51 हजार नई भर्तियां और 25 हजार युवाओं को मिलेंगी नियुक्तियां, राजस्थान सरकार की प्रथम वर्षगांठ पर सौगात

जयपुर. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राज्य सरकार का एक साल पूरा होने से पहले करीब 25 हजार युवाओं को नियुक्तियां देने और 51 हजार से अधिक नई भर्तियों की सौगात देने जा रहे हैं। युवाओं के रोजगार के सपने को पूरा करने में ये नियुक्तियां एवं विज्ञप्तियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और ‘सुराज संकल्प’ की दिशा में अहम कदम साबित होंगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हाल ही में समीक्षा बैठक आयोजित कर सभी विभागों को जारी भर्ती प्रक्रियाएं समय पर पूरी कर युवाओं को शीघ्र नियुक्तियां देने एवं नई भर्तियां निकालने पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद अब राज्य सरकार पहली वर्षगांठ के मौके पर मुख्यमंत्री रोजगार उत्सव के दौरान सात विभागों के लगभग 25 हजार युवाओं को नियुक्तियां दिए जाने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार 48 हजार 593 चतुर्थ श्रेणी एवं समकक्ष पदों तथा 3 हजार 170 वाहन चालकों की भर्ती प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू करने जा रही है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और वाहन चालकों के लंबे समय से रिक्त चले आ रहे पदों को भरने के लिए राज्य सरकार ने हाल ही इनसे जुड़े सेवा नियमों और भर्ती प्रक्रिया में जरूरी बदलाव किए थे। राज्य सरकार की युवाओं को निरंतर रोजगार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के क्रम में तीसरे मुख्यमंत्री रोजगार उत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नर्सिंग ऑफिसर, चिकित्सा अधिकारी (दंत चिकित्सक), हॉस्पिटल केयर टेकर, अध्यापक लेवल एक एवं दो, वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक, आयुर्वेद विभाग में कनिष्ठ कम्पाउंडर और नर्स, आयोजना विभाग में संगणक, कृषि विभाग में कृषि पर्यवेक्षक और संस्कृति शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक के पदों पर सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, सफाई कर्मियों के पदों पर नियुक्तियां दी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि विगत दो रोजगार उत्सवों में 28 हजार 200 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। स्थायी पदों के अतिरिक्त एनएचएम के 21 काडर के विभिन्न पदों पर संविदा भर्ती की जाएगी, जिसके लिए अभ्यर्थना राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को भिजवाई जा रही है। अब तक एनएचएम में 3 काडर की भर्ती परीक्षाएं बोर्ड द्वारा कराई जा चुकी हैं। इनमें से जीएनएम को दिसंबर माह में नियुक्ति दे दी जाएगी। इसके अतिरिक्त कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और एएनएम के पदों के लिए सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन का कार्य चल रहा है। recent visitors 60

वोटबैंक के बजाय जनहित में करें कार्य, राजस्थान-भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कांग्रेस को सलाह

जयपुर. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि विपक्ष क्या कर रहा है, इस पर ध्यान करने की बजाय भाजपा हमेशा अपने कार्यों पर ध्यान देती है। विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के 140 करोड़ देशवासियों को अपना परिवार कहने से आपत्ति है, उनको देशवासियों को संगठित रहने की अपील करने से आपत्ति है और उनको वस्त्र और उसके रंग से भी आपत्ति है तो इससे उनकी विकृत मानसिकता देशवासियों के सामने उजागर हो गई। कांग्रेसी नेताओं को औवेसी के बयानों पर कभी आपत्ति नहीं हुई, वो 15 मिनट पुलिस हटाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देते, क्योंकि कांग्रेस वोटबैंक की राजनीति करती है, उसको विकास से कोई लेना देना नहीं है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस में राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है, इसका नुकसान कांग्रेस पार्टी को होना तय है। भाजपा ने कभी भी कांग्रेस क्या कर रही है, इस पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास की नीति पर कार्य करते हुए जन कल्याणकारी नीतियां तैयार की। भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने बजट में हर वर्ग, हर समुदाय के लिए योजनाएं बनाई। भाजपा समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति के लिए कार्य कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के अधिकांश नेता भ्रष्टाचार और घोटालों में संलिप्त पाए जा रहे है। कर्नाटक में कांग्रेसी नेता के 64 ठिकानों पर कमरे नोटों से भरे मिले। कर्नाटक ही नहीं, कांग्रेस शासित प्रदेशों में घोटाले पर घोटाले किए जा रहे है। ऐसे में कांग्रेस को अपनी गिरेबा में झांक कर देखना चाहिए। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के बजाय कांग्रेसियों को जनहित में काम करना चाहिए। वोटबैंक के लिए प्रलोभन देने की बजाय रोजगार सृजन करने की जरूरत है। कांग्रेस चुनावों में रेवड़ियां बांटने का काम करती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आज देशवासियों को संगठित रहने का संदेश देने में विपक्ष को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। भाजपा की एक नीति है कि सबको एकजुट रहना है तब ही राष्ट्र का विकास होगा। देश की एकता, अखंडता सुदृढ़ होगी। अगर हम आपस में बटेंगे तो दुश्मनों को लाभ होगा। कांग्रेस ने हमेशा देश को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम किया। कांग्रेस पार्टी के नेताओं के स्वभाव में छिद्रान्वेषण भरा हुआ है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने सलाह देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को अपना ध्यान रखना चाहिए, पडौस के घर में ताकझांक शोभा नहीं देती। समाज के बुद्धिजीवी, राजनेता या फिर सभ्रान्त व्यक्तियों को ताकझांक शोभा नहीं देती। भाजपा नेता जनता के विकास के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है। recent visitors 75

