उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आने वाला समय भारत का है। हम फिर से सोने की चिड़िया बनने की राह पर हैं और इस सपने को पूरा करने के लिए अच्छा स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, सबसे पहला सुख निरोगी काया है। विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ भारत आवश्यक है। इसके लिए नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा, स्वस्थ जीवन शैली अपनानी होगी और नियमित जाँच करवानी होगी, ताकि रोगों का समय पर निदान हो सके और प्रसार को रोका जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ज्ञान विज्ञान भवन, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल में भोजपाल मित्र परिषद द्वारा आयोजित कैंसर जाँच एवं जागरूकता शिविर का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिये सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि शासकीय प्रयासों के साथ निजी सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2003 में प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। आगामी 2 वर्षों में 8 नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले जाने की योजना है। इसके अलावा, 12 जिलों में पीपीपी मोड से मेडिकल कॉलेज स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘राइट टू हेल्थ’ के साथ ‘राइट टू स्क्रीनिंग’ भी ज़रूरी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भोजपाल मित्र परिषद द्वारा कैंसर जागरूकता एवं जाँच शिविर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि कैंसर की सही समय पर जाँच निदान को सरल बनाती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि 'राइट-टू-हेल्थ' के साथ 'राइट-टू-स्क्रीनिंग' भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे देश में 30 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों की जाँच के लिए 20 फरवरी से 31 मार्च तक निःशुल्क निरोगी काया अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें बीपी, सुगर, फैटी लीवर और कैंसर की जाँच की जा रही है। उन्होंने उपस्थित युवाओं और प्रबुद्ध जनों से आह्वान किया कि इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इससे अधिक से अधिक नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। निरोगी काया अभियान में की जा रही है निःशुल्क जाँच उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के तहत असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों पर जाँच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। रोगों की पहचान होने पर त्वरित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सिविल अस्पतालों अथवा जिला चिकित्सालयों में उपचार प्रारंभ किया जा रहा है। नए मरीजों की पहचान के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा की जा रही है। प्राप्त जानकारी के आधार पर असंचारी रोग स्क्रीनिंग एवं पंजीयन का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए विभिन्न बीमारियों के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी भी दी जा रही है। हर संभागीय मुख्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रयास उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कैंसर के इलाज के लिए शीघ्र ही प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में 'सेंटर-ऑफ-एक्सीलेंस' स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में अत्याधुनिक उपकरण जैसे ब्रेकी थेरेपी, पेट स्कैन, लीनियर एक्सीलरेटर आदि की सुविधा होगी तथा पर्याप्त मैनपॉवर की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क और सजग रहना भी आवश्यक है, ताकि जीवनशैली में सुधार कर स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सके। आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का प्रशस्त करता है मार्ग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण और उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने योग और प्राणायाम को जीवन में अपनाने पर बल दिया। आरोग्य भारती के अशोक वाष्णेय ने संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या और सकारात्मक सोच को स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन का मूल बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र और मौसम के अनुरूप भोजन करना और नियमित व्यायाम को जीवनशैली में शामिल करना आवश्यक है। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, हरिओम जटिया, पीपल्स ग्रुप के डायरेक्टर रोहित पंडित, डॉ. अनिकेश गोयनका, भोजपाल मित्र परिषद के आशीष पांडेय, आशीष जनक सहित अन्य पदाधिकारी, चिकित्सक और चिकित्सा छात्र उपस्थित रहे।   recent visitors 40

