जामा मस्जिद की सीढ़ियों से पाकिस्तान को तगड़ा जवाब दिया गया, पहलगाम पर जुटे मुसलमान, पूरे देश में उबाल

नई दिल्ली पहलगाम में आतंकवादी हमले के विरोध में पूरे देश में उबाल है। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की सीढ़ियों से शुक्रवार को पाकिस्तान को तगड़ा जवाब दिया गया। जुमे की नमाज के बाद सैकड़ों मुसलमानों ने दहशतगर्दी के खिलाफ लड़ने की आवाज बुलंद की और कहा कि पाकिस्तान भारतीय मुसलमानों का भी दुश्मन है। कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछकर मारे गए 26 पर्यटकों के लिए देशभर में गम और गुस्से की लहर है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और सरकार से सख्त ऐक्शन की मांग की जा रही है। शुक्रवार को दिल्ली की जामा मस्जिद पर भी जबरदस्त आक्रोश जाहिर किया गया। सैकड़ों मुसलमानों ने हाथों में तिरंगे और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के पोस्टर लेकर अपनी भावनाओं का इजहार किया। जामा मस्जिद से कहा गया, 'जो हमारी मुल्क के ऊपर बुरी नजर रखेगा, सबसे पहले हिन्दुस्तान के एक-एक मुसलमान का खून बहेगा। अपने मुल्क में दहशतगर्दी पनपने नहीं देंगे। सरकार जल्द से जल्द सख्त फैसले ले, कड़े फैसले ले। उसके बाद देश को सुकून मिलेगा। कश्मीर के उन भाइयों को भी सलाम जिन्होंने दहशतगर्दों का मुकाबला किया और जानें बचाईं। हम उन 26 परिवारों के साथ हैं जिनके बच्चों की जान गई।' उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का एक एक नागरिक, 140 करोड़ देशवासी, हिंदू हो मुस्लिम हो या सिख, ईसाई, गरीब हो या अमीर, आतंकवाद को हिन्दुस्तान के अंदर पनपने नहीं देगा। इस जामा मस्जिद से कहना चाहते हैं कि जो कह रहे हैं कि लड़ाई लड़ रहे हैं, वो हिन्दुस्तान के मुसलमानों के साथ भी अत्याचार और अन्याय कर रहे हैं। ये आपस में नफरत पैदा करना चाहते हैं। भाई को भाई से लड़वाना चाहते हैं। इस मुल्क में 75 साल पहले हिंदुओं और मुसलमानों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी और अब आतंकवाद के खिलाफ एकसाथ लड़ेगा। recent visitors 39

पुरुष हॉकी एशिया कप में पाकिस्तान के ख‍िलाड़‍ियों को वीजा नहीं देगा भारत

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले 26 लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए, भारत सरकार ने गुरुवार को पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया और उनके वीजा रद्द कर दिए. इस कदम से एशिया कप में पाकिस्तान की मौजूदगी पर सवालिया निशान लग गया है, जो 29 अगस्त से 7 सितंबर तक बिहार के राजगीर में आयोजित होने वाला है. ऐसे में माना जा रहा है कि अब पाकिस्तान के ख‍िलाड़‍ियों को वीजा पुरुष हॉकी एशिया कप जो 2026 एफआईएच (International Hockey Federation) वर्ल्ड कप क्वाल‍िफायर है, इस पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि पहलगाम आतंकी हमलों के बाद बिहार में होने वाले इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान की भागीदारी अनिश्चित है. इस महीने की शुरुआत में हॉकी इंडिया ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान, साउथ कोरिया, मलेशिया, चीन और जापान के साथ कॉन्ट‍िनेंटल चैम्प‍ियनश‍िप के लिए भारत आएगा. इंड‍ियन एक्सप्रेस को सूत्र ने बताया कि यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान से जुड़े मैच किसी न्यूट्रल वेन्यू पर होंगे या उन्हें प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जाएगी? इस पर हॉकी इंडिया के एक सूत्र ने कहा कि वे ‘इंतजार करेंगे और देखेंगे कि अगले कुछ महीनों में स्थिति कैसी होती है. अभी कोई भी फैसला लेना जल्दबाजी होगी. लेकिन एक बात स्पष्ट है, हम सरकार की नीति का पालन करेंगे, चाहे वह कुछ भी हो. क्यों हैं एश‍िया कप का महत्व? एशिया कप का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह वर्ल्ड कप क्वाल‍िफायर है, जिसके विजेता को अगले साल के मेगा-इवेंट के लिए सीधा स्थान मिलता है, जिसकी सह-मेजबानी नीदरलैंड और बेल्जियम द्वारा होनी है.  भारत और पाकिस्तान अपने चौथे कॉन्ट‍िनेंटल टाइटल की तलाश में हैं. यहां भारत की टक्कर साउथ कोरिया से भी होनी है. जो गत चैम्प‍ियन भी है. उसने इस प्रतियोगिता को किसी भी अन्य देश की तुलना में पांच बार जीता है. वैसे एशिया कप ही नहीं, पाकिस्तान की अंडर-23 टीम को FIH जूनियर वर्ल्ड कप में भी भाग लेना है, जो कि साल के अंत में चेन्नई और मदुरै में होना है.  पाकिस्तान की हॉकी टीम का टूर्नामेंट के लिए भारत आना असामान्य नहीं है, क्योंकि पिछले एक दशक में ही पाकिस्तानी की टीम ने ने तीन बार सीमा पार की है. ऐसा 2014 चैम्प‍ियंस ट्रॉफी, 2018 वर्ल्ड कप और 2021 जूनियर वर्ल्ड कप के दौरान हुआ. 2023 में PAK फुटबॉल टीम आई थी भारत 2023 में पाकिस्तान की फुटबॉल टीम ने भारत में साउथ एश‍ियन चैम्पियनशिप खेली, जबकि भारत के टेनिस खिलाड़ियों ने पिछले साल डेविस कप के लिए इस्लामाबाद की यात्रा की थी. दोनों देशों की टीमों द्वारा लगातार किए जा रहे दौरे क्रिकेट की स‍िचुएशन से से अलग हैं, जहां भारत और पाकिस्तान ने दोनों देशों में आयोजित आईसीसी इवेंट्स में तटस्थ स्थानों पर मैच खेलने पर सहमति जताई है.   recent visitors 41

