बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट संयंत्र को मंजूरी, स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को औद्योगिक और आर्थिक विकास के नए शिखर पर ले जाने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) को राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र के स्थापना की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इस संयंत्र के लिए बिलासपुर, चांपा के समीप नेशनल हाईवे से लगी 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार सृजन और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30, जो एक नवंबर 2024 से लागू हुई, ने राज्य को निवेशकों के लिए अनुकुल बना दिया है। इस नीति का मूल मंत्र न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन है, जिसके तहत उद्योगों को स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ऑनलाइन आवेदन, और त्वरित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं ने उद्यमियों के लिए छत्तीसगढ़ में कारोबारी माहौल को आसान किया है। नीति में फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इस नीति के तहत उद्योगों को 30-50 प्रतिशत सब्सिडी, 5 से 12 वर्ष तक की कर छूट और ब्याज अनुदान जैसे आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, 1000 से अधिक रोजगार प्रदान करने वाली इकाइयों के लिए बी-स्पोक पॉलिसी और प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये तक का प्रशिक्षण अनुदान भी शामिल है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5 लाख नए रोजगार सृजित करना है, जो स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना से न केवल छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस संयंत्र के लिए 100 एकड़ भूमि को टोकन दर पर आवंटित करने का निर्णय निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार किए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को सभी स्वीकृतियां एक ही मंच पर प्रदान की जा रही हैं, जिससे समय और लागत की बचत हो रही है। ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार ने भी उद्योगों की स्थापना को गति दी है। उद्यमी अब घर बैठे विभिन्न स्वीकृतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए सार्थक पहल की है। दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में देश-विदेश के उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया, जिसके परिणामस्वरूप 4 लाख 40 हजार  करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुंबई समिट में 6,000 करोड़ रुपये, दिल्ली में 15,184 करोड़ रुपये, और बेंगलुरु में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की सहमति ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया है। प्रोजेक्ट टूडे सर्वे के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में 218 नई परियोजनाओं में 1,63,749 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो देश के कुल निवेश का 3.71 प्रतिशत है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के टॉप टेन निवेश वाले राज्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री साय ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल नीतियों के साथ हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति न केवल उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देती है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि पर भी जोर देती है। हमारा लक्ष्य अमृतकाल-छत्तीसगढ़ विजन 2047 नवा अंजोर के तहत विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि राज्य अब नक्सल प्रभावित छवि से बाहर निकलकर एक औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में उभर रहा है। recent visitors 36

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने ग्रामीणों से किया जन संवाद, ग्रामसभा में हुए सम्मिलित

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मऊगंज जिले के खैरा ग्राम में बिछिया नदी के उद्गम स्थल में पूजा-अर्चना की। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में आयोजित कार्यक्रम में नदी के उद्गम स्थल पर पुष्प अर्पित कर दुग्ध अभिषेक किया। जन भागीदारी से जल संचयन के संकल्प के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में मंत्री श्री पटेल ने ग्रामीणजनों से संवाद करते हुए ग्रामसभा का शुभारंभ किया। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि बिछिया नदी के उद्गम स्थल में फेंसिंग कराकर वर्षाकाल में पौध-रोपण करें। उन्होंने कहा कि खैरा की पुण्य भूमि नदी का उद्गम स्थल है। यहाँ के निवासियों को भू-जल स्तर बनाये रखने के लिए इसे हरा-भरा बनाना होगा। पौध-रोपण से आने वाली पीढ़ी का भविष्य संवरेगा। भू-जल स्तर में आ रही कमी व जल संकट को चुनौती के तौर पर स्वीकार करते हुए इससे निपटने के लिए समवेत होने का उन्होंने आहवान किया। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि इस वर्ष तीन माह तक जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से कराए जाकर पौध-रोपण की तैयारी व पुराने जल स्त्रोतों के संरक्षण व पुनर्रुद्धार के कार्य इस दौरान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी पंचायतों में भवन बनाने, सामुदायिक भवन निर्माण व जनपद पंचायतों के भवन निर्माण के कार्य कराए जाएंगे। श्री पटेल ने कहा कि पंचायतों के कार्य की प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। विभिन्न मदों से प्राप्त होने वाली राशि से पंचायतों में आवश्यकतानुसार कार्य कराए जाएं तथा आवास प्लस की सूची में पात्र हितग्राहियों के नाम शामिल कराएं। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक देवतालाब श्री गिरीश गौतम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, डीआईजी श्री राजेश सिंह चंदेल, कलेक्टर मऊगंज संजय कुमार जैन, एसपी दिलीप सोनी सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।   recent visitors 35