उप मुख्यमंत्री ने खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता प्रबंधन की समीक्षा में दिये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा "मन की बात" में देशवासियों को उचित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संतुलित और स्वच्छ भोजन नागरिकों के स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य संस्थानों को सही खाद्य पदार्थों का उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिये की जा रही कार्यवाहियों और गतिविधियों की वृहद समीक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुक्त फूड सेफ्टी संदीप यादव, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश कुमार मौर्य, संयुक्त नियंत्रक श्रीमती माया अवस्थी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। हर ज़िले में हेल्दी और हाईजीनिक फ़ूड स्ट्रीट बनायें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि प्रदेश में एक महीने का विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जाये। जिसमें सभी जिलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच हो साथ ही अच्छी प्रैक्टिस की जानकारी भी दी जाये। एक माह बाद खाद्य गुणवत्ता में सुधार के प्रभाव की समीक्षा कर आगामी कार्य योजना का निर्धारण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा संबंधी बेहतर तरीकों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने का प्रयास किया जाए ताकि वे अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता का प्रसार कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हर ज़िले में हेल्दी और हाईजेनिक फ़ूड स्ट्रीट प्रमाणन के प्रयास किए जायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "ईट राइट इंडिया अभियान" को गति देगा और नागरिकों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश को आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि हेल्दी और हाइजीनिक फूड की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 3 नवीन संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का किया जा रहा है निर्माण खाद्य पदार्थों की जाँच में तेज़ी लाने के लिये 3 नई संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का निर्माण इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में किया जा रहा है। इंदौर और जबलपुर में मशीनें स्थापित कर मानव संसाधन उपलब्ध कराकर परीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। ग्वालियर में 60% सिविल कार्य पूरा हो चुका है। भोपाल में हाइटेक माइक्रो बॉयोलॉजी प्रयोगशाला का 80% निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 अंतर्गत प्रदेश में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2024 तक 10,670 लीगल नमूने और 31,387 सर्विलेंस नमूने लिए गए, जिनमें से 30,692 नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 1,663 नमूने असुरक्षित, अवमानक या मिथ्या छाप पाए गए। विभाग ने 1,729 प्रकरण दायर किए और 2,015 प्रकरणों का निपटारा किया, जिनमें से 2,000 प्रकरणों में दोष सिद्धि हुई। इस अवधि में 24,485 लाइसेंस और 1,46,258 रजिस्ट्रेशन जारी किए गए। लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन से ₹12.47 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि ₹9.02 करोड़ का अर्थदंड अधिरोपित कर ₹2.98 करोड़ की वसूली की गई। 13 हज़ार से अधिक खाद्य कारोबारियों को किया जा चुका है प्रशिक्षित खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु 270 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 13,588 खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया गया है। चलित खाद्य प्रयोगशाला के माध्यम से 563 जनजागरूकता कार्यक्रमों में 15,185 नागरिकों को प्रशिक्षण दिया गया। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल निर्माताओं को भारत सरकार के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। ‘ईट राइट’ गतिविधि के तहत 10 ईट राइट कैंपस, 9 ईट राइट स्कूल, 3 क्लीन वेजिटेबल मार्केट, 4 सेफ भोग प्लेस, 188 हाईजीन रेटिंग और 2 ईट राइट स्टेशनों को प्रमाणित किया गया है। अवमानक असुरक्षित खाद्य पदार्थों के नियंत्रण के वैधानिक प्रावधान संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। अवमानक खाद्य (सब स्टैंडर्ड) वह होता है जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता, लेकिन इससे मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता। मिथ्या छाप खाद्य (मिस ब्रांड) वह खाद्य पदार्थ है, जिसके संबंध में आवश्यक जानकारी या गुण-दोष लेवल पर सही तरीके से अंकित नहीं किए गए हों। वहीं, असुरक्षित खाद्य (अनसेफ) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनकी प्रकृति, गुणवत्ता या सामग्री मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। अधिनियम के तहत दो प्रकार के प्रकरण अभियोजित किए जाते हैं। सिविल प्रकरण (धारा 51 से 58 एवं 61, 63) में अवमानक या मिथ्या छाप से संबंधित अपराध या नियमों का उल्लंघन होने पर मामले न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। आपराधिक प्रकरण (धारा 59, 60, 62, 64, 65) में असुरक्षित खाद्य या बिना लाइसेंस व्यापार से जुड़े मामले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होते हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।   recent visitors 32

