मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उद्योग समागम का 3 मई को मंदसौर में करेंगे शुभारंभ

भोपाल कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी उन्नयन और कृषक कल्याण को समर्पित ‘कृषि उद्योग समागम-2025’ का 3 मई को मंदसौर में भव्य आयोजन होगा। एक दिवसीय समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, क्षेत्रीय सांसद, विधायकगण तथा प्रदेश भर से आए कृषक, उद्यमी, निर्यातक और एफपीओ प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। प्रमुख गतिविधियाँ कृषक सम्मेलन एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन: समागम में कृषि एवं उद्यानिकी के विशेषज्ञों द्वारा नवीनतम तकनीकों पर विस्तृत मार्गदर्शन किसानों और उद्यमियों को प्रदान किया जायेगा, जिसका लाभ वह अपने कृषि और खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों को बेहतर बनाने में कर सकेंगे। नवीन कृषि तकनीकों का प्रदर्शन समागम स्थल पर देश के कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में आधुनिक यंत्रों, उपकरणों का उत्पादन करने वाली इकाइयों द्वारा स्टॉल लगाये जायेंगे। इनमें आधुनिक कृषि यंत्र ट्रैक्टर, हैप्पी सीडर, प्याज-लहसुन बुआई यंत्र, ड्रोन, एआई आधारित उपकरण, पॉवर स्प्रेयर, सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, सेंसर-आधारित उर्वरक संयंत्र, कृषि एवं उद्यानिकी की नवीनतम एवं उन्नत किस्में, पॉली/नेट हाउस, मल्चिंग, पौंड लाइनिंग आदि, जैविक व नैनो फर्टिलाइज़र, कस्टमाइज्ड माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, गौशाला उत्पाद, दुग्ध एवं हर्बल उत्पाद, पशु आहार, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, बायो-फ्लॉक्स, टैंक व केज कल्चर मॉडल, एक्वेरियम डिस्प्ले शामिल हैं। प्राकृतिक एवं जैविक खेती के मॉडल समागम में भाग लेने वाले किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों के लिये प्राकृतिक और जैविक खेती का लाइव प्रदर्शन किया जायेगा, जिसके माध्यम से किसान भाई जैविक खेती की आधुनिक और उन्नत तकनीक से अवगत हो सकेंगे। उद्योग व निर्यात पर संगोष्ठी समागम में कृषि, औषधीय फसलों पर आधारित उद्योगों, एफपीओ, निर्यातकों व क्रेता-विक्रेताओं के लिए संवाद व नेटवर्किंग सत्र का आयोजन भी किया गया है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा उत्पादन के साथ निर्यात, तकनीकों और प्रक्रियाओं के विषय में बताया जायेगा। एग्री-हॉर्टी एक्सपो-2025 में विभागीय सहभागिता कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, कृषि अभियांत्रिकी एमएसएमई, मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, एमपी एग्रो सहित राज्य सरकार के कई अन्य विभाग एवं संस्थान सम्मिलित होंगे। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन समागम में कृषकों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी व ऑन-द-स्पॉट पंजीयन की सुविधा मुहैया करायी जायेगी। स्थानीय नवाचारों की प्रस्तुति समागम के दौरान मंदसौर जिले में कृषकों द्वारा किए गए नवाचारों पर केंद्रित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन मुख्य आकर्षण होगा। कृषक हितलाभ वितरण व निवेश संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कृषि-उद्यानिकी विभाग से संबंधित योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरण और निवेशकों से सीधी चर्चा की जायेगी। मंदसौर उद्यानिकी उत्पादों में अग्रणी जिला 1.15 लाख हेक्टेयर में फल, सब्जी, मसालों, औषधीय फसलों का मुख्य केन्द्र है। इन फसलों से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जायेगा। साथ ही नये निवेशकों को इन फसलों से संबंधी व्यवसायों के लिये जागरूक कर प्रोत्साहित भी किया जायेगा। 33 करोड़ से निर्मित महर्षि सांदीपनि विद्यालय भवन चंदवासा का होगा लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीतामऊ में 33 करोड़ 14 लाख से निर्मित (सीएम राइज स्कूल) महर्षि सांदीपनी विद्यालय भवन चंदवासा का लोकार्पण करेंगे। साथ ही दुधाखेड़ी में 400 करोड़ के निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। 15 विषय-विशेषज्ञों के होंगे व्याख्यान एवं हितलाभ वितरण कृषि उद्योग समागम में 15 विषय-विशेषज्ञ व्याख्यान के रूप में अनुभव साझा करेंगे। किसानों को खेती किसानी से जुड़ी तकनीकी सलाह प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उद्योग समागम में विभिन्न योजनाओं में अलग-अलग हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान करेंगे। लगाये जायेंगे 80 राज्य स्तरीय स्टॉल मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीतामऊ कृषि उद्योग समागम में 8 विभागों द्वारा किसानों से जुड़े विविध तरह के लगाये गये 80 राज्य स्तरीय स्टॉलों का अवलोकन करेंगे। इन स्टॉल के माध्यम से कृषकों को उन्नत तकनीकी, खेती किसानी की जानकारी, नवाचार, उन्नत किसान के संबंध बारे में बताया जाएगा।   recent visitors 29

