सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी दोषी की किसी संपत्ति को तोड़ा जा नहीं सकती

नई दिल्ली देशभर में चल रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दाखिल जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच कर रही है. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई  पर रोक लगाते हुए कहा था कि सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को हटाने की ही छूट होगी. इस मामले में यूपी, एमपी और राजस्थान की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पेश हुए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में पूछा कि क्या दोषी करार देने पर भी किसी की संपत्ति तोड़ी जा सकती है? जिस पर एसजी तुषार ने कहा कि नहीं, यहां तक कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी नहीं. मेरे कुछ सुझाव हैं, नोटिस को रजिस्टर्ड एडी से भेजा जाए. हम सबके लिए गाइडलाइन जारी करेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम सब नागरिकों के लिए गाइडलाइन जारी करेंगे. अवैध निर्माण हिंदू, मुस्लिम कोई भी कर सकता है. हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों. बेशक, अतिक्रमण के लिए हमने कहा है कि अगर यह सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ या जल निकाय या रेलवे लाइन क्षेत्र पर है, तो हमने स्पष्ट कर दिया है. अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है, चाहे वह गुरुद्वारा हो या दरगाह या मंदिर, यह सार्वजनिक बाधा नहीं बन सकती. जस्टिस गवई ने कहा कि चाहे मंदिर हो, दरगाह हो,  उसे जाना ही होगा क्योंकि ⁠सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हाल ही में यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में जमीयत ने अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है। याचिका में सरकार को आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने से रोकने की मांग की गई है. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि यदि  2 संरचनाओं में उल्लंघन हुआ है और केवल 1 के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और आप पाते हैं कि पृष्ठभूमि में कोई अपराध है. यह समझौता करने योग्य या गैर समझौता करने योग्य अपराध हो सकता है. यदि आप शुरू में किसी व्यक्ति की जांच कर रहे हैं और आपको जल्द ही उसका आपराधिक इतिहास पता चलता है तो? दो गलतियां एक सही नहीं बनाती हैं. इस बारे में हमारी सहायता करें. न्यायिक निगरानी होनी चाहिए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान तो खोजना ही होगा, कुछ न्यायिक निगरानी होनी चाहिए. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है. हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. नोटिस जारी किए जाने चाहिए, पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. कानून किसी खास धर्म के लिए नहीं… इस मामले में जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए और तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत. जस्टिस गवई ने कहा कि हम सभी के लिए कानून बनाएंगे, किसी खास धर्म के लिए नहीं. अवैध निर्माणों को सभी धर्मों से अलग किया जाना चाहिए. नोटिस की सही सर्विस होनी चाहिए, पंजीकृत ए.डी. के माध्यम से नोटिस हो. नोटिस चिपकाने की यह प्रक्रिया चले, डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए. इससे अधिकारी भी सुरक्षित रहेंगे, हमारे पास भारत से पर्याप्त विशेषज्ञ है. एसजी ने कहा कि ऐसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बुलडोजर मामले बहुत कम होंगे, ये मामले दो फीसदी होंगे. लेकिन बिल्डरों से जुड़े इस तरह के मामले बहुत हैं. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि जब तक नगर निगम के अधिकारी इन पर फैसला नहीं ले लेते, तब तक कोई अर्ध न्यायिक निगरानी भी नहीं है. ये मामला दो फीसदी का नहीं है. आंकड़े बताते हैं कि साढ़े चार लाख मामले तोड़फोड़ के हैं. हिंदू-मुस्लिम की बात क्यों आती है? सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिंदू-मुस्लिम की बात क्यो आती है. वे हमेशा अदालत में जा सकते हैं  इसमें भेदभाव कहां है. जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान खोजना होगा. जैसे न्यायिक निरीक्षण किया जाए. इसपर SG ने कहा कोर्ट मीडिया में प्रचारित कुछ घटनाओं को छोड़कर इसके लिए एक सामान्य कानून बनाए जाने पर विचार करें. तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान  की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है, हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. ⁠नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. ⁠साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. ⁠नोटिस जारी किए जाने चाहिए. ⁠पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. ⁠हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. तुषार मेहता ने आगे कहा कि⁠ जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. ⁠मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. ⁠अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए.⁠ तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत.  ⁠जस्टिस गवई ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं. ⁠हम सभी के … Read more

