Sunday, July 5, 2026 2:35 pm

अमेरिका में हर चौथा मुसलमान इस्लाम छोड़ चुका, अपना धर्म छोड़ने में ईसाई सबसे आगे

नई दिल्ली भारत के लिए धर्म परिवर्तन बहुत बड़े राजनीतिक विवाद का मसला रहा है। लेकिन, हकीकत ये है कि अपना धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपनाने या किसी भी धर्म को न मानने वाले लोगों के मामले में अमेरिका और यूरोप के देश ज्यादा आगे हैं। तथ्य यह भी है कि जब धर्म परिवर्तन की बात आती है या अपना धर्म छोड़ने की बात आती है तो इसमें ईसाई सबसे आगे हैं। उनके बाद बौद्ध हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन करने में दिलचस्पी दिखाई है। एक बड़ा तथ्य यह भी है कि ऐसा करने वालों में अधिकतर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपना धर्म तो छोड़ दिया है, लेकिन वह किसी अन्य धर्म से जुड़े भी नहीं। इसके बाद वे लोग हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपना धर्म बदला है, बल्कि नई आस्था भी कबूल की है। दक्षिण कोरिया में 50% ने छोड़ा अपना धर्म प्यू रिसर्च सेंटर दुनिया के 36 देशों में सर्वे के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचा है कि अगर दक्षिण कोरिया जैसे देश की आधी आबादी अपना धर्म छोड़ चुकी है, वहीं हिंदू और मुसलमानों की यह विशेषता है कि वह जिस धर्म में पैदा होते हैं, उसे बिरले ही छोड़ते हैं। मतलब, उनकी आस्था अपने धर्म से आमतौर पर हमेशा जुड़ी रहती है। इस सर्वे के अनुसार अपना धर्म बदलने वाले लोगों में एक बड़ा ट्रेंड ये है कि इनमें ज्यादातर जनसंख्या उन लोगों की है, जो किसी दूसरे धर्म को अपनाने की जगह खुद को नास्तिक, अनिश्वरवादी (atheists),अज्ञेयवादी (agnostics) या 'नथिंग इन पर्टिक्युलर'कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं। दक्षिण कोरिया के बाद सबसे ज्यादा लोगों ने अपना धर्म स्पेन में बदला है। इस लिस्ट में कुल 15 देशों के नाम हैं, जिसमें भारत 14वें स्थान पर है, जहां मात्र 2% लोग आज उस धर्म का पालन नहीं करते, जिस आस्था में उनका जन्म हुआ था। अपना धर्म छोड़ने में ईसाई सबसे आगे हमने ऊपर बात की ईसाई धर्म मानने वालों की, जो सबसे ज्यादा धर्म बदल रहे हैं। यह इस तरह से देखा जा सकता है कि स्पेन में जहां करीब 100 में से 90 लोग ईसाई बनकर पैदा हुए, लेकिन अब उनमें से 54 ही इस धर्म को मानते हैं। यानी कुल 36% क्रिश्चियन अपना धर्म छोड़ चुके हैं। इसमें कुल 10 ईसाई बहुल देशों का जिक्र है, जिसमें दूसरे नंबर पर स्वीडन और आखिर में इटली का नाम है। इटली में भी 20 क्रिश्चियन आज उस धर्म को नहीं मानते, जिसमें उनका जन्म हुआ था। अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 22% है। धर्म छोड़ने वालों में ईसाइयों के बाद बौद्ध हजारों साल पहले भारत में बौद्ध धर्म का रंग फीका पड़ने लगा था। दुनिया भर में ईसाइयों के बाद आज जिस धर्म के लोग अपने मूल धर्म से मुंह फेर रहे हैं तो वे बौद्ध हैं। मसलन, जापान में अगर 58 लोगों ने बौद्ध धर्म में जन्म लिया तो आज उनमें से मात्र 34 ही इस धर्म को मानते हैं। कुल मिलाकर 26% ने अपना मूल धर्म छोड़ दिया है। यह स्थिति दक्षिण कोरिया, सिंगापुर से लेकर श्रीलंका तक में दिखाई दे रही है। अमेरिका में 23% मुसलमानों ने छोड़ा इस्लाम जैसा कि पहले बताया गया कि इस सर्वे के अनुसार आज भी हिंदू और मुसलमानों में ऐसे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो अपने धर्म में ही बने रहना पसंद करते हैं, और अपना धर्म छोड़कर दूसरे को अपनाने वालों की संख्या इनमें सबसे कम है। जैसे बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में एक भी मुसलमान ने इस्लाम नहीं छोड़ा। यही स्थिति