प्रदेश में मोहन यादव सरकार जल्द कर सकते है मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों की पद से हो सकती है छुट्टी

भोपाल प्रदेश में मोहन यादव सरकार को डेढ़ वर्ष होने जा रहा है, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। उधर, मंत्रिमंडल विस्तार का भी नेताओं को इंतजार है। पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, जयंत मलैया, हरिशंकर खटीक, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह और संजय पाठक को अपना नंबर आने की संभावना दिख रही है। दरअसल, पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट है, तो मध्य प्रदेश में भी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं।   क्षेत्रीय संतुलन साधने की होगी कोशिश इसमें क्षेत्रीय संतुलन साधने के हिसाब कुछ पूर्व मंत्रियों को फिर मौका दिया जा सकता है। उनके अलावा कांग्रेस से भाजपा में आए छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा सीट से विधायक कमलेश शाह भी प्रतीक्षारत हैं। रामनिवास रावत के मंत्रिमंडल से त्याग पत्र देने के बाद मोहन कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। नियम के अनुसार 35 मंत्री हो सकते हैं। कुछ मंत्रियों की पद से हो सकती है छुट्टी मंत्री बनने के लिए पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, संजय पाठक, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य पूर्व मंत्री सत्ता और संगठन में अपने संपर्कों के माध्यम से प्रयासरत भी हैं। संभावना जताई जा रही है कि रिक्त स्थानों की पूर्ति हो सकती है। कुछ मंत्रियों को खराब प्रदर्शन के आधार पर विश्राम भी दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी प्राथमिकता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति है, इसलिए यह काम इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले हो सकता है। उधर, राजनीतिक नियुक्तियां भी अब की जाएंगी। इसको लेकर संगठन स्तर पर कई बार चर्चा भी हो चुकी है। इसमें कुछ पूर्व विधायकों को समायोजित भी किया जाएगा। अभी इनके पास कोई काम नहीं है। जयंत मलैया को बनाया जा सकता है वित्त आयोग का अध्यक्ष सूत्रों के अनुसार पूर्व वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया को छठवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पांचवें वित्त आयोग की अनुशंसाएं अप्रैल 2026 तक के लिए हैं। आयोग विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद स्थानीय निकायों को दी जाने वाली राशि के संबंध में अनुशंसा करेगा। ये विधायक कर रहे इंतजार गोपाल भार्गवः नौ बार के विधायक। उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सरकार में लगातार मंत्री रहे। बुंदेलखंड के कद्दावर नेता। भूपेंद्र सिंहः एक बार के सांसद और पांच बार के विधायक। शिवराज सरकार में लगातार आठ वर्ष मंत्री रहे। बुंदेलखंड क्षेत्र में पकड़। जयंत मलैयाः बुंदेलखंड क्षेत्र से आते हैं। आठ बार के विधायक। सुंदरलाल पटवा से लेकर शिवराज सरकार तक में मंत्री रहे। वित्त, वाणिज्यिक कर और जल संसाधन विभाग में काम करने का लंबा अनुभव। ब्रजेंद्र प्रताप सिंहः पांच बार के विधायक। दो बार मंत्री रह चुके हैं। हरिशंकर खटीकः भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष रहने के साथ संगठन में काम कर चुके हैं। चार बार के विधायक। शिवराज सरकार में मंत्री भी रहे।   recent visitors 25

भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस में यात्रियों को बड़ी राहत, 2 स्लीपर कोच बढ़ाए, बढ़ती भीड़ के चलते रेलवे ने किया फैसला

भोपाल भोपाल और ग्वालियर के मध्य चलने वाली इंटरसिटी गाड़ी क्रमांक 12197 और 12198 में दो स्लीपर कोच जोड़े जाने से रेल यात्रियों को लाभ हो रहा है। यह व्यवस्था दिनांक 10 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। इस परिवर्तन के बाद अब ट्रेन में 14 सामान्य श्रेणी, 2 स्लीपर श्रेणी, 2 कुर्सीयान, 1 वातानुकूलित कुर्सीयान समेत कुल 21 कोच हो गए हैं। भाजपा नेता और  पूर्व प्रदेश प्रवक्ता धैर्यवर्धन शर्मा ने बताया कि इंटरसिटी ट्रेन दो कोच बढ़ाए जाने से में शिवपुरी, गुना, अशोकनगर के नागरिकों को ग्वालियर और भोपाल आना-जाना अब अधिक सुविधाजनक हो गया है। पश्चिम मध्य जोन की सलाहकार समिति के सदस्य रहे धैर्यवर्धन ने इस निर्णय पर यात्रियों को बधाई देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने बुधवार और रविवार के दिनों को जोड़कर सातों दिन इंटरसिटी चलाए जाने के लिए क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री सिंधिया का भी आभार माना है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी ने अवगत कराया है कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 12197/12198 ग्वालियर-भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस में दो स्लीपर श्रेणी के कोच स्थायी रूप से जोड़े जा रहे हैं। इस संबंध में भोपाल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि ग्रीष्मकालीन भीड़ और बढ़ती हुई यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था दिनांक 10 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। इस परिवर्तन के बाद अब इस ट्रेन में 14 सामान्य श्रेणी, 2 स्लीपर श्रेणी, 2 कुर्सीयान, 1 वातानुकूलित कुर्सीयान सहित कुल 21 कोच होंगे। recent visitors 30

इंदौर-खंडवा रोड पर बना ब्रिज, निकलने लगे वाहन, मार्ग पर बनेंगे एनिमल कॉरिडोर, वन्यजीवों की सुरक्षा

इंदौर  इंदौर-खंडवा राजमार्ग का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा नहीं हो पाया है। निर्माण कार्य के चलते वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसी कारण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पहला ब्रिज वाहनों के लिए खोल दिया है। बीते कुछ दिनों से वाहन ब्रिज के माध्यम से निकाले जा रहे हैं, ताकि चमेली देवी कालेज के सामने बने ब्रिज के आसपास की सड़क को दुरुस्त किया जा सके। वर्तमान में यहां अंडरपास का कार्य भी प्रगति पर है। अधिकारियों के मुताबिक मई माह में दतोदा वाले ब्रिज से भी वाहन निकल सकेंगे। 216 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग पर तीन सुरंगों के साथ सात ब्रिज और अंडरपास बनाए जा रहे हैं। ये ब्रिज और अंडरपास चमेली देवी कालेज, उमेरीखेड़ा, चोखी ढाणी, सिमरोल, भेरूघाट, बाईग्राम और बड़वाह में बन रहें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने के लिए इन स्थानों पर अंडरपास की सुविधा रहेगी। इन सभी ब्रिजों को जनवरी तक तैयार किया जाना था, लेकिन कार्य की धीमी गति के कारण निर्धारित समयसीमा से छह महीने की और मोहलत दी गई है। अब तैयार होगी सर्विस लेन चमेली देवी ब्रिज का कार्य अप्रैल के पहले सप्ताह में पूर्ण कर लिया गया है। अब वाहनों को इस ब्रिज से निकाला जा रहा है, ताकि सर्विस लेन का निर्माण शुरू किया जा सके। निर्माण एजेंसी आने वाले दिनों में सर्विस लेन को बंद कर कार्य शुरू करेगी। इसके साथ ही ब्रिज के नीचे बन रहे दो अंडरपास का कार्य अंतिम चरण में है। मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेश्वर राव का कहना है कि मई के अंतिम सप्ताह तक अंडरपास और सर्विस लेन का निर्माण पूर्ण किया जाएगा। जानवरों के लिए बनेंगे एनिमल कॉरिडोर वाहनों के साथ इस राजमार्ग के निर्माण में वन्यजीवों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जंगलों से गुजरने वाले मार्गों पर पांच से छह स्थानों पर ‘एनिमल कॉरिडोर’ यानी अंडरपास बनाए जाएंगे, जो केवल जानवरों के लिए होंगे। इनकी मदद से वन्यप्राणी एक ओर से दूसरी ओर आसानी से जा सकेंगे। वन विभाग ने इन स्थानों की पहचान कर ली है और इनका निर्माण कार्य आगामी कुछ सप्ताहों में शुरू होने की संभावना है। सिमरोल ब्रिज शुरू करने की योजना     चमेली देवी कॉलेज के बाद दतोदा ब्रिज से वाहन गुजर सकेंगे। मई तक लोगों को थोड़ा इंतजार करना होगा। वैसे एनएचएआई ने जून तक सिमरोल ब्रिज शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए हैं। – सुमेश बांझल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई   recent visitors 40