प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका

टीबी मुक्त भारत के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों की सराहना की  प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें क्षयरोग मुक्त घोषित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल शासकीय प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इसे साकार किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि इस अभियान में सहयोग दें और टीबी मुक्त मध्यप्रदेश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सबकी मेहनत और सेवा भाव से ही मध्यप्रदेश क्षयरोग उन्मूलन की दिशा में इतनी तेज गति से आगे बढ़ा है। निक्षय मित्रों ने अपने स्तर पर आर्थिक और पोषण सहायता प्रदान कर मरीजों को नया जीवन दिया है, जो एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से हम टीबी मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे। मध्यप्रदेश में 100 दिवसीय विशेष निक्षय शिविर अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से 23 जिलों में गहन टीबी खोज और उपचार अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य उच्च टीबी बोझ वाले जिलों में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए मामलों को रोकना है। इस अभियान के तहत 78 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 21 हजार 430 नए टीबी मरीज चिन्हित (नोटिफाई) किए गए और उनका तुरंत उपचार शुरू कराया गया। डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इस दौरान 19 हजार से अधिक निक्षय मित्रों ने 25 हजार से अधिक टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान की और 4 लाख से अधिक नागरिकों ने टीबी मुक्त भारत के संकल्प की शपथ ली। प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के अंतर्गत 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश ने क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त किया है। वर्ष 2020 में संभावित क्षयरोगी दर 532 प्रति लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 3031 प्रति लाख हो गई, जो रोगियों की शीघ्र पहचान और बेहतर निगरानी का प्रमाण है। वर्ष 2024 में 1 लाख 90 हजार क्षय रोगियों को खोजने के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 81 हजार 85 (95%) रोगियों की पहचान की गई। प्रदेश में टीबी उपचार की सफलता दर 87% है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। गत 1 नवंबर 2024 से सभी अधिसूचित टीबी मरीजों को उपचार के दौरान एक हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो पहले 500 रूपये प्रतिमाह थी। इसके अलावा, अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में सभी खोजे गए टीबी रोगियों को 750 रूपये की एकमुश्त राशि भी प्रदान की जा रही है। प्रदेश की सभी जेलों में भी समय-समय पर आईसीएमआर की हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। बलगम के नमूने लेकर उन्हें सीबीनेट और टूनेट मशीनों द्वारा जांच की जाती है, जिससे जेलों में क्षयरोग के मामलों की शीघ्र पहचान हो रही है।   recent visitors 41

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नियमित जाँच और अंगदान को बढ़ावा देने का किया आह्वान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी रोगों से बचा जा सकता है। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से किडनी रोगों के प्रति जागरूक रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के प्रमुख कारण हैं। इसके नियंत्रण के लिए समय पर जांच और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं लेकिन अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें। अपने आहार में किडनी के लिए अनुकूल फल और सब्जियाँ शामिल करें और भोजन में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों का प्रयोग करें। नियमित रूप से व्यायाम करें और धूम्रपान व शराब के सेवन से बचें। साथ ही, चीनी और नमक के अधिक सेवन से परहेज करें ताकि किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित न हो। वर्तमान वर्ष में अब तक 1 लाख 76 हज़ार से अधिक डायलिसिस सत्र सफलतापूर्वक संपन्न उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सभी नागरिकों को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार किडनी रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और डायलिसिस सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 67 डायलिसिस इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनमें 325 डायलिसिस मशीनों से मरीजों को राहत प्रदान की जा रही है। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक 5058 मरीजों ने इन सेवाओं का लाभ लिया, और इस अवधि में 1,76,975 डायलिसिस सत्र सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। सभी शासकीय चिकित्सालयों में गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवा सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन वीडियो मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे राज्य स्तर से सभी डायलिसिस इकाइयों पर निगरानी रखी जा रही है। रोकथाम और प्रारंभिक पहचान पर जोर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त सभी मरीजों की नियमित सीकेडी जांच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि इस बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में पहचाना और नियंत्रित किया जा सके। सभी चिकित्सकों को भी इस विषय में जागरूक किया जा रहा है कि वे उच्च जोखिम वाले मरीजों की समय पर पहचान कर उचित मार्गदर्शन दें।उन्होंने नागरिकों से अंगदान को अपनाने की अपील की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार अंग प्रत्यारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं पर कार्य कर रही है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को नया जीवन मिल सके। किडनी विकारों के कारण और बचाव दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन: दर्द कम करने वाली एनएसएआईडी और एनाल्जेसिक दवाएं अत्यधिक उपयोग से किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बिना चिकित्सक की सलाह के इनका लंबे समय तक सेवन न करें। अधिक नमक का सेवन: ज्यादा नमक या सोडियम युक्त आहार से रक्तचाप बढ़ता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक की जगह जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करें। प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड में सोडियम, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक होती है। इससे किडनी रोग का खतरा 24% तक बढ़ सकता है। इनकी जगह ताजा और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ अपनाएं। कम पानी पीना: शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा न होने से किडनी विषाक्त पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे क्षति का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, खासकर गर्म मौसम में या अधिक शारीरिक गतिविधि करने पर। नींद की कमी: अच्छी नींद संपूर्ण स्वास्थ्य और किडनी के सुचारू कार्य के लिए आवश्यक है। नींद-जागने का चक्र किडनी के कार्य भार को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में संतुलन बना रहता है। अत्यधिक मांस का सेवन: प्रोटीन जरूरी है, लेकिन अधिक मात्रा में मांस खाने से किडनी पर दबाव बढ़ सकता है। संतुलित आहार का पालन करें और अपनी प्रोटीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखें। अत्यधिक चीनी खाना: अधिक चीनी मोटापे को बढ़ाती है, जिससे उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बढ़ता है। ये दोनों किडनी रोग के प्रमुख कारण हैं। धूम्रपान: धूम्रपान न केवल हृदय और फेफड़ों के लिए बल्कि किडनी के लिए भी हानिकारक है। धूम्रपान करने वालों में मूत्र में प्रोटीन बढ़ने की संभावना अधिक होती है, जो किडनी खराबी का संकेत हो सकता है। अत्यधिक शराब सेवन: ज्यादा शराब पीने से किडनी के कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है और रक्तचाप बढ़ सकता है, जो किडनी रोग का प्रमुख कारण है। निष्क्रिय जीवनशैली: नियमित व्यायाम से वजन, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखा जा सकता है, जिससे किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है। लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।   recent visitors 33