ट्यूनिशिया की भी है। भारत में सिर्फ 1% मुसलमान अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में शामिल हुए हैं। भारत से ज्यादा तुर्की में मुसलमानों ने इस्लाम छोड़ा है। यहां इस्लाम में पैदा होने वाले 4% लोग अब खुद को मुस्लिम नहीं मानते और इनमें से 1% दूसरा धर्म अपना चुके हैं। सिंगापुर में यह संख्या 3% है, जो अब मुस्लिम नहीं हैं। सबसे ज्यादा मुसलमानों ने अमेरिका में इस्लाम छोड़ा है। यहां अगर 100 लोग इस्लाम में पैदा हुए थे तो अब उनमें से सिर्फ 77 ही इसका पालन करते हैं। यानी 23% ने इस्लाम छोड़ दिया है। 10% ने कोई अन्य धर्म अपना लिया है और 13% किसी भी धर्म का पालन नहीं करते। अमेरिका में 18% हिंदुओं ने हिंदुत्व छोड़ा मुसलमान ही नहीं अमेरिका में रहने वाले सबसे ज्यादा हिंदुओं ने भी अपना धर्म छोड़ा है। आज अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या 18% है, जो पैदा तो हिंदू धर्म में हुए थे, लेकिन अब इस धर्म को नहीं मानते। ऐसा करने वाले श्रीलंका में 11% हैं। श्रीलंका में जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़ा है, उनमें से अधिकांश अब ईसाई बन चुके हैं। लेकिन, अमेरिका में हिंदुत्व छोड़ने वाले अधिकतर आज कोई धर्म नहीं मानते और बाकी ईसाई बन चुके हैं। दुनिया में 14.4% लोग किसी धर्म को नहीं मानते इस सर्वे का एक बड़ा नतीजा ये रहा है कि 2022 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में अगर 31.6% ईसाई, 25.8% मुसलमान और 15.1% हिंदू थे तो ऐसे लोगों की तादाद 14.4% हो चुकी थी, जो किसी धर्म से नहीं जुड़े थे। इनके बाद 6.6% बौद्ध,5.4% फोक रिलिजनिस्ट, 0.8% अन्य और 0.2% यहूदी थे। एक और महत्वपूर्ण बात जो इस सर्वे से सामने आई है, वह यह कि धर्म से मुंह मोड़ने वालों में ज्यादातर युवा हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा तादाद पढ़े-लिखे और पुरुषों की है, जो उस धर्म से निकल रहे हैं, जिसमें वे पैदा हुए थे। recent visitors 25

प्रदेश में धर्म परिवर्तन के लिए 1 लाख का लालच…पुलिस ने पातालकोट एक्सप्रेस से 18 यात्रियों को पकड़ा, धर्मांतरण के लिए जा रहे थे जालंधर

ग्वालियर  ग्वालियर में देर रात पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन में पुलिस ने 18 यात्रियों को पकड़ा है। ये सभी लोग गरीब मजदूर वर्ग के हैं। इन्हें कुछ लोगों ने लालच दिया था कि यदि वे ईसाई धर्म अपना लेंगे, तो उन्हें एक-एक लाख रुपए मिलेंगे। साथ ही, उनके बच्चों को क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ाया जाएगा और उन्हें विदेश में नौकरी करने का मौका मिलेगा। इसी लालच में छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में लोग इस गिरोह के साथ पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन से पंजाब की ओर रवाना हुए थे। हालांकि, पुलिस को सूचना मिलते ही घेराबंदी कर दी गई। सबसे पहले विदिशा के गंजबासौदा में ट्रेन को रोककर 11 यात्रियों को उतार लिया गया। इसके बाद बीना स्टेशन पर 4 यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया। यहां यह पता चला कि कोच एस-1 में तीन यात्री और हैं। इसके बाद, ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पातालकोट एक्सप्रेस को 30 मिनट तक रोककर सघन जांच की गई, जिसके बाद तीन यात्रियों को पकड़ा गया। ग्वालियर जीआरपी ने इन तीनों को गंजबासौदा पुलिस के हवाले कर दिया। ग्वालियर जीआरपी पुलिस के मुताबिक बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सूचना दी थी कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को धर्मांतरण के लिए पंजाब के जालंधर चर्च ले जाया जा रहा है। वहां इन लोगों को पैसों का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाएगा।सूचना देने वालों ने बताया कि छिंदवाड़ा के सेजनाथ सूर्यवंशी और विजय कुमार इन लोगों को लेकर पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हैं। पकड़े गए यात्रियों ने पुलिस को बताया कि सेजनाथ और विजय कुमार कुछ महीने पहले उनसे मिले थे। उन्होंने बताया था कि ईसाई धर्म अपनाने पर उन्हें कई फायदे होंगे, एक लाख रुपए मिलेंगे, उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाएगा और वे विदेश जाने का अवसर पा सकेंगे।यही लोग उन्हें जालंधर, पंजाब के चर्च में ले जा रहे थे। आरोपियों ने यह भी बताया कि इससे पहले उन्हें फिरोजपुर के चर्च भी ले जाया जा चुका है। इस मामले में ग्वालियर जीआरपी ने बताया कि पकड़े गए तीनों यात्रियों को गंजबासौदा जीआरपी को सौंप दिया गया है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।. बजरंग दल ने दी थी जानकारी ग्वालियर जीआरपी से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को भोपाल पुलिस को बजरंग दल के पदाधिकारियों ने सूचना दी थी कि छिंदवाड़ा से बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को धर्मांतरण के लिए पंजाब के जालंधर चर्च ले जाया जा रहा है। वहां इन लोगों को पैसों का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाएगा। सूचना देने वालों ने बताया कि छिंदवाड़ा के सेजनाथ सूर्यवंशी और विजय कुमार इन लोगों को लेकर पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन के एस-1, एस-2, एस-3, एस-4, एस-5 कोच में सवार हैं। इस पर भोपाल पुलिस सक्रिय हुई, लेकिन स्टेशन पहुंचने तक ट्रेन रवाना हो चुकी थी। इसके बाद आगे विदिशा के गंजबासौदा में पुलिस और जीआरपी को सूचना दी गई। गंजबासौदा स्टेशन पर ट्रेन को रोककर पुलिस ने 11 यात्रियों को पहचान कर हिरासत में लिया, जिनमें सेजनाथ और विजय भी शामिल थे। जब ट्रेन यहां से निकली तो पता चला कि कुछ और लोग अभी भी ट्रेन में सवार हैं। इसके बाद बीना स्टेशन पर पुलिस ने एस-4 कोच से चार और यात्रियों को पकड़ा। बीना स्टेशन पर भी पकड़े गए यात्री बीना में पकड़े गए यात्रियों से पूछताछ के बाद पता चला कि ट्रेन में उनके तीन और साथी मौजूद हैं, जो एस-1 और एस-2 कोच में बैठे हैं। इसके बाद ग्वालियर पुलिस और जीआरपी को सूचना दी गई। रात 11:30 बजे जब पातालकोट एक्सप्रेस ग्वालियर पहुंची तो पुलिस ने घेराबंदी कर दी। पुलिस को देखकर धर्मांतरण के लिए जा रहे यात्री अन्य कोचों में छिपने की कोशिश करने लगे। करीब 30 मिनट तक पुलिस और जीआरपी ने ट्रेन की तलाशी ली और आखिरकार एस-5 कोच से तीन यात्रियों को पकड़ लिया। इनमें शामिल हैं,     रितेश प्रकाश (37 वर्ष) – पिता का नाम जान प्रकाश, निवासी मिशन चर्च कंपाउंड     मना विश्वकर्मा (45 वर्ष) – पिता का नाम फगनलाल, निवासी नोनिया करवल परतला     राकेश (41 वर्ष) – पिता का नाम विजय नागवंशी, निवासी छिंदवाड़ा लालच देकर धर्म परिवर्तन की कोशिश पकड़े गए यात्रियों ने पुलिस को बताया कि सेजनाथ और विजय कुमार कुछ महीने पहले उनसे मिले थे। उन्होंने बताया था कि ईसाई धर्म अपनाने पर उन्हें कई फायदे होंगे, एक लाख रुपए मिलेंगे, उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाएगा और वे विदेश जाने का अवसर पा सकेंगे। यही लोग उन्हें जालंधर, पंजाब के चर्च में ले जा रहे थे। आरोपियों ने यह भी बताया कि इससे पहले उन्हें फिरोजपुर के चर्च भी ले जाया जा चुका है। इस मामले में ग्वालियर जीआरपी ने बताया कि पकड़े गए तीनों यात्रियों को गंजबासौदा जीआरपी को सौंप दिया गया है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है। recent visitors 17