भोपाल में हुआ लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन

पीएफएमएस एक सुदृढ़ नेटवर्क प्रणाली, 3.48 लाख करोड़ की हुई बचत : सीजीए दुबे एसएनए-स्पर्श प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन में पीएफएमएस की भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्य सचिव जैन भोपाल में हुआ लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन भोपाल नियंत्रक महालेखा परीक्षक श्याम सुन्दर दुबे ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पीएफएमएस की पारदर्शिता और दक्षता के साथ निधियों के वितरण में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पीएफएमएस एक सुदृढ़ नेटवर्क प्रणाली है, जो विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं से जुड़ी हुई है। दुबे ने कहा कि पीएफएमएस जैसी सशक्त प्रणाली से लाभार्थियों के दोहराव की और फर्जी लाभार्थियों को समाप्त कर अब तक लगभग 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत की है। लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) पर पहला क्षेत्रीय सम्मेलन दिनांक 2 मई 2025 को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में आयोजित किया गया। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीजीए) दुबे ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव जैन आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन में मध्यप्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पीएफएमएस का स्वागत करते हुए केन्द्र सरकार में अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान हुए इससे संबंधित अनुभव साझा किए। उन्होंने SNA-SPARSH प्रणाली के माध्यम से पीएफएमएस की उस भूमिका की सराहना की, जिसके अंतर्गत सरकार को निधियों के निष्क्रिय रूप से रखे जाने के लिए ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि पीएफएमएस आधुनिक सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का आधार बन चुका है, जिससे राज्य सरकारें जन-कल्याणकारी योजनाओं को तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्षम हुई हैं। उन्होंने PFMS, RBI और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए इसे डिजिटल इंडिया के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सम्मेलन में पीएफएमएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके विभिन्न मॉड्यूल्स पर प्रस्तुतियाँ दीं। सम्मेलन में राज्य वित्त विभाग, कोषालय लेखा निदेशालय और विभिन्न राज्य सरकारों के विभागों एवं मंत्रालयों के अधिकारी सम्मिलित हुए। प्रतिभागियों को SNA-SPARSH, DBT और DBT-SPARSH जैसे मॉड्यूल्स की नवीनतम कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी गई। यह सम्मेलन कार्यान्वयन एजेंसियों, सरकारी विभागों तथा प्रत्यक्ष लाभार्थियों से सुझाव प्राप्त कर पीएफएमएस प्रणाली में सुधार की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने का एक मंच सिद्ध हुआ। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों को SNA-SPARSH से संबंधित तकनीकी प्रश्नों के समाधान भी प्रदान किए गए। निकट भविष्य में इस प्रकार की क्षेत्रीय सम्मेलन विभिन्न राज्यों में आयोजित किये जाएंगे।   recent visitors 35

2000 रुपये के नोट वापस लेने के 2 साल बाद भी 6,266 करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में: RBI डेटा

नई दिल्ली भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा दो साल पहले नोटबंदी के बाद, 6,266 करोड़ रुपये मूल्य के 2,000 रुपये के उच्च मूल्य के नोट अभी भी चलन में हैं, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार। 2,000 के नोट कानूनी रूप से मान्य हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 19 मई को घोषणा की थी कि वह 2,000 रुपये के नोट को वापस लेगा। RBI ने कहा कि कंपनी का कुल मूल्य 19 मई, 2023 को कारोबार की समाप्ति पर 3.56 लाख करोड़ रुपये से घटकर 30 अप्रैल, 2025 को कारोबार की समाप्ति पर 6,266 करोड़ रुपये रह गया। केंद्रीय बैंक ने कहा, "इस प्रकार, 19 मई, 2023 तक चलन में 2000 रुपये के बैंकनोटों का 98.24 प्रतिशत वापस आ गया है।" ऐसे नोट जमा करने और/या बदलने की सुविधा 7 अक्टूबर, 2023 तक बैंक की सभी शाखाओं में उपलब्ध है। हालाँकि, यह सुविधा अभी भी रिज़र्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों में उपलब्ध है। 9 अक्टूबर, 2023 से, RBI द्वारा जारी किए गए कार्यालय व्यक्तियों और संस्थानों से उनके बैंक खातों में जमा करने के लिए 2,000 रुपये के नोट भी स्वीकार कर रहे हैं। इसके अलावा, लोग देश के किसी भी डाकघर से भारतीय डाक के माध्यम से 2,000 रुपये के नोट RBI द्वारा जारी किसी भी कार्यालय को अपने बैंक खातों में जमा करने के लिए भेज सकते हैं। (PTI से इनपुट्स के साथ)   recent visitors 38