रामगढ़ में अधिक तो दौसा में सबसे कम, राजस्थान में दोपहर तक 39.35 प्रतिशत मतदान

झुंझनू/दौसा. राजस्थान विधानसभा उपचुनाव 2024 के तहत मतदान जारी है। सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 11 बजे तक 24.83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। राजस्थान विधानसभा उपचुनाव 2024 के तहत मतदान जारी है। सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में दोपहर एक बजे तक 39.35 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। अब तक सर्वाधिक 45.4 फीसदी मतदान रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुआ है। विधानसभा क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत – 0- रामगढ़: 45.4 0- खींवसर: 42.74 0- चौरासी:  40.95 0- सलूम्बर: 40.03 0- देवली उनियारा: 37.78 0- झुंझनू: 35.71 0- दौसा: 32.17 दौसा उपचुनाव 2024 दौसा विधानसभा उपचुनाव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय व्यास मोहल्ला में मतदान संख्या 92, 93 पर नव विवाहिता ने विदाई से पहले मतदान किया। नवविवाहिता खुशी बंसीवाल ने कहा, मतदान जरूरी है। रामगढ़ (अलवर) के नोगवां में स्थित राजकीय वरिष्ठोपाध्याय संस्कृत विद्यालय में नवविवाहित जोड़ा भी वोट डालने पहुंचा। इस जोड़े की कल देवउठनी ग्यारस पर ही शादी हुई थी और आज यह जोड़ा वोट देने अपने बूथ पर पहुंच गया। वोट लड़की ने डाला, जबकि नवविवाहित पति इसके साथ पोलिंग स्टेशन तक गया। इन दोनों ने पोशाक भी शादी वाली ही पहन रखी थी। इनको वोट देते हुए देखने के लिए बूथ के बाहर परिवार वाले भी खड़े हुए थे। झुंझुनूं में मतदान जारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और एसपी कर रहे निरीक्षण झुंझुनूं में मतदान शुरू होने के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी रामावतार मीणा और एसपी शरद चौधरी मुस्तैद नजर आ रहे हैं। दोनों अधिकारी मतदान केंद्रों का संयुक्त निरीक्षण निरीक्षण कर रहे हैं, जिसमें शहीद पीरू सिंह स्कूल स्थित मतदान केंद्र, जिला परिषद स्थित मतदान केंद्र, पीरू सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित मतदान केंद्र, महर्षि दयानंद बालिका महाविद्यालय स्थित पिंक बूथ, शहीद कर्नल जेपी जानू राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय व जेके मोदी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित संवेदनशील मतदान केंद्र का निरिक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मौके पर मौजूद सेक्टर मजिस्ट्रेट समेत अन्य अधिकारियों व कार्मिकों से जानकारी लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। झुंझुनूं शहर के जिला परिषद स्थित मतदान केंद्र पर पहली बार मतदान करने वाले युवा को सम्मानित किया गया। महर्षि दयानंद बालिका महाविद्यालय स्थित पिंक बूथ का भी जायजा लिया गया। यह बूथ पूर्णतया महिला कार्मिकों द्वारा प्रबंधित है। जिला निर्वाचन अधिकारी रामावतार मीणा ने बताया कि 263 मतदान केन्द्रों पर दो लाख 74 हजार 698 मतदाता कर सकेंगे। मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। अभी तक मतदान शांतिपूर्ण चल रहा है। एसपी शरद चौधरी ने बताया कि साढ़े सोलह सो पुलिस जवान लगे हुए। संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा बल भी लगाए गए हैं। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान करवाया जा रहा है। नरेश मीणा ने SDM को मारा थप्पड़ टोंक के देवली उनियारा विधानसभा उपचुनाव में समरावता में मतदान बहिष्कार का मामला सामने आया। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा और उनके समर्थकों ने मतदान केंद्र में घुसने का प्रयास किया, जिससे पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ झड़प हुई। एएसपी बृजेंद्र सिंह भाटी सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। यह घटना मतदान प्रक्रिया में खलल डालने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। राजस्थान विधानसभा उपचुनाव 2024 के तहत मतदान जारी है। सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 11 बजे तक 24.83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। अब तक सर्वाधिक 28.97 फीसदी मतदान रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुआ है। विधानसभा क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत     रामगढ़: 28.97     खींवसर: 26.67     चौरासी:  26.42     सलूम्बर: 25.26     झुंझनू: 23.12     देवली उनियारा: 22.69     दौसा: 20.43 मतदान के प्रति उत्साह सभी सात निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के प्रति लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में महिला और दिव्यांग मतदाता भी अपने मताधिकार का उपयोग करने पहुंच रहे हैं। मतदान के बाद लोग सेल्फी भी ले रहे हैं। राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा सुगम मतदान के लिए दिव्यांगों और बुजुर्गों सहित सभी मतदाताओं के लिए व्यवस्था की गई है। वोट मित्रों द्वारा दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं की मतदान में सहायता की जा रही है। मतदान प्रोत्साहन के लिए प्रमाण-पत्र मतदान प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए बूथों पर कई गतिविधियां की जा रही हैं। दौसा विधानसभा क्षेत्र में सुबह-सुबह मतदान करने वाले मतदाताओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। रामगढ़ से बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों ने वोटिंग कर किए जीत के दावे रामगढ़ उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सुखवंत सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान ने अपने- अपने बूथों पर जाकर वोट डाले। सुखवंत सिंह अपने परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ वोट देने पहुंचे। जबकि आर्यन अकेले ही कार्यकर्ताओं के साथ अपना वोट देने गए। इस मौके पर सुखवंत सिंह कदम कॉलोनी स्थित बूथ संख्या-241 पर अपने परिवार के साथ मतदान करने के लिए पहुंचे। उन्होंने अपने परिवार के साथ मतदान किया। उनके साथ उनकी छोटी बेटी पत्नी और बेटा मौजूद रहे। आमजन से अपील किए कि अधिक से अधिक पहले मतदान करें, फिर जलपान करें। उन्होंने कहा कि बीजेपी सबका साथ, सबका विकास के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ रही है और उनकी यही प्रथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत की है और उनकी मेहनत चुनाव में अवश्य रंग लाएगी। बीजेपी इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में अवश्य जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी ज्यादा से ज्यादा पोलिंग करवाना चाहती है, ताकि उनको पूरा फायदा मिल सके। उधर दूसरी ओर आर्यन जुबेर खान ने रामगढ़ में अपना वोट डाला। वे मतदान केंद्र पर पहुंचकर लाइन में लगे और बाद में बूथ के अंदर जाकर अपना वोट भी डाला। वोट डालने के बाद आर्यन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत दुख का विषय है कि उन्हें यहां से चुनाव लड़ना पड़ रहा है। इससे पहले उनके पिता यहां से चुनाव लड़ते थे और वे केवल चुनाव में काम करते थे। उन्होंने कहा कि उनका पूरा परिवार ही शुरू से कांग्रेस से जुड़ा रहा है और इसीलिए वे कांग्रेस से ही चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने उनके परिवार को बहुत कुछ दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, पहले मतदान करें, फिर जलपान करें! आगामी राजस्थान विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में आप सभी सम्मानित मतदाताओं से मेरी अपील है कि अपने क्षेत्र के समग्र … Read more

सीएम भजनलाल, डोटासरा, हनुमान और रोत की दांव पर प्रतिष्ठा, राजस्थान में क्लीन स्वीप के दावों के बीच कल मतदान

