भारत करेगा डे-नाइट टेस्ट प्रैक्टिस, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज के दौरान खेलना होगा एक डे-नाइट टेस्ट

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम को इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाना है। ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेली जानी है। इस बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में चार नहीं बल्कि पांच टेस्ट मैच खेले जाने हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के लिए यह सीरीज बहुत ज्यादा अहम होने वाली है, क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023-25 के फाइनल में जगह बनाने के लिए हर हाल में इस सीरीज के ज्यादा से ज्यादा टेस्ट मैच जीतना चाहेंगे। भारतीय टीम को पांच में से एक टेस्ट मैच डे-नाइट खेलना है। डे-नाइट टेस्ट मैच से पहले भारतीय टीम को दो दिवसीय प्रैक्टिस मैच खेलने को मिलेगा। भारतीय टीम प्राइम मिनिस्टर XI के खिलाफ दो दिवसीय वॉर्म-अप मैच खेलेगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच 22 नवंबर से पर्थ में खेला जाएगा। यह 1991-92 के बाद पहला मौगा होगा जबकि इन दोनों टीमों के बीच पांच टेस्ट मैच की सीरीज खेली जाएगी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि भारतीय टीम 30 नवंबर से कैनबरा के मनुका ओवल में प्राइम मिनिस्टर XI के खिलाफ दो दिवसीय डे-नाइट प्रैक्टिस मैच खेलेगी। भारतीय टीम की एडिलेड में होने वाले डे-नाइट टेस्ट मैच की तैयारी में मदद करने के लिए यह प्रैक्टिस मैच कार्यक्रम में जोड़ा गया है। भारत ने 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में भी एक डे-नाइट टेस्ट मैच खेला था। भारत ने ऑस्ट्रेलिया में खेली गई पिछली दो बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। 2020-21 में एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया था, जहां भारतीय टीम 36 रनों पर ऑलआउट हो गई थी, भारत ने वो मैच आठ विकेट से हराया था। भारत के लिए सीरीज का आगाज बहुत भयानक था, लेकिन इसके बाद भारतीय टीम ने धमाकेदार वापसी करते हुए सीरीज पर 2-1 से कब्जा जमाया था। भारत ने इसके बाद मेलबर्न टेस्ट आठ विकेट से जीता, सिडनी टेस्ट ड्रॉ पर छूटा, जबकि ब्रिसबेन टेस्ट तीन विकेट से जीता था। 1st Test Match, पर्थ टेस्ट, 22-26 नवंबर 2024 2nd Test Match, एडिलेड डे-नाइट टेस्ट, 6-10 दिसंबर 2024 3rd Test Match, ब्रिसबेन टेस्ट, 14-18 दिसंबर 2024 4th Test Match, मेलबर्न टेस्ट, 26-30 दिसंबर 2024 5th Test Match, सिडनी टेस्ट, 3-7 जनवरी 2025   recent visitors 91

