति/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। अभी ट्रेनों की ​स्पीड 130 किमी/घंटा है। रेलवे दिल्ली-मुंबई रूट पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बेलास्ट-लेस ट्रैक बिछा रहा है। भोपाल इसी रूट में है इसलिए यहां भी ट्रैक अपडेट किया जा रहा है। भोपाल मेन स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1, 2 और 3 से लेकर यार्ड तक, संत हिरदाराम नगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म 1 और 2, और नर्मदापुरम, विदिशा व हरदा स्टेशनों के प्लेटफॉर्म 1 व 2 से यार्ड तक इस ट्रैक को बिछाने की योजना है। हाल ही में आरडीएसओ ने इस ट्रैक पर 220 किमी की स्पीड से ट्रेन चलाने की मंजूरी दी है। ट्रेनों में कंपन नहीं होता, गति बढ़ती है, सफर आरामदायक सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के अनुसार- इन ट्रैक्स को ज्यादा मेंटेनेंस की जरूरत नहीं होती है। ट्रैक में कंपन नहीं होता इसलिए स्पीड बढ़ती है और सफर अधिक आरामदायक होता है। ऐसे ट्रैक 50-60 साल तक टिकाऊ रहते हैं। ट्रैक में गिट्टी की जगह कंक्रीट व डामर जैसी ठोस सामग्री लगती है।   recent visitors 60

ब्रिटिश फूड व्लॉगर भारतीय रेलवे में फूड डिलेवरी की तेजी को लेकर काफी आश्चर्य में दिखा, बोला – ब्रिटेन के इस मामले में भारत से सीख लेना चाहिए

मुंबई सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ न कुछ वीडियोज वायरल होता ही रहतो हैं। कभी यह वीडियोज लोगों की जिज्ञासा का कारण बनते हैं तो कभी लोगों के लिए एक मनोरंजन का साधन बन जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक ब्रिटिश फूड व्लॉगर भारतीय रेलवे में फूड डिलेवरी की तेजी को लेकर काफी आश्चर्य में दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं वह यह भी कहता नजर आता है कि ब्रिटेन के इस मामले में भारत से सीख लेना चाहिए। सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर जॉर्ज बकले नाम का यह इन्फ्लुएंसर बताता है कि वह भारत की यात्रा पर है और यहां पर उसने एक बहुत ही अजीब चीज देखी है। वह बताता है हमें वाराणसी जाते समय भूख का अहसास हुआ तो हमने जोमैटो से कानपुर सेंट्रल पर खाना लाने का ऑर्डर कर दिया। जब हम कानपुर सेंट्रल पर पहुंचे तो हमारा खाना वहां आ गया। इसके लिए हमें केवल 345 रुपए देने पड़े यह बहुत ही बेहतर बात है। बकले ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया उसके कैप्शन में उन्होंने लिखा की ब्रिटेन को इससे सीख लेने की जरूरत है। आपको बता दें कि ट्रेन में यात्रा करते समय आप आईआरसीटीसी के मान्यता प्राप्त किसी भी एप के जरिए अपना खाना ऑर्डर कर सकते हैं जो आपके द्वारा बताए गए स्टेशन पर ट्रेन के रुकने के समय पर पहुंच जाएगा। इसके लिए आपको बस दस अंकों का पीएनआर नंबर देना होगा। बकले के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपने-अपने हिसाब से प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, "यह तो कुछ भी नहीं है एक बार तो मैंने अपनी ट्रेन यात्रा के दौरान पिज्जा ऑर्डर किया था और वह हमारे पास गरमागरम पहुंचा था।" एक और यूजर ने लिखा कि फूड डिलेवरी कोई रॉकेट साइंस नहीं है.. लेकिन तब भी हम कर लेते हैं। एक और यूजर ने लिखा कि यह देखकर अच्छा लगा कि आप भारत में अपना अच्छा समय बिता रहे हैं और यहां के कल्चर को सराह रहे हैं। हां, कभी-कभी कुछ गलत काम हो जाते हैं लेकिन वह दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं…आपका कंटेंट बहुत अच्छा है। recent visitors 53

पहाड़ों के बीच प्रगति का सेतु ‘अंजी खड्ड’