हजारों वर्ष पुराने मुड़िया बौद्ध मठ के रास्ते से अतिक्रमण हटाने के HC ने कलेक्टर को दिए निर्देश

जबलपुर जबलपुर के गोपालपुर के पास स्थित मौर्यकालीन प्राचीन बौद्ध मठ के पहुंच मार्ग से अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को अंतरिम आदेश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने यह आदेश उस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसमें मठ से जुड़े रास्ते पर अतिक्रमण कर आवाजाही बंद करने की शिकायत की गई थी। याचिका बौद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के रीजनल हेड सुखलाल वर्मा और अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दादा बैजनाथ कुशवाहा की ओर से दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लम्हेटा घाट स्थित मुड़िया बौद्ध मठ हजारों वर्ष पुराना मौर्यकालीन बौद्ध स्थल है। इसके पास की 32 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित रूप से भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है और मठ तक पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। याचिका में उल्लेख किया गया कि 27 जनवरी 2021 को तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मप्र टूरिज्म बोर्ड को पत्र भेजकर मठ के विकास के लिए बजट स्वीकृति का अनुरोध किया था। इससे पहले 15 जून 2012 को म.प्र. शासन के पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग ने इस स्थल को प्राचीन स्मारक घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। 1 अप्रैल 2015 को इस स्थल को अंतिम रूप से संरक्षित स्मारक घोषित करने का अनुरोध भी संस्कृति विभाग को भेजा गया, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अतिक्रमण के खिलाफ स्थानीय स्तर पर पत्राचार और धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई, तो यह याचिका दाखिल की गई। याचिका में मप्र शासन के प्रमुख सचिव (राजस्व), प्रमुख सचिव (पुरातत्व), प्रमुख सचिव (धार्मिक न्यास), सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग), कलेक्टर जबलपुर, एसडीओ (राजस्व), तहसीलदार, नगर निगम अधिकारी भेड़ाघाट और निजी पक्षों रीता सेंगर, गुंजन नंदा, सोनिया नारंग व आरडीएम केयर इंडिया प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर अंगददीप सिंह नारंग को अनावेदक बनाया गया है।   recent visitors 42

अचलपुरा में एक प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या, गाँव में मचा हड़कंप

राजगढ़ भोजपुर थाना के अंतर्गत अचलपुरा में एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव साड़ी के फंदे पर मोहवा पेड़ लटके मिले। जानकारी के मुताबिक अचलपुरा गांव के मोहन लाल जब सुबह शौच के लिए खेत पर गया तो देखा कि एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव मोहवा के पेड़ पर लटक देख वह गांव की ओर भागा और गांव वालो को सूचना दी। इसके बाद गांव के सैकड़ो लोग एकत्रित हो गए और पुलिस को सूचना दी। भोजपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनो के शव को पेड़ से उतार कर खिलचीपुर शासकीय अस्पताल लेकर आए। जहां पर डाॅक्टर द्वारा पीएम कर शव परिजनों को सौप दिया। दोपहर को परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार किया। लड़के की पहचान राधेश्याम पिता देवीलाल तंवर 21 व लड़की की पहचान मंजूबाई पिता भंवरलाल तंवर 19 के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार राधेश्याम तवर उम्र 21 वर्ष और लड़की 19 वर्ष दोनों ने सुबह के समय मोहवाँ के पेड़ पर लटककर आत्महत्या कर ली। लड़की तीन दिन पहले ससुराल से मायके आई थी। लड़के के पिताजी द्वारा बताया की लड़के की शादी डोडिया खेड़ी सीताराम की लड़की से को गई थी, लेकिन 2 साल से लड़की के पिताजी द्वारा कोर्ड केस कर रखा था और लड़की भेजने को मना किया गया था। लड़के को गांव की लड़की के साथ कोई प्रेम हुआ इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। लेकिन लड़का उसके ससुराल वालों से परेशान था, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया होगा। लड़की के पिताजी भंवरलाल तंवर ने बताया की लड़की की शादी दुर्जन पूरा के हरिओम से 3 साल पहले कर दी गई थी। वह ससुराल में ही 1 साल से रहती थी. हाल ही में 3 दिन पूर्व अपने मायके गांव आई थी. आज सुबह लड़की घर से पांच बजे निकली और 9 बजे हमे गांव से सूचना मिली की एक लड़का लड़की ने आत्महत्या कर ली. हम मौके पर पहुंचे तो मेरी लड़की गांव के लड़के के साथ आत्महत्या कर ली । कैलाश चंद्र दांगी, एसआई भोजपुर थाना ने बताया- गांव से सुबह के समय सूचना मिली थी की अचलपुरा गांव के एक प्रेमी जोड़े में आत्महत्या कर ली. हम मौके पर पहुंचकर कर दोनो के शव खिलचीपुर अस्पताल में आए जहा पर दोनो के शव का पीएम करवाकर परिजनों को सौप दिया और जांच की जा रही है।   recent visitors 130