इंदौर से दुबई की सीधी उड़ान बंद, शारजाह की रहेगी जारी, फेरे भी बढ़ाए

 इंदौर  एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर और दुबई के बीच अपनी सीधी उड़ान सेवा बंद कर दी है। आखिरी उड़ान गुरुवार रात इंदौर से रवाना हुई। एयरलाइन ने इस रूट पर बुकिंग लेना बंद कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए, एयरलाइन ने शारजाह के लिए अपनी उड़ानों की आवृत्ति बढ़ा दी है। अब इंदौर और शारजाह के बीच सप्ताह में दो उड़ानों की जगह चार उड़ाने होंगी। जो यात्री इंदौर से दुबई की यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें अब शारजाह से होकर जाना होगा। 17 महीनों तक चली दरअसल, 30 मार्च, 2023 को शुरू हुई सीधी इंदौर-दुबई उड़ान लगभग 17 महीनों तक चली। उद्योग के जानकारों के अनुसार, दुबई हवाई अड्डे पर उपयुक्त स्लॉट उपलब्ध न होने के कारण सीधी उड़ान बंद की जा रही है। शुरुआत में, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अप्रैल 2023 में इंदौर और शारजाह के बीच हफ़्ते में तीन उड़ाने शुरू की थीं। सीधी दुबई उड़ान शुरू होने के साथ, शारजाह उड़ान की आवृत्ति घटाकर हफ़्ते में दो दिन कर दी गई थी। अब, बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए, एयरलाइन ने इंदौर और शारजाह के बीच हफ्ते में चार उड़ाने संचालित करने का निर्णय लिया है। शारजाह होते हुए जाएंगे दुबई उड़ान बंद होने से, यात्रियों को अब शारजाह की यात्रा करनी होगी और फिर सड़क मार्ग से दुबई जाना होगा। इससे यात्रियों का खर्च बढ़ेगा। हालांकि, दुबई की तुलना में शारजाह हवाई अड्डे पर कम यातायात होने से यात्रियों को चेक-इन और चेक-आउट प्रक्रियाओं के मामले में कम समय लगेगा। इसकी अपेक्षा विमान कंपनी सप्ताह में दो दिन चलने वाली शारजाह उडा़न को बढ़ाकर सप्ताह में चार दिन संचालित करेगी। यह उड़ान शारजाह से रविवार, मंगलवार, गुरुवार, शनिवार को इंदौर आएगी और इंदौर से सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को उड़ान वापस रवाना होगी। शारजाह का कम किया था फेरा इंदौर और शारजाह के बीच एक अप्रैल 2023 में सप्ताह में तीन दिन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने उडा़न शुरू की थी। शुक्रवार को दुबई की उड़ान भी संचालित होती थी। इस वजह से शारजाह की शुक्रवार की उड़ान को बंद कर दिया गया था। दोनों उड़ान एक ही दिन होने से शारजाह उड़ान को कम यात्री मिल रहे थे। वर्तमान में सप्ताह में दो दिन ही शारजाह उडा़न संचालित हो रही है। शारजाह से दुबई जाना पड़ेगा इंदौर से दुबई के लिए चलने वाली एकमात्र सीधी उडा़न की बुकिंंग बंद हो चुकी है। इंदौर से यात्रियों को शारजाह पहुंचकर सड़क मार्ग से दुबई जाना हाेगा। इससे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त राशि का भार भी पड़ेगा। दुबई की अपेक्षा शारजाह एयरपोर्ट पर उडा़नों का संचालन कम होने से यात्रियों को चेकइन और चेकआउट में परेशानी नहीं होगी। यह रहेगा शारजाह का शेड्यूल     इंदौर-शारजाह – आईएक्स 255 उड़ान इंदौर से रात्रि 12.10 बजे रवाना होकर यूएई समय अनुसार 2.05 बजे शारजाह पहुंचेगी।     शारजाह-इंदौर – आईएक्स 256 उड़ान यूएई समय अनुसार 17.50 बजे शारजाह से रवाना होकर रात्रि 10.35 बजे इंदौर पहुंचेगी।   recent visitors 105