खनिज कंपनियों और केंद्र को ‘सुप्रीम’ झटका, नौ जजों की बेंच ने कहा- खनिज संपदा पर टैक्स पहली अप्रैल, 2005 से लागू होगा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने केंद्र और खनिज कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। संविधान बेंच ने कहा है कि खनिज संपदा पर टैक्स 1 अप्रैल, 2005 से लागू होगा। संविधान बेंच ने कहा कि 1 अप्रैल, 2005 से कोई ब्याज या जुर्माना नहीं लगेगा। राज्य सरकारें 12 साल की अवधि में टैक्स ले सकेंगी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को इस सवाल पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस बात का विरोध किया था कि राज्य सरकारें खनिज संपदा पर केंद्र की ओर से लगाए गए रॉयल्टी का रिफंड मांग सकती हैं। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अगर टैक्स का रिफंड मांगा जाएगा तो इसके बहुआयामी प्रभाव होंगे। मेहता ने कहा था कि मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार का कहना है कि इस फैसले को आगे से लागू किया जाए। सुनवाई के दौरान विपक्ष शासित प्रदेशों ने मांग की थी कि इस आदेश को पूर्ववर्ती प्रभाव से लागू किया जाए ताकि वे केंद्र से रिफंड मांग सकें। इस दौरान खनन गतिविधियों जुड़ी कंपनियों और फर्मों ने केंद्र के रुख का समर्थन किया था। 25 जुलाई को नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने 8:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि राज्य सरकारों को खनिज संपदा पर टैक्स लगाने का अधिकार है । राज्यों के इस अधिकार को केंद्रीय कानून माइंस एंड मिनिरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ समेत आठ जजों ने ये फैसला दिया था, जबकि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस फैसले के उलट फैसला दिया था। इस मामले की शुरुआत इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड और तमिलनाडु सरकार के बीच विवाद से हुई थी। इंडिया सीमेंट्स खनन लीज लेने के बाद तमिलनाडु सरकार को रॉयल्टी दे रही थी। तमिलनाडु सरकार ने इस रॉयल्टी के अलावा इंडिया सीमेंट्स पर एक और सेस लगा दिया। इसके बाद इंडिया सीमेंट्स ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इंडिया सीमेंट्स का कहना था कि रॉयल्टी पर सेस लगाना रॉयल्टी पर टैक्स लगाना है जो कि राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। तमिलनाडु सरकार का कहना था कि सेस भू-राजस्व के तहत है और ये खनिज संपदा के अधिकार की बात है जो राज्य सरकार लगा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने 1989 में इंडिया सीमेंट्स के पक्ष में फैसला दिया। सात जजों की बेंच ने कहा था कि खनिज संपदा वाली जमीन पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इस बेंच ने कहा था कि राज्य सरकार रॉयल्टी लगा सकती है लेकिन उस पर टैक्स नहीं लगा सकती है। नौ सदस्यीय संविधान बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस ह्रषिकेश राय, जस्टिस एएस ओका, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्जल भुईंया, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एजी मसीह शामिल रहे।     recent visitors 101

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को मऊ से विधायक अब्बास अंसारी की विशेष अनुमति याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की जमानत याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। कोर्ट ने अब्बास की जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस भी जारी किया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और संदीप मेहता की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी करते हुए उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक अब्बास अंसारी की विशेष अनुमति याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 9 मई के अपने आदेश में अब्बास की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, उसने निचली अदालत को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द सुनवाई पूरी करे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा था, “यह अदालत पीएमएलए की धारा 45 के संदर्भ में पहली नजर में यह संतुष्टि देने में असमर्थ है कि आवेदक दोषी नहीं है या फिर वह जमानत पर रहते समय कोई अपराध नहीं कर सकता।” कोर्ट ने अब्बास अंसारी के खिलाफ मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश किए गए मनी ट्रेल का भी संज्ञान लिया। बयान में कहा गया है कि मनी ट्रेल अंसारी को दो कंपनियों- मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन और मेसर्स आगाज से धन के लेनदेन से जोड़ता है। ईडी का आरोप है कि अंसारी ने इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया था। ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तीन अलग-अलग एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। पहले आपराधिक मामले में, यह आरोप लगाया गया था कि एक निर्माण कंपनी के भागीदारों ने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण किया था। वहीं, दूसरी एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मुख्तार अंसारी ने एक स्कूल बनाने के लिए विधायक कोष से धन लिया था। लेकिन, कोई स्कूल नहीं बनाया गया और जमीन का इस्तेमाल कृषि के लिए किया गया। तीसरी एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अंसारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी जमीन हड़प ली और एक अवैध मकान बना लिया। recent visitors 95