भोपाल में 60 हजार बकायादारों से बिजली कंपनी को 300 करोड़ वसूलना, अब कटेगा कनेक्शन!

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में 60 हजार बकायादारों से बिजली कंपनी को 300 करोड़ वसूलना है। बीते वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में एमडी मध्यक्षेत्र क्षितिज सिंघई ने बताया कि अब बिल जमा न करने वालों के बिजली कनेक्शन काटे जाएंगे। उन्होंने बताया कि शहर में 1900 से ज्यादा बकायादार 1 लाख से अधिक राशि वाले हैं, जबकि दस हजार रुपए से अधिक व एक लाख से कम बकाया राशि वाले 56 हजार के करीब बिजली उपभोक्ता हैं। सूची से हटाए बड़े नाम कंपनी की सूची में शामिल करीब 60 हजार नाम वो हैं जो कहीं कोई बड़ा रसूख नहीं रखते। हालांकि कंपनी जो सूची अपडेट कर रही है उसमें राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यालयों का ध्यान में रखा जा रहा। इन्हें भी शामिल कर लें तो बकाया राशि 450 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। कंपनी की सूची में 2.90 लाख उपभोक्ताओं पर दस हजार से कम का बकाया है। वसूली के लिए ये प्रयोग -बंदूक लाइसेंस रद्द करने को पत्र। -बैंक खातों को ब्लॉक करने बैंकों को पत्र। -वरिष्ठ इंजीनियर्स, अफसरों को फील्ड में उतारा। -हर बकायादार के घर कंपनी की टीमें भेंजी। बिजली के बकायादारों की सूची अपडेट की जा रही है। काफी बकायादार हैं। वसूली के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।- क्षितिज सिंघई, एमडी मध्यक्षेत्र recent visitors 37

जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 50 हजार खेत तालाब बनाए जाएंगे: मंत्री पटेल