श्रीनगर जब घाटियां गहरी होती हैं और पहाड़ रास्ता रोकते हैं, तब इंसान के सपने ऊंचे हो जाते हैं। कश्मीर के दिल तक पहुंचने के इन्हीं ऊंचे सपनों ने फिर से एक नई कहानी को जन्म दिया है। ये कहानी एक पुल की है जो सिर्फ लोहे और केबल से नहीं, हिम्मत और हुनर से भी बना है। ये कहानी है भारत के पहले केबल-स्टेड रेलवे ब्रिज- अंजी खड्ड ब्रिज की जो जम्मू-कश्मीर की चुनौतीपूर्ण घाटियों के बीच, अंजी नदी की गहरी खाई को पाटता है। कटरा और रियासी के बीच कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देने जा रहा यह अद्भुत संरचना भारतीय इंजीनियरिंग के आत्मविश्वास और कौशल की मिसाल है। यह ब्रिज उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कटरा-बनिहाल रेल खंड में बनाया गया है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ जैसी सभी सीमाओं को पार कर यह ब्रिज घाटी को देश के बाकी हिस्सों से और मजबूती के साथ जोड़ रहा है। आकर्षक डिजाईन के साथ बने इस ब्रिज का निर्माण कार्य सिर्फ 11 महीने में ही पूरा कर लिया गया है जो नदी तल से 331 मीटर ऊंचाई पर स्थित है जबकि नीव से 193 मीटर ऊंचा एक मजबूत सेंट्रल पायलन पर टिका हुआ है, जो इसकी पूरी संरचना को संतुलन में रखता है। अंजी खड्ड ब्रिज, चिनाब ब्रिज के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज भी है। इस ब्रिज को 96 केबलों के सहारे बनाया गया है जिनका कुल वजन 849 मीट्रिक टन और  कुल लंबाई 653 किलोमीटर है। 725 मीटर लम्बे इस ब्रिज की संरचना में 8,215 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। मौजूदा आवश्यकताओं के मद्देनजर बने इस ब्रिज से जम्मू-कश्मीर के विकास के तार जुड़े हुए हैं। यह ब्रिज घाटी के दूर-दराज इलाकों मेंं बसे गांवों और कस्बों का बड़े शहरों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करता है जिससे विकासशील जगहों पर चिकित्सा, शिक्षा और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता आसान हो जाएगी।  बेहतर कनेक्टिविटी के वजह से स्थानीय लोगों लिए रोज़गार के नए अवसरो का सृजन होगा साथ ही घाटी में व्यापार और पर्यटन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। ●    पुल की कुल लंबाई: 725 मीटर ●    नदी के तल से ऊंचाई: 331 मीटर ●    सेंट्रल पायलन की ऊंचाई: 193 मीटर ●    केबल की संख्या: 96 ●    केबल का कुल वजन: 849 मीट्रिक टन ●    केबल की कुल लंबाई: 653 किलोमीटर ●    निर्माण में कुल स्टील का इस्तेमाल:  8,215 मीट्रिक टन recent visitors 50

वित्तीय वर्ष 2024-25 में पमरे की प्रमुख उपलब्धियां, नई रेललाइन निर्माण, स्क्रैप बिक्री, संड्री आय एवं ट्रैक रिन्यूवल में सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्ज हुई

  भोपाल  महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय के निरंतर मॉनेटरिंग के चलते पश्चिम मध्य रेल ने बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान इन्फ्रास्ट्रचर कमीशनिंग, नई लाइनें बिछाने/दोहरीकरण/तिहरीकरण, स्क्रैप बिक्री, ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू, माल ढुलाई और इसके साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी के एकीकरण सहित विभिन्न श्रेणियों में शानदार उपलब्धियां हासिल कीं।     बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान माननीय रेलमंत्री जी द्वारा संपूर्ण भारतीय रेलवे पर किये गए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु पश्चिम मध्य रेल को लेखा एवं वित्त प्रबंधन शील्ड और कार्मिक प्रबंधन शील्ड पश्चिम मध्य रेल महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय को प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त पश्चिम मध्य रेल के एक अधिकारी एवं एक कर्मचारी को भी व्यक्तिगत रूप से अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है I       माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा वर्ष 2024 के दौरान पश्चिम मध्य रेल की लगभग 4880 करोड़ लागत की 18 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है। इसके साथ ही लोकल उत्पाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से "वन स्टेशन वन प्रोडक्ट" स्टॉल एवं स्टेशनों पर सस्ती एवं जेनरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र" संचालित किये जा रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में पमरे की प्रमुख उपलब्धियां नीचे दी गई हैं :- 1) स्क्रैप बिक्री:- पमरे स्क्रैप सामग्री जुटाकर और ई-नीलामी के माध्यम से इसकी बिक्री करके संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने के लिए हरसंभव प्रयास करती है। पमरे द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 477 करोड़ 66 लाख रुपये की स्क्रैप बिक्री की गई है। रेलवे बोर्ड द्वारा रूपये 320 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसकी तुलना में रूपये 157 करोड़ 66 लाख (49.27 प्रतिशत) अधिक की स्क्रैप बिक्री की गई है। पश्चिम मध्य रेल की अब तक की सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्ज की हैं। 2) नॉन फेयर रेवन्यू (संड्री आय):– पमरे ने संड्री आय के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 229 करोड़ 98 लाख रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 330 करोड़ 87 लाख रुपये का नॉन फेयर रेवन्यू हासिल किया है जो लगभग 44 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि है। यह वृद्धि अब तक की सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड उपलब्धि दर्शाती हैं। 3) ट्रैक रिन्यूवल:- पमरे में ट्रैक की क्षमता को बढ़ाने के लिए एवं सरंक्षा में वृद्धि करने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2023-24 में 316 किलोमीटर ट्रैक रिन्यूवल की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के 452 किलोमीटर ट्रैक का रिन्यूवल कार्य किया,जो 43 प्रतिशत अधिक है। पश्चिम मध्य रेलवे का अब तक का सर्वश्रेष्ठ ट्रैक रिन्यूवल कार्य है। 4) कैपेक्स:– वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पश्चिम मध्य रेल का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) 9699 करोड़ 54 लाख रुपये की शत-प्रतिशत उपयोगिता साबित हुई है। जबकि पश्चिम मध्य रेलवे को कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) 9631 करोड़ 30 लाख रूपये ग्रांट हुआ था। 5) यात्री यातायात एवं अन्य कोचिंग ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू:- पमरे ने यात्री यातायात के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 2335 करोड़ 21 लाख रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 2431 करोड़ 15 लाख रुपये का ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू हासिल किया है जो लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह अन्य कोचिंग आय के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 163 करोड़ 39 लाख रुपये की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 174 करोड़ 81 लाख रुपये का ऑर्जिनेटिंग रेवन्यू हासिल किया है जो लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। यह दोनों वृद्धि अब तक की अधिकतम उपलब्धि दर्शाती हैं। ट्रेन यात्री सुविधाओं और व्यवसाय विकास इकाइयों (बीडीयू) के ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण एवं कार्यकलापों के साथ-साथ अत्‍यंत प्रभावकारी नीति निर्माण से रेल राजस्व बढ़ाने में काफी मदद मिली है। 