सुप्रीम कोर्ट शंभू बॉर्डर पर किसानों के चक्का जाम पर सख्त, कहा- हाईवे ट्रैक्टरों की पार्किंग के लिए नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट शंभू बॉर्ड  को आंशिक रूप से खोले जाने को लेकर गंभीर हो गया है। अदालत ने आदेश दिया की इसे जल्द खोला जाए। इसके लिए पंजाब और हरियाणा के डीजीपी को एक सप्ताह के भीतर बैठक करने और समाधान निकालने को कहा है। दरअसल, किसान एमएसपी को लेकर पिछले कई सालों से आंदोलन पर हैं। केंद्र सरकार से कई राउंड की उनकी वार्ता भी हो चुकी है, मगर समाधान नहीं निकल सका। इस साल फरवरी में एक बार फिर किसानों ने दिल्ली की ओर रुख किया तो उन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड लगा दिए। तब से किसान वहीं बैठे हैं। । इसके अलावा एम्बुलेंस, आवश्यक सेवाओं और स्थानीय यात्रियों की आवाजाही के लिए शंभू बॉर्डर पर सड़क को आंशिक रूप से खोलने की आवश्यकता है। अदालत ने पंजाब सरकार से यह भी कहा है कि वह किसानों से बात करे और उन्हें शंभू बॉर्डर से ट्रैक्टरों को हटाने के लिए राजी करे। बेंच ने पंजाब सरकार से प्रदर्शनकारी किसानों को शंभू बॉर्डर पर सड़क से ट्रैक्टर हटाने के लिए समझाने को कहा। न्यायालय ने कहा कि राजमार्ग वाहन पार्किंग के लिए नहीं हैं। इस तरह शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी किसानों पर भी तीखी टिप्पणी की, जो कई महीने से ट्रैक्टरों को लेकर शंभू बॉर्डर पर डटे हैं। अदालत ने शंभू बॉर्डर पर सड़कों को आंशिक रूप से फिर से खोलने के लिए पंजाब, हरियाणा के पुलिस महानिदेशकों से एक सप्ताह में पड़ोसी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया। बेंच ने इस दौरान शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत करने के वास्ते प्रस्तावित समिति के लिए गैर-राजनीतिक नाम सुझाने के लिए पंजाब, हरियाणा सरकारों की सराहना की। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से बातचीत करने के लिए गठित की जाने वाली समिति की शर्तों पर संक्षिप्त आदेश पारित करेगा।  यात्रियों के लिए एक-एक लेन खोली जा सकती सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हुई सुनवाई में कहा कि शंभू बॉर्डर पर यात्रियों के लिए एक-एक लेन खोली जा सकती है। अदालत ने पंजाब और हरियाणा के डीजीपी को पटियाला और अंबाला जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ एक सप्ताह के भीतर बैठक करने को कहा है। इसके अलावा, कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि वह किसानों को सड़क से ट्रैक्टर हटाने के लिए राजी करे। पंजाब और हरियाणा सरकार की सराहना न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने एक समिति गठित करने के लिए गैर-राजनीतिक नाम सुझाने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार की सराहना की, जो प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बैठक करेगी। कोर्ट ने कहा कि एम्बुलेंस, आवश्यक सेवाओं और स्थानीय यात्रियों की आवाजाही के लिए शंभू बॉर्डर पर सड़क को आंशिक रूप से खोलने की आवश्यकता है। उच्चतम न्यायालय ने पंजाब सरकार से प्रदर्शनकारी किसानों को शंभू बॉर्डर पर सड़क से ट्रैक्टर हटाने के लिए समझाने को कहा। न्यायालय ने कहा कि राजमार्ग वाहन पार्किंग के लिए नहीं हैं। recent visitors 120

सांसदों ने एसटी/एससी के लिए क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संबंध में संयुक्त रूप से एक ज्ञापन सौंपा

नई दिल्ली / हरिद्वार एसटी/एससी समुदाय से जुड़े करीब 100 भाजपा सांसदों ने  शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान सांसदों ने एसटी/एससी के लिए क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संबंध में संयुक्त रूप से एक ज्ञापन सौंपा और मांग की कि इस फैसले को एसटी/एससी समाज में नहीं लागू किया जाना चाहिए। सांसदों के मुताबिक पीएम मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले को देखेंगे। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा राज्यसभा सांसद  एवं गुरु रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो.सिकंदर कुमार ने बताया कि  प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि सरकार सांसदों के पक्ष में काम करेगी। दोनों सदनों के करीब 100 सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज पीएम मोदी से मुलाकात कर अपनी मांगे रखीं। गुरु रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविदास आचार्य एवं उत्तराखंड के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और महापीठ के संगठन महामंत्री सूरज भान कटारिया ने स्पष्ट कहा है की एससी/एसटी से क्रीमी लेयर (पहचानने) (और आरक्षण लाभ से उन्हें बाहर करने) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर असहमति जताई थी और कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करेगी। बता दें कि 1 अगस्त को एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यों के पास एससी और एसटी में उप-वर्गीकृत करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही संबंधित प्राधिकरण को यह सुनिश्चत करना होगा कि क्या उस वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, मात्रात्मक प्रतिनिधित्व के बजाय प्रभावी प्रतिनिधित्व के आधार पर पर्याप्तता की गणना करनी चाहिए।  हालांकि देशभर के कई संगठनों ने 21 अगस्त को बंद का आह्वान भी किया है। क्या था मामला … सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण के लिए राज्यों को दी थी अनुमति गौरतलब है कि 1 अगस्त को शीर्ष अदालत ने 6:1 के बहुमत से फैसला सुनाया कि एससी और एसटी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति है। यह फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात जजों की बेंच ने सुनाया, जिसने ईवी चिन्नैया मामले में पहले के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उप-वर्गीकरण की अनुमति नहीं है क्योंकि एससी/एसटी समरूप (होमोजेनस) वर्ग बनाते हैं। सीजेआई चंद्रचूड़ के अलावा बेंच में जस्टिस बीआर गवई, विक्रम नाथ, बेला एम त्रिवेदी, पंकज मिथल, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई ने सुझाव दिया था कि राज्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों में से भी क्रीमी लेयर की पहचान करने के लिए एक नीति विकसित करें। हालांकि जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दिए जाने के पक्ष में असहमति जताई। recent visitors 95