जयपुर. राजस्थान में कल यानी बुधवार को उपचुनाव के लिए मतदान होगा। इसके बाद प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं। इसलिए उपचुनाव के नतीजे अहम हैं। बीजेपी ने उपचुनावों में पूरी ताकत झोंकी है। अपने तमाम मंत्री, विधायक और संगठन को चुनावी मैदान में झोंक दिया। कांग्रेस चुनावी प्रचार में वैसी आक्रामकता नहीं दिखा पाई। चुनावी परिणाम 23 नवंबर को जारी होंगे। हालांकि, नतीजे जो भी हों राजस्थान विधानसभा में सरकार की स्थिति पर कोई असर आने वाला नहीं है। लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने अपने सारे चुनावी घोड़े मैदान में दौड़ा दिए। इसकी वजह है प्रतिष्ठा। बीजेपी में यह चुनाव सीएम भजनलाल शर्मा के चेहरे पर हो रहे हैं। कांग्रेस की जीत-हार प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कद तय करेगी। वहीं, क्षेत्रीय पार्टियों में आएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल और बीएपी सांसद राजकुमार रोत के लिए भी उपचुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। हालांकि, ये दोनों ही नेता चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। लेकिन मुकाबला इन्हीं चेहरों के इर्द-गिर्द लड़ा जा रहा है। सीएम भजनलाल शर्मा: यह उपचुनाव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। हालांकि, उनके सीएम बनने के बाद प्रदेश में लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। लेकिन तब सरकार बिल्कुल नई थी। यही वजह रही कि लोकसभा चुनावों में 11 सीटें हारने का ठीकरा संगठन पर फूट गया। लेकिन अब सरकार को काम करते हुए करीब एक साल हो गया है। सरकार अपने चुनावी वादों में से भी ज्यादातर पूरे होने का दावा कर रही है। राइजिंग राजस्थान जैसी बड़ी निवेश समिट करवाई जा रही है। इसलिए उपचुनाव में जनता का मतदान सरकार के काम पर मुहर होगा। अकेले पड़े गोविंद सिंह डोटासरा पूरे उपचुनाव के दौरान प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ही कांग्रेस में सबसे सक्रिय नजर आए। कांग्रेस में प्रदेश स्तरीय नेताओं की संख्या कम नहीं है। लेकिन जहां भाजपा के नेताओं को चुनाव क्षेत्रों में प्रवास तक करवाया गया। वहीं, कांग्रेस के नेता प्रचार के लिए भी नहीं पहुंचे। पूर्व सीएम अशोक गहलोत सिर्फ दौसा और देवली-उनियारा की नामांकन सभाओं में पहुंचे। इसके बाद वे पूरी तरह महाराष्ट्र चुनावों में लग गए। वहीं, सचिन पायलट सिर्फ दौसा, देवली-उनियारा और झुंझुनूं पहुंचे। ये तीनों ही सीटें उनके कैंप के नेताओं से जुड़ी मानी जाती हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पूरी तरह सिर्फ अलवर की रामगढ़ सीट पर ही सक्रिय दिखे। इस लिहाज से यदि चुनाव नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो डोटासरा का कद काफी बढ़ जाएगा। खींवसर: पूरा चुनाव हनुमान पर फोकस खींवसर में त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी-कांग्रेस और आरएलपी के प्रत्याशियों के बीच टक्कर है। हनुमान बेनीवाल के लोकसभा में जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। इस उपचुनाव में उन्होंने अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को उतारा है। लेकिन यहां के चुनावों को यदि कम शब्दों में समझा जाए तो यह हनुमान की जीत और हार का चुनाव है। इसके अलावा यहां कोई बड़ी चर्चा नहीं है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों का टारगेट हनुमान बेनीवाल ही हैं और वे अकेले मुकाबले में अपनी जीत के रिकॉर्ड के साथ डटे हैं। राजकुमार रोत: वागड़ की लड़ाई भारत आदिवासी पार्टी डूंगरपुर-बांसवाड़ा की चौरासी और उदयपुर की सलूंबर सीट से चुनाव लड़ रही है। लेकिन इसके पीछे जो चेहरा है, वह राजकुमार रोत का है। राजकुमार रोत लोकसभा में बीजेपी नेता महेंद्रजीत मालवीय को हराकर वागड़ में आदिवसियों के बीच विश्वास बना चुके हैं और जिन दो सीटों पर बीएपी उपचुनाव लड़ रही है, उसमें रोत की साख सबसे ज्यादा दावं पर लगी है। recent visitors 82