पीएम श्री शास. हाईस्कूल सेमरखापा द्वारा लगातार की जा रही है बाउंड्री वॉल की मांग

 मण्डला जिला मुख्यालय  के नजदीक ग्राम पंचायत  सेमरखापा मे संचालित  पीएम श्री शास. हाईस्कूल सेमरखापा (मण्डला) में बांड्रीबाल न होने के कारण आसमाजिक तत्वों द्वारा उपद्रव किया  जा रहा है ।  स्कूल प्रबंधन ने बताया की स्कूल मे वाड्रीवाल न होने के कारण असमाजिक तत्वों द्वारा शराब की बोतलें, मलमूत्र भरकर पाऊच फेक  कर स्कूल परिसर मे  लगातार गंदगी की जा रही  है मिली जानकारी अनुसार  15/06/2024 को लिखित रूप से ग्राम  पंचायत में सूचना  दी गई, परन्तु आज दिनाँक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।  विगत  05/08/2014 दिन सोमवार को एवं दिनांक 06/08/2024 दिन मंगलवार को  पानी की टंकी के पास बैठकर गाली – गलौज, जोर जोर से चिल्लाना, सीटी बजाने, अर्द्धमरी बिल्ली को प्राथमिक शाला की खिड़‌की से कमरे मे फेकने से शाला में अध्ययनरत छात्र/छात्रों, शिक्षक डर, दहशत  का माहौल बना हुआ है   शाला में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा ही साथ ही छात्र छात्राओं एवं शिक्षकों के साथ कभी भी अनहोनी घटना घटित हो सकती है। समय रहते यदि इन असमाजिक तत्वों की नहीं रोका गया तो छात्र/छात्राओं एवं शिक्षकों के साथ कोई बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।          एकीकृत शासकीय पीएम श्री हाईस्कूल के प्रभारी प्राचार्य  के के हरदहा द्वारा बताया गया, विद्यालय परिसर मे बाउंड्री वॉल एवं चौकी दार की व्यवस्था न होने से आसपास के असमाजिक तत्वों द्वारा लगातार शाला मे पदस्थ शिक्षिकाओं एवं अध्ययन कर रही बच्चियों को परेशान किया जा रहा है।  हमारे द्वारा लगातार वरिष्ठ कार्यालय से शाला मे बाउंड्री वॉल बनवाने  की मांग की जा रही है पर अभी तक इस विद्यालय मे बाउंड्री वॉल का निर्माण नही हो सका जो पहले फैंसिंग लगवाई गई थी उस भी इन तत्वों द्वारा तोड़ दिया जहां मात्र शोपीस की तरह केवल गेट खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय में करीबन  12-13 महिला शिक्षिका और  02 सौ के आसपास बच्चियां अध्ययन कर रही है। इनका कहना है –  विद्यालय के आसपास असमाजिक तत्व आये दिन हुजूम लगाकर कक्षा रूम मे पत्थर फेंकने के साथ शराब की बाटल आदि फेंक कर परेशान किया जा रहा है। महिला  शिक्षकों से अभद्रता भी की जाती जिससे खतरा बना हुआ है। जिसकी शिकायत हमने ग्राम पंचायत को की है। के के हरदहा प्रभारी प्राचार्य शास. पीएम श्री विद्यालय सेमरखापा, मण्डला   आपके द्वारा मामला संज्ञान मे लाया गया है इस संबंध मे तुरंत कार्यवाही कर पुलिस थाना को भी सूचित किया जायेगा। इंजी. कमलेश तेकाम उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष शिक्षा समिति जिला पंचायत, मण्डला recent visitors 108

कांग्रेस के लिए गुटबाजी और विवाद सुलझाना मुश्किल होता जा रहा है, पार्टी के नेता अपनी ताकत दिखाने के लिए अलग-अलग प्रदर्शन कर…

