पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जारी किए आदेश, जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य पर मिलेगा पुरस्‍कार

भोपाल जल गंगा संवर्धन अभियान में श्रेष्ठ कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, कर्मियों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार दो श्रेणी में प्रदान किये जायेंगे। इस संबंध में म.प्र. राज्‍य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्‍त श्री अवि प्रसाद ने बताया कि एक पुरस्कार जल गंगा संवर्धन अभियान में समग्र रूप से उत्कष्ट कार्य पर और दूसरा मनरेगा अन्‍तर्गत खेत-तालाब निर्माण में श्रेष्ठ कार्य करने पर दिया जाएगा। अभियान में समग्र रूप से श्रेष्ठ कार्य करने पर पुरस्कार प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी में दिया जाएगा। विभाग द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को निर्देश पत्र भी जारी कर दिए गए हैं। अभियान में समग्र रूप से श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिले के कलेक्टर को क्रमश: 1 लाख 50 हजार रुपये, 1 लाख 25 लाख रुपये और 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। इसी प्रकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्‍कार क्रमश: 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप राशि प्रदान की जाएगी। जबकि, जिले के अमले के लिए क्रमश: 6 लाख, 4 लाख 50 हजार और 3 लाख रुपये की पुरस्कार स्वरूप राशि प्रदान की जाएगी। जिले के अधिकारियों-कर्मचारियों को पुरस्कार देने के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिला स्तरीय समिति द्वारा चयन किया जाएगा। इसके साथ ही यदि अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिला, जनपद, पंचायत में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों, कर्मियों का स्थानांतरण हो जाता है तो उन्हें पदस्थापना की कार्य अवधि के समानुपात में पुरस्कार की राशि प्रदान की जाएगी। जिन नवगठित जिलों में जिला पंचायत गठित नहीं है उन जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त रूप से उनकी जनपदों के प्रदर्शन के आधार पर समानुपातिक रूप से पुरस्कार दी जाएगी। राज्य स्तर पर किया जाएगा सत्यापन जल गंगा संवर्धन अभियान की अवधि पूर्ण होने पर मनरेगा डेशबोर्ड/ पोर्टल/JGSA dashboard पर निर्धारित मापदंडों के अनुसार जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों की रैंक के आधार पर उपरोक्त श्रेणियों का चयन किया जाएगा। इसका सत्यापन राज्य स्तर पर किया जाएगा। खेत-तालाब में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले व विकासखंड को भी मिलेगा पुरस्कार जल गंगा संवर्धन अभियान में खेत-तालाब के निर्माण में उत्कृष्ट कार्य वाले जिले व विकासखंड को पुरस्कृत किया जाएगा। यह पुरस्कार दो श्रेणियों में दिया जाएगा। जिला स्तरीय पुरस्कार के लिए "ए" व "बी" दो श्रेणी होगी। "ए" श्रेणी में 4 या उससे कम जनपदों को शामिल किया जाएगा। है। इसी तरह से बी श्रेणी में 5 या उससे अधिक जनपदों को शामिल किया जाएगा। विकासखंड स्तरीय पुरस्कार के लिए भी ए व बी श्रेणी निर्धारित की गई। ए श्रेणी में 70 या उससे कम ग्राम पंचायतों वाली जनपद पंचायतों को शामिल किया गया, जबकि "बी" श्रेणी के लिए 71 या उससे अधिक ग्राम पंचायत वाली जनपदों को शामिल किया गया है। पूरे प्रदेश में जिला स्तर व विकासखंड स्तर की दोनों श्रेणियों के लिए 1-1 पुरस्कार दिया जाएगा। जिला स्तरीय पुरस्कार "ए" व "बी" श्रेणी में आने वाले कलेक्टर को 1 लाख रुपये, मुख्य कार्यपालन अधिकारी को 75 हजार रुपये, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को 50 हजार रुपये और जिले के अमले के लिए 2 लाख 75 हजार रुपये की राशि पुरस्कार के तौर पर दी जाएगी। विकासखंड स्तर पर भी "ए" व "बी" श्रेणी में आने वाले जनपद पंचायत सीईओ को 50 हजार रुपये, सहायक यंत्री जनपद पंचायत को 30 हजार रुपये और जनपद अमले को 1 लाख 20 हजार रुपये की राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाएगी।   recent visitors 40

शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के लिये 19 मई से शिविर लगाने का फैसला किया

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश की समाप्ति तक की अवधि में संभाग और जिला स्तर पर समस्याओं के निराकरण के लिये 19 मई से शिविर लगाने का फैसला किया है। शिविर में किये जाने वाले कार्यों के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किये हैं। शिविर में क्रमोन्नति वेतनमान, समयमान वेतनमान, वेतन वृद्धि, सेवा अभिलेखों के अपडेटेशन पर विशेष कार्य किया जायेगा। इसके साथ ही आगामी 3 वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के वेतन निर्धारण का कोष एवं लेखा द्वारा परीक्षण किया जाकर वसूली योग्य प्रकरणों में सेवा से पूर्व वसूली का निर्धारण किया जायेगा। शिविर में पेंशन और अन्य लम्बित स्वतत्वों का निराकरण, अन्य लम्बित अभ्यावेदनों का निराकरण किया जायेगा। जिला और संभागीय कार्यालयों को 30 मई तक समय-सारणी का निर्धारण संबंधित संयुक्त संचालक के मार्गदर्शन में किये जाने के लिये कहा गया है। समय-सारणी की सूचना लोक शिक्षण संचालनालय को दिये जाने के लिये कहा गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस से होगी समीक्षा शिविरों में होने वाली प्रतिदिन की कार्यवाही की 5 जून तक प्रति कार्य-दिवस वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भोपाल से समीक्षा की जायेगी। प्रकरणों पर निराकरण नहीं होने पर लम्बित आवेदन और न्यायालयीन प्रकरण निर्मित होने पर संबंधित संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे। लम्बित प्रकरणों के संबंध में आवेदक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और संयुक्त जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं।   recent visitors 33

अब छात्र जिन विषयों में फैल हुए हैं, उनकी दोबारा से परीक्षा देनी होगी, 10वीं और 12वीं की दूसरी परीक्षा का टाइम टेबल जारी

ग्वालियर मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल(MPBSE) 10वीं व 12वीं की परीक्षा में फेल होने वाले, अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का मौका 17 जून से मिलेगा। जिले में बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट आने के बाद दोनों ही कक्षाओं के 15967 छात्र इस परीक्षा में बैठकर अपने पूरे साल को बचा सकते हैं। यहां बता दें कि नई शिक्षा नीति के तहत अब छात्रों की पूरक परीक्षा नहीं आएगी। अब छात्र जिन विषयों में फैल हुए हैं, उनकी दोबारा से परीक्षा देनी होगी और उनकी अंक सूची में सप्लीमेंट्री भी लिखा हुआ नहीं आएगा। यदि छात्र सभी विषयों में फेल हैं, तो वह सभी विषयों की परीक्षा दे सकता है। बोर्ड ने द्वितीय परीक्षा के लिए टाइम टेबल भी जारी कर दिया है। दूसरी परीक्षा में परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से लेकर अन्य जो भी नियम हैं वे फरवरी-मार्च में हुई परीक्षा वाले ही रहेंगे। इसलिए खास है यह परीक्षा दूसरी परीक्षा में छात्र सभी विषयों की परीक्षा दे सकते हैं। इसके साथ ही जो छात्र पास हो गए हैं, वे श्रेणी सुधार के लिए भी परीक्षा दे सकते है। साथ ही किसी वजह से पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहे छात्र या परीक्षा में समय पर न पहुंचने वाले सभी छात्रों को इस परीक्षा में मौका मिलेगा। पूरा साल खराब नहीं होगा यानी छात्र का पूरा साल खराब नहीं होगा। साथ ही जो छात्र परीक्षा देगा परिणाम आने तक वह अगली परीक्षा में अस्थायी रूप से प्रवेश भी ले सकता है। इससे उसकी अगली परीक्षा की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी। recent visitors 39

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बूथ मैनेजमेंट से लेकर आभासी दुनिया में मज़बूत करेगी, लगेगा स्पेशल ट्रेनिंग कैंप