6) पीओएच (पीरियोडिक ओवर हॉलिंग):– पमरे द्वारा कोचों और वैगनों का रूटीन ओवर हॉलिंग करके अधिक से अधिक पीओएच (पीरियोडिक ओवर हॉलिंग) आउटटर्न किया। सवारी डिब्बा पुर्ननिर्माण कारखाना (सीआरडब्लूएस) भोपाल द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1198 कोचों की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 1369 कोचों का अनुरक्षण कर आउटटर्न किया, जो  14 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार वर्कशॉप (डब्लूआरएस) कोटा कारखाना द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 6720 वैगनों  की तुलना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 6938 वैगनों की मरम्मत करके आउटटर्न किया है, जो 3 प्रतिशत अधिक है। 7) इन्फ्रास्ट्रचर कमीशनिंग (नई लाइन/दोहरीकरण/तिहरीकरण) के मामले में वित्तीय वर्ष  2024-25 के दौरान कुल 174 किलोमीटर का नवनिर्मित रेलवे ट्रैक कमीशन किया गया है जिनमें कि 75 किमी. नई रेल लाइन कार्य, 47 किमी दोहरीकरण एवं 52 किमी. तिहरीकरण के कार्य शामिल हैं। पश्चिम मध्य रेल ने नई रेललाइन अधोसरंचना कार्य में अब तक की सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्ज हुई है।   8) फुट ओवर ब्रिज (एफओबी):- यात्रि‍यों/पैदल यात्रि‍यों को आवागमन में सहूलियत हेतु स्टेशनों पर एक प्लेटफॉर्म से दुसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 37 एफओबी का निर्माण किया गया।   9) रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी):– सड़कों पर बनी पटरियों को पार करने में जनता की सहूलियत के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 33 रोड ओवर ब्रिज एवं 62 रोड अंडर ब्रिज / सीमित ऊंचाई सबवे (एल.एच.एस.) निर्माण कराए गए। 10) समपार फाटक हटाए गए:- समपार फाटकों (लेवल क्रॉसिंग या एलसी गेट) पर लोगों की सुरक्षा चिंता का प्रमुख विषय रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 30 समपार फाटकों को हटाया गया। 11) लिफ्ट:- ‘सुगम्य भारत अभियान’ के तहत रेल प्लेटफॉर्म पर दिव्यांगजनों, वृद्धों और बच्चों की आवाजाही को सुगम्‍य बनाने के लिए पमरे में रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्केलेटर लगा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 11 लिफ्ट लगाए गए। 12) ‘‘अमृत स्टेशन योजना‘‘ के तहत, पश्चिम मध्य रेल के कुल 53 रेलवे स्टेशनों का उन्नयन कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत जबलपुर मंडल के 15 स्टेशन, भोपाल मंडल के 15 एवं कोटा मंडल के 17 स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा जबलपुर, सतना, भोपाल, बीना, कोटा एवं डकनिया तलाव रेलवे स्टेशनों के मेजर अपगे्रडेशन के कार्य भी शामिल हैं। इन स्टेशनों में कोटा मंडल के बूंदी एवं मांडलगढ़, जबलपुर मंडल के श्रीधाम एवं कटनी साउथ और भोपाल मंडल के नर्मदापुरम एवं शाजापुर स्टेशनों का कार्य लगभग पूर्ण होने की स्टेज पर है। recent visitors 45

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान यूटीएस मोबाइल ऐप से एमएसटी रेल टिकट बुकिंग: यात्रियों के लिए लाभदायक विकल्प भोपाल भोपाल मंडल में यात्री मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से बुक कर सकते हैं। यह सुविधा न केवल यात्रा को सरल बनाती है बल्कि समय और धन की बचत भी करती है। भोपाल मंडल में पिछले 6 महीनों में अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक कुल 60,672 मासिक सीजन रेल टिकट बुक किए गए, जिनमें से 17,722 टिकट यानी करीब 30% टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से बुक किए गए। MST क्या है? MST यानी Monthly Season Ticket एक प्रकार का मासिक रेल टिकट है जो यात्रियों को रोज़ाना आने-जाने के लिए बार-बार टिकट लेने की झंझट से मुक्ति देता है। यह टिकट एक अधिकतम 150 किलोमीटर  के लिए मान्य होता है और महीने भर रेल यात्राओं की सुविधा देता है। MST (Monthly Season Ticket) रेलवे द्वारा नियमित यात्रियों के लिए दी जाने वाली एक सुविधा है जो रोज़ रेल टिकट लेने की ज़रूरत को खत्म कर देती है। यह