भोपाल  मध्य प्रदेश में विधानसभा और उसके बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस एकजुट होने की कोशिश में लगी है। मगर कांग्रेस की इन कोशिशों को विवाद और गुटबाजी कमजोर करने में लगी है। कांग्रेस के लिए गुटबाजी और विवाद सुलझाना मुश्किल होता जा रहा है। राज्य में कांग्रेस अपनी ताकत दिखाने के लिए अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन कर रही है। इंदौर नगर निगम में हुए घोटाले को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। वहीं दतिया सहित अन्य स्थानों पर भी पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। एक तरफ जहां पार्टी अपनी एकजुटता के साथ ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान भी उभर कर सामने आ रही है। इंदौर में एक पेड़ मां के नाम अभियान की शुरुआत हुई और राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस अभियान में सहयोग मांगने के लिए कांग्रेस के दफ्तर पहुंच गए। कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस के शहर अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा और ग्रामीण अध्यक्ष सदाशिव यादव ने स्वागत किया। इस मामले ने तूल पकड़ा और पार्टी की ओर से निलंबन का नोटिस जारी कर दिया गया। इस पर भी कांग्रेस दो फाड़ हो गई। यह मामला थमा नहीं था कि प्रदेश कार्यालय में ऐसे बोर्ड लगा दिए गए जिसने विवाद को जन्म दे दिया। पार्टी ने कार्यालय का समय भी तय कर दिया था। विवाद बढ़ा तो पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि यह समय कार्यालय में कर्मचारियों के लिए तय किया गया है। इन दो विवादों के बाद ताजा मामला दतिया जिले का है, जहां पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। इस आयोजन के बाद कांग्रेस के दो गुट आपस में भिड़ गए और गोली तक चल गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में कांग्रेस आपसी गुटबाजी और खींचतान के कारण कमजोर हुई है। लगातार हार के बावजूद भी कांग्रेस के नेता सीख लेने को तैयार नहीं है। अब तो गुटबाजी और विवाद पार्टी के लिए रोग का रूप ले चुके हैं। सवाल एक ही है क्या कांग्रेस इससे खुद को बाहर निकल पाएगी या और ग्रसित हो जाएगी। recent visitors 107

विवादित टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ दर्ज मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा की जाएगी

जबलपुर  मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा नेत्री इमरती देवी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ भाजपा नेत्री ने डबरा में एफआईआर दर्ज करवाई थी. पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि जब उन्होंने कथित अपराध किया, वह विधायक नहीं थे और वर्तमान में भी विधायक नहीं हैं. इसलिए उनके खिलाफ एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए. एमपी-एमएलए कोर्ट गठित करने का उद्देश्य बताया एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ के संबंध में पारित आदेश का समीक्षा करते हुए कहा "इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि निर्वाचित प्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) के खिलाफ आपराधिक मुकदमे शीघ्रता से समाप्त हो जाएं. इसके अलावा विशेष विचार की आवश्यकता केवल देश में राजनीति में अपराधीकरण की बढ़ती लहर के कारण और निर्वाचित प्रतिनिधियों (वर्तमान या पूर्व) के पास प्रभावी अभियोजन को प्रभावित करने या बाधित करने की शक्ति के कारण हैं." पूर्व विधायक भी मामले को प्रभावित कर सकता है सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार "वर्तमान एवं पूर्व विधायकों एवं सांसदों के मुकदमों की सुनवाई के लिए मध्य प्रदेश राज्य में विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई है. विशेष न्यायालयों की स्थापना का उद्देश्य वर्तमान एवं पूर्व विधायकों एवं सांसदों द्वारा या उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाना है." याचिकाकर्ता पूर्व विधायक हैं लेकिन अपराध के समय वह विधायक नहीं था और वर्तमान में भी विधायक नहीं है. अपराध की प्रासंगिक तारीख के अनुसार अभियुक्त पर विशेष न्यायालय द्वारा मुकदमा चलाया जाना है या नहीं, इसकी व्याख्या करना विशेष न्यायालयों की स्थापना के उद्देश्य को ही विफल कर देगी. मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया ये भी कहा गया "अभियुक्त की स्थिति महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण पहलू वह शक्ति है जिसका वह आनंद लेता है जो गवाहों को प्रभावित या प्रभावी अभियोजन को बाधित कर सकती है." एकलपीठ ने मणिपुर हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विशेष न्यायालयों के पास पूर्व और वर्तमान विधानमंडलों के खिलाफ सभी मामलों की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है, भले ही ऐसे अपराध किए जाने के समय उनकी स्थिति कुछ भी हो. एकलपीठ ने सुनवाई के बाद प्रकरण एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए. इमरती देवी ने जारी किया था वीडियो इस वाकये के बाद पूर्व मंत्री इमरती देवी ने भी वीडियो जारी कर अपनी बात कही थी. उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेसियों के लिए मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि उन्हें सद्बुद्धि दे. एक दलित महिला के बारे में ऐसा बोलना शोभा नहीं देता है. मैं कुछ ज्यादा नहीं बोलना चाहती, क्योंकि उन्होंने मुझे सदैव बड़ी बहन कहा है. भगवान ने उनकी बुद्धि खराब कर दी है, इसलिए ऐसा बोल रहे हैं. वह तो बहुत छोटे हैं. उनके बड़े नेता कमलनाथ मुझे आइटम कहते हैं, दिग्विजय सिंह टंच माल कहते हैं. कांग्रेसी तो शुरू से ऐसे ही बोलते आ रहे हैं. मैं एसपी के पास जाऊंगी, एफआईआर कराऊंगी. उन्हें छोडूंगी नहीं. इमरती को इतना सस्ता न समझें कि कभी भी कुछ भी बोल दें. मैं अपनी सरकार से भी कहूंगी कि मुझे न्याय दो.’   recent visitors 162