भोपाल मध्य प्रदेश की सत्ता से करीब 2 दशक से बाहर कांग्रेस पार्टी अब आगामी 2028 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को नए सिरे से तैयार करने में जुट गयी है. यह तैयारी ज़मीन पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर आभासी दुनिया यानि वर्चुअल वर्ल्ड में कांग्रेस को कैसे मज़बूत करना है, उसकी होगी. जिसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गुर सिखाये जायेंगे. सबसे खास बात यह है कि इसका खर्चा नेता और कार्यकर्ता खुद उठाएंगे. इसके लिए AICC ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिन राव अपनी टीम के साथ 9 जून से 15 जून तक मध्यप्रदेश में रहेंगे और सर्वोदय मेथोडोलॉजी को अपनाते हुए किसी शांत जगह पर यह ट्रेनिंग कैंप लगाया जायेगा. सबसे बड़ी बात है कि कांग्रेस के सभी विधायकों और जिला अध्यक्षों समेत सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस प्रशिक्षिण शिविर में आना अनिवार्य होगा, जिसके लिए एक निश्चित शुल्क उनसे लिया जायेगा. एमपी कांग्रेस के अभिनव बरोलिया ने बताया कि सर्वोदय कैंप पहले भी आयोजित होते रहे हैं लेकिन अब नए ज़माने की नई तकनीक को भी इस बार शामिल किया जायेगा. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी चाहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बीजेपी के संगठन से मुकाबले के लिए हर मोर्चे पर तैयार करना पड़ेगा इसलिए इस कैंप का आयोजन किया जा रहा है. बीजेपी जिस तरह से सोशल मीडिया में नैरेटिव बनाती है और फेक न्यूज़ फैलाती है उसे कैसे पहचानें और कांग्रेस के खिलाफ होने वाले दुष्प्रचार को कैसे रोका जाये, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस पार्टी का देश की आज़ादी और विकास में क्या योगदान रहा इसे जनता तक पहुंचाने की ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके अलावा नेताओं और कार्यकर्ताओं को बताया जायेगा कि वो कैसे प्रवास पर रहें, प्रवास के दौरान लोगों से मिले, कार्यकर्ताओं के घर खाना खाएं या जिस इलाके में प्रवास पर हों वहां के लोगों के साथ समय बिताएं यह सारी बातें इस सर्वोदय कैंप में बताई जाएगी. recent visitors 62

नितिन गडकरी ने नई सेमीकंडक्टर यूनिट को भारत की ‘तकनीकी आत्मनिर्भरता’ की खोज में एक महत्वपूर्ण कदम बताया

नई दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में नई सेमीकंडक्टर यूनिट को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की 'तकनीकी आत्मनिर्भरता' की खोज में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत अतिरिक्त सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की स्थापना को हरी झंडी दिखाए जाने के कदम को सराहा। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने 'एक्स' पर लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत एक अतिरिक्त सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा की स्थापना को मंजूरी दे दी है।" उन्होंने आगे कहा, "5 यूनिट के निर्माण के एडवांस स्टेज में होने के साथ, यह छठा प्लांट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की खोज में एक बड़ा कदम है।" केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस प्लांट को लेकर आगे जानकारी दी कि नई अप्रूव्ड यूनिट हार्डवेयर विकास में अपनी विरासत के लिए प्रसिद्ध एचसीएल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में ग्लोबल लीडर फॉक्सकॉन के बीच एक संयुक्त उद्यम है। यह प्लांट यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के भीतर जेवर हवाई अड्डे के पास स्थित होगा। यह प्लांट 20,000 वेफर और 36 मिलियन यूनिट प्रति माह की अनुमानित क्षमता के साथ डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन करेगा। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना को मंजूरी दी है। इससे 3,700 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा। इस नए प्लांट में मोबाइल, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, पीसी और डिस्प्ले वाले दूसरे डिवाइस के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का निर्माण होगा। कैबिनेट नोट के अनुसार, ''भारत में लैपटॉप, मोबाइल, सर्वर, मेडिकल डिवाइस, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की तेजी से विकास के साथ सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ रही है, यह नई यूनिट प्रधानमंत्री मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को और आगे बढ़ाएगी।'' recent visitors 67