हम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सवाल है कि पानी को कहां संग्रहित करेंगे?”: असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पहलगाम आतंकी हमले पर केंद्र सरकार की सख्त प्रतिक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि अब वक्त है कि पाकिस्तान को ठोस और निर्णायक जवाब दिया जाए। उन्होंने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे साहसिक कदम बताया। साथ ही उन्होंने सरकार से यह सवाल भी पूछा कि अगर हम पाकिस्तान को पानी नहीं देंगे तो उसे कहां स्टोर करेंगे। ओवैसी ने कहा, “पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों को शरण दी जाती है, सरकार को अब किसी संकोच के बिना कार्रवाई करनी चाहिए। हम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सवाल है कि पानी को कहां संग्रहित करेंगे?” ओवैसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून भारत को आत्मरक्षा में वायु और समुद्री नाकेबंदी करने का अधिकार देता है और भारत को हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध जैसे कठोर कदम भी उठाने चाहिए। हालांकि, इस दौरान ओवैसी ने बेसरान घास के मैदान में CRPF की अनुपस्थिति और QRT (त्वरित प्रतिक्रिया दल) के एक घंटे की देरी से पहुंचने पर सवाल उठाए। उन्होंने इस हमले को टारगेटेड और सांप्रदायिक करार दिया। ओवैसी ने कहा, "हमलों के दौरान लोगों से उनका धर्म पूछकर गोली मारी गई। ये सामान्य आतंकवाद नहीं, सांप्रदायिक हिंसा है।" उन्होंने कश्मीरियों और घाटी के छात्रों के खिलाफ झूठा प्रचार बंद करने की अपील की। साथ ही जोर देकर कहा कि आतंकवादियों की कड़ी निंदा जरूरी है, लेकिन निर्दोष लोगों को निशाना बनाना नहीं। बैठक में शामिल रहे नेता जेपी नड्डा, एस जयशंकर, किरण रिजिजू, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने का संकल्प लिया। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम के लोकप्रिय पर्यटन स्थल में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। हमले की जिम्मेदारी TRF (The Resistance Front) ने ली है, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है। recent visitors 65

शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने राज्यों में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों की सूची तैयार करें और इसे केंद्र को सौंपें