Vidisha के बीजामंडल में हिंदू नहीं कर पाएंगे पूजा, कलेक्टर ने दिया ASI के ‘मस्जिद’ नोटिफिकेशन का हवाला

 विदिशा  मध्य प्रदेश के विदिशा जिला प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की अधिसूचना का हवाला देते हुए शुक्रवार को नागपंचमी के मौके पर हिन्दुओं के पूजा करने के लिए 11वीं सदी के बीजामंडल को खोलने से इनकार कर दिया है। हिंदुओं के एक समूह ने जिलाधिकारी बुद्धेश कुमार वैद्य को शहर के बीचों-बीच स्थित इस स्थल को नागपंचमी पर खोलने के लिए ज्ञापन सौंपा था। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। जिलाधिकारी ने उनकी याचिका एएसआई को भेज दी, जिसने 1951 की गजट अधिसूचना का दो अगस्त को हवाला देते हुए कहा कि बीजामंडल मंदिर नहीं, बल्कि मस्जिद है। एएसआई है ढांचे का संरक्षक जिलाधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि एएसआई इस ढांचे का संरक्षक है, इसलिए उन्होंने मामले पर निर्णय लेने के लिए ज्ञापन उसे भेजा था। ज्ञापन सौंपने वाले हिंदू समूह के नेता शुभम वर्मा ने निराशा व्यक्त करते हुए एजेंसी से कहा, 'हम पिछले 30 साल से नागपंचमी पर वहां (ढांचे के बाहर) पूजा करते आ रहे हैं, लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि यह मंदिर नहीं बल्कि मस्जिद है।' वर्मा ने जिलाधिकारी के पत्र और एएसआई की गजट अधिसूचना को दिखाते हुए कहा कि एएसआई द्वारा इसे मस्जिद बताए जाने से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। हिंदुओं ने मांगी पूजा की अनुमति हालांकि, इस साल हिंदू समूहों ने 9 अगस्त को परिसर में प्रवेश करने और पूजा करने की अनुमति मांगी। विदिशा कलेक्टर बुद्धेश वैश्य ने उनके अनुरोध को एएसआई को भेज दिया, जिसने 1951 के राजपत्र अधिसूचना का हवाला देते हुए इस स्थल को 'बीजामंडल मस्जिद' के रूप में वर्गीकृत किया। कलेक्टर ने तब पूजा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे हिंदू समूहों में आक्रोश फैल गया। वे एएसआई द्वारा इस स्थल को मस्जिद के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध करते हैं, उनका दावा है कि यह 1972 से हिंदू पूजा स्थल रहा है। विधायक चाहते हैं सर्वेक्षण वहीं, विदिशा विधायक 'मंदिर के स्वामित्व' को साबित करने के लिए सर्वेक्षण चाहते हैं वे एएसआई द्वारा इस स्थल को मस्जिद के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध करते हैं, उनका दावा है कि यह 1972 से हिंदू पूजा स्थल रहा है। भोपाल से 60 किमी दूर भोपाल से लगभग 60 किमी और सांची स्तूप से बमुश्किल 10 किमी दूर विजय सूर्य मंदिर/बीजामंडल मस्जिद स्थल का इतिहास उथल-पुथल भरा रहा है। एएसआई-भोपाल सर्किल की वेबसाइट का कहना है कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर के खंडहरों पर किया गया था। हालांकि, यहां स्तंभ पर पाए गए शिलालेखों में से एक का कहना है कि यह देवी चर्चिका का मंदिर था। सूर्य देव के सम्मान में बनाया गया था यह मंदिर ऐसा माना जाता है कि इसे 11वीं-12वीं शताब्दी में सूर्य देव के सम्मान में बनाया गया था। मुगल शासन के दौरान, विशेष रूप से औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद 17वीं शताब्दी