एमपी में व्हाइट टॉपिंग तकनीक बनेगी, बढ़ेगी सड़कों की उम्र, चार महीनों के अंदर काम खत्म करने का रखा टारगेट

भोपाल  मध्य प्रदेश में जल्द ही सड़कें और मजबूत बनेंगी। पीडब्ल्यूडी खराब सड़कों की समस्या से निपटने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपना रहा है। इस तकनीक से बनी सड़कें ज़्यादा टिकाऊ होती हैं और लंबे समय तक चलती हैं। शुरुआत में 21 जिलों की 41 सड़कों पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काम इसी महीने शुरू हो जाएगा और चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बारिश में सड़कों के उखड़ने की समस्या से निजात मिलेगी। लोक निर्माण विभाग ने खराब सड़कों की बढ़ती शिकायतों के बाद यह कदम उठाया है। बारिश में सड़कें टूटने से लोगों को काफी परेशानी होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें इस समस्या का समाधान करेंगी। इस तकनीक से करीब 108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट नवंबर अंत तक शुरू होकर अगले चार महीनों में पूरा हो जाएगा। सड़क निर्माण में नई क्रांति व्हाइट टॉपिंग तकनीक सड़क निर्माण में एक नया मोड़ है। यह तकनीक सड़कों को मजबूत और टिकाऊ बनाती है। इससे सड़कों का रखरखाव भी आसान हो जाता है। यह तकनीक लंबे समय में पैसा भी बचाती है। सरकार का यह कदम प्रदेश की सड़कों की दशा सुधारने में मददगार साबित होगा। इससे लोगों को आवागमन में सुविधा होगी और राज्य के विकास को गति मिलेगी। यह तकनीक भविष्य में सड़क निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह सड़कों को गर्मी से बचाती है. इससे शहरों का तापमान भी कम रहता है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बेहतर सड़कें और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा बेहतर यात्रा का अनुभव भोपाल में वल्लभ भवन मार्ग और सीएम हाउस मार्ग समेत 14 सड़कों को चिह्नित किया गया है। PWD ने 15 अन्य जिलों में भी एक-एक सड़क पर इस तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इन जिलों में इंदौर, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल से लेकर मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना,आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास और हरदा शामिल हैं। इससे इन जिलों की सड़कों की हालत में सुधार होगा। लोगों को बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। जानें क्या है व्हाइट टॉपिंग तकनीक व्हाइट टॉपिंग तकनीक में पुरानी सड़क की ऊपरी परत हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। इसमें M-40 ग्रेड सीमेंट और फाइबर बुरादा का इस्तेमाल होता है। 6 से 8 इंच मोटी यह परत सड़क को मजबूत बनाती है। भारी ट्रैफ़िक और खराब मौसम का भी इस पर कम असर होता है। इससे सड़क की उम्र 20 से 25 साल तक बढ़ जाती है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी है। कंक्रीट की सतह डामर से ज़्यादा ठंडी रहती है। इससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है। recent visitors 66

पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में 41 सड़कें और नई तकनीक से बनेंगी

 भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत राज्य के 21 जिलों में 41 मार्गों का निर्माण नई तकनीक से होगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है और इन्हें चार महीने में पूरा किया जाएगा। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अब सड़क निर्माण की नई तकनीक व्हाइट टॉपिंग को अपनाने का निर्णय लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 21 जिलों में चयनित 41 सड़कों पर इस तकनीक को लागू किया जाएगा। इन मार्गों की कुल लंबाई 109.31 किलोमीटर है। योजना को नवंबर के अंत तक शुरू करने की तैयारी है और इसे अगले 4 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के तहत सबसे अधिक 14 सड़कों पर कार्य भोपाल में किया जाएगा। अन्य जिलों में इंदौर और ग्वालियर में तीन-तीन सड़कें, बुरहानपुर, मंदसौर और सागर में दो-दो सड़कें, आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल, मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना और हरदा में एक-एक सड़क पर वाइट टॉपिंग तकनीक लागू की जाएगी। क्या है वाइट टॉपिंग तकनीक वाइट टॉपिंग सड़क निर्माण की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें पुरानी सड़कों पर कंक्रीट की मोटी परत चढ़ाई जाती है। यह प्रक्रिया सड़कों को न केवल मजबूत और टिकाऊ बनाती है, बल्कि उनकी आयु भी 20 से 25 साल तक बढ़ा देती है। इस तकनीक में सबसे पहले पुरानी सड़क की सतह को साफ किया जाता है। उसके बाद 6 से 8 इंच मोटी कंक्रीट की परत डाली जाती है, जो भारी यातायात और खराब मौसम का सामना करने में सक्षम होती है। recent visitors 130

भारतीय सड़क कांग्रेस और लोक निर्माण विभाग के सहयोग से शिविर का आयोजन

भोपाल सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में उभरती नवीनतम प्रवृत्तियों और तकनीकों पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में 19 और 20 अक्टूबर को किया जा रहा है। इसमें सड़क और पुल निर्माण की नवीनतम तकनीकों, सामग्रियों और अनुबंध निष्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहयोग से होगा। सेमिनार के पहले दिन 19 अक्टूबर को उद्घाटन-सत्र में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकनिर्माण मंत्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी(EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे। पहले दिन की प्रमुख चर्चाओं में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग, और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग, और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। दूसरे दिन 20 अक्टूबर को ईपीसी (EPC इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन)) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने और नवीनतम तकनीकों के माध्यम से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभवों और नवाचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रदेश की अवसंरचना परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिल सके। इस दो दिवसीय आयोजन से मध्यप्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक साबित होगा।   recent visitors 77