‘पीएम मोदी की कृपा से आप चूहे से शेर बने हैं’, राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष पर के राजकुमार रोत का हमला

जयपुर. विधानसभा उपचुनाव में चौरासी सीट दिन प्रतिदिन विवादित बयानों के घेरे में आती जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ चौरासी आए थे। युवा मोर्चा के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मदन राठौड़ ने राजकुमार रोत को चूहा बताते हुए एक कहानी सुनाई थी। मदन राठौड़ ने कहा था कि एक चूहा था, जो संत की कृपा से शेर बन गया और शेर बनते ही उसने संत को खाने का प्रयास किया तो संत ने उसे पुनः चूहा बना दिया। इसलिए की जनता ने जिस चूहे को लोकसभा सांसद बनकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजा है। अब वक्त आ गया है कि यही जनता मंत्र पढ़कर शेर बन गए राजकुमार रात को दोबारा चूहा बना दे। मदन राठौड़ के इस बयान पर सांसद राजकुमार रोत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो खुद प्रधानमंत्री मोदी की कृपा पर चल रहे हैं, वह मुझे बताएंगे कि मैं कौन हूं मुझे डूंगरपुर बांसवाड़ा की जनता ने आशीर्वाद दिया है और यह जनता 13 तारीख को तय करेगी की कौन चूहे से शेर बनता है और कौन शेर से चूहा। कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी में राजकुमार रोत पर 5 साल में मोटरसाइकिल से गाड़ी पर आने का कच्चे मकान से पक्का मकान बनाने का आरोप लगाया था, जिसका जवाब देते हुए राजकुमार रोत ने कहा कि चार बार का विधायक बाबूलाल खराड़ी अपने घर में नहाने के लिए बाथरुम नहीं बन सके। वह क्षेत्र के विकास की बात करते हैं, जो अपना घर नहीं बना पाए। वह क्षेत्र का विकास क्या करेंगे और अगर कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कोई विकास किया है तो हमें बताएं। राजकुमार ने कहा कि मैं और मेरी पत्नी दोनों के पगार आते हैं और उसी पगार से अगर मैं गाड़ी चला रहा हूं तो भाजपा नेताओं को क्या तकलीफ है? उसी पगार से अगर मैंने पक्का घर बना लिया तो इनको क्यों तकलीफ हो रही है। भारतीय आदिवासी पार्टी में फूट की खबरों पर उन्होंने कहा कि भाजपा को हमारी इतनी चिंता क्यों है? वह क्यों खुद की चिंता नहीं कर लेते, क्यों पूरा दलबल लगाकर चौरासी में लगे हुए हैं। राजकुमार रोत ने कहा कि इस बार हमारी जनता ने ठान लिया है कि भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाएंगे। recent visitors 167

डीजीपी ने सभी आईजी और एसपी को भेजा पत्र, राजस्थान-पुलिस के जवानों के तबादलों पर रोक

जयपुर. राज्य सरकार जब तक तबादलों पर से प्रतिबंध नहीं हटा देते तब तक पुलिस महकमें में जवानों के ट्रांसफर नहीं किए जा सकेंगे। इसके लिए प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी यूआर साहू ने बकायदा सभी रेंज आईजी और एसपी को पत्र भेजा है। पत्र में लिखा है कि जब तक सरकार तबादले पर से प्रतिबंध नहीं हटा देती है, तब तक किसी का भी तबादला नहीं किया जाए। दरअसल राजस्थान में भजनलाल सरकार ने तबादलों पर बैन लगा रखा है, लेकिन इसके बावजूद कई जिलों में और संभाग में पुलिस डिपार्टमेंट में तबादलों का सिलसिला जारी है। यही वजह है कि पुलिस डिपार्टमेंट में होने वाले तबादलों पर रोक लगाने के लिए पुलिस महानिदेशक यूआर साहू में सभी रेंज IG और जिला SP को पत्र लिखकर बिना पुलिस मुख्यालय की अनुमति के तबादले नहीं करने के आदेश जारी किए हैं। डीजीपी यूआर साहू के आदेश के मुताबिक अब रेंज IG और पुलिस अधीक्षक अपने स्तर पर तबादले नहीं कर सकेंगे। तबादलों पर प्रतिबंध की समय सीमा में तबादलों पर रोक रहेगी। बैन के बाद भी जिलों में तबादले राज्य सरकार की तरफ से प्रदेश में तबादलों पर बैन नहीं हटाया गया, लेकिन इसके बाद भी पुलिस सहित प्रदेश के सभी महकमों में जमकर तबादले हुए। अपने आदेश में डीजीपी ने कहा है कि अगर बहुत जरूरी होने पर तबादला करना है तो कारणों सहित सक्षम स्तर से अनुमति लेनी होगी। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के तबादलों पर रोक के बावजूद कई ज़िलों और रेंज में पुलिस विभाग में रेंज और ज़िला एसपी के स्तर पर तबादले किए जा रहे हैं। इसकी शिकायत पुलिस मुख्यालय में होने पर पुलिस महानिदेशक की ओर से आदेश जारी किया गया है। recent visitors 87