में इसे मस्जिद के रूप में पुनर्निर्मित किया गया था। हालांकि, मराठा शासन के दौरान मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थल जीर्ण-शीर्ण हो गया। हिंदू महासभा के नेतृत्व में किया गया आंदोलन 1934 में मंदिर के अवशेषों की खोज ने हिंदू महासभा के नेतृत्व में इसके संरक्षण के लिए एक आंदोलन को जन्म दिया। इसका एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय कार्यालयों में हिंदू महासभा के उम्मीदवार चुने गए। तब से, मंदिर को साल में केवल एक बार नाग पंचमी पर पूजा के लिए खोला जाता है। 1965 में सांप्रदायिक तनाव को दूर करने के लिए, तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्रा ने मुसलमानों के लिए एक अलग ईदगाह की स्थापना की। पीएम मोदी से की मांग फिर से विवाद उठने के साथ, हिंदू संगठनों ने पीएम नरेंद्र मोदी से 'बीजामंडल विजय मंदिर' को नियमित पूजा के लिए फिर से खोलने की अपील की है। कलेक्टर बुद्धेश वैश्य ने स्थानीय मीडिया को बताया कि सब कुछ एएसआई नियमों के अनुसार किया जाएगा। मुस्लिम प्रतिनिधियों ने विवाद पर मीडिया से बात करने से परहेज किया। विदिशा विधायक ने की यह मांग वहीं, विदिशा के भाजपा विधायक मुकेश टंडन ने मंदिर के स्वामित्व को स्थापित करने के लिए एक सर्वेक्षण का प्रस्ताव दिया है। उनका मानना है कि इस सर्वेक्षण से मंदिर की स्थिति की पुष्टि होगी। साथ ही संभावित रूप से 'पूजा के लिए इसके पूर्ण उपयोग की बहाली' होगी। टंडन ने मुस्लिम समुदाय के रुख को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने 'भूमि पर कोई विवाद नहीं जताया है'। उन्होंने समुदायों के बीच आपसी सम्मान पर प्रकाश डाला। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं, विशेष रूप से ईद पर, को समायोजित करने के प्रयासों का हवाला दिया। हिंदुओं में पैदा कर दी है चिंता उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा मंदिर पर लगाए गए ताले ने हिंदुओं में चिंता पैदा कर दी है। विधायक ने कहा कि एएसआई का कहना है कि ताला वहां संग्रहित कुछ मूर्तियों की सुरक्षा के लिए है। स्मारक संरक्षण के लिए 1951 में स्थापित कानूनी ढांचे का हवाला देते हुए टंडन ने कहा कि आपके नियमों में ताला लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि ताला के बारे में भ्रम को दूर करने के लिए जिला प्रशासन के साथ एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें एएसआई से इसे खोलने का आग्रह किया गया था, खासकर नाग पंचमी पूजा के दौरान। विधानसभा में उठाएंगे इसे विधायक इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। साथ ही पीएम मोदी और मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने के लिए दिल्ली जाने के लिए एक टीम बना रहे हैं। विधायक ने अप्रैल 1992 में इसी तरह की स्थिति का जिक्र किया, जब विरोध प्रदर्शन के बाद एएसआई और जिला अधिकारियों के साथ सफल बातचीत हुई थी, जिसके बाद 11 लोगों की टीम को मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि हिंदू परिवार एएसआई द्वारा लगाए गए किसी प्रतिबंध के बिना इस स्थल पर पूजा करना जारी रखे हुए हैं। recent visitors 89