किशोर को पहले बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया, खतना कराकर उससे नमाज पढ़वाई गई

आजमगढ़  उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले के रहने वाले एक किशोर को पहले बहला फुसलाकर बाराबंकी ले जाया गया। फिर उसका धर्म परिवर्तन कराया गया। उसका खतना कराकर उससे नमाज पढ़वाई गई। इसका खुलासा उस समय हुआ जब पीड़ित किशोर अपना बयान दर्ज कराने के लिए आजमगढ़ के किशोर न्याय बोर्ड के आफिस पहुंचा। इस मामले में बाराबंकी में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बाराबंकी में यह तहरीर विनय सिंह राजपूत ने दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह अपने सहयोगी बृजेश कुमार वैश्य, जिलाध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद, बाराबंकी के साथ निजी कार्य से बाराबंकी में घूम रहे थे। जब वे पल्हरी चौराहे के पास स्थित हिंद मेडिकल स्टोर के पास खड़े थे, तभी एक लड़का आया, जिसने अपना नाम नूर मोहम्मद बताया और कहा कि वह अतरौलिया, आजमगढ़ का रहने वाला है। फिर उसने अपना असली नाम अनुज कुमार बताया और बताया कि वह हिंदू हरिजन बिरादरी से है। बालक ने बताया कि मुर्शीद और उसके पिता रियासत अली, जो कबाड़ी का काम करते हैं, उसे बहलाकर अपने साथ ले आए थे। वे उसे अफीफा रेस्टोरेंट में काम करने के लिए रखे थे। एक दिन रेस्टोरेंट के मालिक ने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि उसका परिवार नहीं है। उसके बाद उसे अस्पताल ले जाकर उसके लिंग के ऊपरी भाग की स्किन काटी गई और उसका इलाज किया गया। बालक को यह बताया गया कि अब से उसका नाम नूर मोहम्मद होगा और वह मुस्लिम धर्म को अपनाएगा। इसके बाद वह लोग थाने पहुंचे और तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने धर्म परिवर्तन और शारीरिक शोषण के आरोप में तीन लोगों मुर्शीद, उसके पिता रियासत अली और अफीफा रेस्टोरेंट के मालिक के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। इसके बाद बाराबंकी पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड आजमगढ़ को मामला प्रेषित कर दिया। शुक्रवार को उक्त किशोर अपना बयान दर्ज कराने के लिए किशोर न्याय बोर्ड पहुंचा। इस दौरान उसने आप बीती बताई। इस संबंध में किशोर न्याय बोर्ड के बेंच आफ मजिस्ट्रेट अखिलेश सिंह ने बताया कि एक मामला आया है पुलिस लेकर आई है वह बच्चा बिना बताए घर से भाग गया था। बच्चे ने बताया कि मुर्शीद नाम के लड़के से उसकी दोस्ती हो गई थी वही उसे बहला फुसलाकर काम दिलाने के बहाने बाराबंकी लेकर चला गया। मुर्शीद ने इस बच्चे को एक होटल में काम दिलवा दिया। फिर उसका खतना करवाकर मुस्लिम बना दिया गया। जिस होटल में यह बच्चा काम करता था कुछ लोग वहां खाना खाने गए थे बच्चे ने आपबीती बताई। इसके बाद बाराबंकी में तीन लोगों के खिलाफ एससी एसटी का मुकदमा दर्ज किया गया। यह बच्चा डेढ़ महीने बाल सुधार गृह में था । उसके बाद पुलिस लेकर यहां आई है। बच्चे को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया है। उनका एक बच्चे की काउंसलिंग की गई है। बच्चा चूंकी अभी डरा हुआ है इसलिए पूरी बात नहीं बता रहा है लेकिन बच्चे के धर्म परिवर्तन के पीछे कोई एक बड़ा गैंग काम कर रहा है इसकी संभावना है। इस पूरे मामले में चाइल्ड कमेटी के चेयरमैन रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि बाराबंकी में मुकदमा दर्ज हुआ है। जिले का मामला होने के कारण बाराबंकी से इसे हमारे यहां ट्रांसफर किया गया है। इसमें लड़के का धर्म परिवर्तन कराकर खतना करने और नमाज पढ़वाने का आरोप है। आज किशोर को इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। recent visitors 39