सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरक्षण का लाभ सिर्फ पहली पीढ़ी तक ही सीमित होना चाहिए, ए राजा ने टिप्पणी की आलोचना की

नई दिल्ली लोकसभा में डीएमके सांसद ए राजा ने मंगलवार को सरकार से दलित आरक्षण को बचाने का अनुरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि वह दलितों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाएं। ए राजा ने हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी की आलोचना की है जिसमें कोर्ट ने कहा है कि आरक्षण का लाभ सिर्फ पहली पीढ़ी तक ही सीमित होना चाहिए। इस फैसले पर असहमति जताते हुए ए राजा ने लोकसभा में एक सत्र के दौरान कहा, “दलित लोगों में आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से उनके अधिकार छीन जायेंगे। उन्होंने आगे हरियाणा की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा, “हरियाणा में एक आईपीएस अधिकारी को भी अपनी शादी में घोड़े पर बैठने की अनुमति नहीं थी।” हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है कि राज्य सरकार एससी और एसटी कोटे में उपवर्गीकरण करने का अधिकार है। भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड सहित 7 जजों की पीठ ने यह भी कहा कि एससी एसटी के कोटे में भी क्रीमी लेयर की पहचान कर उन्हें आरक्षण के दायरे से हटाने की जरूरत है। उपवर्गीकरण की इजाजत देकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के लिए एससी/एसटी श्रेणियों के अंदर सबसे वंचित समूहों की पहचान करने और उन्हें लक्षित लाभ प्रदान करने का रास्ता खोल दिया है। recent visitors 105

कानून व्यवस्था सामान्य नहीं हो जाती भारत की गहरी चिंता बनी रहेगी, 19 हजार भारतीय सबसे बड़ी चिंता: जयशंकर

ढाका बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद दंगों की भयावह तस्वीर ने दुनिया को चिंतित कर दिया है। खासकर, भारत बांग्लादेश में हो रहे हर घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर निरंतर नजर रखे हुए है और जब तक वहां कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती भारत की गहरी चिंता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अभी भी 19 हजार भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिनमें अधिकतर छात्र हैं। हम उनसे लगातार संपर्क में हैं। जयशंकर ने बांग्लादेश के घटनाक्रम पर राज्यसभा में बयान देते हुए कहा कि पड़ोसी देश का राजनीतिक घटनाक्रम चिंता का विषय है और सरकार अपने राजनयिक मिशनों के माध्यम से वहां रह रहे भारतीय नागरिकों से बराबर संपर्क बनाये हुए है। उन्होंने कहा कि वहां भारत के 19 हजार नागरिक हैं जिनमें करीब नौ हजार छात्र हैं और इनमें से काफी छात्र जुलाई में स्वदेश आ गये थे। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर नजर विदेश मंत्री ने कहा कि भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी निगाह रखे हुए है। वहां से ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं कि कई समूह और संगठन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सलामती के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा , “ स्वभाविक है कि जब तक वहां कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती हमारी गहरी चिंता बनी रहेगी। ” विदेश मंत्री ने बताया कि सीमाओं पर तैनात सुरक्षा बलों को बांग्लादेश की जटिल स्थिति को देखते हुए असाधारण रूप से चौकस रहने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले 24 घंटों से ढाका में अधिकारियों के साथ संपर्क बनाये हुए है। पीएम हसीना ने मांगी थी भारत की मदद बांग्लादेश के घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि पांच अगस्त को ढाका में कर्फ्यू लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में सड़कों पर जमा हो गये थे। हम समझते हैं कि वहां के सुरक्षा प्रतिष्ठान (सेना) के साथ एक बैठक के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा देने का निर्णय किया और थोड़े समय के नोटिस पर उन्होंने कुछ समय के लिए भारत आने की अनुमति का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि साथ ही हमें बांग्लादेश के अधिकारियों से हवाई उडान की अनुमति का भी अनुरोध मिला और वह (हसीना) सोमवार शाम दिल्ली आ गयी। दो दिन पहले बिगड़े हालात विदेश मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश में चार अगस्त को स्थिति ने गंभीर मोड़ लिया और पुलिस थानों तथा सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमले होने लगे जिसके बाद हिंसा ने व्यापक रूप ले लिया । सरकार में शामिल लोगों की संपत्तियों पर पूरे देश में हमले होने लगे। विदेश मंत्री ने कहा कि खास तौर से चिंता की बात यह है कि अल्पसंख्यकों , उनके व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर भी कई जगह हमले हुए। इन हमलों का पूरा विवरण अभी स्पष्ट नहीं है। जुलाई से जारी है हिंसा जयशंकर ने कहा कि बंगलादेश में इस वर्ष जनवरी में हुए चुनाव के बाद से तनाव बढ गया था और वहां की राजनीति में ध्रुवीकरण और विभाजन गहरा होने लगा था। इस पृष्ठभूमि में जून में शुरू हुए विद्यार्थियों के आंदोलन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। हिंसा की घटनाएं बढने लगी , सरकारी इमारतों पर हमले होने लगे , सड़क और रेल मार्गों पर बाधा पहुंचायी गयी। यह हिंसा जुलाई में भी जारी रही। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में हमने बराबर संयम बरतने की सलाह दी और आग्रह किया कि स्थिति को बातचीत से सामान्य किया जाये। हमने विभिन्न राजनीतिक शक्तियों से भी इसी तरह का आग्रह किया जिनके साथ हमारा संपर्क था। विदेश मंत्री ने कहा कि 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद सार्वजनिक प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आयी। उसके बाद वहां की सरकार के फैसलों और कार्रवाईयों से स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती गयी और आंदोलन ऐसे माेड पर पहुंच गया जहां केवल एक ही मांग रही गयी थी कि प्रधानमंत्री हसीना इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में दशकों से असाधारण रूप से प्रगाढ़ रहे हैं। बांग्लादेश में हिंसा और अस्थिरता को लेकर भारत में सभी दलों की चिंता समान है। recent visitors 129