प्रदेश के लाल ने पेरिस ओलंपिक में किया कमाल, विवेक सागर के घर जश्न का माहौल

नर्मदापुरम  हॉकी के ओलंपिक इतिहास में लगातार दूसरी बार भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है. इसकी खुशियां पेरिस से लेकर मध्य प्रदेश के छोटे से गांव चांदोन तक मनाई जा रही हैं. दरअसल मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के छोटे से गांव चांदोन में जन्में विवेक सागर देश की ओलंपिक टीम का हिस्सा है और मैच में विवेक के सराहनीय योगदान के कारण देश को कांस्य पदक मिला है. इसी जीत को लेकर पूरा जिला विवेक के परिवार के साथ जश्न में शरीक है. इस दौरान विवेक के गांव में जश्न का माहौल है. इस दौरान ढोल बाजे के साथ नाच गाना कर सभी लोग पेरिस ओलंपिक में हॉकी टीम के कांस्य पदक जीतने की खुशी मना रहे हैं. दोनों ही मैचों में विवके का अहम योगदान पेरिस में खेले जा रहे हैं ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में भारत की टीम ने स्पेन को 2-1 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया. भारत की हॉकी टीम ने ओलंपिक में लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल जीता है. ओलंपिक के इन दोनों ही मुकाबलों में इटारसी के चांदोन गांव निवासी विवेक सागर का अहम योगदान है. विवेक बचपन से ही हॉकी के दीवाने थे और गांव के कच्चे मैदान से प्रैक्टिस करते हुए विवेक लगातार भारत की ओर से दूसरी बार ओलंपिक टीम का हिस्सा बने हैं. टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर मध्य प्रदेश सरकार ने विवेक को डीएसपी की नौकरी दी थी. साथ ही उन्हें एकलव्य अवॉर्ड से भी नवाजा था. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दी बधाई उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने पेरिस ओलिम्पिक में भारतीय हाकी टीम को कांस्य पदक जीतने पर पूरी हॉकी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी टीम ने भारत का गौरव बढ़ाया है। भारतीय हॉकी टीम ने अत्यंत कलात्मक हॉकी का प्रदर्शन कर भारतवासियों का दिल जीत लिया। गांव में जश्न का माहौल विवेक के भाई विद्यासागर ने बताया कि, ''पूरे गांव में जश्न का माहौल है. घर और गांव में ढोल बजाकर पटाखे फोड़कर जश्न मनाया जा रहा है.'' उन्होंने कहा कि "ब्रॉन्ज मेडल मिलना भी एक बड़ी बात है." विवेक के पिता रोहित प्रसाद का कहना है कि "बहुत ही अच्छा लग रहा है, शुरू से मेरे द्वारा तो कई बार विवेक को हॉकी खेलने के लिए मना किया जाता था, लेकिन जब विवेक आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, तो बहुत खुशी होती है.'' विवेक ने प्रदेशवासियों को दी बधाई नर्मदापुरम जिले एकलौते हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर ने मैच में ब्रॉन्ज मैडल जीतने के बाद एमपी के नागरिकों और खिलाड़ियों को बधाई दी. उन्होंने वीडियो शेयर कर कहा कि "ओलंपिक में आज भारतीय हाकी टीम ने ब्रॉन्ज मैडल जीता है. साथ ही भारतीय टीम और उनको सपोर्ट करने के लिए प्रदेश वासियों और हॉकी प्रेमियों को बधाई देते हुए कहा कि, ''आज भारतीय हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक में तीसरा स्थान प्राप्त कर ब्रॉन्ज मेडल घर लेकर जा रही है.''   recent visitors 100