टिकट कई प्रकारों में उपलब्ध है जैसे – QST (Quarterly Season Ticket) जो 3 महीनों के लिए, HST (Half-Yearly Season Ticket) जो 6 महीनों के लिए और YST (Yearly Season Ticket) जो पूरे 12 महीनों के लिए मान्य होता है। ये सभी विकल्प यात्रियों को अधिक रियायत और सुविधा प्रदान करते हैं। अब ये सभी सीजन रेल टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से बुक किए जा सकते हैं, जिससे रेल टिकट काउंटर की कतारों से मुक्ति, समय की बचत और पेपरलेस यात्रा का लाभ मिलता है। MST रेल टिकट लेने के लाभ: 1.    डिजिटल सुविधा: अब MST भी मोबाइल ऐप से बुक की जा सकती है, पेपरलेस और कैशलेस जिससे पेपर MST खोने का डर भी नहीं रहता क्यूंकि अब आपका मोबाइल ही आपकी MST है । 2.    रोज़ टिकट लेने की ज़रूरत नहीं: हर दिन टिकट खरीदने की झंझट से छुटकारा। 3.    पैसों की बचत: डेली रेल टिकट की तुलना में एमएसटी कहीं ज़्यादा किफायती होता है। 4.    समय की बचत: स्टेशन पर कतार में खड़े रहने की ज़रूरत नहीं।      वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि "मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी UTS ऑन मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकता है, जो कि दैनिक यात्रियों के लिए बहुत ही उपयोगी सुविधा है। मैं सभी यात्रियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस डिजिटल रेल सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और डिजिटल इंडिया की दिशा में अपना योगदान दें।" यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप: MST रेल टिकट बुकिंग की आसान प्रक्रिया 1.    ऐप डाउनलोड करें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से 'UTS' ऐप डाउनलोड करें। 2.    रजिस्ट्रेशन करें: मोबाइल नंबर से साइन अप करें। 3.    टिकट बुकिंग करें: o    MST विकल्प चुनें और रूट भरें। o    R-Wallet से भुगतान करें (3% बोनस भी मिलता है)। o    टिकट आपके मोबाइल पर पेपरलेस रूप में उपलब्ध रहेगा। recent visitors 49

नया पंबन पुल: राष्ट्र का गौरव – इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक

भोपाल ऐतिहासिक महत्व का एक अद्वितीय पुल भारत के दक्षिणी समुद्री किनारे पर, मुख्यभूमि को पवित्र रामेश्वरम द्वीप से जोड़ता नया पंबन पुल आज देश की आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है। यह पुल पुराने पंबन पुल (जो 100 वर्षों से अधिक समय तक सेवा में रहा) का स्थान ले रहा है और भारत की बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मंडपम रेलवे स्टेशन और रामेश्वरम द्वीप के बीच बना यह नया रेलवे समुद्री पुल केवल एक प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग क्षमताओं में भारत की एक बड़ी छलांग है। यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, जो तकनीकी उन्नयन, पर्यावरणीय अनुकूलता और वैश्विक कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह नवभारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। पंबन पुल की ऐतिहासिक विरासत 1914 में बने मूल पंबन पुल ने समुद्र के ऊपर 2.078 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए तमिलनाडु की मुख्यभूमि (मंडपम) को रामेश्वरम द्वीप से जोड़ा। इसका ‘Scherzer रोलिंग लिफ्ट स्पैन’ जलयानों को नीचे से गुजरने की अनुमति देता था और यह अपने समय से काफी आगे की तकनीक थी। यह पुल रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं की जीवनरेखा था। नया पुल क्यों जरूरी था? 100 वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद, पुराना पुल जंग और संरचनात्मक क्षरण के कारण जर्जर होने लगा था। साथ ही इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियाँ — जैसे कि भूकंपीय गतिविधियाँ, चक्रवाती तूफान और खारे समुद्री वातावरण — ने एक ऐसे आधुनिक पुल की आवश्यकता को जन्म दिया जो इन सभी स्थितियों का सामना कर सके। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को इस ऐतिहासिक कार्य को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई और उसने इस सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। RVNL की भूमिका RVNL ने इस परियोजना को केवल एक निर्माण परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मानक स्थापित करने वाले इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में देखा। हमारी टीम ने नवीनतम तकनीकों, पर्यावरणीय संतुलन और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण तरीकों के साथ काम किया। पुल को मौजूदा पुल के पास ही बनाया गया, इस दौरान समुद्री और रेल यातायात को निर्बाध रूप से चालू रखा गया। निर्माण की चुनौतियाँ पाक जलडमरूमध्य की तेज हवाएँ, तूफानी मौसम और ज्वार-भाटा ने निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। भारी निर्माण सामग्री को इस दूरस्थ क्षेत्र तक पहुँचाना, और सीमित समय में कार्य संपन्न करना एक बड़ा कार्य था। फिर भी, 1400 टन से अधिक स्टील निर्माण, 99 गर्डर, लिफ्ट स्पैन और समुद्र के भीतर विद्युतीकरण जैसे कार्य पूरी तरह दुर्घटनारहित तरीके से पूरे किए गए — यह RVNL की सुरक्षा और गुणवत्ता प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सहयोग और टीमवर्क यह परियोजना रेल मंत्रालय, दक्षिण रेलवे, तमिलनाडु सरकार और देश के विभिन्न ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं व सलाहकारों के सहयोग से संभव हो पाई। खास बात यह है कि इस पुल का निर्माण पूरी तरह भारतीय ठेकेदारों द्वारा किया गया — जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुल की प्रमुख विशेषताएँ वर्टिकल लिफ्ट तंत्र: पुल का सबसे विशेष फीचर इसका 72 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जो 22 मीटर ऊपर उठता है, जिससे बड़े जहाज़ आसानी से निकल सकते हैं। तेज़ रफ्तार क्षमता: पुराने पुल पर ट्रेनें केवल 10 किमी/घंटा की गति से चलती थीं, जबकि नया पुल 160 किमी/घंटा तक की क्षमता वाला है (फिलहाल 98 किमी/घंटा तक)। अधिक भार वहन क्षमता: 25 टन एक्सल लोड के अनुसार डिजाइन किया गया है, जिससे माल और यात्रियों की आवाजाही में बढ़ोतरी होगी। जंगरोधी निर्माण: समुद्री वातावरण के प्रभाव से बचाव हेतु उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील, मोटे सदस्य और पॉलीसिलॉक्सेन पेंटिंग का उपयोग किया गया है, जिससे पुल की सेवा आयु न्यूनतम 35 वर्ष हो गई है। भूकंप और चक्रवात प्रतिरोधक: पुल को भूकंपीय और चक्रवाती परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूती से डिजाइन किया गया है। रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: वायु गति, संरचना की स्थिति, और ट्रेनों की निगरानी हेतु स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं। विद्युतीकृत दोहरी पटरियों की व्यवस्था: भविष्य में दोहरी लाइन की सुविधा और ट्रैक्शन सिस्टम पहले से मौजूद है। सामाजिक और आर्थिक प्रभाव रोजगार सृजन: निर्माण के दौरान और बाद में पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा: रामनाथस्वामी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब यात्रा ज्यादा सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक हो गई है। पर्यटन में वृद्धि: इसका दृश्यात्मक सौंदर्य, तकनीकी आकर्षण और रामसेतु जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। आर्थिक सुधार: सामानों की आवाजाही में तेजी से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। एक हरित और सतत परियोजना निर्माण के दौरान पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। इको-फ्रेंडली