जातिगत समीकरणों से तय होगी जीत या बदलेगी परंपरा?, राजस्थान की सातों सीटों के उपचुनावों में लग रहे कयास

अलवर/नागौर. इस बार प्रदेश की सातों सीटों पर चुनाव अलग-अलग दिशाओं में हैं। शायद यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय दल भी परिवारवाद और सहानुभूति कार्ड जैसे दांव आजमा रहे हैं। प्रदेश की जिन सात सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है, उनमें से दो दक्षिणी राजस्थान में, दो पूर्वी राजस्थान में और एक-एक उत्तरी, मध्य और पश्चिमी राजस्थान में है। अलवर जिले की यह सीट सांप्रदायिक ध्रुवीकरण वाली सीट रही है। यहां के कुल वोटरों में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 30 प्रतिशत से ज्यादा है और कांग्रेस को इसी बडे़ वोट बैंक के सहारे जीत की उम्मीद है। पार्टी के प्रत्याशी आर्यन जुबैर यहां से कांग्रेस के परंपरागत उम्मीदवार और दिवगंत विधायक जुबैर खान के पुत्र हैं। बीजेपी के सुखवंत सिंह की छवि यहां सॉफ्ट मानी जाती है। इसलिए बीजेपी के खिलाफ मेवों का ध्रुवीकरण कम रह सकता है। दौसा में चुनाव की दिशा सामान्य वर्ग करेगा तय इस सीट के उपचुनाव पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। इसका एक बड़ा कारण तो यह है कि सरकार से इस्तीफा देकर बैठे मंत्री किरोड़ीलाल मीणा यहां से अपने भाई जगमोहन मीणा को टिकट दिलाने में सफल रहे हैं, वहीं दूसरा बड़ा कारण है कि एक सामान्य वर्ग की सीट पर भाजपा ने जगमोहन मीणा के रूप में जहां अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस डीडी बैरवा के रूप में अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। इस सीट के कुल वोटों में से करीब पचास प्रतिशत एससी-एसटी के वोट हैं और शेष पचास प्रतिशत में सामान्य, मुस्लिम और ओबीसी के वोटर आते हैं। अब चूंकि दोनों ही प्रमुख दलों ने सामान्य या ओबीसी वर्ग से किसी को टिकट नहीं दिया है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि ये वोट कांग्रेस या भाजपा में से किसे चुनते हैं। हालांकि भाजपा को उम्मीद है कि सामान्य और मूल ओबीसी वोट परंपरागत रूप से भाजपा के साथ रहे हैं, इसलिए मीणा वोटों के साथ इन वोटों का जुड़ाव उसकी जीत को आसान बना देगा। देवली-उनियारा में कांग्रेस को मीणा वोट कटने का डर टोंक जिले की इस सीट पर मीणा, गुर्जर और मुस्लिम वोटों का बाहुल्य है। कांग्रेस ने मीणा और मुस्लिम वोटों की गोलबंदी की उम्मीद में यहां से कस्तूरचंद मीणा को टिकट दिया है। चूंकि सचिन पायलट टोंक से विधायक हैं और यह उन्हीं के खेमे के हरीश मीणा की सीट रही है, इसलिए पार्टी को गुर्जर वोटों की उम्मीद भी है, लेकिन कांग्रेस के इन दोनों ही वोट बैंकों में सेंध पड़ गई है। कांग्रेस के बागी के रूप में पूर्व छात्र नेता नरेश मीणा मैदान में हैं, जो मीणा वोटों को बंटवारा कर सकते हैं, वहीं भाजपा ने अपने पुराने कार्यकर्ता राजेन्द्र गुर्जर को टिकट देकर कांग्रेस की एकमुश्त गुर्जर वोट मिलने की उम्मीद को भी झटका दिया है। ऐसे में कांग्रेस की बड़ी उम्मीद यहां मुस्लिम वोट हैं, वहीं भाजपा सामान्य