आज SC में CJI करेंगे आमिर खान का स्‍वागत! जजों के साथ देखेंगे बॉलीवुड स्‍टार की ये मूवी, वजह बेहद खास

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में आज एक खास इनीशिएटिव के तहत ‘लापता लेडीज’ फिल्म दिखाई जाएगी। यह फिल्म जजों, उनके परिवार के सदस्यों और रजिस्ट्री अधिकारियों के लिए यह फिल्म दिखायी जाएगी। समीक्षकों ने इस फिल्म की काफी प्रशंसा की है और यह लैंगिक समानता के विषय पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक अनुभाग द्वारा जारी संदेश के अनुसार, प्रसिद्ध अभिनेता एवं निर्माता आमिर खान के अलावा फिल्म की निर्देशक किरण राव भी स्क्रीनिंग के दौरान उपस्थित रहेंगी। फिल्म देखने का यह आइडिया जस्टिस चंद्रचूड़ की पत्नी कल्पना दास का था। उन्होंने अपने स्टाफ के साथ यह फिल्म देखी थी। सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक अनुभाग द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के 75वें वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों के तहत लैंगिक समानता के विषय पर आधारित फिल्म 'लापता लेडीज' शुक्रवार, नौ अगस्त 2024 को प्रशासनिक भवन परिसर के सी-ब्लॉक स्थित सभागार में प्रदर्शित की जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश अपने परिवार के लोगों के साथ फिल्म देखने पहुंचेंगे। फिल्म अपराह्न सवा चार बजे से शाम छह बजकर 20 मिनट तक दिखाई जाएगी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि यह सुप्रीम कोर्ट के स्टाफ को सेंसिटाइज करने की मेरी कोशिश है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ऐसा बहुत कुछ हो रहा है, जिसकी बहुत ज्यादा पब्लिसिटी नहीं हो रही है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट स्टाफ मेंबर्स के लिए आयुर्वेदिक क्लीनिक चलाई जा रही है। यहां पर 24 घंटे सुप्रीम कोर्ट स्टाफ मेंबर्स का इलाज किया जाता है। recent visitors 105

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरक्षण का लाभ सिर्फ पहली पीढ़ी तक ही सीमित होना चाहिए, ए राजा ने टिप्पणी की आलोचना की

नई दिल्ली लोकसभा में डीएमके सांसद ए राजा ने मंगलवार को सरकार से दलित आरक्षण को बचाने का अनुरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि वह दलितों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाएं। ए राजा ने हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी की आलोचना की है जिसमें कोर्ट ने कहा है कि आरक्षण का लाभ सिर्फ पहली पीढ़ी तक ही सीमित होना चाहिए। इस फैसले पर असहमति जताते हुए ए राजा ने लोकसभा में एक सत्र के दौरान कहा, “दलित लोगों में आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से उनके अधिकार छीन जायेंगे। उन्होंने आगे हरियाणा की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा, “हरियाणा में एक आईपीएस अधिकारी को भी अपनी शादी में घोड़े पर बैठने की अनुमति नहीं थी।” हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है कि राज्य सरकार एससी और एसटी कोटे में उपवर्गीकरण करने का अधिकार है। भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड सहित 7 जजों की पीठ ने यह भी कहा कि एससी एसटी के कोटे में भी क्रीमी लेयर की पहचान कर उन्हें आरक्षण के दायरे से हटाने की जरूरत है। उपवर्गीकरण की इजाजत देकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के लिए एससी/एसटी श्रेणियों के अंदर सबसे वंचित समूहों की पहचान करने और उन्हें लक्षित लाभ प्रदान करने का रास्ता खोल दिया है। recent visitors 117