Friday, July 10, 2026 6:29 pm

उत्तर प्रदेश में अवैध शराब माफियाओं पर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ  उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतर्राज्यीय स्तर पर अपमिश्रित ज़हरीली शराब का धंधा करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का सरगना सुखविंद्र सिंह उर्फ सेठी सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह ENA/Rectified Spirit की अवैध आपूर्ति कर ज़हरीली शराब बनाने में लिप्त था। गिरफ्तार आरोपियों में सरगना सुखविंद्र सिंह उर्फ सेठी को उधमसिंह नगर, उत्तराखंड से पकड़ा गया, जबकि उसके साथी गुड्डू, रामसिंह और सुनील कुमार को बिजनौर से दबोचा गया। शराब बनाने के लिए स्प्रिट का करते थे प्रयोग एसटीएफ ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में रेक्टिफाइड स्प्रिट, अपमिश्रित शराब से भरे केन, खाली कांच की बोतलें, तीन चारपहिया वाहन और अन्य सामान बरामद किया है। एसटीएफ को यह सफलता गुप्त सूचना के आधार पर मिली, जब टीम को जानकारी मिली कि काशीपुर-हरिद्वार रोड स्थित मां जगदम्बा ढाबे पर रेक्टिफाइड स्प्रिट कंटेनरों से निकाली जा रही है। यह स्प्रिट दवा कंपनियों को भेजी जानी थी, लेकिन मिलभगत से इसे अवैध शराब निर्माण में प्रयोग किया जा रहा था। पूछताछ में खुले ये राज STF की पूछताछ में सरगना सुखविंद्र ने बताया कि वह मूल रूप से बस चालक था और अपने परिचित सतनाम सिंह से इस अवैध धंधे में जुड़ा। सतनाम की मृत्यु के बाद उसने खुद इसका संचालन शुरू किया। ट्रैकर चालक गुड्डू, जो IGL केमिकल फैक्ट्री से स्प्रिट लाता था, इस धंधे में उसका सहयोगी बन गया। स्प्रिट को अवैध तरीके से निकालकर ढाबे के पास उतारा जाता था, जहां से रामसिंह और अन्य सहयोगी इसे फैला देते थे। रामसिंह ने कबूल किया कि वह पहले भी कच्ची शराब बनाने के मामलों में जेल जा चुका है और अब सेठी से स्प्रिट लेकर स्वयं शराब बनाता और बेचता था। वहीं, गुड्डू ने बताया कि वह कंपनी कर्मचारी भूप सिंह से मिलीभगत कर स्प्रिट की निर्धारित मात्रा से अधिक लोड करवाता था और इसे ढाबे पर बेचता था। recent visitors 40

MP Police की तरह ही अब लोकायुक्त, EOW सहित 6 जांच एजेंसियां आरोपी को रख सकेंगे हिरासत में, अधिसूचना जारी

 भोपाल मध्य प्रदेश की जांच एजेंसियां लोकायुक्त, EOW, स्टेट CID या STF के पास अब अपना खुद का लॉकअप और इंटेरोगेशन रूम होने वाला है. इसको लेकर राज्य के गृह विभाग ने निर्देश जारी कर दिए हैं. लंबे समय से यह जांच एजेंसियां आरोपियों को हिरासत में रखने और पूछताछ के लिए खुद के लॉकअप और इंटेरोगेशन रूम की मांग कर रही थीं, जिसे आखिरकार अब मान लिया गया है. गृह विभाग के सर्कुलर के तहत अब लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, सीआईडी, एसटीएफ, राज्य नारकोटिक्स को लॉकअप और इंटेरोगेशन रूम बनाने की अनुमति है. इसके लिए इन एजेंसियों को अपने कार्यालय में एक कक्ष चिह्नित करना होगा, जहां आरोपी को 5-6 घंटे तक पूछताछ के लिए रखा जा सकेगा. कमरे में एक टेबल होगी, जिस पर एक तरफ आरोपी और दूसरी तरफ जांच अधिकारी होंगे. रूम में एचडी कैमरे लगाए जाएंगे, जिसका लाइव आउटपुट वरिष्ठ अफसरों के केबिन में दिया जाएगा, जहां से वे पूछताछ को लाइव देख सकेंगे. आरोपी को हिरासत के दौरान यहीं पर खाना भी दिया जाएगा. इन जांच एजेंसियों के वर्तमान में जो संभागीय मुख्यालय हैं, वहां इसका निर्माण किया जाएगा. क्यों हुई जरूरत महसूस? दरअसल, वर्तमान में यह जांच एजेंसियां जब किसी को हिरासत में लेती हैं तो इनसे जांच अधिकारी अपने कक्ष में पूछताछ करते हैं या बेहद संवेदनशील मामलों में आला अधिकारीयों के कमरे में पूछताछ की जाती है. पूछताछ खत्म होने के बाद आरोपियों को नजदीकी पुलिस थाने के लॉकअप में रात बिताने के लिए लाया जाता है. इससे समय भी लगता है और एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करते समय आरोपियों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना पड़ता है. हाल ही में लोकायुक्त की हिरासत में रहे आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा को लोकायुक्त कार्यालय के पास स्थित कोहेफिजा थाने में रखा गया था.   recent visitors 35