और मूल ओबीसी वोटों के सहारे दिखाई दे रही है। राजेंद्र गुढ़ा हैं झुंझुनू में एक्स फैक्टर शेखावटी क्षेत्र की इस सीट पर कांग्रेस के ओला परिवार का वर्चस्व रहा है और इस बार भी पार्टी ने इसी परिवार के अमित ओला को टिकट देकर जाट और मुस्लिम वोटों के सहारे जीत की उम्मीद की है, क्योंकि इस सीट पर यही दो वोट सबसे ज्यादा हैं। भाजपा ने भी हालांकि राजेन्द्र भांभू के रूप में जाट उम्मीदवार को ही टिकट दिया है, ऐसे में जाट वोटों के बंटवारे के साथ ही पार्टी को सामान्य और मूल ओबीसी के वोटों की उम्मीद भी है, लेकिन इस सीट के एक्स फैक्टर राजेन्द्र गुढ़ा माने जा रहे हैं जो कांग्रेस के एससी और मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करते दिख रहे हैं और ऐसा होता है तो इसका सीधा फायदा भाजपा के उम्मीदवार हो सकता है। खींवसर के त्रिकोणीय संघर्ष में बटेंगे जाट वोट नागौर जिले की खींवसर सीट पर जाट मुस्लिम और एससी मतदाता सबसे ज्यादा हैं। यहां हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय संघर्ष है और चूंकि तीनों के उम्मीदवार जाट हैं, इसलिए जाट वोट तीन जगह बंटेंगे। किसी भी प्रत्याशी का जीत का दारोमदार एससी और मुस्लिम वोटों पर रहेगा, जो वैसे तो कांग्रेस के वोट बैंक माने जाते हैं, लेकिन इस सीट पर आरएलपी के साथ जाते रहे हैं। विधानसभा चुनाव में आरएलपी से भाजपा में गए रेवतराम डांगा ने आरएलपी के वोट बैंक में अच्छी सेंधमारी की थी और हनुमान बेनीवाल सिर्फ दो हजार वोटों से जीत पाए थे। इस बार भी भाजपा ने फिर से डांगा पर दांव खेला है। वहीं हनुमान बेनीवाल ने अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे सवाईसिंह की पत्नी रतन चौधरी को टिकट दिया है। चौरासी आरक्षित सीट पर सब कुछ एसटी वोटों के हाथ बांसवाड़ा जिले की इस आदिवासी बहुल सीट पर करीब 85 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति की है। ऐसे में यहां अन्य जातियों या सामान्य वर्ग के लिए बहुत गुंजाइश बचती नहीं है। आदिवासियों की बीच सक्रिय भारतीय आदिवासी पार्टी और भाजपा व कांग्रेस के बीच यहां त्रिकोणीय मुकाबला है तो सही, लेकिन जातिगत समीकरण आदिवासियों की ही उपजातियों के बीच के हैं। सलूंबर में आदिवासियों के साथ ही अन्य वोट बैंक भी प्रभावी अब तक उदयपुर का हिस्सा रही सलूंबर सीट अब खुद अपने आप में जिला हो गई है। आदिवासियों की संख्या अधिक होने के कारण यह भी आरक्षित सीट है, लेकिन यहां सामान्य वर्ग की अन्य जातियां जैसे जैन, ब्राह्मण, राजपूत और मूल ओबीसी की जातियां भी ठीकठाक संख्या में हैं। यही कारण है कि इस सीट पर आदिवासी पार्टियों के बजाए कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला होता आया है। दिवंगत विधायक अमृतलाल  मीणा यहां से लगातार तीसरी बार विधायक बने थे। इस बार भाजपा ने उनकी पत्नी शांतादेवी को टिकट देकर अनूसूचित जनजाति के साथ ही सामान्य वर्ग के अपने परंपरागत वोट बैंक के सहारे जीत की उम्मीद की है। उनके सामने कांग्रेस की रेशम मीणा हैं, वहीं बीएपी ने भी रमेशचंद मीणा को मैदान में उतारा है। recent visitors 77