आप सांसद ने कहा कि बांग्लादेश संकट एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है, बैठक में नहीं बुलाने पर भड़की

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) ने बांग्लादेश संकट पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित न किए जाने पर सरकार को पत्र लिखने का निर्णय लिया है। आप नेताओं ने इस मुद्दे पर गहरी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी को भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए था। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी को कथित रूप से दरकिनार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र पर निशाना साधा। आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद ने कहा कि बांग्लादेश संकट एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है। आप जल्द ही सरकार को एक औपचारिक पत्र भेजकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगेगी। संजय सिंह ने कहा, "विदेश मंत्री ने हमें बांग्लादेश की जमीनी स्थिति के बारे में बताया। हमने इस पर कोई सवाल नहीं पूछा क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। लेकिन आप एक राष्ट्रीय पार्टी है और हमारे पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सांसद हैं। हो सकता है कि पीएम मोदी हमें पसंद न करते हों। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा पीएम की पसंद और नापसंद का मुद्दा नहीं हो सकता।" संजय सिंह ने कहा, "जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि प्रधानमंत्री किस पार्टी से खुश हैं या नाराज हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में हर पार्टी को शामिल किया जाना चाहिए।" उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी को जानबूझकर बैठक से बाहर रखा गया। उन्होंने कहा, "13 सांसदों वाली राष्ट्रीय पार्टी आम आदमी पार्टी को इस महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित न करना सरकार की गंभीरता की कमी और क्षुद्र मानसिकता को दर्शाता है।" AAP नेता ने कहा कि सरकार ने हमें यह नहीं बताया कि हमें क्यों नहीं बुलाया गया। यह पहली बार है, जब हमें नहीं बुलाया गया। हम अफगानिस्तान पर सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए थे। गौरतलब है कि बांग्लादेश संकट पर चर्चा करने के लिए हाल ही में एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें कई प्रमुख राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन आम आदमी पार्टी को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे पार्टी में नाराजगी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक में नेताओं को सूचित किया कि भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मदद का भरोसा दिलाते हुए उन्हें भविष्य की रणनीति तय करने के लिए समय दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक में जयशंकर ने कहा कि हसीना को भारत आए चौबीस घंटे भी नहीं बीते हैं और वह सदमे में हैं। सूत्रों के मुताबिक, जयशंकर ने कहा कि सरकार हसीना को सदमे से उबरने के लिए समय दे रही है और इसके बाद वह उनकी भविष्य की योजनाओं सहित अन्य मुद्दों पर उनसे बात करेगी। recent visitors 126

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को ब्रिटेन ने दिया जोर का झटका, जिस देश में पहले पहुंचीं, वहीं शरण लें