सामग्री, ऊर्जा कुशल लाइटिंग और निगरानी प्रणाली जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया जिससे यह परियोजना भविष्य के लिए भी टिकाऊ बनी रहे। वैश्विक तुलना नया पंबन पुल भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट समुद्री रेलवे पुल है और यह विश्व की प्रतिष्ठित संरचनाओं — जैसे कि गोल्डन गेट ब्रिज (अमेरिका), टॉवर ब्रिज (लंदन), और ओरेसुंड ब्रिज (डेनमार्क-स्वीडन) — की श्रेणी में स्थान पाता है। यह भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा का जीवंत उदाहरण है। निष्कर्ष: भविष्य की दिशा में एक कदम नया पंबन पुल केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत बनकर रहेगा। RVNL इसी भावना के साथ देशभर में ऐसी और परियोजनाएं लाने के लिए प्रतिबद्ध है।   recent visitors 38

विकसित रेल-विकसित भारत विश्व स्तरीय से श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ: एम. जमशेद

भारतीय रेलवे, भारत की विकास कहानी का क्राउचिंग टाइगर, दुनिया की सबसे उल्लेखनीय और कम चर्चित कहानियों में से एक है कि कैसे बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के प्रति जागरूक सार्वजनिक नीति में रणनीतिक निवेश राष्ट्रीय विकास के लिए प्रभावशाली लाभांश हो सकता है। पिछले दशक (2014-2024) के दौरान भारतीय रेलवे ने जो प्रगति की है, वह विकास और प्रगति का स्वर्णिम काल हो सकता है, और यह प्रणाली आज विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते रेलवे नेटवर्क में से एक है। इसके संदर्भ में, भारत की कहानी को क्या अलग बनाता है और इसे विकास के लिए समान महत्वाकांक्षा वाले देशों और क्षेत्रों के लिए एक सबक बनाता है? मुख्य बात एक सार्वजनिक नीति दृष्टिकोण था जिसे सबसे अच्छे ढंग से यह कहकर संक्षेप में प्रस्तुत किया जा सकता है कि रेलवे के लिए योजना भारत के साथ और भारत के लिए बनाई गई है। इसका मतलब यह चिन्हित करना था कि यह प्रणाली आम आदमी के लिए रेलवे के रूप में अपनी आवश्यक भूमिका में विश्व स्तरीय और किफायती बनी रहनी चाहिए, साथ ही भारत के 22.4 मिलियन लोगों के दैनिक प्रयासों के साथ-साथ, जो अपने आर्थिक जीवन के एक हिस्से के रूप में इस सेवा का उपयोग करते हैं – और यह कि इसे एक ऐसी प्रणाली के रूप में समानांतर रूप से विकसित होना चाहिए जो भारत के उद्योग, वाणिज्य और 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा का समर्थन करती है। इसके लिए व्यापार करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता थी। अतीत में रेलवे अपनी धीमी विकास दर, आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे की क्षमता संतृप्ति आदि के लिए आलोचना के घेरे में आया था। यह अभी भी उन लोगों से आता है जो पर्याप्त ज्ञान के बिना जानकारी प्राप्त किए पुरानी मानसिकता से चिपके हुए हैं जैसे कि नेटवर्क विकास की अक्सर 1950 के बाद से केवल 68000 किमी तक क्रमिक वृद्धि के लिए आलोचना की जाती है, बिना यह जाने कि लाइन क्षमता वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बढोतरी ट्रैक किलोमीटर की है जो आज 132000 किमी से अधिक हो गई है। पिछले दशक के साथ इसके प्रदर्शन की दस साल की व्यापक तुलना इस बात को साबित करती है। 