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश भर के सभी मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और अपने-अपने राज्यों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की तत्काल पहचान करने का निर्देश दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर उठाया गया है। शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे पाकिस्तानी नागरिकों की सूची केंद्र सरकार को भेजें ताकि उनके वीजा तुरंत रद्द किए जा सकें और उन्हें देश से बाहर निकाला जाए। पहलगाम हमले के बाद सख्त कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन में हुए आतंकी हमले में 25 भारतीय पर्यटकों और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी। यह हमला 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर घाटी में सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया है और इसके जवाब में कई कठोर कदम उठाए हैं। इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित करना, अटारी-वाघा सीमा चौकी को बंद करना, पाकिस्तानी सैन्य सहायकों को नई दिल्ली से निष्कासित करना और सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना शामिल है। वीजा रद्द करने की प्रक्रिया गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने राज्यों में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों की सूची तैयार करें और इसे केंद्र को सौंपें। सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि 27 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के सभी मौजूदा वीजा रद्द कर दिए जाएंगे, जबकि मेडिकल वीजा 29 अप्रैल 2025 तक वैध रहेंगे। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान से जल्द से जल्द वापस लौटने की सलाह दी गई है। राज्यों से त्वरित कार्रवाई की मांग शाह ने मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और अपने-अपने राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखें। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान और उनके वीजा रद्द करने की प्रक्रिया में कोई देरी न हो। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस मामले में राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। पाकिस्तान के साथ राजनयिक तनाव पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को और कम कर दिया है। भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के सैन्य सलाहकारों को निष्कासित कर दिया और इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या को 55 से घटाकर 30 करने का फैसला किया है। जवाब में, पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और भारत के साथ सभी व्यापारिक गतिविधियों को निलंबित कर दिया। पाकिस्तान ने भारत के सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के फैसले को "युद्ध की कार्रवाई" करार दिया है। प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले के बाद कहा कि इस हमले के दोषियों और उनके समर्थकों को "कल्पना से परे सजा" दी जाएगी। उन्होंने बिहार के मधुबनी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों को बख्शा नहीं जाएगा।" मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। विपक्ष का समर्थन कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और केंद्र सरकार के कदमों का समर्थन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश को एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ना होगा। पार्टी ने 25 अप्रैल 2025 को देश भर में कैंडललाइट मार्च का आयोजन किया ताकि हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जा सके और आतंकवाद के खिलाफ एकता का संदेश दिया जा सके। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पहलगाम हमले की कई देशों ने निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस इस दुख की घड़ी में भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर के लिए "यात्रा न करें" की सलाह जारी की है और भारत के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कोई ढील नहीं बरतेगी। गृह मंत्री शाह की मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने का फैसला इस दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ जवाबी कार्रवाइयों में जुटे हैं। recent visitors 57

आरएसएस चीफ ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात पर बल देते हुए कहा- हमारे पास शक्ति है तो यह दिखानी होगी

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा संघर्ष धर्म और अधर्म के बीच है, न कि केवल किसी संप्रदाय या धर्म के नाम पर। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धर्म पूछकर लोगों की हत्या करते हैं, वे कट्टरपंथी हैं, और ऐसा आचरण राक्षसी प्रवृत्ति का परिचायक है। आरएसएस चीफ ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात पर बल देते हुए कहा कि अगर हमारे पास शक्ति है तो यह दिखानी होगी। आरएसएस चीफ ने कहा, "यह लड़ाई संप्रदायों या धर्मों के बीच नहीं है। इसका आधार जरूर धर्म और संप्रदाय है, लेकिन यह वास्तव में धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई है।" उन्होंने आगे कहा, ''भारतीय सैनिकों या नागरिकों ने कभी किसी की धर्म पूछकर हत्या नहीं की। हिंदू कभी भी धर्म पूछकर हत्या नहीं करते। जो लोग धर्म पूछकर लोगों की हत्या करते हैं, वे कट्टरपंथी हैं, और ऐसा आचरण राक्षसी प्रवृत्ति का परिचायक है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे दिल में दर्द है। हम गुस्से में हैं लेकिन बुराई को नष्ट करने के लिए ताकत दिखानी होगी। रावण ने अपना इरादा नहीं बदला तो और कोई विकल्प नहीं था। राम ने उसे सुधारने का मौका दिया था और उसके बाद मारा था।’’ राम-रावण प्रसंग से दी मिसाल मोहन भागवत ने रावण के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा, "रावण भगवान शिव का भक्त था, वेद जानता था, लेकिन उसका मन और बुद्धि परिवर्तन को तैयार नहीं थे। ऐसे राक्षस का अंत राम ने किया, क्योंकि परिवर्तन के लिए कभी-कभी विनाश आवश्यक होता है।" उन्होंने कहा कि राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों का अंत ही देश और धर्म की रक्षा के लिए जरूरी है। मोहन भागवत ने कहा, "देश के हर नागरिक के मन में दुख और क्रोध होना स्वाभाविक है, क्योंकि राक्षसों के विनाश के लिए अपरिमित शक्ति की आवश्यकता होती है।" उन्होंने ने इस बात पर भी जोर दिया कि कुछ लोग चेतना और तर्क से परे होते हैं और ऐसे लोगों में कोई सुधार संभव नहीं होता, सिर्फ कठोर कार्रवाई ही उनका समाधान है। recent visitors 38

वीर सावरकर पर SC की राहुल गांधी को नसीहत, हमें आजादी दिलाई थी और आप ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, दोबारा ऐसा ना हो

