उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा प्रदेश के हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ग्वालियर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण योजना की गहन समीक्षा की उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री एवं ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जय आरोग्य अस्पताल, ग्वालियर में सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग के आवश्यक पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार करने और अस्पताल भवन के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों को शीघ्रता एवं प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में ग्वालियर क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के अधोसंरचना विकास, मैन पॉवर, उपकरण उपलब्धता की विस्तारपूर्वक समीक्षा कर आवश्यक व्यवस्थाओं के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार समस्त अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बाहर न जाना पड़े। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकास, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और चिकित्सकीय स्टॉफ की पर्याप्त नियुक्ति सुनिश्चित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत सांवेर विधानसभा क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, तथा संचालक नीरज कुमार सिंह उपस्थित रहे।   recent visitors 40

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य अमले को तैयारियों के लिए जारी किये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राज्य में बढ़ती गर्मी और लू की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकाल के समय में सभी नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं। समस्त स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक तैयारियों के लिए निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने अपील की है कि सभी नागरिक सावधानियों का अवश्य पालन करें। प्रबंध संचालक, एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षकों को गर्मी के दृष्टिगत स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियों और जागरूकता के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गर्मी के मौसम में भारत सरकार द्वारा हीट रिलेटेड इलनेस से बचाव के लिए दिशा-निर्देश को जिला व स्वास्थ्य संस्थानों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के लिए कहा है। साथ ही जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इन पर चर्चा कर संबंधित विभाग प्रमुखों को भी अवगत कराने के निर्देश दिए गये हैं। उन्होंने जनसामान्य को जागरूक करने और सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में रोगियों को एचआरआई से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, आईएचआईपी पोर्टल पर प्रतिदिन एचआरआई मामलों की रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है। इससे अधिक तापमान से होने वाली बीमारियों व अवांक्षित घटनाओं को रोका जा सकेगा। क्या करें हाइड्रेटेड रहना है जरूरी गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम समस्या है। इससे गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। नागरिक दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। यात्रा करते समय पानी अवश्य साथ रखें। ओआरएस, नींबू पानी, लस्सी, छाछ, फलों के रस (थोड़ा नमक मिलाकर) जैसे घरेलू पेय का सेवन लाभकारी होता है। तरबूज, खरबूजा, संतरा, अंगूर, अनानास, खीरा जैसी मौसमी फल-सब्ज़ियों का सेवन शरीर में तरलता बनाए रखने में सहायक होता है। शरीर को ढँककर रखें धूप में निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढँकना बेहद जरूरी है। हल्के रंग के, सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि गर्मी से राहत मिल सके। सिर को टोपी, छतरी, गमछा या पारंपरिक उपायों से ढकना चाहिए। नंगे पांव धूप में जाना भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए चप्पल या जूते पहनना अनिवार्य है। घर को ठंडा और सुरक्षित बनाएँ जहाँ तक हो सके, दोपहर के समय घर के अंदर या छांव में रहें। घर में ठंडी हवा का संचार बना रहे, इसके लिए दिन में खिड़कियां और पर्दे बंद रखें और रात में उन्हें खोल दें। बाहर जाना जरूरी हो, तो सुबह या शाम के ठंडे समय में ही जाएं। गर्मी के समय बाहरी गतिविधियों को सीमित करना आवश्यक है। घर में ठंडक बनाए रखने के लिए पर्दे, शटर या सनशेड का उपयोग करें। दिन में निचली मंजिल पर रहना ज्यादा सुरक्षित होता है। शरीर को ठंडा रखने के लिए पंखा, ठंडा पानी, गीले कपड़े, या 20°C के पानी में पैरों को डुबोना सहायक होता है। विशेष ध्यान देने योग्य संवेदनशील वर्ग छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मानसिक या शारीरिक बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति और बाहर कार्य करने वाले लोग अधिक संवेदनशील होते हैं। इन लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा और देखरेख की आवश्यकता होती है। ठंडे प्रदेश से गर्म प्रदेश में आने वाले लोगों को अपने शरीर को नई जलवायु के अनुसार ढालने के लिए समय देना चाहिए। मौसम की जानकारी रखें रेडियो, टीवी, समाचार पत्रों या भारत मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट (https://mausam.imd.gov.in) से मौसम की ताज़ा जानकारी लेते रहें। मौसम की पूर्व चेतावनियों को गंभीरता से लें और उसी अनुसार अपने कार्यक्रम बनाएं। बचाव के लिए ये गलतियां न करें दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बाहर न निकलें। इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है। भारी कामकाज या शारीरिक मेहनत भी टालें। नंगे पांव बाहर न निकलें। गर्मी में खाना पकाते समय रसोई में वेंटिलेशन रखें। शराब, चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, या अधिक मीठे पेयों से बचें, ये शरीर से तरलता कम करते हैं। बासी और भारी प्रोटीन युक्त भोजन न करें। किसी भी परिस्थिति में बच्चों या पालतू जानवरों को बंद वाहन में न छोड़ें। श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए विशेष निर्देश काम की जगह पर ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य है और हर 20 मिनट में पानी पीने की सलाह दी जाए। काम को सुबह-शाम के समय शेड्यूल करें। छांव की व्यवस्था करें और कार्य के बीच पर्याप्त आराम दें। नए श्रमिकों के लिए कार्य का समय धीरे-धीरे बढ़ाएं ताकि वे मौसम के अनुसार ढल सकें। श्रमिकों को गर्मी से संबंधित लक्षणों की पहचान और प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दें। ‘बडी सिस्टम’ अपनाएं और प्रशिक्षित फर्स्ट एड कर्मियों की व्यवस्था करें। गर्भवती या बीमार श्रमिकों के लिए डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है। भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में सावधानी खेलों या धार्मिक आयोजनों जैसे भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में अत्यधिक गर्मी और पसीने के कारण हीट रिले़टेड इलनेस (एचआरआई) की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे आयोजनों में पर्याप्त पानी, छांव और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य है। उपस्थित लोगों को लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए। गर्मी से होने वाली बीमारियां और लक्षण अत्यधिक गर्मी से शरीर का तापमान ऊपर जा सकता है, जिससे हीट स्ट्रेस, हीट रैश, हाथ-पांव सूजना, मांसपेशियों की ऐंठन, चक्कर आना, हीट एक्सहॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे दिल, फेफड़े, किडनी जैसी पुरानी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। लक्षणों में चक्कर, बेहोशी, उल्टी, सिरदर्द, बहुत ज्यादा प्यास, गाढ़ा पेशाब, तेज़ सांस और दिल की धड़कन शामिल हैं। मांसपेशियों की ऐंठन होने पर तुरंत ठंडे स्थान पर आराम करें और ओआरएस पिएं। एक घंटे से अधिक ऐंठन रहने पर डॉक्टर से परामर्श लें। हीट स्ट्रोक: जानलेवा स्थिति हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें शरीर का तापमान 40°C से ऊपर हो सकता है और व्यक्ति बेहोश, भ्रमित या चिड़चिड़ा हो सकता है। त्वचा लाल, गर्म और सूखी हो जाती है। बच्चों में संकेत: दूध न पीना, चिड़चिड़ापन, पेशाब कम होना, आंखों का धंसना, सुस्ती या झटका आना, शरीर से खून आना आदि। तुरंत क्या करें 108 या 102 पर कॉल करें। व्यक्ति को ठंडी जगह ले … Read more

यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में वैश्विक क्षितिज पर उभर रहा है। यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल सफल रिट्रीट भोपाल में एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ऑल इंडिया काउंसिल मीट-2025 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने एसोसिएशन के सभी प्रतिनिधियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं एवं श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों प्रतिनिधियों को सम्मानित किया अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते है उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को आशा और संभावनाओं की दृष्टि से देख रही है। भारत वह राष्ट्र है जो विश्व में शांति स्थापित करने की सामर्थ्य रखता है। आज का भारत अपने निर्णय अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं, बल्कि वैश्विक हित में लेता है। हमारी सेनाएं पूरी मजबूती के साथ खड़ी हैं। अब वह समय नहीं जब हम ज़मीन पर विजय के बाद टेबल पर हार जायें, अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भारतीय सेना के साथ जुड़कर कार्य करना गौरव और राष्ट्रसेवा का अवसर है। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। सैन्य क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता, अनुशासन और प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और एसोसिएशन इन सभी मानकों पर खरा उतर रहा है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। भविष्य में हथियार भी भारतीय होंगे उन्हें चलाने वाले भी स्वदेशी होंगे। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य भारतीय सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर भारत माता की सेवा कर रहे हैं, यह अत्यंत गर्व की बात है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 80 जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारी, बिल्डर्स, सैन्य क्षेत्र से जुड़े अधिकारी एवं प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।   recent visitors 32