बलूचिस्तान में न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय : हिमंत बिस्वा सरमा

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान में वर्षों से हो रही न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय बनी हुई हैं। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं, जिन्हें आमतौर पर 'मारो और फेंको नीति' के रूप में जाना जाता है, पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है। वर्षों से, बलूचों ने जबरन गायब किए जाने के क्रूर अभियान को झेला है, जहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियां अपहरण कर लेती हैं, उन्हें यातना दी जाती है और बाद में वे दूरदराज के खड्डों में मृत पाए जाते हैं या उन्हें सुनसान सड़कों पर फेंक दिया जाता है।" मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन करते हैं और उन्होंने याद दिलाया कि भारत उनके लिए खड़ा रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की आवाज ने दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान के संकट की ओर खींचा, जिसे पाकिस्तान ने लंबे समय तक दबाए रखा था। सीएम सरमा ने पोस्ट में उल्लेख किया, "यह अमानवीय प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है, जहां परिवारों को उम्मीद की जगह अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं। इसी गंभीर पृष्ठभूमि में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, वैश्विक समुदाय के लंबे समय से धारण मौन को तोड़ा। बलूचिस्तान से बहने वाली 'लाल नदियों' का जिक्र करते हुए, उन्होंने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज़ दी, यह इस बात की पुष्टि थी कि भारत उत्पीड़ित और चुप कराए गए लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वजन भी था, जिससे एक ऐसे संकट की तरफ ध्यान गया जिससे पाकिस्तान ने लंबे समय तक छुपाने की कोशिश की।" सीएम सरमा ने आगे कहा, "वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि 20,000 से अधिक बलूच व्यक्ति गायब हो गए हैं, सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं। यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है – यह एक मानवीय आपातकाल है।" recent visitors 66

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- कांग्रेस, सपा और राजद मचा रहे जाति जनगणना का श्रेय लेने का झूठमूठ का हल्ला

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य ने जाति जनगणना का झूठा श्रेय लेने के लिए कांग्रेस, सपा और राजद की आलोचना की। केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए लिखा, "परिवादी तिकड़ी में जकड़ी कांग्रेस, सपा और राजद तीनों जाति जनगणना का श्रेय लेने का झूठमूठ का हल्ला मचा रहे हैं। दस साल पहले यूपीए शासनकाल में राजद नेता लालू प्रसाद यादव और सपा नेता मुलायम सिंह यादव यानी दो यादव परिवार कांग्रेस के शाही परिवार की मजबूत बैसाखी बनकर केंद्र की सत्ता में अपना हिसाब-किताब साफ कर रहे थे। कांग्रेस दोनों को जांच एजेंसियों का ख़ौफ़ दिखा रही थी। आय से अधिक संपत्ति के संगीन मामले थे। अमेरिका से परमाणु समझौता कराने में भी सपा की कथित भूमिका थी। जाति जनगणना की पैरोकारी तब केवल छलावा भर थी। अब जाति जनगणना का झूठा श्रेय लेकर ख़ुशी में पटाखा फोड़कर अपनी जग हंसाई करा रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा कि इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की कमान संभालने के बाद दबी-कुचली जातियों को एक नई चेतना मिली है। जाति जनगणना से उनको सबको हर स्तर पर अपना हक मिलेगा और देश भी मजबूत बनेगा। पिछले कुछ सालों से जाति जनगणना भारतीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में एक रही है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लोकसभा के चुनाव में भी प्रमुख मुद्दे की तरह पेश किया था। अब केंद्र सरकार ने भी जातिगत जनगणना कराने की घोषणा कर दी है। बुधवार को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने इस बारे में घोषणा दी है। इसके साथ ही यह पहली बार होगा जब आजाद भारत में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इससे पहले जाति सर्वेक्षण कराए गए हैं। बिहार समेत कुछ राज्यों ने भी जाति सर्वेक्षण कराए हैं। केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना कराने के फैसले के लिए भारतीय राजनीति में यह मामला एक बार फिर सतह पर आ गया है और कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों इसका श्रेय लेने में जुट गए हैं। recent visitors 66