Wednesday, July 1, 2026 9:13 pm

सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है

नई दिल्ली क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट जगत में कोई भी पहचान देने की जरूरत नहीं है। उनके योगदान को शब्दों में व्यक्त करना बेहद मुश्किल है। हालांकि, क्रिकेट की दुनिया से रिटायरमेंट लेने के बाद भी उनका संबंध खेल से बना हुआ है। क्या आप जानते हैं कि बीसीसीआई (BCCI) सचिन तेंदुलकर को हर महीने कितनी पेंशन देती है? अगर नहीं, तो इस लेख में हम आपको यही जानकारी देंगे, साथ ही यह भी बताएंगे कि अन्य क्रिकेटरों को क्या पेंशन मिलती है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2004 में एक पेंशन योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य रिटायर होने के बाद क्रिकेटरों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत पेंशन राशि खिलाड़ी के टेस्ट मैचों की संख्या पर आधारित थी। यानी, जितने ज्यादा टेस्ट मैच खेले होंगे, उतनी अधिक पेंशन मिलती है। यह योजना क्रिकेटरों की लंबी सेवा और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए बनाई गई थी। सचिन तेंदुलकर को कितनी पेंशन मिलती है? सचिन तेंदुलकर के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है। यह पेंशन उनकी लंबी क्रिकेट यात्रा और योगदान के आधार पर तय की गई है। बीसीसीआई का यह कदम सचिन जैसे महान खिलाड़ी के सम्मान के रूप में देखा जाता है। अन्य क्रिकेटर्स को क्या मिलती है पेंशन? सचिन तेंदुलकर के अलावा बीसीसीआई कई अन्य महान क्रिकेटरों को भी पेंशन देती है। उदाहरण के तौर पर: युवराज सिंह को हर महीने 60,000 रुपये की पेंशन मिलती है। विनोद कांबली को 6,30,000 रुपये की सालाना पेंशन मिलती है। यह पेंशन क्रिकेटरों को उनके योगदान के आधार पर दी जाती है, और यह उन खिलाड़ियों के लिए एक तरह का सम्मान और उनके क्रिकेट करियर के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है। recent visitors 39

तेंदुलकर के नाम दर्ज हुई खास उपलब्धि, MCC ने क्लब सदस्यता से सम्मानित किया

मेलबर्न  मेलबर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने घोषणा की है कि भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने इसकी मानद क्रिकेट सदस्यता स्वीकार कर ली है। एमसीसी की स्थापना 1838 में हुई थी और यह ऑस्ट्रेलिया के सबसे पुराने खेल क्लबों में से एक है। वे प्रतिष्ठित मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) के प्रबंधन और विकास के लिए भी जिम्मेदार हैं, जो वर्तमान में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पारंपरिक बॉक्सिंग डे टेस्ट की मेजबानी कर रहा है। एमसीसी नेअपने एक्स अकाउंट पर कहा, “एक आइकन को सम्मानित किया गया। एमसीसी को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि पूर्व भारतीय कप्तान सचिन तेंदुलकर ने खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान को स्वीकार करते हुए मानद क्रिकेट सदस्यता स्वीकार कर ली है।” तेंदुलकर को खेल के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक माना जाता है, उनका अंतरराष्ट्रीय करियर 1989 से 2013 तक चला। उन्होंने भारत के लिए 664 मैचों में 34,357 रन बनाते हुए 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए और 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे। भारत की कप्तानी करने वाले तेंदुलकर ने मेलबर्न में भारत के लिए पांच टेस्ट और सात वनडे खेले, जिसमें उन्होंने क्रमशः 449 और 190 रन बनाए। अब तक, वह मेलबर्न में खेले गए टेस्ट मैचों में भारत के अग्रणी रन स्कोरर हैं, जिसमें उनके नाम एक शतक और तीन अर्द्धशतक हैं। 2012 में, तेंदुलकर को ऑर्डर ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया का मानद सदस्य बनाया गया, जो यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बन गए। उसी वर्ष, उन्हें सिडनी क्रिकेट क्लब की मानद आजीवन सदस्यता भी दी गई। 2014 में, तेंदुलकर को इंग्लैंड में यॉर्कशायर काउंटी क्रिकेट क्लब की मानद आजीवन सदस्यता से सम्मानित किया गया। वह मैरीलबोन क्रिकेट क्लब के आजीवन सदस्य भी हैं, जो लंदन में लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड और मुंबई में एमआईजी क्रिकेट क्लब के संरक्षक हैं, जहां उन्होंने युवावस्था में प्रशिक्षण लिया था।   recent visitors 43

भारतीय पहलवान विनेश फोगाट की सपोर्ट में आये सचिन तेंदुलकर, कहा-सिल्वर की हकदार है, नियम में बदलाव का सुझाव

नई दिल्ली भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक में धमाकेदार अंदाज में लगातार तीन मुकाबले जीतकर फाइनल तक का सफर तय कर लिया था। लेकिन उन्हें 50 किग्रा वर्ग के स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था। विनेश ने अपना वजन कम करने के लिए सभी हथकंडे अपनाए लेकिन विफल रहीं। उन्होंने अगले ही दिन सोशल मीडिया पर अपने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती करियर को भी अलविदा कह दिया। हालांकि उनके पदक जीतने की आखिरी उम्मीद अभी कायम है। विनेश ने अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ खेल पंचाट में अपील की और मांग की कि उन्हें संयुक्त रजत पदक दिया जाए। जिसके लेकर सुनवाई होने वाली है। इस बीच भारत के दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने विनेश फोगाट के सपोर्ट में एक पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि विनेश फोगाट निश्चित तौर पर सिल्वर मेडल जीतने की हकदार है। उन्होंने नियमों को फिर से देखने का भी सुझाव दिया है। सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ''अंपायर काल्स का समय! हर स्पोर्ट्स में नियम होते हैं और शायद कभी-कभी उन पर पुनर्विचार भी किया जाना चाहिए। विनेश फोगाट ने फाइनल के लिए सही तरीके से क्वालीफाई किया था। फाइनल से पहले वजन के आधार पर उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना और उनसे रजत पदक छीन लिया जाना तर्क और खेल भावना के खिलाफ है।" सचिन तेंदुलकर ने कहा, "अगर किसी एथलीट को प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल जैसे नैतिक उल्लंघनों के लिए अयोग्य ठहराया जाता तो यह समझ में आता। उस स्थिति में, कोई भी पदक न दिया जाना और अंतिम स्थान पर रखा जाना न्यायोचित होगा।" उन्होंने आगे कहा, "विनेश ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर शीर्ष दो में जगह बनाई। वह निश्चित रूप से रजत पदक की हकदार है। हम सभी खेल पंचाट न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हमें उम्मीद करनी चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए कि विनेश को वह पहचान मिले जिसकी वह हकदार है।" विनेश ने खेल पंचाट (कैस) में 50 किग्रा वर्ग के ओलंपिक फाइनल से पहले अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ अपील की है जिसमें उन्होंने संयुक्त रजत पदक देने की मांग की है। विनेश ने अयोग्य घोषित होने के बाद दिन का एक बड़ा हिस्सा खेल गांव के अंदर पॉलीक्लिनिक में बिताया, क्योंकि वजन कम करने के उपाय के कारण उनके शरीर में पानी की कमी हो गई। इन उपायों में भूखा रहना, तरल पदार्थों से परहेज करना और पसीना बहाने के लिए पूरी रात जागना शामिल था। recent visitors 133