जीरो कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र : मंत्री शुक्ला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की विधानसभा में प्रस्तुत किया गया बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब युवा, अन्नदाता और नारी (जीवायएएन) पर ध्यान के मंत्र पर फोकस के साथ ही धर्म और अध्यात्म की धरोहर को संरक्षित करने वाला है। मंत्री शुक्ला ने बजट में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत 7132 करोड़ रुपए एवं कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत 447 करोड़ रुपए का प्रवाधान किये जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से किसान और आम नागरिक अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे। परिणामस्वरूप वर्ष 2047 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य की प्राप्ति में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान कर सकेगा। मंत्री शुक्ला ने कहा कि बजट में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के साथ राम पथ गमन योजना के लिए भी समुचित राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सर्व-सुविधायुक्त वैचारिक अध्ययन केंद्र के रूप में गीता भवन बनाए जाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय का भी स्वागत किया है। मंत्री शुक्ला ने कहा कि इस बजट में फिर एक बार सरकार ने जनता पर बिना कोई कर लगाए बजट राशि को बढ़ाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह बजट आने वाले वर्षों में समृद्ध मध्यप्रदेश के साथ विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।   recent visitors 35

स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि, 23 हज़ार 535 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत 2025-26 का बजट सर्वसमावेशी और दूरदर्शी है। यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बजट में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस वर्ष स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि कर कुल 23 हज़ार 535 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 2,992 करोड़ रूपये अधिक है। यह स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तृत और सुदृढ़ बनाने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सर्व-हितकारी और विकासोन्मुखी बजट के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री (वित्त) जगदीश देवड़ा का आभार व्यक्त किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं उप मुख्यमंत्री (वित्त) देवड़ा के नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास का एक प्रभावी दस्तावेज है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। सरकार ने संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और अधोसंरचना विकास को भी समान रूप से प्राथमिकता दी है। प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्प और कला-संस्कृति को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाएँ शुरू की जा रही हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को भव्यता प्रदान की जा सके। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन किया गया है। ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का किया जा रहा है विस्तार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुष्मान भारत योजना के लिए इस वर्ष 2,039 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में 1,000 संजीवनी और 1,059 जननी एम्बुलेंस संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से 22 लाख नागरिकों को आपातकालीन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 249 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित नागरिकों के लिए ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने व्यापक प्रयास किए हैं। इस वर्ष नीमच, मंदसौर और सिवनी में नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 400 एमबीबीएस और 252 पीजी सीटों की वृद्धि की गई है। रीवा जिला चिकित्सालय में 100 बिस्तरों का नया वार्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है। प्रत्येक विधानसभा में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए बनाए जाएंगे हेलीपैड उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा’ की हर क्षेत्र में सहज उपलब्धता के लिये प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में हेलीपैड बनाए जाएंगे। सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य मानकों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिये सरकार संकल्पित है। बजटीय प्रावधान और चिकित्सकीय, सहायक चिकित्सकीय अमले के प्रतिबद्ध और समर्पित प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में आदर्श राज्य बनाने में सफल होंगे।   recent visitors 26

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में विभागीय विषयों की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विभागीय विषयों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में वेतन संरक्षा (पे-प्रोटेक्शन) के लाभ आवश्यक है जिससे चिकित्सा शिक्षकों का आर्थिक संतुलन प्रभावित न हो और कार्यक्षमता बनी रहे। उन्होंने पे-प्रोटेक्शन के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने नर्सिंग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने पर जोर दिया और कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन की कमी को शीघ्र दूर करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल इक्विपमेंट की समय पर खरीदी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू प्रदाय के लिये स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, एमडी एमपीपीएचसीएल मयंक अग्रवाल उपस्थित रहे।   recent visitors 36