नई दिल्ली बांग्लादेश की कल तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना आज शरण की मोहताज हैं। वह 5 अगस्त को पीएम पद से इस्तीफा देकर भारत आ गई थीं और फिलहाल यहीं हैं। कहा जा रहा है कि वह ब्रिटेन में शरण लेना चाहती हैं, जहां उनकी बहन और बेटे रहते हैं। लेकिन इस बीच ब्रिटेन से शरण की उम्मीद लगाए शेख हसीना को झटका लगा है। ब्रिटेन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमारे इमिग्रेशन रूल्स किसी व्यक्ति को शरण के लिए आने या फिर अस्थायी तौर पर रहने की परमिशन नहीं देते। ब्रिटिश गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की शरण तो किसी को भी उस देश में ही मांगनी चाहिए, जहां वह सबसे पहले सुरक्षित पहुंचा हो। इस तरह ब्रिटेन ने एक तरह से शेख हसीना को भारत में ही शरण मांगने का सुझाव दिया है। सर कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाले ब्रिटेन से विकल्प खारिज होने की सूरत में शेख हसीना को अब किसी नए विकल्प पर विचार करना होगा। अब तक भारत सरकार की ओर से शेख हसीना के ठहरने पर कुछ कहा नहीं गया है। लेकिन बांग्लादेशी मीडिया का कहना है कि शेख हसीना अंतरिम ठहराव के लिए ही भारत पहुंची थीं और वह यहां से किसी और देश जा सकती हैं। लेकिन अब तक वह हिंडन एयरबेस में ही ठहरी थीं। कुछ वक्त पहले उन्हें दिल्ली में ही किसी सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया है। ब्रिटिश गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि यदि किसी को संरक्षण चाहिए तो जिस भी देश में वह सबसे पहले पहुंचे, वहीं उसे शरण मांगनी चाहिए। अब तक यह भी साफ नहीं है कि शेख हसीना ने ब्रिटेन से शरण मांगी है अथवा नहीं। 76 साल की शेख हसीना को हिंसक प्रदर्शनों के चलते सोमवार को देश छोड़ना पड़ा था और उससे ठीक पहले इस्तीफा दिया था। नौकरियों में कोटे के विरोध में वहां ऐसा आंदोलन हुआ कि 300 से ज्यादा लोग अब तक मारे जा चुके हैं। यही नहीं शेख हसीना के निकलने के बाद भी देश में हिंसा का दौर जारी है और करीब 100 लोग फिर मारे जा चुके हैं। कहा जा रहा है कि हसीना को निकलने के लिए सेना से 45 मिनट मिले थे। शेख हसीना अब जाएं तो जाएं कहां यदि शेख हसीना को ब्रिटेन में शरण नहीं मिलती है तो उन्हें किसी और देश का रुख करना होगा। इसके अलावा तब तक भारत में ही रहना होगा। सूत्रों का कहना है कि भारतीय एजेंसियां भी चाहती हैं कि शेख हसीना यहां ज्यादा दिन न रहें। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके यहां ठहरने से बांग्लादेश में भारत के खिलाफ माहौल बन सकता है। भारत के लिए बांग्लादेश से अच्छे संबंध रखना जरूरी है क्योंकि पाकिस्तानी एजेंसियां वहां हावी हो सकती हैं। ऐसे में हसीना की कीमत पर भारत सरकार ढाका से संबंध नहीं बिगाड़ना चाहेगी। recent visitors 109

कॉलेज में हिजाब पर प्रतिबंध के मामले को आने वाले दिनों में जल्द ही सूचीबद्ध किया जाएगा: सीजेआई

नई दिल्ली कॉलेज में हिजाब प्रतिबंध का मामला एक बार फिर से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उसने बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है, जिसमें मुंबई के एक कॉलेज के परिसर में हिजाब, बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय को बरकरार रखा गया है। मंगलवार को जब याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष पेश किया गया, तो सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस मामले के लिए एक पीठ नियुक्त कर दी है और इसे आने वाले दिनों में जल्द ही सूचीबद्ध किया जाएगा। बंबई उच्च न्यायालय ने ‘चेंबूर ट्रॉम्बे एजुकेशन सोसाइटी’ के एन जी आचार्य एवं डी के मराठे महाविद्यालय द्वारा हिजाब, बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से 26 जून को इनकार कर दिया था और कहा था कि ऐसे नियम छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ‘ड्रेस कोड’ का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना है, जो कि शैक्षणिक संस्थान की ‘‘स्थापना और प्रशासन’’ के लिए कॉलेज के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने अपील को तत्काल सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर संज्ञान लेते हुए कहा कि इस मामले के लिए पहले ही एक पीठ तय कर दी गई है और इसे जल्द ही सूचीबद्ध किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अबीहा जैदी ने मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि कॉलेज में ‘यूनिट टेस्ट’ संभवत: बुधवार से शुरू हो जाएंगे। शीर्ष अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जारी किए गए ऐसे आदेशों की वैधता पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उच्चतम न्यायालय की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने 13 अक्टूबर, 2022 को कर्नाटक में उठे हिजाब विवाद को लेकर विरोधाभासी फैसला सुनाया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत तत्कालीन राज्य सरकार ने कर्नाटक के विद्यालयों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें प्रतिबंध हटाने से इनकार कर दिया गया था, जबकि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कहा था कि राज्य के विद्यालयों और महाविद्यालयों में कहीं भी हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। मौजूदा विवाद मुंबई के एक कॉलेज के निर्णय से जुड़ा है। बंबई उच्च न्यायालय ने प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि 'ड्रेस कोड' सभी छात्राओं पर लागू है, चाहे उनकी जाति या धर्म कुछ भी हो। छात्राओं ने उच्च न्यायालय का रुख कर कॉलेज द्वारा जारी उस निर्देश को चुनौती दी थी, जिसमें हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी पहनने और किसी भी तरह का बैज लगाने पर प्रतिबंध संबंधी ‘ड्रेस कोड’ को लागू किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि यह नियम उनके धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकार, निजता के अधिकार और ‘‘पसंद के अधिकार’’ का उल्लंघन करता है। अदालत ने कहा था कि वह यह नहीं समझ पा रही है कि कॉलेज द्वारा 'ड्रेस कोड' निर्धारित करने से संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन कैसे होता है। न्यायाधीशों ने कहा था, ‘‘हमारे विचार में निर्धारित 'ड्रेस कोड' को भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1) (ए) और अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है।’’ पीठ ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि हिजाब, नकाब और बुर्का पहनना उनके धर्म का अनिवार्य हिस्सा है। recent visitors 103