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अपने ज्ञान का प्रयोग समाज के उत्थान में करें। केवल व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, समाज और देश के विकास में भी भागीदारी आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के बाद ही असली कार्य प्रारंभ होता है। अपने योगदान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे राष्ट्र के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अधोसंरचना, आर्थिक समृद्धि, और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को दोहराया और कहा कि ‘स्किल, स्केल और स्पीड’ के तीन स्तंभों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि "धरती से दौलत निकालनी होगी"- इस विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए ‘नदी जोड़ो परियोजना’ के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नव युग की शुरुआत हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज युवाओं के पास विकास के बहुत अवसर हैं। इन अवसरों का लाभ उठायें। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग स्वयं, समाज, देश और विश्व के कल्याण के लिये करें। उन्होंने कहा कि समाज युवाओं की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और युवाओं को इस भरोसे पर खरा उतरना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की दीक्षांत समारोह स्मारिका तथा "कंप्यूटर एक परिचय" पुस्तक के 41वें संस्करण का विमोचन भी किया। समारोह में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे, इसरो के वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक राधाकांत पाढ़ी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।   recent visitors 58

MP के रीवा शहर में बनेगा कैंसर अस्पताल, अब मरीजों को नहीं जाना होगा भोपाल

रीवा मध्य प्रदेश को जल्द ही एक और कैंसर अस्पताल की सौगात मिलने वाली है, इस बात की जानकारी डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने दी है. उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं, एक से डेढ़ साल के बीच ही अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा, वहीं अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस में ऑर्डर भी दे दिए गए हैं. यह कैंसर अस्पताल में विंध्य अंचल में खुलेगा ऐसे में अब यहां के मरीजों को भोपाल या इंदौर जाने की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि उन्हें उनके ही घर में कैंसर का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा.  कैंसर एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। यह जिसे भी हो जाए उसके परिवार को तबाह करके रख देती है। समय पर यदि इसका इलाज ना मिले, तो यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा कर उसकी जान ले सकती है। कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की हक्की-बक्की गुम हो जाती है। कैंसर का इलाज काफी महंगा भी है, लेकिन कुछ ऐसे भी संस्थान है, जहां फ्री में या फिर बहुत ही कम पैसे में इसका इलाज कराया जाता है। जो लोग कैंसर से पीड़ित हो जाते हैं, उन्हें जीवन भर डॉक्टर की निगरानी में रहना पड़ता है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के रीवावासियों के लिए खुशखबरी है। बता दें कि जिले में कैंसर अस्पताल बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले 1 से डेढ़ साल में यहां कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। स्थानीय लोगों को फायदा मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, यहां निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस आर्डर भी दे दिए गए हैं। जिसकी जानकारी खुद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दी है। उन्होंने बताया कि काफी लंबे समय से इस प्रोजेक्ट पर विचार किया जा रहा था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस अस्पताल को बनाने का निर्णय लिया गया। जिसमें पहले 200 बेड की व्यवस्था की जाएगी। इस अस्पताल के बनने से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। मिलेगा बेहतर इलाज रीवा के लोगों को इलाज के लिए टाटा मेमोरियल या फिर भोपाल एम्स जाना पड़ता था, लेकिन रीवा में ही कैंसर अस्पताल बनने के बाद उनकी यह परेशानी दूर हो जाएगी। यहां उन्हें बेहतर इलाज मिल पाएगा। करोड़ों की लागत से बन रहे इस अस्पताल में मरीज को बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। कैंसर की अस्पताल में 20 से 25 करोड़ की लागत की कई मशीन लगाई जाएगी। जिसकी मदद से पहले स्टेज में ही कैंसर का पता लगाया जाएगा। साथ ही इसका इलाज भी शुरू कर दिया जाएगा। एक से डेढ़ साल में बनेगा अस्पताल के बनने से रीवा के लोगों को अब इलाज के टाटा मेमोरियल और भोपाल एम्स नहीं जाना पड़ेगा। रीवा में ही उन्हें बेहतर इलाज हो पाएगा, अगले एक से डेढ़ साल में कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। करोड़ों रुपयाें की मशीनों से होगा इलाज बता दें कि, कैंसर के इलाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण मशीनों की जरूरत होती है। जिनमें लीनियर एक्सीलरेटर, कोबाल्ट मशीन, पेट स्कैन समेत ब्रेकीथेरेपी मशीन भी शामिल है। अकेले लीनियर एक्सीलरेटर मशीन की कीमत 50 से 60 करोड़ रुपए की है। recent visitors 37

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा को विकसित बनाने के साथ जल समृद्ध बनाना

