पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी चेन्‍नई 154 रन पर सिमटी, हैदराबाद को मिला 155 रन का टारगेट

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के 43वें मुकाबले में आज दो वर्ल्‍ड कप विनर कप्‍तान आमने-सामने हैं। चेन्‍नई के एमए चिदम्बरम स्टेडियम में चेन्‍नई सुपर किंग्‍स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच टक्‍कर हों रही है। सनराइजर्स हैदराबाद के कप्‍तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया है। पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी चेन्‍नई 154 रन पर सिमट गई। दोनों ही टीमों ने मौजूदा सीजन में 8-8 मैच खेले हैं और 2-2 में जीत दर्ज की है। प्‍वाइंट्स टेबल में चेन्‍नई 10वें और हैदराबाद 9वें पायदान पर है। एक और हार चेन्‍नई और हैदराबाद की प्‍लेऑफ की उम्‍मीदों को धराशाई कर सकती है। चेन्‍नई अपने घर पर कोलकाता, दिल्‍ली और आरसीबी से हार चुकी है। ऐसे में पैट कमिंस भी चेन्‍नई को चेपॉक में धूल चटाना चाहेंगे। 54 रन पर सिमटी चेन्‍नई आखिरी ओवर में दीपक हुड्ड कैच आउट हुए। उन्‍होंने 22 रन बनाए। 6 साल बाद चेपॉक में चेन्‍नई ऑल आउट हुए। टीम ने 20 ओवर में 154 रन बनाए। ऐसे में हैदराबाद को जीत के लए 155 रन चाहिए हैं। recent visitors 43

वक्फ कानून पर नहीं लगा सकते पूरी तरह रोक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि इस कानून पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है। 1,332 पन्नों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में सरकार ने विवादास्पद कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536) से अधिक की वृद्धि हुई है। हलफनामे में कहा गया है, "मुगल काल से ठीक पहले, आजादी से पहले और आजादी के बाद के दौर में भारत में कुल 18,29,163.896 एकड़ जमीन वक्फ की थी।" इसमें निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण करने के लिए पहले के प्रावधानों के "दुरुपयोग" का दावा किया गया है। हलफनामा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव शेरशा सी शेख मोहिद्दीन द्वारा दायर किया गया था। इसमें आगे कहा गया, "कानून में यह तय स्थिति है कि संवैधानिक अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगाएंगी और मामले पर अंतिम रूप से निर्णय लेंगी। संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।'' केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि वक्फ जैसी धार्मिक व्यवस्था का प्रबंधन किया जाए और उसमें जताया गया भरोसा कायम रहे। वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा, ''जब वैधता की परिकल्पना की जाती है तो प्रतिकूल परिणामों के बारे में जाने बिना ही पूरी तरह रोक लगाना अनुचित है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वैध, विधायी शक्ति का उचित प्रयोग है। केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विधायी क्षमता और अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकता है। recent visitors 52

पहलगाम आतंकी हमला: ताशकंद समझौता रद्द कर अपनी ही कब्र खोदेगा पाक, क्या है हाजी पीर दर्रा