नई दिल्ली स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है। शुक्रवार को अदालत ने कांग्रेस नेता से कहा कि वीर सावरकर जैसे लोगों ने हमें आजादी दिलाई थी और आप उनके साथ इस तरह का बर्ताव कर रहे हैं। यही नहीं राहुल गांधी को नसीहत देते हुए अदालत ने कहा कि भविष्य में कभी ऐसी टिप्पणी मत करना, अन्यथा अदालत उसका स्वत: संज्ञान ले सकती है। वीर सावरकर पर राहुल गांधी की माफीवीर वाली टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का मजाक न उड़ाएं। बेंच ने राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि क्या राहुल गांधी को पता है कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों से संवाद में खुद के लिए 'आपका वफादार सेवक' शब्द का इस्तेमाल किया था। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि वीर सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी गैरजिम्मेदाराना थी। उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। हालांकि अदालत ने इस मामले में उन्हें राहत भी दी है। बेंच ने सावरकर के खिलाफ टिप्पणी को लेकर मानहानि के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन रद्द करने से इनकार करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है। इसके साथ ही इस मामले में यूपी सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी ने एक रैली के दौरान वीर सावरकर पर विवादित बयान दिया था। अदालत बोली- महात्मा गांधी ने भी खुद को बताया था ‘अंग्रेजों का वफादार नौकर’ दरअसल यह पूरा मामला 2022 में शुरू हुआ था। तब राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में एक रैली की थी। इसमें उन्होंने वीर सावरकर पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने एक चिट्ठी दिखाते हुए कहा था कि सावरकर ने अंग्रेजों का नौकर बने रहने की बात कही थी। इसके साथ ही डरकर माफी भी मांगी थी। गांधी-नेहरू ने ऐसा नहीं किया, इसलिए वे सालों तक जेल में रहे। इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ एक अधिवक्ता ने केस कर दिया था। हालांकि अदालत ने केस की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को नसीहत दी और ऐतिहासिक तथ्य भी गिनाए। बेंच ने कहा कि क्या आपको पता है कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों के साथ संवाद में खुद को 'वफादार नौकर' बताया था। recent visitors 39

भोपाल में जुमे की नमाज में पहलगाम हमले में मारे गए लोंगो को श्रद्धांजलि, मुस्लिमों में काली पट्टी बांध पढ़ी नमाज

भोपाल जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश और शोक की लहर फैल गई है। इस हमले में कई निर्दोष पर्यटक मारे गए, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरे देश ने इस हमले को इंसानियत पर हमला बताया है। इसको लेकर 25 अप्रैल 2025 को राजधानी भोपाल के इमामी गेट चौराहे पर दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच पहलगाम में हाल ही में हुई आतंकवादी घटना के विरोध में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया । इस दौरान प्रदर्शनकारी काली पट्टी बांधकर आतंकवाद का पुतला दहन हुआ । सोशल एक्टिविस्ट अनवर पठान एवं उनके साथियों ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में उपस्थित होकर देशभक्ति का परिचय दें और आतंक के विरुद्ध एकजुटता दिखाएं। इसके अलावा, शहर के कई मुस्लिम युवक जुमे की नमाज़ के दौरान हाथों पर काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। पहलगाम अटैक, उलेमा बोर्ड बोला-पाकिस्तान का बहिष्कार हो भोपाल स्थित मसाजिद कमेटी के अंतर्गत आने वाले दारुल क़ज़ा और दारुल इफ्ता ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह घटना पूरी मानवता को शर्मसार करने वाली है। उन्होंने मुस्लिम समाज की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं और प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री से मांग की कि हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थानीय नागरिकों से सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील भी की। पहलगाम आतंकवादी हमले के खिलाफ देश भर में भारी गुस्सा और आक्रोश है। लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शहरों में बाजार बंद कर विरोध जताया जा रहा है। इस बीच, ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन (AIIO) के प्रमुख डॉ इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज में आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों से काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज पढ़ने की अपील की है। आतंकवादी शैतान होता है-इलियासी इलियासी ने कहा, 'यह बहुत ही दुखद हमला है। इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है। हम सबको एक होकर इसका मुकाबला करना होगा। हमने तमाम मस्जिदों से खास तौर पर जामा मस्जिदों से, मदरसों से गुजारिश कर दी है कि जुमे की नमाज में उन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी जो लोग इस हमले में शहीद हो गए। उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ की जाएगी। तमाम इमाम आतंकवाद के खिलाफ खड़े होकर ऐलान करेंगे। आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता है। आतंकवादी शैतान होता है। पाकिस्तान भारत में जिस तरह आतंकवाद फैलाता है, उसे जवाब देने के लिए भारत तैयार है। जवाब जरूर दिया जाएगा। देश को एक होकर आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा।' recent visitors 39