लालकृष्ण आडवाणी फिर अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर, पिछले महीने ही हुए थे डिस्चार्ज

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को मंगलवार को फिर यहां अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। आडवाणी को वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक सूत्र ने कहा,‘‘एल के आडवाणी की हालत स्थिर है। मूत्रविज्ञान, हृदयरोग विज्ञान और जेरिएट्रिक मेडिसिन सहित विभिन्न विशेषज्ञ उनकी जांच कर रहे हैं।’’ इससे पहले पिछले महीने ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां कुछ दिन इलाज के छुट्टी दे गई थी। 96 वर्षीय आडवाणी पहले भी अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उससे कुछ दिन पहले उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया था। उन्हें एम्स में एक रात रखने के बाद छुट्टी दे दी गई थी। एलके आडवाणी भारतीय राजनीति के प्रमुख हस्तियों में से एक हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। एलके आडवाणी की पहचान एक दृढ़ और सक्षम नेता के रूप में होती है, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसी साल केंद्र की भाजपा सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया है। recent visitors 112

संन्यास लेने वाले खूंखार बल्लेबाज अब रॉयल्स की तरफ से खेलेंगे, दिनेश कार्तिक एसए20 से जुड़ने …

मुंबई पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को पार्ल रॉयल्स ने एसए20 के तीसरे सत्र के लिए अनुबंधित किया, जिससे वह अगले साल 9 जनवरी से शुरू होने वाली दक्षिण अफ्रीकी टी20 क्रिकेट लीग से जुड़ने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बन गए. आईपीएल में लंबे समय तक खेलने वाले 39 साल के कार्तिक ने इस साल जून में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया था और उन्हें आईपीएल टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू ने मेंटर (मार्गदर्शक) सह बल्लेबाजी कोच के रूप में नियुक्त किया है. भारत के लिए तीनों प्रारूपों में 180 मैच खेलने वाले कार्तिक ने कहा, ‘दक्षिण अफ्रीका में खेलने और वहां जाने की मेरी बहुत सारी यादें हैं और जब यह अवसर आया तो मैं मना नहीं कर सका क्योंकि प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापस आना और रॉयल्स के साथ इस अविश्वसनीय प्रतियोगिता को जीतना कितना खास होगा.’ कार्तिक ने पिछला प्रतिस्पर्धी टी20 मैच आईपीएल 2024 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए खेला था. उन्होंने 2024 सत्र में 14 मैच में 187.36 के स्ट्राइक रेट से 326 रन बनाए थे. कार्तिक ने भारत के लिए आखिरी मैच 2022 में ऑस्ट्रेलिया में हुए टी20 विश्व कप के दौरान बांग्लादेश के खिलाफ खेला था. एक दिन पहले लीग के दूत बनाए गए कार्तिक ने कहा, ‘मैं पार्ल रॉयल्स टीम में शामिल होकर बहुत खुश हूं जिस टीम में काफी अनुभव, गुणवत्ता और क्षमता है. मैं निश्चित रूप से इस समूह में शामिल होने और एक रोमांचक सत्र में योगदान देने के लिए उत्सुक हूं.’   recent visitors 126