Wednesday, July 8, 2026 3:36 am

देश में अनिश्चितकालीन हिरासत में रखे गए रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई की मांग की, CJI चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट (SC) ने हाल ही में केंद्र से एक याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें देश में अनिश्चितकालीन हिरासत में रखे गए रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई की मांग की गई है। कोर्ट ने 12 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि "नोटिस जारी कर रहे हैं। इसका जवाब 27 अगस्त 2024 तक दिया जाना चाहिए।" मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये फैसला दिया। इसमें न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ ने केंद्र और अन्य से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। जनहित याचिका में भारत में युवा महिलाओं और बच्चों सहित रोहिंग्या शरणार्थियों को अनिश्चित काल के लिए हिरासत में रखने को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह कानून द्वारा स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। यह याचिका रीता मनचंदा ने दायर की है। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी, टी. मयूरा प्रियन, रचिता चावला और श्रेय रवि डंभारे कर रहे हैं। याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह सरकारों को निर्देश दे कि वे रोहिंग्या बंदियों को रिहा करें, जिन्हें विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम (भारत में प्रवेश), 1929 के तहत दो वर्षों से अधिक समय से हिरासत में रखा गया है। याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता रीता मनचंदा दक्षिण एशियाई संघर्षों एवं शांति स्थापना में विशेषज्ञता रखने वाली एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं। उन्होंने अपने सह-लेखक मनाहिल किदवई के साथ मिलकर 'डेस्टिनीज अंडर डिटेंशन' नाम से भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें उन्होंने भारत में विभिन्न हिरासत केंद्रों, किशोर गृहों और कल्याण केंद्रों में हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं के मामलों का डॉक्यूमेंटेशन किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन्हें अपनी रिपोर्ट में इस बात के सबूत मिले हैं कि हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं को कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया या उन्हें शरणार्थी के रूप में अपना मामला पेश करने का मौका नहीं दिया गया। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कई रोहिंग्या बंदियों को स्वच्छ पेयजल और पौष्टिक भोजन तक नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, यौन हिंसा और मानव तस्करी के अमानवीय अपराधों से बचकर निकलीं युवा रोहिंग्या महिलाओं को बिना किसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता के हिरासत में रखा गया है। उन्हें सामान्य रूप से चिकित्सा उपचार तक नहीं मिल पा रहा। याचिकाकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में हिरासत केंद्रों में हुई दो मौतों का भी जिक्र किया है। इसमें एक नाबालिग की मौत भी शामिल है, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा, "रोहिंग्या बच्चों को कोई शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका कोई भविष्य नहीं है।" याचिका में कहा गया है, "रोहिंग्याओं को हिरासत केंद्रों के अंदर उनके श्रम के लिए कोई मजदूरी नहीं दी जाती है। यह दर्शाता है कि हिरासत केंद्रों में बंदियों, विशेष रूप से युवा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और मानवीय सम्मान के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके अलावा, इस तरह की निरंतर हिरासत क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार है, जो यातना के बराबर है।" recent visitors 68

मुस्लिमों को रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताकर पीटने का मामला सामने आया, बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए ऐसा बदला!

नई दिल्ली दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं द्वारा झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे मुस्लिमों को रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताकर पीटने का मामला सामने आया है। इस दौरान कई झुग्गियों में तोड़फोड़ कर आग भी लगा दी गई। गाजियाबाद पुलिस ने इस मारपीट के संबंध में हिन्दू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके 15-20 अज्ञात साथियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि, बांग्लादेश में सियासी तख्ता पलट के बाद वहां रहने वाले हिन्दुओं पर किए जा रहे कथित अत्याचार की खबरों का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है।   जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम को गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले संजय नगर स्थित झुग्गी झोपड़ियों में रह रहे कूड़ा बीनने वाले लोगों पर हिन्दू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके साथियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमलावरों ने यहां रहने वाले लोगों के साथ गाली-गलौज कर उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस दौरान पिंकी चौधरी का कहना था कि ये लोग बांग्लादेशी हैं। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन फिर भी उग्र हुए लोग उनके साथ तोड़फोड़ करते रहे। इस पूरे मामले में पुलिस ने पिंकी चौधरी और उनके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर गाजियाबाद पुलिस इस घटना के संबंध में शनिवार को मधुबन बापूधाम थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराओं 191 (2), 354, 115 (2), 117 (4), 299, 324 (5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद की जिन झुग्गियों में यह तोड़फोड़ और मारपीट हुई यह घटना हुई वह गुलधर रेलवे स्टेशन के पास फ्री होल्ड कॉलोनी के पीछे बसी हुई हैं। पिटने वालों में कोई भी बांग्लादेशी नहीं था : एसीपी एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया, ''दिनांक 09.08.2024 को थाना मधुबन बापूधाम क्षेत्र अंतर्गत गुलधर रेलवे स्टेशन के पास झुग्गियों में कुछ लोग रह रहे थे। वहां पर हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी अपने 15-20 समर्थकों के साथ पहुंचकर उन पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट करने लगे और उनकी झुग्गियों में तोड़फोड़ करने लगे। जांच के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया कि वहां रह रहे लोगों में से कोई भी बांग्लादेशी नहीं था। उक्त घटना का संज्ञान लेते हुए हिंदू रक्षा दल अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके समर्थकों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई जारी है।''   recent visitors 65