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा को विकसित बनाने के साथ जल समृद्ध बनाना है। वर्षा के जल को संरक्षित करने तथा प्राचीन जल स्त्रोतों में सुधार कार्य कर जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में पानी की कमी न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्राम पंचायत सगरा में केन्द्रीय जल शक्ति विभाग के सहयोग से बोर के माध्यम से संग्रहित होने वाले भूजल को जमीन के भीतर संचयित किये जाने के कार्य का शुभारंभ किया। ग्राम पंचायत सगरा में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार के जल शक्ति विभाग के सहयोग से रीवा जिले में 100 बोरवेल के माध्यम से संग्रहित होने वाले जल को जमीन के अंदर संचित किये जाने का कार्य प्रारंभ हो रहा है। इसके अतिरिक्त जल गंगा अभियान में जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य आगामी 3 माह तक नियमित रूप से संचालित होंगे। यह प्रयास है कि वर्षा का जल बर्बाद न हो। जमीन के अंदर इसका संचयन हो तथा जल स्त्रोत भी पानीदार रहे ताकि जिले का भूजल स्तर कम न हो। उन्होंने जल संरक्षण कार्य में आमजनों की सहभागिता की भी अपेक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा जहां एक ओर हर घर को शुद्ध पानी पहुंचाने का कार्य हो रहा है वहीं दूसरी ओर जल संचयन, संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर के पानी का दोहन न होकर इसका पोषण हो यह इस योजना का लक्ष्य है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि जल गंगा अभियान अन्तर्गत जिले के तालाब निर्माण के साथ ही मनरेगा से पानी बचाने की संरचनाओं को पूर्ण किये जाने के कार्य कराये जायेंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर ने जल संचयन कार्य में गुजरात के दल को प्रशासन के पूर्ण सहयोग की बात कही। इससे पूर्व गुजरात के जल संचयन दल प्रभारी अमित सिंह ने बताया कि रीवा जिले में 100 बोर कर संग्रहित पानी को चेम्बर बनाकर भूमि के अंदर संचयित किया जायेगा। इस कार्य का शुभारंभ सगरा से किया गया है। सरपंच श्रीमती सावित्री राजेश पाल, सीईओ जनपद संजय सिंह, समाजसेवी राजेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन व ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित रहे।   recent visitors 34

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बेसिक्स आफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ

मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बेसिक्स आफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक है। गभर्वती महिला की समय-समय पर जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श देकर एवं उनके परिजनों को जागरूक कर मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में गायनी विभाग के तत्वाधान में “बेसिक्स ऑफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीयन हो। उसकी समय-समय पर जांच की जाकर चिकित्सकीय परामर्श दिया जाय और यह प्रयास हों कि वह क्रिटिकल अवस्था में पहुंचे ही नहीं। चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएँ देकर एवं ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य कार्यकर्ता व स्टाफ अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए गर्भवती महिला का ध्यान रखें और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने का समन्वित प्रयास करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हुई है। चिकित्सकों के पदों की पूर्ति की गई है। मेडिकल कालेज खोले गये हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है इससे वहां जिला अस्पताल जैसी सभी सुविधाएँ मुहैया रहें। उन्होंने चिकित्सकों व स्वास्थ्य विभाग के अमले को इस चुनौती का सामना करते हुए संकल्प के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जिससे प्रदेश मातृ मृत्यु व शिशु मृत्यु दर कम कर पाने में सफल हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कार्यशाला में विचार विमर्श व प्राप्त सुझावों का नीचे स्तर तक लाभ मिलेगा और यह कार्यशाला सार्थक सिद्ध होगी। उन्होंने कार्यशाला में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ व बीएमओ की उपस्थिति की बात कही। कार्यशाला में मिशन डायरेक्टर एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने भोपाल से वीडियो कांफ्रेंसिग से सम्मिलित हुई। डायरेक्टर एनएचएम एमसीएच (रेगुलेशन एण्ड पॉलिशी) डॉ. अरूणा कुमार ने मातृ मृत्यु दर का संभागवार प्रस्तुतीकरण देते हुए उसे कम करने के विषय में जानकारी दी। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरूण श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि कार्यशाला से चिकित्सक सीख लेकर समर्पित भाव से कार्य करें तो हम प्रदेश में मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर को कम कर सकेंगे। उन्होंने शोध व अकादमिक स्तर को सशक्त बनाने की भी बात कही। संचालक श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को उप मुख्यमंत्री शुक्ल के प्रयासों से पर्याप्त बजट प्राप्त हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हो रही है। रीवा भी उक्त स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रदेश में पीछे नहीं है। डॉ. बीनू कुशवाहा, डीन मेडिकल कालेज डॉ. सुनील अग्रवाल, अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालय के गायनी विभाग के चिकित्सक, मेडिकल कालेज के चिकित्सक तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।   recent visitors 31