2014-2024 के दौरान, 2004-2014 के 14900 की तुलना में कुल 31000 किलोमीटर नये ट्रैक की स्थापना की गई है। इसी तरह कुल संचयी माल लदान 8473 मिलियन टन यानी 12660 मिलियन टन तक बढ़ गया तथा भारतीय रेल ने 8.64 लाख करोड़ के मुकाबले 18.56 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। इसके साथ ही विद्युतीकरण के फलस्वरूप कार्बन फुटप्रिंट पर बचत 5188 किलोमीटर की तुलना में 44000 किलामीटर से अधिक हो गई है। पिछले दशक में शून्य के मुकाबले 2741 किमी लंबे विश्व स्तरीय डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण, लोको का उत्पादन 4695 से बढ़कर 9168 हो गया है और कोचों का निर्माण 32000 से बढ़कर 54000 हो गया। भारतीय रेल ने उत्पादकता और प्रदर्शन के सभी मापदंडों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में प्रमुख सुधार मुख्य बजट के साथ रेलवे बजट के विलय के साथ आया, जिसे स्टीम एज माइंड सेट वाले कई बूमर्स अभी भी बिना किसी स्पष्ट कारण के याद करते हैं। रेलवे को वित्तीय कमी के कारण संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण स्वीकृत परियोजनाओं की बड़ी संख्या में लंबित थी, लेकिन पिछले दशक में जीबीएस में 8.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि पिछले दस वर्षों में यह केवल 1.56 लाख करोड़ रुपये था। रेलवे जल्द ही श्रीनगर के लिए अपनी पहली ट्रेन चलाएगा, घाटी में सफर के लिए ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है, इस रेल मार्ग में सबसे ऊंचे पुलों और विशाल पहाड़ों पर नेटवर्क को जोड़ने वाली सबसे लंबी रेल सुरंगों का निर्माण हो चुका है। भारतीय रेलवे अपनी निर्बाध कनेक्टिविटी के लिए 100% विद्युतीकरण को प्राप्त करने वाला पहला प्रमुख रेलवे बनने वाला है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट में भारी कमी आएगी। रेलवे नेटवर्क में टक्कर रोधी कवच का उपयोग भी यातायात रेलवे प्रणाली में सबसे बड़ा है। भारत मे संचालित रेलगाड़ियां भी ‘विश्व स्तरीय’ से आगे निकल रही हैं। भारतीय रेलवे ने घरेलू आवश्यकताओं के साथ उन्नत वैश्विक तकनीकों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया है, जिसका लक्ष्य संरक्षित, तेज, स्वच्छ और अधिक आरामदायक रेलगाड़ियां बनाना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय रेल सभी के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके। भारतीय रेलवे अपने अनूठे बिजनेस मॉडल के साथ अपने माल ढुलाई राजस्व से यात्री परिहवन के मद के घाटे को वहन करती है और फिर भी लाभदायक बनी रहती है। प्रमुख विकसित रेलवे प्रणालियाँ या तो निजीकरण कर दी गई हैं और उच्च टैरिफ तय करने के लिए स्वतंत्र हैं या अपने घाटे के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं, इसके विपरीत भारतीय रेलवे अपने सभी परिचालन और कार्य व्यय का ध्यान रखती है और अपने कैपेक्स के लिए सकल बजटीय सहायता प्राप्त करती है। अन्य साधनों से कड़ी प्रतिस्पर्धा और उत्पन मांग पर निर्भर होने के बावजूद, इसके राजस्व सृजन लक्ष्य साल दर साल रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज करते हुए सफलतापूर्वक हासिल किए जा रहे हैं। यह बात उन बुमर्स और 90 के दशक के बच्चों के लिए आश्चर्य की बात हो सकती है जो भारत में एक साधारण युग को याद करते हैं। “निर्यात गुणवत्ता“ का लेबल लगाने वाली किसी भी चीज़ की कीमत प्रीमियम हुआ करती थी, जबकि सबसे अच्छे उत्पाद – जिन्हें विश्व स्तरीय कहा जाता था – वे यूरोप और अमेरिका के समृद्ध देशों के लिए आरक्षित थे। भारतीयों को अक्सर कुछ गलत सामाजिक-आर्थिक सोच की आड़ में घटिया सामान या सेवाएँ प्रदान की जाती थीं। पीढ़ियों को भारतीय रेलवे जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए भी अपनी अपेक्षाएँ कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालाँकि, 2014 के बाद सरकार के फोकस ने विकास और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के प्रति एक दृढ़ प्रगतिशील और प्रेरक दृष्टिकोण अपनाया है। आधुनिक भारत एक ऐसे राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर का हकदार है जो नवाचार की कमी और रूढ़िवादी अंतर्मुखी एजेंडे से मुक्त हो। यह प्रगति आवश्यक रेलवे घटकों के लिए उच्च स्तर के स्थानीयकरण को बनाए रखते हुए और विनिर्माण सुविधाओं को अभूतपूर्व स्तर … Read more