Wednesday, July 8, 2026 2:34 pm

अब घर बैठे आसान होगा रजिस्ट्री का काम, संपदा-2.0 पोर्टल और ऐप से पाएं सर्टिफाइड कॉपी

भोपाल   मध्यप्रदेश में पुरानी रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी लेने के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। इसे ऑनलाइन निकलवाया जा सकता है। पंजीयन विभाग ने संपदा-2.0 पोर्टल और मोबाइल ऐप पर यह सुविधा शुरू की है। जिन रजिस्ट्री का डिजिटाइजेशन नहीं हुआ, उनकी सर्टिफाइड कॉपी के लिए भी इस माध्यम से आवेदन किया जा सकेगा। पंजीयन विभाग उसे डिजिटाइज कर ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। इसके लिए 300 रुपए फीस तय की गई है। मंदसौर पहला जिला जहां के 100 फीसदी डिजिटाइज्ड आइजी (पंजीयन) अमित तोमर के अनुसार वर्ष 2000 तक के दस्तावेज डिजिटाइज किए जा चुके हैं। मंदसौरएमपी का पहला जिला है जहां के 100 फीसदी रजिस्ट्री दस्तावेज डिजिटाइज हो चुके हैं। यहां 1908 तक की रजिस्ट्री डिजिटाइज हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रयास के लिए मध्यप्रदेश सरकार को 24 करोड़ रुपए का विशेष अनुदान भी दिया है। क्या करना होगा: स्टेप-बाय-स्टेप समझिए -1- एमपीआइजीआर के संपदा पोर्टल पर जाएं। मांगी गई जानकारियां देकर लॉगिन आइडी बनाएं। -2- दस्तावेज प्रमाणित प्रति पर क्लिक कर ओपन करें।  3- पुरानी रजिस्ट्री का डॉक्यूमेंट नंबर डालकर सर्च करें। -4- डॉक्यूमेंट नंबर नहीं है तो किन वर्षों के बीच रजिस्ट्री कराई, वह अवधि और नाम से रजिस्ट्री सर्च करें। मिलने पर एड टू कार्ट करें। -5- अब तय शुल्क जमा करें। -6- संबंधित सब रजिस्ट्रार के डिजिटल हस्ताक्षर युक्त सर्टिफाइड कॉपी ई-मेल और व्हाट्सऐप पर भेजी जाएगी। जो रजिस्ट्री डिजिटाइज नहीं हैं, उनकी कॉपी के लिए यहीं से आवेदन किया जा सकता है। recent visitors 22

मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री की प्रक्रिया हुई डिजिटल, रजिस्ट्री ऑफिस के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत, जानें संपदा 2.0 के फायदे

भोपाल मध्यप्रदेश में अब जमीन या मकान-दुकान की रजिस्ट्री कराना बहुत आसान हो गया है। 10 अक्टूबर से नए नियम लागू हो रहे हैं, जिसमें अब आपको गवाह लाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और न ही बार-बार रजिस्ट्री ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसे लेकर एमपी के फाइनेंस मिनिस्टर जगदीश देवड़ा ने बताया कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। इसके लिए संपदा 2.0 नाम का एक नया सॉफ्टवेयर लॉन्च किया जा रहा है। सीएम डॉक्टर मोहन यादव 10 अक्टूबर को इसका शुभारंभ करेंगे। सॉफ्टवेयर का यहां हुआ पायलट प्रोजेक्ट इससे पहले संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर को गुना, हरदा, डिंडौरी और रतलाम जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया गया था। जहां इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली। अब इसे पूरे प्रदेश के 55 जिलों में लागू किया जा रहा है। इन सुविधाओं का मिलेगा फायदा नए नियमों के तहत, खरीदार और विक्रेता की पहचान आधार और पैन कार्ड से होगी। संपदा 2.0 में ई-केवाईसी से पहचान की जाएगी। वीडियो केवाईसी की सुविधा भी होगी। इसके अलावा संपत्ति की जीआईएस मैपिंग, बायोमेट्रिक पहचान और दस्तावेजों का अपने आप फॉर्मेट होना जैसी कई नई सुविधाएं भी शामिल हैं। डिजिटल सिग्नेचर से तैयार किए जा सकेंगे डॉक्यूमेंट सबसे बड़ी बात यह है कि संपदा 2.0" के जरिए डिजिटल सिग्नेचर से डॉक्यूमेंट तैयार किए जा सकेंगे। इसका मतलब है कि अब रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्री ऑफिस जाने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी। पंजीयन अधिकारी से वीडियो कॉल के जरिए भी बात की जा सकेगी। दस्तावेजों की ई-कॉपी डिजी लॉकर, व्हाट्सएप और ई-मेल पर भी होगी। इसकी मदद से रजिस्ट्री प्रक्रिया में आसानी और पारदर्शिता भी आएगी। recent visitors 126