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के दुष्कर्म मामले में डॉक्टरों की निगरानी में उसका गर्भपात कराने की अनुमति दी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म की शिकार आठवीं कक्षा की 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने यह फैसला पीड़िता के स्वास्थ्य को देखते हुए लिया, जिसे गर्भ ठहरने के बाद से गंभीर शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने हाई कोर्ट को अवगत कराते हुए कहा था कि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया गया, तो छात्रा की जान को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने इसको बेहद गंभीरता से लिया। पीड़िता महज एक नाबालिग छात्रा है, जो आरोपी के बहकावे में आकर उसके साथ चली गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद छात्रा ने परिजनों के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1), 64(2), 64(2)(एफ), 64(2)(एम), 365(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध दर्ज किया। चिकित्सकीय रिपोर्ट ने दिया खतरे का संकेत सरकारी अस्पताल में हुई चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि पीड़िता 10 सप्ताह 4 दिन की गर्भवती है और भ्रूण जीवित अवस्था में है। शुरुआत में डॉक्टरों ने पीड़िता की उम्र और मामले की न्यायिक स्थिति को देखते हुए गर्भपात की अनुमति नहीं दी थी। गर्भ की अवधि बढ़ने के साथ ही पीड़िता को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होने लगीं। डॉक्टरों ने हाई कोर्ट को अवगत कराया कि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया, तो छात्रा की जान को खतरा हो सकता है। सीएमएचओ की रिपोर्ट के आधार पर अनुमति हाई कोर्ट के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने पीड़िता का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण कराया और विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि पीड़िता का गर्भपात किया जाना आवश्यक है। इससे उसकी जान को खतरा नहीं होगा। इस आधार पर न्यायालय ने विशेषज्ञ डाक्टरों की निगरानी में अबार्शन कराने की अनुमति दे दी। पीड़िता की गोपनीयता व गरिमा बनी रहे हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पीड़िता की पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता या उसकी कानूनी अभिभावक की उपस्थिति में वह जिला अस्पताल में रिपोर्ट करें, जहां डाक्टरों की टीम एक बार फिर से मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की जांच करेगी। सब कुछ ठीक पाए जाने पर गर्भपात की प्रक्रिया की जाएगी। कोर्ट ने एक और अहम आदेश में यह भी कहा कि गर्भपात के बाद भ्रूण को संरक्षित रखा जाए और उसका डीएनए नमूना लिया जाए, ताकि आगे की जांच में उसका उपयोग किया जा सके।   recent visitors 54

रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच खींचतान के लिए दोनों मंत्रालयों ने नए सिरे से एक सहमति पत्र पर किये हस्ताक्षर

नई दिल्ली जमीन समेत अन्य अनेक मामलों में रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय के बीच खींचतान और उसके कारण परियोजनाओं में होने वाली देरी को समाप्त करने के लिए दोनों मंत्रालयों ने नए सिरे से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहमति पत्र से पीएम गति शक्ति के तहत आने वाली बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में आ रहीं अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी। दोनों मंत्रालयों ने पिछले साल नवंबर में भी नेशनल हाईवे कॉरिडोर में आने वाले रोड ओवर और रोड अंडर ब्रिजों के लिए इसी तरह के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। मिलकर समाधान निकालेंगे मंत्रालय उसी के अनुरूप अब जमीन समेत अन्य मामलों को लेकर भी अनुबंध किया गया है। नए समझौते में एक-दूसरे की जमीन लेने की प्रक्रिया को और सरल और समयबद्ध किया गया है। इसके साथ ही दोनों मंत्रालय समन्वय के लिए प्रोजेक्ट स्तर पर समितियों का भी गठन करेंगे और विवाद वाली स्थितियों में मिलकर समाधान तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। सहमति पत्र के अनुसार अगर हाईवे निर्माण के लिए रेलवे की जमीन का कोई हिस्सा सड़क परिवहन मंत्रालय अथवा एनएचएआई को चाहिए तो उसे उसके ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा और रेलवे 90 दिनों के भीतर वह जमीन सौंप देगा। यही प्रक्रिया रेलवे की जरूरतों के लिए भी लागू होगी। साझा पोर्टल किया जाएगा तैयार चूंकि सड़क परिवहन मंत्रालय के पास अभी इस तरह का कोई पोर्टल नहीं है इसलिए रेलवे को ऑफलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के 15 दिनों के भीतर दोनों मंत्रालयों की एक संयुक्त टीम जमीन की पहचान करेंगी। जमीन और आरओबी तथा आरयूबी के मामलों के समाधान के लिए दोनों मंत्रालयों ने हर दो महीने में समीक्षा बैठक करने का भी फैसला किया है। इसके अतिरिक्त दोनों मंत्रालय एक साझा पोर्टल भी विकसित करेंगे जिसमें इन मामलों को दर्ज किया जा सकेगा।   recent visitors 54