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश के सभी 52 जिलों में 50 हजार खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। ये खेत तालाब प्रदेश के किसानों की सिंचाई में मदद करने के साथ जल संरक्षण को मजबूती देने का काम करेंगे। यह पहल वर्तमान जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत के साथ नई संरचनाओं के निर्माण पर आधारित है। खेत तालाब निजी खेत पर बनी जल भंडारण की संरचना होती है। ये तालाब कृषि से जुड़े कई कार्यों में काम आते हैं, जैसे रबी और खरीफ फसलों की सिंचाई, मछली पालन, सिंघाड़े की खेती, पशुओं के लिए पीने का पानी आदि। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी जिला पंचायतों के सीईओ को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इन 50 हजार खेत तालाबों के निर्माण के लिए विशिष्ट जिलाों के हिसाब से लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इस बड़े पैमाने की परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) – वाटरशेड विकास घटक से रणनीतिक रूप से तैयार किए जाएंगे।   इस अभियान के तहत कई कारकों को ध्यान में रखकर इंदौर में कम से कम 55 तालाब और नीमच में कम से कम 57 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, बालाघाट को अधिकतम 3,900 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। इसी तरह शहडोल जिले में 3,746 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। खेत तालाबों के निर्माण के लिए सही जगह का चयन अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा। इस अभियान के तहत तालाबों के निर्माण के लिए खेतों के निचले हिस्सों को प्राथमिकता दी जाएगी। खेत के निचले हिस्से में प्राकृतिक प्रवाह के कारण सबसे अधिक पानी जमा होता है। इसी तरह तालाब वहीं बनाए जाएंगे जहां उनके ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) से इतना पानी आ सके जो तालाब की जरूरत को पूरा कर सके। राज्य में जितनी औसतन बारिश होती है और जो खेती के तरीके हैं उन्हें देखते हुए सरकार ने तय किया है कि कुल खेती योग्य जमीन में से करीब 10% जमीन पर ही फार्म पोंड बनाए जाएंगे। कुशल जल प्रबंधन सुनिश्चित करने और केंद्रित जल प्रवाह को रोकने के लिए तालाब खोदने की जगह चयन प्रक्रिया एक चरणबद्ध तरीके का पालन करेगी। इस तरीके में विभिन्न खेतों में प्रस्तावित जगहों को एक सीधी रेखा के बजाए जिग-जैग पैटर्न में चुना जाएगा। सबसे उपयुक्त स्थानों के चयन में सहायता के लिए एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी किया जाएगा। मनरेगा के तहत किसानों की जरूरतों के आधार पर 400 क्यूबिक मीटर, 800 क्यूबिक मीटर, 1000 क्यूबिक मीटर और 3600 क्यूबिक मीटर की भंडारण क्षमता वाले खेत तालाबों का निर्माण किया जा सकता है। इन तालाबों के आकार के लिए डिजाइन और परियोजना अनुमान प्रदान किए गए हैं। पीएमकेएसवाई-वाटरशेड विकास योजना के तहत निर्मित खेत तालाबों की न्यूनतम भंडारण क्षमता 3600 क्यूबिक मीटर होगी। खेत तालाबों से अत्यधिक रिसाव को नियंत्रित करने के उपाय लागू किए जाएंगे। इन तालाबों से निकली मिट्टी का उपयोग तटबंध बनाने में किया जाएगा। ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के इंजीनियर (कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता) इन खेत तालाबों के निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे। 50 हजार खेत तालाब बनाने की घोषणा आयोजित पंच-सरपंच सम्मेलन में मंत्री पटेल ने ग्राम पंचायतों के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को ई-ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत पंचायतों के लिए सुविधायुक्त भवनों का निर्माण प्राथमिकता पर किया जा रहा है। जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 50 हजार खेत तालाब बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में कई पंचायत भवन आज भी अधूरे हैं या उपर नहीं हैं, जबकि अन्य राज्यों में दो से तीन मंजिला पंचायत भवन बन रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब नए मॉडल के अनुसार पंचायत भवनों का निर्माण किया जाएगा। आयोजन में मौजूद लोग बलिदान गाथाओं का हुआ स्मरण- कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों द्वारा रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान को याद करते हुए उनके साहस और समर्पण की कहानियों का उल्लेख किया गया। सभी ने बुजुर्ग दानदाता बेटी बाई लोधी के योगदान की सराहना की और पुष्पमालाएं अर्पित कर सम्मानित किया। इस दौौन बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सदस्य कविता राय, अजय गोटिया, राकेश सिंह लोधी, जनपद अध्यक्ष सुनीता दुबे, जनपद उपाध्यक्ष दुर्गा पटेल, मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, आशीष चौरसिया, जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत, एसडीएम विंकी सिंहमारे, जनपद सीईओ यजुर्वेद्र कोरी, पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रकाश सिंह बागरी, शंकर महतो, पूर्व मंडल अध्यक्ष डॉ. प्रशांत राय, पंकज राय, सरपंच कैलाश चंद्र जैन आदि मौजूद रहे। recent visitors 49