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से रिश्ते तल्ख हो गए हैं। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त ऐक्शन लेते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है और बॉर्डर सील करने समेत कई अन्य कदम उठाए हैं। इससे पड़ोसी देश बौखला उठा है। पाकिस्तान ने शिमला समझौता निलंबित करने का फैसला किया है और ताशकंद समझौते को भी रद्द करने की सोच रहा है। ताशकंद समझौता 10 जनवरी, 1966 को उज्बेकिस्तान में हुआ था। 1965 की जंग के बाद सोवियत संघ की मौजूदगी में यह समझौता हुआ था, जिसमें भारत की तरफ से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान की तरफ से तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। इसी समझौते के तहत भारत ने हाजी पीर दर्रा पर से अपना कब्जा हटा लिया था और 5 अगस्त 1965 से पहले की यथास्थिति बहाल करने पर तैयार हो गया था। इसे 60 साल पहले भारत की एक बड़ी चूक कहा जाता है। अब जब फिर से पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान की नकेल कसना चाह रहा है तो हाजी पीर दर्रा की बात अनायास सामने आ जा रही है क्योंकि यह वही दर्रा है, जहां से पाकिस्तान भारत में अपनी आतंकियों की सप्लाई करता है। अगर 60 साल पहले भारत ने वह चूक नहीं की होती, तो आज कश्मीर में पाकिस्तान आतंक न फैला रहा होता। क्या है हाजी पीर दर्रा? हाजी पीर दर्रा हिमालय पर्वतमाला की पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है। यह जम्मू-कश्मीर स्थित पूंछ को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट से जोड़ता है। 2,637 मीटर यानी 8,652 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित यह रणनीतिक दर्रा न केवल पूरे पाक अधिकृत कश्मीर घाटी पर नजर रखता है बल्कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ का मुख्य मार्ग भी यही है। अगर भारत ने 60 साल पहले इस दर्रे को पाकिस्तान को नहीं सौंपा होता तो पाक आतंकियों की कश्मीर में सप्लाई रोक सकता था और इस्लामाबाद की नकेल भी कस सकता था। इसके अलावा इस दर्रे पर भारत का कब्जा होने से पूंछ और उरी के बीच की दूरी भी 282 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 56 किलोमीटर रह जाती। देश का बंटवारा होने से पहले जम्मू घाटी और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इसी दर्रे से होकर गुजरती थी लेकिन 1948 में पाकिस्तान द्वारा PoK और हाजी पीर दर्रे पर कब्जा कर लेने के बाद से यह रास्ता अनुपयोगी हो गया है। पूरी रात बारिश के बीच की थी चढ़ाई 1965 के भारत-पाक जंग में भारतीय सेना ने हाजी पीर दर्रे के पास स्थित तीन ऊंची पहाड़ियों पूर्व में बेदोरी (3760 मीटर), पश्चिम में सांक (2895 मीटर) और दक्षिण-पश्चिम में लेडवाली गली (3140 मीटर) पर कब्जा कर लिया था, जो इस दर्रे से मात्र 10 से 14 किसोमीटर की दूरी पर था। 27 अगस्त 1965 को मेजर रणजीत सिंह दयाल ने पूरी रात बारिश होने के बावजूद भारी बाधाओं को पार करते हुए तीव्र पहाड़ी पर चढ़ाई की थी और 28 अगस्त, 1965 को इस रणनीतिक दर्रे पर कब्जा कर लिया था। 29 अगस्त को पाकिस्तानी सेना ने फिर से इसे अपने कब्जे में करने की कोशिश की लेकिन भारतीय जवानों ने पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया था। 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग लौटाना पड़ेगा हालांकि, जब 10 जनवरी 1966 को ताशकंद में भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ तो भारत ने हाजी पीर दर्के पर से अपना कब्जा छोड़ दिया और समझौते के मुताबिक 5 अगस्त, 1965 की यथास्थिति पर लौट गया। इस तरह एक बार फिर इस रणनीतिक दर्रे पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया। भारत ने उस जंग में पाकिस्तान के 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग पर भी कब्जा कर लिया था। इसके तहत सियालकोट, लाहौर और कश्मीर घाटी के उपजाऊ क्षेत्र और हाजी पीर दर्रा शामिल था लेकिन सब कुछ लौटाना पड़ गया। अगर पाकिस्तान ने ताशकंद समझौता तोड़ा तो एक बार फिर इस पर भारत का कब्जा हो जाएगा। recent visitors 51

पाकिस्तानी संसद ने भारत के खिलाफ सर्वसम्मति से घातक हमले को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया

इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आने से पड़ोसी देश तिलमिला गया है। संसद में पाकिस्तान भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहा है। शुक्रवार को पाकिस्तानी संसद ने भारत के खिलाफ सर्वसम्मति से घातक हमले को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। उसने कहा कि पाकिस्तान अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पहलगाम हमले में आतंकियों ने 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा है। पाकिस्तानी डिप्टी पीएम इशाक डार ने संसद में प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान जल आतंकवाद या सैन्य उकसावे सहित किसी भी आक्रमण के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। प्रस्ताव के अनुसार, संसद ने इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों की हत्या पाकिस्तान के अपनाए गए मूल्यों के विपरीत है। कहा गया, ''यह प्रस्ताव जम्मू और कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले से पाकिस्तान को जोड़ने के सभी तुच्छ और निराधार प्रयासों को भी खारिज करता है।'' प्रस्ताव में पाकिस्तान ने भारत पर उसे बदनाम करने का आरोप लगाया। संसद ने कहा, ''पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए भारत सरकार द्वारा सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण अभियान की निंदा की जाती है, जो संकीर्ण राजनीतिक लक्ष्य के लिए आतंकवाद के मुद्दे का शोषण करने के परिचित पैटर्न पर चल रहा है।'' साथ ही, पाकिस्तान ने भारत की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के फैसले की भी निंदा की और फिर से दोहराया कि यह साफ तरीके से युद्ध की कार्रवाई के बराबर है। नई दिल्ली ने हमले के बाद बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। भारत ने कार्रवाई करते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, पाक से लगने वाली अटारी बॉर्डर को भी बंद कर दिया और राजनयिक संबंधों को भी कम कर दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी अहम बैठक की और भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस को बंद करने समेत कई फैसले लिए। recent visitors 39

सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का लिया फैसला

नई दिल्ली चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच आईपीएल 2025 का 43वां मुकाबला शुक्रवार को एम चिदंबरम स्टेडियम में खेला जा रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है।चेन्नई ने दो बदलाव किए हैं। रचिन और शंकर को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जबकि ब्रेविस और हुड्डा को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली है। चेन्नई ने किए दो बदलाव सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने इंडियन प्रीमियर लीग में शुक्रवार को चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। सुपरकिंग्स ने दो बदलाव करते हुए रचिन रविंद्र और विजय शंकर की जगह डेवाल्ड ब्रेविस और दीपक हुड्डा को एकादश में शामिल किया है। सनराइजर्स हैदराबाद प्लेइंग इलेवन सनराइजर्स हैदराबाद (प्लेइंग इलेवन): अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, नितीश कुमार रेड्डी, हेनरिक क्लासेन (विकेटकीपर), अनिकेत वर्मा, कामिंडु मेंडिस, पैट कमिंस (कप्तान), हर्षल पटेल, जयदेव उनादकट, जीशान अंसारी, मोहम्मद शमी चेन्नई सुपर किंग्स प्लेइंग इलेवन चेन्नई सुपर किंग्स (प्लेइंग इलेवन): शेख रशीद, आयुष म्हात्रे, सैम करन, रवींद्र जड़ेजा, देवाल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे, एमएस धोनी (विकेटकीपर/कप्तान), दीपक हुडा, नूर अहमद, खलील अहमद, मथीशा पथिराना सनराइजर्स हैदराबाद ने जीता टॉस सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। recent visitors 53

सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन की शुरुआत कर दी, पहलगाम में हमला करने वाले 4 आतंकियों को देखा है, महिला के दावे से हड़कंप

जम्मू जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में शामिल आतंकियों के लिए तेजी से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच, कठुआ जिले में एक महिला ने दावा किया कि उन्होंने हमले में शामिल आतंकियों को देखा है, जिससे हड़कंप मच गया। इसके बाद कठुआ में बड़े स्तर पर सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन की शुरुआत कर दी है। 'इंडिया टुडे' के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस का विशेष अभियान समूह मौके पर पहुंच गया है और तलाशी अभियान चला रहा है। कठुआ के अलावा, पुलवामा और बारामूला में भी आतंकियों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने गोलीबारी करते हुए 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इसमें कई लोग घायल भी हुए थे। इसके बाद आतंकी घटनास्थल से भागने में कामयाब रहे थे। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सेना आतंकियों को ढूंढने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले में शामिल प्रत्येक अपराधी की तलाश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमलावरों को इस कायरतापूर्ण कृत्य की भारी कीमत चुकानी होगी। उपराज्यपाल ने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी समेत शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक की। लगभग एक घंटे तक चली बैठक में उपराज्यपाल ने सेना प्रमुख से न केवल पहलगाम आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा, बल्कि आतंकवाद के बुनियादी ढांचे और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को कुचलने के प्रयासों को भी तेज करने को कहा। बैठक के दौरान सिन्हा ने कहा कि देश को सेना, पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शौर्य और वीरता पर पूरा भरोसा है और इन सभी एजेंसियों को मिलकर पहलगाम आतंकवादी हमले के गुनहगारों और मददगारों की पहचान कर, उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में सतत कार्रवाई करनी चाहिए। सेना प्रमुख शुक्रवार को घाटी पहुंचे थे, जहां उन्होंने पहलगाम हमले के बाद की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि सेना प्रमुख जम्मू-कश्मीर की समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे और शीर्ष सैन्य अधिकारी उन्हें हमले के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। recent visitors 32

भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी, 25 से 30 अप्रैल के बीच राज्य के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है

देहरादून गर्मी से झुलसते उत्तराखंडवासियों को जल्द ही राहत मिल सकती है, क्योंकि एक बार फिर पहाड़ों में मौसम करवट लेने को तैयार है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि 25 से 30 अप्रैल के बीच राज्य के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। जहां एक ओर मैदानों में तेज गर्मी और लू लोगों को बेहाल कर रही है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भी तपिश बढ़ने लगी है। इसका असर अब प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी दिखने लगा है, जिससे कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बन गई है।  कहां-कहां और कब होगी बारिश? जानिए जिलेवार अलर्ट  25 अप्रैल – उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में बारिश के आसार।  26 व 27 अप्रैल – इन तीन जिलों के साथ रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भी बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना।  28 अप्रैल – पूरे प्रदेश में मौसम के साफ रहने की उम्मीद। 29 अप्रैल – पिथौरागढ़, चम्पावत और नैनीताल में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 30 अप्रैल – मौसम विभाग ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक बारिश की संभावना जताई है, खासकर चम्पावत और नैनीताल में तेज़ बौछारें पड़ सकती हैं।  गर्जना और बिजली गिरने की चेतावनी IMD ने 26 और 27 अप्रैल को गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है। लोगों से आग्रह किया गया है कि इस दौरान खुले स्थानों से बचें और सुरक्षित स्थानों में रहें।  गर्मी से बेहाल लोग और जल संकट की दस्तक राज्य के मैदानी जिलों में पारा लगातार चढ़ रहा है। एसी-कूलर ही अब राहत का सहारा बने हैं। उधर, पहाड़ों में तेज धूप के कारण झरने और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है।   recent visitors 40